द्वितीय इतिहास

इतिहास की दूसरी पुस्तक

 

अध्याय 1

सुलैमान की भेंट - सुलैमान की बुद्धि की पसंद - सुलैमान की ताकत और धन।

1 और दाऊद का पुत्र सुलैमान अपने राज्य में दृढ़ हुआ, और उसका परमेश्वर यहोवा उसके संग रहा, और उसकी बहुत बड़ाई की।

2 तब सुलैमान ने सब इस्राएलियोंसे, अर्यात् सहस्त्रोंऔर शतपतियों, और न्यायियों, और सब इस्राएलियोंके सब हाकिमोंसे, जो पितरोंके मुख्य प्रधान थे, बातें की।

3 तब सुलैमान और उसके संग की सारी मण्डली गिबोन के ऊंचे स्थान को गई; क्योंकि परमेश्वर की मण्डली का निवासस्थान था, जिसे यहोवा के दास मूसा ने जंगल में बनवाया था।

4 परन्तु परमेश्वर का सन्दूक दाऊद किर्यत्यारीम से उस स्यान पर ले आया, जिसे दाऊद ने उसके लिथे तैयार किया था; क्योंकि उस ने उसके लिथे यरूशलेम में तम्बू खड़ा किया था।

5 फिर जो पीतल की वेदी, जो ऊरी के पुत्र बसलेल ने, और हूर के पुत्रा, बसलील ने बनाई या, उस ने यहोवा के निवास के साम्हने धर दी; और सुलैमान और मण्डली ने उसकी खोज की।

6 और सुलैमान वहां यहोवा के साम्हने पीतल की वेदी के पास गया, जो मिलापवाले तम्बू में थी, और उस पर एक हजार होमबलि चढ़ाए।

7 उसी रात परमेश्वर ने सुलैमान को दर्शन देकर उस से कहा, मांग, कि मैं तुझे क्या दूं।

8 सुलैमान ने परमेश्वर से कहा, तू ने मेरे पिता दाऊद पर बड़ी दया की, और उसके स्थान पर मुझे राज्य करने के लिथे ठहराया है।

9 अब, हे परमेश्वर यहोवा, तेरा वचन मेरे पिता दाऊद से दृढ़ हो; क्योंकि तू ने मुझे पृथ्वी की मिट्टी के समान बहुत से लोगों पर राजा ठहराया है।

10 अब मुझे बुद्धि और ज्ञान दो, कि मैं निकलकर इन लोगोंके साम्हने भीतर आऊं; क्योंकि तेरी इस प्रजा का न्याय कौन कर सकता है, वह इतना महान है?

11 और परमेश्वर ने सुलैमान से कहा, यह तो तेरे मन में था, और तू ने न तो धन, न धन, न सम्मान, और न अपके शत्रुओं का जीवन, और न अब तक दीर्घायु की मांग की; परन्‍तु बुद्धि और ज्ञान अपके लिथे मांगा है, कि तू मेरी प्रजा का न्याय करे, जिस पर मैं ने तुझे राजा ठहराया है;

12 बुद्धि और ज्ञान तुझे दिया गया है; और मैं तुझे धन-दौलत, और ऐश्वर्य दूंगा, जैसा तुझ से पहिले किसी राजा का न हुआ, और न तेरे बाद किसी का उसके समान होगा।

13 तब सुलैमान अपनी यात्रा से उस ऊंचे स्थान को जो गिबोन में था, यरूशलेम को मिला, और मिलापवाले तम्बू के साम्हने आया, और इस्राएल पर राज्य करने लगा।

14 और सुलैमान ने रथ और सवार इकट्ठे किए; और उसके एक हजार चार सौ रय, और बारह हजार सवार थे, जिन्हें उस ने रथोंके नगरोंमें, और राजा के पास यरूशलेम में रखा।।

15 और राजा ने यरूशलेम में चान्दी और सोने को पत्यरोंके समान बहुतायत से बनाया, और देवदार के वृक्षोंको वह तराई में गूलर के वृक्षोंके समान बहुतायत से कर दिया।

16 और सुलैमान के घोड़े मिस्र से लाये थे, और सन के सूत थे; राजा के व्यापारियों को सूत का सूत कीमत पर मिलता था।

17 और उन्होंने मिस्र से छ: सौ शेकेल चान्दी का रथ, और डेढ़ सौ शेकेल का एक रथ निकाला; और वे हित्तियोंके सब राजाओं, और अराम के राजाओं के लिथे अपके अपके लिथे घोड़े ले आए।    


अध्याय 2

मंदिर निर्माण की तैयारी।

1 और सुलैमान ने यहोवा के नाम का भवन, और उसके राज्य के लिथे एक भवन बनाने का निश्चय किया।

2 और सुलैमान ने साठ हजार पुरूषों को बोझ उठाने के लिथे, और साठ हजार को पहाड़ पर काटने के लिथे, और तीन हजार छ: सौ पुरूषों को उनके देखने के लिथे कहा।

3 और सुलैमान ने सोर के राजा हूराम के पास यह कहला भेजा, कि जैसा तू ने मेरे पिता दाऊद से किया, और उसके रहने के लिथे उसके भवन बनाने के लिथे उसके पास देवदार भेजे, सो मेरे साथ वैसा ही व्यवहार भी।

4 देख, मैं अपके परमेश्वर यहोवा के नाम का एक भवन बनाता हूं, कि उसको उसको अर्पण करूं, और उसके साम्हने सुगन्धित धूप, और नित्य भेंट की रोटी, और होमबलि के लिथे सब्त के दिन और सब्त के दिन जलाऊं, और अमावस्या पर, और हमारे परमेश्वर यहोवा के पर्वों पर। और यह नियम इस्राएल में सर्वदा रखा जाएगा।

5 और जो भवन मैं बनाऊं वह बड़ा भवन ठहरे; क्योंकि हमारा परमेश्वर यहोवा सब देवताओं में महान है।

6 परन्‍तु कौन उसका भवन बना सकता है, क्‍योंकि वह स्‍वर्ग और स्‍वर्ग के स्‍वर्ग को देखकर उस में समा नहीं सकता? तब मैं कौन हूं, कि उसके साम्हने केवल बलिदान जलाने के लिथे उसके लिये एक भवन बनाऊं?

7 सो अब मुझे एक पुरूष भेज कि जो सोने, और चान्दी, और पीतल, और लोहे, बैंजनी, और लाल, और नीले रंग का काम करने का धूर्त हो, और जो मेरे संग के धूर्तोंके संग कब्र खोदने का भी कुशल हो। यहूदा और यरूशलेम में, जिसे मेरे पिता दाऊद ने प्रदान किया था।

8 मेरे पास लबानोन में से देवदारु, और देवदारु, और सुगन्धी के वृक्ष भी भेज दे; क्योंकि मैं जानता हूं, कि तेरे दास लबानोन में लकड़ी काटने में कुशल हैं; और देखो, मैं अपके दासोंको तेरे दासोंके संग भेजूंगा,

9 यहां तक कि मेरे लिये बहुत सी लकड़ी तैयार करने के लिथे; क्‍योंकि जो भवन मैं बनाने पर हूं वह अद्‍भुत होगा।

10 और देख, मैं तेरे दासोंको जो लकड़ी काटनेवाले हैं, उन्हें बीस हजार सआ कूट गेहूँ, और बीस हजार सर जव, और बीस हजार बत दाखमधु, और बीस हजार बत तेल दूंगा।

11 तब सोर के राजा हूराम ने लिखित उत्तर देकर सुलैमान के पास यह कहला भेजा, कि यहोवा ने अपक्की प्रजा से प्रीति रखी है, और तुझे उनका राजा ठहराया है।

12 फिर हूराम ने कहा, धन्य है इस्राएल का परमेश्वर यहोवा, जिस ने आकाश और पृय्वी को बनाया, जिस ने दाऊद राजा को बुद्धिमान पुत्र दिया, और बुद्धिमानी और समझ से ऐसा किया, कि यहोवा के लिथे एक भवन और उसके लिथे एक भवन बनाए। साम्राज्य।

13 और अब मैं ने अपने पिता हूराम में से एक चतुर मनुष्य को भेजा है, जो समझदार हो गया है,

14 दान की पुत्रियों में से एक स्त्री का पुत्र, और उसका पिता सोर का पुरूष था, जो सोने, और चान्दी, पीतल, लोहे, पत्यर, और लकड़ी, बैंजनी, और नीले रंग का काम करने में कुशल था। और उत्तम मलमल, और लाल रंग में; और अपके धूर्त लोगों, और अपके प्रभु दाऊद तेरे पिता दाऊद के धूर्तोंके साम्हने, और जो युक्ति उस पर डाली जाए उसका पता लगाने के लिथे सब प्रकार की कब्रें खोदें।

15 सो अब वह गेहूँ, जव, तेल और दाखमधु, जिसके विषय में मेरे प्रभु ने कहा है, वह अपके कर्मचारियोंके पास भेजे।

16 और हम लबानोन में से जितनी तेरी आवश्यकता हो उतनी लकड़ी काट डालेंगे; और हम उसे समुद्र के किनारे तैरते हुए याफा में तेरे पास ले आएंगे; और उसे यरूशलेम तक ले जाना।

17 तब सुलैमान ने इस्राएल के देश में जितने परदेशी थे, उन सभोंको गिन लिया, जिस से उसके पिता दाऊद ने उनको गिन लिया; और वे एक लाख पचास हजार तीन हजार छह सौ पाए गए।

18 और उस ने उन में से साठ हजार को बोझ ढोने, और अस्सी हजार को पहाड़ पर काटनेवाले, और तीन हजार छ: सौ निरीक्षकोंको लोगोंको काम पर लगाने के लिथे ठहराया।


अध्याय 3

मंदिर निर्माण का स्थान और समय - घर का माप और आभूषण।

1 तब सुलैमान ने यरूशलेम में मोरिय्याह पहाड़ पर यहोवा का भवन बनाना आरम्भ किया, जहां यहोवा ने अपके पिता दाऊद को दर्शन दिया या, उस स्थान पर जिसे दाऊद ने यबूसी ओर्नान के खलिहान में तैयार किया था।

2 और वह अपके राज्य के चौथे वर्ष के दूसरे महीने के दूसरे दिन को बनाने लगा।

3 अब वे बातें हैं जो सुलैमान को परमेश्वर के भवन के निर्माण के लिए दी गई थीं। पहिले नाप के बाद उसकी लम्बाई साठ हाथ और चौड़ाई बीस हाथ थी।

4 और जो ओसारे भवन के साम्हने या, उसकी लम्बाई भवन की चौड़ाई के अनुसार बीस हाथ की या, और उसकी ऊंचाई एक सौ बीस हाथ की या; और उस ने उसको भीतर चोखे सोने से मढ़ा।

5 और उस बड़े भवन की छत उस ने देवदारु के पेड़ से लगाई, जिसे उस ने अच्छे सोने से मढ़ा, और उस पर खजूर के वृक्ष और जंजीरें लगाईं।

6 और उस ने भवन को सुन्दरता के लिथे बहुमूल्य मणियों से सजाया; और परवैम का सोना था।

7 और भवन, कडिय़ों, खम्भों, और शहरपनाहों, और किवाड़ोंको भी उस ने सोने से मढ़ा; और शहरपनाह पर करूब खुदे हुए।

8 और उस ने परमपवित्र भवन को, जिसकी लम्बाई भवन की चौड़ाई के अनुसार बीस हाथ, और चौड़ाई बीस हाथ की हो, बनाया; और उस ने उसको छ: सौ किक्कार चोखे सोने से मढ़ा।

9 और कीलों का तौल पचास शेकेल सोने का या। और ऊपरी कोठरियों को उस ने सोने से मढ़ा।

10 और परमपवित्र भवन में उस ने मूरत के काम के दो करूब बनवाए, और उन्हें सोने से मढ़ा।

11 और करूबोंके पंख बीस हाथ लम्बे थे; एक करूब का एक पंख पांच हाथ का था, जो भवन की शहरपनाह तक पहुंचा था; और दूसरा पंख भी पांच हाथ का था, और दूसरे करूब के पंख तक पहुंचा था।

12 और दूसरे करूब का एक पंख पांच हाथ का या, जो भवन की शहरपनाह तक पहुंचा था; और दूसरा पंख भी पांच हाथ का था, और दूसरे करूब के पंख से मिला हुआ था।

13 इन करूबों के पंख बीस हाथ फैले हुए थे; और वे अपने पांवों के बल खड़े हुए, और उनके मुंह भीतर की ओर थे।

14 और उस ने नीले, बैंजनी, और लाल रंग, और सूक्ष्म मलमल का परदा बनवाया, और उस पर करूब गढ़ा।

15 फिर उस ने भवन के साम्हने पैंतीस हाथ ऊंचे दो खम्भे बनवाए, और उन में से एक एक की चोटी पर जो अंगरखा था वह पांच हाथ का था।

16 और उस ने भविष्‍य की नाईं जंजीरें बनाकर खम्भोंके सिरोंपर धर दी; और एक सौ अनार बनाकर जंजीरों में बंधवाए।

17 और उसने उन खम्भोंको मन्दिर के साम्हने, एक की दहिनी ओर, और दूसरे को बाईं ओर खड़ा किया; और उस का नाम यकीन, और उस का नाम बायीं ओर बोअज रखा।


अध्याय 4

वेदी — पिघला हुआ समुद्र — हौदियाँ, दीये, मेज़, आंगन, और पीतल और सोने के यंत्र।

1 फिर उस ने पीतल की एक वेदी बनाई, जिसकी लम्बाई बीस हाथ, और चौड़ाई बीस हाथ, और ऊंचाई दस हाथ की थी।

2 फिर उस ने एक किनारे से छोर तक दस हाथ का एक ढला हुआ समुद्र बनाया, और उसकी ऊंचाई चारोंओर पांच हाथ की थी; और उसके चारोंओर तीस हाथ की रेखा लगी हुई थी।

3 और उसके नीचे उसके चारोंओर बैलोंके साम्हने थे; एक हाथ में दस, समुद्र को चारों ओर से घेरते हुए। बैलों की दो पंक्तियाँ डाली जाती थीं, जब वे डाली जाती थीं।

4 वह बारह बैलों पर खड़ा हुआ, तीन उत्तर की ओर, और तीन पश्चिम की ओर, और तीन दक्खिन की ओर, और तीन पूर्व की ओर; और उनके ऊपर समुद्र बना हुआ था, और उनके सब बान्धे हुए अंग भीतर की ओर थे।

5 और उसकी मोटाई एक हाथ की चौडी, और उसका किनारा प्याले के किनारे के काम जैसा या; लिली के फूलों के साथ; और इसे तीन हजार स्नान प्राप्त हुए।

6 और उस ने दस हौदियां भी बनाई, और पांच दहिनी ओर और पांच बाईं ओर धोने के लिथे रखीं; वे होमबलि के लिये जो कुछ वे चढ़ाते थे, उन में धोते थे; परन्तु समुद्र याजकों के धोने के लिथे था।

7 और उस ने उनके साम्हने सोने की दस दीवटें बनाईं, और पांच को दहिनी ओर और पांच को बाईं ओर मन्‍दिर में रखा।

8 और उस ने दस मेजें भी बनाईं, और पांच दायीं ओर और पांच बाईं ओर मन्‍दिर में रखीं। और उसने सोने के सौ कटोरे बनाए।

9 फिर उस ने याजकों का आंगन, और बड़ा आंगन, और आंगन के द्वार बनवाए, और उनके द्वार पीतल से मढ़वाए।

10 और उस ने समुद्र को पूरब की दहिनी ओर, दक्खिन के साम्हने रखा।

11 और हूराम ने हण्डियों, फावड़ियों, और कटोरों को बनाया। और हूराम ने परमेश्वर के भवन के लिथे जो काम राजा सुलैमान के लिथे बनाना या, वह पूरा किया;

12 जो दो खम्भे, और खम्भे, और दोनों खम्भोंके ऊपर की पटियां, और दोनों ही पटियां जो खम्भोंके सिरे पर थीं, उन दोनोंको ढांपने के लिथे वे दोनोंपुष्प;

13 और दोनों पुष्पांजलि पर चार सौ अनार; एक एक पुष्पांजलि पर अनार की दो पंक्तियाँ हों, और खम्भोंके ऊपर की कडिय़ोंके दोनोंपूंछ ढांपने के लिथे।

14 उस ने कुसिर्यां भी बनाई, और उन पर हौदियां भी बनाईं;

15 एक समुद्र और उसके नीचे बारह बैल।

16 अपके पिता हूराम ने यहोवा के भवन के लिथे चमकते हुए पीतल के हण्डर, फावड़े, कांटों, और उनके सब साजोंको उसके पिता हूराम ने राजा सुलैमान के लिथे बनवाया।

17 राजा ने उन्हें यरदन के अराबा में सुक्कोत और जेरेदाता के बीच की मिट्टी की भूमि में डाल दिया।

18 इस प्रकार सुलैमान ने ये सब पात्र बहुत अधिक बनाए; क्योंकि पीतल का वजन पता नहीं चल सका।

19 और सुलैमान ने परमेश्वर के भवन के लिये जितने पात्र थे, वे सब सोने की वेदी, और वे मेजें जिन पर भेंट की रोटी रखी गई थी, बनवाया;

20 और दीवटोंके दीवट अपके अपके दीपकोंसमेत हों, कि वे चोखे सोने की रीति के अनुसार भविष्‍य के साम्हने जलाए जाएं;

21 और फूलों, और दीपकों, और चिमटे को उसने सोने और उस सिद्ध सोने से बनाया।

22 और चोखे सोने के सुंघे, और कटोरे, और धूपदान, और धूपदान; और भवन का प्रवेश द्वार, और परमपवित्र स्थान के लिए उसके भीतरी द्वार, और भवन के भवन के किवाड़ सोने के बने थे।


अध्याय 5

समर्पित खज़ाना - सन्दूक को दैवज्ञ में शामिल करना - ईश्वर अपने पक्ष का संकेत देता है।  

1 इस प्रकार जो काम सुलैमान ने यहोवा के भवन के लिथे किया वह सब पूरा हुआ; और जो वस्‍तुएं उसके पिता दाऊद ने समर्पित की थीं उन सभोंको सुलैमान ले आया; और चान्दी, सोना, और सब साज-सामान उस ने परमेश्वर के भवन के भण्डारोंमें रख दिए।

2 तब सुलैमान ने इस्राएल के पुरनियोंको, और गोत्रोंके सब मुख्य मुख्य पुरूषोंको, जो इस्राएलियोंके पितरोंके मुख्य मुख्य पुरूष थे, यहोवा की वाचा का सन्दूक दाऊदपुर में से निकालने के लिथे यरूशलेम को इकट्ठी की, सिय्योन है।

3 इसलिथे सब इस्राएली पुरूष सातवें महीने के पर्ब्ब में राजा के पास इकट्ठे हुए।

4 और इस्राएल के सब पुरनिये आए; और लेवियोंने सन्दूक को उठा लिया।

5 और वे सन्दूक, और मिलापवाले तम्बू, और जितने पवित्र पात्र निवास में थे, उन सभोंको याजक और लेवीय ऊपर ले आए।

6 और राजा सुलैमान और इस्राएल की सारी मण्डली जो उसके पास सन्दूक के साम्हने इकट्ठी हुई थी, उन भेड़-बकरियोंऔर बैलोंको बलि किया, जिनकी गिनती न की जा सकती थी और न उनकी गिनती हो सकती थी।

7 और याजक यहोवा की वाचा के सन्दूक को उसके स्यान में, अर्थात भवन के भविष्‍य में, परमपवित्र गति से करूबोंके पंखोंके तले ले आए;

8 क्योंकि करूब सन्दूक के स्थान पर अपने पंख फैलाए हुए थे, और करूब सन्दूक और उसके ऊपर के डंडोंको ढांपे थे।

9 और उन्होंने सन्दूक के डंडोंको ऐसा ढा दिया, कि डंडोंके सिरे उस सन्दूक में से भविष्‍य के साम्हने दिखाई देने लगे; लेकिन वे बिना देखे नहीं गए। और वही आज तक है।

10 जब यहोवा ने इस्राएलियोंके मिस्र से निकलने के समय उन से वाचा बान्धी, तब जो पटिया मूसा ने होरेब में उस में रखी, उस समय सन्दूक में और कुछ न था।

11 और जब याजक पवित्रस्थान से निकल आए, तब ऐसा हुआ; (क्योंकि जितने याजक उपस्थित थे, वे सब पवित्र किए गए, और निश्चय उनकी बाट जोहते न रहे;

12 और जितने लेवीय गवैये थे, वे सब के सब आसाप, हेमान, यदूतून, और अपके अपके पुत्रोंऔर भाइयोंसमेत, जो झांझ, सारंगी, और वीणा लिए हुए श्वेत मलमल पहिने हुए थे, वेदी की पूर्व की ओर खड़े थे। और उनके संग एक सौ बीस याजक तुरहियां फूंकते हुए;)

13 ऐसा हुआ कि जैसे तुरहियां बजाने वाले और गवैये एक सा थे, कि यहोवा की स्तुति और धन्यवाद करते हुए एक स्वर सुनाया जाए; और जब वे तुरहियां, और झांझ, और बाजे बजाकर ऊंचे शब्द से बोल उठे, और यहोवा की स्तुति करते हुए कहा, कि वह भला है; क्योंकि उसकी करूणा सदा की है; कि तब भवन बादल से भर गया, अर्थात यहोवा का भवन भी बादल से भर गया;

14 और याजक बादल के कारण सेवा टहल करने को खड़े न रह सके; क्योंकि यहोवा का तेज परमेश्वर के भवन में भर गया था।


अध्याय 6

मंदिर के समर्पण पर सुलैमान की प्रार्थना।

1 तब सुलैमान ने कहा, यहोवा ने कहा है, कि वह घोर अन्धकार में वास करेगा।

2 परन्तु मैं ने तेरे लिथे निवास का भवन, और तेरे निवास का स्यान सदा बना रखा है।

3 तब राजा ने मुंह फेरकर इस्राएल की सारी मण्डली को आशीर्वाद दिया; और इस्राएल की सारी मण्डली खड़ी रही।

4 और उस ने कहा, धन्य है इस्राएल का परमेश्वर यहोवा, जिस ने अपके पिता दाऊद से जो कहा या, वह अपके हाथोंसे पूरा किया, और कहा,

5 जिस दिन से मैं अपक्की प्रजा को मिस्र देश से निकाल ले आया हूं, तब से मैं ने इस्राएल के सब गोत्रोंमें से किसी नगर को उस में घर बनाने के लिथे न चुना कि उस में मेरा नाम हो; और न मैं ने किसी पुरूष को अपक्की प्रजा इस्राएल पर प्रधान होने के लिथे चुना;

6 परन्तु मैं ने यरूशलेम को इसलिये चुना है, कि वहां मेरा नाम रहे; और दाऊद को मेरी प्रजा इस्राएल पर प्रधान होने के लिये चुन लिया है।

7 अब मेरे पिता दाऊद के मन में यह था कि इस्राएल के परमेश्वर यहोवा के नाम का एक भवन बनाए।

8 परन्तु यहोवा ने मेरे पिता दाऊद से कहा, जब तेरे मन में मेरे नाम का भवन बनाने का मन हुआ, तब तू ने अच्छा काम किया, जो तेरे मन में हुआ;

9 तौभी भवन न बनाना; परन्तु तेरा पुत्र जो तेरी कमर से निकलेगा, वही मेरे नाम का भवन बनाएगा।

10 इसलिथे यहोवा ने अपक्की कही हुई बात पूरी की है; क्योंकि मैं अपके पिता दाऊद की कोठरी में खड़ा हुआ हूं, और यहोवा की प्रतिज्ञा के अनुसार इस्राएल के सिंहासन पर विराजमान हूं, और इस्राएल के परमेश्वर यहोवा के नाम का भवन बनाया है।

11 और उस में मैं ने वह सन्दूक रखा है, जिस में यहोवा की वह वाचा है, जो उस ने इस्राएलियोंसे बान्धी थी।

12 और वह इस्राएल की सारी मण्डली के साम्हने यहोवा की वेदी के साम्हने खड़ा हुआ, और अपने हाथ फैलाए;

13 क्योंकि सुलैमान ने पांच हाथ लम्बा, और पांच हाथ चौड़ा, और तीन हाथ ऊंचा पीतल का एक पाड़ बनाकर आंगन के बीच में खड़ा किया या; और उस पर खड़ा हुआ, और इस्राएल की सारी मण्डली के साम्हने घुटनों के बल बैठा, और अपने हाथ आकाश की ओर फैलाए;

14 और कहा, हे इस्राएल के परमेश्वर यहोवा, तेरे तुल्य कोई परमेश्वर न स्वर्ग में और न पृथ्वी पर; जो वाचा बान्धते, और तेरे दासोंपर दया करते हैं, जो अपके सारे मन से तेरे साम्हने चलते हैं;

15 जो तू ने अपके दास मेरे पिता दाऊद के पास उस से पूरी की है, जिस की तू ने उस से प्रतिज्ञा की है; और अपके मुंह से बातें की, और अपके हाथ से उसको पूरा किया, जैसा आज के दिन है।

16 इसलिथे अब हे इस्राएल के परमेश्वर यहोवा, अपके दास मेरे पिता दाऊद के पास उसकी उस बात को मान, जिसके विषय में तू ने उस से कहा या, कि तेरे साम्हने कोई पुरूष इस्राएल की गद्दी पर विराजने न पाएगा; तौभी तेरे लड़केबाल इसलिथे चौकस रहें, कि तू मेरी व्यवस्था पर चलता रहे, जैसा तू मेरे साम्हने चलता रहा है।

17 अब, हे इस्राएल के परमेश्वर यहोवा, जो वचन तू ने अपके दास दाऊद से कहा या, वह सत्य हो।

18 परन्तु क्या परमेश्वर मनुष्यों के संग पृय्वी पर वास करेगा? देख, स्वर्ग और आकाश का स्वर्ग तुझ में समा नहीं सकता; कितना कम है यह घर जो मैंने बनाया है!

