जकर्याह

जकर्याह

 

अध्याय 1

पश्चाताप का आदेश दिया - घोड़ों की दृष्टि - देवदूत की प्रार्थना - चार सींगों की दृष्टि, और चार बढ़ई।

1 दारा के दूसरे वर्ष के आठवें महीने में, यहोवा का यह वचन इद्दो भविष्यद्वक्ता के पुत्र बेरेक्याह के पुत्र जकर्याह के पास यह कहला पहुंचा,

2 यहोवा तुम्हारे पुरखाओं से बहुत अप्रसन्न हुआ है।

3 इसलिथे तू उन से कहना, सेनाओं का यहोवा योंकहता है; सेनाओं के यहोवा की यह वाणी है, तुम मेरी ओर फिरो, और मैं तुम्हारी ओर फिरूंगा, सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है।

4 अपने पुरखाओं की नाईं न बनो, जिन को पहिले भविष्यद्वक्ता यह कहकर पुकारते थे, कि सेनाओं का यहोवा योंकहता है; अब तुम अपनी बुरी चालचलन और अपने बुरे कामों से फिरो; परन्तु उन्होंने न तो सुना, और न मेरी सुनी, यहोवा की यही वाणी है।

5 तुम्हारे पिता, वे कहाँ हैं? और भविष्यद्वक्ता, क्या वे सदा जीवित रहते हैं?

6 परन्तु मेरी वे बातें और मेरी विधियां, जिनकी आज्ञा मैं ने अपके दास भविष्यद्वक्ताओंको दी थी, क्या उन्होंने तुम्हारे पुरखाओं को पकड़ न लिया? और उन्होंने लौटकर कहा, जैसा सेनाओं के यहोवा ने हम से, हमारे चालचलन और हमारे कामोंके अनुसार वैसा ही करने की युक्ति की, उसने हम से वैसा ही व्यवहार किया।

7 दारा के दूसरे वर्ष के ग्यारहवें महीने के चौबीसवें दिन को, जो सेबत नाम है, इद्दो भविष्यद्वक्ता के पुत्र बेरेक्याह के पुत्र जकर्याह के पास यहोवा का यह वचन पहुंचा,

8 मैं ने रात को देखा, और क्या देखा, कि एक पुरूष लाल घोड़े पर सवार होकर नीचे में मेंहदी के पेड़ोंके बीच खड़ा है; और उसके पीछे लाल घोड़े, चित्तीदार, और श्वेत थे।

9 तब मैं ने कहा, हे मेरे प्रभु, ये क्या हैं? और जिस दूत ने मुझ से बातें की, उस ने मुझ से कहा, मैं तुझे बताऊंगा कि ये क्या हैं।

10 और जो पुरूष मेंहदी के वृक्षोंके बीच में खड़ा या, उस ने उत्तर दिया, कि ये वे हैं, जिन्हें यहोवा ने पृय्वी पर इधर-उधर चलने के लिथे भेजा है।

11 और उन्होंने यहोवा के उस दूत को जो मेंहदी के बीच में खड़ा था, उत्तर दिया, और कहा, हम पृय्वी पर इधर-उधर फिरते-फिरते हैं, और देखो, सारी पृय्वी शांत बैठी है, और विश्राम में है।

12 तब यहोवा के दूत ने उत्तर दिया, हे सेनाओं के यहोवा, तू कब तक यरूशलेम और यहूदा के नगरोंपर, जिन पर तू साठ वर्ष से क्रोध करता आया है, दया न करेगा?

13 और यहोवा ने उस दूत को उत्तर दिया, जिस ने मुझ से अच्छी बातें और मनभावन बातें कहीं।

14 तब जिस दूत ने मुझ से बातें की या, उस ने मुझ से कहा, तू दोहाई देकर कह, सेनाओं का यहोवा योंकहता है; मुझे यरूशलेम और सिय्योन के लिये बड़ी जलन हुई है।

15 और मैं उन अन्यजातियों से जो सुखी हैं बहुत अप्रसन्‍न हूं; क्‍योंकि मैं तो थोड़ा सा अप्रसन्‍न था, और उन्होंने दु:ख को बढ़ाया।

16 इसलिथे यहोवा योंकहता है; मैं करूणा के साथ यरूशलेम को लौटा हूं; मेरा घर उस में बनाया जाएगा, सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है, और यरूशलेम पर एक डोरी डाली जाएगी।

17 फिर भी पुकारो, कहो, सेनाओं का यहोवा यों कहता है; समृद्धि के द्वारा मेरे नगर अभी तक विदेशों में फैले होंगे; और यहोवा सिय्योन को शान्ति देगा, तौभी यरूशलेम को चुन लेगा।

18 तब मैं ने आंखें उठाकर क्या देखा, कि क्या चार सींग हैं?

19 और मैं ने उस दूत से जो मुझ से बातें करता या, पूछा, ये क्या हैं? और उस ने मुझे उत्तर दिया, ये वे ही सींग हैं, जिन्होंने यहूदा, इस्राएल और यरूशलेम को तितर-बितर किया है।

20 और यहोवा ने मुझे चार बढ़ई दिखाए।

21 तब मैं ने कहा, ये क्या करने आए हैं? और उस ने कहा, ये वे ही सींग हैं, जिन्होंने यहूदा को ऐसा तितर-बितर किया है, कि किसी ने सिर न उठाया; परन्तु ये उन्हें मारने आए हैं, कि अन्यजातियों के उन सींगों को निकाल फेंकें, जिन्होंने यहूदा देश को तितर-बितर करने के लिथे अपके सींग ऊपर उठाए थे।


अध्याय 2

यरूशलेम को मापा गया — सिय्योन का छुटकारे

1 फिर मैं ने आंखें उठाकर क्या देखा, कि एक मनुष्य हाथ में नाप लिए हुए है।

2 तब मैं ने कहा, तू कहां जाता है? और उस ने मुझ से कहा, यरूशलेम को नापना, कि उसकी चौड़ाई क्या है, और उसकी लम्बाई कितनी है।

3 और देखो, जो दूत मुझ से बातें करता या, वह निकला, और दूसरा दूत उस से भेंट करने को निकला,

4 उस ने उस से कहा, भागकर उस जवान से यह कह, कि यरूशलेम नगरोंके समान बसा रहेगा, जिस में मनुष्य और पशु बहुत हों;

5 क्योंकि यहोवा की यह वाणी है, मैं उसके लिये चारोंओर आग की शहरपनाह ठहरूंगा, और उसके बीच में तेज होगा।

