पैगंबर ईजेकील की किताब
अध्याय 1
चार करूबों, चार पहियों, और परमेश्वर की महिमा का यहेजकेल का दर्शन।
1 तीसवें वर्ष के चौथे महीने के पांचवें दिन, जब मैं कबार नदी के किनारे बंधुओं के बीच में था, तब आकाश खुल गया, और मैं ने परमेश्वर के दर्शन देखे।
2 महीने के पांचवें दिन को, जो राजा यहोयाकीन के बंधुआई का पांचवां वर्ष था,
3 यहोवा का यह वचन कबार नदी के किनारे कसदियोंके देश में बूजी के पुत्र यहेजकेल याजक के पास पहुंचा; और उस पर यहोवा का हाथ था।
4 और मैं ने दृष्टि की, और क्या देखा, कि उत्तर की ओर से एक बवण्डर निकल आया, और एक बड़ा बादल, और एक आग धूसर हो गई, और उसके चारोंओर एक ऐसी चमक छा गई, जो उसके बीच में से अम्बर के रंग के समान निकली है। आग की।
5 और उसके बीच में से चार जीवित प्राणियोंकी समानता निकली। और यह उनका रूप था; उनके पास एक आदमी की समानता थी।
6 और हर एक के चार मुख थे, और हर एक के चार पंख थे।
7 और उनके पांव सीधे पाँव थे; और उनके पांवों के तलवे बछड़े के पांव के समान थे; और वे जले हुए पीतल के रंग के समान चमकने लगे।
8 और उनके चारोंओर पंख के नीचे मनुष्य के हाथ थे; और उन चारों के मुंह और पंख थे।
9 उनके पंख आपस में जुड़े हुए थे; जब वे गए, तब न मुड़े; वे सब सीधे आगे बढ़े।
10 इन चारों के मुख पुरूष के साम्हने और दहिनी ओर सिंह के साम्हने थे; और उन चारों के बाईं ओर बैल का सा मुंह था; उन चारों के मुख उकाब के समान थे।
11 उनके मुख योंही थे; और उनके पंख ऊपर की ओर फैले हुए थे; एक एक के दो पंख आपस में जुड़े हुए थे, और दो अपने शरीरों को ढांपे हुए थे।
12 और वे सब सीधे आगे बढ़ते गए; जहां आत्मा को जाना था, वे चले गए; और जब वे गए, तब न मुड़े।
13 और जीवधारियों के साम्हने उनका रूप धधकते अंगारों, और दीपकोंके साम्हने सा था; वह जीवित प्राणियों के बीच ऊपर और नीचे चला गया; और आग तेज थी, और आग में से बिजली निकली।
14 और जीवित प्राणी दौड़कर बिजली की चमक की नाईं लौट आए।
15 अब जब मैं ने जीवधारियों को देखा, तो देखो, पृथ्वी पर जीवधारियों का एक पहिया चार मुख वाला है।
16 पहियों का रूप और उनका काम बेर के रंग जैसा था; और उन चारों की एक ही समानता थी; और उनका रूप और उनका काम ऐसा था मानो वह पहिए के बीच में पहिए के समान हों।
17 जब वे चले, तो अपके चारोंओर चले; और जब वे गए, तब न मुड़े।
18 और उनकी कडिय़ां इतनी ऊंची थीं, कि वे बहुत डरी हुई थीं; और उनके चारोंओर चारोंओर के छल्ले आंखों से भरे हुए थे।
19 और जब जीवित प्राणी चले, तब पहिए उनके पीछे चले; और जब जीवधारी पृय्वी पर से उठाए गए, तब पहिए भी ऊपर उठ गए।
20 जहां कहीं आत्मा को जाना था, वे वहीं जाते थे, जहां उनका आत्मा जाना था; और पहिए उनके साम्हने ऊपर उठ गए; क्योंकि जीवित प्राणी की आत्मा पहियों में थी।
21 जब वे गए, तब वे गए; और जब वे खड़े थे, वे खड़े थे; और जब वे पृय्वी पर से उठाए गए, तब पहिए उनके साम्हने ऊपर उठ गए; क्योंकि जीवित प्राणी की आत्मा पहियों में थी।
22 और जीवित प्राणी के सिरों पर आकाश की समानता भयानक क्रिस्टल के रंग के समान थी, जो उनके सिरों पर फैला हुआ था।
23 और आकाश के नीचे उनके पंख सीधे थे, एक दूसरे की ओर; हर एक के दो दो थे, जो इस ओर ढँके हुए थे, और हर एक के दो-दो थे, जो उस ओर ढँके हुए थे, अर्थात् उनके शरीर।
24 और जब वे चले, तो मैं ने उनके पंखोंका शब्द, जैसे बड़े जल का शब्द, और सर्वशक्तिमान का शब्द, और न सेना का शब्द, वैसा शब्द सुना; जब वे खड़े हुए, तो उन्होंने अपने पंख गिरा दिए।
25 और उस आकाशमण्डल से जो उनके सिरोंके ऊपर था, शब्द हुआ, जब वे खड़े हुए, और अपने पंख गिराए थे।
26 और उस आकाशमण्डल के ऊपर जो उनके सिरोंके ऊपर था, वह नीलमणि के पत्यर के समान सिंहासन के समान था; और उस सिंहासन की समानता पर उसके ऊपर एक मनुष्य की उपस्थिति की समानता थी।
27 और मैं ने अम्बर का रंग, और उसके भीतर चारोंओर आग का सा दिखाई, और उसकी कमर से ऊपर की ओर, और उसकी कमर से नीचे तक, मैं ने आग का सा दिखाई, और उसके चारों ओर चमक थी।
28 जैसा धनुष वर्षा के दिन बादल में होता है, वैसा ही चारों ओर का तेज दिखाई देता था। यह प्रभु की महिमा की समानता का प्रकटन था। और यह देखकर मैं मुंह के बल गिर पड़ा, और एक बोलनेवाले का शब्द सुना।
अध्याय 2
यहेजकेल का आदेश - उसका निर्देश - रोल।
1 उस ने मुझ से कहा, हे मनुष्य के सन्तान, अपके पांवोंके बल खड़ा हो, और मैं तुझ से बातें करूंगा।
2 और जब उस ने मुझ से बातें की, तब आत्मा ने मुझ में प्रवेश किया, और मुझे अपने पांवोंके बल खड़ा किया, कि मैं ने अपक्की बातें करनेवाले की सुनी।
3 उस ने मुझ से कहा, हे मनुष्य के सन्तान, मैं तुझे इस्त्राएलियोंके पास एक बलवा करनेवाली जाति के पास भेजता हूं, जिस ने मुझ से बलवा किया है; वे और उनके पुरखा आज तक मेरे विरुद्ध अपराध करते रहे हैं।
4 क्योंकि वे हठीले बालक और हठीले हैं। मैं तुझे उनके पास भेजता हूं; और उन से कहना, परमेश्वर यहोवा यों कहता है।
5 और वे सुनेंगे, वा धीरज धरेंगे, क्योंकि वे बलवा करनेवाले घराने हैं, तौभी वे जान लेंगे कि उन में एक भविष्यद्वक्ता हुआ है।
6 और हे मनुष्य के सन्तान, तू उन से न डरना, और न उनकी बातोंसे डरना, चाहे कंटें और कांटे तेरे संग हों, और तू बिच्छुओं के बीच रहता है; उनके वचनों से न डरना, और न उनकी दृष्टि से घबराना, चाहे वे विद्रोही घराने के हों।
7 और तू मेरी बातें उन से कहना, कि वे सुनेंगे, वा न मानें; क्योंकि वे अति विद्रोही हैं।
8 परन्तु हे मनुष्य के सन्तान, सुन, जो मैं तुझ से कहता हूं; उस विद्रोही घराने के समान विद्रोही न बनो; अपना मुंह खोल, और जो मैं तुझे देता हूं उसे खा।
9 जब मैं ने दृष्टि की, तो क्या देखा, कि मेरी ओर एक हाथ भेजा गया है; और देखो, उस में एक पुस्तक का एक रोल था;
10 और उस ने उसको मेरे साम्हने फैलाया; और यह भीतर और बाहर लिखा गया था; और उस में विलाप, और विलाप, और हाय लिखा हुआ था।
अध्याय 3
यहेजकेल रोल खाता है - भविष्यवाणी का नियम - भगवान बंद कर देता है और भविष्यद्वक्ता का मुंह खोलता है।
1 फिर उस ने मुझ से कहा, हे मनुष्य के सन्तान, जो कुछ तुझे मिले उसे खा; इस रोल को खा, और इस्राएल के घराने से बातें कर।
2 तब मैं ने अपना मुंह खोला, और उस ने मुझे वह रोल खाने को दिया।
3 और उसने मुझसे कहा, मनुष्य का बेटा, तेरा पेट खाने का कारण बनता है, और इस रोल के साथ तेरा आंत भरता है जो मैं तुम्हें देता हूं। फिर क्या मैंने उसे खा लिया; और वह मेरे मुंह में मधुरता के लिथे मधु के समान था।
4 उस ने मुझ से कहा, हे मनुष्य के सन्तान, जाकर इस्राएल के घराने के पास जा, और मेरी बातें उन से कह।
5 क्योंकि तू अपक्की बोली और कठोर भाषा बोलनेवालोंके पास नहीं, परन्तु इस्राएल के घराने के लिथे भेजा गया है;
6 उन बहुत से लोगों से नहीं जो पराई बोली और कठोर भाषा के हैं, जिनकी बातें तू नहीं समझ सकता। निश्चय यदि मैं ने तुझे उनके पास भेजा होता, तो वे तेरी सुनते।
7 परन्तु इस्राएल का घराना तेरी न सुनेगा; क्योंकि उन्होंने मेरी न सुनी होगी; क्योंकि इस्राएल का सारा घराना निर्भीक और कठोर मन वाला है।
8 देख, मैं ने तेरे मुख को उनके मुख के साम्हने, और तेरा माथा उनके माथे के साम्हने दृढ़ किया है।
9 मैं ने तेरे माथे को चकमक पत्थर से भी कठोर बना दिया है; उन से न डरना, और न उनके रूप देखकर निराश होना, चाहे वे विद्रोही घराने के हों।
10 फिर उस ने मुझ से कहा, हे मनुष्य के सन्तान, मेरे सब वचन जो मैं तुझ से कहूं, अपके मन में ग्रहण कर, और कानोंसे सुन।
11 और बन्धुआई में से अपक्की प्रजा के लोगोंके पास जाकर उन से कह, कि परमेश्वर यहोवा योंकहता है; कि वे सुनेंगे, वा सहन करेंगे।
12 तब आत्मा ने मुझे उठा लिया, और मैं ने अपने पीछे पीछे बड़ी दौड़ का शब्द सुना, कि यहोवा की महिमा उसके स्यान से धन्य हो।
13 मैं ने जीवधारियों के पंखों का शब्द जो आपस में छूते थे, और पहियों का उनके साम्हने का शब्द, और बड़ी दौड़ का शब्द भी सुना।
14 तब आत्मा ने मुझे उठाकर ले लिया, और मैं अपक्की आत्मा की तपन में कड़वा होकर चला गया; परन्तु यहोवा का हाथ मुझ पर दृढ़ था।
15 तब मैं तेल-अबाब की बंधुआई में से उनके पास आया, जो कबार नदी के किनारे रहते थे, और जहां वे बैठे थे, वहां सात दिन तक उनके बीच अचम्भा करता रहा।
16 और ऐसा हुआ कि सात दिन के बीतने पर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि
17 हे मनुष्य के सन्तान, मैं ने तुझे इस्राएल के घराने का पहरुआ ठहराया है; सो मेरे मुंह से वचन सुन, और उन्हें मेरी ओर से चेतावनी दे।
18 जब मैं दुष्ट से कहूं, कि तू निश्चय मरेगा; और तू उसे न चिताता है, और न दुष्ट को उसके दुष्ट मार्ग से चिताने, कि उसका प्राण बचाने को कहता है; वही दुष्ट अपके अधर्म में मारा जाएगा; परन्तु उसका लहू मैं तेरे हाथ मांगूंगा।
19 तौभी यदि तू दुष्ट को चिताए, और वह अपक्की दुष्टता और दुष्ट चाल से न फिरे, तो वह अपके अधर्म में मर जाएगा; परन्तु तू ने अपके प्राण को छुड़ाया है।
20 फिर जब कोई धर्मी अपके धर्म से फिरकर अधर्म करे, और मैं उसके साम्हने ठोकर का कारण रखूं, तब वह मर जाएगा; क्योंकि तू ने उस को चितावनी न दी, वह अपके पाप में मर जाएगा, और उसका धर्म जो उस ने किया है स्मरण न रहेगा; परन्तु उसका लहू मैं तेरे हाथ मांगूंगा।
21 तौभी यदि तू धर्मी को चितौनी दे, कि धर्मी पाप न करे, और न पाप करे, तो वह निश्चय जीवित रहेगा, क्योंकि उस को चेतावनी दी गई है; तू ने अपके प्राण को भी छुड़ाया है।
22 और यहोवा का हाथ मुझ पर था; और उस ने मुझ से कहा, उठ, मैदान में निकल जा, और मैं वहां तुझ से बातें करूंगा।
23 तब मैं उठकर मैदान में चला गया; और वहां यहोवा का तेज वैसा ही खड़ा हुआ जैसा मैं ने कबार नदी के तीर पर देखा; और मैं मुँह के बल गिर पड़ा।
24 तब आत्मा ने मुझ में प्रवेश किया, और मुझे पांवोंपर खड़ा किया, और मुझ से बातें की, और मुझ से कहा, जा, अपके अपके घर में बन्द कर।
25 परन्तु हे मनुष्य के सन्तान, देख, वे तुझ पर बन्धन बान्धेंगे, और तुझ से बान्धेंगे, और तू उनके बीच में न निकलने पाएगा;
26 और मैं तेरी जीभ तेरे मुंह की छत पर लगाऊंगा, कि तू गूंगा ठहरेगा, और उनके लिथे डांटने न पाएगा; क्योंकि वे विद्रोही घराने हैं।
27 परन्तु जब मैं तुझ से बातें करूंगा, तब तेरा मुंह खोलूंगा, और तू उन से कहना, परमेश्वर यहोवा योंकहता है; जो सुनता है, वह सुन ले; और जो छोड़े, वह सहे; क्योंकि वे विद्रोही घराने हैं।
अध्याय 4
यरूशलेम की घेराबंदी का पूर्वाभास हुआ।
1 हे मनुष्य के सन्तान, तू भी एक खपरैल ले कर अपके साम्हने रखना, और उस पर यरूशलेम नगर को चित्रित करना;
2 और उसके साम्हने घेरा डालना, और उसके साम्हने एक गढ़ बनाना, और उसके साम्हने एक पहाड़ बनाना; डेरे को भी उसके साम्हने खड़ा करना, और उसके चारोंओर पीटने वाले मेढ़ोंको लगाना।
3 फिर अपके पास एक लोहे का पैन ले कर अपके और नगर के बीच में लोहे की शहरपनाह के लिथे धरना; और उसके साम्हने अपना मुंह धरना, और वह घेर लिया जाएगा, और तू उसके साम्हने घेर लेना। यह इस्राएल के घराने के लिये एक चिन्ह ठहरेगा।
4 अपक्की बायीं ओर लेटकर इस्राएल के घराने के अधर्म के काम उस पर रख; जितने दिन तू उस में लेटेगा, उसके अनुसार तू उनके अधर्म का भार वहन करेगा।
5 क्योंकि मैं ने उनके अधर्म के वर्ष तेरे लिथे तीन सौ नब्बे दिन की गिनती के अनुसार ठहराए हैं; इस प्रकार तू इस्राएल के घराने के अधर्म का भार वहन करेगा।
6 और जब तू उन्हें पूरा कर ले, तब अपक्की दहिनी ओर लेट जा, और यहूदा के घराने के अधर्म के काम को चालीस दिन तक सहना; मैं ने तुझे एक वर्ष के लिये प्रतिदिन नियुक्त किया है।
7 इसलिथे अपना मुंह यरूशलेम के घेरे की ओर करना, और अपना हाथ खुला रखना, और उसके विरुद्ध भविष्यद्वाणी करना।
8 और देख, मैं तुझ पर बैंठ बांधूंगा, और जब तक तू अपनी घेराबंदी के दिनोंको समाप्त न कर ले तब तक तुझे एक ओर से दूसरी ओर न मोड़ना।
9 और गेहूँ, जौ, सेम, मसूर, बाजरा, और फिटकरी भी अपके पास ले कर एक ही पात्र में रखना, और जितने दिन अपके पांव के लिथे लेटने की गिनती के अनुसार उसकी रोटियां बनाना। ; उस में से तीन सौ नब्बे दिन तक खाया करना।
10 और तेरा जो मांस अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके लिथे तौले हुए बीस शेकेल अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके खाने का मूि त, तुम समय-समय पर उसे खाओगे।
11 और हीन का छठा भाग नाप कर पीना; तुम समय-समय पर पीते रहना।
12 और उसको जव की टिकिया की नाईं खाना, और उस के साम्हने मनुष्य के गोबर से पकाना।
13 और यहोवा ने कहा, इस्राएली अपक्की अशुद्ध रोटी अन्यजातियोंके बीच जहां मैं उन्हें भगाऊंगा, वैसे ही खाएंगे।
14 तब मैं ने कहा, हे परमेश्वर यहोवा! देख, मेरा प्राण अशुद्ध नहीं हुआ; क्योंकि बचपन से अब तक मैं ने उस में से कुछ न खाया जो मर गया, वा टुकड़े-टुकड़े हो गया; न तो घिनौना मांस मेरे मुंह में आया।
15 तब उस ने मुझ से कहा, सुन, मैं ने मनुष्य के गोबर के लिथे तुझे गाय का गोबर दिया है, और तू उसी से अपनी रोटी तैयार करना।
16 फिर उस ने मुझ से कहा, हे मनुष्य के सन्तान, सुन, मैं यरूशलेम में रोटी की लाठी को तोड़ डालूंगा; और वे तौल कर और चौकसी से रोटी खाएं; और वे नाप कर और चकित होकर जल पीएंगे;
17 कि वे रोटी और पानी चाहते हैं, और एक दूसरे के साथ चकित हो सकते हैं, और अपने अधर्म के लिए नष्ट कर सकते हैं।
अध्याय 5
बालों का प्रकार — यरूशलेम का न्याय।
1 और हे मनुष्य के सन्तान, तू एक चोखा छुरी लेकर नाई का छुरा ले, और अपके सिर और दाढ़ी पर चढ़ा दे; तो तुम तौलना, और बालों को विभाजित करने के लिए संतुलन ले लो।
2 जब घेराबंदी के दिन पूरे हों, तब नगर के बीच में एक तिहाई आग जलाना; और एक तीसरा भाग लेकर उसके चारोंओर छुरी से मारना; और एक तिहाई भाग तू वायु में बिखेरना; और मैं उनके पीछे तलवार निकालूंगा।
3 और उस में से भी थोड़े से लेकर अपके अपके वस्त्रोंमें बान्धना।
4 तब उन में से फिर ले कर आग के बीच में डाल देना, और आग में जला देना; क्योंकि उस से इस्राएल के सारे घराने में आग भड़क उठेगी।
5 परमेश्वर यहोवा यों कहता है; यह यरूशलेम है; मैंने उसे उन जातियों और देशों के बीच में स्थापित किया है जो उसके चारों ओर हैं।
6 और उस ने मेरे नियमोंको अन्यजातियोंसे अधिक दुष्टता, और मेरी विधियोंको अपने चारोंओर के देशोंसे अधिक दुष्ट बना दिया है; क्योंकि उन्होंने मेरे नियमों और मेरी विधियों को झुठलाया है, वे उन पर नहीं चले।
7 इस कारण परमेश्वर यहोवा यों कहता है; क्योंकि तुम ने अपने चारों ओर की जातियों से बहुत अधिक गुणा किया, और मेरी विधियों पर नहीं चले, और न ही मेरे नियमों का पालन किया है, न ही अपने आसपास के राष्ट्रों के नियमों के अनुसार किया है;
8 इसलिथे परमेश्वर यहोवा योंकहता है; देख, मैं तेरे विरुद्ध हूं, और जाति जाति के साम्हने तेरे बीच में दण्ड दूंगा।
9 और जो मैं ने न किया वह तुझ में करूंगा, और तेरे सब घिनौने कामोंके कारण ऐसा फिर कभी न करूंगा।
10 इसलिथे अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके िपता अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके पुत्र खा जाएंगे; और मैं तेरा न्याय करूंगा, और तेरे बचे हुओं को सब आँधी में तितर-बितर कर दूंगा।
11 इस कारण मेरे जीवन की सौगन्ध, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है; निश्चय तू ने अपक्की सब घिनौनी वस्तुओं और सब घिनौने कामोंसे मेरे पवित्रस्थान को अशुद्ध किया है, इस कारण मैं भी तुझे छोटा करूंगा; न मेरी आंखें मूंद लेंगी, और न मैं कुछ तरस खाऊंगा।
12 तेरा एक तिहाई भाग मरी से मर जाएगा, और वे तेरे बीच में अकाल से मरेंगे; और एक तिहाई भाग तेरे चारोंओर तलवार से मारा जाएगा; और मैं एक तिहाई भाग को सब आँधी में तितर-बितर करूँगा, और उनके पीछे एक तलवार निकालूँगा।
13 इस प्रकार मेरा कोप भड़केगा, और मैं अपना जलजल उन पर भड़काऊंगा, और मुझे शान्ति मिलेगी; और जब मैं ने उन पर अपनी जलजलाहट पूरी की, तब वे जान लेंगे कि मैं यहोवा ने अपने जलवे में यह बात कही है।
14 और मैं तुझे उन सब जातियोंके लिथे जो तेरे चारोंओर के हैं, और उन सब के साम्हने ललकारूंगा, जो तेरे पास से होकर जाते हैं।
15 इसलिथे जब मैं कोप, जलजल, और जलजलाहट के कारण तुझ पर दण्ड दूंगा, तब वह तेरे चारोंओर की जातियोंके लिथे नामधराई और ताना, और शिक्षा और अचम्भा होगा। मैं यहोवा ने यह कहा है।
16 जब मैं उन पर अकाल के बुरे तीर चलाऊंगा, जो उनके विनाश के लिये होंगे, और जिन्हें मैं तुम्हें नष्ट करने को भेजूंगा; और मैं तुझ पर अकाल बढ़ाऊंगा, और तेरी लाठी को तोड़ दूंगा;
17 सो मैं तुम पर अकाल और दुष्ट जन्तु भेजूंगा, और वे तुम्हें मार डालेंगे; और मरी और लोहू तुझ में से होकर निकलेंगे; और मैं तुझ पर तलवार चलाऊंगा। मैं यहोवा ने यह कहा है।
अध्याय 6
इस्राएल का न्याय — एक शेष धन्य है।
1 और यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि,
2 हे मनुष्य के सन्तान, अपना मुंह इस्राएल के पहाड़ों की ओर करके उनके विरुद्ध भविष्यद्वाणी कर,
3 और कहो, हे इस्राएल के पहाड़ों, परमेश्वर यहोवा का वचन सुनो; पहाड़ों और पहाड़ियों, नदियों और घाटियों से परमेश्वर यहोवा यों कहता है; देख, मैं तुझ पर तलवार चलाऊंगा, और तेरे ऊंचे स्थानोंको नाश करूंगा।
4 और तेरी वेदियां उजाड़ दी जाएंगी, और तेरी मूरतें तोड़ दी जाएंगी; और मैं तेरे मारे हुओं को तेरी मूरतोंके साम्हने डालूंगा।
5 और मैं इस्राएलियोंकी लोथोंको उनकी मूरतोंके साम्हने रखूंगा; और मैं तेरी हड्डियोंको तेरी वेदियोंके चारोंओर तितर-बितर करूंगा;