19 इसलिथे अपके दास की प्रार्यना, और उसकी बिनती पर ध्यान दे, कि हे मेरे परमेश्वर यहोवा, उस दोहाई और उस प्रार्थना को जो तेरा दास तेरे साम्हने प्रार्थना करता है, सुन ले;

20 इसलिथे कि जिस स्यान के विषय में तू ने कहा है, कि उस में तू अपके नाम को रखना चाहता है, उस पर रात दिन तेरी आंखें इस भवन की ओर लगी रहे; कि तेरा दास इस स्यान के लिये जो प्रार्थना करे उस पर कान लगाए।

21 इसलिथे अपके दास और अपक्की प्रजा इस्राएल की बिनती सुन, जो वे इस स्यान के लिथे करें; अपके निवासस्थान में से सुन, वरन स्वर्ग से भी; और जब तू सुने तो क्षमा कर।

22 यदि कोई अपके पड़ोसी के विरुद्ध पाप करे, और अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके श‍य खा जाए, और यह शपय इस भवन की तेरी वेदी के साम्हने हो;

23 तब तू स्वर्ग में से सुन, और अपके दासोंका न्याय अपके अपके अपके दासोंको अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके सिर के लिथे पलटा दे; और धर्मी को धर्मी ठहराकर, और उसके धर्म के अनुसार उसे देकर।

24 और यदि तेरी प्रजा इस्राएल ने तेरे विरुद्ध पाप किया है, तो वह शत्रुओं के साम्हने और भी बुरी हो जाएगी; और लौटकर तेरा नाम मान लेना, और इस भवन में तेरे साम्हने प्रार्थना करना, और बिनती करना;

25 तब तू स्वर्ग में से सुन, और अपक्की प्रजा इस्राएल का पाप क्षमा कर, और उन्हें उस देश में जो तू ने उन्हें और उनके पुरखाओं को दिया है, ले आ।

26 जब आकाश बन्द हो, और मेंह न हो, क्योंकि उन्होंने तेरे विरुद्ध पाप किया है; तौभी यदि वे इस स्यान की ओर प्रार्यना करें, और तेरा नाम मान लें, और जब तू उन को दु:ख दे, तब अपके पाप से फिरें;

27 तब तू स्वर्ग में से सुन, और अपके दासोंऔर अपक्की प्रजा इस्राएल का पाप क्षमा कर, जब तू ने उन्हें वह अच्छा मार्ग सिखाया है जिस पर उन्हें चलना है; और अपक्की भूमि पर मेंह बरसाना, जिसे तू ने अपक्की प्रजा को निज भाग करके दिया है।

28 यदि देश में घटी हो, और मरी पड़े, यदि फूंकना, वा फफूंदी, टिड्डियां वा बिच्छू हों; यदि उनके शत्रु उनके देश के नगरोंमें उन्हें घेर लें; चाहे कोई दर्द हो, या कोई भी बीमारी हो;

29 तब किसी मनुष्य वा अपनी सारी प्रजा इस्राएल से क्या बिनती वा बिनती की जाए, जब सब अपके अपके अपके दुख और अपके अपके अपके अपके दुख को जाने, और अपके अपके हाथ इस भवन में फैलाए;

30 तब अपके निवासस्थान में से स्वर्ग में से सुनना, और क्षमा करना, और जिस मनुष्य का मन तू जानता है, उसके सब चालचलन के अनुसार उसका बदला देना; (क्योंकि तू केवल पुरुषों के बच्चों के दिलों को जानता है;)

31 जिस से वे तेरा भय मानते हुए तेरे मार्ग पर चलते रहें, और जब तक उस देश में रहें, जिसे तू ने हमारे पुरखाओं को दिया है, तब तक रहेंगे।

32 और परदेशी के विषय में, जो तेरी प्रजा इस्राएल का नहीं, वरन तेरे बड़े नाम, और बलवन्त हाथ, और बढ़ाई हुई भुजा के निमित्त दूर देश से आया है; यदि वे आकर इस भवन में प्रार्थना करें;

33 तब तू अपने निवास स्थान से स्वर्ग में से सुन, और जो कुछ परदेशी तुझ से कहेगा वही करना; जिस से पृय्वी के सब लोग तेरा नाम जानें, और तेरी प्रजा इस्राएल की नाईं तेरा भय मानें, और जान लें कि यह भवन जो मैं ने बनाया है, वह तेरा नाम है।

34 यदि तेरी प्रजा के लोग अपके शत्रुओं से लड़ने को उस मार्ग से जाएं जिस मार्ग से तू उन्हें भेजे, और वे इस नगर के लिथे जिसे तू ने चुना है, और उस भवन की ओर जिसे मैं ने तेरे नाम के लिथे बनाया है, तुझ से बिनती करे;

35 तब तू आकाश से उनकी प्रार्यना और बिनती सुनना, और उनका मुकद्दमा संभालना।

36 यदि वे तुझ से फिर पाप करें, (क्योंकि ऐसा कोई मनुष्य नहीं जो पाप न करे) और तू उन से क्रोधित होकर उनके शत्रुओं के साम्हने उन्हें छुड़ा ले, और वे उन्हें बंधुआई में ले जाकर दूर वा निकट देश में ले जाएं;

37 तौभी यदि वे अपने आप को उस देश में जहां वे बन्धुआई में लाए गए हैं, सोचकर फिरें और अपने बंधुआई के देश में तुझ से प्रार्थना करें, कि हम ने पाप किया है, हम ने पाप किया है, और दुष्टता से काम किया है;

38 यदि वे अपके बन्धुआई के देश में अपके सारे मन और अपने सारे प्राण समेत तेरे पास फिरें, और अपके देश के लिथे जो तू ने उनके पुरखाओं को दिया है, और उस नगर की ओर जिसे तू ने चुना है, प्रार्यना करें। और उस भवन की ओर जो मैं ने तेरे नाम के लिथे बनाया है;

39 तब तू अपके निवासस्थान में से स्वर्ग पर से उनकी प्रार्थना और बिनती सुनना, और उनके मुकद्दमे पर दृढ़ रहना, और अपक्की प्रजा को जिन्होंने तेरे विरुद्ध पाप किया है, क्षमा करना।

40 अब, हे मेरे परमेश्वर, मैं तुझ से बिनती करता हूं, कि तेरी आंखें खुली रहे, और इस स्थान में की जाने वाली प्रार्थना की ओर कान लगाए।

41 इसलिथे अब, हे परमेश्वर यहोवा, अपके विश्राम स्यान को, तू अपके बल के सन्दूक समेत उठ; हे यहोवा परमेश्वर, तेरे याजक उद्धार के वस्त्र पहिने हों, और तेरे पवित्र लोग भलाई के कारण आनन्दित हों।

42 हे परमेश्वर यहोवा, अपके अभिषिक्त का मुंह न फेर; अपने दास दाऊद की करूणा को स्मरण रखो।


अध्याय 7

लोग परमेश्वर की आराधना करते हैं - सुलैमान का बलिदान - सुलैमान लोगों को खारिज करता है - परमेश्वर उसे शर्त पर वादे देता है।

1 जब सुलैमान प्रार्यना कर चुका, तब आग आकाश से उतरी, और होमबलि और मेलबलि को भस्म कर दिया; और यहोवा का तेज भवन में भर गया।

2 और याजक यहोवा के भवन में प्रवेश न कर सके, क्योंकि यहोवा का तेज यहोवा के भवन में भर गया या।

3 और जब सब इस्राएलियोंने देखा, कि आग धधकती, और यहोवा का तेज भवन पर पड़ता है, तब वे फुटपाथ पर भूमि की ओर मुंह करके दण्डवत करने लगे, और दण्डवत करके यहोवा की स्तुति करने लगे, क्योंकि वह है अच्छा है; क्योंकि उसकी करूणा सदा की है।

4 तब राजा और सारी प्रजा ने यहोवा के साम्हने मेलबलि किए।

5 और राजा सुलैमान ने बाईस हजार बैलों, और एक लाख बीस हजार भेड़-बकरियोंकी बलि चढ़ाई। इसलिए राजा और सभी लोगों ने परमेश्वर के भवन को समर्पित किया।

6 और याजक अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके ारा य य रहे; और लेवीय भी यहोवा के बाजे लिये हुए थे, जिन्हें राजा दाऊद ने यहोवा की स्तुति करने के लिथे बनवाया या, क्योंकि उसकी करूणा सदा की है, जब दाऊद उनकी सेवा के कारण उसकी स्तुति करता है; और याजकों ने उनके साम्हने नरसिंगा फूंका, और सब इस्राएली खड़े हो गए।

7 फिर सुलैमान ने उस आंगन के बीच में जो यहोवा के भवन के साम्हने था, पवित्र किया; क्योंकि वह होमबलि और मेलबलि की चर्बी वहीं चढ़ाता था, क्योंकि पीतल की वेदी जो सुलैमान ने बनाई थी, वह होमबलि, और अन्नबलि और चरबी ग्रहण न कर सकी।

8 उसी समय सुलैमान ने हमात में प्रवेश करने से लेकर मिस्र की नदी तक के सब इस्राएलियों समेत सात दिन तक पर्व मनाया।

9 और आठवें दिन उन्होंने एक महासभा की; क्योंकि वे वेदी के समर्पण को सात दिन और पर्व को सात दिन तक मानते थे।

10 और सातवें महीने के तेईसवें दिन को उस ने लोगोंको अपके अपके डेरे में विदा किया, और उस भलाई के कारण जो यहोवा ने दाऊद, और सुलैमान और अपक्की प्रजा इस्राएल पर दिखाई या, उसके लिथे आनन्दित और मगन हो।

11 इस प्रकार सुलैमान ने यहोवा के भवन और राजभवन को पूरा किया; और जो कुछ सुलैमान के मन में यहोवा के भवन और अपके घर में बनाने को आया, वह सब उस ने अच्छा किया।

12 और यहोवा ने रात को सुलैमान को दर्शन देकर उस से कहा, मैं ने तेरी प्रार्यना सुनी है, और इस स्थान को बलि के भवन के लिथे अपके लिथे चुन लिया है।

13 यदि मैं आकाश को ऐसा बन्द कर दूं कि मेंह न हो, वा टिड्डियोंको देश को खा जाने की आज्ञा दे, वा अपक्की प्रजा में मरी फैलाऊं;

14 यदि मेरी प्रजा के लोग जो मेरे कहलाते हैं, दीन होकर प्रार्थना करें, और मेरे दर्शन के खोजी हों, और अपक्की दुष्टता से फिरें; तब मैं स्वर्ग में से सुनूंगा, और उनका पाप क्षमा करूंगा, और उनके देश को चंगा करूंगा।

15 अब मेरी आंखें खुली रहेंगी, और उस प्रार्थना की ओर जो इस स्थान में की जाती है, मेरे कान लगे रहेंगे।

16 क्योंकि अब मैं ने इस भवन को चुन लिया है और पवित्र किया है, कि मेरा नाम इसमें सदा बना रहे; और मेरी आंखें और मेरा मन वहां सदा लगे रहेंगे।

17 और यदि तू अपके पिता दाऊद की नाई मेरे आगे आगे चलता रहे, और जो कुछ मैं ने तुझे आज्ञा दी है उसके अनुसार चले, और मेरी विधियोंऔर मेरे नियमोंका पालन करना;

18 तब मैं तेरे राज्य की गद्दी को वैसे ही स्थिर करूंगा जैसा मैं ने तेरे पिता दाऊद से यह वाचा बान्धी है, कि तुझ में इस्राएल का प्रधान होने के लिथे कोई पुरूष न रह जाएगा।

19 परन्तु यदि तुम फिरकर मेरी मूरतोंऔर मेरी आज्ञाओं को जो मैं ने तुम्हारे साम्हने रखी हैं, त्यागकर पराए देवताओं की उपासना करके उनकी उपासना करना,

20 तब मैं उन्हें अपके देश में से जो मैं ने उन्हें दिया है, जड़ से उखाड़कर उखाड़ दूंगा; और इस भवन को जिसे मैं ने अपके नाम के लिथे पवित्र ठहराया है, उसको मैं अपके साम्हने से दूर कर दूंगा, और सब जातियोंमें यह नीतिवचन और उपनिषद् ठहरूंगा।

21 और यह भवन जो ऊंचा है, उसके पास से चलनेवाले सब को आश्चर्य होगा; कि वह कहे, यहोवा ने इस देश और इस भवन से ऐसा क्यों किया है?

22 और उत्तर दिया जाएगा, कि उन्होंने अपके पितरोंके परमेश्वर यहोवा को, जो उन्हें मिस्र देश से निकाल ले आया या, त्याग दिया, और पराए देवताओं को पकड़ लिया, और उन्हें दण्डवत किया, और उनकी उपासना की; इस कारण वह उन पर विपत्ति लाया है।


अध्याय 8

सुलैमान के भवन - अन्यजातियों ने सहायक नदियां बनाईं, परन्तु इस्राएल के शासकों ने सुलैमान के बलिदानों को - वह याजकों और लेवियों को नियुक्त करता है - ओपीर से सोना।  

1 और बीस वर्ष के बीतने पर, जब सुलैमान ने यहोवा के भवन और अपके भवन को बनाया या,

2 और जो नगर हूराम ने सुलैमान को फेर दिए थे, उन्हें सुलैमान ने बनाया, और इस्राएलियोंको उन में बसाया।

3 और सुलैमान हमात-सोबा को गया, और उस पर प्रबल हुआ।

4 और उस ने जंगल में तदमोर को, और जितने भण्डार नगर उस ने हमात में बनवाए, उन सभोंको उस ने दृढ़ किया।

5 फिर उस ने ऊपरवाले बेत-होरोन को, और नीचे के बेत-होरोन को नगरों समेत शहरपनाह, फाटकों और बेंड़ों समेत दृढ़ किया;

6 और बालात, और सुलैमान के सब भण्डार नगर, और रथोंके सब नगर, और सवारोंके नगर, और जो कुछ सुलैमान ने यरूशलेम, और लबानोन, और अपके राज्य के सारे देश में बनाना चाहा वह सब कुछ बनाना।

7 हित्तियों, एमोरियों, परिज्जियों, हिब्बियों, और यबूसियोंमें से जितने लोग बचे थे, वे सब इस्राएल के न थे,

8 परन्तु उनके पुत्रोंमें से जो उनके पीछे देश में रह गए थे, जिन्हें इस्राएलियोंने नाश न किया, उन से सुलैमान ने आज तक कर देने को ठहराया।

9 परन्तु इस्त्राएलियोंमें से सुलैमान ने अपके काम के लिथे किसी को दास न ठहराया; परन्तु वे योद्धा, और उसके प्रधान, और उसके रथोंके प्रधान, और सवार थे।

10 और राजा सुलैमान के हाकिमोंके प्रधान ये ही थे, जो प्रजा पर प्रभुता करने वाले ढाई सौ थे।

11 और सुलैमान फिरौन की बेटी को दाऊदपुर में से उस भवन में ले आया, जो उस ने उसके लिथे बनाया या; क्योंकि उस ने कहा, मेरी पत्नी इस्राएल के राजा दाऊद के घराने में न रहने पाए, क्योंकि वे स्थान पवित्र हैं, जहां यहोवा का सन्दूक आया है।

12 तब सुलैमान ने यहोवा की वेदी पर जो उस ने ओसारे के साम्हने बनाई या, होमबलि चढ़ाई।

13 मूसा की आज्ञा के अनुसार सब्त के दिन, और अमावस्या को, और पर्वोंके पर्वोंपर, वर्ष में तीन बार, अर्यात् अखमीरी रोटी के पर्व, और सप्ताहों का पर्व, और निवासों के पर्व में।

14 और उस ने अपके पिता दाऊद की आज्ञा के अनुसार याजकोंके दल अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके लिथे लिथे लिथे अपके अपके अपके अपके लिथे स्तुति करने, और याजकोंके साम्हने सेवा टहल करने को नियुक्‍त किया; कुली भी हर द्वार पर अपने मार्ग से; क्योंकि परमेश्वर के भक्त दाऊद ने ऐसी ही आज्ञा दी थी।

15 और वे राजा की आज्ञा से याजकोंऔर लेवियोंके पास किसी बात वा भण्डार के विषय में न हटे।

16 अब सुलैमान का सारा काम यहोवा के भवन की नींव के दिन तक, और उसके पूरा होने तक तैयार किया गया। इस प्रकार यहोवा का भवन सिद्ध हुआ।

17 तब सुलैमान एस्योनगेबेर और एदोम देश के समुद्र के किनारे एलोत को गया।

18 और हूराम ने अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अप म अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके लि आ ह; और वे सुलैमान के सेवकोंके संग ओपीर को गए, और वहां से साढ़े चार सौ किक्कार सोना लेकर राजा सुलैमान के पास ले आए।


अध्याय 9

शीबा की रानी - सुलैमान का सोना, लक्ष्य, हाथीदांत का सिंहासन, बर्तन, उपहार, रथ, श्रद्धांजलि, शासन और मृत्यु।

1 और जब शेबा की रानी ने सुलैमान की कीर्ति सुनी, तब वह एक बहुत बड़े दल, और सुगन्धद्रव्य, और बहुत सोना, और बहुमूल्य मणि रखनेवाले ऊंटोंके संग यरूशलेम में कठिन प्रश्न पूछकर सुलैमान की परीक्षा लेने को आई; और जब वह सुलैमान के पास आई, तो जो कुछ अपके मन में था उस से उस से बातें करने लगी।

2 और सुलैमान ने अपके सब प्रश्न उस से कहे; और सुलैमान से कोई ऐसी बात छिपी न थी, जो उस ने उस से न कही।

3 और जब शेबा की रानी ने सुलैमान की बुद्धि और उसके बनाए हुए भवन को देखा,

4 और उसकी मेज का मांस, और उसके कर्मचारियोंका बैठना, और उसके सेवकोंका हाज़िर होना, और उनका वस्त्र; उसके पिलानेवाले भी, और उनके वस्त्र भी; और जिस चढ़ाई से वह यहोवा के भवन में चढ़ गया; उसके अंदर और कोई आत्मा नहीं थी।

5 और उस ने राजा से कहा, मैं ने अपके देश में तेरे कामोंऔर तेरी बुद्धि के विषय में सत्य समाचार सुना;

6 तौभी मैं ने उनकी बातों की प्रतीति तब तक न की, जब तक मैं न आकर अपक्की आंखोंसे देख लेता; और देखो, तेरी बुद्धि की आधी महानता मुझ से न कही गई; क्‍योंकि तू ने उस कीर्ति से बढ़कर है जो मैं ने सुनी है।

7 धन्य हैं तेरे जन, और धन्य हैं तेरे ये दास, जो नित्य तेरे साम्हने खड़े रहते हैं, और तेरी बुद्धि की सुनते हैं।

8 धन्य है तेरा परमेश्वर यहोवा, जिस ने तुझे अपके परमेश्वर यहोवा के लिथे राजा होने के लिथे अपके सिंहासन पर विराजमान किया; क्योंकि तेरा परमेश्वर इस्राएल से प्रीति रखता या, कि उन्हें सदा के लिये स्थिर करे, इसलिथे उस ने तुझे उनका राजा ठहराया, कि न्याय और न्याय करें।

9 और उसने राजा को एक सौ बीस किक्कार सोना, और बहुत सुगन्धित सुगन्धित वस्तुएं, और मणि दीं; न तो ऐसा कोई मसाला था, जितना शेबा की रानी ने राजा सुलैमान को दिया था।

10 और हूराम के सेवक, और सुलैमान के सेवक, जो ओपीर से सोना लाते थे, वे चने के वृझ और मणि ले आए।

11 और राजा ने यहोवा के भवन, और राजभवन के साम्हने अलगम के वृझोंको छतरियां, और गवैयोंके लिथे वीणा बजाईं; और यहूदा देश में पहिले ऐसे न देखे गए थे।

12 और राजा सुलैमान ने शेबा की रानी को जो कुछ वह मांगा, और जो कुछ वह राजा के पास लाई थी, सब कुछ दे दिया। तब वह मुड़ी, और अपक्की अपक्की दासियों समेत अपके देश को चली गई।

13 और एक वर्ष में जो सोना सुलैमान के पास पहुंचा, वह छ: सौ साठ किक्कार सोना या;

14 इसके अलावा जो पादरी और व्यापारी लाए थे। और अरब के सब राजा और देश के हाकिम सुलैमान के पास सोना चान्दी ले आए।

15 और राजा सुलैमान ने सोने के दो सौ लट्ठे बनवाए; छ: सौ शेकेल पीटा हुआ सोना एक लक्ष्य को गया।

16 और उस ने तीन सौ ढालें गढ़ी हुई सोने की बनाईं; एक ही ढाल में तीन सौ शेकेल सोना निकला। और राजा ने उन्हें लबानोन के वन के भवन में रखा।

17 फिर राजा ने हाथीदांत का एक बड़ा सिंहासन बनवाया, और उसे चोखे सोने से मढ़ा।

18 और सिंहासन की ओर छ: सीढ़ियां थीं, और सोने का एक पावोंकी चौकी, जो सिंहासन पर बंधी हुई या, और बैठने के स्थान की दोनों अलंगों पर टिकी हुई थी, और दो सिंह डब्बोंके पास खड़े थे;

19 और बारह सिंह वहां एक ओर और दूसरी ओर छ: सीढियोंपर खड़े थे। किसी भी राज्य में ऐसा नहीं बना था।

20 और राजा सुलैमान के पीने के सब पात्र सोने के थे, और लबानोन के वन के भवन के सब पात्र चोखे सोने के थे; कोई चाँदी का नहीं था; सुलैमान के दिनों में इसका कोई हिसाब नहीं था।

21 क्योंकि हूराम के सेवकोंके संग राजा के जहाज तर्शीश को गए; हर तीन वर्ष में एक बार तर्शीश के जहाज सोना, चान्दी, हाथीदांत, वानर, और मोर लेकर आते थे।

22 और राजा सुलैमान ने पृय्वी के सब राजाओं को धन और बुद्धि से पार किया।

23 और पृय्वी के सब राजाओं ने सुलैमान की उस बुद्धि को सुनने के लिथे जो परमेश्वर ने उसके मन में डाली या, उसके साम्हने ढूढ़ने लगे।

24 और वे अपके अपके भेंट अर्थात चान्दी के पात्र, और सोने के पात्र, और वस्त्र, वस्त्र, और सुगन्धद्रव्य, घोड़े, और खच्चर प्रति वर्ष के हिसाब से लाते थे।

25 और सुलैमान के घर और रथोंके लिथे चार हजार ठेले, और बारह हजार सवार थे; जिसे उस ने रथोंके नगरोंमें और राजा को यरूशलेम में दिया या।

26 और वह महानद से लेकर पलिश्तियोंके देश तक और मिस्र के सिवाने तक सब राजाओं पर राज्य करता या।

27 और राजा ने यरूशलेम में चान्दी को मणियों का बना दिया, और देवदार के वृक्षों ने उसे नीचे के अराबा में बहुतायत के गूलर के वृक्षों के समान बना दिया।

28 और वे मिस्र से और सब देशोंसे सुलैमान के घोड़ोंको ले आए।

29 सुलैमान के और सब काम क्या पहिले और अन्त में, क्या वे नातान भविष्यद्वक्ता की पुस्तक में, और शीलोनी अहिय्याह की भविष्यद्वाणी में, और नबात के पुत्र यारोबाम के विरुद्ध इद्दो दशीं के दर्शन में नहीं लिखे हैं?

30 और सुलैमान यरूशलेम में चालीस वर्ष तक सारे इस्राएल पर राज्य करता रहा।

31 और सुलैमान अपके पुरखाओं के संग सो गया, और उसको अपके पिता दाऊद के नगर में मिट्टी दी गई; और उसका पुत्र रहूबियाम उसके स्थान पर राज्य करने लगा।


अध्याय 10

दस जनजातियों का विद्रोह।

1 और रहूबियाम शकेम को गया; क्‍योंकि सब इस्राएली शकेम को राजा बनाने के लिथे आए थे।

2 और जब नबात का पुत्र यारोबाम, जो मिस्र में था, जहां वह राजा सुलैमान के साम्हने से भागा या, यह सुना, कि यारोबाम मिस्र से लौट आया है।

3 और उन्होंने भेजकर उसे बुलवा लिया। तब यारोबाम और सारे इस्राएल ने आकर रहूबियाम से कहा,

4 तेरे पिता ने हमारा जूआ भारी किया; सो अब तू अपके पिता की घोर दासता, और उसके भारी जूए को जो उस ने हम पर डाला है, थोड़ा हल्का कर, तब हम तेरी उपासना करेंगे।

5 उस ने उन से कहा, तीन दिन के बाद मेरे पास फिर आओ। और लोग चले गए।

6 तब राजा रहूबियाम ने उन पुरनियोंसे जो अपके पिता सुलैमान के जीवित रहते उसके साम्हने खड़े हुए थे युक्‍ति की, कि इन लोगोंको उत्तर देने के लिथे तुम मुझे क्या युक्ति देते हो?

7 और उन्होंने उस से कहा, यदि तू इस प्रजा पर कृपा करके उन पर प्रसन्न हो, और उन से अच्छी बातें कहे, तो वे सदा तेरे दास बने रहेंगे।

8 परन्तु उस ने उस सम्मति को जो पुरनियोंने उसको दी या, छोड़ दिया, और उन जवानोंसे जो उसके साम्हने पले-बढ़े थे सम्मति ली।

9 उस ने उन से कहा, तुम क्या सम्मति देते हो, कि हम उन लोगोंको उत्तर दें, जिन्होंने मुझ से कहा है, कि जो जूआ तुम्हारे पिता ने हम पर रखा था उसे थोड़ा हल्का करो?