6 हो, हो, निकलकर उत्तर देश से भाग निकल, यहोवा की यह वाणी है, यहोवा की यह वाणी है, कि मैं ने तुम को आकाश की चारों दिशाओं की नाईं फैला दिया है।

7 हे सिय्योन, जो बाबुल की बेटी के संग रहता है, अपना उद्धार कर।

8 क्योंकि सेनाओं का यहोवा यों कहता है; महिमा के बाद उसने मुझे उन राष्ट्रों के पास भेजा है जिन्होंने तुम्हें लूट लिया है; क्योंकि जो तुझे छूता है, वह अपक्की आंख की पुतली को छूता है।

9 क्योंकि देख, मैं उन पर हाथ उठाऊंगा, और वे अपके दासोंकी लूट ठहरेंगे; और तुम जान लोगे कि सेनाओं के यहोवा ने मुझे भेजा है।

10 हे सिय्योन की बेटी, गाओ और आनन्द करो; क्योंकि देख, मैं आता हूं, और तेरे बीच में बसा रहूंगा, यहोवा की यही वाणी है।

11 और उस समय बहुत सी जातियां यहोवा से मिल जाएंगी, और वे मेरी प्रजा ठहरेंगी; और मैं तेरे बीच में बसा रहूंगा, और तू जान लेगा, कि सेनाओं के यहोवा ने मुझे तेरे पास भेजा है।

12 और यहोवा यहूदा के पवित्र देश में अपके भाग का अधिकारी होगा, और यरूशलेम को फिर से चुन लेगा।

13 हे सब प्राणियों, यहोवा के साम्हने चुप रहो; क्‍योंकि वह अपके पवित्र निवास में से जिलाया गया है।


अध्याय 3

शैतान ने यहोशू का विरोध किया - शाखा का वादा किया गया है।

1 और उसने मुझे यहोशू महायाजक को यहोवा के दूत के साम्हने खड़ा दिखाया, और शैतान उसकी दहिनी ओर उसका साम्हना करने को खड़ा हुआ।

2 और यहोवा ने शैतान से कहा, हे शैतान, यहोवा तुझे ताड़ना दे; यहाँ तक कि यहोवा जिस ने यरूशलेम को चुना है, वह तुझे डांटेगा; क्या यह आग से निकाला गया ब्रांड नहीं है?

3 यहोशू गन्दे वस्त्र पहिने हुए, और दूत के साम्हने खड़ा हुआ।

4 उस ने उत्तर दिया, और अपके साम्हने खड़े रहनेवालोंसे कहा, उस से मैले वस्त्र उतार ले। और उस से उस ने कहा, सुन, मैं ने तेरे अधर्म को तेरे पास से दूर कर दिया है, और मैं तुझे वस्‍त्र पहिनाता हूं।

5 और मैं ने कहा, वे उसके सिर पर एक सुहावना कपड़ा लगाए। तब उन्होंने उसके सिर पर एक सुहावना कपड़ा लगाया, और उसे वस्त्र पहिनाए। और यहोवा का दूत पास खड़ा रहा।

6 और यहोवा के दूत ने यहोशू से यह कहकर विरोध किया,

7 सेनाओं का यहोवा यों कहता है; यदि तू मेरे मार्ग पर चले, और मेरी आज्ञा को माने, तो मेरे घर का भी न्याय करना, और मेरे आंगनों की भी चौकसी करना, और जो पास खड़े हैं उनके बीच मैं तुझे चलने के स्थान दूंगा।

8 हे यहोशू, महायाजक, तू और तेरे संगी जो तेरे साम्हने बैठे हैं, सुन; क्योंकि वे चकित मनुष्य हैं; क्‍योंकि देख, मैं अपके दास को शाखा निकालूंगा।

9 क्योंकि देखो, वह पत्थर जो मैं ने यहोशू के साम्हने रखा है; एक पत्थर पर सात आंखें हों; देख, सेनाओं के यहोवा की यह वाणी है, मैं उसकी कब्र खोदूंगा, और उस देश के अधर्म को एक ही दिन में दूर कर दूंगा।

10 उस समय सेनाओं के यहोवा की यह वाणी है, कि तुम अपके अपके अपके अपके अपके पड़ोसी को दाखलता और अंजीर के वृक्ष तले बुलाना।


अध्याय 4

सोने की दीवट - जैतून के दो पेड़, और दो अभिषिक्त।

1 और जिस दूत ने मुझ से बातें की, उस ने फिर आकर मुझे ऐसे जगाया जैसे कोई नींद से जाग गया हो,

2 और मुझ से पूछा, तू क्या देखता है? और मैं ने कहा, मैं ने दृष्टि की है, और क्या देखा है, कि मैं ने सब सोने की दीवट को देखा है, और उसके ऊपर एक कटोरा है, और उस पर उसके सात दीपक हैं, और उन सात दीपकोंके ऊपर सात नलियां हैं, जो उसके ऊपर हैं;

3 और उसके पास जलपाई के दो वृक्ष, एक कटोरे की दहिनी ओर, और दूसरा उसकी बाईं ओर।

4 तब मैं ने उत्तर दिया, और उस दूत से जो मुझ से बातें करता या, कहा, हे मेरे प्रभु, ये क्या हैं?

5 तब जिस दूत ने मुझ से बातें की या, उस ने मुझ से कहा, क्या तू नहीं जानता कि ये क्या हैं? और मैंने कहा, नहीं, मेरे स्वामी।

6 तब उस ने उत्तर देकर मुझ से कहा, यहोवा का यह वचन जरूब्बाबेल से यह है, कि न तो पराक्रम से, और न शक्ति से, परन्तु मेरी आत्मा से, सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है।

7 हे महान पर्वत, तू कौन है? जरूब्बाबेल के साम्हने तू मैदान हो जाएगा; और वह उसका मणि उस पर जयजयकार करते हुए निकलेगा, हे अनुग्रह, उस पर अनुग्रह।

8 फिर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि,

9 इस भवन की नेव जरूब्बाबेल के हाथों ने डाली है; उसके हाथ भी उसे पूरा करेंगे; और तुम जान लोगे कि सेनाओं के यहोवा ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है।

10 क्‍योंकि किस ने छोटी बातोंके दिन को तुच्छ जाना? क्योंकि वे आनन्दित होंगे, और उन सातोंके संग जरूब्बाबेल के हाथ की बेर को देखेंगे; वे यहोवा के दास हैं, जो सारी पृय्वी पर इधर-उधर भागते फिरते हैं।

11 तब मैं ने उत्तर देकर उस से कहा, दीवट की दाहिनी ओर और उसकी बाईं ओर जलपाई के ये दोनोंवृक्ष क्या हैं?