6 तेरे सब निवासस्थानोंमें नगर उजाड़ दिए जाएंगे, और ऊंचे स्थान उजाड़ हो जाएंगे; कि तेरी वेदियां उजाड़ और उजाड़ दी जाएं, और तेरी मूरतें तोड़ी जाएं, और बन्द हो जाएं, और तेरी मूरतें ढा दी जाएं, और तेरे काम नाश किए जाएं।
7 और मारे हुए लोग तुम्हारे बीच में गिरेंगे, और तुम जान लोगे कि मैं यहोवा हूं।
8 तौभी मैं बचे हुओं को छोड़ दूंगा, कि जब तुम देश देश में तित्तर बित्तर हो जाओगे, तब तुम्हारे पास कुछ ऐसे भी होंगे जो तलवार से बचकर अन्यजातियोंमें से बच जाएंगे।
9 और तुम में से जो बच निकले वे मुझे उन जातियों के बीच में स्मरण करेंगे, जहां वे बंधुआई में ले जाए जाएंगे, क्योंकि मैं उनके व्यभिचारी मन से टूट गया हूं, जो मुझ से अलग हो गए हैं, और उनकी आंखों से वे अपनी मूरतों के पीछे व्यभिचार करते हैं; और वे उन बुराइयों के कारण जो उन्होंने अपके सब घिनौने कामोंमें की हैं, अपने आप से घृणा करेंगे।
10 और वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं, और यह कि मैं ने व्यर्थ नहीं कहा कि मैं उनके साथ यह बुराई करूंगा ।
11 परमेश्वर यहोवा यों कहता है, अपके हाथ से मार, और अपने पांव से मुहर लगाकर कह, हाय, इस्राएल के घराने के सब घृणित कामोंके लिथे हाय! क्योंकि वे तलवार, अकाल और मरी से मारे जाएंगे।
12 जो दूर हो वह मरी से मरेगा; और जो निकट हो वह तलवार से मारा जाएगा; और जो बचा रहे और घेर लिया जाए वह अकाल से मरेगा; इस प्रकार मैं उन पर अपना जलजलाहट पूरा करूंगा।
13 तब तुम जान लोगे कि मैं यहोवा हूं, जब उनके मारे हुए लोग उनकी वेदियोंके चारोंओर उनकी मूरतोंके बीच, और सब ऊंचे पहाड़ोंपर, और सब पहाड़ोंकी चोटियोंपर, और सब हरे वृक्षोंके तले, और सब घने बांजवृझ के नीचे होंगे, वह स्थान जहाँ उन्होंने अपनी सब मूरतों को मीठा स्वाद दिया था।
14 इसलिथे मैं उन पर अपना हाथ बढ़ाकर देश को उजाड़ दूंगा, वरन दिबलात की ओर के जंगल से भी अधिक उजाड़ दूंगा; और वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं।
अध्याय 7
इस्राएल का उजाड़ना — शत्रु पवित्रस्थान को अशुद्ध करते हैं — एक जंजीर का प्रकार।
1 फिर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि
2 फिर हे मनुष्य के सन्तान, इस्राएल देश के विषय में परमेश्वर यहोवा यों कहता है; एक अंत, देश के चारों कोनों पर अंत आ गया है।
3 अब तेरा अन्त आ गया है, और मैं तुझ पर अपना कोप भड़काऊंगा, और तेरे चालचलन के अनुसार तेरा न्याय करूंगा, और तेरे सब घिनौने कामोंका बदला तुझे दूंगा।
4 और मैं तुझ पर दया न करूंगा, और न मैं तरस खाऊंगा; परन्तु मैं तेरी चालचलन का बदला तुझ को दूंगा, और तेरे घिनौने काम तेरे बीच में होंगे; और तुम जान लोगे कि मैं यहोवा हूं।
5 परमेश्वर यहोवा यों कहता है; एक बुराई केवल एक बुराई है, देखो, आ गया है।
6 अन्त आ गया, अन्त आ गया; यह तुम्हारे लिए देखता है; देखो, आ गया है।
7 भोर का समय तेरे पास है, हे देश के रहनेवाले; समय आ गया है, संकट का दिन निकट है, और पहाड़ों का फिर से शब्द नहीं सुनाया जाएगा।
8 अब मैं शीघ्र ही तुझ पर अपनी जलजलाहट भड़काऊंगा, और अपना कोप तुझ पर भड़काऊंगा; और मैं तेरी चालचलन के अनुसार तेरा न्याय करूंगा, और तेरे सब घिनौने कामोंका बदला तुझे दूंगा।
9 और मैं न तो तरस खाऊंगा, और न मैं तरस खाऊंगा; मैं तेरी चालचलन और घिनौने कामोंके अनुसार जो तेरे बीच में हैं, तुझे उसका बदला दूंगा; और तुम जान लोगे कि मारने वाला यहोवा मैं हूं।
10 देखो, वह दिन आ गया है; सुबह निकली है; छड़ी खिल गई है, अभिमान फूट पड़ा है।
11 उपद्रव दुष्टता की छड़ी में चढ़ गया है; उन में से कोई न रहेगा, न उनकी भीड़ में से, और न ही उनके किसी; न उनके लिये विलाप करना होगा।
12 समय आ गया, वह दिन निकट आया; न क्रेता आनन्द करे, और न विक्रेता शोक करे; क्योंकि उस की सारी भीड़ पर कोप भड़का है।
13 क्योंकि बेचनेवाले के जीवित रहने पर भी बिकवाली की ओर फिर न आने पाए; क्योंकि दर्शन उसकी सारी भीड़ को छू रहा है, जो फिर न लौटेगा; और न कोई अपके जीवन के अधर्म के लिथे अपने को दृढ़ करेगा।
14 उन्होंने सब तैयार करने के लिथे नरसिंगा फूंका है; परन्तु कोई युद्ध में नहीं जाता; क्योंकि उस की सारी भीड़ पर मेरा कोप भड़क उठा है।
15 बाहर तलवार, और भीतर मरी और अकाल है; जो कोई मैदान में हो वह तलवार से मारा जाएगा; और जो नगर में हो, वह अकाल और मरी उसे खा जाएगा।
16 परन्तु जो उन से बच निकलेंगे, वे बच निकलेंगे, और पहाड़ोंपर तराई के कबूतरोंकी नाईं अपके अधर्म के लिथे विलाप करेंगे।
17 सब हाथ निर्बल होंगे, और सब घुटने जल के समान निर्बल होंगे।
18 और वे टाट पहिने हुए हों, और भय उन्हें ढांप ले; और सब के मुख पर लज्जा होगी, और सब के सिरों पर गंजापन होगा।
19 वे अपनी चान्दी सड़कों पर फेंक दें, और उनका सोना निकाल दिया जाए; यहोवा के कोप के दिन उनका सोना चान्दी उनको छुड़ा न सकेगा; वे अपके मन को तृप्त न करेंगे, और न अपना पेट भरेंगे; क्योंकि यह उनके अधर्म की ठोकर है।
20 और अपके अलंकार के शोभा के विषय में उस ने उसको प्रताप के साथ रखा; परन्तु उन्होंने अपके घिनौने कामोंऔर अपक्की घिनौनी वस्तुओं की मूरतें उसी में बनाईं; इसलिथे मैं ने उसको उन से दूर कर दिया है।
21 और मैं उसे परदेशियोंके वश में कर दूंगा, और लूट के लिथे पृय्वी के दुष्टोंके हाथ करूंगा; और वे उसे अपवित्र करेंगे।
22 मैं भी उन से मुंह फेरूंगा, और वे मेरे गुप्त स्थान को अपवित्र करेंगे; क्योंकि डाकू उस में घुसकर उसे अशुद्ध करेंगे।
23 एक जंजीर बनाओ; क्योंकि देश खूनी अपराधों से भरा है, और शहर हिंसा से भरा है।
24 इसलिथे मैं अन्यजातियोंमें से घिनौने लोगोंको ले आऊंगा, और वे अपके घरोंके अधिकारी होंगे; मैं बलवन्तों का विलाप भी बन्द कर दूंगा; और उनके पवित्र स्थान अशुद्ध किए जाएं।
25 विनाश आनेवाला है; और वे शान्ति ढूंढ़ेंगे, और कोई न होगा।
26 शरारत पर विपत्ति आएगी, और अफवाह अफवाह पर होगी; तब वे भविष्यद्वक्ता का दर्शन ढूंढ़ेंगे; परन्तु व्यवस्था याजक की ओर से, और पुरनियोंकी सम्मति नाश हो जाएगी।
27 राजा विलाप करेगा, और प्रधान वीरान पहिनेगा, और देश के लोगोंके हाथ दुखेंगे; मैं उनके मार्ग के अनुसार उनके साथ वैसा ही करूंगा, और उनके जंगल के अनुसार उनका न्याय करूंगा; और वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं।
अध्याय 8
परमेश्वर का दर्शन — ईर्ष्या की छवि — मूर्तिपूजा के लिए परमेश्वर का क्रोध।
1 और छठे वर्ष के छठे महीने के पांचवें दिन को जब मैं अपके घर में बैठा या, और यहूदा के पुरनिये मेरे साम्हने बैठे रहे, तब यहोवा परमेश्वर का हाथ उस पर पड़ा या मुझे।
2 तब मैं ने क्या देखा, और मुझे आग का सा सादृश्य दिखाई दिया; उसकी कमर से भी नीचे की ओर, आग; और उसकी कमर से भी ऊपर की ओर, जैसा चमकीला, और अम्बर के रंग जैसा है।
3 और उस ने हाथ का सा रूप बढ़ाकर मुझे मेरे सिर के ताले से पकड़ लिया; और आत्मा ने मुझे पृय्वी और आकाश के बीच में उठा लिया, और परमेश्वर के दर्शन के अनुसार यरूशलेम को उस भीतरी फाटक के पास जो उत्तर की ओर है, ले आया; ईर्ष्या की छवि का आसन कहाँ था, जो ईर्ष्या को भड़काता है।
4 और देखो, इस्राएल के परमेश्वर का तेज उस दर्शन के अनुसार जो मैं ने अराबा में देखा या।
5 तब उस ने मुझ से कहा, हे मनुष्य के सन्तान, अपनी आंखें उत्तर की ओर की ओर उठा। तब मैं ने उत्तर दिशा की ओर आंखें उठाईं, और उत्तर की ओर वेदी के फाटक पर प्रवेश में ईर्ष्या की यह मूरत देखी।
6 उस ने और मुझ से कहा, हे मनुष्य के सन्तान, क्या तू देखता है कि वे क्या करते हैं? और जो बड़े घिनौने काम इस्राएल के घराने ने यहां किए हैं, कि मैं अपके पवित्रस्थान से दूर चला जाऊं? परन्तु तुम को फिर से फिरो, और तुम बड़े घिनौने कामोंको देखोगे।
7 और वह मुझे आंगन के द्वार पर ले गया; और जब मैं ने दृष्टि की, तो क्या देखा कि शहरपनाह में एक छेद है।
8 तब उस ने मुझ से कहा, हे मनुष्य के सन्तान, शहरपनाह खोदकर खोद; और जब मैं शहरपनाह खोद चुका, तब क्या देखा, कि एक द्वार है।
9 उस ने मुझ से कहा, भीतर जा, और उन दुष्ट घिनौने कामों को देख जो वे यहां करते हैं।
10 सो मैं ने भीतर जाकर देखा; और सब प्रकार के रेंगनेवाले जन्तु, और घिनौने पशु, और इस्राएल के घराने की सब मूरतें जो चारोंओर की शहरपनाह पर उकेरी हुई हैं, देखो।
11 और इस्राएल के घराने के पुरनियोंमें से सत्तर पुरुष उनके साम्हने खड़े हुए, और उनके बीच में शापान का पुत्र याजन्याह भी खड़ा हुआ, जिस के हाथ में अपना धूपदान था; और धूप का घना बादल चढ़ गया।
12 तब उस ने मुझ से कहा, हे मनुष्य के सन्तान, क्या तू ने देखा है, कि इस्राएल के घराने के पुरनिये अपक्की अपक्की मूरत की कोठरियोंमें अन्धकार में क्या करते हैं? क्योंकि वे कहते हैं, यहोवा हम को नहीं देखता; यहोवा ने पृथ्वी को त्याग दिया है।
13 उस ने मुझ से यह भी कहा, तुझे फिर से फिरा, और तू उन बड़े घिनौने कामोंको जो वे करते हैं देखेंगे।
14 तब वह मुझे यहोवा के भवन के उस फाटक के पास ले गया, जो उत्तर की ओर था; और देखो, वहां स्त्रियां बैठी हुई हैं, जो तम्मूज के लिये रो रही हैं।
15 तब उस ने मुझ से कहा, हे मनुष्य के सन्तान, क्या तू ने यह देखा है? तुझे फिर से फिरा, और तू इन से भी बड़े घिनौने काम देखेगा।
16 और वह मुझे यहोवा के भवन के भीतरी आंगन में ले गया, और क्या देखा, कि यहोवा के भवन के द्वार पर ओसारे और वेदी के बीच कोई पच्चीस पुरूष थे, और अपके अपके पीठ भवन के भवन की ओर थे। यहोवा, और उनके मुख पूर्व की ओर हों; और उन्होंने पूरब की ओर सूर्य को दण्डवत किया।
17 तब उस ने मुझ से कहा, हे मनुष्य के सन्तान, क्या तू ने यह देखा है? क्या यहूदा के घराने के लिये यह हल्की बात है, कि जो घिनौने काम वे यहां करते हैं, वे करते हैं? क्योंकि उन्होंने देश को उपद्रव से भर दिया है, और मुझे रिस दिलाने के लिथे लौट आए हैं; और देखो, उन्होंने डाली को अपक्की नाक से लगा लिया।
18 इसलिथे मैं भी जलजलाहट करूंगा; मेरी आंख न छूटेगी, और न मैं तरस खाऊंगा; और चाहे वे मेरे कानोंमें ऊंचे शब्द से पुकारें, तौभी मैं उनकी न सुनूंगा।
अध्याय 9
संरक्षण और विनाश की दृष्टि।
1 और उस ने मेरे कानोंमें ऊंचे शब्द से पुकारा, कि नगर के अधिकारी अपके अपके अपके हाथ में नाश करनेवाले हथियार लिये हुए अपके अपके समीप आ जाएं।
2 और देखो, छः मनुष्य ऊंचे फाटक के मार्ग से, जो उत्तर की ओर है, आ गए, और एक एक अपके हाथ में घात करने का हथियार है; और उन में से एक पुरूष मलमल पहिने हुए या, और उसके पास लेखक का सूत पहिने हुआ था; और वे भीतर जाकर पीतल की वेदी के पास खड़े हो गए।
3 और इस्राएल के परमेश्वर का तेज करूब से, जहां वह रहता या, भवन की डेवढ़ी पर चढ़ गया। और उस ने उस मलमल के पहिए को, जिस के पास लेखक की सूई का सींग था, बुलवा भेजा;
4 और यहोवा ने उस से कहा, नगर के बीच में यरूशलेम के बीच से होकर जा, और उन सब घिनौने कामोंके लिथे जो उसके बीच में किए जाएं, आहें भरनेवाले और रोनेवालोंके माथे पर चिन्ह लगा।
5 और औरोंसे उस ने मेरी सुनते हुए कहा, नगर में उसके पीछे पीछे चलकर मार डालना; न तो अपक्की आंखे छोड़ो, और न तरस खाओ;
6 क्या बूढ़ी और जवान, क्या दासियां, क्या बालक, क्या स्त्रियां, सब को मार डालना; परन्तु किसी मनुष्य के निकट न जाना जिस पर उसका चिन्ह हो; और मेरे पवित्रस्थान से आरम्भ करो। तब वे उन पुरनियोंसे जो भवन के साम्हने थे, उन से आरम्भ करने लगे।
7 उस ने उन से कहा, भवन को अशुद्ध कर, और आंगनोंको मारे हुओं से भर दे; तुम आगे जाओ। और वे निकल गए, और नगर में घात किए।
8 और ऐसा हुआ कि जब वे उनको घात कर रहे थे, और मैं रह गया, तब मैं मुंह के बल गिर पड़ा, और चिल्लाकर कहा, हे परमेश्वर यहोवा! क्या तू अपनी जलजलाहट यरूशलेम पर उंडेलकर इस्राएल के सब बचे हुओं को नाश करेगा?
9 तब उस ने मुझ से कहा, इस्राएल और यहूदा के घराने का अधर्म बहुत बड़ा है, और देश लोहू से, और नगर टेढ़ी-मेढ़ी से भरा हुआ है; क्योंकि वे कहते हैं, कि यहोवा ने पृय्वी को त्याग दिया है, और यहोवा देखता नहीं।
10 और मुझ पर भी दृष्टि न पड़ेगी, और न मैं तरस खाऊंगा, वरन उनके चालचलन का बदला मैं उनके सिर पर दूंगा।
11 और देखो, जिस मनुष्य ने सन का पहिरावा पहिने हुए उसकी बगल में काँटा था, उस ने यह कह कर समाचार दिया, कि जैसा तू ने मुझे आज्ञा दी है वैसा ही मैं ने किया है।
अध्याय 10
आग के अंगारों का दर्शन — करूबों का दर्शन।
1 तब मैं ने दृष्टि की, और क्या देखा, कि उस आकाश में जो करूबोंके सिर के ऊपर है, उन पर नीलम का पत्यर सा दिखाई दिया, मानो वह सिंहासन के साम्य में है।
2 और उस ने उस सन के पहिने हुए पुरूष से कहा, पहियों के बीच में करूबोंके नीचे जाकर करूबोंके बीच में से आग के अंगारोंसे अपना हाथ भरकर नगर के ऊपर तितर-बितर कर दे। और वह मेरी दृष्टि में चला गया।
3 जब वह पुरूष भीतर गया, तब करूब भवन की दहिनी ओर खड़े हुए; और बादल भीतरी आंगन में भर गया।
4 तब यहोवा का तेज करूब पर से चढ़कर भवन की डेवढ़ी पर खड़ा हुआ; और घर बादल से भर गया, और आंगन यहोवा के तेज के तेज से भर गया।
5 और करूबों के पंखों का शब्द बाहरी आंगन तक ऐसा सुना गया, जैसे सर्वशक्तिमान परमेश्वर का शब्द जब वह बोलता है।
6 और ऐसा हुआ, कि जब उस ने सन के पहिने हुए पुरूष को यह आज्ञा दी, कि पहियोंके बीच में से करूबोंके बीच में से आग लो; तब वह भीतर गया, और पहिए के पास खड़ा हो गया।
7 और एक करूब ने अपना हाथ करूबोंके बीच से उस आग तक बढ़ाया जो करूबोंके बीच में थी, और उसे ले कर उसके मलमल के पहिए के हाथ में कर दिया; जो इसे ले गया, और बाहर चला गया।
8 और करूबों में उनके पंखों के नीचे मनुष्य के हाथ का सा दिखाई दिया।
9 और जब मैं ने दृष्टि की, तो क्या देखा, कि करूबोंके पास के चारोंपहिए, एक पहिए से एक करूब, और दूसरे पहिए दूसरे करूब के पास, और पहिए बेर के पत्यर के समान दिखाई दे रहे हैं।
10 और उन चारोंका रूप एक ही सा था, मानो पहिए के बीच में कोई पहिरा हो।
11 जब वे चले, तो अपके चारोंओर चले; वे चलते-चलते फिरे नहीं, वरन उस स्थान को जहां सिर की दृष्टि होती थी, उसके पीछे हो लिए; वे वैसे नहीं मुड़े जैसे वे गए थे।
12 और उनका सारा शरीर, और उनकी पीठ, और उनके हाथ, और उनके पंख, और पहिए, चारोंओर आंखोंसे भरे हुए थे, वरन उन चारोंके पहिए भी।
13 हे पहिए, मेरे सुनते ही पहिए चिल्ला उठे।
14 और सब के चार मुख थे; पहिला मुख करूब का सा, और दूसरा मुख मनुष्य का सा, और तीसरा सिंह का सा, और चौथा उकाब का सा था।
15 और करूब ऊँचे किए गए। यह वह जीवित प्राणी है जिसे मैं ने कबार नदी के किनारे देखा था।
16 और जब करूब चले, तब पहिए उनके पीछे चले; और जब करूबोंने अपके पंख पृय्वी पर से ऊपर उठने को उठाए, तब वे पहिए भी अपके पास से न फिरे।
17 जब वे खड़े हुए, तब ये खड़े रहे; और जब वे ऊंचे किए गए, तब वे भी अपने आप उठ गए; क्योंकि उन में जीवित प्राणी का आत्मा था।
18 तब यहोवा का तेज भवन की डेवढ़ी पर से हटकर करूबोंके ऊपर ठहर गया।
19 और करूब अपके पंख उठाकर मेरी दृष्टि में पृय्वी पर से चढ़ गए; जब वे निकल गए, तो पहिए भी उनके पास थे, और सब यहोवा के भवन के पूर्वी फाटक के द्वार पर खड़े थे; और उनके ऊपर इस्राएल के परमेश्वर का तेज था।
20 यह वह जीवित प्राणी है जो मैं ने कबार नदी के किनारे इस्राएल के परमेश्वर के नीचे देखा है; और मैं जानता था कि वे करूब हैं।
21 हर एक के चार चार मुख और हर एक के चार पंख थे; और उनके पंखों के नीचे एक आदमी के हाथों की समानता थी।
22 और उनके चेहरों की समानता वही थी, जो मैं ने कबार नदी के किनारे देखी, और उनका रूप, और वे आप ही थे; वे सब सीधे आगे बढ़े।
अध्याय 11
हाकिमों का अनुमान - उनका पाप और न्याय - परमेश्वर की महिमा शहर को छोड़ देती है।
1 फिर आत्मा ने मुझे उठा लिया, और यहोवा के भवन के पूर्व फाटक के पास ले गया, जो पूर्व की ओर है; और देखो, फाटक के द्वार पर पच्चीस पुरूष हैं; जिन में मैं ने अजूर के पुत्र याजन्याह को, और बनायाह के पुत्र पलत्याह को, जो प्रजा के प्रधान थे, देखा।
2 तब उस ने मुझ से कहा, हे मनुष्य के सन्तान, ये वे मनुष्य हैं जो इस नगर में दुष्टता की युक्ति करके बुरी युक्ति करते हैं;
3 जो कहते हैं, वह निकट नहीं है; चलो घर बनाते हैं; यह नगर हौज है, और हम मांस हैं।
4 इसलिथे हे मनुष्य के सन्तान, उनके विरुद्ध भविष्यद्वाणी कर।
5 और यहोवा का आत्मा मुझ पर उतरा, और मुझ से कहा, कह; यहोवा यों कहता है; हे इस्राएल के घराने, तुम ने योंकहा है; क्योंकि जो बातें तुम्हारे मन में आती हैं, उन में से एक एक को मैं जानता हूं।
6 तुम ने इस नगर में अपके मारे हुओं को बढ़ाया है, और उसकी सड़कोंको मारे हुओं से भर दिया है।
7 इस कारण परमेश्वर यहोवा यों कहता है; तेरे जो मारे गए हैं, उन्हें तू ने उसके बीच में रखा है, वे मांस हैं, और यह नगर हौज है; परन्तु मैं तुझे उसके बीच में से निकाल लाऊंगा।
8 तुम तलवार से डरते हो; और मैं तुम पर तलवार चलाऊंगा, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
9 और मैं तुम को उसके बीच से निकाल कर परदेशियोंके हाथ में कर दूंगा, और तुम्हारे बीच में न्याय दण्ड दूंगा।
10 तुम तलवार से मारे जाओगे; मैं इस्राएल के सिवाने में तेरा न्याय करूंगा; और तुम जान लोगे कि मैं यहोवा हूं।
11 यह नगर न तो तेरा हौज ठहरेगा, और न उसके बीच का मांस तुम ठहरोगे; परन्तु मैं इस्राएल के सिवाने पर तेरा न्याय करूंगा;
12 और तुम जान लोगे कि मैं यहोवा हूं; क्योंकि तुम न तो मेरी विधियों पर चले, और न मेरे नियमों को मानो, वरन अपने चारों ओर की अन्य जातियों की रीति पर चले हो।
13 और जब मैं ने भविष्यद्वाणी की, तब बनायाह का पुत्र पलत्याह मर गया। तब मैं मुंह के बल गिर पड़ा, और ऊंचे शब्द से पुकार कर कहा, हे परमेश्वर यहोवा! क्या तू इस्राएल के बचे हुओं का अन्त कर डालेगा?