10 और जो जवान उसके संग लाए गए थे, उन ने उस से कहा, अपके अपके पिता ने हमारा जूआ भारी तो किया, परन्तु हमारे लिये हल्का कर; उन से यों कहना, मेरी छोटी उंगली मेरे पिता की कमर से मोटी होगी।

11 क्योंकि जब मेरा पिता तुम पर भारी जूआ डालेगा, तब मैं तुम्हारे जूए पर और भी जूआ डालूंगा; मेरे पिता ने कोड़ों से तुझे ताड़ना दी, परन्तु मैं बिच्छुओं से तुझे ताड़ना दूंगा।

12 तब यारोबाम और सब लोग तीसरे दिन रहूबियाम के पास आए, जैसा राजा ने कहा, तीसरे दिन मेरे पास फिर आ।

13 तब राजा ने उन से कठोरता से उत्तर दिया; और राजा रहूबियाम ने पुरनियों की युक्ति को त्याग दिया,

14 और जवानों की सम्मति के अनुसार उनको उत्तर दिया, कि मेरे पिता ने तेरा जूआ भारी कर दिया, परन्तु मैं उस में और बढ़ाऊंगा; मेरे पिता ने कोड़ों से तुझे ताड़ना दी, परन्तु मैं बिच्छुओं से तुझे ताड़ना दूंगा।

15 तब राजा ने प्रजा की न मानी; क्योंकि जो वचन यहोवा ने शीलोवासी अहिय्याह के द्वारा नबात के पुत्र यारोबाम से कहा था, उसे पूरा करने के लिथे यहोवा की ओर से हुआ है।

16 जब सब इस्राएलियों ने देखा, कि राजा ने उनकी न मानी, तब लोगों ने राजा को उत्तर दिया, कि दाऊद में हमारा क्या भाग है? और यिशै की सन्तान में हमारा कोई निज भाग नहीं; हे इस्राएल, अपके अपके डेरे को, हे इस्राएल; और अब हे दाऊद, अपके घराने की सुधि ले। तब सब इस्राएली अपके अपके डेरे को गए।

17 परन्तु इस्राएली जो यहूदा के नगरोंमें रहते थे, उन पर रहूबियाम राज्य करता या।

18 तब राजा रहूबियाम ने हादोराम को जो भेंट का अधिकारी था, भेजा; और इस्राएलियोंने उस पर पत्यरवाह किए, और वह मर गया। परन्तु राजा रहूबियाम ने उसे अपके रय पर चढ़ाने के लिथे फुर्ती की, कि यरूशलेम भाग जाए।

19 और इस्राएल दाऊद के घराने से आज तक बलवा करता है।


अध्याय 11

रहूबियाम ने शमायाह को डाँटा - वह अपने राज्य को मजबूत करता है - याजकों और लेवियों ने यहूदा के राज्य को मजबूत किया।

1 और जब रहूबियाम यरूशलेम को आया, तब उस ने यहूदा और बिन्यामीन के घराने में से एक लाख चौरासी हजार चुने हुओं को, जो शूरवीर थे, इस्राएल से लड़ने के लिथे इकट्ठा किया, कि वह राज्य को रहूबियाम के पास फिर ले आए।

2 परन्तु यहोवा का यह वचन परमेश्वर के भक्त शमायाह के पास पहुंचा, और कहा,

3 यहूदा के राजा सुलैमान के पुत्र रहूबियाम और यहूदा और बिन्यामीन के सब इस्राएलियोंसे कह,

4 यहोवा यों कहता है, कि न चढ़ना, और न अपके भाइयोंसे युद्ध करना; हर एक मनुष्य को उसके घर लौटा दे; क्योंकि यह काम मुझ से किया गया है। और उन्होंने यहोवा की बात मानी, और यारोबाम पर चढ़ाई करने से लौट गए।

5 और रहूबियाम यरूशलेम में रहने लगा, और यहूदा में रक्षा के लिथे नगरोंको बसाया।

6 उस ने बेतलेहेम, एताम, और तकोआ को भी बनाया,

7 और बेतसूर, शोको, अदुल्लाम,

8 और गत, मारेशा, जीप,

9 और अदोरैम, लाकीश, अजेका,

10 और सोरा, अय्याओन, हेब्रोन, जो यहूदा और बिन्यामीन में हैं, उन्होंने नगरोंको गढ़ा।

11 और उस ने गढ़ोंको दृढ़ किया, और उन में प्रधान ठहराए, और भोजन, और तेल और दाखमधु के भण्डार रखे।

12 और हर एक नगर में उस ने ढालें और भाले रखे, और यहूदा और बिन्यामीन को अपके संग में लिये हुए उन्हें बहुत दृढ़ किया।

13 और याजक और लेवीय जो सारे इस्राएल में रहते थे, अपके सब देशोंमें से उसकी सहायता करने लगे।

14 क्योंकि लेवीय अपक्की चराइयोंऔर अपक्की निज भूमि को छोड़कर यहूदा और यरूशलेम को आए; क्योंकि यारोबाम और उसके पुत्रों ने उन्हें यहोवा के लिये याजक का काम करने से दूर कर दिया या।

15 और उस ने ऊँचे स्थानों, और दुष्टात्माओं, और अपने बनाए हुए बछड़ोंके लिथे उसके लिये याजक ठहराया।

16 और उनके पीछे, इस्राएल के सब गोत्रोंमें से, जो इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की खोज में मन लगाते थे, अपके पितरोंके परमेश्वर यहोवा के लिथे बलिदान करने को यरूशलेम को आए।

17 तब उन्होंने यहूदा के राज्य को दृढ़ किया, और सुलैमान के पुत्र रहूबियाम को तीन वर्ष तक दृढ़ किया; वे तीन वर्ष तक दाऊद और सुलैमान की सी चाल चले।

18 और रहूबियाम ने दाऊद के पोते यरीमोत की बेटी महलत और यिशै के पुत्र एलीआब की बेटी अबीहैल को ब्याह लिया;

19 जिससे उसके बच्चे उत्पन्न हुए; यूश, और शमर्याह, और जाहम।

20 और उसके बाद उसने अबशालोम की बेटी माका को ब्याह लिया; जिस से अबिय्याह, अत्तै, जीज़ा, और शलोमीत उत्पन्न हुए।

21 और रहूबियाम अबशालोम की बेटी माका से अपक्की सब पत्नियोंऔर रखेलियोंसे अधिक प्रीति रखता या; (क्योंकि उस ने अठारह स्त्रियां, और साठ रखैलें ब्याहीं, और उसके अट्ठाईस पुत्र और साठ बेटियां उत्पन्न हुई।)

22 और रहूबियाम ने माका के पुत्र अबिय्याह को प्रधान ठहराया, कि वह अपके भाइयोंमें प्रधान हो; क्योंकि वह उसे राजा बनाना चाहता था।

23 और उस ने बुद्धिमानी से काम लिया, और अपक्की सन्तान को यहूदा और बिन्यामीन के सब देशोंमें, और सब गढ़वाले नगरोंमें तितर-बितर कर दिया; और उस ने उन्हें बहुतायत में भोजन दिया। और वह कई पत्नियों की इच्छा रखता था।


अध्याय 12

रहूबियाम ने यहोवा को त्याग दिया - रहूबियाम का राज्य और मृत्यु।

1 और ऐसा हुआ कि जब रहूबियाम ने राज्य को दृढ़ किया, और अपने आप को दृढ़ किया, तब उस ने यहोवा की व्यवस्था और उसके साथ सारे इस्राएल को त्याग दिया।

2 और ऐसा हुआ, कि रहूबियाम राजा के पांचवें वर्ष में मिस्र का राजा शीशक यरूशलेम पर चढ़ाई करने लगा, क्योंकि उन्होंने यहोवा का उल्लंघन किया या।

3 बारह सौ रय, और साठ हजार सवार; और जो लोग उसके संग मिस्र से निकल आए थे, उनकी गिनती न हुई; लुबिम, सुक्कीम और इथियोपियाई।

4 और वह यहूदा के गढ़वाले नगरोंको ले कर यरूशलेम को आया।

5 तब शमायाह नबी रहूबियाम के पास, और यहूदा के हाकिमोंके पास जो शीशक के कारण यरूशलेम में इकट्ठे हुए थे, पास आकर कहने लगे, यहोवा योंकहता है, कि तुम ने मुझे छोड़ दिया है, और इसलिथे मैं ने भी तुम्हें उसी देश में छोड़ दिया है। शीशक का हाथ।

6 तब इस्राएल के हाकिमोंऔर राजा ने अपके आप को दीन किया; और उन्होंने कहा, यहोवा धर्मी है।

7 जब यहोवा ने देखा, कि वे दीन हो गए हैं, तब यहोवा का यह वचन शमायाह के पास पहुंचा, कि वे दीन हो गए हैं; इसलिथे मैं उनका नाश न करूंगा, वरन उनका कुछ उद्धार करूंगा; और शीशक के द्वारा मेरा कोप यरूशलेम पर न भड़केगा।

8 तौभी वे उसके दास होंगे; ताकि वे मेरी सेवा और देशों के राज्यों की सेवा को जान सकें।

9 तब मिस्र का राजा शीशक यरूशलेम पर चढ़ाई करके यहोवा के भवन की भण्डार और राजभवन की भण्डार लूट ले गया; उसने सब ले लिया; वह सोने की ढालें भी ले गया जो सुलैमान ने बनाई थीं।

10 उसके बदले में राजा रहूबियाम ने पीतल की ढालें बनवाकर राजभवन के द्वार की रखवाली करनेवाले जल्लादोंके प्रधान के हाथ सौंप दीं।

11 और जब राजा यहोवा के भवन में गया, तब पहरू आकर उन्हें ले गए, और पहरे की कोठरी में ले आए।

12 और जब वह अपने आप को दीन किया, तब यहोवा का कोप उस पर ऐसा भड़क उठा, कि वह उसे पूरी रीति से नाश न करने पाएगा; और यहूदा में भी सब ठीक हो गया।

13 तब राजा रहूबियाम ने यरूशलेम में अपने आप को दृढ़ किया, और राज्य करता रहा; क्योंकि जब रहूबियाम राज्य करने लगा, तब वह एक चालीस वर्ष का या, और उस नगर में जिसे यहोवा ने इस्राएल के सब गोत्रोंमें से अपना नाम रखने के लिथे चुन लिया या, उस नगर में सत्रह वर्ष तक राज्य करता रहा। और उसकी माता का नाम नामा था जो अम्मोनी स्त्री थी।

14 और उस ने बुरा किया, क्योंकि उस ने यहोवा को ढूंढ़ने के लिथे अपना मन तैयार न किया।

15 क्या रहूबियाम के काम पहिले क्या अन्त में, क्या वे शमायाह भविष्यद्वक्ता की पुस्तक में, और इद्दो दशीं की वंशावली के विषय में नहीं लिखे हैं? और रहूबियाम और यारोबाम के बीच निरन्तर युद्ध होते रहे।

16 और रहूबियाम अपके पुरखाओं के संग सो गया, और उसको दाऊदपुर में मिट्टी दी गई; और उसका पुत्र अबिय्याह उसके स्थान पर राज्य करने लगा।


अध्याय 13

अबिय्याह ने यारोबाम पर विजय प्राप्त की।

1 यारोबाम राजा के अठारहवें वर्ष में अबिय्याह यहूदा पर राज्य करने लगा।

2 वह तीन वर्ष तक यरूशलेम में राज्य करता रहा। उसकी माता का नाम मीकायाह भी था, जो गिबा के ऊरीएल की बेटी थी। और अबिय्याह और यारोबाम के बीच युद्ध हुआ।

3 और अबिय्याह ने चार लाख चुने हुए शूरवीरोंकी सेना के साय पांति बान्धी; यारोबाम ने भी आठ लाख शूरवीरोंके साथ उसके विरुद्ध युद्ध की पांति बान्धी।

4 तब अबिय्याह जमरैम पहाड़ पर जो एप्रैम के पहाड़ पर है, उठकर कहने लगा, हे यारोबाम, हे सब इस्राएल, हे मुझ को देख;

5 क्या तुम नहीं जानते, कि इस्राएल के परमेश्वर यहोवा ने इस्राएल पर राज्य को सदा के लिये दाऊद को, अर्थात उसे और उसके पुत्रोंको नमक की वाचा के द्वारा दे दिया?

6 तौभी नबात का पुत्र यारोबाम, जो दाऊद के पुत्र सुलैमान का दास है, उठ खड़ा हुआ है, और उसने अपके स्वामी से बलवा किया है।

7 और जब रहूबियाम जवान और कोमल था, और उसका साम्हना न कर सका, तब उसके पास बेलियाल की सन्तान निकम्मे मनुष्य इकट्ठे हुए, और सुलैमान के पुत्र रहूबियाम के साम्हने बलवन्त हो गए।

8 और अब तुम दाऊद की सन्तान के वश में यहोवा के राज्य का साम्हना करने का विचार करते हो; और तुम लोगों की भीड़ हो, और तुम्हारे संग सोने के बछड़े भी हैं, जिन्हें यारोबाम ने तुम्हें देवताओं के लिये ठहराया है।

9 क्या तुम ने यहोवा के याजकों, अर्यात् हारून की सन्तान और लेवियोंको निकाल कर अन्य देशोंकी जातियोंके अनुसार याजक नहीं ठहराया? ताकि जो कोई एक बछड़े और सात मेढ़ों के द्वारा अपने आप को पवित्र करने आए, वह उनका याजक ठहरे, जो देवता नहीं हैं।

10 परन्तु हम तो यहोवा ही हमारा परमेश्वर है, और हम ने उसे नहीं छोड़ा; और हारून की सन्तान यहोवा की सेवा टहल करनेवाले याजक हैं, और लेवीय अपके काम की बाट जोहते हैं;

11 और वे प्रतिदिन भोर और सांझ को यहोवा के लिथे होमबलि और सुगन्धित धूप जलाते हैं; रोटी भी उन्हें शुद्ध मेज पर व्यवस्थित करती है; और सोने की दीवट और उसके दीये भी सांझ को जलाने के लिथे; क्योंकि हम अपके परमेश्वर यहोवा की आज्ञा का पालन करते हैं; परन्तु तुम ने उसे छोड़ दिया है।

12 और देखो, हमारे प्रधान के लिथे परमेश्वर स्वयं हमारे संग है, और उसके याजक तुरहियां फूंकने के लिथे तुम्हारे विरुद्ध ललकारने को हैं। हे इस्राएलियों, अपके पितरोंके परमेश्वर यहोवा से मत लड़ो; क्योंकि तुम सफल नहीं होओगे।

13 परन्तु यारोबाम ने उनके पीछे घात लगाकर चढ़ाई की; इस प्रकार वे यहूदा के साम्हने थे, और घात लगाकर बैठे थे।

14 जब यहूदा ने पीछे मुड़कर देखा, तो क्या देखा, कि आगे और पीछे लड़ाई हो रही है; और उन्होंने यहोवा की दोहाई दी, और याजकोंने नरसिंगा फूंका।

15 तब यहूदा के लोगोंने जयजयकार किया; और जब यहूदा के पुरूष ललकारे, तब ऐसा हुआ कि परमेश्वर ने यारोबाम और सारे इस्राएल को अबिय्याह और यहूदा के साम्हने मार लिया।

16 और इस्राएली यहूदा के साम्हने भाग गए; और परमेश्वर ने उन्हें उनके हाथ में कर दिया।

17 और अबिय्याह और उसकी प्रजा ने उन्हें बड़े घात से घात किया; इस प्रकार इस्राएल में से चुने हुए पांच लाख पुरुष मारे गए।

18 इस प्रकार उस समय इस्राएलियोंको वश में किया गया, और यहूदा के लोग प्रबल हुए, क्योंकि उन्होंने अपके पितरोंके परमेश्वर यहोवा पर भरोसा रखा था।

19 और अबिय्याह ने यारोबाम का पीछा किया, और उसके पास से बेतेल, और उसके नगरों समेत यशाना, और एप्रैम के नगर भी ले लिए।

20 और अबिय्याह के दिनोंमें यारोबाम फिर से बलवान न हुआ; और यहोवा ने उसे मारा, और वह मर गया।

21 परन्तु अबिय्याह पराक्रमी हो गया, और उसने चौदह स्त्रियां ब्याह लीं, और उसके बाईस बेटे और सोलह बेटियां उत्पन्न हुईं।

22 और अबिय्याह के और काम, और उसके चालचलन, और उसके वचन इद्दो भविष्यद्वक्ता की कहानी में लिखे हैं।


अध्याय 14

आसा मूर्तिपूजा को नष्ट करता है, जेरह को उखाड़ फेंकता है, और कूशियों को बिगाड़ देता है।

1 तब अबिय्याह अपके पुरखाओं के संग सो गया, और उन्होंने उसको दाऊदपुर में मिट्टी दी; और उसका पुत्र आसा उसके स्थान पर राज्य करने लगा। उसके दिनों में दस वर्ष तक देश शांत रहा।

2 और आसा ने वही किया जो उसके परमेश्वर यहोवा की दृष्टि में भला और ठीक था;

3 क्योंकि उस ने पराए देवताओं की वेदियोंऔर ऊंचे स्थानोंको ले लिया, और मूरतोंको तोड़ डाला, और अवनोंको काट डाला;

4 और यहूदा को आज्ञा दी, कि अपके पितरोंके परमेश्वर यहोवा को ढूंढ़ो, और व्यवस्था और आज्ञा का पालन करो।

5 फिर उस ने यहूदा के सब नगरोंमें से ऊंचे स्यानोंऔर मूरतोंको भी छीन लिया; और राज्य उसके साम्हने शांत रहा।

6 और उसने यहूदा में गढ़वाले नगर बनाए; क्‍योंकि उस देश में विश्‍वास था, और उन वर्षोंमें उसका कोई युद्ध न हुआ था; क्योंकि यहोवा ने उसे विश्राम दिया था।

7 इसलिथे उस ने यहूदा से कहा, हम इन नगरोंको बनाएं, और इनके चारोंओर शहरपनाह, और गुम्मट, फाटक और बेंड़े बनाएं, जब तक देश हमारे साम्हने बना रहे; क्योंकि हम ने अपके परमेश्वर यहोवा को ढूंढ़ा है, उस को ढूंढा है, और उस ने हम को चारोंओर से विश्राम दिया है। इसलिए उन्होंने निर्माण किया और समृद्ध हुए।

8 और आसा के पास यहूदा में से तीन लाख पुरूषोंकी एक सेना थी, जो निशाना और भाले लिए हुए थे; और बिन्यामीन में से जिनके पास ढालें और धनुष थे, वे दो लाख चौरासी हजार थे; ये सब शूरवीर थे।

9 तब जेरह नाम कूशी उन पर चढ़ाई करके एक हजार हजार और तीन सौ रथों की सेना लेकर निकल आया; और मारेशा के पास आया।

10 तब आसा ने उसका साम्हना करने को निकला, और उन्होंने सपता नाम तराई में मारेशा में पांति बान्धी।

11 और आसा ने अपके परमेश्वर यहोवा की दोहाई दी, और कहा, हे प्रभु, चाहे बहुतोंके वा अपके अपके साम्हने तेरे लिथे कुछ नहीं; हे हमारे परमेश्वर यहोवा, हमारी सहायता कर; क्‍योंकि हम तुझ पर विश्‍वास करते हैं, और तेरे नाम से इस भीड़ पर चढ़ाई करते हैं। हे यहोवा, तू हमारा परमेश्वर है; मनुष्य तुझ पर प्रबल न हो।

12 तब यहोवा ने कूशियोंको आसा और यहूदा के साम्हने मारा; और इथियोपियाई भाग गए।

13 और आसा और उसके संगी लोग गरार तक उनका पीछा करते रहे; और कूशियों को उखाड़ फेंका गया, कि वे अपने आप को ठीक न कर सके; क्योंकि वे यहोवा के साम्हने और उसके दल के साम्हने नाश किए गए; और वे बहुत लूट ले गए।

14 और उन्होंने गरार के चारोंओर के सब नगरोंको जीत लिया; क्योंकि यहोवा का भय उन पर छा गया; और उन्होंने सब नगरोंको लूट लिया; क्योंकि उन में बहुत अधिक लूट थी।

15 और उन्होंने पशुओं के डेरों को भी मारा, और भेड़-बकरी और ऊंटों को बहुत ले गए, और यरूशलेम को लौट गए।


अध्याय 15

आसा, यहूदा के साथ, परमेश्वर के साथ वाचा बाँधता है, और एक लंबी शांति का आनंद लेता है।

1 और परमेश्वर का आत्मा ओदेद के पुत्र अजर्याह पर उतरा;

2 और वह आसा से भेंट करने को निकला, और उस से कहा, हे आसा, और सारे यहूदा, और बिन्यामीन, मेरी सुन; जब तक तुम उसके साथ रहो तब तक यहोवा तुम्हारे साथ है; और यदि तुम उसे ढूंढ़ोगे, तो वह तुम में से मिल जाएगा; परन्तु यदि तुम उसे छोड़ दोगे, तो वह तुम्हें भी छोड़ देगा।

3 इस्राएल बहुत समय से सच्चे परमेश्वर के बिना, और बिना उपदेश देने वाले याजक और बिना व्यवस्था के रहा है।

4 परन्तु जब वे संकट में पड़कर इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की ओर फिरे, और उसको ढूंढ़ने लगे, तब वह उन में से मिला।

5 उस समय न तो बाहर जानेवाले को, और न आने वाले को चैन मिला, वरन देश देश के सब रहनेवालोंको बहुत दुख हुआ।

6 और जाति जाति और नगर नगर से नाश की गई; क्‍योंकि परमेश्वर ने उन्‍हें सब विपत्तियोंसे तंग किया है।

7 सो हियाव बान्धो, और तुम्हारे हाथ निर्बल न हों; आपके काम के लिए पुरस्कृत किया जाएगा।

8 और जब आसा ने ये बातें और ओदेद भविष्यद्वक्ता की भविष्यद्वाणी सुनी, तब उस ने हियाव बान्धकर यहूदा और बिन्यामीन के सारे देश में से और उन नगरोंमें से जो उस ने एप्रैम के पहाड़ पर से ले आए थे, घिनौनी मूरतोंको दूर किया, और यहोवा की वेदी का नवीनीकरण किया, जो यहोवा के ओसारे के साम्हने थी।

9 और उस ने एप्रैम, मनश्शे, और शिमोन में से सब यहूदा और बिन्यामीन को, और उनके संग परदेशियोंको भी इकट्ठा किया; क्योंकि जब उन्होंने देखा, कि उसका परमेश्वर यहोवा उसके संग है, तब वे इस्राएल में से उसके पास बहुतायत से मारे गए।

10 सो वे आसा के राज्य के पन्द्रहवें वर्ष के तीसरे महीने में यरूशलेम में इकट्ठे हुए।

11 और उस लूट में से जो वे ले आए थे, उसी समय उन्होंने सात सौ बैल और सात हजार भेड़-बकरियां यहोवा को भेंट की।

12 और उन्होंने अपके पितरोंके परमेश्वर यहोवा को अपके सारे मन और अपने सारे प्राण से ढूंढ़ने की वाचा बान्धी;

13 कि जो कोई इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की खोज न करे, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, चाहे वह पुरुष हो या स्त्री, वह मार डाला जाए।

14 और उन्होंने ऊंचे शब्द से, और ललकारते हुए, और नरसिंगों, और बांगोंके साथ यहोवा से शपय खाई।

15 और सब यहूदा शपथ खाकर आनन्दित हुए; क्‍योंकि उन्‍होंने अपके सारे मन से शपय खाई थी, और अपक्की अभिलाषा से उसको ढूंढ़ते थे; और वह उनमें से पाया गया; और यहोवा ने उन्हें चारोंओर विश्राम दिया।

16 और राजा आसा की माता माका के विषय में भी उस ने उसको रानी होने से हटा दिया, क्योंकि उस ने अशेरा में मूरत बना ली थी; और आसा ने उसकी मूरत को काट डाला, और उस पर मुहर लगा दी, और किद्रोन नाले में उसे जला दिया।

17 परन्तु ऊंचे स्थान इस्राएल में से दूर न किए गए; तौभी आसा का मन जीवन भर खरा रहा।

18 और जो वस्तुएं उसके पिता ने अर्पण की थीं, और जो उस ने अपक्की अपक्की समर्पित की थीं, उन्हें वह परमेश्वर के भवन में ले आया, अर्थात् चांदी, सोना, और पात्र।

19 और आसा के राज्य के पैंतीसवें वर्ष तक फिर कोई युद्ध न हुआ।


अध्याय 16

आसा ने हनानी को बन्दीगृह में डाल दिया - वह अपने रोग में परमेश्वर की नहीं, परन्तु वैद्यों की खोज करता है।

1 आसा के राज्य के छत्तीसवें वर्ष में इस्राएल के राजा बाशा ने यहूदा पर चढ़ाई की, और रामा को इसलिथे दृढ़ किया कि कोई यहूदा के राजा आसा के पास जाने या उसके पास न आने पाए।

2 तब आसा ने यहोवा के भवन और राजभवन के भण्डारों में से सोना-चांदी निकालकर अराम के राजा बेन्हदद के पास जो दमिश्क में रहता या, यह कहला भेजा,

3 जैसा मेरे पिता और तेरे पिता के बीच में हुआ, वैसा ही मेरे और तेरे बीच भी वाचा है; देख, मैं ने तुझे चान्दी सोना भेजा है; जाकर इस्राएल के राजा बाशा से अपनी वाचा तोड़, कि वह मेरे पास से चला जाए।

4 तब बेन्हदद ने राजा आसा की बात मानकर अपक्की सेना के प्रधानोंको इस्राएल के नगरोंपर चढ़ाई करने को भेज दिया; और उन्होंने इय्योन, और दान, और हाबिल-मैम, और नप्ताली के सब भण्डार नगरोंको जीत लिया।

5 यह सुनकर बाशा ने रामा को बनाना छोड़ दिया, और अपना काम बन्द कर दिया।

6 तब राजा आसा ने सारे यहूदा को ले लिया; और वे रामा के पत्यरों, और उसकी लकड़ी को, जिन से बाशा निर्माण करता या, ले गए; और उसी से उस ने गेबा और मिस्पा को बनाया।

7 उस समय हनानी दशीं ने यहूदा के राजा आसा के पास आकर उस से कहा, तू ने अराम के राजा पर भरोसा किया है, और अपके परमेश्वर यहोवा पर भरोसा नहीं रखा, इसलिथे अराम के राजा की सेना बच निकली है तुम्हारे हाथ की।

8 क्या कूशी और लूबीम बहुत बड़े दल के नहीं थे, और उनके पास बहुत से रथ और सवार थे? तौभी तू ने यहोवा पर भरोसा रखा, इसलिथे उस ने उनको तेरे हाथ कर दिया।

9 क्योंकि यहोवा की दृष्टि सारी पृय्वी पर इधर-उधर दौड़ती रहती है, कि जिनका मन उसकी ओर निष्कपट रहता है, उनके पक्ष में वह अपने आप को दृढ़ करे। इस में तू ने मूर्खता की है; इसलिथे अब से तू युद्ध करता रहेगा।