12 और मैं ने फिर उत्तर दिया, और उस से कहा, जलपाई की ये दो शाखाएं क्या हैं जो सोने के दो नलोंके द्वारा अपने आप में से सोने का तेल खाली कर देती हैं?

13 उस ने मुझे उत्तर देकर कहा, क्या तू नहीं जानता कि ये क्या हैं? और मैंने कहा, नहीं, मेरे स्वामी।

14 तब उस ने कहा, ये वे दो अभिषिक्‍त जन हैं जो सारी पृय्वी के यहोवा के साम्हने खड़े हैं।


अध्याय 5

उड़ता हुआ रोल - एपा में दबाई गई स्त्री।

1 तब मैं ने फिरकर आंखें उठाई, और क्या देखा, कि एक उड़ता हुआ रोल है।

2 उस ने मुझ से कहा, तू क्या देखता है? और मैं ने उत्तर दिया, मैं एक उड़ता हुआ रोल देखता हूं; उसकी लम्बाई बीस हाथ और चौड़ाई दस हाथ की है।

3 उस ने मुझ से कहा, यह शाप है जो सारी पृय्वी पर फैला है; क्‍योंकि जो कोई चोरी करेगा, वह उसके अनुसार इस अलंग के समान नाश किया जाएगा; और जो कोई शपय खाए, वह उसके अनुसार उसी अलंग के समान नाश किया जाए।

4 सेनाओं के यहोवा की यह वाणी है, मैं उसको निकालूंगा, और वह चोर के घराने में, और मेरे नाम की झूठी शपय खानेवाले के घर में प्रवेश करेगा, और वह उसके घर के बीच में रहेगा, और वह उसकी लकड़ी और उसके पत्‍थरों समेत उसे भस्म कर दो।

5 तब जिस दूत ने मुझ से बातें की या, उस ने निकलकर मुझ से कहा, आंखें उठाकर देख, कि यह क्या निकल रहा है।

6 और मैं ने कहा, यह क्या है? उस ने कहा, यह एपा निकलता है। उस ने और कहा, यह सारी पृय्वी पर उनकी समानता है।

7 और देखो, एक किक्कार सीसा ऊपर उठा हुआ था; और यह एपा के बीच में बैठी हुई स्त्री है।

8 उस ने कहा, यह तो दुष्टता है। और उस ने उसको एपा के बीच में डाल दिया; और उस ने सीसे का भार उसके मुंह पर डाल दिया।

9 तब मैं ने आंखें उठाकर क्या देखा, कि दो स्त्रियां निकलीं, और उनके पंखोंमें आँधी चल रही है; क्योंकि उनके पंख सारस के पंखों के समान थे; और उन्होंने एपा को पृय्वी और आकाश के बीच में ऊंचा किया।

10 तब मैं ने उस दूत से जो मुझ से बातें करता या, कहा, ये एपा कहां धारण करते हैं?

11 उस ने मुझ से कहा, शिनार देश में उसका एक भवन बनाना; और वह वहां स्थिर होकर अपक्की ही नींव पर खड़ा किया जाए।


अध्याय 6

चार रथों का दर्शन—यहोशू के मुकुट—शाखा।

1 और मैं ने फिरकर आंखें उठाई, और क्या देखा, कि दो पहाड़ोंके बीच से चार रय निकले हैं; और पहाड़ पीतल के पहाड़ थे।

2 पहिले रथ में लाल घोड़े थे; और दूसरे रथ में काले घोड़े;

3 और तीसरे रथ में श्वेत घोड़े; और चौथे रथ में हथेलियां और बे घोड़े।

4 तब मैं ने उस दूत से जो मुझ से बातें करता या, कहा, हे मेरे प्रभु, ये क्या हैं?

5 तब स्वर्गदूत ने उत्तर देकर मुझ से कहा, स्वर्ग के ये चार दास हैं, जो सारी पृय्वी के यहोवा के साम्हने खड़े होकर निकल जाते हैं।

6 जो काले घोड़े उन में हैं, वे उत्तर देश को चले जाते हैं; और गोरे लोग उनके पीछे पीछे चले जाते हैं; और हथेलियां दक्खिन देश की ओर निकल जाती हैं।

7 और खाड़ी निकलकर पृय्वी पर इधर-उधर फिरने लगे, और जाने का यत्न किया; और उस ने कहा, यहां से चले आओ, पृय्वी पर इधर-उधर चल फिरो। इसलिए वे पृथ्वी पर इधर-उधर घूमते रहे।

8 तब उस ने मुझ से दोहाई दी, और मुझ से कहा, सुन, जो उत्तर की ओर जाते हैं, उन ने उत्तर देश में मेरी आत्मा को शान्त कर दिया है।

9 और यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि,

10 बन्धुवाई में से हेल्डै, तोबिय्याह और यदायाह में से जो बेबीलोन से आए हैं, उनको ले, और उसी दिन आकर सपन्याह के पुत्र योशिय्याह के घर में जाना;

11 तब चान्दी और सोना लेकर मुकुट बनवाना, और उनको यहोसेदेक के पुत्र यहोशू महायाजक के सिर पर रखना;

12 और उस से कहो, सेनाओं का यहोवा यों कहता है, देखो वह मनुष्य है जिसका नाम शाखा है; और वह अपके स्यान में से बड़ा होकर यहोवा का भवन बनाएगा;

13 वह यहोवा का भवन भी बनाए; और वह महिमा उठाएगा, और अपने सिंहासन पर विराजमान होगा; और वह अपके सिंहासन पर याजक ठहरे; और उन दोनों के बीच मेल की युक्ति हो।

14 और वे मुकुट हेलेम, और तोबिय्याह, और यदायाह, और सपन्याह के पुत्र हेन के लिथे यहोवा के भवन में स्मरण करने के लिथे हों।

15 और जो दूर दूर हों वे आकर यहोवा के भवन में निर्माण करें, और तुम जान लोगे कि सेनाओं के यहोवा ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है। और यह तब होगा, जब तुम अपने परमेश्वर यहोवा की वाणी को यत्न से मानोगे।


अध्याय 7

बंदी उपवास की पूछताछ करते हैं - पाप उनकी कैद का कारण है।

1 और दारा राजा के चौथे वर्ष के नौवें महीने के चौथे दिन किसल्यू में यहोवा का वचन जकर्याह के पास पहुंचा;

2 जब उन्होंने शेजेर और रेगेममेलेक परमेश्वर के भवन में अपके जनोंको यहोवा के साम्हने प्रार्यना करने को भेज दिया,

3 और सेनाओं के यहोवा के भवन के याजकों, और भविष्यद्वक्ताओं से कहूं, कि क्या मैं पांचवें महीने में अपने को अलग करके रोऊं, जैसा मैं इतने वर्षों से करता आया हूं?