14 फिर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि,
15 हे मनुष्य के सन्तान, तेरे भाई, तेरे भाई, और अपके कुटुम्ब के जन, और इस्राएल का सारा घराना, वे ही हैं, जिन से यरूशलेम के निवासियोंने कहा है, कि तुम यहोवा से दूर हो जाओ; यह भूमि हमारे अधिकार में दी गई है।
16 इसलिथे कह, परमेश्वर यहोवा योंकहता है; यद्यपि मैं ने उन्हें अन्यजातियों के बीच दूर कर दिया है, और यद्यपि मैंने उन्हें देशों में तितर-बितर कर दिया है, फिर भी मैं उन देशों में एक छोटे से अभयारण्य के रूप में रहूंगा जहां वे आएंगे।
17 इसलिथे कहो, परमेश्वर यहोवा योंकहता है; मैं तुम को लोगों में से इकट्ठा करूंगा, और उन देशों में से जहां तुम तित्तर बित्तर हुए हो, इकट्ठा करूंगा, और इस्राएल का देश तुम्हें दूंगा।
18 और वे वहां जाकर उसके सब घिनौने कामोंऔर सब घिनौने कामोंको वहां से उठा ले जाएंगे।
19 और मैं उनका एक मन दूंगा, और तुम्हारे भीतर नई आत्मा उत्पन्न करूंगा; और मैं उनकी देह में से पत्यरी मन को निकाल कर उन्हें मांस का हृदय दूंगा;
20 कि वे मेरी विधियों पर चलें, और मेरी विधियोंको मानें, और उन पर चलें; और वे मेरी प्रजा ठहरेंगे, और मैं उनका परमेश्वर ठहरूंगा।
21 परन्तु जिन लोगों का मन उनके घिनौने कामों और घिनौने कामों के अनुसार चलता है, उनका बदला मैं उन्हीं के सिर पर दूंगा, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
22 तब करूबोंने अपके पंख और पहिए अपके साय अपके ऊपर उठाए; और उनके ऊपर इस्राएल के परमेश्वर का तेज था।
23 और यहोवा का तेज नगर के बीच से उठकर उस पर्वत पर खड़ा हुआ जो नगर के पूर्व की ओर है।
24 तब आत्मा ने मुझे उठा लिया, और परमेश्वर के आत्मा के द्वारा दर्शन के द्वारा मुझे कसदियोंमें, जो बन्धुआई में से हैं, ले आया। सो जो दर्शन मैं ने देखा था, वह मुझ से ऊपर चला गया।
25 तब जो कुछ यहोवा ने मुझे दिखाया था, वह सब मैं ने उन से बन्धुआई में के विषय में कहा।
अध्याय 12
यहेजकेल के हटाने का प्रकार — यहेजकेल का कांपना यहूदियों की वीरानी को दर्शाता है।
1 यहोवा का यह वचन भी मेरे पास पहुंचा, कि
2 हे मनुष्य के सन्तान, तू विद्रोही घराने के बीच में रहता है, जिस के देखने की आंखें हैं, और नहीं देखती; उनके पास सुनने के लिए कान हैं, और सुनते नहीं; क्योंकि वे विद्रोही घराने हैं।
3 इसलिथे, हे मनुष्य के सन्तान, दूर करने के लिथे अपके लिथे सामान तैयार कर, और उनके साम्हने प्रति दिन निकाल दे; और उनके साम्हने अपके स्यान से दूसरे स्यान को जाना; यह हो सकता है कि वे विचार करेंगे, हालांकि वे एक विद्रोही घर हैं।
4 तब अपक्की वस्तुओं को उनके साम्हने प्रति दिन निकालना, जैसे दूर करने का सामान हो; और उनके साम्हने उनके साम्हने निकल जाना, जैसे वे बन्धुआई में चले जाते हैं।
5 उन के साम्हने शहरपनाह खोदकर उस से पूरा करना।
6 उन के साम्हने उसको अपके कन्धोंपर उठाना, और सांझ को आगे ले जाना; अपना मुंह ढांपे रहना, ऐसा न हो कि भूमि दिखाई दे; क्योंकि मैं ने तुझे इस्राएल के घराने के लिथे एक चिन्ह ठहराया है।
7 और जिस आज्ञा के अनुसार मैं ने वैसा ही किया; मैं दिन को अपना सामान बन्धुआई के लिये ले आया, और सांझ को भी अपने हाथ से शहरपनाह खोद डाला; मैं उसे गोधूलि में लाया, और मैं ने उसे उनके सामने अपने कंधे पर उठा लिया।
8 और भोर को यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि,
9 हे मनुष्य के सन्तान, क्या इस्राएल के घराने अर्थात् बलवा करनेवाले घराने ने तुझ से नहीं कहा, तू क्या करता है?
10 उन से कहो, परमेश्वर यहोवा यों कहता है; यह बोझ यरूशलेम के हाकिम, और इस्राएल के सारे घराने पर, जो उनके बीच में हैं, वरन यह काम करता है।
11 कह, मैं तेरी निशानी हूं; जैसा मैं ने किया है, वैसा ही उनके साथ भी किया जाएगा; वे हटा देंगे और बंधुआई में चले जाएंगे।
12 और उन में से जो प्रधान हो वह सांझ को अपने कन्धे पर उठाकर निकल जाए; वे ऐसा करने के लिथे शहरपनाह खोदकर खोदेंगे; वह अपना मुंह ढांप ले, कि वह अपनी आंखों से भूमि को न देखे।
13 मैं उस पर अपना जाल भी फैलाऊंगा, और वह मेरे फन्दे में फंस जाएगा; और मैं उसे कसदियोंके देश में बाबुल ले आऊंगा; तौभी वह उसे न देखे, चाहे वह वहीं मर जाए।
14 और जो कुछ उसकी सहायता के लिथे उसके चारोंओर होगा, और उसके सब दल जो उसके चारोंओर होंगे, उन सभोंको मैं सब पवन की ओर तितर-बितर करूंगा; और मैं उनके पीछे तलवार निकालूंगा।
15 और जब मैं उन्हें अन्यजातियोंमें तित्तर बित्तर करूंगा, और देश देश में तितर-बितर करूंगा, तब वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं।
16 परन्तु मैं उन में से थोड़े से पुरूषोंको तलवार, और अकाल, और मरी से बचाने के लिथे छोड़ दूंगा; कि वे अन्यजातियोंमें जहां वे आते हैं, अपके सब घिनौने कामोंका वर्णन करें; और वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं।
17 फिर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि,
18 हे मनुष्य के सन्तान, अपक्की रोटी कांपते हुए खा, और कांपते और चौकस होकर अपना जल पी;
19 और उस देश के लोगोंसे कह, कि यरूशलेम और इस्राएल के निवासियोंका परमेश्वर यहोवा योंकहता है; वे अपनी रोटी चौकसी से खाएं, और अचम्भे से अपना पानी पियें, कि उसका देश उसके सब रहनेवालों के उपद्रव के कारण उजाड़ हो जाए।
20 और जो नगर बसे हुए हैं वे उजाड़ दिए जाएंगे, और देश उजाड़ हो जाएगा; और तुम जान लोगे कि मैं यहोवा हूं।
21 और यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि
22 हे मनुष्य के सन्तान, वह कौन सी कहावत है जो इस्राएल देश में तेरी यह कहती है, कि दिन ढले हैं, और सब दर्शन विफल हो जाते हैं?
23 सो उन से कहो, परमेश्वर यहोवा यों कहता है; मैं इस नीतिवचन को समाप्त कर दूंगा, और वे इसे इस्राएल में नीतिवचन के रूप में उपयोग नहीं करेंगे; परन्तु उन से कहो, दिन निकट हैं, और सब दर्शन का प्रभाव है।
24 क्योंकि इस्त्राएल के घराने में फिर कोई व्यर्थ दर्शन वा चापलूसी करनेवाली बात न होगी।
25 क्योंकि मैं यहोवा हूं; मैं बोलूंगा, और जो वचन मैं कहूंगा वह पूरा होगा; यह और लंबा नहीं होगा; क्योंकि हे बलवा करनेवाले घराने, तेरे दिनोंमें मैं वचन कह कर उसे पूरा करूंगा, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
26 फिर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि,
27 हे मनुष्य के सन्तान, देखो, इस्राएल के घराने के लोग कहते हैं, कि जो दर्शन वह देखता है, वह बहुत दिन तक रहने वाला है, और वह दूर के समयोंके विषय में भविष्यद्वाणी करता है।
28 इसलिथे उन से कहो, परमेश्वर यहोवा योंकहता है; मेरे वचनों में से कोई भी आगे बढ़ाया नहीं जाएगा, परन्तु जो वचन मैंने कहा है वह किया जाएगा, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
अध्याय 13
झूठ बोलने वाले भविष्यद्वक्ताओं और भविष्यद्वक्ताओं की फटकार।
1 और यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि,
2 हे मनुष्य के सन्तान, भविष्यद्वाणी करनेवाले इस्राएल के भविष्यद्वक्ताओंके विषय में भविष्यद्वाणी कर, और उन से जो अपके ही मन से भविष्यद्वाणी करते हैं, कह, कि यहोवा का वचन सुनो;
3 परमेश्वर यहोवा यों कहता है; धिक्कार है मूर्ख भविष्यद्वक्ताओं पर, जो अपनी आत्मा के पीछे हो लेते हैं, और कुछ भी नहीं देखा!
4 हे इस्राएल, तेरे भविष्यद्वक्ता जंगल की लोमडिय़ोंके समान हैं।
5 तुम ने फाटकों में चढ़ाई नहीं की, और यहोवा के दिन में युद्ध में खड़े होने के लिये इस्राएल के घराने के लिये बाड़ा नहीं बनाया।
6 उन्हों ने व्यर्थ और मिथ्या भविष्यद्वाणी को यह कहते हुए देखा है, कि यहोवा की यह वाणी है; और यहोवा ने उन्हें नहीं भेजा; और उन्होंने दूसरों को यह आशा दी है कि वे वचन की पुष्टि करेंगे।
7 क्या तुम ने व्यर्थ दर्शन नहीं देखा, और तुम ने झूठी भविष्यद्वाणी नहीं की, जब कि तुम कहते हो, कि यहोवा यह कहता है; यद्यपि मैंने बात नहीं की है?
8 इसलिथे परमेश्वर यहोवा योंकहता है; क्योंकि तुम ने व्यर्थ बातें की हैं, और झूठ को देखा है, इस कारण देखो, मैं तुम्हारे विरुद्ध हूं, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
9 और मेरा हाथ उन भविष्यद्वक्ताओं पर रहेगा, जो व्यर्थता, और उस ईश्वरीय झूठ को देखते हैं; वे मेरी प्रजा की मण्डली में न हों, और न वे इस्राएल के घराने के लेख में लिखे जाएं, और वे इस्राएल के देश में प्रवेश न करें; और तुम जान लोगे कि मैं यहोवा परमेश्वर हूं।
10 इसलिथे कि उन्होंने मेरी प्रजा को यह कहकर बहकाया, कि कुशल है; और कोई शांति नहीं थी; और एक ने शहरपनाह बनाई, और देखो, औरोंने उस पर बिना तड़के के गारे से दागे;
11 जो उस पर तड़के गारे से दाग लगाते हैं, उन से कह, कि वह गिर जाए; एक अतिप्रवाही बौछार होगी; और हे बड़े ओले तुम गिरोगे; और तूफानी हवा उसे फाड़ डालेगी।
12 देखो, जब शहरपनाह गिरी हो, तब क्या तुम से यह न कहा जाएगा, कि जिस दाग से तुम ने उस पर दाग लगाया है वह कहां है?
13 इसलिथे परमेश्वर यहोवा योंकहता है; मैं अपक्की जलजलाहट में उसको आँधी से फाड़ डालूंगा; और मेरे कोप की बड़ी वर्षा होगी, और मेरी जलजलाहट में बड़े बड़े ओले उसको भस्म करने के लिये होंगे।
14 सो मैं उस शहरपनाह को जिस पर तू ने बिना तराशे हुए गारे से दागा है, तोड़ डालूंगा, और भूमि पर गिरा दूंगा, कि उसकी नेव खोजी जाए, और वह गिर जाए, और तुम उसके बीच में भस्म हो जाओगे; और तुम जान लोगे कि मैं यहोवा हूं।
15 इस प्रकार मैं शहरपनाह पर, और उन पर जो उस पर तड़के के गारे से दागे गए हैं, अपना जलजलाहट भड़काऊंगा, और तुम से कहूंगा, शहरपन अब न रहा, और न वे उसके लगानेवाले रहे;
16 इस्राएल के भविष्यद्वक्ता, जो यरूशलेम के विषय में भविष्यद्वाणी करते हैं, और जो उसके लिथे शान्ति के दर्शन देखते हैं, और शान्ति नहीं, यहोवा परमेश्वर की यही वाणी है।
17 इसी प्रकार, हे मनुष्य के सन्तान, अपक्की प्रजा की बेटियोंके साम्हने अपना मुंह फेर लेना, जो अपके ही मन से भविष्यद्वाणी करती हैं; और तू उनके विरुद्ध नबूवत करना।
18 और कहो, परमेश्वर यहोवा योंकहता है; उन महिलाओं के लिए धिक्कार है जो सभी आर्महोल तक तकिए सिलती हैं, और आत्माओं का शिकार करने के लिए हर कद के सिर पर रूमाल बनाती हैं! क्या तुम मेरे लोगों की आत्माओं का शिकार करोगे, और क्या तुम उन आत्माओं को जीवित बचाओगे जो तुम्हारे पास आती हैं?
19 और क्या तुम मेरी प्रजा के बीच में मुट्ठी भर जव और रोटियोंके लिथे मुझे अपवित्र करोगे, कि जो प्राण न मर जाएं, और जो जीवित न रहें उन को घात करें, और अपक्की प्रजा से जो तेरी झूठी बातें सुनते हैं, झूठ बोलकर मुझे अशुद्ध करें?
20 इस कारण परमेश्वर यहोवा यों कहता है; देख, मैं तेरे उन तकियों के विरोध में हूं, जहां से तुम प्राणों को उड़ाने के लिथे उनका शिकार करते हो, और मैं उन्हें तुम्हारी भुजाओं से फाड़ दूंगा, और प्राणों को, यहां तक कि उन आत्माओं को भी जाने दूंगा, जिनका तुम उन्हें उड़ाने के लिए शिकार करते हो।
21 मैं तेरे रूमाल भी फाड़ दूंगा, और अपक्की प्रजा को तेरे हाथ से छुड़ाऊंगा, और वे फिर तेरे हाथ में शिकार करने के लिथे न रहेंगी; और तुम जान लोगे कि मैं यहोवा हूं।
22 क्योंकि तुम ने धर्मियोंके मन को फूठ से उदास किया है, जिन को मैं ने उदास नहीं किया; और दुष्टों के हाथ बलवन्त किए, कि वह अपके दुष्ट मार्ग से फिर न फिरे, और उसे जीवन देने का वचन दे;
23 इसलिथे तुम फिर न तो व्यर्थता, और न ही ईश्वरीय अटकल देखोगे; क्योंकि मैं अपक्की प्रजा को तेरे हाथ से छुड़ाऊंगा; और तुम जान लोगे कि मैं यहोवा हूं।
अध्याय 14
मूर्तिपूजकों ने पश्चाताप करने का आह्वान किया - अकाल, शोरगुल वाले जानवरों, तलवार और महामारी की सजा - उदाहरण के लिए आरक्षित एक अवशेष।
1 तब इस्राएल के कुछ पुरनिये मेरे पास आकर मेरे साम्हने बैठ गए।
2 और यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि
3 हे मनुष्य के सन्तान, इन लोगोंने अपक्की अपक्की मूरतें अपके मन में गढ़ी हैं, और अपके अधर्म की ठोकर को अपके साम्हने रखा है; क्या मुझसे उनसे बिल्कुल भी पूछताछ की जानी चाहिए?
4 इसलिथे उन से कह, कि परमेश्वर यहोवा योंकहता है; इस्राएल के घराने का हर एक पुरूष जो अपक्की मूरतोंको अपके मन में स्थिर करे, और अपके अधर्म की ठोकर को अपके साम्हने धरकर भविष्यद्वक्ता के पास आए; मैं यहोवा अपनी मूरतों की भीड़ के अनुसार उसके आने वाले को उत्तर दूंगा;
5 कि मैं इस्राएल के घराने को उनके मन में ले लूंगा, क्योंकि वे सब अपक्की मूरतोंके कारण मुझ से अलग हो गए हैं।
6 इसलिथे इस्राएल के घराने से कह, कि परमेश्वर यहोवा योंकहता है; मन फिराओ, और अपक्की मूरतोंसे फिरो; और अपना मुंह अपके सब घिनौने कामोंसे फेर ले।
7 क्योंकि इस्राएल के घराने वा परदेशी जो इस्राएल में परदेशी हो, और अपके अपके मन में अपक्की मूरतोंको स्थिर करके अपके अधर्म की ठोकर को अपके साम्हने धरकर भविष्यद्वक्ताके पास आ जाए, मेरे विषय में उससे पूछताछ करना; मैं यहोवा उसे आप ही उत्तर दूंगा;
8 और मैं उस मनुष्य के साम्हने अपना मुंह करके उसके लिये एक चिन्ह और कहावत बनाऊंगा, और उसे अपक्की प्रजा के बीच में से नाश करूंगा; और तुम जान लोगे कि मैं यहोवा हूं।
9 और यदि भविष्यद्वक्ता किसी बात के द्वारा धोखा खाए, तो मैं यहोवा ने उस भविष्यद्वक्ता को धोखा नहीं दिया; इस कारण मैं अपना हाथ उस पर बढ़ाऊंगा, और उसे अपक्की प्रजा इस्राएल के बीच में से सत्यानाश करूंगा।
10 और वे अपके अधर्म का दण्ड भोगेंगे; नबी का दण्ड उसके खोजी के दण्ड के समान होगा;
11 इसलिथे कि इस्राएल का घराना फिर मेरे पास से भटक न जाए, और अपने सब अपराधोंके कारण फिर अशुद्ध न हो; परन्तु इसलिये कि वे मेरी प्रजा ठहरें, और मैं उनका परमेश्वर ठहरूं, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
12 यहोवा का यह वचन फिर मेरे पास पहुंचा, कि,
13 हे मनुष्य के सन्तान, जब देश बड़ा अपराध करके मेरे विरुद्ध पाप करे, तब मैं उस पर अपना हाथ बढ़ाकर उसकी रोटी की लाठी को तोड़ डालूंगा, और उस पर अकाल डालूंगा, और मनुष्य और पशु को उस में से नाश करूंगा; यह;
14 चाहे नूह, दानिय्येल और अय्यूब ये तीनों मनुष्य उस में हों, तौभी अपके प्राणोंको धर्म के द्वारा बचाए, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
15 यदि मैं ऊँचे स्वरवाले जन्तुओं को उस देश में से होकर जाने दे, और वे उसे ऐसा उजाड़ दें कि वह उजाड़ हो जाए, और कोई पशु पशुओं के कारण उस में से होकर न गुजरे;
16 चाहे ये तीनों मनुष्य उस में हों, तौभी मेरे जीवित रहने के कारण, परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, कि वे न तो पुत्र उत्पन्न करेंगे और न बेटियां; वे केवल छुड़ाए जाएंगे, परन्तु देश उजाड़ हो जाएगा।
17 वा यदि मैं उस देश में तलवार चलाकर यह कहूं, कि तलवार उस देश में चल; कि मैं उस में से मनुष्य और पशु दोनों को नाश करूं;
18 परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, कि मेरे जीवन की शपय में ये तीनों मनुष्य उस में थे, तौभी वे न तो पुत्र उत्पन्न करेंगे और न बेटियां, वरन केवल अपके ही छुड़ाए जाएंगे।
19 या यदि मैं उस देश में मरी भेजूं, और उस पर अपना जलजलाहट भरकर उस में से मनुष्य क्या पशु नाश कर डालूं;
20 चाहे नूह, दानिय्येल और अय्यूब उस में हों, तौभी मेरे जीवन की सौगन्ध, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है, वे न तो कोई पुत्र उत्पन्न करेंगे और न पुत्री; वे अपने प्राणों को अपने धर्म के अनुसार बचाएंगे।
21 क्योंकि परमेश्वर यहोवा यों कहता है; जब मैं यरूशलेम पर तलवार, और अकाल, और गरजनेवाले पशु, और मरी, कि वह मनुष्य और पशु दोनों को नाश करे, तब मैं ने अपके चार भयानक दण्ड को और क्यों न भेजा?