10 तब आसा ने दर्शी पर क्रोधित होकर उसे बन्दीगृह में डाल दिया; क्योंकि वह इस बात के कारण उस पर क्रोधित हुआ था। और आसा ने उसी समय कुछ लोगों पर अन्धेर किया।

11 और देखो, पहिले और अन्त में आसा के काम, देखो, वे यहूदा और इस्राएल के राजाओं की पुस्तक में लिखे हुए हैं।

12 और आसा अपके राज्य के उनतीसवें वर्ष में अपके पांवोंमें रोगग्रस्त रहा, और जब तक उसका रोग बहुत अधिक न हो गया; तौभी उस ने अपके रोग में यहोवा की नहीं, पर वैद्योंकी खोज की।

13 और आसा अपके पुरखाओं के संग सो गया, और अपके राज्य के एक चालीसवें वर्ष में मर गया।

14 और उन्होंने उसको उसी की कब्रोंमें, जो उस ने दाऊदपुर में अपने लिये बनाई या, मिट्टी दी, और उस बिछौने पर लिटा दिया, जो सुगन्धित सुगन्धित और नाना प्रकार के सुगन्धद्रव्योंसे भरी हुई थी, जो औषधि के काम में बनाए जाते थे; और उन्होंने उसके लिये बहुत बड़ी आग जलाई।


अध्याय 17

यहोशापात समृद्ध हुआ - उसने लेवियों को हाकिमों के साथ यहूदा को सिखाने के लिए भेजा - उसके शत्रु परमेश्वर से भयभीत थे - उसकी महानता।

1 और उसका पुत्र यहोशापात उसके स्थान पर राज्य करने लगा, और इस्राएल के विरुद्ध अपने आप को दृढ़ किया।

2 और उस ने यहूदा के सब गढ़वाले नगरोंमें सेना लगाई, और यहूदा के देश में, और एप्रैम के उन नगरोंमें जिन्हें उसके पिता आसा ने ले लिया या, सिपाहियोंकी चौकियां लगा दीं।

3 और यहोवा यहोशापात के संग रहा, क्योंकि वह अपके पिता दाऊद के पहिले मार्गोंपर चला, और बालीम की खोज में न रहा;

4 परन्‍तु अपके पिता के परमेश्वर यहोवा की खोज में चला, और उस की आज्ञाओं पर चला, न कि इस्राएल के कामोंके अनुसार।

5 इसलिथे यहोवा ने राज्य को उसके हाथ में स्थिर कर दिया; और सब यहूदी यहोशापात के पास भेंट ले आए; और उसके पास बहुतायत में धन और सम्मान था।

6 और उसका मन यहोवा की सी चाल चलने लगा; इसके अलावा उसने यहूदा से ऊंचे स्थानों और अखाड़ों को ले लिया।

7 और अपके राज्य के तीसरे वर्ष में उसने अपके हाकिमोंके पास बेन्हेल, ओबद्याह, जकर्याह, नतनेल, और मीकायाह को यहूदा के नगरोंमें उपदेश देने को भेज दिया।

8 और उसके संग उस ने लेवियोंको भेजा, अर्यात् शमायाह, नतन्याह, जबद्याह, असाहेल, शमीरामोत, यहोनातान, अदोनिय्याह, तोबिय्याह, और तोबदोनिय्याह, और लेवीय; और उनके संग एलीशामा और यहोराम याजक थे।

9 और उन्होंने यहूदा में शिक्षा दी, और यहोवा की व्यवस्था की पुस्तक अपके पास रखी, और यहूदा के सब नगरोंमें घूमकर लोगोंको उपदेश दिया।

10 और यहूदा के चारोंओर के देश के सब राज्योंमें यहोवा का भय मानने लगा, यहां तक कि उन्होंने यहोशापात से कोई युद्ध न किया।

11 फिर कुछ पलिश्ती यहोशापात को भेंट, और भेंट चान्दी ले आए; और अरब के लोग उसके पास सात हजार सात सौ मेढ़े, और सात हजार सात सौ बकरे ले आए।

12 और यहोशापात बहुत अधिक बढ़ गया; और उस ने यहूदा के गढ़ों, और भण्डार के नगरोंको बनाया।

13 और यहूदा के नगरोंमें उसका बहुत व्यापार था; और यरूशलेम में योद्धा और शूरवीर थे।

14 और उनकी गिनती अपके पितरोंके घरानोंके अनुसार ये हैं; यहूदा के हज़ारों सेनापति; अदना प्रधान, और उसके संग तीन लाख शूरवीर थे।

15 और उसके पास प्रधान यहोहानान या, और उसके संग दो लाख साठ हजार थे।

16 और उसके आगे जिक्री का पुत्र अमस्याह था, जिस ने अपके आप को यहोवा के लिथे अपके लिथे बलिदान किया; और उसके साथ दो लाख शूरवीर थे।

17 और बिन्यामीन से; एल्यादा शूरवीर था, और उसके संग धनुष और ढाल वाले दो लाख पुरुष थे।

18 और उसके पास यहोजाबाद या, और उसके संग एक लाख चौरासी हजार युद्ध के लिथे तैयार हुए थे।

19 वे ही राजा की बाट जोहते थे, सिवाय उन को जिन्हें राजा ने सारे यहूदा में गढ़वाले नगरोंमें डाल दिया।


अध्याय 18

यहोशापात गिलाद के रामोत पर अहाब के साथ मिला, और अहाब वहीं मारा गया।

1 और यहोशापात के पास धन और प्रतिष्ठा बहुत थी, और वह अहाब के साथ मेलजोल रखता था।

2 और कुछ वर्षों के बाद वह अहाब के पास शोमरोन को गया। और अहाब ने अपक्की और अपक्की अपक्की प्रजा के लिथे बहुत भेड़-बकरियां और गाय-बैल बलि किए, और उसको अपने संग गिलाद के रामोत पर चढ़ने को समझा।

3 तब इस्राएल के राजा अहाब ने यहूदा के राजा यहोशापात से कहा, क्या तू मेरे संग गिलाद के रामोत को जाएगा? उस ने उस को उत्तर दिया, कि जैसा तू है वैसा ही मैं हूं, और मेरी प्रजा तेरी प्रजा के समान है; और हम युद्ध में तेरे संग रहेंगे।

4 तब यहोशापात ने इस्राएल के राजा से कहा, आज यहोवा के वचन के अनुसार पूछ, मैं तुझ से बिनती करता हूं।

5 इसलिथे इस्राएल के राजा ने भविष्यद्वक्ताओंके संग चार सौ पुरूष इकट्ठे करके उन से कहा, क्या हम गिलाद के रामोत पर युद्ध करने को जाएं, वा मैं धीरज धरूं? उन्होंने कहा, चढ़ो; क्योंकि परमेश्वर उसे राजा के हाथ में कर देगा।

6 परन्तु यहोशापात ने कहा, क्या वे यहां यहोवा का भविष्यद्वक्ता नहीं, कि हम उस से पूछें?

7 तब इस्राएल के राजा ने यहोशापात से कहा, एक पुरूष और है, जिस के द्वारा हम यहोवा से पूछ सकते हैं; लेकिन मैं उससे नफरत करता हूँ; क्‍योंकि उस ने मुझ से कभी भला नहीं, परन्‍तु सदा बुरा ही भविष्यद्वाणी की; वही इम्ला का पुत्र मीकायाह है। और यहोशापात ने कहा, राजा ऐसा न कहे।

8 तब इस्राएल के राजा ने अपके हाकिमोंमें से एक को बुलवाकर कहा, यिम्ला के पुत्र मीकायाह को फुर्ती से ले आ।

9 और इस्राएल का राजा और यहूदा का राजा यहोशापात अपके अपके अपके वस्त्र पहिने हुए अपके अपके सिंहासन पर विराजमान होकर शोमरोन के फाटक के द्वार पर एक सुनसान स्थान पर बैठे; और सब भविष्यद्वक्ता उनके साम्हने नबूवत करने लगे।

10 और कनाना के पुत्र सिदकिय्याह ने उसके लिये लोहे के सींग बनवाए थे, और कहा, यहोवा योंकहता है, कि इन से तू अराम को तब तक भगाना जब तक वे नाश न हो जाएं।

11 और सब भविष्यद्वक्ताओं ने यों ही भविष्यद्वाणी की, और कहा, गिलाद के रामोत को जा, और उन्नति कर; क्योंकि यहोवा उसे राजा के हाथ में कर देगा।

12 और वह दूत जो मीकायाह को बुलाने को गया, उस ने उस से कहा, सुन, भविष्यद्वक्ताओं की बातें एक ही बार में राजा को अच्छी लगती हैं; इसलिये तेरा वचन, मैं तुझ से बिनती करता हूं, उन में से एक के समान हो, और अच्छा बोल।

13 मीकायाह ने कहा, यहोवा के जीवन की शपथ, जो मेरा परमेश्वर योंकहता है, वही मैं कहूंगा।

14 और जब वह राजा के पास पहुंचा, तब राजा ने उस से कहा, हे मीकायाह, क्या हम गिलाद के रामोत पर युद्ध करने को जाएं, वा मैं धीरज धरे रहूं? और उस ने कहा, चढ़, और समृद्ध हो, और वे तेरे वश में कर दिए जाएंगे।

15 तब राजा ने उस से कहा, मैं तुझे कितनी बार शाप दूंगा, कि तू यहोवा के नाम से मुझ से सच के सिवा कुछ न कहे?

16 फिर उस ने कहा, मैं ने सब इस्राएलियोंको उन भेड़ोंकी नाईं जिनका कोई चरवाहा नहीं, पहाड़ोंपर तित्तर बित्तर हुआ देखा; और यहोवा ने कहा, इनका कोई स्वामी नहीं; इसलिये वे सब कुशल से अपके घर को लौट जाएं।

17 तब इस्राएल के राजा ने यहोशापात से कहा, क्या मैं ने तुझ से न कहा था, कि वह मेरे लिथे भला नहीं परन्तु बुराई की भविष्यद्वाणी करेगा?

18 उस ने फिर कहा, इसलिथे यहोवा का वचन सुनो; मैं ने यहोवा को अपने सिंहासन पर विराजमान देखा, और स्वर्ग की सारी सेना को उसकी दाहिनी ओर और उसकी बाईं ओर खड़ा देखा।

19 और यहोवा ने कहा, इस्राएल के राजा अहाब को कौन बहकाएगा, कि वह गिलाद के रामोत में चढ़ाई करके गिर जाए? और एक ने इस रीति के बाद कहा, और कोई उस रीति के बाद कह रहा था।

20 तब एक झूठ बोलनेवाली आत्मा निकलकर उनके साम्हने खड़ी हुई, और कहा, मैं उसे फुसलाऊंगा। और यहोवा ने उस से कहा, कहां से?

21 उस ने कहा, मैं निकलूंगा, और अपके सब भविष्यद्वक्ताओंके मुंह में झूठ बोलने वाली आत्मा ठहरूंगा। और यहोवा ने कहा, तू उसे बहकाएगा, और तू प्रबल भी होगा; बाहर जाओ, और ऐसा ही करो; क्योंकि इन सब ने मेरे विरुद्ध पाप किया है।

22 इसलिथे अब देखो, यहोवा ने तेरे इन भविष्यद्वक्ताओंके मुंह में एक झूठी आत्मा पाई है, और यहोवा ने तेरे विरुद्ध बुरा कहा है।

23 तब कनाना के पुत्र सिदकिय्याह ने निकट जाकर मीकायाह के गाल पर ऐसा मारा, कि यहोवा का आत्मा तुझ से बातें करने को मुझ से किस ओर चला गया?

24 मीकायाह ने कहा, सुन, जिस दिन तू छिपने के लिथे भीतरी कोठरी में जाएगा उस दिन देखेगा।

25 तब इस्राएल के राजा ने कहा, मीकायाह को लेकर नगर के हाकिम आमोन और राजा के पुत्र योआश के पास ले जा;

26 तब राजा योंकहता है, कि इस मनुष्य को बन्दीगृह में डाल, और जब तक मैं कुशल से न लौट आऊं, तब तक उसे दु:ख की रोटी और दु:ख का जल खिलाऊं।

27 मीकायाह ने कहा, यदि तू निश्चय कुशल से लौट जाए, तो यहोवा ने मेरे द्वारा कुछ नहीं कहा है। उस ने कहा, हे सब लोगों, सुनो।

28 तब इस्राएल का राजा और यहूदा का राजा यहोशापात गिलाद के रामोत को गया।

29 तब इस्राएल के राजा ने यहोशापात से कहा, मैं भेष बदलकर युद्ध में जाऊंगा; परन्तु तू अपके वस्त्र पहिने। तब इस्राएल के राजा ने भेष बदला; और वे युद्ध में गए।

30 अराम के राजा ने रथोंके प्रधानोंको जो अपके संगी थे यह आज्ञा दी या, कि छोटे वा बड़े से न लड़ो, केवल इस्राएल के राजा से ही लड़ो।

31 जब रथोंके प्रधानोंने यहोशापात को देखा, तब कहने लगे, कि यह इस्राएल का राजा है। इसलिथे उन्होंने लड़ने को उसके चारोंओर घेर लिया; परन्तु यहोशापात ने दोहाई दी, और यहोवा ने उसकी सहायता की; और परमेश्वर ने उन्हें अपने पास से जाने को उभारा।

32 ऐसा हुआ कि जब रथोंके प्रधानोंने जान लिया कि यह इस्राएल का राजा नहीं है, तब वे उसका पीछा करने से फिर लौट गए।

33 और एक मनुष्य ने धनुष बान्धकर इस्त्राएल के राजा को फीते के जोड़ के बीच में मारा; इसलिथे उस ने अपके रय से कहा, अपके हाथ फेर, कि तू मुझे सेना में से निकाल ले; क्योंकि मैं घायल हूँ।

34 और उस दिन लड़ाई और बढ़ गई; तौभी इस्राएल का राजा अपके रय पर अरामियोंके साम्हने सांफ तक खड़ा रहा; और सूर्य के अस्त होते ही वह मर गया।


अध्याय 19

न्यायियों, याजकों और लेवियों को यहोशापात ने येहू द्वारा ताड़ना दी।

1 और यहूदा का राजा यहोशापात कुशल से अपके घर यरूशलेम को लौट गया।

2 और दशीं हनानी का पुत्र येहू उस से भेंट करने को निकला, और राजा यहोशापात से कहने लगा, क्या तुझे दुष्टोंकी सहायता करनी चाहिए, और यहोवा के बैरियोंसे प्रेम रखना चाहिए? इस कारण यहोवा के साम्हने से तुझ पर कोप भड़क उठा है।

3 तौभी तुझ में अच्छी वस्तुएं पाई जाती हैं, जिस से तू ने अशेरा को देश में से निकाल लिया, और परमेश्वर को ढूंढ़ने के लिथे अपना मन तैयार किया है।

4 और यहोशापात यरूशलेम में रहने लगा; और वह फिर उन लोगों के बीच से बेर्शेबा से एप्रैम के पहाड़ को निकल गया, और उनको उनके पितरोंके परमेश्वर यहोवा के पास लौटा ले आया।

5 और उस ने यहूदा के सब गढ़वाले नगरोंके नगरोंके सब नगरोंमें देश में न्यायियोंको ठहराया,

6 और न्यायियों से कहा, जो कुछ तुम करते हो उसकी चौकसी करना; क्योंकि तुम मनुष्य के लिये नहीं, परन्तु यहोवा के लिये न्याय करते हो, जो न्याय के समय तुम्हारे साथ है।

7 इसलिथे अब यहोवा का भय तुम पर बना रहे; ध्यान रखना और करना; क्योंकि न तो हमारे परमेश्वर यहोवा में अधर्म है, और न किसी का आदर करना, और न भेंट लेना।

8 फिर यहोशापात ने लेवियों, और याजकों, और इस्राएल के पितरोंके मुख्य प्रधानोंमें से यहोवा के न्याय के लिथे, और जब वे यरूशलेम को लौट गए, तब विवाद के लिथे यरूशलेम में ठहरा दिया।

9 और उस ने उनको आज्ञा दी, कि तुम यहोवा का भय मानकर सच्चाई और सिद्ध मन से ऐसा करना।

10 और अपके नगरोंमें रहनेवाले अपके भाइयोंमें से जो लोहू और लोहू, व्‍यवस्‍था और आज्ञा, विधियोंऔर नियमोंके बीच में जो कुछ तुम्हारे पास आए, उन को सावधान करना, कि वे यहोवा का अपराध न करें, और ऐसा ही क्रोध उन पर भड़के तुम और तुम्हारे भाइयों पर; यह करो, और तुम अतिचार न करना।

11 और देखो, यहोवा की सब बातोंमें मुख्य याजक अमर्याह तुम्हारे ऊपर है; और इश्माएल का पुत्र जबद्याह, यहूदा के घराने का हाकिम, राजा के सब कामोंके लिथे; और लेवीय भी तेरे साम्हने हाकिम होंगे। साहसपूर्वक व्यवहार करो, और यहोवा भलाई के साथ रहेगा।


अध्याय 20

यहोशापात एक उपवास की घोषणा करता है - उसकी प्रार्थना - यहजीएल यहोशापात के शासनकाल की भविष्यवाणी।

1 इसके बाद ऐसा हुआ, कि मोआबियोंऔर अम्मोनियोंऔर उनके साथ अम्मोनियोंको छोड़कर अन्य लोग यहोशापात से लड़ने को आए।

2 तब कितने लोग आकर यहोशापात से कहने लगे, कि अराम की इस पार समुद्र के पार से एक बड़ी भीड़ तुझ पर चढ़ाई करेगी; और देखो, वे हसासोन-तामार में हैं, जो एनगदी कहलाता है।

3 तब यहोशापात डर गया, और यहोवा को ढूंढ़ने लगा, और सारे यहूदा में उपवास का प्रचार किया।

4 तब यहूदा यहोवा से सहायता मांगने को इकट्ठे हुए; वे यहूदा के सब नगरोंसे निकलकर यहोवा को ढूंढ़ने आए।

5 और यहोशापात यहूदा और यरूशलेम की मण्डली में यहोवा के भवन में नए आंगन के साम्हने खड़ा रहा,

6 और कहा, हे हमारे पितरोंके परमेश्वर यहोवा, हे स्वर्ग में रहने वाले परमेश्वर; और अन्यजातियों के सभी राज्यों पर शासन करता है; और तेरे हाथ में ऐसा सामर्थ और पराक्रम है, कि कोई तेरा साम्हने नहीं कर सकता;

7 तू ने हमारे परमेश्वर ने इस देश के निवासियोंको अपक्की प्रजा इस्राएल के साम्हने से निकाल दिया, और अपके मित्र इब्राहीम के वंश को सदा के लिथे दे दिया।

8 और वे उसमें रहने लगे, और उस में तेरे नाम के लिथे एक पवित्रस्यान बनाया, और कहा,

9 जब तलवार, न्याय, वा मरी, वा अकाल की नाईं हम पर कोई विपत्ति आए, तब हम इस भवन के साम्हने और तेरे साम्हने खड़े हों, (क्योंकि तेरा नाम इस भवन में है) और अपके क्लेश में तेरी दोहाई देते हैं, तब तू सुनेगा और सहायता करेगा।

10 और अब देखो, अम्मोनियों, और मोआबियों, और सेईर के पहाड़ को, जिन पर तू ने इस्राएलियों को मिस्र देश से निकलने के समय चढ़ाई न करने दिया, परन्तु वे उनके पास से फिर गए, और उनका सत्यानाश न किया;

11 देखो, वे हमें प्रतिफल नहीं देते, वरन अपनी उस निज भूमि से जो तू ने हमें विरासत में दी है, निकालने के लिथे आए हैं।

12 हे हमारे परमेश्वर, क्या तू उनका न्याय नहीं करेगा? क्योंकि इस बड़ी मण्डली के विरुद्ध जो हम पर चढ़ाई करती है, हमारा कोई बल नहीं; हम नहीं जानते कि क्या करना है; परन्तु हमारी निगाहें तुझ पर टिकी हैं।

13 और सब यहूदी अपके बालबच्चों, पत्नियों, और बालकों समेत यहोवा के साम्हने खड़े रहे।

14 तब यहजीएल, जो जकर्याह का पुत्र था, यह बनायाह का पुत्र, यह बनायाह का पुत्र, यह यीएल का पुत्र, यह मत्तन्याह का पुत्र, और आसाप के वंश में से एक लेवीय था, यहोवा का आत्मा मण्डली के बीच में आया;

15 और उस ने कहा, हे सब यहूदा, हे यरूशलेम के निवासियों, और हे राजा यहोशापात, सुनो, यहोवा तुम से योंकहता है, इस बड़ी भीड़ के कारण मत डरो, और न घबराओ, क्योंकि लड़ाई तुम्हारी नहीं, परन्तु परमेश्वर की है। .

16 कल तुम उनका साम्हना करना; देखो, वे सिज की चट्टान के पास चढ़ते हैं; और तुम उन्हें नाले के छोर पर यरूएल के जंगल के साम्हने पाओगे।

17 तुम आज के दिन लड़ने को न जाना; हे यहूदा और यरूशलेम, अपने आप को खड़ा करो, और अपने साथ यहोवा के उद्धार को देखो; डरो मत, और न ही निराश हो; कल उनके विरुद्ध निकल जाओ; क्योंकि यहोवा तुम्हारे साथ रहेगा।

18 और यहोशापात ने अपना सिर भूमि की ओर मुंह करके झुकाया; और सब यहूदा और यरूशलेम के निवासी यहोवा को दण्डवत करते हुए यहोवा के साम्हने गिर पड़े।

19 और कहातियोंमें से लेवीय, और कोरहियोंमें से, ऊंचे शब्द से इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की स्तुति करने को उठ खड़े हुए।

20 बिहान को वे सबेरे उठकर तकोआ के जंगल में निकल गए; और जब वे आगे बढ़ रहे थे, तब यहोशापात खड़ा हुआ, और कहने लगा, हे यहूदा, हे यरूशलेम के निवासियों, मेरी सुन; अपने परमेश्वर यहोवा पर विश्वास रखो, तो तुम स्थिर हो जाओगे; उसके नबियों पर विश्वास करो, तो तुम समृद्ध हो जाओगे।

21 और जब उस ने प्रजा से सम्मति की, तब यहोवा के लिथे गवैयोंको नियुक्त किया, और जब वे सेना के साम्हने निकलकर यह कहने लगे, कि यहोवा की स्तुति करो, पवित्रता की शोभा की स्तुति करो; क्योंकि उसकी करूणा सदा की है।

22 और जब वे गीत गाकर स्तुति करने लगे, तब यहोवा ने अम्मोनियों, मोआबियोंऔर सेईर पर्वत पर जो यहूदा पर चढ़ाई की या, उन पर घात लगाए; और उन्हें पीटा गया।

23 क्योंकि अम्मोनियोंऔर मोआबियोंने सेईर पहाड़ के निवासियोंके साम्हने चढ़ाई की, कि उनको पूरी रीति से घात करे, और नाश करे; और जब वे सेईर के निवासियोंको नाश कर चुके, तब सब ने एक दूसरे को नाश करने में सहायता की।

24 और जब यहूदा जंगल में प्रहरीदुर्ग की ओर आया, तब उन्होंने भीड़ पर दृष्टि की, और क्या देखा, कि वे लोथें भूमि पर गिर पड़ी हैं, और कोई न बचा।

25 और जब यहोशापात और उसकी प्रजा अपके लूट को लेने को आई, तब उन्हें लोथों समेत बहुत सारा धन, और मणियां, जो उन्होंने अपके लिथे उतार दीं, उस से अधिक जो वे ले जा सकते थे; और वे लूट को बटोरने में तीन दिन तक रहे, इतना ही हो गया।

26 और चौथे दिन वे बराका नाम तराई में इकट्ठे हुए; वहाँ उन्होंने यहोवा को आशीर्वाद दिया; इस कारण उसी स्थान का नाम बराका की तराई, आज तक पड़ा है।

27 तब वे यहूदा और यरूशलेम के सब पुरूष, और उनके आगे आगे यहोशापात, और आनन्द के साथ यरूशलेम को लौट गए; क्‍योंकि यहोवा ने उन्‍हें उनके शत्रुओं के कारण आनन्‍दित किया था।

28 और वे यहोवा के भवन के लिथे स्तुतिगान, और वीणा, और तुरहियां लिये हुए यरूशलेम को आए।

29 और उन देशों के सब राज्योंके मन में परमेश्वर का भय छा गया, जब उन्होंने सुना कि यहोवा ने इस्राएल के शत्रुओं से युद्ध किया है।

30 तब यहोशापात का राज्य शांत रहा; क्योंकि उसके परमेश्वर ने उसे चारोंओर विश्राम दिया है।

31 और यहोशापात यहूदा पर राज्य करने लगा; जब वह राज्य करने लगा, तब वह पैंतीस वर्ष का या, और पच्चीस वर्ष तक यरूशलेम में राज्य करता रहा। और उसकी माता का नाम अजूबा था, जो शिल्ही की बेटी थी।

32 और वह अपके पिता आसा की सी चाल चला, और जो यहोवा की दृष्टि में ठीक है वही करते हुए उस से न हटे।

33 तौभी ऊँचे स्थान दूर न किए गए; क्‍योंकि अब तक प्रजा ने अपके पितरोंके परमेश्वर के लिथे अपना मन तैयार न किया था।

34 और पहिले और अन्त में यहोशापात के और काम क्या हुए, वे हनानी के पुत्र येहू की उस पुस्तक में लिखे हैं, जिसका वर्णन इस्राएल के राजाओं की पुस्तक में है।

35 और इसके बाद यहूदा का राजा यहोशापात इस्राएल के राजा अहज्याह से मिला, जिसने बहुत दुष्टता की थी;

36 और वह उसके साथ हो गया, कि तर्शीश को जाने के लिथे जहाज बनवाए; और उन्होंने एस्योनगेबेर में जहाज बनाए।

37 तब मारेशा के दोदावा के पुत्र एलीएजेर ने यहोशापात के विरुद्ध यह भविष्यद्वाणी की, कि तू ने अहज्याह से मेल किया है, यहोवा ने तेरे कामोंको तोड़ डाला है। और जहाज टूट गए, कि वे तर्शीश को नहीं जा सके।