4 तब सेनाओं के यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि

5 उस देश के सब लोगों और याजकों से कह, कि जब तुम पांचवें और सातवें महीने में, अर्यात् सत्तर वर्ष तक उपवास और विलाप करते रहे, तब क्या तुम ने मेरे लिथे भी उपवास रखा था?

6 और जब तुम ने खाया, और पिया, तो क्या अपके लिथे नहीं खाया, और अपके लिथे नहीं पिया?

7 क्या तुम उन वचनों को न सुनना जो यहोवा ने पहिले भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा पुकारा था, जब यरूशलेम और उसके चारोंओर के नगर और उसके चारोंओर के दक्खिन और तराई में लोग बसे हुए थे, और वे समृद्ध थे?

8 और यहोवा का यह वचन जकर्याह के पास पहुंचा, और कहा,

9 सेनाओं का यहोवा योंकहता है, कि सच्चा न्याय करना, और अपके अपके भाई पर दया और करुणा करना;

10 और न विधवा पर अन्धेर करना, न अनाथों को, न परदेशियों को, और न कंगालों पर; और तुम में से कोई अपने भाई के विरुद्ध अपने मन में बुराई की कल्पना न करे।

11 परन्तु उन्होंने सुनने से इन्कार किया, और कन्धा खींच लिया, और कान बन्द कर लिए, कि वे न सुनें।

12 हां, उन्होंने अपने मन को दृढ़ पत्यर की नाईं बना लिया, ऐसा न हो कि वे व्यवस्था और उन वचनोंको सुनें जिन्हें सेनाओं के यहोवा ने पहिले भविष्यद्वक्ताओंके द्वारा अपके आत्मा में भेजा है; इसलिथे सेनाओं के यहोवा की ओर से बड़ा कोप भड़क उठा।

13 इसलिथे ऐसा हुआ, कि जब उस ने दोहाई दी, और उन्होंने न सुनी; इसलिथे उन्होंने दोहाई दी, और मैं ने न सुनी, सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है;

14 परन्तु मैं ने उनको बवण्डर के द्वारा उन सब जातियोंमें, जिन को वे नहीं जानते थे, तित्तर बित्तर कर दिया। इस प्रकार उनके पीछे यह देश उजाड़ हो गया, कि कोई वहां से होकर न निकला, और न लौटा; क्योंकि उन्होंने मनोहर देश को उजाड़ दिया है।


अध्याय 8

अंत के दिनों में, यरूशलेम को फिर से स्थापित किया जाएगा, यहूदा को इकट्ठा किया जाएगा, और यहोवा अपने लोगों को अतीत की किसी भी चीज़ से परे आशीर्वाद देगा।

1 सेनाओं के यहोवा का यह वचन फिर मेरे पास पहुंचा,

2 सेनाओं का यहोवा यों कहता है; मुझे सिय्योन के लिए बड़ी जलन हुई, और बड़ी जलजलाहट के साथ मुझे उसके लिए जलन हुई।

3 यहोवा यों कहता है; मैं सिय्योन लौट आया हूं, और यरूशलेम के बीच में बसा रहूंगा; और यरूशलेम सच्चाई का नगर कहलाएगा; और सेनाओं के यहोवा का पर्वत पवित्र पर्वत है।

4 सेनाओं का यहोवा यों कहता है; यरूशलेम की गलियों में बूढे और बूढ़ी औरतें और अपक्की लाठी हाथ में लिये हुए बहुत युग तक बसे रहेंगे।

5 और नगर की गलियां उसकी सड़कों पर खेल रहे लड़के-लड़कियों से भरी रहेंगी।

6 सेनाओं का यहोवा यों कहता है; यदि इन दिनों में इन बचे हुओं की दृष्टि में यह अद्भुत है, तो क्या यह मेरी दृष्टि में भी अद्भुत होगा? सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है।

7 सेनाओं का यहोवा यों कहता है; देख, मैं अपनी प्रजा को पूरब और पच्छिम देश से इकट्ठा करूंगा;

8 और मैं उनको ले आऊंगा, और वे यरूशलेम के बीच में बसेंगे; और वे मेरी प्रजा ठहरेंगे, और सच्चाई और धर्म से मैं उनका परमेश्वर ठहरूंगा।

9 सेनाओं का यहोवा यों कहता है; तुम जो इन दिनों में भविष्यद्वक्ताओं के मुख से इन वचनों को सुनते हो, जो उस दिन हुए थे, जब सेनाओं के यहोवा के भवन की नेव डाली गई, कि मन्दिर बनाया जाए।

10 क्योंकि उन दिनों के पहिले न तो मनुष्य का भाड़ा, और न पशु का भाड़ा; जो कोई दु:ख के कारण निकला या भीतर आया, उसे न तो चैन मिला; क्योंकि मैं ने सब मनुष्यों को अपके पड़ोसी के विरुद्ध खड़ा किया है।

11 परन्तु अब मैं इस प्रजा के बचे हुओं में पहिले दिनों की नाईं न रहूंगा, सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है।

12 क्योंकि बीज समृद्ध होगा; दाखलता उसे फल देगी, और भूमि से उसकी उपज बढ़ेगी, और आकाश से ओस पड़ेगी; और मैं इस प्रजा के बचे हुओं को इन सब वस्तुओं का अधिकारी बनाऊंगा।

13 और ऐसा होगा, कि हे यहूदा के घराने, और इस्राएल के घराने, अन्यजातियोंके बीच तुम शाप थे; इसी प्रकार मैं तुम्हें इकट्ठा करूंगा, और तुम आशीष पाओगे; डरो मत, लेकिन अपने हाथों को मजबूत होने दो।

14 क्योंकि सेनाओं का यहोवा यों कहता है; सेनाओं के यहोवा की यह वाणी है, कि जब तेरे पुरखाओं ने मुझे क्रोध दिलाया, तब मैं ने तुझे दण्ड देने का विचार किया, और मैं ने मन न फिराया;