22 तौभी देखो, उस में कुछ पुत्र और बेटियां, जो उत्पन्न होंगी, उनमें से कुछ बचे रहेंगे; देखो, वे तुम्हारे पास निकल आएंगे, और तुम उनका चालचलन और उनके काम देखोगे; और जो विपत्ति मैं ने यरूशलेम पर डाली है उस सब के विषय में जो कुछ मैं ने उस में डाला है उस के विषय में तुम को शान्ति मिलेगी।
23 और जब तुम उनके चालचलन और उनके कामोंको देखोगे, तब वे तुम्हें शान्ति देंगे; और तुम जान लोगे कि जो कुछ मैं ने उस में किया है वह अकारण नहीं किया, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
अध्याय 15
यरूशलेम की अस्वीकृति।
1 और यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि,
2 हे मनुष्य के सन्तान, दाखलता का वृक्ष किसी वृक्ष से, वा उस डाली से जो वन के वृक्षोंमें से है, क्या है?
3 क्या उसकी लकड़ी किसी काम के लिये ली जाए? वा उस पर कोई पात्र टांगने के लिथे लोग उसकी एक टहनी लेंगे?
4 देखो, वह ईंधन के लिथे आग में झोंका जाता है; आग उसके दोनों सिरों को भस्म कर देती है, और बीच का भाग जल जाता है। क्या यह किसी काम के लिए मिलते हैं?
5 देखो, जब वह चंगा हो गया, तो वह बिना काम का मिला; जब आग ने उसे भस्म कर दिया, और वह जल गई, तब किसी काम के लिथे उसे कितना कम मिलेगा?
6 इसलिथे परमेश्वर यहोवा योंकहता है; जैसा दाख का वृक्ष वन के वृक्षों में से जिसे मैं ने आग में जलाने के लिये दिया है, वैसा ही मैं यरूशलेम के निवासियों को दूंगा।
7 और मैं उनके साम्हने अपना मुंह फेरूंगा; वे एक आग में से निकलेंगे, और दूसरी आग उन्हें भस्म करेगी; और जब मैं उन से मुंह फेर लूंगा तब तुम जान लोगे कि मैं यहोवा हूं।
8 और मैं देश को उजाड़ दूंगा, क्योंकि उन्होंने अपराध किया है, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
अध्याय 16
एक मनहूस महिला की समानता के तहत यरूशलेम की दुष्ट स्थिति को दिखाया गया है - अंत में दया का वादा किया गया है।
1 फिर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि,
2 हे मनुष्य के सन्तान, यरूशलेम को उसके घिनौने कामों का ज्ञान करा,
3 और कहो, परमेश्वर यहोवा यरूशलेम से यों कहता है; तेरा जन्म और तेरा जन्म कनान देश का है; तेरा पिता एमोरी, और तेरी माता हित्ती थी।
4 और तेरे जन्म के दिन तेरी नाभि न तो कटी, और न तुझे सहारा देने के लिथे जल से न धोया गया; तू न तो नमकीन हुआ, और न कुछ लपेटा गया।
5 किसी ने तुझ पर दया नहीं की, कि इनमें से कुछ तुझ से करे, और तुझ पर दया करे; परन्तु जिस दिन तू उत्पन्न हुआ, उस दिन तू अपके जन से घिन करने के लिथे खुले मैदान में फेंक दिया गया।
6 और जब मैं तेरे पास से चला, और तुझे अपके ही लोहू में अशुद्ध देखा, तब मैं ने तुझ से कहा, जब तू अपके लोहू में रह, जीवित रहे; हां, जब तू अपके लोहू में था, तब मैं ने तुझ से कहा था, जीवित रह।
7 मैं ने तुझे मैदान की कली की नाईं बढ़ा दिया है, और तू बढ़ता और बड़ा होता जाता है, और तू उत्तम आभूषण पाता है; तेरे स्तन सुडौल हैं, और तेरे बाल बड़े हो गए हैं, जबकि तू नंगा और नंगा था।
8 और जब मैं ने तेरे पास से होकर तेरी ओर दृष्टि की, तो क्या देखा, कि तेरे प्रेम का समय आ गया है; और मैं ने अपक्की कमर को तेरे ऊपर फैलाया, और तेरा नंगापन ढांप दिया; हां, मैं ने तुझ से शपय खाई, और तेरे साथ वाचा बान्धी, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है, और तू मेरा हो गया ।
9 तब मैं ने तुझे जल से नहलाया; वरन मैं ने तेरा लोहू तुझ पर से भली भांति धो डाला, और तेल से तेरा अभिषेक किया है।
10 मैं ने तुझे भी कढ़ाई का काम पहिनाया, और तुझे बिज्जू की खाल पहिना दी, और मैं ने तुझे उत्तम मलमल से पहिनाया, और तुझे रेशम से ढांप दिया।
11 मैं ने तुझे भी आभूषण पहनाए, और तेरे हाथोंमें कंगन, और तेरे गले में जंजीर बान्धी।
12 और मैं ने तेरे माथे पर एक गहना, और तेरे कानोंमें बालियां, और तेरे सिर पर एक सुंदर मुकुट रखा है।
13 इस प्रकार तू सोने और चान्दी से अलंकृत हुआ; और तेरा वस्त्र उत्तम मलमल, और रेशम, और लच्छेदार वस्त्रों का था; तू ने मैदा, और मधु, और तेल खाया था; और तू अति सुन्दर था, और तू राज्य करने में सफल हुआ।
14 और तेरी शोभा के कारण अन्यजातियोंमें तेरी ख्याति फैल गई; क्योंकि वह मेरी शोभा के द्वारा जो मैं ने तुझ पर पहिनाया था, वह सिद्ध हुआ, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
15 परन्तु तू ने अपक्की शोभा पर भरोसा रखा, और अपक्की कीर्ति के कारण वेश्या का काम किया, और अपक्की व्यभिचारियोंको सब आने-जानेवालोंपर उण्डेल दिया; उसका यह था।
16 और अपके वस्त्रोंमें से तू ने अपके ऊँचे स्थानोंको लेकर अपके ऊँचे स्थानोंको अलग-अलग रंग से अलंकृत किया, और उस पर वेश्या का काम किया; जैसी बातें न आएंगी, और न होंगी।
17 तू ने मेरे सोने और चान्दी से जो मैं ने तुझे दिया था, अपके सुन्दर मणियों को लेकर मनुष्योंकी मूरतें बना लीं, और उन से व्यभिचार किया,
18 और अपके भुने हुए वस्त्र ले कर ढांपे; और मेरा तेल और मेरा धूप उनके साम्हने रखा है।
19 मेरा मांस जो मैं ने तुझे दिया था, वह मैदा, और तेल, और मधु, जिस से मैं ने तुझे खिलाया या, उसको भी तू ने उनके साम्हने सुगन्ध के लिथे रखा है; और ऐसा ही हुआ, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
20 फिर तू ने अपके अपके बेटे-बेटियोंको, जो तू ने मुझ से उत्पन्न किए हैं, ले जाकर उन के लिथे खा जाने के लिथे बलि भी किए हैं। क्या यह तेरी व्यभिचार की एक छोटी सी बात है,
21 कि तू ने मेरे लड़केबालोंको घात करके उनको छुड़ाया है, कि वे उनके लिथे आग में से निकल जाएं?
22 और अपके सब घिनौने कामोंऔर व्यभिचारोंमें तू ने अपक्की जवानी के दिन स्मरण न किए, जब तू नंगा और नंगा था, और अपके लोहू के कारण अशुद्ध हुआ।
23 और तेरी सारी दुष्टता के बाद हुआ, (हाय, तुझ पर हाय! परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है,)
24 कि तू ने अपके लिथे एक प्रतिष्ठित स्यान बनवाया है, और सब चौकोंमें तुझे ऊंचा स्थान बनाया है।
25 तू ने अपके ऊँचे स्थान को मार्ग के सब सिरोंपर बनाया, और अपक्की शोभा को घिनौना बना दिया है, और आने-जानेवालोंके लिथे अपने पांव खोल दिए हैं, और अपक्की व्यभिचारिणी हो गई है।
26 तू ने अपके पड़ोसी मिस्रियोंके संग व्यभिचार किया है, जो मांस से बहुत बड़े हैं; और मुझे क्रोध दिलाने के लिथे तेरा व्यभिचार बढ़ा दिया है।
27 देखो, इसलिथे मैं ने तेरा हाथ बढ़ाकर तेरा साधारण भोजन घटा दिया है, और तेरे बैरियोंकी इच्छा के वश में तुझे सौंप दिया है, जो पलिश्तियोंकी बेटियाँ हैं, जो तेरे धूर्त चालचलन से लज्जित हैं।
28 तू ने अश्शूरियों के साथ भी व्यभिचार किया है, क्योंकि तू अतृप्त था; वरन तू ने उनके साथ व्यभिचार किया, तौभी तृप्त न हो सका।
29 तू ने अपना व्यभिचार कनान देश में कसदिया तक बढ़ाया है; तौभी तू इस से सन्तुष्ट न हुआ।
30 तेरा मन क्या ही निर्बल है, यहोवा परमेश्वर की यह वाणी है, कि तू यह सब काम करता है, जो एक व्यभिचारी व्यभिचारिणी स्त्री का काम है;
31 इस से तू सब मार्ग के सिरे पर अपना प्रतिष्ठित स्थान स्थिर करता, और सब चौकोंमें अपनी गति तेज करता है; और तू वेश्या के समान न रहा, कि तू भाड़े का तिरस्कार करता है;
32 पर उस स्त्री की नाई जो व्यभिचार करती है, जो अपके पति के बदले परदेशियोंको ले लेती है!
33 वे सब वेश्याओं को भेंट देते हैं; परन्तु तू अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके ललए भाड़े पर िेता है ।
34 और तुम में दूसरी स्त्रियों की ओर से जो व्यभिचार करती हैं, तुम में इसके विपरीत है, और कोई व्यभिचार करने के लिये तुम्हारे पीछे पीछे नहीं चलता; और उस में तू बदला देता है, और तुझे कोई प्रतिफल नहीं दिया जाता, इस कारण तू विरोध करता है।
35 इसलिए, हे वेश्या, यहोवा का वचन सुन;
36 परमेश्वर यहोवा यों कहता है; क्योंकि तेरा मलिनता उण्डेला गया, और तेरा नंगापन तेरे प्रेमियोंके संग, और घिनौनी मूरतोंसे, और अपक्की सन्तानोंके लोहू से, जो तू ने उनको दिया या;
37 देखो, इसलिथे मैं तुम्हारे सब यारोंको जिन से तुम प्रसन्न हो, और जितनोंको तू ने प्रीति रखता है, उन सभोंको, जिनसे तू बैर रखता है, इकट्ठा करूंगा; और मैं उन्हें तेरे साम्हने चारोंओर इकट्ठा करूंगा, और तेरा नंगापन उन के साम्हने देखूंगा, कि वे तेरा सारा नंगापन देखें।
38 और मैं तुम्हारा न्याय ऐसे करूंगा, जैसे विवाह बंधन तोड़नेवाली और लोहू करनेवाली स्त्रियोंका न्याय किया जाएगा; और मैं जलजलाहट और जलन से तुझे लहू दूंगा।
39 और मैं तुझे उनके वश में कर दूंगा, और वे तेरे प्रतिष्ठित स्थान को ढा देंगे, और तेरे ऊंचे स्थानोंको ढा देंगे; वे तेरे वस्त्र भी उतारेंगे, और तेरे सुन्दर गहने ले लेंगे, और तुझे नंगा और नंगा छोड़ देंगे।
40 वे भी तेरे विरुद्ध एक दल बुलवाएंगे, और तुझे पत्यरवाह करेंगे, और अपक्की तलवारोंसे तुझे कुचल डालेंगे।
41 और वे तेरे घरोंको आग लगाकर जलाएंगे, और बहुत सी स्त्रियोंके साम्हने तुझे दण्ड देंगे; और मैं तुझे व्यभिचार करने से रोकूंगा, और तू फिर कभी भाड़ा न देना।
42 तब मैं तुझ पर अपना जलजलाहट विश्राम करने के लिथे भड़काऊंगा, और मेरी जलन तुझ पर से हट जाएगी, और मैं चुप रहूंगा, और फिर कभी क्रोध न करूंगा।
43 क्योंकि तू ने अपक्की जवानी के दिन स्मरण नहीं किए, वरन इन सब बातोंमें मुझे चिढ़ाया है; देख, इसलिथे मैं भी तेरे चालचलन का बदला तेरे सिर पर दूंगा, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है; और अपके सब घिनौने कामोंसे बढ़कर यह काम न करना।
44 सुन, जो कोई नीतिवचन का प्रयोग करेगा, वह तेरे विरुद्ध यह कहावत लगाएगा, कि जैसी माता वैसी ही उसकी बेटी भी होती है।
45 तू अपक्की माता की बेटी है, जो अपके पति और अपके बालकोंसे बैर रखती है; और तू अपक्की उन बहिनोंकी बहिन है, जो अपके अपके पति और अपके लड़केबालोंसे बैर रखती हैं; तेरी माता हित्ती थी, और तेरा पिता एमोरी।
46 और तेरी बड़ी बहिन शोमरोन है, वह और उसकी बेटियां जो तेरे बायीं ओर रहती हैं; और तेरी छोटी बहिन जो तेरी दहिनी ओर रहती है, वह सदोम और उसकी बेटियां हैं।
47 तौभी तू न तो उनके मार्गों पर चला, और न उनके घिनौने कामों के अनुसार चला; परन्तु मानो वह बहुत छोटी सी बात हो, और तू उन से बढ़कर अपके सब कामोंमें भ्रष्ट हो गया।
48 परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, मेरे जीवन की सौगन्ध, तेरी बहिन सदोम ने न तो अपक्की बेटियोंको, जैसा तू ने और न अपक्की बेटियोंको किया है वैसा नहीं किया।
49 सुन, तेरी बहिन सदोम का अधर्म यह था, कि उस में और उसकी बेटियोंमें घमण्ड, भरपेट भोजन, और आलस्य बहुत था, और न उस ने कंगालोंऔर दरिद्रोंका हाथ बढ़ाया।
50 और उन्होंने घमण्ड किया, और मेरे साम्हने घृणित काम किया; इस कारण मैं ने उन्हें अच्छा देखा, और उन्हें ले गया।
51 और न तो शोमरोन ने तेरे आधे पाप किए; परन्तु तू ने अपक्की घिनौनी वस्तुओं को उन से अधिक बढ़ाया, और अपक्की बहिनोंको अपके सब घिनौने कामोंमें धर्मी ठहराया है।
52 तू भी, जिस ने अपक्की बहनोंका न्याय किया है, अपके पापोंके लिथे अपक्की लज्जा को सहना
कि तू ने उन से अधिक घिनौना काम किया है; वे तुझ से अधिक धर्मी हैं; वरन तू भी लज्जित हो, और अपनी बहनों को धर्मी ठहराने से लज्जित हो।
53 जब मैं सदोम और उसकी बेटियोंकी बंधुआई, और शोमरोन और उसकी बेटियोंकी बंधुआई को फिर लाऊंगा, तब मैं तेरे बंधुओं की बंधुआई को उनके बीच में फिर लाऊंगा;
54 जिस से तू अपक्की लज्जित हो, और जो कुछ तू ने किया है उस में लज्जित हो, कि तू उन को शान्ति दे।
55 जब तेरी बहिनें सदोम और उसकी बेटियां अपके पहिले निज भाग को लौट जाएं, और शोमरोन और उसकी बेटियां अपके अपके निज भाग को लौट जाएं, तब तू अपक्की बेटियां अपके पहिली निज भूमि को लौट जाना।
56 क्योंकि तेरे घमण्ड के दिन तेरे मुंह से तेरी बहिन सदोम का नाम न लिया गया,
57 इस से पहिले कि तू अरामियोंकी नामधराई के समय, और उसके चारोंओर के सब पलिश्तियोंकी नामधराई के समय, जो तुझे चारोंओर तुच्छ जानते हैं, तेरी दुष्टता का पता चलता है।
58 तू ने अपक्की कुटिलता और घिनौने काम उठाए हैं, यहोवा की यही वाणी है।
59 क्योंकि परमेश्वर यहोवा यों कहता है; मैं तुझ से वैसा ही व्यवहार करूंगा जैसा तू ने किया है, जिस ने वाचा तोड़ने की शपथ को तुच्छ जाना है।
60 तौभी मैं तेरी जवानी के दिनोंमें तेरे साथ की गई वाचा को स्मरण करूंगा, और तेरे लिये सदा की वाचा बान्धूंगा।
61 तब तू अपक्की चालचलन को स्मरण रखना, और जब तू अपक्की बहिनों, अपके ज्येष्ठ और अपक्की छोटी बहिनोंको ग्रहण करे, तब लज्जित होना; और मैं उन्हें तुझे बेटियां ब्याह दूंगा, परन्तु तेरी वाचा के अनुसार नहीं।
62 और मैं तुझ से अपनी वाचा बान्धूंगा; और तू जान लेगा कि मैं यहोवा हूं;
63 जिस से तू स्मरण करके लज्जित हो, और अपक्की लज्जा के कारण फिर कभी अपना मुंह न खोलना, जब मैं तेरे सब कामोंके लिथे तुझ से शान्त हो जाऊं, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
अध्याय 17
दो उकाबों का दृष्टान्त, एक दाखलता और एक देवदार।
1 और यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि,
2 हे मनुष्य के सन्तान, एक पहेली बूझकर इस्राएल के घराने से एक दृष्टान्त कह;
3 और कहो, परमेश्वर यहोवा योंकहता है; एक बड़ा उकाब, जिसके बड़े-बड़े पंख हैं, और लम्बे पंखों वाला, और भिन्न-भिन्न रंगों के पंखों से भरा हुआ, लबानोन में आया, और देवदार की सबसे ऊंची डाली को ले गया;
4 और उस ने अपक्की टहनियोंके ऊपर से काट डाला, और उसे यातायात के देश में ले गया; उसने उसे व्यापारियों के शहर में स्थापित किया।
5 और उस ने उस देश के बीज को लेकर उसे एक फलदायी खेत में लगाया; उसने उसे बड़े जल के पास रखा, और उसे विलो के पेड़ के रूप में स्थापित किया।
6 और वह बड़ा होकर छोटे कद की फैलती हुई दाखलता बन गई, जिसकी डालियां उसकी ओर लगी, और उसकी जड़ें उसके नीचे थीं; सो वह दाखलता बन गई, और डालियां निकलीं, और टहनियां निकलीं।
7 और एक और बड़ा उकाब था, जिसके बड़े पंख और बहुत से पंख थे; और देखो, इस दाखलता ने अपनी जड़ें उसकी ओर मोड़ लीं, और अपनी डालियां उसकी ओर बढ़ा लीं, कि वह उसके वृक्षारोपण की खाइयों से उसे सींचे।
8 वह अच्छी भूमि में बड़े जल के पास लगाया गया था, कि उस में डालियां निकलीं, और उस में फल आए, कि वह अच्छी दाखलता हो।
9 तू कह, कि परमेश्वर यहोवा यों कहता है; क्या यह समृद्ध होगा? क्या वह उसकी जड़ को उखाड़कर उसके फल को ऐसा न काटेगा कि वह मुरझा जाए? वह अपने झरने के सब पत्तों में सूख जाएगा, यहां तक कि बड़ी शक्ति के बिना या बहुत से लोगों को उसकी जड़ों से तोड़ने के लिए।
10 हां, देखो, रोपने के बाद क्या वह सुफल होगा? जब पुरवाई उसको छू ले, तब क्या वह पूरी रीति से मुरझा न जाए? वह खाइयों में मुरझा जाएगा जहां वह बढ़ता है।
11 फिर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि
12 अब बलवा करनेवाले घराने से कहो, क्या तुम नहीं जानते कि इन बातोंका क्या अर्थ है? उन से कहो, सुन, बाबुल का राजा यरूशलेम को आया है, और वह उसके राजा और उसके हाकिमोंको ले कर अपने साथ बाबुल को ले गया है।
13 और उस ने राजा के वंश में से ले कर उस से वाचा बान्धी, और उस से शपय खाई है; उस ने देश के पराक्रमी को भी ले लिया है;
14 इसलिये कि राज्य आधार बना रहे, कि वह ऊपर न उठे, वरन अपनी वाचा के अनुसार स्थिर रहे।
15 परन्तु उस ने अपके दूतोंको मिस्र भेजकर उस से बलवा किया, कि वे उसको घोड़े और बहुत से लोग दें। क्या वह समृद्ध होगा? क्या वह बच निकलेगा जो ऐसी बातें करता है? वा वाचा तोड़कर छुड़ाया जाए?