अध्याय 21

यहोराम का दुष्ट शासन - एलिय्याह की भविष्यवाणी - यहोराम की कुख्यात मृत्यु।

1 यहोशापात अपके पुरखाओं के संग सो गया, और उसको उसके पुरखाओं के संग दाऊदपुर में मिट्टी दी गई। और उसका पुत्र यहोराम उसके स्थान पर राज्य करने लगा।

2 और उसके यहोशापात के पुत्र, अजर्याह, यहीएल, जकर्याह, अजर्याह, मीकाएल और शपत्याह थे; ये सब इस्राएल के राजा यहोशापात के पुत्र थे।

3 और उनके पिता ने उन्हें चान्दी, सोना, और बहुमूल्य वस्तुएं दीं, और यहूदा में गढ़वाले नगर भी दिए; परन्तु राज्य ने यहोराम को दे दिया; क्योंकि वह जेठा था।

4 जब यहोराम अपके पिता के राज्य में जिला उठा, तब उस ने बलवन्त होकर अपके सब भाइयोंको, और इस्राएल के हाकिमोंमें से अपके सब भाइयोंको भी मार डाला।

5 जब यहोराम राज्य करने लगा, तब वह बत्तीस वर्ष का या, और आठ वर्ष तक यरूशलेम में राज्य करता रहा।

6 और वह अहाब के घराने की नाईं इस्राएल के राजाओं की सी चाल चला; क्‍योंकि उसके अहाब की बेटी से पत्‍नी हुई; और उस ने वह किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा था।

7 तौभी यहोवा दाऊद के घराने को नाश न करेगा, उस वाचा के कारण जो उस ने दाऊद से बान्धी या, और उस ने उसे और उसके पुत्रोंको सदा के लिये ज्योति देने का वचन दिया था।

8 उसके दिनोंमें एदोमियोंने यहूदा के वश में से बलवा किया, और अपके आप को राजा बना लिया।

9 तब यहोराम अपके हाकिमोंऔर अपके सब रथों समेत अपके संग निकला; और वह रात को उठा, और उन एदोमियोंको जो उसे घेरे हुए थे, और रथोंके प्रधानोंको भी मारा।

10 इस प्रकार एदोमी यहूदा के हाथ से आज तक विद्रोह करते रहे। उसी समय लिब्ना ने भी उसके हाथ से बलवा किया; क्योंकि उस ने अपके पितरोंके परमेश्वर यहोवा को त्याग दिया या।

11 फिर उस ने यहूदा के पहाड़ोंमें ऊंचे स्थान बनाए, और यरूशलेम के निवासियोंसे व्यभिचार कराया, और यहूदा को उस में विवश किया।

12 और एलिय्याह भविष्यद्वक्ता की ओर से उसके पास यह लिखा हुआ, कि तेरे पिता दाऊद का परमेश्वर यहोवा यों कहता है, कि तू न तो अपके पिता यहोशापात की सी चला, और न यहूदा के राजा आसा की सी चाल चली।

13 परन्तु इस्राएल के राजाओं की सी चाल चली, और यहूदा और यरूशलेम के निवासियोंको अहाब के घराने की व्यभिचार की नाईं व्यभिचार कराया, और अपके पिता के घराने के भाइयोंको मार डाला, खुद से बेहतर;

14 देख, यहोवा तेरी प्रजा, और तेरे लड़केबालों, और तेरी पत्नियों, और तेरी सारी सम्पत्ति पर बड़ी विपत्ति डालेगा।

15 और जब तक उस रोग के कारण दिन-ब-दिन तेरी आंतें न निकल जाएं, तब तक तुझे पेट के रोग से बड़ा रोग होगा।

16 फिर यहोवा ने पलिश्तियोंऔर कूशियोंके पास रहनेवाले अरबियोंके आत्मा यहोराम पर चढ़ाई की;

17 और वे यहूदा में चढ़ गए, और उस में सेंध लगाकर जो कुछ राजभवन में मिला, उसे और उसके पुत्रों, और पत्नियोंको भी ले गए; यहाँ तक कि उसके पुत्रों में सबसे छोटा यहोआहाज को छोड़ कर उसका कोई पुत्र न बचा।

18 और इस सब के बाद यहोवा ने उसके पेट में एक असाध्य रोग से मारा।

19 और ऐसा हुआ, कि समय बीतने पर, दो वर्ष के बीतने के बाद, उसकी बीमारी के कारण उसके पेट बाहर निकल गए; इसलिए वह गंभीर बीमारियों से मर गया। और उसकी प्रजा ने उसके पुरखाओं के जलने के समान उसके लिये आग न जलाई।

20 जब वह राज्य करने लगा, तब बत्तीस वर्ष का या, और आठ वर्ष तक यरूशलेम में राज्य करता रहा, और बिन चाहा चला गया। तौभी उन्होंने उसे दाऊदपुर में मिट्टी दी, परन्तु राजाओं की कब्रों में नहीं।


अध्याय 22

अहज्याह येहू द्वारा मारा गया - अतल्याह राज्य को हड़प लेता है।

1 और यरूशलेम के निवासियोंने उसके स्थान पर उसके छोटे पुत्र अहज्याह को राजा बनाया; क्‍योंकि जो दल अरबियोंके संग छावनी में आया या, उस ने सब ज्येष्ठोंको घात किया था। तब यहूदा के राजा यहोराम का पुत्र अहज्याह राज्य करने लगा।

2 जब अहज्याह राज्य करने लगा, तब वह बाईस वर्ष का या, और यरूशलेम में एक वर्ष तक राज्य करता रहा। उसकी माता का नाम भी ओम्री की पुत्री अतल्याह था।

3 वह भी अहाब के घराने की सी चाल चला; क्योंकि उसकी माता दुष्टता करने की उसकी युक्ति करने वाली थी।

4 इसलिथे उस ने यहोवा की दृष्टि में अहाब के घराने के समान बुरा किया; क्‍योंकि उसके पिता की मृत्‍यु के पश्‍चात् उसके विनाश तक वे उसके सलाहकार थे।

5 और वह उनकी सम्मति के अनुसार चला, और इस्राएल के राजा अहाब के पुत्र यहोराम के संग गिलाद के रामोत में अराम के राजा हजेल से लड़ने को गया; और अरामियों ने योराम को मारा।

6 और जब वह अराम के राजा हजाएल से लड़कर रामा में उस को हुए घावों के कारण यिज्रैल में चंगा हो गया, तब वह ठीक हो गया। और यहूदा के राजा यहोराम का पुत्र अजर्याह बीमार होने के कारण अहाब के पुत्र यहोराम से मिलने यिज्रेल में गया।

7 और अहज्याह का नाश योराम के पास आकर परमेश्वर की ओर से हुआ; क्योंकि जब वह आया, तब यहोराम के संग निमशी के पुत्र येहू पर चढ़ाई करने को गया, जिस का अभिषेक यहोवा ने अहाब के घराने को नाश करने के लिथे किया या।

8 और ऐसा हुआ, कि जब येहू अहाब के घराने का न्याय कर रहा या, और यहूदा के हाकिमोंऔर अहज्याह के भाइयोंके पुत्रोंको जो अहज्याह की सेवा टहल करते थे, पाया, तब उस ने उन्हें मार डाला।

9 और उस ने अहज्याह को ढूंढ़ा; और उन्होंने उसे पकड़ लिया, (क्योंकि वह शोमरोन में छिपा हुआ था) और उसे येहू के पास ले आए; और जब उन्होंने उसे घात किया, तब उसको मिट्टी दी गई; क्योंकि उन्होंने कहा, वह यहोशापात का पुत्र है, जिस ने अपने सारे मन से यहोवा को ढूंढ़ा। इसलिए अहज्याह के घराने को राज्य को स्थिर रखने का अधिकार नहीं था।

10 परन्तु जब अहज्याह की माता अतल्याह ने देखा, कि उसका पुत्र मर गया है, तब उस ने उठकर यहूदा के घराने के राजघराने के सब वंश को नाश किया।

11 परन्तु राजा की बेटी यहोशबात ने अहज्याह के पुत्र योआश को ले जाकर मारे गए राजकुमारोंमें से चुरा कर, और उस की धाई समेत खाट में रख दिया। तब यहोआदा याजक की पत्नी यहोराम राजा की बेटी यहोशबात (क्योंकि वह अहज्याह की बहिन थी) ने उसको अतल्याह से ऐसा छिपा रखा, कि उस ने उसे मार डाला न।

12 और वह छ: वर्ष तक उनके संग परमेश्वर के भवन में छिपा रहा; और अतल्याह देश पर राज्य करने लगा।


अध्याय 23

यहोयादा योआश को राजा बनाता है, और परमेश्वर की उपासना को पुनर्स्थापित करता है।   

1 और सातवें वर्ष में यहोयादा ने बलवन्त होकर शतपतियोंको ले लिया, अर्थात् यरोहाम के पुत्र अजर्याह, यहोहानान के पुत्र इश्माएल, ओबेद के पुत्र अजर्याह, अदाया के पुत्र मासेयाह और जिक्री के पुत्र एलीशापात को। , उसके साथ वाचा में।

2 और उन्होंने यहूदा में घूमकर यहूदा के सब नगरोंमें से लेवियोंको, और इस्राएल के पितरोंके प्रधानोंके मुख्य पुरूषोंको इकट्ठा किया, और वे यरूशलेम को आए।

3 और सारी मण्डली ने परमेश्वर के भवन में राजा के साथ वाचा बान्धी। और उस ने उन से कहा, देखो, राजा का पुत्र राज्य करेगा, जैसा यहोवा ने दाऊद की सन्तान के विषय में कहा है।

4 जो काम तुम करना वह यह है; याजकों और लेवियों में से तुम में से जो एक तिहाई सब्त के दिन प्रवेश करे, वे द्वार द्वारपाल हों;

5 और एक तिहाई भाग राजभवन में हो; और एक तिहाई भाग नेव के फाटक पर; और सब लोग यहोवा के भवन के आंगनोंमें हों।

6 परन्तु याजकोंऔर लेवियोंके सेवकोंको छोड़ कोई यहोवा के भवन में न आने पाए; वे भीतर जाएं, क्योंकि वे पवित्र हैं; परन्तु सब लोग यहोवा की चौकसी करते रहें।

7 तब लेवीय अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके शय्या अिधय अपके अपके अपके राजा को चारों ओर से घेर ले; और जो कोई घर में आए वह मार डाला जाए; परन्तु जब वह भीतर आए, और जब वह बाहर जाए, तब तुम उसके साथ रहो।

8 तब लेवियोंऔर सब यहूदा लोगोंने यहोयादा याजक की आज्ञा के अनुसार किया, और सब्त के दिन आनेवाले अपके अपके जनोंको जो सब्त के दिन बाहर जाने वाले थे, उनके संग ले लिया; क्योंकि यहोयादा याजक ने मार्ग न छोड़ा।

9 फिर यहोयादा याजक ने अपके अपके हाकिमोंको शत-प्रतिशत भाले, बन्धन, और ढालें दीं, जो दाऊद राजा की या, जो परमेश्वर के भवन में रहती या।

10 और उस ने सब लोगोंको अर्यात् अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके शय्या हो, अर्यात् मन्दिर की दहिनी अलंग से लेकर मन्‍दिर की बाईं अलंग तक, और वेदी और मन्‍दिर के पास, और चारोंओर राजा के पास खड़ा किया।।

11 तब उन्होंने राजपुत्र को बाहर ले जाकर उस पर मुकुट पहिनाया, और उसकी गवाही दी, और उसे राजा बनाया। और यहोयादा और उसके पुत्रों ने उसका अभिषेक किया, और कहा, परमेश्वर राजा को बचाए।

12 जब अतल्याह ने लोगों के दौड़ने और राजा की स्तुति करने का शब्द सुना, तब वह लोगों के पास यहोवा के भवन में आई।

13 और उस ने दृष्टि की, और क्या देखा, कि राजा अपके खम्भे के पास द्वार पर खड़ा है, और हाकिम और नरसिंगा राजा के पास हैं; और उस देश के सब लोग आनन्दित हुए, और तुरहियां फूंकते थे, और गवैये भी जो बाजे बजाते थे, और स्तुति गाने की शिक्षा देते थे। तब अतल्याह ने अपने कपडे फाड़े और कहा देशद्रोह, देशद्रोह।

14 तब यहोयादा याजक ने शत-प्रतिशत सेनापतियों को जो सेना पर नियुक्त किए गए थे, बाहर ले जाकर उन से कहा, उसे पर्वतमाला में से ले आओ; और जो कोई उसके पीछे हो, वह तलवार से मारा जाए। क्योंकि याजक ने कहा, उसे यहोवा के भवन में घात न करना।

15 तब उन्होंने उस पर हाथ रखे; और जब वह राजभवन के घोड़े के फाटक के द्वार पर पहुंची, तो उन्होंने उसे वहीं मार डाला।

16 और यहोयादा ने अपके बीच, और सब लोगोंके बीच, और राजा के बीच वाचा बान्धी, कि वे यहोवा की प्रजा ठहरेंगे।

17 तब सब लोगों ने जाकर बाल के भवन को ढा दिया, और उसकी वेदियोंऔर उसकी मूरतोंको तोड़ डाला, और बाल के याजक मत्तन को वेदियोंके साम्हने घात किया।

18 फिर यहोयादा ने यहोवा के भवन के कामों को उन लेवियों याजकों के हाथ से ठहराया जिन्हें दाऊद ने यहोवा के भवन में बाँट दिया था, कि वे यहोवा के होमबलि चढ़ाएँ, जैसा कि मूसा की व्यवस्था में लिखा है। , आनन्द और गायन के साथ, जैसा कि दाऊद ने ठहराया था।

19 और उस ने द्वारपालोंको यहोवा के भवन के फाटकोंके साम्हने खड़ा किया, कि जो कोई किसी वस्तु में अशुद्ध न हो, वह भीतर प्रवेश न करे।

20 और उस ने शतपतियों, और रईसों, और प्रजा के हाकिमों, और देश के सब लोगोंको लेकर राजा को यहोवा के भवन में से उतार दिया; और ऊंचे फाटक से होकर राजभवन में आए, और राजा को राज्य की गद्दी पर बिठा दिया।

21 और उस देश के सब लोग आनन्दित हुए; और नगर में सन्नाटा छा गया, इसके बाद उन्होंने अतल्याह को तलवार से घात किया।


अध्याय 24

योआश मन्दिर की मरम्मत करता है; मूर्तिपूजा में गिरना, जकर्याह को मार डालना।

1 जब योआश राज्य करने लगा, तब वह सात वर्ष का या, और यरूशलेम में चालीस वर्ष तक राज्य करता रहा। उसकी माता का नाम भी बेर्शेबा की सीब्याह था।

2 और योआश ने वही किया जो यहोवा की दृष्टि में यहोयादा याजक के जीवन भर ठीक रहा।

3 और यहोयादा ने अपके दो स्त्रियां ब्याह लीं; और उसके और भी बेटे बेटियां उत्पन्न हुई।

4 इसके बाद योआश ने यहोवा के भवन की मरम्मत करने का मन बनाया।

5 और उस ने याजक और लेवीवंशियोंको इकट्ठा करके उन से कहा, यहूदा के नगरोंमें जाकर सब इस्राएलियोंको प्रति वर्ष अपके परमेश्वर के भवन की मरम्मत करने के लिथे धन इकट्ठा करो, और देखो, कि तुम मामले में शीघ्रता करते हो। तौभी लेवियोंने फुर्ती न की।

6 तब राजा ने यहोयादा प्रधान को बुलवाकर उस से कहा, यहोवा के दास मूसा की इस आज्ञा के अनुसार तू ने लेवियोंसे यहूदा से और यरूशलेम से चन्दा लेने की आज्ञा क्योंनहीं दी? इस्राएल की मण्डली, साक्षी के निवास के लिथे?

7 क्योंकि अतल्याह की सन्तान उस दुष्ट स्त्री ने परमेश्वर के भवन को ढा दिया था; और यहोवा के भवन की सब समर्पित वस्तुएं बालीम को दीं।

8 और राजा की आज्ञा से उन्होंने एक सन्दूक बनाया, और उसे यहोवा के भवन के फाटक के बाहर लगा दिया।

9 और उन्होंने यहूदा और यरूशलेम के द्वारा यह प्रचार किया, कि जो संग्रह परमेश्वर के दास मूसा ने जंगल में इस्राएल पर रखा है, वह यहोवा के पास ले आए।

10 और सब हाकिमोंऔर सब प्रजा के लोगोंने आनन्द किया, और भीतर ले जाकर जब तक उनका अन्त न हो गया, तब तक वे उनके सन्दूक में डाल दिए।

11 और ऐसा हुआ, कि लेवियोंके द्वारा जिस समय वह सन्दूक राजभवन के पास लाया गया, और जब उन्होंने देखा, कि बहुत रुपया है, तब राजा के शास्त्री और महायाजक के हाकिम ने आकर उस संदूक को खाली किया। और उसे ले कर फिर अपने स्थान पर ले गया। वे दिन प्रतिदिन ऐसा ही करते थे, और बहुत धन इकट्ठा करते थे।

12 और राजा और यहोयादा ने यहोवा के भवन की सेवा के काम करनेवालोंको दिया, और यहोवा के भवन की मरम्मत के लिथे राजमिस्त्री और बढ़ई, और भवन की मरम्मत के लिथे लोहे और पीतल के गढ़े हुए कामगारोंको काम पर रखा या। भगवान।

13 तब काम करनेवालोंने काम किया, और उनके द्वारा काम सिद्ध हुआ, और परमेश्वर के भवन को उसकी दशा में स्थिर करके दृढ़ किया।

14 और जब वे उसे पूरा कर चुके, तब वे शेष रुपए राजा और यहोयादा के साम्हने ले आए, जो यहोवा के भवन के लिथे पात्र, और सेवा टहल करने के लिथे पात्र, और सीताफल, और चम्मच, और सोने के पात्र और चढ़ाने के लिथे किए गए या चांदी। और यहोयादा के जीवन भर वे नित्य यहोवा के भवन में होमबलि चढ़ाते रहे।

15 परन्तु यहोयादा बूढ़ा हो गया, और उसके मरने के दिन भर से भर गया; जब वह मरा तब वह एक सौ तीस वर्ष का था।

16 और उन्होंने उसको दाऊदपुर में राजाओं के बीच मिट्टी दी, क्योंकि उस ने परमेश्वर और अपके घराने दोनोंकी ओर इस्राएल का भला किया या।

17 यहोयादा के मरने के बाद यहूदा के हाकिमोंने आकर राजा को दण्डवत् किया। तब राजा ने उनकी बात मानी।

18 और वे अपके पितरोंके परमेश्वर यहोवा के भवन को छोड़कर अवनोंऔर मूरतोंकी उपासना करने लगे; और उनके इस अपराध के कारण यहूदा और यरूशलेम पर कोप भड़क उठा।

19 तौभी उस ने उनके पास भविष्यद्वक्ता भेजे, कि उन्हें यहोवा के पास फिर से लाएं; और उन्होंने उनके विरुद्ध गवाही दी; परन्तु उन्होंने कान न दिया।

20 और परमेश्वर का आत्मा यहोयादा याजक के पुत्र जकर्याह पर उतरा, जो लोगोंके ऊपर खड़ा हुआ, और उन से कहने लगा, परमेश्वर योंकहता है, कि तुम यहोवा की आज्ञाओं का उल्लंघन क्योंकरते हो, कि तुम उन्नति नहीं कर सकते? क्योंकि तुम ने यहोवा को त्याग दिया है, उसी ने तुम्हें भी छोड़ दिया है।

21 और उन्होंने उसके विरुद्ध द्रोह की गोष्ठी की, और राजा की आज्ञा के अनुसार यहोवा के भवन के आंगन में उस पर पत्यरवाह किए।

22 इस प्रकार राजा योआश ने अपके पिता यहोयादा की उस प्रीति का स्मरण न किया, जो उसके पिता ने की या, वरन उसके पुत्र को घात किया। और जब वह मर गया, तो उस ने कहा, यहोवा मुझ पर दृष्टि करके मुझ को ठहरा।

23 और वर्ष के अन्त में ऐसा हुआ कि अराम की सेना उसके विरुद्ध चढ़ाई करने लगी; और उन्होंने यहूदा और यरूशलेम में आकर प्रजा के सब हाकिमोंको लोगोंमें से सत्यानाश किया, और उनकी सारी लूट दमिश्क के राजा के पास भेज दी।

24 क्योंकि अरामियों की सेना मनुष्यों के एक छोटे दल के साथ आई, और यहोवा ने एक बहुत बड़ी सेना को उनके हाथ में कर दिया, क्योंकि उन्होंने अपने पूर्वजों के परमेश्वर यहोवा को त्याग दिया था। इस प्रकार उन्होंने योआश के विरुद्ध न्याय किया।

25 और जब वे उसके पास से चले गए, (क्योंकि उन्होंने उसे बड़ी व्याधि में छोड़ दिया था), तब उसके अपके कर्मचारियोंने यहोयादा याजक के पुत्रोंके लोहू के कारण उस से द्रोह की गोष्ठी की, और उसे उसके बिछौने पर घात किया, और वह मर गया; और उसको दाऊदपुर में मिट्टी दी गई, परन्तु उसे राजाओं की कब्रोंमें नहीं मिट्टी दी गई।

26 और ये वे हैं जिन्होंने उसके विरुद्ध द्रोह की गोष्ठी की; अम्मोनी शिमात का पुत्र जाबाद, और मोआबी शिम्रीत का पुत्र यहोजाबाद।

27 अब उसके पुत्रों, और जो भारी बोझ उस पर डाला गया है, और जो परमेश्वर के भवन के बन रहा है, उसके विषय में देखो, वे सब राजाओं की पुस्तक की कहानी में लिखे हुए हैं। और उसका पुत्र अमस्याह उसके स्थान पर राज्य करने लगा।


अध्याय 25

अमस्याह देशद्रोहियों पर न्याय करता है - एदोमियों को उखाड़ फेंकता है - अमस्याह भविष्यद्वक्ता की चितौनियों को तुच्छ जानता है - वह साजिश से मारा जाता है।

1 जब अमस्याह राज्य करने लगा, तब वह पच्चीस वर्ष का या, और यरूशलेम में उनतीस वर्ष तक राज्य करता रहा। और उसकी माता का नाम यरूशलेम की यहोअद्दान था।

2 और उसने वह किया जो यहोवा की दृष्टि में ठीक है, परन्तु सिद्ध मन से नहीं।

3 जब उसके पास राज्य दृढ़ हुआ, तब उस ने अपके उन कर्मचारियोंको मार डाला, जिन्होंने उसके पिता राजा को मार डाला था।

4 परन्तु उस ने उनके बालकोंको न घात किया, वरन वैसा ही किया, जैसा मूसा की उस पुस्तक की व्यवस्था में लिखा है, जिस में यहोवा ने यह आज्ञा दी थी, कि पुत्रोंके लिथे पिता न मरेंगे, और न पिता के लिथे पुत्र मरेंगे, वरन हर एक मनुष्य अपने ही पाप के लिए मरेगा।

5 फिर अमस्याह ने यहूदा को इकट्ठा किया, और यहूदा और बिन्यामीन के सारे देश में उनके पितरोंके घरानोंके अनुसार सहस्रपति और शतपति ठहराए; और उस ने उन्हें बीस वर्ष वा उस से अधिक अवस्या के गिन लिया, और उन्हें तीन लाख उत्तम पुरूष मिले, जो युद्ध करने के योग्य थे, जो भाले और ढाल धरने में कुशल थे।

6 और उस ने इस्राएल में से एक लाख वीर शूरवीरोंको भी एक सौ किक्कार चान्दी देकर काम पर रखा।

7 परन्तु परमेश्वर के एक जन ने उसके पास आकर कहा, हे राजा, इस्राएल की सेना तेरे संग न जाने पाए; क्योंकि यहोवा इस्राएल के संग नहीं, अर्थात एप्रैम के सब बच्चों के संग।

8 परन्तु यदि तू जाना चाहे, तो कर, लड़ाई के लिये हियाव बान्ध; परमेश्वर तुझे शत्रुओं के साम्हने गिरा देगा; क्योंकि परमेश्वर के पास सहायता करने और गिराने की शक्ति है।

9 तब अमस्याह ने परमेश्वर के भक्त से कहा, परन्तु जो सौ किक्कार मैं ने इस्राएल की सेना को दिया है, उसका हम क्या करें? और परमेश्वर के जन ने उत्तर दिया, यहोवा तुझे इससे कहीं अधिक दे सकता है।

10 तब अमस्याह ने उनको अलग कर दिया, कि जो सेना एप्रैम से उसके पास अपके घर जाने को आई या; इस कारण उनका कोप यहूदा पर बहुत भड़क उठा, और वे बड़े कोप से अपने घर लौट गए।

11 तब अमस्याह बलवन्त होकर अपक्की प्रजा को ले चला, और नमक की तराई में जाकर सेईर के दस हजार पुरूषोंको मार लिया।

12 और और दस हजार जीवित बचे हुए, यहूदा के बच्चे बन्धुआई में ले गए, और उन्हें चट्टान की चोटी पर ले गए, और चट्टान की चोटी से नीचे गिरा दिया, कि वे सब टुकड़े-टुकड़े हो गए।

13 तौभी अमस्याह ने जो सेना के सिपाहियोंको उसके संग लड़ने को न जाने के लिथे कूच करके भेज दिया, वे शोमरोन से लेकर बेथोरोन तक यहूदा के नगरोंपर गिर पड़े, और उन में से तीन हजार को मार लिया, और बहुत लूट ले ली।

14 जब अमस्याह एदोमियोंके वध से निकला, तब उस ने सेईर के वंश के देवताओं को ले जाकर अपके देवता होने के लिथे खड़ा किया, और उनके साम्हने दण्डवत् किया, और उनके लिथे धूप जलाया, उन्हें।

15 इसलिथे यहोवा का कोप अमस्याह पर भड़क उठा, और उस ने उसके पास एक भविष्यद्वक्ता भेजकर कहा, कि तू ने प्रजा के देवताओं को क्यों ढूंढा, जो अपक्की प्रजा को तेरे हाथ से न छुड़ा सके?