15 सो मैं ने उन दिनोंमें फिर सोचा है, कि यरूशलेम और यहूदा के घराने का भला करूं; डरो तुम नहीं।

16 जो काम तुम्हें करना होगा वे ये हैं; तुम अपने पड़ोसी से सच बोलो; सत्य और शान्ति का न्याय अपके फाटकों पर करना;

17 और तुम में से कोई अपके अपके मन में अपके पड़ोसी के विरूद्ध बुराई की कल्पना न करे; और झूठी शपथ से प्रेम न करना; क्योंकि इन सब बातों से मैं बैर रखता हूं, यहोवा की यही वाणी है।

18 और सेनाओं के यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि

19 सेनाओं का यहोवा यों कहता है; यहूदा के घराने के लिये चौथे महीने का उपवास, और पांचवें का उपवास, और सातवें का उपवास, और दसवां का उपवास, यहूदा के घराने के लिये हर्ष और उल्लास, और हर्षोल्लास के पर्व हों; इसलिए सच्चाई और शांति से प्यार करो।

20 सेनाओं का यहोवा यों कहता है; ऐसा होगा, कि लोग और बहुत नगरों के रहने वाले लोग आएंगे:

21 और एक नगर के रहनेवाले दूसरे नगर के पास जाकर यह कहें, कि आओ, हम फुर्ती से यहोवा के साम्हने प्रार्यना करने, और सेनाओं के यहोवा को ढूंढ़ने को जाएं; मैं भी जाऊंगा।

22 हां, बहुत से लोग और सामर्थी जातियां यरूशलेम में सेनाओं के यहोवा को ढूंढ़ने और यहोवा के साम्हने प्रार्यना करने को आएंगी।

23 सेनाओं का यहोवा यों कहता है; उन दिनों में ऐसा होगा, कि जाति जाति की सब भाषा बोलनेवालोंमें से दस मनुष्य, यहां तक कि जो यहूदी है उसकी स्कर्ट को यह कहकर पकड़ लेंगे, कि हम तेरे संग चलेंगे, क्योंकि हम ने सुना है कि परमेश्वर आपके साथ है।


अध्याय 9

यरूशलेम ने मसीह के आने के लिए आनन्दित होने का आह्वान किया - परमेश्वर की रक्षा की प्रतिज्ञा।

1 हद्रक और दमिश्क के देश में यहोवा के वचन का भार उसके शेष भाग पर रहेगा; जब इस्राएल के सब गोत्रों की नाई मनुष्य की आंखें यहोवा की ओर लगी रहेंगी।

2 और हमात भी उसके पास से होकर जाएगा; सोर, और सीदोन, चाहे वह बहुत बुद्धिमान हो।

3 और सोर ने अपके लिये दृढ़ गढ़ बना लिया, और चान्दी को मिट्टी की नाईं, और अच्छा सोना सड़कों की कीच के समान इकठ्ठा किया।

4 देख, यहोवा उसे बाहर निकाल देगा, और वह उसकी शक्ति को समुद्र में मार डालेगा; और वह आग से भस्म हो जाएगी।

5 अशकलोन उसको देखेगा, और डरेगा; गाजा भी इसे देखेगा, और बहुत उदास होगा, और एक्रोन; क्योंकि उसकी आशा लज्जित होगी; और राजा गाजा से नाश हो जाएगा, और अशकलोन बसा न रहेगा।

6 और अशदोद में एक कमीने बसेगा, और मैं पलिश्तियोंके घमण्ड को नाश करूंगा।

7 और मैं उसके मुंह से उसका लोहू, और उसके घिनौने काम उसके दांतोंके बीच में से दूर करूंगा; परन्तु जो बचा रहे, वही हमारे परमेश्वर के लिथे ठहरेगा, और वह यहूदा में हाकिम, और एक्रोन यबूसी के समान ठहरेगा।

8 और मैं अपके घर के चारोंओर सेना के कारण, और उसके आनेवाले के कारण, और उसके लौटनेवाले के कारण डेरे डालूंगा; और कोई अन्धेर करनेवाला फिर उन में से होकर न चलेगा; क्‍योंकि अब मैं ने अपक्की आंखोंसे देखा है।

9 हे सिय्योन की बेटी, अति आनन्दित हो; हे यरूशलेम की पुत्री, जयजयकार करो; देख, तेरा राजा तेरे पास आता है; वह धर्मी और उद्धार पाने वाला है; दीन, और गदहे पर सवार, और बछेड़े पर गदहे का बच्चा।

10 और मैं एप्रैम के रथ, और यरूशलेम के घोड़े को नाश करूंगा, और युद्ध का धनुष नाश किया जाएगा; और वह अन्यजातियों से मेल मिलाप करेगा; और उसका राज्य समुद्र से समुद्र तक, और महानद से लेकर पृय्वी के छोर तक रहेगा।

11 मैं ने तेरी वाचा के लोहू के द्वारा तेरे बन्दियोंको उस गड़हे में से जिसमें जल नहीं है, निकाल दिया है।

12 हे आशा के बन्दियों, दृढ़ गढ़ की ओर फिरो; मैं आज भी कहता हूं, कि मैं तुझ को दुगना फल दूंगा;

13 जब मैं ने यहूदा को अपके लिथे झुकाकर धनुष को एप्रैम से भर दिया, और हे सिय्योन, तेरे पुत्रोंको, हे यूनान, तेरे पुत्रोंके साम्हने खड़ा किया, और तुझे एक शूरवीर की तलवार बना दिया।

14 और यहोवा उनके ऊपर दिखाई देगा, और उसका तीर बिजली की नाईं निकलेगा; और यहोवा परमेश्वर नरसिंगा फूंकेगा, और दक्खिन दिशा के बवंडरोंके संग चलेगा।

15 सेनाओं का यहोवा उनकी रक्षा करेगा; और वे खा जाएंगे, और गोफन के पत्यरों से अपने वश में कर लेंगे; और वे पीएंगे, और दाखमधु की नाईं ऐसा शोर मचाएंगे; और वे कटोरे और वेदी के कोनोंके समान भरे जाएं।

16 और उस समय उनका परमेश्वर यहोवा अपक्की प्रजा की भेड़-बकरियोंके समान उनका उद्धार करेगा, क्योंकि वे मुकुट के पत्यरोंके समान उसके देश पर ध्वजा के समान ऊंचे किए जाएंगे।

17 क्योंकि उसकी भलाई कितनी बड़ी है, और उसकी शोभा क्या ही बड़ी है! अन्न जवानों को प्रफुल्लित करेगा, और दासियों को नया दाखमधु पिलाएगा।