16 परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, मेरे जीवन की सौगन्ध, जिस स्थान की शपय को उस ने तुच्छ जाना, और जिस की वाचा बाबेल के बीच में उस से तोड़ दी, उस में निश्चय वह मर जाएगा।
17 और फिरौन अपक्की बड़ी सेना और बड़ी सेना समेत युद्ध में उसके लिथे अपके लिथे पहाड़ बनवाकर, और गढ़ बनाकर बहुत से लोगोंको नाश करने के लिथे न बनाए;
18 यह देखकर कि उस ने वाचा को तोड़कर उस शपय को तुच्छ जाना, और जब देख, कि वह अपके हाथ करके ये सब काम कर चुका है, तब भी न बचेगा।
19 इसलिथे परमेश्वर यहोवा योंकहता है; मेरे जीवित रहने की शपय, कि उस ने तुच्छ जाना, और मेरी वाचा जो उस ने तोड़ दी, उसका बदला मैं उसी के सिर पर दूंगा।
20 और मैं उस पर अपना जाल फैलाऊंगा, और वह मेरे फन्दे में फंस जाएगा, और मैं उसे बाबुल में ले जाऊंगा, और वहां उस अपराध के लिथे जो उस ने मुझ से अपराध किया या, उस से बिनती करूंगा।।
21 और उसके सब भगोड़े अपके सब दल समेत तलवार से मारे जाएंगे, और जो बचे रहेंगे वे सब पवनोंकी ओर तित्तर बित्तर हो जाएंगे; और तुम जान लोगे कि यह मैं यहोवा ने कहा है।
22 परमेश्वर यहोवा यों कहता है; मैं ऊँचे देवदार की डालियों में से भी लूंगा, और उसे खड़ा करूंगा; मैं उसकी युवा टहनियों के ऊपर से एक कोमल टहनियां काटूंगा, और उसे एक ऊंचे पहाड़ और प्रतिष्ठित पर लगाऊंगा;
23 मैं उसे इस्राएल के ऊंचे पहाड़ पर लगाऊंगा; और वह डालियां निकालेगा, और फल देगा, और अच्छा देवदार होगा; और उसके नीचे एक एक पंख के सब पक्षी निवास करेंगे; वे उसकी डालियों की छाया में बसे रहेंगे।
24 और मैदान के सब वृझ जान लेंगे, कि मैं यहोवा ने ऊंचे वृझ को गिरा दिया, और नीचे के वृझ को ऊंचा किया, और हरे वृझ को सुखा डाला, और सूखे वृझ को फलने-फूलने दिया है; मैं यहोवा ने कहा है, और किया भी है।
अध्याय 18
खट्टे अंगूर का अन्यायपूर्ण दृष्टान्त।
1 यहोवा का यह वचन फिर मेरे पास पहुंचा, कि,
2 इसका क्या अर्थ है कि तुम इस्राएल के देश के विषय में यह कहावत प्रयोग करते हो, कि पुरखा खट्टे अंगूर खा चुके हैं, और बच्चों के दांत झड़ गए हैं?
3 परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, मेरे जीवन की सौगन्ध, तुझे इस्राएल में यह कहावत फिर कभी बोलने का अवसर न मिलेगा।
4 देख, सब जीव मेरे हैं; जैसे पिता का प्राण, वैसे ही पुत्र का प्राण भी मेरा है; जो आत्मा पाप करे, वह मर जाएगा।
5 परन्तु यदि कोई मनुष्य धर्मी ठहरे, और वह करे जो उचित और ठीक है,
6 और न पहाड़ों पर खाया, और न इस्राएल के घराने की मूरतों की ओर आंखें उठाई, और न अपके पड़ोसी की पत्नी को अशुद्ध किया, और न रजस्वला स्त्री के निकट गया,
7 और किसी पर अन्धेर न किया, वरन उसका बन्धक अपके बन्धक को लौटा दिया, और हिंसा से किसी को लूटा नहीं, और अपक्की रोटी भूखे को दी, और नंगोंको वस्त्र पहिनाया;
8 जिस ने सूद नहीं दिया, और न कुछ बढ़ा लिया, जिस ने अधर्म से हाथ छुड़ाया है, उसी ने मनुष्य और मनुष्य का सच्चा न्याय किया है,
9 वह मेरी विधियों पर चला, और मेरे नियमोंका पालन किया है, कि सच्चाई करूं; वह धर्मी है, वह निश्चय जीवित रहेगा, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
10 यदि वह एक ऐसा पुत्र उत्पन्न करे जो डाकू, और लोहू बहाने वाला हो, और जो इन में से किसी एक के साथ वैसा ही करे,
11 और जो उन कामोंमें से कुछ भी नहीं करता, वरन पहाड़ोंपर खाया भी है, और अपके पड़ोसी की पत्नी को अशुद्ध किया है,
12 उस ने कंगालों और दरिद्रों पर अन्धेर किया, और उपद्रव से लूट लिया, बन्धक को फिर न लौटाया, और मूरतोंकी ओर आंखें उठाकर घिनौना काम किया है,
13 उस ने सूद देकर बढ़ाया, और बढ़ा लिया है; तो क्या वह जीवित रहेगा? वह जीवित न रहे; उस ने ये सब घिनौने काम किए हैं; वह अवश्य मरेगा; उसका खून उस पर होगा।
14 अब, यदि उसके एक पुत्र उत्पन्न हो, जो अपके पिता के सब पापों को जो उस ने किए हैं देखे, और विचार करे, और ऐसा न करे,
15 जिस ने पहाड़ों पर कुछ न खाया हो, और न इस्राएल के घराने की मूरतों की ओर आंख उठाई हो, और अपक्की पड़ोसी की पत्नी को अशुद्ध न किया हो,
16 न किसी पर अन्धेर किया, न बन्धक को टाला, और न हिंसा से लूटा, वरन अपक्की रोटी भूखोंको दी, और नंगोंको पहिरावा पहिनाया,
17 उस ने कंगालों पर से अपना हाथ हटा लिया है, जिस ने न तो सूद लिया और न बढ़ा, वह मेरे नियमों को पूरा किया, वह मेरी विधियों पर चला है; वह अपके पिता के अधर्म के कारण न मरेगा, वह निश्चय जीवित रहेगा।
18 और उसके पिता ने घोर अन्धेर करके उसके भाई को बल से लूटा, और वह किया जो उसकी प्रजा के बीच अच्छा नहीं, क्या वह अपके अधर्म में मारा जाएगा।
19 तौभी तुम कहते हो, क्यों? क्या पुत्र पिता के अधर्म का भार वहन नहीं करता? जब पुत्र ने वह किया हो जो उचित और धर्म का हो, और मेरी सब विधियों को माना हो, और उन पर चलता हो, तो वह निश्चय जीवित रहेगा।
20 जो प्राणी पाप करे, वह मर जाएगा। पुत्र पिता का अधर्म न सहे, और न पिता पुत्र का अधर्म सहे; धर्मी की धार्मिकता उस पर होगी, और दुष्ट की दुष्टता उस पर होगी।
21 परन्तु यदि दुष्ट अपके सब पापोंसे जो उस ने किए हैं फिरें, और मेरी सब विधियोंको मानें, और उचित और धर्म के काम करें, तो वह निश्चय जीवित रहेगा, वह न मरेगा।
22 उसके सब अपराध जो उस ने किए हों, उसकी चर्चा उस से न की जाएगी; अपने धर्म के काम से जो उस ने किया है, वह जीवित रहेगा।
23 क्या मुझे इस बात से कुछ भी प्रसन्नता है कि दुष्ट मर जाएं? भगवान भगवान कहते हैं; और यह नहीं कि वह अपक्की चालचलन से फिरकर जीवित रहे?
24 परन्तु जब धर्मी अपके धर्म से फिरकर अधर्म करे, और उन सब घिनौने कामोंके जो वह दुष्ट करता है, करे, तो क्या वह जीवित रहेगा? उसके सब धर्म जो उस ने किए हों, उसका वर्णन न किया जाए; अपने अपराध में जो उस ने अपराध किया है, और अपने पाप में जो उसने पाप किया है, उनमें वह मर जाएगा।
25 तौभी तुम कहते हो, यहोवा की चाल तुल्य नहीं है। हे इस्राएल के घराने, अब सुन; क्या मेरा रास्ता बराबर नहीं है? क्या तुम्हारे रास्ते असमान नहीं हैं?
26 जब धर्मी अपके धर्म से फिरकर अधर्म करे, और उन में मर जाए; अपने अधर्म के काम के लिये जो उस ने किया है, वह मर जाएगा।
27 फिर जब वह दुष्ट अपनी उस दुष्टता से जो उस ने की फिरे फिरे, और उचित और धर्म के काम करे, तब वह अपके प्राण को जीवित बचाएगा।
28 इसलिथे कि वह विचार करके अपके सब अपराधोंसे जो उस ने किए फिरे हैं, निश्चय जीवित रहेगा, और न मरेगा।।
29 तौभी इस्राएल का घराना योंकहता है, यहोवा की चाल तुल्य नहीं है। हे इस्राएल के घराने, क्या मेरी गति समान नहीं है? क्या तुम्हारे रास्ते असमान नहीं हैं?
30 इसलिथे हे इस्राएल के घराने, मैं तुम्हारा न्याय अपक्की चालचलन के अनुसार करूंगा, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है। मन फिराओ, और अपने सब अपराधों से फिरो; इसलिथे अधर्म तेरा नाश न होगा।
31 अपने उन सब अपराधों को जो तुम ने किए थे, दूर कर; और तुझे नया मन और नई आत्मा बना; हे इस्राएल के घराने, तुम क्यों मरोगे?
32 क्योंकि जो मरता है उसके मरने से मुझे कुछ प्रसन्नता नहीं, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है; इसलिए तुम फिरो और जीवित रहो।
अध्याय 19
शेरों की भेड़ियों का दृष्टान्त — व्यर्थ लता का दृष्टान्त।
1 फिर इस्राएल के हाकिमोंके लिथे विलाप करना,
2 और कह, तेरी माता क्या है? एक शेरनी; वह सिंहों के बीच लेट गई, और अपने भेड़ियों को जवान सिंहों में पाला।
3 और वह अपक्की एक भेड़ को उठा ले गई; वह जवान सिंह बन गई, और अहेर पकड़ना सीख गई; इसने पुरुषों को खा लिया।
4 अन्यजातियों ने भी उसके विषय में सुना; वह उनके गड़हे में ले लिया गया, और वे उसे जंजीरोंमें जकड़ कर मिस्र देश में ले आए।
5 जब उसने देखा, कि मैं बाट जोहती या, और उसकी आशा टूट गई है, तब उस ने अपक्की एक और भेड़ को लेकर उसे जवान सिंह बना दिया।
6 और वह सिंहोंके बीच ऊपर-नीचे जाता रहा, और जवान सिंह बन गया, और अहेर पकड़ना सीख गया, और मनुष्योंको खा जाता।
7 और वह उनके उजाड़ महलोंको जानता था, और उस ने उनके नगरोंको उजाड़ दिया; और देश उसके गरजने के शब्द से उजाड़ और उसकी परिपूर्णता उजाड़ हो गया।
8 तब अन्यजातियोंने प्रान्तोंमें से चारोंओर उसके विरुद्ध कूच करके उस पर अपना जाल फैलाया; वह उनके गड्ढे में ले जाया गया।
9 और वे उसे बन्धनोंमें बन्द करके बाबुल के राजा के पास ले गए; वे उसे गढ़ में ले आए, कि उसका शब्द इस्राएल के पहाड़ों पर फिर सुनाई न दे।
10 तेरी माता मेरे लोहू में उस दाखलता के समान है, जो जल के किनारे लगाई गई है; वह बहुत जल के कारण फलवन्त और डालियों से भरी हुई थी।
11 और उसके राजदण्डोंके लिथे जो प्रभुता करते थे, उसके लिथे दृढ़ छड़ें या, और उसका कद मोटी डालियोंके बीच में ऊंचा किया गया, और वह अपक्की बहुत सी डालियोंसमेत अपनी ऊंचाई पर दिखाई दी।
12 परन्तु वह जलजलाहट के साथ उठाई गई, और भूमि पर गिरा दी गई, और पुरवाई वायु से उसके फल सूख गए; उसकी मजबूत छड़ें टूट गईं और उड़ गईं; आग ने उन्हें भस्म कर दिया।
13 और अब वह जंगल में सूखी और प्यासी भूमि में लगाई गई है।
14 और उसकी डालियों की डण्डी में से आग निकल गई, जिस से उसका फल भस्म हो गया, और उसके पास राजदण्ड होने के लिथे कोई दृढ़ डंडा न रहा।। यह एक विलाप है, और विलाप के लिए होगा।
अध्याय 20
इस्राएल के विद्रोह — परमेश्वर ने उन्हें इकट्ठा करने की प्रतिज्ञा की है।
1 और सातवें वर्ष के पांचवें महीने के दसवें दिन को, इस्राएल के कुछ पुरनिये यहोवा से पूछने को आए, और मेरे साम्हने बैठ गए।
2 तब यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि,
3 हे मनुष्य के सन्तान, इस्राएल के पुरनियोंसे कह, कि परमेश्वर यहोवा योंकहता है; क्या तुम मुझसे पूछने आए हो? परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, कि मेरे जीवन की सौगन्ध, तुझ से मुझ से कुछ न पूछा जाएगा।
4 क्या तू उनका न्याय करेगा, मनुष्य के सन्तान, क्या तू उनका न्याय करेगा? उन्हें उनके पुरखाओं के घिनौने कामों का ज्ञान कराओ;
5 और उन से कहो, परमेश्वर यहोवा योंकहता है; जिस दिन मैं ने इस्राएल को चुन लिया, और याकूब के घराने के वंश की ओर हाथ बढ़ाकर मिस्र देश में उन पर प्रगट किया, जब मैं ने उन पर हाथ उठाकर कहा, कि मैं तेरा यहोवा हूं भगवान;
6 जिस दिन मैं ने उन पर हाथ उठाया, कि उन्हें मिस्र देश से निकालकर उस देश में पहुंचाऊं, जिस में मैं ने उनका भेद लिया या, और उस में दूध और मधु की धाराएं बहती हैं, जो सब देशोंकी महिमा है;
7 तब मैं ने उन से कहा, अपक्की आंखोंके घिनौने कामोंको दूर कर, और मिस्र की मूरतोंके साम्हने अपने आप को अशुद्ध न करना; मैं तुम्हारा स्वामी, परमेश्वर हूँ।
8 परन्तु उन्होंने मुझ से बलवा किया, और मेरी न मानी; उन्होंने न तो अपक्की आंखोंकी घिनौनी वस्तुओं को दूर किया, और न मिस्र की मूरतोंको छोड़ा; तब मैं ने कहा, मैं अपक्की जलजलाहट उन पर भड़काऊंगा, कि अपना कोप मिस्र देश के बीच उन पर भड़काऊं।
9 परन्तु मैं ने अपके नाम के लिथे ऐसा गढ़ा, कि वह उन जातियोंके साम्हने, जिनके बीच में वे थे, जिन के साम्हने मैं ने अपके आप को प्रगट करके उन्हें मिस्र देश से निकाल लाया, अशुद्ध न होने पाए।
10 इसलिथे मैं ने उनको मिस्र देश से निकालकर जंगल में पहुंचाया।
11 और मैं ने उन्हें अपक्की विधियां दी, और अपके नियम दिखाए, जिन पर यदि कोई माने, तो उन में जीवित भी रहेगा।
12 और मैं ने अपके विश्रामदिन उनको भी दिए, कि वे मेरे और उनके बीच एक चिन्ह ठहरें, जिस से वे जान लें कि मैं उनका पवित्र करनेवाला यहोवा हूं।
13 परन्तु इस्राएल के घराने ने जंगल में मुझ से बलवा किया; वे मेरी विधियों पर न चले, और मेरे उन नियमोंको तुच्छ जाना, जिन को यदि कोई माने, तो उन में जीवित भी रहेगा; और मेरे विश्रामदिनोंको वे बहुत अपवित्र करते हैं; तब मैं ने कहा, मैं जंगल में उन पर अपक्की जलजलाहट भड़काऊंगा, कि उन्हें भस्म कर दूं।
14 परन्तु मैं ने अपके नाम के लिथे गढ़ा, कि वह उन जातियोंके साम्हने अपवित्र न हो जाए, जिनके साम्हने मैं उन्हें निकाल लाया था।
15 तौभी मैं ने जंगल में उन पर अपना हाथ बढ़ाया, कि मैं उन्हें उस देश में न ले आने दूंगा, जिसे मैं ने उन्हें दिया था, और उस में दूध और मधु की धाराएं बहती हैं, जो सब देशोंकी महिमा है;
16 क्योंकि उन्होंने मेरे नियमोंको तुच्छ जाना, और मेरी विधियोंपर न चले, वरन मेरे विश्रामदिनोंको अशुद्ध किया; क्योंकि उनका मन अपक्की मूरतोंके पीछे लग गया।
17 तौभी मेरी दृष्टि ने उनको नाश करने से बचाया, और न मैं ने जंगल में उनका अन्त किया।
18 परन्तु मैं ने जंगल में उनके बालकोंसे कहा, अपके पितरोंकी विधियोंपर न चलना, और न उनके नियमोंको मानना, और न उनकी मूरतोंसे अपने आप को अशुद्ध करना;
19 मैं तेरा परमेश्वर यहोवा हूं; मेरी विधियों पर चलो, और मेरे नियमों का पालन करो, और उन पर चलो;
20 और मेरे विश्रामदिनोंको पवित्र करो; और वे मेरे और तुम्हारे बीच एक चिन्ह ठहरेंगे, जिस से तुम जान सको कि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं।
21 तौभी बालकोंने मुझ से बलवा किया; वे न तो मेरी विधियों पर चले, और न मेरे नियमों को मानने के लिये उन पर चलते रहे, जिन्हें यदि कोई माने, तो उन में जीवित भी रहेगा; उन्होंने मेरे विश्रामदिनों को अशुद्ध किया; तब मैं ने कहा, मैं उन पर अपनी जलजलाहट भड़काऊंगा, कि जंगल में उन पर अपना कोप भड़काऊं।
22 तौभी मैं ने हाथ बढ़ाकर अपके नाम के निमित्त ऐसा किया, कि वह उन अन्यजातियोंके साम्हने अपवित्र न हो जाए, जिनके साम्हने मैं उन्हें निकाल लाया था।
23 मैं ने जंगल में भी उन पर हाथ उठाया, कि मैं उन्हें अन्यजातियोंमें तितर-बितर करूं, और देश देश में तितर-बितर करूं;
24 क्योंकि उन्होंने मेरे नियम न माने, वरन मेरी विधियोंको तुच्छ जाना, और मेरे विश्रामदिनोंको अशुद्ध किया, और उनकी आंखें अपके पितरोंकी मूरतोंपर लगी रहती थीं।
25 इसलिथे मैं ने उनको ऐसी विधियां दीं जो अच्छी न थीं, और ऐसे नियम भी दिए जिनके अनुसार वे जीवित न रहें;
26 और मैं ने उनको उन्हीं के वरदानोंके द्वारा अपवित्र किया, कि उन्होंने उस आग में से जो गर्भ का द्वार खोलती है, पार कर दिया, कि मैं उन्हें ऐसा उजाड़ दूं, कि वे जान लें कि मैं यहोवा हूं।
27 इसलिथे हे मनुष्य के सन्तान, इस्राएल के घराने से कह, कि परमेश्वर यहोवा योंकहता है; तौभी इस में तेरे पुरखाओं ने मेरी निन्दा की है, कि उन्होंने मेरा अपराध किया है।
28 क्योंकि जब मैं उन्हें उस देश में ले आया, जिसे देने के लिथे मैं ने हाथ बढ़ाकर उन्हें दिया या, तब उन्होंने सब ऊंचे पहाड़ और सब घने वृक्ष देखे, और वहां अपके बलि चढ़ाए, और वहां उन्होंने भेंट चढ़ा दी। उनकी भेंट का उत्तेजना; वहाँ भी उन्होंने अपना मीठा सुगन्ध बनाया, और अपके अर्घ को वहीं उंडेल दिया।
29 तब मैं ने उन से कहा, तुम किस ऊंचे स्थान पर जाते हो? और उसका नाम आज तक बामा रखा गया है।
30 इसलिथे इस्राएल के घराने से कहो; इस प्रकार भगवान भगवान कहते हैं; तुम अपने पुरखाओं की सी चाल से अशुद्ध हो गए हो, और उनके घिनौने कामों के अनुसार व्यभिचार करते हो।
31 क्योंकि जब तुम अपक्की भेंट चढ़ाते हो, और अपके पुत्रोंको आग में से उड़ाते हो, तब तो तुम अपक्की सब मूरतोंसमेत अपके अपके को आज तक अशुद्ध करते हो; और हे इस्राएल के घराने, क्या मैं तुझ से पूछूंगा? परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, कि मेरे जीवन की सौगन्ध, तुझ से मुझ से कुछ न पूछा जाएगा।
32 और जो कुछ तुम्हारे मन में आए वह कभी न रहे, कि तुम कहते हो, कि हम अन्यजातियोंके समान, और देश देश के कुलोंके समान लकड़ी और पत्थर की सेवा करेंगे।
33 परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, मेरे जीवन की सौगन्ध, निश्चय बलवन्त हाथ और बढ़ाई हुई भुजा और जलजलाहट के साथ मैं तुम पर प्रभुता करूंगा;
34 और मैं तुम को लोगोंमें से निकालूंगा, और उन देशोंमें से जहां तुम तित्तर बित्तर हुए हो, और बलवन्त हाथ, और बढ़ाई हुई भुजा और जलजलाहट के द्वारा तुम्हें इकट्ठा करूंगा।
35 और मैं तुम को प्रजा के जंगल में पहुंचाऊंगा, और वहां मैं तुम से आमने सामने बिनती करूंगा।
36 जैसे मैं ने मिस्र देश के जंगल में तुम्हारे पुरखाओं से बिनती की, वैसे ही मैं तुम से भी बिनती करूंगा, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
37 और मैं तुझे लाठी के नीचे से चलाऊंगा, और वाचा के बन्धन में डाल दूंगा;
38 और मैं तुम्हारे बीच में से बलवाइयोंको, और जो मेरे विरुद्ध अपराध करते हैं उनको दूर करूंगा; मैं उनको उस देश में से निकाल लाऊंगा जहां वे रहते हैं, और वे इस्राएल के देश में प्रवेश न करने पाएंगे; और तुम जान लोगे कि मैं यहोवा हूं।
39 हे इस्राएल के घराने, तेरा परमेश्वर यहोवा योंकहता है; यदि तुम मेरी बात नहीं मानोगे, तो जाओ, उसके सब मूरतों की उपासना करो, वरन उसके बाद भी। वरन अपक्की भेंटों, और अपनी मूरतोंसे मेरे पवित्र नाम को फिर अशुद्ध न करना।
40 क्योंकि मेरे पवित्र पर्वत पर, इस्राएल के ऊंचे पहाड़ पर, परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, कि इस्राएल का सारा घराना वरन देश के सब लोग मेरी उपासना करें; वहाँ मैं उन्हें ग्रहण करूँगा, और वहाँ मैं तेरी भेंटों, और तेरे बलिदानों की पहिली उपज, और तेरी सब पवित्र वस्तुओं की मांग करूंगा।
41 जब मैं तुम को प्रजा में से निकाल कर उन देशों में से जहां तुम तित्तर बित्तर हुए या, इकट्ठा करूंगा, तब मैं तुम्हारे मीठे स्वाद से तुम्हें ग्रहण करूंगा; और मैं अन्यजातियों के साम्हने तुम में पवित्र ठहरूंगा।
42 और जब मैं तुझे इस्राएल के देश में उस देश में पहुंचाऊंगा, जिसे मैं ने तेरे पुरखाओं को देने के लिथे अपके हाथ उठाया था, तब तुम जान लोगे कि मैं यहोवा हूं।
43 और वहां तुम अपके चालचलन और अपके सब कामोंको स्मरण करना, जिन में तुम अशुद्ध हुए हो; और तुम अपक्की दृष्टि में अपके सब बुरे कामोंके कारण अपके साम्हने से घृणा करना।
44 और जब मैं ने अपके नाम के निमित्त तुम्हारे साथ काम किया, तब तुम जान लोगे कि मैं यहोवा हूं, न तो अपके दुष्ट कामोंके अनुसार, और न तेरे भ्रष्ट कामोंके अनुसार, हे इस्राएल के घराने, यहोवा परमेश्वर की यही वाणी है।
45 फिर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि,
46 हे मनुष्य के सन्तान, अपना मुंह दक्खिन की ओर कर, और अपना वचन दक्खिन की ओर छोड़, और दक्खिन के जंगल के विषय में भविष्यद्वाणी कर;
47 और दक्खिन देश के वन से कह, यहोवा का वचन सुन; इस प्रकार भगवान भगवान कहते हैं; देख, मैं तुझ में आग लगाऊंगा, और वह तेरे सब हरे वृक्षों, और सब सूखे वृक्षोंको भस्म कर डालेगी; वह धधकती हुई लौ न बुझे, और दक्खिन से उत्तर तक सब मुख उस में जलाए जाएं।
48 और सब प्राणी देखेंगे, कि मैं यहोवा ने उसको जलाया है; इसे बुझाया नहीं जाएगा।
49 तब मैं ने कहा, हे परमेश्वर यहोवा! वे मेरे विषय में कहते हैं, क्या वह दृष्टान्त नहीं बोलता?