16 और ऐसा हुआ कि जब वह उस से बातें कर रहा या, तब राजा ने उस से कहा, क्या तू ने राजा की सम्मति के अनुसार किया है? सहन करना; तू क्यों मारा जाए? तब नबी ने मना किया, और कहा, मैं जानता हूं, कि परमेश्वर ने तुझे नाश करने की ठान ली है, क्योंकि तू ने यह किया है, और मेरी युक्ति पर ध्यान नहीं दिया।

17 तब यहूदा के राजा अमस्याह ने सम्मति लेकर इस्राएल के राजा यहोआहाज के पुत्र योआश के पास यह कहला भेजा, कि आओ, हम एक दूसरे के साम्हने देखें।

18 तब इस्राएल के राजा योआश ने यहूदा के राजा अमस्याह के पास यह कहला भेजा, कि लबानोन में उगनेवाली थीस्ल ने लबानोन के देवदार के पास कहला भेजा, कि अपक्की बेटी मेरे पुत्र को ब्याह दे; और लबानोन में एक जंगली पशु के पास से होकर गुजरा, और उस ऊँट को रौंद डाला।

19 तू कहता है, देख, तू ने एदोमियोंको मारा है; और तेरा मन तुझे घमण्ड करने के लिथे ऊपर उठाता है; अब घर पर रहो; तू क्यों अपक्की हानि के लिथे हस्तक्षेप करे, कि तू और यहूदा तेरे संग गिर पड़े?

20 परन्तु अमस्याह ने न सुनी; क्योंकि यह परमेश्वर की ओर से आया है, कि वह उन्हें उनके शत्रुओं के हाथ में कर दे, क्योंकि वे एदोम के देवताओं की खोज में थे।

21 तब इस्राएल का राजा योआश चढ़ गया; और उस ने और यहूदा के राजा अमस्याह दोनों ने यहूदा के बेतशेमेश में एक दूसरे को आमने-सामने देखा।

22 और यहूदा इस्त्राएलियोंके साम्हने बुरी दशा में पड़ा या, और वे अपके अपके अपके डेरे को भागे गए।।

23 तब इस्राएल के राजा योआश ने यहूदा के राजा अमस्याह को, जो यहोआहाज का पोता और योआश का पोता या, बेतशेमेश में ले जाकर यरूशलेम को ले गया, और यरूशलेम की शहरपनाह को एप्रैम के फाटक से कोने के फाटक तक तोड़ डाला। , चार सौ हाथ।

24 और वह सब सोना और चान्दी, और जितने पात्र परमेश्वर के भवन में ओबेदेदोम के पास मिले, और राजभवन के भण्डार, और बन्धुओं को भी लेकर शोमरोन को लौट गया।

25 और यहूदा के राजा योआश का पुत्र अमस्याह, इस्राएल के राजा यहोआहाज के पुत्र योआश की मृत्यु के पश्चात् पन्द्रह वर्ष जीवित रहा।

26 अब अमस्याह के और काम, जो पहिले और अन्त में थे, क्या वे यहूदा और इस्राएल के राजाओं की पुस्तक में नहीं लिखे हैं?

27 जब अमस्याह यहोवा के पीछे चलने से फिरा, तब उन्होंने यरूशलेम में उसके विरुद्ध षड्यन्त्र रचा; और वह लाकीश को भाग गया; परन्तु उन्होंने उसके पीछे लाकीश को भेज दिया, और उसे वहीं मार डाला।

28 और वे उसे घोड़ों पर चढ़ाकर यहूदा के नगर में उसके पुरखाओं के संग मिट्टी दीं।


अध्याय 26

उज्जिय्याह, सफल हुआ, समृद्ध हुआ - वह याजक के कार्यालय पर आक्रमण करता है, और कोढ़ से मारा जाता है।

1 तब यहूदा के सब लोगोंने उज्जिय्याह को, जो सोलह वर्ष का या, ले लिया, और उसके पिता अमस्याह की कोठरी में उसको राजा ठहराया।

2 उस ने एलोत को दृढ़ करके यहूदा को फेर दिया, उसके बाद राजा अपके पुरखाओं के संग सो गया।

3 उज्जिय्याह जब राज्य करने लगा, तब वह सोलह वर्ष का या, और यरूशलेम में बावन वर्ष तक राज्य करता रहा। उसकी माता का नाम भी यरूशलेम का यकोल्याह था।

4 और जो कुछ उसके पिता अमस्याह ने किया, उसके अनुसार उसने वही किया जो यहोवा की दृष्टि में ठीक है।

5 और वह जकर्याह के दिनोंमें परमेश्वर को ढूंढ़ता था, जो परमेश्वर के दर्शनोंकी समझ रखता था; और जब तक वह यहोवा को ढूंढ़ता रहा, तब तक परमेश्वर ने उसे सुफल किया।

6 तब उसने जाकर पलिश्तियोंसे युद्ध किया, और गत की शहरपनाह, और यब्नेह की शहरपनाह, और अशदोद की शहरपनाह को ढा दिया, और अशदोद और पलिश्तियोंके बीच नगरोंको बसाया।

7 और परमेश्वर ने पलिश्तियोंके विरुद्ध, और गुरबाल में रहने वाले अरबियोंऔर महूनियोंके साम्हने उसकी सहायता की।

8 और अम्मोनियोंने उज्जिय्याह को भेंट दी; और उसका नाम मिस्र देश तक फैल गया; क्‍योंकि उस ने अपके आप को बहुत दृढ़ किया है।

9 फिर उज्जिय्याह ने यरूशलेम में कोने के फाटक पर, और तराई के फाटक पर, और शहरपनाह के मोड़ पर भी गुम्मट बनाकर उन्हें दृढ़ किया।

10 फिर उस ने जंगल में गुम्मट बनवाए, और बहुत से कुएं खोदे; क्योंकि उसके पास नीचे के देश में और मैदानोंमें बहुत से पशु थे; किसान भी, और पहाड़ों में दाख की बारी, और कर्मेल में; क्योंकि वह पशुपालन से प्रेम करता था।

11 और उज्जिय्याह के और भी बहुत से योद्धा थे, जो राजा के प्रधानोंमें से एक हनन्याह के हाथ में यीएल शास्त्री, और मासेयाह हाकिम के हाथ से अपने-अपने हिसाब से दल बनाकर युद्ध करने को निकले थे।

12 शूरवीरों के पितरों के पितरों के घरानों के मुख्य मुख्य पुरूषों की गिनती दो हजार छ: सौ थी।

13 और उनके हाथ के नीचे तीन लाख सात हजार पांच सौ सेना थी, जो राजा को शत्रु से लड़ने के लिथे प्रबल शक्‍ति से युद्ध करती या।

14 और उज्जिय्याह ने उनके लिथे सब गणोंमें ढालें, और भाले, और टोपियां, और बाड़े, और धनुष, और पत्यर डालने के लिथे गोफन तैयार किए।।

15 और उस ने यरूशलेम में धूर्तोंके गढ़े हुए यन्त्र बनवाए, कि वे गुम्मटोंऔर गढ़ोंपर तीर और बड़े बड़े पत्यर मारें। और उसका नाम दूर-दूर तक फैल गया; क्योंकि जब तक वह बलवन्त हुआ, तब तक उसकी अद्‌भुत सहायता की गई।

16 परन्‍तु जब वह बलवन्त हुआ, तब उसका मन नाश की ओर उठा; क्योंकि उस ने अपके परमेश्वर यहोवा का अपराध किया या, और यहोवा के भवन में धूप की वेदी पर धूप जलाने को गया।

17 और अजर्याह याजक उसके पीछे पीछे गया, और उसके संग यहोवा के साठ याजक जो शूरवीर थे;

18 और वे राजा उज्जिय्याह का साम्हना करने लगे, और उस से कहने लगे, हे उज्जिय्याह, यहोवा के लिथे धूप जलाना तुझे नहीं, परन्तु हारून की सन्तान के याजकोंको जो धूप जलाने के लिथे पवित्रा किए गए हैं, काम आता है; अभयारण्य से बाहर जाओ; क्‍योंकि तू ने अतिचार किया है; और वह यहोवा परमेश्वर की ओर से तेरे आदर के लिथे न हो।

19 तब उज्जिय्याह क्रोधित हुआ, और उसके हाथ में धूप जलाने को धूपदान था; और जब वह याजकोंसे क्रोधित हुआ, तब कोढ़ उसके माथे पर याजकोंके साम्हने यहोवा के भवन में धूप वेदी के पास से उठ खड़ा हुआ।

20 और अजर्याह प्रधान याजक और सब याजकोंने उस की ओर दृष्टि करके क्या देखा, कि उसके माथे पर कोढ़ है, और उन्होंने उसे वहां से निकाल दिया; हां, स्वयं भी बाहर जाने के लिए उतावला था, क्योंकि यहोवा ने उसे मारा था ।

21 और उज्जिय्याह राजा अपक्की मृत्यु के दिन तक कोढ़ी था, और कोढ़ी होकर बहुत घर में रहता या; क्योंकि वह यहोवा के भवन में से नाश किया गया; और उसका पुत्र योताम राजभवन का अधिकारी था, और देश के लोगोंका न्याय करता या।

22 अब उज्जिय्याह के और काम क्या पहिले क्या अन्त में, आमोस के पुत्र यशायाह भविष्यद्वक्ता ने लिखा।

23 तब उज्जिय्याह अपके पुरखाओं के संग सो गया, और उसको उसके पुरखाओं के संग उस भूमि में मिट्टी दी गई, जो राजाओं की थी; क्योंकि उन्होंने कहा, वह कोढ़ी है; और उसका पुत्र योताम उसके स्थान पर राज्य करने लगा।


अध्याय 27

योताम, जो अच्छी तरह से राज्य करता है, समृद्ध होता है - वह अम्मोनियों को वश में करता है - उसका शासन - आहाज उसका उत्तराधिकारी होता है।

1 जब योताम राज्य करने लगा, तब वह पच्चीस वर्ष का या, और यरूशलेम में सोलह वर्ष तक राज्य करता रहा। उसकी माता का नाम सादोक की बेटी यरुशा भी था।

2 और जो कुछ उसके पिता उज्जिय्याह ने किया, उसके अनुसार उसने वही किया जो यहोवा की दृष्टि में ठीक है; तौभी उस ने यहोवा के भवन में प्रवेश न किया। और लोगों ने अभी तक भ्रष्ट तरीके से किया।

3 उस ने यहोवा के भवन के ऊंचे फाटक को बनाया, और ओपेल की शहरपनाह पर बहुत कुछ बनाया।

4 फिर उस ने यहूदा के पहाड़ोंमें नगर बनाए, और वनोंमें उस ने गढ़ और गुम्मट बनाए।

5 वह अम्मोनियों के राजा से भी लड़ा, और उन पर प्रबल हुआ। और अम्मोनियोंने उसी वर्ष उसको एक सौ किक्कार चान्दी, और दस हजार सआ गेहूं, और दस हजार जव दिया। अम्मोनियों ने उसे दूसरे वर्ष और तीसरे वर्ष में इतना ही दिया।

6 इसलिथे योताम पराक्रमी हो गया, क्योंकि उस ने अपके परमेश्वर यहोवा के साम्हने अपना मार्ग तैयार किया।

7 योताम के और काम, और उसके सब युद्ध, और उसके चालचलन, देखो, वे इस्राएल और यहूदा के राजाओं की पुस्तक में लिखे हैं।

8 जब वह राज्य करने लगा, तब वह पच्चीस वर्ष का या, और यरूशलेम में सोलह वर्ष तक राज्य करता रहा।

9 और योताम अपके पुरखाओं के संग सो गया, और उन्होंने उसको दाऊदपुर में मिट्टी दी; और उसका पुत्र आहाज उसके स्थान पर राज्य करने लगा।


अध्याय 28

आहाज अरामियों से पीड़ित हुआ - आहाज और अधिक मूर्तिपूजक हो गया - वह मर रहा है, हिजकिय्याह उसका उत्तराधिकारी है।

1 जब आहाज राज्य करने लगा, तब वह बीस वर्ष का या, और यरूशलेम में सोलह वर्ष तक राज्य करता रहा; परन्तु उसने अपने पिता दाऊद की नाईं वह नहीं किया जो यहोवा की दृष्टि में ठीक है;

2 क्योंकि वह इस्राएल के राजाओं की सी चाल चला, और बालाम के लिथे ढली हुई मूरतें भी बनाईं।

3 फिर उस ने हिन्नोम के पुत्र की तराई में धूप जलाया, और उन जातियोंके घिनौने कामोंके अनुसार जिन्हें यहोवा ने इस्राएलियोंके साम्हने से निकाल दिया था, अपके बच्चोंको आग में जला दिया।

4 उस ने ऊंचे स्यानोंपर, और पहाडिय़ोंपर, और सब हरे वृक्षोंके नीचे बलि भी की, और धूप जलाया।

5 इसलिथे उसके परमेश्वर यहोवा ने उसको अराम के राजा के वश में कर दिया; और वे उसे घात करके बड़ी भीड़ को बन्धुआई में ले गए, और दमिश्क में ले आए। और वह इस्त्राएल के राजा के वश में कर दिया गया, जिस ने उसे बड़े घात से मारा या।

6 क्योंकि रमल्याह के पुत्र पेकह ने यहूदा में एक दिन में एक लाख बीस हजार घात किए, जो सब शूरवीर थे; क्योंकि उन्होंने अपके पितरोंके परमेश्वर यहोवा को त्याग दिया या।

7 और एप्रैम के एक पराक्रमी जिक्री ने राजा के पुत्र मासेयाह को, और घर के हाकिम अज्रीकाम को, और राजा के पास के एल्काना को मार डाला।

8 और इस्त्राएलियोंने अपके अपके भाइयोंमें से दो लाख स्त्रियां, बेटे बेटियां बन्धुआई में ले लीं, और उनका बहुत कुछ लूट लिया, और लूट को शोमरोन में ले आए।

9 वहाँ यहोवा का एक नबी था, जिसका नाम ओदेद था; और उस सेना के साम्हने जो शोमरोन में आई, निकलकर उन से कहने लगा, देखो, तुम्हारे पितरोंका परमेश्वर यहोवा यहूदा से क्रोधित हुआ या, उस ने उनको तुम्हारे हाथ कर दिया, और तुम ने उस जलजलाहट से जो ऊपर चढ़ गई है, मार डाला है। स्वर्ग में।

10 और अब तुम ने यहूदा और यरूशलेम के दासोंऔर दासियोंके आधीन रहने की ठानी; परन्तु क्या तुम्हारे साथ तुम्हारे परमेश्वर यहोवा के विरुद्ध पाप नहीं हैं?

11 सो अब मेरी सुन, और बन्धुओं को जिन्हें तू ने अपके भाइयोंके हाथ से बन्धुआ किया है, फिर से छुड़ा; क्योंकि यहोवा का कोप तुम पर भड़का है।

12 तब एप्रैमियोंके मुख्य पुरूषोंमें से योहानान का पुत्र अजर्याह, मशिल्लेमोत का पुत्र बेरेक्याह, शल्लूम का पुत्र यहिज्किय्याह, और हदलै का पुत्र अमासा, जो युद्ध से आए थे, उनके साम्हने उठ खड़े हुए।

13 और उन से कहा, तुम बन्धुओं को यहां न लाना; क्‍योंकि हम ने तो पहले ही यहोवा का अपमान किया है, तौभी तुम हमारे पापों और हमारे अतिचारों को और बढ़ाना चाहते हो; क्‍योंकि हमारा अतिचार बहुत बड़ा है, और इस्त्राएल पर भयंकर कोप भड़का है।

14 सो हथियारबंद पुरूष बन्धुओं और लूट की संपत्ति को हाकिमोंऔर सारी मण्डली के साम्हने छोड़ गए।

15 और जो पुरूष प्रगट किए गए थे, वे उठकर बन्धुओं को ले गए, और लूट के सब वस्त्र पहिने हुए, जो उनके बीच में नंगे थे, और उन्हें पहिनावा दिया, और उन्हें पहनाया, और खाने पीने को दिया, और उनका अभिषेक किया, और सब निर्बलों को गदहों पर चढ़ाकर खजूर के नगर यरीहो में उनके भाइयोंके पास ले गए; तब वे शोमरोन को लौट गए।

16 उस समय राजा आहाज ने अश्शूर के राजाओं के पास उसकी सहायता करने को भेजा।

17 क्‍योंकि फिर एदोमी आकर यहूदा को मार डाला, और बंधुआई में ले गए।

18 और पलिश्तियोंने निचले देश के नगरोंऔर यहूदा के दक्षिण के नगरोंपर चढ़ाई करके बेतशेमेश, अय्यालोन, गदेरोत, और शोको और उसके गांवोंको, और तिम्ना को उसके गांवों समेत, गिम्जो और उसके गांव; और वे वहीं रहने लगे।

19 क्योंकि इस्राएल के राजा आहाज के कारण यहोवा ने यहूदा को नीचा दिखाया; क्योंकि उस ने यहूदा को नंगा कर दिया, और यहोवा का घोर अपराध किया है।

20 और अश्शूर के राजा तिलगतपिलनेसेर ने उसके पास आकर उसे दु:ख दिया, परन्तु दृढ़ न किया।

21 क्योंकि आहाज ने यहोवा के भवन, और राजा के भवन और हाकिमोंमें से कुछ ले कर अश्शूर के राजा को दे दिया; लेकिन उसने उसकी मदद नहीं की।

22 और संकट के समय उस ने यहोवा का और भी अपराध किया; यह वह राजा आहाज है।

23 क्योंकि उस ने दमिश्क के देवताओं के लिथे बलि की जिन ने उसको मारा या; और उस ने कहा, अराम के राजाओं के देवता उनकी सहायता करते हैं, इसलिथे मैं उनको बलि चढ़ाऊंगा, कि वे मेरी सहायता करें। परन्तु वे उसके और सारे इस्राएल के नाश थे।

24 और आहाज ने परमेश्वर के भवन के पात्रोंको इकट्ठा किया, और परमेश्वर के भवन के पात्रोंको टुकड़े टुकड़े कर दिया, और यहोवा के भवन के किवाड़ोंको बन्द कर दिया, और उसके लिये यरूशलेम के चारोंकोनोंमें वेदियां बनाईं।

25 और यहूदा के सब नगरोंमें उस ने पराए देवताओं के लिथे धूप जलाने के लिथे ऊंचे स्यान बनाए, और अपके पितरोंके परमेश्वर यहोवा को भड़काया।

26 अब उसके और काम और उसके सब चालचलन, पहिले और अन्त में, वे यहूदा और इस्राएल के राजाओं की पुस्तक में लिखे हुए हैं।

27 और आहाज अपके पुरखाओं के संग सो गया, और उसको नगर में, अर्यात् यरूशलेम में मिट्टी दी गई; परन्तु वे उसे इस्राएल के राजाओं की कब्रोंमें न ले आए; और उसका पुत्र हिजकिय्याह उसके स्थान पर राज्य करने लगा।


अध्याय 29

हिजकिय्याह परमेश्वर की उपासना को पुनर्स्थापित करता है - वह लेवियों को उपदेश देता है।

1 हिजकिय्याह पच्चीस वर्ष का होकर राज्य करने लगा, और बाईस वर्ष तक यरूशलेम में राज्य करता रहा। और उसकी माता का नाम अबिय्याह था, जो जकर्याह की बेटी थी।

2 और जो कुछ उसके पिता दाऊद ने किया था, उसके अनुसार उसने वही किया जो यहोवा की दृष्टि में ठीक है।

3 उस ने अपके राज्य के पहिले वर्ष के पहिले महीने में यहोवा के भवन के किवाड़ोंको खोलकर उनकी मरम्मत की।

4 तब वह याजकोंऔर लेवियोंको ले आया, और उन्हें पूर्व की सड़क पर इकट्ठा किया।

5 और उन से कहा, हे लेवियों, मेरी सुनो; अब अपने आप को पवित्र करना, और अपने पितरों के परमेश्वर यहोवा के भवन को पवित्र करना, और पवित्र स्थान में से मलिनता को दूर करना।

6 क्‍योंकि हमारे पुरखाओं ने विश्वासघात किया, और वह किया है जो हमारे परमेश्वर यहोवा की दृष्टि में बुरा है, और उसको त्यागकर यहोवा के निवास से मुंह फेर लिया है, और मुंह फेर लिया है।

7 और उन्होंने ओसारे के किवाड़ोंको बन्द कर दिया, और दीपकोंको बुझा दिया, और पवित्रस्यान में इस्राएल के परमेश्वर के लिथे न तो धूप जलाई, और न होमबलि चढ़ाए।

8 इसलिथे यहोवा का कोप यहूदा और यरूशलेम पर भड़क उठा, और उस ने उनको ऐसा संकट में डाल दिया, कि वे चकित और फुफकारते हैं, जैसा कि तुम अपनी आंखोंसे देखते हो।

9 क्योंकि देखो, हमारे बाप तलवार से मारे गए हैं, और हमारे बेटे-बेटियां और स्त्रियां इस कारण बन्धुआई में हैं।

10 अब मेरे मन में यह है कि मैं इस्राएल के परमेश्वर यहोवा से वाचा बान्धूं, कि उसका भयंकर कोप हम पर से दूर हो जाए।

11 हे मेरे पुत्रों, अब लापरवाही न करना; क्योंकि यहोवा ने तुझे चुना है, कि उसके साम्हने खड़े होकर उसकी उपासना करे, और उसकी सेवा टहल करना, और धूप जलाना।

12 तब लेवीय कहातियोंमें से अमासै का पुत्र महत, और अजर्याह का पुत्र योएल; और मरारी की सन्तान में से; अब्दी का पुत्र कीश, और यहलेलेल का पुत्र अजर्याह; और गेर्शोनियोंमें से; जिम्मा का पुत्र योआह, और योआह का पुत्र अदन;

13 और एलीसापान के वंश में से; शिम्री, और यीएल; और आसाप की सन्तान में से; जकर्याह, और मत्तन्याह;

14 और हेमान की सन्तान में से; यहीएल, और शिमी; और यदूतून की सन्तान में से; शमायाह, और उज्जीएल।

15 और उन्होंने अपके भाइयोंको इकट्ठा किया, और अपके को पवित्र किया, और यहोवा की इस आज्ञा के अनुसार यहोवा के भवन को शुद्ध करने के लिथे यहोवा के वचन के अनुसार आए।

16 और याजक यहोवा के भवन के भीतरी भाग में जाकर उसे शुद्ध करने को गए, और जितनी अशुद्धता यहोवा के भवन में पाई, उस सब को यहोवा के भवन के आंगन में ले आए। और लेवीवंशियोंने उसे ले लिया, कि वह किद्रोन नाले में ले जाए।

17 पहले महीने के पहिले दिन को वे पवित्र करने लगे, और महीने के अस्सी दिन को वे यहोवा के ओसारे में आए; इस प्रकार उन्होंने आठ दिन में यहोवा के भवन को पवित्र किया; और पहिले महीने के सोलहवें दिन को उन्होंने पूरा किया।

18 तब वे राजा हिजकिय्याह के पास जाकर कहने लगे, कि हम ने यहोवा के सारे भवन को, और होमबलि की वेदी को, और उसके सब पात्र, और भेंट की मेज, और उसके सब पात्र समेत शुद्ध कर दिया है।

19 और जितने पात्र राजा आहाज ने अपके राज्य में अपके अपराध करके फेंक दिए थे, उन सभोंको हम ने तैयार करके पवित्र किया है, और देखो, वे यहोवा की वेदी के साम्हने हैं।

20 तब राजा हिजकिय्याह सवेरे उठा, और नगर के हाकिमोंको इकट्ठा करके यहोवा के भवन को गया।

21 और वे राज्य और पवित्रस्थान और यहूदा के लिथे सात बछड़े, और सात मेढ़े, और सात भेड़ के बच्चे, और सात बकरे पापबलि के लिथे ले आए। और उसने हारून की सन्तान याजकोंको यहोवा की वेदी पर चढ़ाने की आज्ञा दी।

22 तब उन्होंने बछड़ोंको घात किया, और याजकोंने लोहू लेकर वेदी पर छिड़का; उसी प्रकार जब उन्होंने मेढ़ों को मार डाला, तब उन्होंने वेदी पर लोहू छिड़का; उन्होंने मेमनों को भी मार डाला, और वेदी पर लोहू छिड़का।

23 और वे पापबलि के बकरोंको राजा और मण्डली के साम्हने ले आए; और उन्होंने उन पर हाथ रखे;

24 और याजकोंने उनको घात किया, और अपके लोहू से सब इस्राएलियोंके लिथे प्रायश्चित्त करने के लिथे वेदी पर मेल कर लिया; क्योंकि राजा ने आज्ञा दी थी कि होमबलि और पापबलि सारे इस्राएल के लिथे किए जाएं।

25 और दाऊद, और राजा के दशीं गाद, और नातान भविष्यद्वक्ता की आज्ञा के अनुसार उस ने लेवियोंको यहोवा के भवन में झांझ, सारंगी, और वीणा बजाते हुए खड़ा किया; क्योंकि यहोवा की आज्ञा उसके भविष्यद्वक्ताओं की ओर से ऐसी ही थी।

26 और लेवीय दाऊद के बाजे लिए हुए, और याजक तुरहियां लिए हुए खड़े रहे।

27 और हिजकिय्याह ने होमबलि को वेदी पर चढ़ाने की आज्ञा दी। और जब होम-बलि शुरू हुई, तब यहोवा का गीत नरसिंगे और इस्राएल के राजा दाऊद के द्वारा ठहराए गए बाजे से भी आरम्भ हुआ।

28 और सारी मण्डली ने दण्डवत् किया, और गवैयोंने गीत गाए, और तुरहियां फूंकीं; और यह सब तब तक चलता रहा जब तक होमबलि समाप्त न हो जाए।

29 और जब उन्होंने भेंट पूरी की, तब राजा ने और जितने उसके संग थे, सब ने दण्डवत् करके दण्डवत् किया।

30 फिर हिजकिय्याह राजा और हाकिमोंने लेवियोंको आज्ञा दी, कि दाऊद और आसाप दशीं की बातें कहकर यहोवा का भजन गाएं। और वे आनन्द से स्तुति गाते थे, और सिर झुकाकर दण्डवत करते थे।

31 तब हिजकिय्याह ने उत्तर दिया, कि अब तुम ने अपने आप को यहोवा के लिथे पवित्र किया है, निकट आकर यहोवा के भवन में बलिदान और धन्यवाद की भेंट ले आओ। और मण्डली के लोग मेलबलि और धन्यवादबलि ले आए; और जितने स्वतन्त्र मन के थे, उतने होमबलि।