अध्याय 10

परमेश्वर की खोज की जानी है - वह अपने झुंड को बचाएगा और पुनर्स्थापित करेगा।

1 बाद की वर्षा के समय यहोवा से वर्षा मांगो; इसलिथे यहोवा उजले बादल बनाएगा, और उन्हें मैदान की सब घासोंमें मेंह बरसाएगा।

2 क्योंकि मूरतों ने व्यर्थ बातें की हैं, और भविष्यद्वक्ताओं ने झूठ देखा है, और फूठे स्वप्न देखे हैं; वे व्यर्थ आराम करते हैं; इस कारण वे भेड़-बकरियों की नाईं चले, और कोई चरवाहा न होने के कारण वे व्याकुल हो उठे।

3 मेरा कोप चरवाहों पर भड़क उठा, और मैं ने बकरियोंको दण्ड दिया; क्योंकि सेनाओं के यहोवा ने अपक्की भेड़-बकरियोंको यहूदा के घराने की सुधि ली है, और युद्ध में उनको अपना अच्छा घोड़ा बनाया है।

4 उसी में से कोना निकला, उस में से कील, उसी में से युद्ध का धनुष, और सब अन्धेर करनेवाले एक संग निकले।

5 और वे उन शूरवीरोंके समान होंगे, जो युद्ध में अपने शत्रुओं को सड़कोंकी कीचड़ में रौंदते हैं; और वे लड़ेंगे, क्योंकि यहोवा उनके संग है, और घोड़ोंके सवार लज्जित होंगे।

6 और मैं यहूदा के घराने को दृढ़ करूंगा, और यूसुफ के घराने का उद्धार करूंगा, और उनके स्थान पर उन्हें फिर ले आऊंगा; क्योंकि मैं उन पर दया करता हूं; और वे ऐसे होंगे मानो मैं ने उनको दूर न किया हो; क्योंकि मैं उनका परमेश्वर यहोवा हूं, और उनकी सुनूंगा।

7 और एप्रैम के लोग शूरवीर के समान होंगे, और उनका मन दाखमधु की नाईं मगन होगा; वरन उनकी सन्तान इसे देखकर आनन्दित होगी; उनका मन यहोवा के कारण आनन्दित होगा।

8 मैं उनके लिथे फुफकारूंगा, और उन्हें बटोरूंगा; क्योंकि मैं ने उनको छुड़ा लिया है, और वे बढ़ते ही जाएंगे।

9 और मैं उन्हें लोगोंके बीच बोऊंगा; और वे मुझे दूर देशों में स्मरण करेंगे; और वे अपके बालकोंके संग रहेंगे, और फिर जाएंगे।

10 मैं उनको भी मिस्र देश से फिर ले आऊंगा, और अश्शूर से इकट्ठा करूंगा; और मैं उनको गिलाद और लाबानोन के देश में पहुंचाऊंगा; और उनके लिये जगह न पाएगी।

11 और वह दु:ख के साथ समुद्र में से होकर जाएगा, और समुद्र की लहरोंको मारेगा, और महानद के सब गहिरे स्थान सूख जाएंगे; और अश्शूर का घमण्ड गिरा दिया जाएगा, और मिस्र का राजदण्ड दूर हो जाएगा।

12 और मैं उन्हें यहोवा में दृढ़ करूंगा; और वे उसके नाम से ऊपर-नीचे चलेंगे, यहोवा की यही वाणी है।


अध्याय 11

यरुशलम का विनाश - सौंदर्य की सीढ़ियाँ और बैंड टूट गए - मूर्ख चरवाहा।

1 हे लबानोन, अपके द्वार खोल, कि आग तेरे देवदारोंको भस्म करे।

2 हाउल, देवदार का पेड़; क्योंकि देवदार गिर गया है; क्योंकि पराक्रमी बिगड़ गए हैं; हे बाशान के बांज, हाय! क्योंकि विंटेज का जंगल नीचे आ गया है।

3 चरवाहों के गरजने का शब्द है; क्योंकि उनका वैभव नष्ट हो गया है; जवान सिंहों की दहाड़ की आवाज; क्योंकि यरदन का घमण्ड नष्ट हो गया है।

4 मेरा परमेश्वर यहोवा यों कहता है; वध के झुंड को खिलाओ;

5 जिसके अधिकारी उन्हें घात करें, और अपके आप को दोषी न ठहराएं; और उनके बेचनेवाले कहते हैं, यहोवा धन्य है; क्योंकि मैं धनी हूं; और उनके अपने चरवाहों ने उन पर दया नहीं की।

6 क्योंकि मैं उस देश के निवासियों पर फिर कभी दया न करूंगा, यहोवा की यही वाणी है; परन्तु देखो, मैं उन सब को उसके पड़ोसी और उसके राजा के हाथ में कर दूंगा; और वे देश को मारेंगे, और मैं उनको उनके हाथ से न छुड़ाऊंगा।

7 और हे भेड़-बकरियोंके कंगालों, हे भेड़-बकरियोंके भेड़-बकरियोंको मैं चराऊंगा। और मैं ने अपने पास दो डंडे लिये; एक को मैंने सौंदर्य कहा, और दूसरे को मैंने बैंड कहा; और मैं ने भेड़-बकरियोंको खिलाया।

8 मैं ने एक महीने में तीन चरवाहे भी नाश किए; और मेरे प्राण ने उन से प्रेम किया, और उनके प्राण ने भी मुझ से घृणा की।

9 तब मैं ने कहा, मैं तुझे न खिलाऊंगा; कि वह मर जाए, उसे मरने दो; और जो काटा जाना हो, वह काटा जाए; और बाकी सब एक दूसरे का मांस खाएं।

10 और मैं ने अपक्की लाठी, अर्यात् सौन्दर्य को लेकर उसको काट डाला, कि अपक्की वाचा को जो मैं ने सब लोगोंसे बान्धी या, तोड़ दूं।

11 और वह उसी दिन टूट गया; और भेड़-बकरियों के कंगाल जो मेरी बाट जोहते थे जान गए कि यह यहोवा का वचन है।

12 और मैं ने उन से कहा, यदि तुम भला समझे, तो मेरा दाम दे; और यदि नहीं, तो सहन करो। इसलिथे उन्होंने मेरे दाम के लिथे चान्दी के तीस सिक्के तौले।