अध्याय 21
आहें भरने का चिन्ह - तेज, चमकीली तलवार।
1 और यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि,
2 हे मनुष्य के सन्तान, अपना मुंह यरूशलेम की ओर कर, और अपना वचन पवित्र स्थानों की ओर छोड़, और इस्राएल देश के विषय में भविष्यद्वाणी कर,
3 और इस्राएल के देश से कह, यहोवा योंकहता है; देख, मैं तेरे विरुद्ध हूं, और अपक्की तलवार को अपके म्यान में से निकालूंगा, और तुझ में से धर्मी और दुष्ट को नाश करूंगा।
4 इसलिथे कि मैं तुझ में से धर्मी और दुष्ट दोनोंको नाश करूंगा, इसलिथे मेरी तलवार उसके म्यान में से दक्खिन से उत्तर की ओर सब प्राणियोंपर चढ़ाई जाएगी;
5 जिस से सब प्राणी जान लें कि मैं यहोवा ने अपके म्यान में से अपनी तलवार निकाली है; यह अब और नहीं लौटेगा।
6 इसलिथे, हे मनुष्य के सन्तान, अपनी कमर तोड़ कर आहें; और उनकी आंखोंके साम्हने कटुता के साथ आहें।
7 और जब वे तुझ से कहें, कि तू क्यों आहें भरता है? कि तू उत्तर देना, कि समाचार आ रहा है, क्योंकि वह आ रहा है; और सब का मन गल जाएगा, और सब हाथ ढीले हो जाएंगे, और सब आत्मा मूर्छित हो जाएगी, और सब घुटने जल के समान निर्बल हो जाएंगे; देखो, वह आएगा, और पूरा किया जाएगा, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
8 फिर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि,
9 हे मनुष्य के सन्तान, भविष्यद्वाणी करके कह, यहोवा योंकहता है; कहो, तलवार, तलवार की धार तेज और गढ़ी जाती है;
10 वह घोर वध करने के लिये तेज किया जाता है; यह फ़र्श किया गया है कि यह चमक सकता है; तो क्या हमें मज़ाक करना चाहिए? वह मेरे पुत्र की लाठी को सब वृक्षों की नाईं तुच्छ जानता है।
11 और उस ने उसको गढ़ने के लिथे दिया है, कि वह संभाला जाए; यह तलवार धारी हुई है, और गढ़ी गई है, कि उसे घात करनेवाले के हाथ में कर दे।
12 हे मनुष्य के सन्तान, रोना और हाहाकार करना; क्योंकि वह मेरी प्रजा पर होगा, वह इस्राएल के सब हाकिमोंपर होगा; मेरी प्रजा पर तलवार से भय पड़ेगा; इसलिए अपनी जाँघ पर मारो।
13 क्योंकि यह परीक्षा है, और यदि तलवार डंडे को भी ललकारे, तो क्या होगा? वह फिर न रहेगा, यहोवा परमेश्वर की यही वाणी है।
14 इसलिथे, हे मनुष्य के सन्तान, भविष्यद्वाणी करके अपके हाथोंपर ऐसा वार कर, कि तलवार तीसरी बार, अर्थात मारे हुओं की तलवार से दुगनी हो जाए; यह मारे गए महापुरुषों की तलवार है, जो उनकी गुप्त कोठरी में प्रवेश करती है।
15 मैं ने उनके सब फाटकोंके साम्हने तलवार की नोक लगाई है, कि उनका मन उदास हो जाए, और उनके खण्डहर बढ़ जाएं; आह! वह चमकीला बनाया जाता है, वह वध के लिथे लपेटा जाता है।
16 जहां कहीं तेरा मुंह हो, उस मार्ग से, न तो दहिनी ओर, वा बाईं ओर चला जा।
17 और मैं अपके हाथोंको ऐसा मारूंगा, और अपक्की जलजलाहट को शांत करूंगा; मैं यहोवा ने कहा है।
18 यहोवा का यह वचन फिर मेरे पास पहुंचा, कि,
19 और हे मनुष्य के सन्तान, अपके दो मार्ग ठहरा, कि बाबुल के राजा की तलवार आ जाए; दोनों एक ही देश से निकलेंगे; और एक स्थान चुन ले, और नगर के मार्ग के सिरे पर उसे चुन ले।
20 एक मार्ग ठहरा, कि तलवार अम्मोनियोंके रब्बा और यरूशलेम के रब्बा में गढ़वाले यहूदा तक पहुंचे।
21 क्योंकि बाबुल का राजा मार्ग के दोनो मार्ग के सिरे पर भविष्यवाणी करने को खड़ा हुआ था; उसने अपने तीरों को उज्ज्वल बनाया, उसने छवियों के साथ परामर्श किया, उसने कलेजे में देखा।
22 उसके दहिने हाथ यरूशलेम के लिथे भविष्यद्वक्ता ठहरा, कि प्रधान ठहराए, और वध के समय मुंह खोले, और ऊँचे शब्द से पुकारे, और फाटकोंके साम्हने पीटने वाले मेढ़े ठहराए, और पहाड़ गिराए, और किला बनाए।
23 और शपय खानेवालोंके लिथे वह अपक्की दृष्टि में मिथ्या भविष्यद्वक्ता ठहरेगा; परन्तु वह अधर्म को स्मरण करने के लिये बुलाएगा, कि वे ले लिए जाएं।
24 इस कारण परमेश्वर यहोवा यों कहता है; क्योंकि तू ने अपके अधर्म का स्मरण कराया है, जिस से तेरे अपराध प्रगट हो जाते हैं, और सब कामोंमें तेरे पाप प्रगट होते हैं; क्योंकि मैं कहता हूं, कि तुम स्मरण करने के लिए आए हो, हाथ से पकड़ लिए जाओगे।
25 और हे इस्त्राएल के अपवित्र हाकिम, हे अधर्म का अन्त करने का दिन आ गया है,
26 परमेश्वर यहोवा यों कहता है; मुकुट हटाओ, और मुकुट उतारो; यह वही नहीं होगा; जो नीच है, उसे ऊंचा करो, और जो ऊंचा है उसे नीचा करो।
27 मैं उसको उलट दूंगा, और उलट दूंगा; और वह तब तक न रहेगा, जब तक उसका अधिकार न आ जाए; और मैं उसे दूंगा।
28 और हे मनुष्य के सन्तान, भविष्यद्वाणी करके कह, कि अम्मोनियोंके विषय में और उनकी नामधराई के विषय में परमेश्वर यहोवा यों कहता है; तू यह भी कह, कि तलवार, तलवार खींची जाती है; वध करने के लिथे उसका सज्जा किया जाता है, कि वह चमकने के लिथे भस्म हो जाए;
29 जब तक वे तुझ से व्यर्थ बात देखते हैं, और तुझ से झूठ की भविष्यवाणी करते हैं, कि तुझे उन दुष्टोंकी गर्दनों पर ले आएं, जो मारे गए हैं, और उनका दिन आ गया है, जब उनके अधर्म का अन्त हो जाएगा।
30 क्या मैं उसे उसके म्यान में लौटा दूं? मैं तेरा न्याय उस स्थान में करूंगा जहां तू पैदा हुआ था, तेरे जन्म के देश में।
31 और मैं तुझ पर अपना क्रोध भड़काऊंगा; मैं अपके जलजलाहट की आग में तुझ पर फूंकूंगा, और तुझे पशु के हाथ कर दूंगा, और नाश करने में निपुण होऊंगा।
32 तू आग का ईंधन होगा; तेरा खून देश के बीच में रहेगा; तू फिर स्मरण न किया जाएगा; क्योंकि मैं यहोवा ने यह कहा है।
अध्याय 22
यरूशलेम में पापों की एक सूची — सामान्य भ्रष्टाचार।
1 फिर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि
2 अब, हे मनुष्य के सन्तान, क्या तू न्याय करेगा, क्या तू खूनी नगर का न्याय करेगा? वरन उसके सब घिनौने काम उसको भी दिखाना।
3 तब तू कहना, परमेश्वर यहोवा यों कहता है; नगर उसके बीच में लोहू बहाता है, कि उसका समय आ जाए, और अपके आप को अशुद्ध करने के लिथे अपने विरुद्ध मूरतें गढ़ी हैं।
4 जो खून तू ने बहाया है, उस में तू दोषी ठहरेगा; और अपनी बनाई हुई मूरतोंमें अपके आप को अशुद्ध किया है; और अपके दिन निकट आए हैं, और तेरी आयु पूरी हो गई है; इसलिथे मैं ने तुझे अन्यजातियोंके लिथे नामधराई, और सब देशोंके लिथे ठट्ठा किया है।
5 जो निकट हों, और जो तुझ से दूर हों, वे तेरा ठट्ठा करेंगे, जो बदनाम और बहुत चिढ़ते हैं।
6 देख, हे इस्राएल के हाकिमों, सब अपके अपके लहू बहाने के लिथे तेरे पास थे।
7 वे तुझ में माता पिता के द्वारा प्रकाश डाला है; उन्होंने तेरे बीच में परदेशी पर अन्धेर किया है; उन्होंने तुझ में अनाथों और विधवा को चिढ़ाया है।
8 तू ने मेरी पवित्र वस्तुओं को तुच्छ जाना, और मेरे विश्रामदिनोंको अपवित्र ठहराया है।
9 तुझ में ऐसे मनुष्य हैं जो लोहू बहाने की कथा सुनाते हैं; वे तुझ में पहाड़ों पर खाते हैं; वे तेरे बीच में व्यभिचार करते हैं।
10 वे तुझ में अपने पुरखाओं का नंगापन पा गए हैं; उन्होंने तुझ में उसे दीन किया है जो प्रदूषण के लिए अलग किया गया था।
11 और किसी ने अपके पड़ोसी की पत्नी से घिनौना काम किया है; और दूसरे ने अपक्की बहू को कुकर्म करके अशुद्ध किया है; तू ने अपके पिता की बेटी अपक्की बहिन को दीन किया है।
12 उन्होंने तुझ में लोहू बहाने के लिथे भेंट ली हैं; तू ने सूदखोरी और वृद्धि की है, और तू ने लालच के द्वारा अपने पड़ोसियों से प्राप्त किया है, और मुझे भूल गया है, भगवान भगवान की यही वाणी है।
13 देखो, इसलिथे मैं ने अपक्की अपक्की कमाई पर, जो तू ने किया है, और तेरे उस लोहू पर, जो तेरे बीच में हुआ है, अपना हाथ मारा है।
14 जिन दिनों में मैं तुझ से व्यवहार करूंगा, क्या तेरा मन स्थिर रह सकेगा, वा तेरे हाथ बलवन्त हो सकेंगे? मैं यहोवा ने यह कहा है, और करूंगा।
15 और मैं तुझे अन्यजातियोंमें तित्तर बित्तर करूंगा, और देश देश में तितर-बितर करूंगा, और तेरी मलिनता तुझ में से दूर करूंगा।
16 और अन्यजातियों के साम्हने अपके निज भाग को अपके हाथ में लेना, तब तू जान लेगा कि मैं यहोवा हूं।
17 और यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि,
18 हे मनुष्य के सन्तान, इस्राएल का घराना मेरी दृष्टि में मूढ़ हो गया है; वे सब भट्ठी के बीच में पीतल, और टिन, और लोहा, और सीसा हैं; वे तो चाँदी के समुंदर के समान हैं।
19 इसलिथे परमेश्वर यहोवा योंकहता है; क्योंकि तुम सब के सब मूढ़ हो गए हो, देखो, इसलिथे मैं तुम्हें यरूशलेम के बीच में इकट्ठा करूंगा।
20 जैसे वे चान्दी, और पीतल, और लोहा, और सीसा, और टिन को भट्ठी के बीच में बटोरते हैं, कि उस पर आग फूंक दें, और उसे पिघला दें; इसी प्रकार मैं अपके कोप और अपक्की जलजलाहट में तुझे इकट्ठा करूंगा, और तुझे वहीं छोड़ दूंगा, और तुझे पिघला दूंगा।
21 हां, मैं तुम को इकट्ठा करूंगा, और अपक्की जलजलाहट की आग में तुम पर फूंकूंगा, और तुम उसके बीच में पिघल जाओगे।
22 जैसे चान्दी भट्टी के बीच में गल जाती है, वैसे ही तुम उसके बीच में भी पिघल जाओगे; और तुम जान लोगे कि मैं यहोवा ने तुम पर अपनी जलजलाहट उंडेल दी है।
23 और यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि,
24 हे मनुष्य के सन्तान, उस से कह, कि तू वह देश है जो शुद्ध न हो, और जलजलाहट के दिन में मेंह न बरसाए।
25 उसके बीच में उसके भविष्यद्वक्ताओं का षडय़ंत्र रचा गया है, जैसे गरजता हुआ सिंह अहेर को फाड़ देता है; उन्होंने आत्माओं को खा लिया है; उन्होंने खजाना और कीमती चीजें ले ली हैं; उन्होंने उसके बीच में बहुत सी विधवाएं की हैं।
26 उसके याजकों ने मेरी व्यवस्या का उल्लंघन किया है, और मेरी पवित्र वस्तुओं को अपवित्र किया है; उन्होंने पवित्र और अपवित्र में कुछ भेद नहीं किया, और न अशुद्ध और शुद्ध में भेद किया, और मेरे विश्रामदिनोंसे अपनी आंखें फेरते रहे, और मैं उनके बीच अपवित्र हूं।
27 उसके बीच में उसके हाकिम उन भेड़ियों के समान हैं जो अहेर फाड़ने, और लोहू बहाने, और प्राणों को नाश करने, और बेईमानी का लाभ पाने के लिथे लहूलुहान करते हैं।
28 और उसके भविष्यद्वक्ताओं ने उन पर व्यर्थता, और दैवीय झूठ देखकर उन पर तड़का लगाया है, कि जब यहोवा ने कुछ नहीं कहा, तब परमेश्वर यहोवा यों कहता है।
29 देश के लोगों ने अन्धेर किया, और लूट की, और कंगालों और दरिद्रोंको तंग किया है; हाँ, उन्होंने उस परदेशी पर गलत ज़ुल्म ढाया है।
30 और मैं ने उन में से ऐसा पुरूष ढूंढ़ा, जो बाड़ा बना दे, और देश के निमित्त मेरे साम्हने खाई में खड़ा हो, कि मैं उसको नाश न करूं; लेकिन मुझे कोई नहीं मिला।
31 इस कारण मैं ने उन पर अपना जलजलाया है; मैं ने उन्हें अपके जलजलाहट की आग से भस्म कर दिया है; मैं ने उनके सिरों पर उनका बदला लिया है, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
अध्याय 23
अहोला और अहोलीबा — भविष्यद्वक्ता उनके व्यभिचारों को ताड़ना देता है।
1 यहोवा का यह वचन फिर मेरे पास पहुंचा, कि,
2 हे मनुष्य के सन्तान, ये दो स्त्रियां हैं, जो एक ही माता की बेटियां हैं;
3 और उन्होंने मिस्र में व्यभिचार किया; उन्होंने अपनी युवावस्था में व्यभिचार किया; और उनके स्तनों को दबाया गया, और वहां उन्होंने अपके कौमार्य के टीथोंको कुचल डाला।
4 और उन में से ज्येष्ठ अहोला, और उसकी बहिन अहोलीबा थे; और वे मेरे थे, और उनके और भी बेटे बेटियां उत्पन्न हुई। इस प्रकार उनके नाम थे; शोमरोन अहोला है, और यरूशलेम अहोलीबा है।
5 और जब अहोला मेरी थी, तब वह वेश्या का काम करती या; और उस ने अपके अपके अपके अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की प्रीति के लिथे अपक्की प्रीति रहे।
6 जो नीले वस्त्र पहिने हुए थे, और सरदार और हाकिम, वे सब के सब मनभावने जवान, और घोड़ोंपर सवार सवार थे।
7 इस प्रकार उसने उन सब से जो अश्शूर के चुने हुए पुरूष थे, वरन उन सभोंसे भी व्यभिचार किया जिन से वह करती थी; और उनकी सब मूरतोंसे उस ने अपके आप को अशुद्ध किया।
8 वह मिस्र से लाई गई अपक्की व्यभिचार को न छोड़ी; क्योंकि वे उसकी जवानी में उसके साथ कुकर्म करते थे, और उसके कुँवारेपन के स्तनों को कुचलते थे, और अपना व्यभिचार उस पर उँडेलते थे।
9 इसलिथे मैं ने उसको उसके यारोंके वश में, अर्यात् अश्शूरियोंके वश में कर दिया है, जिन पर उस ने प्रीति रखी है।
10 उन्हों ने उसका नंगापन देखा; उन्होंने उसके पुत्रों और पुत्रियों को ले लिया, और उसे तलवार से मार डाला; और वह स्त्रियों में प्रसिद्ध हो गई; क्योंकि उन्होंने उस पर न्याय किया था।
11 और जब उसकी बहिन अहोलीबा ने यह देखा, तो वह अपक्की प्रीति में उस से अधिक भ्रष्ट हो गई, और अपक्की बहिन से अधिक व्यभिचारिणी हो गई।
12 उस ने अश्शूरियों पर अपके पड़ोसी, और हाकिमोंऔर हाकिमोंको अति सुन्दर वस्त्र पहिने हुए, और घोड़ोंपर सवार सवार, और सब के सब मनभावने जवान पुरूषोंके साथ प्रेम किया।
13 तब मैं ने देखा, कि वह अशुद्ध हो गई है, कि वे दोनों एक ही मार्ग पर चल पड़े हैं,
14 और उस ने अपना व्यभिचार बढ़ाया; क्योंकि जब उसने दीवारों पर आदमियों को चित्रित देखा, तो कसदियों की छवियों को सिंदूर से चित्रित किया गया,
15 अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके प म रंग पहिने हुए अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके जन्म के देश कसद के बाबुलियोंकी सी चाल चलने के लिथे हाकिम हैं;
16 और जब उस ने उन्हें अपक्की आंखोंसे देखा, तब उस ने उन पर ध्यान दिया, और उनके पास कसदियोंको दूत भेजे।
17 और बाबुल के लोग उसके पास प्रेम की बिछौने पर आए, और अपक्की व्यभिचार से उसको अशुद्ध किया, और वह उनके साथ अशुद्ध हो गई, और उनके कारण उसका मन मुझ से दूर हो गया।
18 तब उस ने अपक्की व्यभिचार को पहिचान लिया, और अपना नंगापन पा लिया; तब मेरा मन उससे अलग हो गया था, जैसे मेरा मन उसकी बहन से अलग हो गया था।
19 तौभी उस ने अपक्की यौवन के दिनोंको स्मरण करने के लिथे अपके व्यभिचार को बहुत बढ़ा दिया, जिन में उस ने मिस्र देश में वेश्या का काम किया था।
20 क्योंकि उस ने उन पर उन पर तरस खाया, जिनका मांस गदहोंके साम्हने, और घोड़ोंके साय की सी बात है।
21 इस प्रकार तू ने अपक्की जवानी की धूर्तता को स्मरण करने के लिथे पुकारा, जब अपक्की जवानी के कारण मिस्रियोंके द्वारा तेरे चूचोंको कुचल डाला।
22 इसलिथे हे अहोलीबा, परमेश्वर यहोवा योंकहता है; देख, मैं तेरे उन प्रेमियों को तेरे विरुद्ध खड़ा करूंगा, जिनके द्वारा तेरा मन मुझ से दूर हो गया है, और मैं उन्हें चारों ओर से तेरे विरुद्ध ले आऊंगा;
23 बाबुली, और सब कसदी, पकोद, शोआ, कोआ, और उनके संग सब अश्शूर; वे सब के सब मनोवांछित जवान, और सरदार, और हाकिम, बड़े-बड़े स्वामी और प्रसिद्ध थे, वे सब के सब घोड़ों पर सवार थे।
24 और वे रय, गाडिय़ों, और पहियों, और लोगों की एक मण्डली के साथ तेरे साम्हने आएं, जो तेरे साम्हने बान्धे, और ढाल, और टोप चारोंओर बान्धें; और मैं उनके साम्हने न्याय करूंगा, और वे अपके अपके न्याय के अनुसार तेरा न्याय करेंगे।
25 और मैं तुझ से जलजलाहट करूंगा, और वे तुझ से क्रोध करेंगे; वे तेरी नाक और तेरे कान छीन लेंगे; और तेरे बचे हुए लोग तलवार से मारे जाएंगे; वे तेरे बेटे-बेटियों को ले लेंगे; और तेरा अवशेष आग से भस्म हो जाएगा।
26 वे तेरा वस्त्र भी उतारेंगे, और तेरे सुन्दर गहने छीन लेंगे।
27 इस प्रकार मैं तेरे व्यभिचार को, और तेरे व्यभिचार को मिस्र देश से दूर कर दूंगा; कि तू उनकी ओर आंखें न लगाना, और न मिस्र को फिर स्मरण करना।
28 क्योंकि परमेश्वर यहोवा यों कहता है; देख, जिन से तू बैर रखता है, उन के हाथ मैं तुझे उनके हाथ कर दूंगा, जिन से तेरा मन भटका हुआ है;
29 और वे तुझ से घृणा करेंगे, और तेरा सब परिश्रम छीन लेंगे, और तुझे नंगा और नंगा छोड़ देंगे; और तेरा व्यभिचार, और तेरा व्यभिचार, और तेरा व्यभिचार, दोनोंका नंगापन प्रगट होगा।
30 मैं तुझ से ये काम करूंगा, क्योंकि तू अन्यजातियों के पीछे व्यभिचारी हो गया है, और तू उनकी मूरतोंसे अशुद्ध हो गया है।
31 तू अपक्की बहिन की सी चाल चली है; इसलिथे मैं उसका कटोरा तेरे हाथ में कर दूंगा।
32 परमेश्वर यहोवा यों कहता है; तू अपक्की बहिन के प्याले में से गहरा और बड़ा पीना; तू ठट्ठों में ठट्ठों में उड़ाया जाएगा, और ठट्ठों में उड़ाया जाएगा; इसमें बहुत कुछ निहित है।
33 तू अपनी बहिन शोमरोन के प्याले से मतवाले और शोक से, और विस्मय और उजाड़ के कटोरे से तृप्त हो जाएगा।
34 तू उसको पीना, और चूसना, और उसके टुकड़े तोड़कर अपके अपने स्तनों को तोड़ देना; क्योंकि मैं ने यह कहा है, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
35 इसलिथे परमेश्वर यहोवा योंकहता है; इसलिथे कि तू ने मुझे भूलकर अपक्की पीठ के पीछे डाल दिया है, इसलिथे तू अपके व्यभिचार और व्यभिचार को भी सह ले।
36 यहोवा ने मुझ से और भी कहा; हे मनुष्य के सन्तान, क्या तू अहोला और अहोलीबा का न्याय करेगा? हां, उन्हें उनके घिनौने कामों की घोषणा करो;
37 कि उन्होंने व्यभिचार किया है, और उनके हाथ में लोहू है, और उन्होंने अपक्की मूरतोंसे व्यभिचार किया है, और अपके पुत्रोंको, जिन्हें उन्होंने मुझ से उत्पन्न किया है, उनके लिथे आग में से होकर भस्म कर डाला है।
38 और उन्होंने मुझ से ऐसा ही किया है; उन्होंने उसी दिन मेरे पवित्रस्थान को अशुद्ध किया, और मेरे विश्रामदिनोंको अपवित्र किया है।
39 क्योंकि जब उन्होंने अपके बालकोंको अपक्की मूरतोंके लिथे घात किया, तब उसी दिन वे मेरे पवित्रस्यान को अपवित्र करने को आए; और देखो, उन्होंने मेरे घर के बीच में ऐसा ही किया है।
40 और इसके अलावा, कि तुम लोगों ने दूर से आने के लिए पुरुषों को भेजा है, जिनके पास एक दूत भेजा गया था; और, लो, वे आ गए; जिसके लिये तू ने अपने आप को धोया, और अपनी आंखों को रंगा, और अपने आप को आभूषणों से सजाया।
41 और एक आलीशान बिछौने पर बैठो, और उसके साम्हने एक मेज तैयार की गई, जिस पर तू ने मेरी धूप और मेरा तेल रखा।
42 और उसके पास एक भीड़ का शान्त होने का शब्द था; और एक ही जाति के मनुष्य सबियोंके संग जंगल से लाए गए, जो अपके हाथोंमें कंगन और सिरोंपर सुन्दर मुकुट पहिने हुए थे।
43 तब मैं ने उस से जो व्यभिचार में बूढ़ी हो गई थी, कहा, क्या वे अब उसके साथ व्यभिचार करेंगे, और वह उनके साथ?