32 और होमबलियोंकी गिनती जो मण्डली लाई, वे साठ दस बछड़े, और एक सौ मेढ़े, और दो सौ भेड़ के बच्चे थे; ये सब यहोवा के होमबलि के लिथे थे।

33 और पवित्र की हुई वस्तुएं छह सौ बैल और तीन हजार भेड़ें थीं।

34 परन्तु याजक इतने कम थे, कि वे सब होमबलि को न फूंक सकते थे; इसलिथे जब तक काम पूरा न हो गया, और अन्य याजक अपने आप को पवित्र न कर लें, तब तक उनके भाई लेवीय उनकी सहायता करते रहे; क्‍योंकि लेवीय याजकों से भी अपने आप को पवित्र करने के लिथे अधिक सीधे थे।

35 और होमबलि भी बहुतायत में थे, और मेलबलि की चरबी, और होमबलि के अर्घ भी बहुतायत में थे। इस प्रकार यहोवा के भवन की सेवा सुचारु हो गई।

36 और हिजकिय्याह और सारी प्रजा के लोग आनन्दित हुए, कि परमेश्वर ने लोगोंको तैयार किया है; क्योंकि बात अचानक की गई थी।


अध्याय 30

हिजकिय्याह फसह की घोषणा करता है - सभा चौदह दिन तक पर्व मनाती है।

1 तब हिजकिय्याह ने सारे इस्राएल और यहूदा के पास यह कहला भेजा, कि एप्रैम और मनश्शे को भी चिट्ठियां लिखीं, कि वे यरूशलेम में यहोवा के भवन में आकर इस्राएल के परमेश्वर यहोवा के लिथे फसह का पर्व मानें।

2 क्‍योंकि राजा ने और अपके हाकिमोंऔर यरूशलेम की सारी मण्डली को सम्मति दी थी, कि दूसरे महीने में फसह मानना।

3 क्योंकि उस समय वे उसका पालन नहीं कर सकते थे, क्योंकि याजकोंने अपने आप को पर्याप्त रूप से पवित्र नहीं किया था, और न ही लोग यरूशलेम में इकट्ठे हुए थे।

4 इस बात से राजा और सारी मण्डली प्रसन्न हुई।

5 तब उन्होंने बेर्शेबा से लेकर दान तक सारे इस्राएल में यह प्रचार करने की आज्ञा दी, कि वे यरूशलेम में इस्राएल के परमेश्वर यहोवा के लिथे फसह मनाने को आएं; क्‍योंकि उन्‍होंने बहुत समय से ऐसा नहीं किया था, जैसा लिखा है।

6 इसलिथे सारे इस्राएल और यहूदा में राजा और उसके हाकिमोंकी चिट्ठियां अपके लिथे चली गईं, और राजा की उस आज्ञा के अनुसार, हे इस्राएलियों, तुम इब्राहीम, इसहाक और इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की ओर फिरो, और वह तुम में से बचे हुओं के पास लौट आएगा, जो अश्शूर के राजाओं के हाथ से छूट गए हैं।

7 और तुम अपने पुरखाओं और अपने भाइयोंके समान न हो जाना, जिन्होंने अपके पितरोंके परमेश्वर यहोवा का अपराध किया या, जिस ने उन्हें उजाड़ने के लिथे छोड़ दिया, जैसा तुम देखते हो।

8 अब अपने पुरखाओं की नाई हठी न बनो, वरन यहोवा के आधीन हो जाओ, और उसके पवित्रस्यान में जाओ, जिसे उस ने सदा के लिए पवित्र किया है; और अपने परमेश्वर यहोवा की उपासना करो, कि उसके कोप का प्रकोप तुम पर से दूर हो जाए।

9 क्योंकि यदि तुम फिर से यहोवा की ओर फिरोगे, तो तुम्हारे भाई और तुम्हारे लड़केबाल उन पर तरस खाएंगे, जो उन्हें बंधुआई में ले जाते हैं, कि वे फिर इस देश में आ जाएं; क्योंकि तेरा परमेश्वर यहोवा अनुग्रहकारी और दयालु है, और यदि तू उसकी ओर फिरे, तो वह तुझ से मुंह न फेरेगा।

10 तब चौकियां एप्रैम और मनश्शे के देश से होते हुए एक नगर से दूसरे नगर में जबूलून तक जाती थीं; परन्‍तु वे उनकी ठट्ठा करने के लिथे उनकी हंसी उड़ाते थे, और उनका ठट्ठा करते थे।

11 तौभी आशेर, मनश्शे और जबूलून के गोताखोर दीन होकर यरूशलेम को आए।

12 और यहूदा में भी परमेश्वर का हाथ यह था, कि वे यहोवा के वचन के अनुसार राजा और हाकिमोंकी आज्ञा मानने के लिये एक मन करें।

13 और दूसरे महीने में अखमीरी रोटी का पर्व मानने के लिथे बहुत से लोग यरूशलेम में इकट्ठे हुए, अर्थात एक बहुत बड़ी मण्डली।

14 और वे उठकर यरूशलेम की वेदियोंको उठा ले गए, और धूप के लिथे सब वेदियोंको उठाकर किद्रोन नाले में डाल दिया।

15 तब उन्होंने दूसरे महीने के चौदहवें दिन को फसह को बलि करना; और याजक और लेवीय लज्जित हुए, और अपने आप को पवित्र किया, और होमबलि को यहोवा के भवन में ले आए।

16 और वे परमेश्वर के भक्त मूसा की व्यवस्या के अनुसार अपके अपके अपके स्थान पर खड़े हुए; याजकों ने लेवियों के हाथ से जो लोहू मिला या, उस पर छिड़का।

17 क्योंकि मण्डली में बहुत से ऐसे थे जो पवित्र न किए गए थे; इसलिए लेवियों को फसहों के वध का अधिकार उन सब के लिथे जो शुद्ध न थे, यहोवा के लिथे पवित्र ठहराना था।

18 क्योंकि बहुत से लोगों ने, अर्यात् एप्रैम, मनश्शे, इस्साकार और जबूलून में से बहुतों ने अपने आप को शुद्ध न किया या, तौभी फसह को लिखा हुआ न खाया था। परन्तु हिजकिय्याह ने उनके लिथे प्रार्थना की, कि अच्छा यहोवा सब को क्षमा करे

19 वह अपके पितरोंके परमेश्वर यहोवा को ढूंढ़ने के लिथे उसका मन तैयार करता है, चाहे वह पवित्रस्थान की शुद्धि के अनुसार शुद्ध न किया जाए।

20 और यहोवा ने हिजकिय्याह की बात मानकर प्रजा को चंगा किया।

21 और इस्राएली जो यरूशलेम में उपस्थित थे, वे सात दिन तक अखमीरी रोटी का पर्ब्ब बड़े आनन्द के साथ मानते रहे; और लेवीय और याजक प्रति दिन यहोवा का भजन गाते हुए यहोवा की स्तुति करते थे।

22 तब हिजकिय्याह ने उन सब लेवियोंसे जो यहोवा की भली-भांति ज्ञान की शिक्षा देते थे, आराम से कहा; और सात दिन तक वे मेलबलि, और अपके पितरोंके परमेश्वर यहोवा के साम्हने अंगीकार करके सात दिन तक भोजन करते रहे।।

23 और सारी मण्डली ने सम्मति की, कि और सात दिन तक माने; और वे सात दिन आनन्द से मनाते रहे।

24 क्योंकि यहूदा के राजा हिजकिय्याह ने मण्डली को एक हजार बछड़े और सात हजार भेड़-बकरियां दीं; और हाकिमों ने मण्डली को एक हजार बछड़े और दस हजार भेड़-बकरियां दीं; और बहुत से याजकोंने अपने को पवित्र किया।

25 और यहूदा की सारी मण्डली, और याजक और लेवीय, और इस्राएल से निकली सारी मण्डली, और इस्राएल के देश से निकले और यहूदा में रहनेवाले परदेशी लोग आनन्दित हुए।

26 सो यरूशलेम में बड़ा आनन्द हुआ; क्योंकि इस्राएल के राजा दाऊद के पुत्र सुलैमान के समय से यरूशलेम में ऐसा न हुआ था।

27 तब लेवीय याजकोंने उठकर प्रजा को आशीर्वाद दिया; और उनका शब्द सुना गया, और उनकी प्रार्यना उसके पवित्र निवास स्थान पर, यहां तक कि स्वर्ग तक पहुंच गई।


अध्याय 31

लोग मूर्तिपूजा को नष्ट करते हैं - लोगों की भेंट और दशमांश - हिजकिय्याह की ईमानदारी।

1 जब यह सब हो गया, तब जितने इस्राएली उपस्थित थे, वे यहूदा के नगरोंमें निकल गए, और मूरतोंको टुकड़े-टुकड़े कर दिया, और अवनोंको काट डाला, और सब यहूदा और बिन्यामीन में से ऊंचे स्थानोंऔर वेदियोंको ढा दिया, एप्रैम और मनश्शे में भी, जब तक कि उन्होंने उन सब को सत्यानाश न कर दिया। तब सब इस्राएली अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके नगर को लौट गए।

2 और हिजकिय्याह ने याजकोंऔर लेवियोंके दलोंको अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके लिथे लिथे लिथे लिथे, और याजक और लेवीय होमबलि और मेलबलियोंके लिथे सेवा टहल करने, और धन्यवाद देने, और स्तुति करने के लिथे फाटकोंके फाटकोंके साम्हने ठहराए। यहोवा के तम्बू।

3 उस ने अपके धन में से अपके भाग को होमबलियोंके लिथे ठहराया, अर्थात भोर और सांझ के होमबलि, और सब्त के दिन, और नये चन्द्रमाओं, और पर्वोंके लिथे होमबलि, जैसा लिखा है, वैसा ही ठहराया। यहोवा की व्यवस्था में।

4 फिर उस ने उन लोगोंको जो यरूशलेम में रहते थे, याजकोंऔर लेवियोंका भाग देने की आज्ञा दी, कि वे यहोवा की व्यवस्था के विषय में उत्साहित हों।

5 और जैसे ही यह आज्ञा फैल गई, इस्राएली अन्न, दाखमधु, तेल, मधु, और खेत की सारी उपज की पहिली उपज बहुतायत में ले आए; और सब वस्तुओं का दशमांश उन्हें बहुतायत से लाया।

6 और यहूदा के नगरोंमें रहनेवाले इस्राएलियोंऔर यहूदाओंके विषय में भी वे बैलोंऔर भेड़-बकरियोंका दशमांश, और पवित्र वस्तुओं का दशमांश जो अपके परमेश्वर यहोवा के लिथे पवित्र किया गया या, ले आए, और ढेर लगाकर रखे।

7 तीसरे महीने में उन्होंने ढेरों की नेव डाली, और सातवें महीने में उन्हें पूरा किया।

8 और जब हिजकिय्याह और हाकिमोंने आकर उन ढेरोंको देखा, तब उन्होंने यहोवा और उसकी प्रजा इस्राएल को आशीर्वाद दिया।

9 तब हिजकिय्याह ने याजकोंऔर लेवियोंसे ढेरोंके विषय में पूछा।

10 और सादोक के घराने के प्रधान याजक अजर्याह ने उस को उत्तर दिया, कि जब से लोग यहोवा के भवन में भेंट चढ़ाने लगे हैं, तब हमारे पास खाने को बहुत हो गया है, और बहुत कुछ छोड़ दिया है; क्योंकि यहोवा ने अपक्की प्रजा को आशीष दी है; और जो बचा है वह यह महान भंडार है।

11 तब हिजकिय्याह ने यहोवा के भवन में कोठरियां तैयार करने की आज्ञा दी; और उन्होंने उन्हें तैयार किया,

12 और भेंट और दशमांश, और अर्पण की वस्तुएं सच्चाई से लाए; जिस पर लेवीवंशी कोनोन्याह शासक था, और उसके बाद उसका भाई शिमी था।

13 और यहीएल, अजज्याह, नहत, असाहेल, यरीमोत, योजाबाद, एलीएल, इस्माकियाह, महत, और बनायाह, कोनोन्याह और उसके भाई शिमी के अधीन राजा हिजकिय्याह की आज्ञा के अनुसार अध्यक्ष थे। , और अजर्याह परमेश्वर के भवन का हाकिम।

14 और लेवीय इम्ना का पुत्र कोरे, जो पूर्व की ओर द्वारपाल था, परमेश्वर की स्वेच्छाबलि का अधिकारी या, कि यहोवा के हव्य और परमपवित्र वस्तु बांटे।

15 और उसके आगे याजकोंके नगरोंमें अदन, मिन्यामीन, येशू, शमायाह, अमर्याह, और शकन्याह थे, कि अपके अपके भाइयोंको अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके सा य� छोटा;

16 पुरुषों की उनकी वंशावली के अलावा, तीन साल की उम्र से और ऊपर की ओर, यहां तक कि हर किसी के लिए जो प्रभु के घर में प्रवेश करते हैं, उनके पाठ्यक्रमों के अनुसार उनके आरोपों में उनकी सेवा के लिए उनका दैनिक हिस्सा;

17 और याजकों की अपके अपके पितरोंके घरानोंके घरानोंके अनुसार अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके साय अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपन अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके पद के लेवीय लेवीय;

18 और सारी मण्डली के द्वारा अपके सब बाल बालबच्चोंकी पत्नियों, और उनके पुत्रों, और उनकी बेटियोंकी वंशावली; क्‍योंकि उन्‍होंने अपके पद पर रहते हुए अपने आप को पवित्रता से पवित्र किया;

19 भी हारून के बेटों के पुजारियों, जो अपने शहरों के उपनगरों के क्षेत्र में थे, हर कई शहर में, जो पुरुष नाम से व्यक्त किए गए थे, सभी पुरुषों को पुजारियों के बीच सभी पुरुषों को भाग देने के लिए, और सभी को वे लेवियों की वंशावली के अनुसार गिने गए।

20 और हिजकिय्याह ने सारे यहूदा में ऐसा ही किया, और अपने परमेश्वर यहोवा के साम्हने जो भला, ठीक, और सत्य था, वही किया।

21 और जो काम उस ने परमेश्वर के भवन की उपासना में, और व्यवस्था में, और आज्ञाओं में अपके परमेश्वर को ढूंढ़ने के लिथे आरम्भ किया, वह अपके सारे मन से किया, और सफल हुआ।


अध्याय 32

सन्हेरीब ने यहूदा पर आक्रमण किया - हिजकिय्याह और यशायाह प्रार्थना करते हैं - एक स्वर्गदूत ने अश्शूरियों की सेना को नष्ट कर दिया - हिजकिय्याह ने चंगा किया - उसका धन, कार्य और मृत्यु।

1 इन बातों और उसके स्थापन के बाद अश्शूर के राजा सन्हेरीब ने आकर यहूदा में प्रवेश किया, और गढ़वाले नगरोंके साम्हने डेरे खड़े किए, और सोचा, कि उन्हें अपने वश में कर लूं।

2 और जब हिजकिय्याह ने देखा, कि सन्हेरीब आ गया है, और यरूशलेम से लड़ने की ठानी है,

3 उस ने अपके हाकिमोंऔर अपके शूरवीरोंसे सम्मति ली, कि उन सोतोंके जल को जो नगर के बाहर थे बन्द कर दें; और उन्होंने उसकी मदद की।

4 सो ऐसे बहुत से लोग इकट्ठे हुए, जिन्होंने सब सोतोंको, और उस नाले को जो देश के बीच में से होकर जाता या, यह कहकर बन्द कर दिया, कि अश्शूर के राजा क्यों आकर बहुत जल ढूंढे?

5 फिर उस ने अपने आप को दृढ़ किया, और टूटी हुई सारी शहरपनाह को दृढ़ किया, और गुम्मटोंपर, और बाहर एक और शहरपनाह तक खड़ा किया, और मिल्लो की मरम्मत की।

दाऊद का नगर, और डार्ट और ढालें बहुतायत से बनाईं।

6 और उस ने प्रजा के सरदारोंको ठहराकर नगर के फाटक के चौक पर अपके पास इकट्ठा किया, और उन से शान्ति से बातें करके कहा,

7 हियाव बान्धो, और हियाव बान्धो, और न अश्शूर के राजा, और न उसके संग की सारी भीड़ के लिथे मत डरो; क्‍योंकि उस से अधिक हमारे पास हो।

8 उसके पास मांस की एक भुजा है; परन्तु हमारा परमेश्वर यहोवा हमारी सहायता करने, और हमारे युद्ध लड़ने को हमारे संग है। और लोगों ने यहूदा के राजा हिजकिय्याह की बातों पर विश्राम किया।

9 इसके बाद अश्शूर के राजा सन्हेरीब ने अपके सेवकोंको यरूशलेम में यहूदा के राजा हिजकिय्याह और यरूशलेम के सब यहूदियोंके पास यह कहला भेजा,

10 अश्शूर का राजा सन्हेरीब यों कहता है, तुम किस बात का भरोसा रखते हो, कि यरूशलेम के घेरे में रहते हो?

11 क्या हिजकिय्याह तुझे यह नहीं समझाता, कि तू अपने आप को अकाल और प्यास से मरने के लिये दे दे, कि हमारा परमेश्वर यहोवा हम को अश्शूर के राजा के हाथ से छुड़ाएगा?

12 क्या उसी हिजकिय्याह ने अपके ऊंचे स्थानोंऔर वेदियोंको दूर करके यहूदा और यरूशलेम को यह आज्ञा नहीं दी, कि तुम एक वेदी के साम्हने दण्डवत करना, और उस पर धूप जलाना?

13 क्या तुम नहीं जानते कि मैं ने और मेरे पुरखाओं ने दूसरे देशों के सब लोगों से क्या क्या किया है? क्या उन देशों की जातियों के देवता किसी रीति से अपके देश को मेरे हाथ से छुड़ा सकते थे?

14 उन जातियों के सब देवताओं में से कौन था, जिन्हें मेरे पुरखाओं ने सत्यानाश करके अपक्की प्रजा को मेरे हाथ से छुड़ाया, कि तेरा परमेश्वर तुझे मेरे हाथ से छुड़ाए?

15 सो अब हिजकिय्याह तुझे धोखा न दे, और न इस रीति से समझाए, और न उस की प्रतीति करे; क्योंकि किसी जाति वा राज्य का कोई देवता अपक्की प्रजा को मेरे और मेरे पुरखाओं के हाथ से छुड़ा न सका; तेरा परमेश्वर तुझे मेरे हाथ से कितना कम छुड़ाएगा?

16 और उसके कर्मचारियोंने यहोवा परमेश्वर और उसके दास हिजकिय्याह के विरुद्ध और भी बातें कीं।

17 उस ने इस्त्राएल के परमेश्वर यहोवा को चिट्ठी लिखकर उसके विरोध में कहने को भी चिट्ठियां लिखीं, कि जैसे अन्य देशोंके देवताओं ने अपक्की प्रजा को मेरे हाथ से नहीं छुड़ाया, वैसे ही हिजकिय्याह का परमेश्वर अपके अपके हाथ से न छुड़ाएगा। लोग मेरे हाथ से निकल गए।

18 तब वे यहूदियोंके वचन में यरूशलेम के लोगोंको जो शहरपनाह पर थे, उन्हें डराने और संकट में डालने के लिथे ऊँचे शब्द से पुकारने लगे; कि वे नगर ले लें।

19 और उन्होंने पृय्वी की प्रजा के देवताओं की नाईं यरूशलेम के परमेश्वर के विरुद्ध बातें की, जो मनुष्य के हाथोंके बने हुए थे।

20 इस कारण राजा हिजकिय्याह और आमोस के पुत्र यशायाह भविष्यद्वक्ता ने प्रार्थना की और स्वर्ग की दोहाई दी।

21 और यहोवा ने एक दूत भेजा, जिस ने अश्शूर राजा की छावनी के सब शूरवीरोंऔर प्रधानोंऔर प्रधानोंको नाश किया। सो वह लज्जित होकर अपके देश को लौट गया। और जब वह अपके देवता के भवन में पहुंचा, तो उसके अपके ही पेट से निकलनेवालोंने वहां उसे तलवार से मार डाला।

22 इस प्रकार यहोवा ने हिजकिय्याह और यरूशलेम के निवासियोंको अश्शूर के राजा सन्हेरीब और सब लोगोंके हाथ से बचाया, और चारोंओर उनकी अगुवाई की।

23 और बहुतेरे यरूशलेम में यहोवा के लिथे भेंट लाए, और यहूदा के राजा हिजकिय्याह के लिथे भेंट लाए; और वह आगे से सब जातियोंके साम्हने बड़ा हुआ करता या।।

24 उन दिनों में हिजकिय्याह रोगी होकर मर गया, और उसने यहोवा से प्रार्यना की; और उस ने उस से बातें की, और उस ने उसको एक चिन्ह दिया।

25 तौभी हिजकिय्याह ने उस से जो लाभ किया उसके अनुसार फिर न किया; क्‍योंकि उसका मन ऊंचा हो गया था; इस कारण उस पर और यहूदा और यरूशलेम पर कोप भड़क उठा।

26 तौभी हिजकिय्याह ने और यरूशलेम के निवासियों, अपने मन के घमण्ड के कारण अपने आप को दीन किया, कि यहोवा का कोप उन पर हिजकिय्याह के दिनोंमें न भड़के।

27 और हिजकिय्याह के पास बहुत धन और प्रतिष्ठा थी; और उस ने चान्दी, और सोना, और मणि, और सुगन्धद्रव्य, और ढालें, और सब प्रकार के मनभावने मणियों के लिथे भण्डार बनाए;

28 अन्न, दाखमधु, और तेल की उपज के भण्डार भी; और सब प्रकार के पशुओं के लिये ठेले, और भेड़-बकरियोंके लिथे लट्ठे।

29 फिर उस ने उसको नगर, और भेड़-बकरी, और गाय-बैल बहुतायत में दिए; क्योंकि परमेश्वर ने उसे बहुत कुछ दिया था।

30 उसी हिजकिय्याह ने भी गीहोन के ऊपरी जल मार्ग को रोक दिया, और सीधे दाऊदपुर की पच्छिम की ओर ले गया। और हिजकिय्याह अपने सब कामोंमें सफल हुआ।

31 तौभी बाबुल के हाकिमों के दूतों ने जो उसके पास देश में किए हुए अजूबे का हाल पूछने को उसके पास भेजे थे, उसके काम में परमेश्वर ने उसे छोड़ दिया, कि उसका परीक्षण करे, कि जो कुछ उसके मन में है उसे वह जान ले।

32 और हिजकिय्याह के और काम, और उसकी भलाई, देखो, वे आमोस के पुत्र यशायाह भविष्यद्वक्ता के दर्शन में, और यहूदा और इस्राएल के राजाओं की पुस्तक में लिखे हुए हैं।

33 और हिजकिय्याह अपके पुरखाओं के संग सो गया, और उन्होंने उसको दाऊदवंशियोंकी कब्रोंके प्रधानोंमें से मिट्टी दी; और सब यहूदा और यरूशलेम के निवासियोंने उसकी मृत्यु के समय उसका आदर किया। और उसका पुत्र मनश्शे उसके स्थान पर राज्य करने लगा।


अध्याय 33

मनश्शे मूर्तिपूजा को स्थापित करता है - बाबुल में ले जाया जाता है - रिहा किया जाता है, और मूर्तिपूजा को डालता है - उसके कार्य और मृत्यु - आमोन उसका उत्तराधिकारी होता है - आमोन मारा जाता है - योशिय्याह उसका उत्तराधिकारी होता है।

1 जब मनश्शे राज्य करने लगा, तब वह बारह वर्ष का या, और यरूशलेम में पचपन वर्ष तक राज्य करता रहा;

2 परन्तु जो अन्यजातियोंके घिनौने कामोंको यहोवा ने इस्त्राएलियोंके साम्हने से निकाल दिया था, उन के समान वह किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है।

3 क्योंकि उस ने उन ऊंचे स्यानोंको जिन्हें उसके पिता हिजकिय्याह ने ढा दिया या, फिर बनाया, और बालीम के लिथे वेदियां खड़ी की, और अशेरा बनाया, और आकाश के सारे गण को दण्डवत किया, और उनकी उपासना की।

4 फिर उस ने यहोवा के उस भवन में वेदियां बनाई जिनके विषय में यहोवा ने कहा या, कि यरूशलेम में मेरा नाम सदा बना रहेगा।

5 और उस ने यहोवा के भवन के दोनों आंगनोंमें आकाश के सारे गण के लिथे वेदियां बनाईं।

6 और उस ने अपके लड़केबालोंको हिन्नोम के पुत्र की तराई में आग में से चलने दिया; वह भी समय देखता था, और जादू का इस्तेमाल करता था, और जादू टोना करता था, और एक परिचित आत्मा के साथ, और जादूगरों के साथ व्यवहार करता था; उस ने यहोवा की दृष्टि में बहुत बुरा काम किया, जिस से उसका क्रोध भड़के।

7 और उस ने खुदी हुई मूरत को, जो उस ने बनाई थी, परमेश्वर के उस भवन में, जिसके विषय में परमेश्वर ने दाऊद और उसके पुत्र सुलैमान से कहा या, कि इस भवन में, और यरूशलेम में, जिसे मैं ने सब गोत्रोंके साम्हने चुन लिया है, स्थापित किया। इस्राएल के, क्या मैं अपना नाम सदा के लिए रखूंगा।

8 और उस देश में से जिसे मैं ने तुम्हारे पुरखाओं के लिथे ठहराया या, मैं इस्राएल का पांव फिर न हटाऊंगा; ताकि वे सारी व्यवस्था, और विधियों, और विधियोंके अनुसार जो मैं ने उन्हें दी है, मानने में चौकसी करें।

9 तब मनश्शे ने यहूदा और यरूशलेम के निवासियोंको भटका दिया, और उन अन्यजातियोंसे भी बुरा किया, जिन्हें यहोवा ने इस्राएलियोंके साम्हने से नाश किया था।

10 और यहोवा ने मनश्शे और लोगोंसे बातें कीं; परन्तु उन्होंने नहीं सुना।

11 इसलिथे यहोवा ने उन पर अश्शूर के राजा की सेना के प्रधानोंको ले लिया, जो मनश्शे को कांटोंके बीच ले गए, और उसे बेड़ियोंसे बांधकर बाबेल को ले गए।

12 और जब वह दु:ख में पड़ा, तब अपके परमेश्वर यहोवा से बिनती करके अपके पितरोंके परमेश्वर के साम्हने बहुत दीन हुआ,

13 और उस से बिनती की; और उस ने उस से बिनती की, और उसकी बिनती सुनकर उसे अपके राज्य में फिर यरूशलेम ले आया। तब मनश्शे ने जान लिया कि यहोवा ही परमेश्वर है।

14 इसके बाद उस ने दाऊदपुर से बाहर गीहोन की पच्छिम ओर तराई में तराई में मछलियां फाटक के भीतर तक एक शहरपनाह बनाई, और ओपेल को चारोंओर से घेर लिया, और उसे बहुत ऊंचे स्थान पर खड़ा किया, और यहूदा के सब गढ़वाले नगरों में युद्ध के प्रधानों को रखना।

15 और पराए देवताओं, और मूरत को यहोवा के भवन में से, और जितनी वेदियां उस ने यहोवा के भवन के पहाड़ और यरूशलेम में बनाईं, उन सभोंको उस ने उठाकर नगर से बाहर निकाल दिया।

16 और उस ने यहोवा की वेदी की मरम्मत की, और उस पर मेलबलि और धन्यवादबलि चढ़ाए, और यहूदा को आज्ञा दी, कि इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की उपासना करे।

17 तौभी प्रजा ने ऊंचे स्थानों पर बलि चढ़ाई, तौभी केवल अपने परमेश्वर यहोवा के लिथे बलिदान किया।

18 मनश्शे के और काम, और उसके परमेश्वर से उसकी प्रार्यना, और द्रष्टाओं की जो बातें इस्राएल के परमेश्वर यहोवा के नाम से उस से कही थीं, सुन, वे सब इस्राएल के राजाओं की पुस्तक में लिखी हुई हैं। .