13 और यहोवा ने मुझ से कहा, उसे कुम्हार के हाथ डाल दे; एक अच्छी कीमत कि मैं उनमें से बेशकीमती था। और मैं ने चान्दी के तीस टुकड़े लेकर यहोवा के भवन में कुम्हार के पास डाल दिए।

14 तब मैं ने अपक्की और लाठी, अर्थात् बैण्डोंको काट डाला, कि मैं यहूदा और इस्राएल के बीच भाईचारा तोड़ दूं।

15 और यहोवा ने मुझ से कहा, मूढ़ चरवाहे के साज-सामान अपने पास ले लो।

16 क्योंकि देखो, मैं देश में एक ऐसा चरवाहा खड़ा करूंगा, जो न तो कटे हुओं की सुधि लेगा, और न बच्चे को ढूंढ़ेगा, और न टूटे हुए को चंगा करेगा, और न खड़े को चराएगा; परन्तु वह चरबी का मांस खाएगा, और उनके पंजोंको टुकड़े टुकड़े कर देगा।

17 हाय उस मूरत के चरवाहे पर जो भेड़-बकरियोंको छोड़ देता है! उसकी बांह और उसकी दहिनी आंख पर तलवार रहे; उसका हाथ सुखाया जाएगा, और उसकी दाहिनी आंख पूरी तरह से काली हो जाएगी।


अध्याय 12

यरूशलेम कांपने का प्याला और बोझिल पत्थर — यहूदा की पुनर्स्थापना — यरूशलेम का पश्चाताप।

1 इस्राएल के लिथे यहोवा के वचन का बोझ, यहोवा की यही वाणी है, जो आकाश को ताने, और पृय्वी की नेव डालने, और उसके भीतर मनुष्य का आत्मा उत्पन्न करनेवाला है।

2 देख, जब वे यहूदा और यरूशलेम के विरुद्ध घेराबंदी में होंगे, तब मैं यरूशलेम को चारोंओर के सब लोगोंके लिथे थरथराने का कटोरा बना दूंगा।

3 उस समय मैं यरूशलेम को सब लोगोंके लिथे भारी पत्यर बनाऊंगा; उसका सारा बोझ उसके टुकड़े-टुकड़े कर दिया जाएगा, चाहे पृय्वी के सब लोग उसके विरुद्ध इकट्ठे हो जाएं।

4 उस समय यहोवा की यह वाणी है, कि मैं सब घोड़ोंको अचम्भा और उसके सवार को विक्षिप्तता से मारूंगा; और मैं यहूदा के घराने पर आंखें खोलूंगा, और प्रजा के सब घोड़ोंको अन्धा कर दूंगा।

5 और यहूदा के हाकिम अपके मन में कहें, कि यरूशलेम के निवासी अपके परमेश्वर सेनाओं के यहोवा में मेरा बल ठहरेंगे।

6 उस समय मैं यहूदा के हाकिमोंको लकड़ियोंके बीच आग का तवा, और पूले में आग की मशाल के समान कर दूंगा; और वे चारोंओर के सब लोगोंको दहिने और बायीं ओर भस्म करेंगे; और यरूशलेम फिर अपने स्यान में, वरन यरूशलेम में फिर बसा रहेगा।

7 यहोवा पहिले यहूदा के डेरे को भी बचाएगा, कि दाऊद के घराने का तेज, और यरूशलेम के निवासियोंका तेज यहूदा के विरूद्ध न बढ़े।

8 उस समय यहोवा यरूशलेम के निवासियोंकी रक्षा करेगा; और जो उस समय उन में निर्बल हो वह दाऊद के समान ठहरेगा; और दाऊद का घराना परमेश्वर के तुल्य ठहरेगा, और यहोवा का दूत उनके साम्हने ठहरेगा।

9 और उस दिन ऐसा होगा, कि मैं उन सब जातियोंको जो यरूशलेम पर चढ़ाई करेंगी, नाश करने का यत्न करूंगा।

10 और मैं दाऊद के घराने और यरूशलेम के निवासियोंपर अनुग्रह और बिनती की आत्मा उण्डेलूंगा; और जिस को उन्होंने बेधा है उस पर वे मेरी ओर दृष्टि करेंगे, और उसके लिये ऐसा विलाप करेंगे जैसे कोई अपके एकलौते पुत्र के लिये विलाप करता है, और उसके लिये ऐसा कटु होगा जैसा अपके पहलौठे के लिये कड़वा होता है।

11 उस दिन यरूशलेम में मगिद्दोन की तराई में हदद्रिमोन के शोक के समान बड़ा शोक होगा।

12 और देश शोक मनाएगा, और सब घराने अलग होंगे; दाऊद के घराने का घराना अलग, और उनकी स्त्रियां अलग; नातान के घराने का कुल अलग, और उनकी पत्नियां अलग;

13 लेवी के घराने का कुल अलग, और उनकी स्त्रियां अलग; शिमी का घराना अलग, और उनकी पत्नियां अलग;

14 जितने घराने बचे हैं, वे सब घराने अलग, और उनकी पत्नियां अलग।


अध्याय 13

पाप का फव्वारा - झूठी भविष्यवाणी - मसीह की मृत्यु।

1 उस समय दाऊद के घराने और यरूशलेम के निवासियोंके लिथे पाप और अशुद्धता के लिथे एक सोता खोला जाएगा।

2 और सेनाओं के यहोवा की यह वाणी है, उस दिन ऐसा होगा, कि मैं देश में से मूरतोंके नाम मिटा डालूंगा, और वे फिर स्मरण न रहेंगी; और मैं भविष्यद्वक्ताओं और अशुद्ध आत्मा को भी देश से निकाल दूंगा।

3 और ऐसा होगा, कि जब कोई भविष्यद्वाणी करेगा, तब उसका पिता और उसकी माता जिस ने उसको उत्पन्न किया है, उस से कहें, कि तू जीवित न रहेगा; क्योंकि तू यहोवा के नाम से झूठ बोलता है; और उसका पिता और उसकी माता जिस ने उसे उत्पन्न किया है, जब वह भविष्यद्वाणी करे, तब वह उसे मार डालेगा।

4 और उस दिन ऐसा होगा, कि भविष्यद्वक्ता अपके अपके दर्शन में से हर एक को भविष्यद्वाणी करके लज्जित होंगे; और वे धोखा देने के लिथे खुरदुरा वस्त्र न पहिनें;

5 परन्तु वह कहेगा, मैं भविष्यद्वक्ता नहीं, मैं तो किसान हूं; क्योंकि मनुष्य ने मुझे बचपन से ही पशु रखना सिखाया है।