44 तौभी जब वे व्यभिचारिणी स्त्री के पास जाते थे, तब वे उसके पास गए; सो वे अहोला और अहोलीबा नाम व्यभिचारी स्त्रियां के पास गए।
45 और धर्मी पुरूष उनका न्याय व्यभिचारिणियोंके अनुसार, और उन स्त्रियोंके अनुसार करें, जो लोहू बहाती हैं; क्योंकि वे व्यभिचारिणी हैं, और उनके हाथ में लोहू है।
46 क्योंकि परमेश्वर यहोवा यों कहता है; मैं उन पर एक दल खड़ा करूंगा, और उन्हें हटा और बिगाड़ने के लिए दूंगा।
47 और मण्डली उन पर पत्यरवाह करे, और अपके अपके अपके तलवारोंसे विदा करे; वे अपके बेटे-बेटियोंको घात करें, और उनके घरोंको आग से फूंक दें।
48 इस प्रकार मैं इस देश में से व्यभिचार को मिटा दूंगा, कि सब स्त्रियोंको यह शिक्षा दी जाए, कि तुम्हारे व्यभिचार के पीछे कुछ न करना।
49 और वे तेरी धूर्तता का बदला तुझ से लेंगे, और तू अपक्की मूरतोंके पापों का भार वहन करेगा; और तुम जान लोगे कि मैं यहोवा परमेश्वर हूं।
अध्याय 24
उबलते हुए बर्तन का दृष्टान्त — यहेजकेल का चिन्ह।
1 फिर नौवें वर्ष के दसवें महीने के दसवें दिन को यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा,
2 हे मनुष्य के सन्तान, उस दिन का नाम लिख, जो उस दिन का है; बाबुल के राजा ने उसी दिन यरूशलेम पर चढ़ाई की।
3 और बलवा करनेवाले घराने से दृष्टान्त कहो, कि परमेश्वर यहोवा योंकहता है; और हौले पर रख, और उस में जल भी डाल;
4 उसके टुकड़े, अर्यात् सब अच्छे अच्छे टुकड़े, जांघ और कंधा समेत इकट्ठा करो; इसे पसंद की हड्डियों से भरें।
5 भेड़-बकरी की चुनी हुयी हडि्डयां ले कर उसके नीचे की हडि्डयां भी जलाकर अच्छी तरह उबाल लें, और वे उस में उसकी हड्डियां देखें।
6 इस कारण परमेश्वर यहोवा यों कहता है; धिक्कार है उस खूनी नगर पर, उस घड़े पर जिसका मैल उस में है, और जिसका मैल उस में से न निकला हो! इसे टुकड़े-टुकड़े करके बाहर निकालो; उस पर बहुत कुछ न पड़ने दें।
7 क्योंकि उसका लोहू उसके बीच में है; उसने उसे चट्टान की चोटी पर स्थापित किया; उस ने उसे भूमि पर न उंडेल दिया, कि उसे धूल से ढांप दिया;
8 कि प्रतिशोध लेने के लिये जलजलाहट भड़के; मैं ने उसका लोहू चट्टान की चोटी पर रखा है, कि वह ढका न जाए।
9 इसलिथे परमेश्वर यहोवा योंकहता है; खूनी शहर को धिक्कार है! मैं आग के ढेर को भी बड़ा कर दूंगा।
10 लकड़ी के ढेर लगाओ, आग सुलगाओ, मांस भस्म करो, और उसे अच्छी तरह से मसाला दो, और हड्डियों को जलने दो।
11 फिर उसे अंगारों पर खाली रखना, जिस से उसका पीतल गर्म होकर जल जाए, और उसका मैल उसी में पिघल जाए, जिस से उसका मैल भस्म हो जाए।
12 वह झूठ से थक गई, और उसका बड़ा मैल उस में से न निकला; उसका मैल आग में होगा।
13 तेरी मलिनता में मूढ़ता है; क्योंकि मैं ने तुझे शुद्ध किया है, और तू शुद्ध न हुआ, तब तक जब तक मैं ने अपक्की जलजलाहट को तुझ पर शांत न कर लूं, तब तक तू अपनी मलिनता से फिर न दूर रहने पाएगा।
14 मैं यहोवा ने यह कहा है; वह हो जाएगा, और मैं वह करूंगा; न लौटूंगा, न बख्शूंगा, न पछताऊंगा; वे तेरी चालचलन और कामोंके अनुसार तेरा न्याय करेंगे, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
15 और यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि,
16 हे मनुष्य के सन्तान, देख, मैं तेरी आंखोंकी लालसा को झटके से तुझ से दूर करता हूं; तौभी तू विलाप न करना, न रोना, और न तेरे आंसू बहेंगे।
17 रोना न छोड़, मरे हुओं के लिथे विलाप न करना, सिर का पहिरावा अपके ऊपर बान्धना, और अपके पांव पहिनाना, और अपके होठोंको न ढांपना, और न मनुष्योंकी रोटी खाना।
18 भोर को मैं ने लोगों से बातें कीं; और मेरी पत्नी भी मर गई; और भोर को जैसा मुझे आज्ञा दी गई थी वैसा ही मैं ने भी किया।
19 और लोगों ने मुझ से कहा, क्या तू हमें नहीं बताता कि ये बातें हम से क्या हैं, कि तू ऐसा करता है?
20 तब मैं ने उनको उत्तर दिया, यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा,
21 इस्राएल के घराने से कह, परमेश्वर यहोवा यों कहता है; देख, मैं अपके पवित्रस्थान को, जो तेरे बल का प्रताप है, और तेरी आंखोंकी लालसा, और जिस पर तेरा मन तरसता है, उसको अपवित्र करूंगा; और तुम्हारे बेटे-बेटियां जिन्हें तुम छोड़ गए हो, तलवार से मारे जाएंगे।
22 और जैसा मैं ने किया है वैसा ही करना; अपने होठों को न ढांपना, और न मनुष्यों की रोटी खाना।
23 और तेरे पहिए तेरे सिरों पर, और तेरी जूती तेरे पांवोंपर रहे; तुम शोक न करना और न रोना, परन्तु अपके अधर्म के कामोंके कारण शोक करना, और एक दूसरे के लिथे विलाप करना।
24 इस प्रकार यहेजकेल तुम्हारे लिए एक चिन्ह है; जो कुछ उस ने किया है उसके अनुसार तुम करना; और जब यह आएगा, तब तुम जान लोगे कि मैं यहोवा परमेश्वर हूं।
25 और, हे मनुष्य के सन्तान, जिस दिन मैं उन से उनका बल, और उनके तेज का आनन्द, और उनकी आंखोंकी अभिलाषा, और जिस में वे मन लगाकर अपने पुत्रोंऔर पुत्रियोंको उन से दूर कर लें, ऐसा न हो।
26 कि जो उस दिन बच जाए, वह तेरे पास आए, कि तुझे कानों से सुनाए?
27 उस समय तेरा मुंह उसके बचनेवाले के लिथे खोला जाएगा, और तू बातें करना, और फिर गूंगा न रहना; और तू उनके लिये एक चिन्ह ठहरेगा; और वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं।
अध्याय 25
अम्मोनियों, मोआब और सेईर, एदोम और पलिश्तियों से परमेश्वर का पलटा लेना।
1 यहोवा का यह वचन फिर मेरे पास पहुंचा, कि,
2 हे मनुष्य के सन्तान, अपना मुंह अम्मोनियोंके साम्हने कर, और उनके विरुद्ध भविष्यद्वाणी कर;
3 और अम्मोनियों से कहो, कि परमेश्वर यहोवा का वचन सुनो; इस प्रकार भगवान भगवान कहते हैं; क्योंकि तू ने कहा, अहा, मेरे पवित्रस्थान के विरोध में, जब वह अपवित्र किया गया था; और इस्राएल के देश के विरुद्ध, जब वह उजाड़ था; और यहूदा के घराने के विरुद्ध, जब वे बन्धुआई में गए;
4 सुन, मैं तुझे पूर्व के मनुष्योंके वश में कर दूंगा, और वे अपके अपके भवन तुझ में बसाएंगे, और अपके निवास तुझ में बसाएंगे; वे तेरा फल खाएंगे, और वे तेरा दूध पीएंगे।
5 और मैं रब्बा को ऊंटोंके लिथे, और अम्मोनियोंको भेड़-बकरियोंके रहने का स्थान बनाऊंगा; और तुम जान लोगे कि मैं यहोवा हूं।
6 क्योंकि परमेश्वर यहोवा यों कहता है; क्योंकि तू ने ताली बजाई, और पांवों पर मुहर लगाई, और इस्राएल देश के विरुद्ध अपके सब के साथ मन में आनन्द किया;
7 सुन, मैं तुझ पर हाथ बढ़ाकर अन्यजातियोंके लिथे तुझे लूट के लिथे छुड़ाऊंगा; और मैं तुझे प्रजा में से नाश करूंगा, और देश देश में से तुझे नाश करूंगा; मैं तुझे नष्ट कर दूंगा; और तुम जान लोगे कि मैं यहोवा हूं।
8 परमेश्वर यहोवा यों कहता है; क्योंकि मोआब और सेईर यह कहते हैं, कि देख, यहूदा का घराना सब अन्यजातियोंके समान है;
9 इसलिथे सुन, मैं मोआब की ओर के नगरोंमें से, अर्यात् उसके सिवानोंपर जो नगर हैं, अर्यात् देश का वैभव बेत-यशीमोत, बालमोन, और किर्यातैम,
10 और पूर्व के लोगों को अम्मोनियों के साथ, और उनके अधिकार में कर देंगे, कि अम्मोनियों को अन्यजातियों के बीच याद नहीं किया जाएगा।
11 और मैं मोआबियोंको दण्ड दूंगा; और वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं।
12 परमेश्वर यहोवा यों कहता है; क्योंकि उस एदोम ने यहूदा के घराने से पलटा लिया है, और उसका बड़ा अपमान किया है, और उन से बदला लिया है;
13 इस कारण परमेश्वर यहोवा यों कहता है; और मैं अपना हाथ एदोम पर बढ़ाऊंगा, और उस में से मनुष्य और पशु दोनों को नाश करूंगा; और मैं उसे तेमान से उजाड़ दूंगा; और ददान के लोग तलवार से मारे जाएंगे।
14 और मैं अपक्की प्रजा इस्राएल के द्वारा एदोम से बदला लूंगा; और वे एदोम में मेरे कोप और मेरी जलजलाहट के अनुसार करेंगे; और वे मेरे प्रतिशोध को जान लेंगे, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
15 परमेश्वर यहोवा यों कहता है; क्योंकि पलिश्तियों ने बदला लिया है, और पुराने बैर के कारण उसको नाश करने के लिथे उदास मन से पलटा लिया है;
16 इसलिथे परमेश्वर यहोवा योंकहता है; देख, मैं पलिश्तियों पर अपना हाथ बढ़ाऊंगा, और करेतीमों को नाश करूंगा, और समुद्रतट के बचे हुओं को नाश करूंगा।
17 और मैं उन से बड़ा पलटा करूंगा; और जब मैं उन से पलटा लूंगा तब वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं।
अध्याय 26
टायरस ने धमकी दी - उसका पतन।
1 और ऐसा हुआ कि ग्यारहवें वर्ष के महीने के पहिले दिन को यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा,
2 हे मनुष्य के सन्तान, जो सोरूस ने यरूशलेम के विषय में कहा है, कि अहा, वह टूट गई, जो प्रजा के फाटक थे; वह मेरी ओर फिरी है; मैं तृप्त हो जाऊंगा, अब वह उजड़ गई है;
3 इसलिथे परमेश्वर यहोवा योंकहता है; देख, हे सोर, मैं तेरे विरुद्ध हूं, और जैसे समुद्र की लहरें उठती हैं, वैसे ही मैं बहुत सी जातियोंको तुझ पर चढ़ाई कराऊंगा।
4 और वे सोर की शहरपनाह को ढा दें, और उसके गुम्मटोंको ढा दें; मैं भी उस पर से उसकी धूल झाड़ूंगा, और उसे चट्टान की चोटी के समान बनाऊंगा।
5 वह समुद्र के बीच में जाल फैलाने का स्थान हो; क्योंकि मैं ने यह कहा है, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है; और वह अन्यजातियोंके लिथे लूट ठहरेगा।
6 और उसकी बेटियां जो मैदान में हों वे तलवार से मारे जाएं; और वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं।
7 क्योंकि परमेश्वर यहोवा यों कहता है; देख, मैं उत्तर दिशा से बाबुल के राजा सोरूस नबूकदनेस्सर को, जो राजाओं का राजा या, घोड़ों, और रथों, और सवारों, और दलों, और बहुत से लोगों के साथ ले आऊंगा।
8 वह तेरी बेटियोंको मैदान में तलवार से घात करेगा; और वह तेरे साम्हने एक गढ़ बनाए, और तेरे साम्हने एक पहाड़ खड़ा करे, और तेरे साम्हने बन्धन को उठाए।
9 और वह तेरी शहरपनाह के साम्हने युद्ध के जत्थे लगाए, और अपक्की कुल्हाड़ियोंसे तेरे गुम्मटोंको ढा दे।
10 उसके घोड़ों की बहुतायत के कारण उनकी धूल तुझ पर छा जाएगी; जब वह तेरे फाटकों में प्रवेश करेगा, तब तेरी शहरपनाह घुडसवारों, और पहियों, और रथों के शब्द से कांप उठेगी, जैसे लोग उस नगर में प्रवेश करते हैं, जिसमें दरार पड़ जाती है।
11 वह अपके घोड़ोंके खुरोंसे तेरे सब चौकोंको रौंदेगा; वह तेरी प्रजा को तलवार से घात करेगा, और तेरे गढ़वाले गढ़ भूमि पर गिर जाएंगे।
12 और वे तेरे धन को लूटेंगे, और तेरे व्यापार को लूटेंगे; और वे तेरी शहरपनाह को तोड़ डालेंगे, और तेरे मनोहर घरोंको नाश करेंगे; और वे तेरे पत्यर, तेरी लकड़ी, और तेरी धूल जल के बीच में रखेंगे;
13 और मैं तेरे गीतोंका कोलाहल बन्द कर दूंगा; और तेरी वीणाओं का शब्द फिर सुनाई न देगा।
14 और मैं तुझे चट्टान की चोटी के समान बनाऊंगा; तू जाल फैलाने का स्थान ठहरेगा; तू फिर न बनाया जाएगा; क्योंकि मैं यहोवा ने यह कहा है, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
15 परमेश्वर यहोवा सोरुस से यों कहता है; जब तेरे बीच में घात किया जाएगा, तब जब घायल दोहाई देंगे, तब तेरे गिरने के शब्द से टापू न कांपेंगे?
16 तब समुद्र के सब हाकिम अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके वस्त्र पहिने, और अपके वस्त्र पहिनकर अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके वस्त्र पहिना; वे कांपते हुए वस्त्र पहिने होंगे; वे भूमि पर बैठेंगे, और हर पल कांपेंगे, और तुझ से चकित होंगे।
17 और वे तेरे लिथे विलाप करेंगे, और तुझ से कहेंगे, कि तू ने किस रीति से नाश किया है, जो समुद्र में रहनेवाले प्रसिद्ध नगर को, जो समुद्र में प्रबल था, और उसके निवासियोंको, जो उनका भय भड़काते हैं, नाश किया है? उस सब पर जो इसे सताता है!