19 उसकी प्रार्यना, और परमेश्वर ने उस से क्या बिनती की, और उसके सब पाप, और अतिचार, और जिन स्थानोंमें उस ने ऊँचे स्थान बनाए, और अशेरा और खुदी हुई मूरतें उसके दीन होने से पहिले खड़ी कीं; देखो, वे द्रष्टाओं के वचनों में लिखे हुए हैं।

20 तब मनश्शे अपके पुरखाओं के संग सो गया, और उन्होंने उसको उसके घर में मिट्टी दी; और उसका पुत्र आमोन उसके स्थान पर राज्य करने लगा।

21 जब आमोन राज्य करने लगा, तब वह बाईस वर्ष का या, और यरूशलेम में दो वर्ष तक राज्य करता रहा।

22 परन्तु उसने अपने पिता मनश्शे की नाईं वही किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है; क्योंकि आमोन ने अपके पिता मनश्शे की सब खुदी हुई मूरतोंके लिथे बलि करके उनकी उपासना की;

23 और जैसा अपके पिता मनश्शे ने अपके आप को दीन किया या, वैसा ही यहोवा के साम्हने दीन न हुआ; परन्तु आमोन ने अधिकाधिक अपराध किया।

24 और उसके सेवकों ने उसके विरुद्ध द्रोह की गोष्ठी की, और उसे उसके ही घर में घात किया।

25 परन्तु देश के लोगोंने उन सभोंको मार डाला, जिन्होंने राजा आमोन के विरुद्ध साजिश की थी; और उस देश के लोगोंने उसके पुत्र योशिय्याह को उसके स्थान पर राजा बनाया।


अध्याय 34

योशिय्याह मूर्तिपूजा को नष्ट करता है - वह मंदिर की मरम्मत करता है - कानून की पुस्तक - योशिय्याह भगवान के साथ वाचा को नवीनीकृत करता है।

1 जब योशिय्याह राज्य करने लगा, तब वह आठ वर्ष का या, और एक तीस वर्ष तक यरूशलेम में राज्य करता रहा।

2 और उसने वही किया जो यहोवा की दृष्टि में ठीक है, और वह अपके पिता दाऊद की सी चाल चला, और न तो दहिनी ओर मुड़ा, और न बाईं ओर।

3 क्योंकि अपके राज्य के आठवें वर्ष में जब वह छोटा या, तब वह अपके पिता दाऊद के परमेश्वर को ढूंढ़ने लगा; और बारहवें वर्ष में वह यहूदा और यरूशलेम को ऊँचे स्थानों से, और अखाड़ों, और खुदी हुई मूरतों, और ढली हुई मूरतों को शुद्ध करने लगा।

4 और उन्होंने उसके साम्हने बालीम की वेदियोंको ढा दिया; और जो मूरतें उन से ऊपर यीं, उनको उस ने काट डाला; और अशेरा, और खुदी हुई मूरतें, और ढली हुई मूरतें उस ने तोड़ डाली, और उनको मिट्टी में मिला दिया, और उन की कब्रोंपर छितरा दिया, जिन्होंने उनके लिथे बलिदान किए थे।

5 और उस ने याजकोंकी हड्डियोंको उनकी वेदियोंपर जलाया, और यहूदा और यरूशलेम को शुद्ध किया।

6 और उसने मनश्शे, एप्रैम, और शिमोन के नगरोंमें, यहां तक कि नप्ताली तक, और चारोंओर की गद्दी समेत ऐसा ही किया।

7 और जब उस ने वेदियोंऔर अखाड़ोंको तोड़ डाला, और खुदी हुई मूरतोंको चूर चूर करके, और इस्राएल के सारे देश में सब मूरतोंको काट डाला, तब वह यरूशलेम को लौट गया।

8 अपके राज्य के अठारहवें वर्ष में जब उस ने देश और भवन को शुद्ध किया, तब उस ने अजल्याह के पुत्र शापान, और नगर के हाकिम मासेयाह और योआहाज के पुत्र योआह को जो अभिलेख करनेवाला था, भवन की मरम्मत करने को भेजा। अपने परमेश्वर यहोवा की ओर से।

9 और जब वे हिल्किय्याह महायाजक के पास पहुंचे, तब जो रुपया परमेश्वर के भवन में लाया गया या, जिसे लेवियोंने मनश्शे और एप्रैम, और सब बचे हुओं इस्त्राएलियोंके हाथ से फाटकोंके पहरेदारोंने बटोर लिया था, और सब यहूदा और बिन्यामीन में से; और वे यरूशलेम को लौट गए।

10 और उन्होंने उसे उन कामगारोंके हाथ में कर दिया, जो यहोवा के भवन की निगरानी करते थे, और उन्होंने उसे यहोवा के भवन के काम करनेवालोंको दे दिया, कि वह भवन की मरम्मत और सुधार करे;

11 गढ़े हुए पत्यर, और जोड़े के लिथे लकड़ी मोल लेने, और उन घरोंको जिन्हें यहूदा के राजा ने नाश किया या, फर्श बनाने के लिथे गढ़नेवालोंऔर बनानेवालोंको दिया।

12 और उन पुरूषों ने वह काम सच्चाई से किया; और उनके अध्यक्ष मरारी के वंश में से यहत और ओबद्याह नाम लेवीय थे; और कहातियों में से जकर्याह और मशुल्लाम, कि वे उसको आगे बढ़ाएं; और अन्य लेवीय, जो बाजे बजाने में कुशल थे।

13 और वे बोझ उठानेवालोंके अधिकारी थे, और सब प्रकार की सेवा करनेवालोंके निरीक्षक थे; और लेवियों में से शास्त्री, और हाकिम, और द्वारपाल थे।

14 और जब वे रुपए यहोवा के भवन में लाए थे, तब हिल्किय्याह याजक को मूसा के द्वारा दी गई यहोवा की व्यवस्था की एक पुस्तक मिली।

15 और हिल्किय्याह ने शापान शास्त्री से कहा, मुझे व्यवस्था की पुस्तक यहोवा के भवन में मिली है। और हिल्किय्याह ने वह पुस्तक शापान को दी।

16 तब शापान उस पुस्तक को राजा के पास ले गया, और राजा का यह वचन फिर सुनाया, कि जो कुछ तेरे दासोंके लिथे किया गया है वह सब वे ही करते हैं।

17 और जो रुपया यहोवा के भवन में मिला था, उसे उन्होंने इकट्ठी करके अध्यक्षोंऔर काम करनेवालोंके हाथ में कर दिया है।

18 तब शापान शास्त्री ने राजा से कहा, हिल्किय्याह याजक ने मुझे एक पुस्तक दी है। और शापान ने उसे राजा के साम्हने पढ़ा।

19 और जब राजा ने व्यवस्या की बातें सुनीं, तब अपके वस्त्र फाड़े।

20 और राजा ने हिल्किय्याह, और शापान के पुत्र अहीकाम, मीका के पुत्र अब्दोन, और शापान शास्त्री, और राजा के सेवक असायाह को यह आज्ञा दी,

21 जाओ, मेरे लिथे यहोवा से और इस्राएल और यहूदा में बचे हुओं से उस पुस्तक के विषय में जो मिली है पूछो; क्योंकि जो कुछ इस पुस्तक में लिखा है उसके अनुसार करने के लिये हमारे पुरखाओं ने यहोवा के वचन का पालन नहीं किया, इसलिये यहोवा का कोप हम पर बहुत भड़का है।

22 और हिल्किय्याह और जिन्हें राजा ने ठहराया या, वे हस्रा के पोते तिकवा के पुत्र शल्लूम की पत्नी हुल्दा भविष्यद्वक्ता के पास गए; (अब वह कॉलेज में यरूशलेम में रहती थी;) और उन्होंने उससे इस आशय की बात की।

23 उस ने उन को उत्तर दिया, कि इस्राएल का परमेश्वर यहोवा योंकहता है, जिस मनुष्य ने तुझे मेरे पास भेजा है उस से कह,

24 यहोवा योंकहता है, कि देख, मैं इस स्यान और उसके निवासियोंके सब शाप जो उस पुस्तक में लिखे हैं, जो उन्होंने यहूदा के राजा के साम्हने पढ़े हैं, उन पर विपत्ति डालूंगा;

25 क्योंकि उन्होंने मुझे त्याग दिया है, और पराए देवताओं के लिथे धूप जलाया है, जिस से वे अपके सब कामोंके द्वारा मुझे रिस दिलाएं; इसलिथे मेरा कोप इस स्यान पर भड़केगा, और न बुझेगा।

26 और यहूदा के राजा, जिस ने तुम को यहोवा से पूछने को भेजा या, उस से कहना, कि जो बातें तू ने सुनी हैं उनके विषय में इस्राएल का परमेश्वर यहोवा योंकहता है;

27 क्योंकि तेरा मन कोमल था, और तू ने परमेश्वर के साम्हने अपने आप को दीन किया, जब तू ने इस स्थान और उसके निवासियोंके विरुद्ध उसके वचनोंको सुना, और मेरे साम्हने अपने आप को दीन किया, और अपने वस्त्र फाड़े, और मेरे साम्हने रोया; मैं ने तेरी भी सुनी है, यहोवा की यही वाणी है।

28 देख, मैं तुझे तेरे पुरखाओं के पास इकट्ठा करूंगा, और तू कुशल से अपक्की कब्र में इकट्ठा हो जाएगा, और जो विपत्ति मैं इस स्थान पर और उसके निवासियोंपर डालूंगा, वह सब तेरी आंखोंमें न लगेगी। सो वे फिर राजा का वचन ले आए।

29 तब राजा ने यहूदा और यरूशलेम के सब पुरनियोंको भेजकर इकट्ठा किया।

30 और राजा यहोवा के भवन में, और यहूदा के सब पुरूष, और यरूशलेम के निवासियों, और याजकों, और लेवियों, और सब छोटे बड़े लोगोंको चढ़ गया; और उस ने उनके कानोंमें वाचा की पुस्तक की सब बातें जो यहोवा के भवन में पाईं, पढ़ लीं।

31 और राजा अपके स्यान पर खड़ा हुआ, और यहोवा के साम्हने वाचा बान्धी, कि यहोवा के पीछे हो ले, और उसकी आज्ञाओं, चितौनियों, और विधियोंका पालन अपके सारे मन और अपने सारे प्राण से करे, कि उनका पालन करे। वाचा के शब्द जो इस पुस्तक में लिखे गए हैं।

32 और जितने यरूशलेम और बिन्यामीन में थे, उन सभोंको उस ने उसके साम्हने खड़ा कराया। और यरूशलेम के निवासियों ने अपने पितरों के परमेश्वर परमेश्वर की वाचा के अनुसार किया।

33 और योशिय्याह ने इस्राएलियोंके सब देशोंमें से सब घिनौने काम दूर किए, और जितने इस्राएलियोंमें उपस्थित थे, उन सभोंको उपासना करने, यहां तक कि उनके परमेश्वर यहोवा की उपासना करने के लिथे ठहराया। और उसके सारे दिन वे अपके पितरोंके परमेश्वर यहोवा के पीछे चलने से न हटे।


अध्याय 35

योशिय्याह फसह मनाता है - वह मारा जाता है - योशिय्याह के लिए विलाप।

1 फिर योशिय्याह ने यरूशलेम में यहोवा के लिथे फसह मनाया; और पहिले महीने के चौदहवें दिन को उन्होंने फसह को बलि करना।

2 और उस ने याजकोंको अपके अपके हाथ में ठहराया, और यहोवा के भवन की उपासना करने के लिथे उनको हियाव दिया।

3 और उन लेवियोंसे जो सब इस्राएलियोंको जो यहोवा के लिथे पवित्र हैं, उपदेश देनेवाले से कहा, पवित्र सन्दूक को उस भवन में रखना, जिसे इस्राएल के राजा दाऊद के पुत्र सुलैमान ने बनवाया था; वह तुम्हारे कन्धों पर बोझ न बने; अब अपके परमेश्वर यहोवा और उसकी प्रजा इस्राएल की उपासना करो,

4 और अपने पिता के घरों द्वारा, अपने पाठ्यक्रमों के बाद, इज़राइल के डेविड किंग के लेखन के अनुसार, और सोलोमन के लेखन के अनुसार, अपने बेटे के लेखन के अनुसार;

5 और अपके अपके पितरोंके पितरोंके घरानोंके खण्डोंके अनुसार, और लेवियोंके कुलोंके विभाजन के अनुसार पवित्र स्थान में खड़े हो।

6 इसलिथे फसह को बलि करो, और अपने आप को पवित्र करो, और अपने भाइयोंको तैयार करो, कि वे मूसा के द्वारा यहोवा के वचन के अनुसार करें।

7 और योशिय्याह ने भेड़-बकरियोंके सब भेड़-बकरियोंऔर बालकोंको फसह के बलि के लिथे सब भेंट के लिथे जो कुछ उपस्थित थे, वे सब को तीस हजार और तीन हजार बछड़े दिए; ये राजा के सार के थे।

8 और उसके हाकिमोंने प्रजा के लिथे याजकोंऔर लेवियोंको स्वेच्छा से दिया; हिल्किय्याह, जकर्याह, और यहीएल ने, जो परमेश्वर के भवन के प्रधान थे, याजकों को दो हजार छ: सौ छोटे पशु, और तीन सौ बैल फसह की भेंट के लिथे दिए।

9 कोनन्याह, और शमायाह, नतनेल, और उसके भाइयोंने हशब्याह, यीएल और योजाबाद ने, जो लेवियोंके प्रधान थे, लेवियोंको पांच हजार छोटे पशु, और पांच सौ बैल फसह की भेंट के लिथे दिए।

10 तब सेवा तैयार की गई, और याजक अपके अपके स्यान पर, और लेवीय राजा की आज्ञा के अनुसार अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपन खड़े रहे।।

11 और उन्होंने फसह को बलि किया, और याजकोंने अपके हाथ से लोहू छिड़का, और लेवीय उनको घात करने लगे।

12 और उन्होंने होमबलि को हटा दिया, कि वे प्रजा के कुलोंके दलोंके अनुसार यहोवा को चढ़ाएं, जैसा कि मूसा की पुस्तक में लिखा है। और उन्होंने बैलों के साथ भी ऐसा ही किया।

13 और उन्होंने फसह को विधि के अनुसार आग में भूनाया; परन्तु अन्य पवित्र वस्तुओं को उन्होंने हौदों, और हौदों, और धूपदानों में बोया, और सब लोगों में फुर्ती से बांट दिया।

14 और उसके बाद उन्होंने अपके लिथे और याजकोंके लिथे तैयारी की; क्योंकि हारून की सन्तान के याजक होमबलि और चरबी को चढ़ाने में रात तक लगे रहे; इसलिथे लेवियोंने अपके अपके लिथे और हारून की सन्तान के याजकोंके लिथे तैयारी की।

15 और आसाप के वंश के गवैये दाऊद, आसाप, हेमान, और राजा के दशीं यदूतून की आज्ञा के अनुसार अपके अपके स्थान पर रहे; और द्वारपाल सब फाटकों पर खड़े रहे; वे अपनी सेवा से विदा न हों; उनके भाइयों के लिए लेवियों ने उनके लिए तैयारी की।

16 सो उसी दिन यहोवा की सारी उपासना, फसह मनाने और यहोवा की वेदी पर होमबलि चढ़ाने के लिथे राजा योशिय्याह की आज्ञा के अनुसार तैयार की गई।

17 और जो इस्राएली उपस्थित थे, वे उस समय फसह, और अखमीरी रोटी का पर्व सात दिन तक मानते रहे।

18 और शमूएल भविष्यद्वक्ता के दिनों से इस्राएल में मनाया जाने वाला कोई फसह न था; और इस्राएल के सब राजाओं ने योशिय्याह, और याजक, और लेवीय, और जितने यहूदा और इस्राएल के लोग उपस्थित थे, और यरूशलेम के निवासियोंके अनुसार फसह का पर्व न माना।

19 योशिय्याह के राज्य के अठारहवें वर्ष में यह फसह मनाया गया।

20 इस सब के बाद जब योशिय्याह ने मन्‍दिर को तैयार किया, तब मिस्र का राजा नको फरात के पास चरकेमिश से लड़ने को चढ़ आया; और योशिय्याह उसके साम्हने निकल गया।

21 परन्तु उस ने उसके पास दूतोंके पास यह कहला भेजा, कि हे यहूदा के राजा, मुझे तुझ से क्या काम? मैं आज के दिन तुझ से नहीं वरन उस घर से जिस से मेरा युद्ध हो रहा है, चढ़ाई करता हूं; क्योंकि परमेश्वर ने मुझे फुर्ती करने की आज्ञा दी है, कि परमेश्वर जो मेरे संग है उसके साथ हस्तक्षेप न कर, ऐसा न हो कि वह तुझे नाश करे।

22 तौभी योशिय्याह ने उस से मुंह न फेर लिया, वरन अपने आप में अय्याश किया, कि उस से लड़े, और परमेश्वर के मुंह से नको की बातें न मानी, और मगिद्दो की तराई में लड़ने को आया।

23 और धनुर्धारियों ने राजा योशिय्याह पर गोलियां चलाईं; और राजा ने अपके सेवकोंसे कहा; मुझे दूर करो; क्योंकि मैं बुरी तरह घायल हूँ।

24 तब उसके सेवकों ने उसे उस रथ में से निकाल कर दूसरे रथ पर जो उसके पास था बैठा दिया; और वे उसे यरूशलेम ले आए, और वह मर गया, और अपके पितरोंकी कब्रोंमें से एक में मिट्टी दी गई।। और सारे यहूदा और यरूशलेम ने योशिय्याह के लिये विलाप किया।

25 और यिर्मयाह ने योशिय्याह के लिथे विलाप किया; और सब गानेवाले और गानेवाली स्त्रियां आज तक योशिय्याह के विषय में विलाप करके उसके विषय में बातें करते थे, और उनके लिये इस्राएल में एक विधि ठहराया; और देखो, वे विलापगीत में लिखे हुए हैं।

26 योशिय्याह के और काम, और उसकी भलाई, जो यहोवा की व्यवस्था में लिखी गई थी, उसके अनुसार,

27 और उसके काम पहिले और अन्त में, वे इस्राएल और यहूदा के राजाओं की पुस्तक में लिखे हुए हैं।


अध्याय 36

यहोआहाज फिरौन द्वारा अपदस्थ किया गया, और मिस्र में ले जाया गया - यहोयाकीम को बाबुल में ले जाया गया - यहोयाकीन को बाबुल में लाया गया - सिदकिय्याह ने भविष्यद्वक्ताओं को तुच्छ जाना, और सिदकिय्याह ने नबूकदनेस्सर के खिलाफ विद्रोह किया - यरूशलेम को नष्ट कर दिया - कुस्रू की घोषणा।

1 तब देश के लोगोंने योशिय्याह के पुत्र यहोआहाज को पकड़कर उसके पिता के स्थान पर यरूशलेम में राजा ठहराया।

2 जब यहोआहाज राज्य करने लगा, तब वह तेईस वर्ष का या, और तीन महीने तक यरूशलेम में राज्य करता रहा।

3 और मिस्र के राजा ने उसको यरूशलेम में डाल दिया, और देश को सौ किक्कार चान्दी और किक्कार सोना देकर दोषी ठहराया।

4 और मिस्र के राजा ने अपके भाई एल्याकीम को यहूदा और यरूशलेम पर राजा ठहराया, और उसका नाम यहोयाकीम रखा। और नको अपके भाई यहोआहाज को लेकर मिस्र को गया।

5 जब यहोयाकीम राज्य करने लगा, तब वह पच्चीस वर्ष का या, और यरूशलेम में ग्यारह वर्ष तक राज्य करता रहा; और उसने वही किया जो उसके परमेश्वर यहोवा की दृष्टि में बुरा है।

6 और बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ने उस पर चढ़ाई की, और उसे बाबुल ले जाने के लिथे बेड़ियोंमें बान्धा।

7 और नबूकदनेस्सर ने यहोवा के भवन के पात्रोंको बाबेल को ले जाकर अपने भवन में बाबुल में रखा।

8 यहोयाकीम के और काम, और उसके घिनौने काम जो उस ने किए, और जो उस में पाए, वे सब इस्राएल और यहूदा के राजाओं की पुस्तक में लिखे हुए हैं; और उसका पुत्र यहोयाकीन उसके स्थान पर राज्य करने लगा।

9 जब यहोयाकीन राज्य करने लगा, तब वह आठ वर्ष का या, और तीन महीने दस दिन तक यरूशलेम में राज्य करता रहा; और उसने वही किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है।

10 और जब वर्ष पूरा हुआ, तब राजा नबूकदनेस्सर ने लोगों को भेजकर यहोवा के भवन के सुन्दर पात्रों समेत बाबुल को ले जाकर उसके भाई सिदकिय्याह को यहूदा और यरूशलेम पर राजा ठहराया।

11 जब सिदकिय्याह राज्य करने लगा, तब वह एक बीस वर्ष का या, और ग्यारह वर्ष तक यरूशलेम में राज्य करता रहा।

12 और उस ने वही किया जो अपके परमेश्वर यहोवा की दृष्टि में बुरा या, और यहोवा के मुंह से कहनेवाले यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के साम्हने दीन न हुआ।

13 और उस ने राजा नबूकदनेस्सर से भी, जिस ने उस को परमेश्वर की शपय खिलाई या, बलवा किया; परन्तु उस ने हठ किया, और अपके मन को कठोर किया, कि इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की ओर फिरे न।

14 और याजकों के सब प्रधानों और प्रजा के लोगों ने अन्यजातियों के सब घिनौने कामों के अनुसार बहुत बड़ा अपराध किया; और यहोवा के उस भवन को जो उस ने यरूशलेम में पवित्र किया या, अपवित्र किया।

15 और उनके पितरोंके परमेश्वर यहोवा ने अपके दूतोंके द्वारा उनके पास बार-बार उठकर और भेजनेवाले को भेजा; क्‍योंकि उस ने अपक्की प्रजा और अपके निवास स्यान पर तरस खाया;

16 परन्तु उन्होंने परमेश्वर के दूतोंको ठट्ठोंमें उड़ाया, और उसके वचनोंको तुच्छ जाना, और उसके भविष्यद्वक्ताओंकी निन्दा की, यहां तक कि यहोवा का कोप अपक्की प्रजा पर ऐसा भड़क उठा, कि उसका कोई उपाय न रहा।

17 इसलिथे वह उन पर कसदियोंके राजा को ले आया, जिस ने उनके जवानोंको उनके पवित्रस्थान के भवन में तलवार से घात किया, और क्या जवान, वा कुंवारे, क्या बूढ़े वा बूढे हुए पुरूष पर कोई तरस न खाया; उसने उन सब को अपने हाथ में कर दिया।

18 और परमेश्वर के भवन के सब पात्र, क्या छोटे क्या बड़े, और यहोवा के भवन के भण्डार, और राजा और उसके हाकिमोंके भण्डार; इन सब को वह बाबुल ले आया।

19 और उन्होंने परमेश्वर के भवन को फूंक दिया, और यरूशलेम की शहरपनाह को ढा दिया, और उसके सब महलोंको आग में झोंक दिया, और उसके सब भली भाँति भस्म हो गए।

20 और जो तलवार से बच गए थे, उन्हें वह बाबेल को ले गया; जहां वे फारस के राज्य के राज्य तक उसके और उसके पुत्रोंके दास बने रहे;

21 जब तक देश अपने विश्रामदिनों का आनन्द न ले ले, तब तक यिर्मयाह के मुख से यहोवा का वचन पूरा हो; जब तक वह उजाड़ रही, तब तक वह साठ दस वर्ष पूरे करने के लिये विश्रामदिन मानी।

22 अब फारस के राजा कुस्रू के पहले वर्ष में, कि यिर्मयाह के मुख से यहोवा का वचन पूरा हो, यहोवा ने फारस के राजा कुस्रू की आत्मा को उभारा, कि उसने उसके सारे राज्य में एक घोषणा की, और यह कहते हुए लिखित रूप में भी लिखो,

23 फारस का राजा कुस्रू यों कहता है, पृय्वी के सब राज्य स्वर्ग के परमेश्वर यहोवा ने मुझे दिए हैं; और उस ने मुझ को यह आज्ञा दी है, कि उसके लिये यरूशलेम में जो यहूदा में है एक भवन बनाऊं। उसके सब लोगों में से तुम में से कौन है? उसका परमेश्वर यहोवा उसके संग रहे, और उसे ऊपर जाने दे।

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