6 और कोई उस से कहे, तेरे हाथ के ये घाव क्या हैं? तब वह उत्तर देगा, जिन से मैं अपके मित्रोंके घर में घायल हुआ था।

7 हे तलवार, मेरे चरवाहे और मेरे संगी पुरूष के विरुद्ध जाग, सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है; चरवाहे को मारो, और भेड़ें तित्तर बित्तर हो जाएंगी; और मैं छोटों पर हाथ फेरूंगा।

8 और ऐसा होगा, कि सारे देश में यहोवा की यह वाणी है, कि उसके दो भाग नाश किए जाएंगे और मर जाएंगे; परन्तु तीसरा उसमें छोड़ दिया जाए।

9 और मैं तीसरे भाग को आग में झोंक दूंगा, और चान्दी की नाईं उन्हें ऐसा शुद्ध करूंगा, जैसा सोना परखा जाता है; वे मेरा नाम लेंगे, और मैं उनकी सुनूंगा; मैं कहूंगा, यह मेरी प्रजा है; और वे कहेंगे, यहोवा मेरा परमेश्वर है।


अध्याय 14

यरूशलेम के विनाशकों ने नष्ट कर दिया — मसीह का दूसरा आगमन — यरूशलेम के शत्रुओं की विपत्ति।

1 सुन, यहोवा का दिन आनेवाला है, और तेरी लूट तेरे बीच बांटी जाएगी।

2 क्योंकि मैं सब जातियोंको यरूशलेम से लड़ने के लिथे इकट्ठा करूंगा; और नगर ले लिया जाएगा, और घरों में बारूदी सुरंगें, और स्त्रियां उजाड़ दी जाएंगी; और नगर का आधा भाग बन्धुआई में चला जाएगा, और जो लोग बचे हैं वे नगर में से नाश न किए जाएं।

3 तब यहोवा निकलकर उन जातियोंसे ऐसे लड़ेगा, जैसा उस ने लड़ाई के दिन में लड़ा था।

4 और उस दिन उसके पांव जैतून के पहाड़ पर, जो पूर्व में यरूशलेम के साम्हने है, खड़े रहें, और जैतून का पहाड़ उसके बीच में पूर्व और पश्चिम की ओर लगे रहे, और एक बहुत बड़ी घाटी होगी ; और आधा पर्वत उत्तर की ओर, और आधा भाग दक्खिन की ओर हट जाए।

5 और तुम पहाड़ों की तराई में भाग जाओगे; क्योंकि पहाड़ों की तराई अजल तक पहुंच जाएगी; वरन जैसे यहूदा के राजा उज्जिय्याह के दिनों में तुम भूकंप के पहिले से भागे थे, वैसे ही तुम भी वैसे ही भागोगे; और मेरा परमेश्वर यहोवा, और सब पवित्र लोग तेरे संग आएंगे।

6 और उस दिन ऐसा होगा, कि न उजियाला होगा, और न अन्धेरा;

7 परन्तु वह एक दिन होगा जो यहोवा को पता चलेगा, न दिन और न रात; परन्तु ऐसा होगा कि सांझ के समय उजाला होगा।

8 उस समय यरूशलेम में से जीवन का जल निकल जाएगा; उनमें से आधे पहिले समुद्र की ओर, और आधे पीछे के समुद्र की ओर; गर्मियों में और सर्दियों में यह होगा।

9 और यहोवा सारी पृय्वी का राजा होगा; उस दिन एक ही यहोवा होगा, और उसका नाम एक होगा।

10 सारा देश गेबा से लेकर यरूशलेम के दक्षिण के रिम्मोन तक अराबा हो जाएगा; और वह बिन्यामीन के फाटक से पहिले फाटक के स्थान तक, कोने के फाटक तक, और हननेल के गुम्मट से लेकर राजा के कुण्डोंतक तक ऊंचे स्थान पर बसा रहे।

11 और उस में मनुष्य बसेंगे, और फिर कभी विनाश न होगा; परन्तु यरूशलेम निडर बसा रहेगा।

12 और जितने लोगों ने यरूशलेम से युद्ध किया है उन सभोंको यहोवा इस से मारेगा; जब तक वे अपके पांवोंके बल खड़े होंगे तब तक उनका मांस भस्म हो जाएगा, और उनकी आंखें उनके छिद्रोंमें से भस्म हो जाएंगी, और उनकी जीभ उनके मुंह से भस्म हो जाएगी।

13 और उस दिन उन में यहोवा की ओर से बड़ा कोलाहल होगा; और वे अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके हाथ पर हाथ अपके अपके अपके प�

14 और यहूदा भी यरूशलेम में लड़ेगा; और चारोंओर की सब जातियोंकी दौलत इकट्ठी की जाएगी, अर्यात् सोना, चान्दी, और वस्त्र बहुत हो जाएंगे।

15 और घोड़े, खच्चर, ऊंट, और गदहे, और जितने पशु इन तंबुओं में होंगे उन सभोंकी व्याधि इस प्रकार होगी।

16 और ऐसा होगा, कि सब जातियोंमें से जो कोई यरूशलेम पर चढ़ाई करेगा, वह प्रति वर्ष राजा, सेनाओं के यहोवा को दण्डवत् करने, और निवासोंके पर्व को मानने को चढ़ाई करेगा।

17 और ऐसा होगा, कि जो कोई पृय्वी के सब कुलोंमें से सेनाओं के यहोवा राजा को दण्डवत करने को यरूशलेम में न आए, उन पर मेंह न बरसेगी।

18 और यदि मिस्र का परिवार न चढ़े, और न बरसे, जिस में मेंह न हो; तब मरी होगी, जिस से यहोवा उन अन्यजातियोंको मार डालेगा जो निवासोंके पर्व को मानने को नहीं आएंगे।

19 मिस्रियों का दण्ड यह होगा, और उन सब जातियों का दण्ड जो निवासों के पर्व को मानने को न आयें।

20 उस समय घोड़ों की घंटियों पर यहोवा के लिथे पवित्र ठहरे; और यहोवा के भवन के पात्र वेदी के साम्हने के कटोरे के समान हों।

21 वरन यरूशलेम और यहूदा के सब मटके सेनाओं के यहोवा के लिथे पवित्र ठहरें; और जितने बलि चढ़ाएं वे सब आकर उन में से ले लें, और उस में देखें; और उस समय सेनाओं के यहोवा के भवन में कोई कनानी फिर न रहेगा।

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