18 तेरे गिरने के दिन टापू कांप उठेंगे; वरन जो द्वीप समुद्र में हैं, वे तेरे जाने से व्याकुल होंगे।
19 क्योंकि परमेश्वर यहोवा यों कहता है; जब मैं तुझे उन नगरोंके समान उजाड़ कर दूंगा, जो बसे हुए नहीं हैं; जब मैं गहिरे जल को तुझ पर चढ़ाऊंगा, और बड़ा जल तुझे ढांप देगा;
20 जब मैं तुझे गढ़े में उतरनेवालोंके संग, अर्यात् प्राचीनकाल के लोगोंके संग ले आऊंगा, और पृय्वी की नीची भूमियों में, अर्यात् गढ़े हुए उजड़नेवालोंके संग तुझे खड़ा करूंगा, कि तू आबाद न हो; और मैं जीवतोंके देश में महिमा करूंगा;
21 मैं तुझे आतंकित करूंगा, और तू फिर न रहेगा; चाहे तू ढूंढ़ा जाए, तौभी फिर कभी न मिलेगा, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
अध्याय 27
टायरस का धन - उसका पतन।
1 यहोवा का यह वचन फिर मेरे पास पहुंचा, कि,
2 अब, हे मनुष्य के सन्तान, सोर के लिथे विलाप करने का नाम ले;
3 सो तूरूस से कह, हे समुद्र के उस द्वार पर स्थित तू जो बहुत द्वीपोंका प्रजा का व्यापारी है, परमेश्वर यहोवा योंकहता है; हे सोरस, तू ने कहा है, कि मैं उत्तम सौंदर्य का हूं।
4तेरे सिवाने समुद्र के बीच में हैं, तेरे बनानेवालोंने तेरी शोभा बढ़ाई है।
5 उन्होंने तेरे सब जहाजों के तख़्तों को सनिर के सन के वृक्षों से बनाया है; उन्होंने तेरे लिये मस्तूल बनाने के लिथे लबानोन से देवदार लिये हैं।
6 बाशान के बांजवृझों में से उन्होंने तेरे तख्त बनाए हैं; अशूरियों की मण्डली ने तेरी बैंचों को हाथीदांत की बनाईं हैं, जो चित्तियों के द्वीपों से निकाली गई हैं।
7 मिस्र की ओर से कढ़ाई के काम का मलमल वह था, जिसे तू ने अपके पाल होने के लिथे फैलाया; एलीशा के द्वीपों से नीला और बैंजनी वह था जो तुझे ढांपता था।
8 तेरे नाविक सीदोन और अर्वाद के निवासी थे; हे सोर, तेरे बुद्धिमान पुरुष, जो तुझ में थे, तेरे पायलट थे।
9 गबाल के पुरनिये और उसके पण्डित तेरे दुम में थे; समुद्र के सब जहाज अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके व्यापार के लिथे तेरे लिथे तेरे लिथे थे।
10 वे फारस, लूद और फूत के लोग तेरी सेना में थे, जो तेरे योद्धा थे; उन्होंने तेरी ढ़ाल और टोप टांग दिया; वे तेरी शोभा बढ़ाते हैं।
11 अर्वाद के लोग तेरी सेना समेत तेरी शहरपनाह के चारोंओर पर थे, और गम्मदीम तेरे गुम्मटोंमें थे; उन्होंने अपनी ढालें तेरी शहरपनाह के चारोंओर पर टांगी हैं; उन्होंने तेरी सुन्दरता को सिद्ध किया है।
12 सब प्रकार की दौलत के कारण तेरा व्यापारी तर्शीश था; वे चाँदी, लोहा, टिन और सीसे से तेरे मेलों में व्यापार करते थे।
13 यावान, तूबल और मेशेक, ये तेरे व्योपारी थे; उन्होंने तेरे बाजार में आदमियों और पीतल के पात्रों का व्यापार किया।
14 तोगर्मा के घराने के लोग तेरे मेलोंमें घोड़ों, सवारों, और खच्चरोंके संग व्यापार करते थे।
15 ददान के पुरूष तेरे व्योपारी थे; तेरे हाथ का माल बहुत से टापू थे; वे तुझे भेंट के लिथे हाथीदांत और आबनूस के सींग ले आए।
16 तेरी बनाई हुई बहुत सी वस्तुओं के कारण अराम तेरा व्यापारी या; वे तेरे मेलों में पन्ने, बैंजनी, और लच्छेदार वस्त्र, और उत्तम मलमल, और मूंगा, और सुपारी लिए हुए थे।
17 यहूदा और इस्राएल के देश, वे तेरे व्योपारी थे; उन्होंने तेरे बाजार में मिन्नीत का गेहूँ, और पन्नाग, और मधु, और तेल, और बाम का व्यापार किया।
18 दमिश्क तेरा व्यापारी था, जो तेरे बनाए हुए माल की भीड़ में, और सब धन की भीड़ के कारण था; हेलबोन की शराब में, और सफेद ऊन में।
19 दान और यावान अपके मेलोंमें इधर-उधर जाते थे; तेरे बाजार में चमकीला लोहा, तेजपत्ता और कैलमस थे।
20 ददान रथोंके लिये बहुमूल्य वस्त्र पहिने हुए तेरा व्यापारी या।
21 अरब और केदार के सब हाकिमों ने तेरे संग भेड़-बकरी, और मेढ़े, और बकरे अपके अपके पास किए; इन्हीं में वे तेरे व्योपारी थे।
22 शेबा और रामा के जो व्यापारी थे, वे ही तेरे व्योपारी थे; उन्होंने तेरे मेलों में सब प्रकार के सुगन्धित पदार्थ, और सब प्रकार के मणि, और सोना लेकर अधिकार किया।
23 हारान, कन्ने, अदन, शेबा के व्यापारी, अश्शूर, और चिलमद ये तेरे व्योपारी थे।
24 ये सब प्रकार के व्यापारी थे, जो नीले वस्त्रों, और कढ़ाई के कामों में, और रस्सियों से बँधे हुए, और देवदार के बने हुए, और तेरे व्यापार के बीच में उत्तम वस्त्रों के संदूक में थे।
25 तेरे बाजार में तर्शीश के जहाज तेरे गीत गाते थे; और तू भर गया, और समुद्र के बीच में बहुत महिमामय किया गया।
26 तेरे नाविक तुझे बड़े जल में ले आए हैं; पुरवाई ने तुझे समुद्र के बीच में तोड़ डाला है।
27 तेरा धन, और तेरा मेल, तेरा माल, तेरे नाविक, और तेरे पायलट, तेरे दुम, और तेरे व्यापारी, और तेरे सब योद्धा जो तुझ में हैं, और तेरी सारी मण्डली में जो बीच में है तेरा विनाश के दिन समुद्र के बीच में गिर जाएगा।
28 तेरे पायलटों के रोने की आवाज से चरागाह कांप उठेंगे।
29 और जो चप्पू, नाविक, और समुद्र के सब पायलट अपके अपके जहाज पर से उतर जाएं, वे देश पर खड़े हों;
30 और उनका शब्द तेरे विरुद्ध सुनाया जाएगा, और वे फूट-फूट कर रोएंगे, और अपने सिरों पर धूलि डालेंगे, और वे राख में डूब जाएंगे;
31 और वे तेरे लिथे पूरी रीति से गंजा हो जाएं, और टाट पहिने हुए हों, और वे तेरे लिथे कटु मन और कटु विलाप से रोएं।
32 और वे विलाप करते हुए तेरे लिथे विलाप करेंगे, और यह कहकर तेरे लिथे विलाप करेंगे, कि कौन सा नगर सोरूस के समान है, जो समुद्र के बीच में नाश किए गए के समान है?
33 जब तेरा माल समुद्र में से निकला, तब तू ने बहुत से लोगोंको भर दिया; तू ने पृथ्वी के राजाओं को अपके धन और व्यापार की बहुतायत से समृद्ध किया है।
34 जब तू गहिरे जल में समुद्र के द्वारा नाश किया जाएगा, तब तेरा माल और तेरा सारा दल जो तेरे बीच में है गिर जाएगा।
35 टापू के सब रहनेवाले तुझ से चकित होंगे, और उनके राजा बहुत डरेंगे, वे अपके मुख से व्याकुल होंगे।
36 प्रजा के बीच के व्योपारी तुझ से फुफकारेंगे; तू भय का कारण होगा, और फिर कभी न होगा।
अध्याय 28
सोर के राजकुमार पर परमेश्वर का न्याय — सीदोन का न्याय — इस्राएल की पुनर्स्थापना।
1 यहोवा का यह वचन फिर मेरे पास पहुंचा, कि,
2 हे मनुष्य के सन्तान, सोर के हाकिम से कह, कि परमेश्वर यहोवा योंकहता है; क्योंकि तेरा मन ऊंचा हो गया है, और तू ने कहा है, मैं एक देवता हूं, मैं समुद्र के बीच में भगवान की सीट पर बैठता हूं; तौभी तू परमेश्वर नहीं, परन्तु मनुष्य है, तौभी तू ने अपने मन को परमेश्वर के मन के समान ठहराया है;
3 देख, तू दानिय्येल से भी अधिक बुद्धिमान है; कोई भेद नहीं, जो वे तुझ से छिपा सकें;
4 तू ने अपनी बुद्धि और समझ से धन प्राप्त किया है, और सोना-चांदी अपके भण्डार में रखा है;
5 तू ने अपक्की बड़ी बुद्धि से, और अपके लेन-देन से अपना धन बढ़ाया है, और अपके धन के कारण तेरा मन ऊंचा हो गया है;
6 इसलिथे परमेश्वर यहोवा योंकहता है; क्योंकि तू ने अपके मन को परमेश्वर के मन के समान ठहराया है;
7 इसलिथे मैं तुझ पर परदेशी लोगोंको अर्यात् अन्यजातियोंके लिथे लाऊंगा; और वे तेरी बुद्धि की शोभा पर तलवारें चलाएंगे, और तेरे तेज को अशुद्ध करेंगे।
8 वे तुझे गड़हे में उतार देंगे, और तू समुद्र के बीच में मारे गए लोगोंको मार डाला जाएगा।
9 क्या तू अब तक अपने घात करनेवाले के साम्हने यह कहेगा, कि मैं परमेश्वर हूं? परन्तु जो तुझे घात करे उसके हाथ में तू मनुष्य ठहरेगा, और कोई परमेश्वर न होगा।
10 तू खतनारहितोंकी मृत्यु परदेशियोंके हाथ से मरना; क्योंकि मैं ने यह कहा है, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
11 फिर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि
12 हे मनुष्य के सन्तान, सोर के राजा के लिथे विलाप करके उस से कह, कि परमेश्वर यहोवा योंकहता है; तू ज्ञान से परिपूर्ण, और सुन्दरता में परिपूर्ण योग पर मुहर लगाता है।
13 तू परमेश्वर की बारी अदन में रहा है; हर एक कीमती मणि तेरा आवरण, सारडिअस, पुखराज, और हीरा, बेरिल, गोमेद, और यशब, नीलम, पन्ना, और कार्बुनकल, और सोना था; जिस दिन तू सृजा गया, उस दिन तेरे ताबूत और तेरे पाइपोंकी कारीगरी तुझ में तैयार की गई।
14 ढकने वाला अभिषिक्त करूब तू ही है; और मैं ने तुझे ऐसा ठहराया है; तू परमेश्वर के पवित्र पर्वत पर गिरा; तू आग के पत्थरों के बीच ऊपर-नीचे चलता फिरता है।
15 तू अपने सृजे जाने के दिन से लेकर अपक्की चालचलन तक सिद्ध बना रहा, जब तक कि तुझ में अधर्म न पाया गया।
16 तेरे माल की बहुतायत से उन्होंने तेरे बीच में उपद्रव से भर दिया है, और तू ने पाप किया है; इस कारण मैं तुझे परमेश्वर के पर्वत पर से अपवित्र समझकर निकाल दूंगा; और हे करूबों को ढांपनेवाले, मैं तुझे आग के पत्यरोंके बीच में से नाश करूंगा।
17 तेरा मन अपक्की शोभा के कारण ऊंचा हो गया है, तू ने अपने तेज के कारण अपनी बुद्धि को भ्रष्ट कर दिया है; मैं तुझे भूमि पर गिरा दूंगा, मैं तुझे राजाओं के साम्हने रखूंगा, कि वे तुझे देखें।
18 तू ने अपके पवित्रास्थानोंको अपके अधर्म के कामोंके कारण और अपके अधर्म के कामोंके द्वारा अशुद्ध किया है; इसलिथे मैं तेरे बीच में से आग निकालूंगा, वह तुझे भस्म करेगी, और जितने तुझे देखते हैं उन सभोंके साम्हने मैं तुझे पृय्वी पर भस्म कर दूंगा।
19 लोगों में से जितने तुझे जानते हैं वे सब तुझ से चकित होंगे; तू भय का कारण होगा, और फिर कभी न होगा।
20 फिर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि,
21 हे मनुष्य के सन्तान, अपना मुंह सीदोन के विरुद्ध करके उसके विरुद्ध भविष्यद्वाणी कर,
22 और कहो, परमेश्वर यहोवा योंकहता है; हे सीदोन, देख, मैं तेरे विरुद्ध हूं; और तेरे बीच मेरी महिमा होगी; और वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं, जब मैं उसके साथ न्याय करूंगा, और उसके द्वारा पवित्र किया जाएगा।
23 क्योंकि मैं उसकी मरी और उसके चौकोंमें लोहू भेजूंगा; और उसके बीच में चारोंओर तलवार से घायलों का न्याय किया जाएगा; और वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं।
24 और इस्त्राएल के घराने के लिथे फिर न तो चुभनेवाली कंगाली होगी, और न उसके चारोंओर के सब लोगोंमें से जो उनको तुच्छ जानते हों, कोई शोक करनेवाला काँटा न रहेगा; और वे जान लेंगे कि मैं यहोवा परमेश्वर हूं।
25 परमेश्वर यहोवा यों कहता है; जब मैं इस्राएल के घराने को उन लोगों में से जिनके बीच वे तितर-बितर हो गए हैं, और अन्यजातियों के साम्हने पवित्र किया जाएगा, तब वे अपने देश में जो मैं ने अपके दास याकूब को दिया है, बसेंगे।
26 और वे उस में निडर बसेंगे, और घर बनाएंगे, और दाख की बारियां लगाएंगे; हां, जब मैं उन सभों को दण्ड दूंगा जो उनके चारों ओर उनका तिरस्कार करते हैं, तब वे विश्वास के साथ निवास करेंगे; और वे जान लेंगे कि मैं उनका परमेश्वर यहोवा हूं।
अध्याय 29
फ़िरौन का विश्वासघात — मिस्र का उजाड़ — इस्राएल फिर से बहाल किया जाएगा।
1 दसवें वर्ष के दसवें महीने के बारहवें दिन को,
यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि,
2 हे मनुष्य के सन्तान, अपना मुंह मिस्र के राजा फिरौन के विरुद्ध कर, और उसके और सारे मिस्र के विरुद्ध भविष्यद्वाणी कर;
3 बोलो, और कहो, परमेश्वर यहोवा यों कहता है; देख, हे मिस्र के राजा फिरौन, वह बड़ा अजगर जो अपक्की नदियोंके बीच में पड़ा है, मैं तेरे विरुद्ध हूं, जिस ने कहा है, कि मेरी नदी मेरी ही है, और मैं ने उसे अपके लिथे बनाया है।
4 परन्तु मैं तेरे जबड़ों में काँटे लगाऊँगा, और तेरी नदियों की मछलियाँ तेरी खालों में लगाऊंगा, और तेरी नदियों के बीच में से तुझे निकाल लाऊंगा, और तेरी नदियों की सब मछलियां तेरे पास लगी रहेंगी। तराजू।
5 और मैं तुझे और तेरी नदियोंकी सब मछलियोंको जंगल में फेंक दूंगा; तू खुले मैदानों पर गिर पड़ेगा; तू न तो इकट्ठा किया जाएगा, और न बटोरेगा; मैं ने तुझे मैदान के पशुओं और आकाश के पक्षियों का मांस खाने को दिया है।
6 और मिस्र के सब रहनेवाले जान लेंगे, कि मैं यहोवा हूं, क्योंकि वे इस्राएल के घराने के लिथे नरकट की लाठी ठहरे हैं।
7 जब उन्होंने तेरा हाथ पकड़ लिया, तब तू टूट गया, और उनका सारा कंधा फाड़ दिया; और जब वे तुझ पर टिके, तब तू ने ब्रेक लगाया, और उनकी सब कमर को स्थिर किया।
8 इसलिथे परमेश्वर यहोवा योंकहता है; देख, मैं तुझ पर तलवार चलाऊंगा, और तुझ में से मनुष्य और पशु दोनोंको नाश करूंगा।
9 और मिस्र देश उजाड़ और उजाड़ हो जाएगा; और वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं; क्योंकि उस ने कहा है, कि नदी मेरी है, और मैं ने उसे बनाया है।
10 सुन, मैं तेरे और तेरी नदियों के विरुद्ध हूं, और मिस्र देश को स्याने के गुम्मट से लेकर कूश के सिवाने तक उजाड़ और उजाड़ कर दूंगा।
11 उस में न तो मनुष्य का पांव चलेगा, और न पशु का पांव उस में से चलेगा, और वह चालीस वर्ष तक जीवित न रहेगा।
12 और मैं मिस्र देश को उजड़े हुए देशोंके बीच में उजाड़ दूंगा, और उसके नगर जो उजड़े हो गए हैं, वे चालीस वर्ष तक उजाड़ पड़े रहेंगे; और मैं मिस्रियोंको जाति जाति में तित्तर बित्तर करूंगा, और देश देश में तितर-बितर करूंगा।
13 तौभी परमेश्वर यहोवा यों कहता है; चालीस वर्ष के बीतने पर मैं मिस्रियोंको उन लोगोंमें से जहां वे तित्तर बित्तर हुए या, इकट्ठा करूंगा;
14 और मैं मिस्र को बन्धुआई में फिर ले आऊंगा, और उन्हें पत्रोस के देश में उनके निवास के देश में लौटा दूंगा; और वे वहां एक मूल राज्य होंगे।
15 वह राज्यों में सब से उत्तम होगा; वह फिर अपने आप को अन्यजातियों से ऊंचा न करेगा; क्योंकि मैं उन्हें कम कर दूंगा, कि वे फिर अन्यजातियों पर शासन न करने पाएंगे।
16 और इस्त्राएल के घराने का भरोसा फिर न रहेगा, जिस से वे अपके अधर्म का स्मरण करके उनकी सुधि लेंगे; परन्तु वे जान लेंगे कि मैं यहोवा परमेश्वर हूं।
17 और बीसवें वर्ष के पहिले महीने के पहिले दिन को यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा,
18 हे मनुष्य के सन्तान, बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ने अपनी सेना को सोरुस के विरुद्ध बड़ी सेवा करने के लिए नियुक्त किया; सबका सिर गंजा हो गया, और सब कंधा छिल गया; तौभी उसके पास सोर के लिथे उस सेवा के लिथे न तो मजदूरी थी, और न उसकी सेना;
19 इसलिथे परमेश्वर यहोवा योंकहता है; देख, मैं मिस्र देश को बेबीलोन के राजा नबूकदनेस्सर को दूंगा; और वह उसकी भीड़ को ले लेगा, और उसकी लूट ले लेगा, और उसका शिकार करेगा; और यह उसकी सेना के लिए मजदूरी होगी।
20 मैं ने मिस्र देश को उसके परिश्रम के लिथे दिया है, जिस से उस ने उसके लिथे सेवा की, क्योंकि उन्होंने मेरे लिथे गढ़ा, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
21 उस समय मैं इस्राएल के घराने का सींग फूटवाऊंगा, और उनके बीच में तुझे मुंह का द्वार दूंगा; और वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं।
अध्याय 30
मिस्र और उसके सहायकों का उजाड़।
1 यहोवा का यह वचन फिर मेरे पास पहुंचा, कि,
2 हे मनुष्य के सन्तान, भविष्यद्वाणी करके कह, कि परमेश्वर यहोवा यों कहता है; हाउल यू; दिन के लायक हाय!
3 क्योंकि वह दिन निकट है, यहोवा का दिन निकट है, और बादल का दिन है; यह अन्यजातियों का समय होगा।
4 और मिस्र में तलवार चलेगी, और जब मिस्र में मारे गए लोग मारे जाएंगे, तब कूश में बड़ी पीड़ा होगी, और वे उसकी भीड़ को छीन लेंगे, और उसकी नेव ढा दी जाएगी।
5 कूशी, और लीबिया, लुदिया, और सब मिले हुए लोग, और कूब, और देश के जो बंधुआई में हैं, वे उनके साथ तलवार से मारे जाएंगे।
6 यहोवा यों कहता है; वे भी जो मिस्र को पकड़े रहेंगे वे गिरेंगे; और उसकी शक्ति का घमण्ड उतरेगा; वे उस में तलवार से सायने के गुम्मट से गिरेंगे, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
7 और वे उजाड़ देश के बीच में उजाड़ हो जाएंगे, और उसके नगर उजड़े हुए नगरोंके बीच में होंगे।
8 और जब मैं मिस्र में आग लगाऊंगा, और उसके सब सहायक नाश किए जाएंगे, तब वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं।
9 उस समय मेरे पास से दूत जहाजों पर चढ़कर कूशियों को डराने के लिथे निकलेंगे, और मिस्र के दिन की नाईं उन पर बड़ी पीड़ा होगी; के लिए, लो, यह आता है।
10 परमेश्वर यहोवा यों कहता है; मैं बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर के हाथ से मिस्र की भीड़ को भी मिटा दूंगा।
11 वह और उसकी प्रजा समेत जो अन्यजातियोंमें भयानक हैं, देश को नाश करने के लिथे लाया जाएगा; और वे मिस्र पर तलवारें चलाएंगे, और देश को मारे हुओं से भर देंगे।
12 और मैं नदियोंको सुखा दूंगा, और देश को दुष्टोंके वश में कर दूंगा; और मैं देश को, और जो कुछ उस में है, सब परदेशियोंके हाथ से उजाड़ दूंगा; मैं यहोवा ने यह बात कही है।
13 परमेश्वर यहोवा यों कहता है; मैं भी मूरतोंको नाश करूंगा, और उनकी मूरतोंको नोप में से मिटा दूंगा; और मिस्र देश का कोई हाकिम फिर न होगा; और मैं मिस्र देश में भय उत्पन्न करूंगा।
14 और मैं पत्रोस को उजाड़ दूंगा, और सोअन में आग लगाऊंगा, और नं में दण्ड दूंगा।
15 और मैं अपना जलजलाहट मिस्र के बल सीन पर डालूंगा; और मैं संख्या की भीड़ को नाश करूंगा।
16 और मैं मिस्र में आग लगाऊंगा; पाप को बड़ी पीड़ा होगी, और कोई फाड़ा नहीं जाएगा, और नोप को प्रतिदिन संकट होगा।
17 आवेन और पीबेसेत के जवान तलवार से मारे जाएंगे; और ये नगर बंधुआई में चले जाएंगे।
18 तहपनेह में भी वह दिन अन्धियारा होगा, जब मैं वहां मिस्र के जूए को तोड़ डालूंगा; और उसके बल का वैभव उस में न रहेगा; उसके लिए बादल छा जाएगा, और उसकी बेटियां बंधुआई में जाएंगी।
19 इस प्रकार मैं मिस्र में दण्ड दूंगा; और वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं।
20 और ग्यारहवें वर्ष के पहिले महीने के सातवें दिन को यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा,
21 हे मनुष्य के सन्तान, मैं ने मिस्र के राजा फिरौन की भुजा तोड़ दी है; और देखो, वह चंगा होने के लिथे बान्धा न जाए, और उसे बांधने के लिथे एक बेला लगाया जाए, और वह तलवार को थामे रहने के लिथे दृढ़ किया जाए।
22 इसलिथे परमेश्वर यहोवा योंकहता है; देख, मैं मिस्र के राजा फिरौन के विरुद्ध हूं, और उसकी भुजाओं, बलवानों, और टूटे हुओं को तोड़ डालूंगा; और मैं उसके हाथ से तलवार गिरा दूंगा।
23 और मैं मिस्रियोंको जाति जाति में तितर-बितर करूंगा, और देश देश में तितर-बितर करूंगा।
24 और मैं बाबुल के राजा की भुजाओं को दृढ़ करूंगा, और अपक्की तलवार उसके हाथ में करूंगा; परन्तु मैं फिरौन की भुजाओं को तोड़ डालूंगा, और वह उसके साम्हने एक घायल मनुष्य के कराहते हुए कराहेगा।।
25 परन्तु मैं बाबुल के राजा की भुजाओं को दृढ़ करूंगा, और फिरौन की भुजाएं गिर जाएंगी; और जब मैं अपनी तलवार बाबुल के राजा के हाथ में कर दूंगा, और वह उसे मिस्र देश पर तानेगा, तब वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं।
26 और मैं मिस्रियोंको जाति जाति में तितर-बितर करूंगा, और देश देश में तितर-बितर करूंगा; और वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं।
अध्याय 31
अश्शूर की महिमा और पतन - मिस्र का विनाश।
1 और ग्यारहवें वर्ष के तीसरे महीने के पहिले दिन को यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा,
2 हे मनुष्य के सन्तान, मिस्र के राजा फिरौन और उसकी भीड़ से बातें कर; तू अपनी महानता में किसे पसंद करता है?
3 देखो, अश्शूर लबानोन का देवदार है, और उसकी सुन्दर डालियां, और छायादार कफन, और ऊंचे कद का है; और उसकी चोटी मोटी टहनियों के बीच में थी।
4 जल ने उसे बड़ा किया, और गहिरे जल ने उसको ऊंचे स्थान पर खड़ा किया, और उसकी नदियां उसके पौधोंके चारोंओर बहती रहीं, और उसकी छोटी नदियां मैदान के सब वृझोंके पास भेज दीं।
5 इसलिथे उसकी ऊंचाई मैदान के सब वृझोंसे अधिक की गई, और उसकी डालियां बहुत बढ़ गईं, और जब वह फूटा, तब बहुत जल के कारण उसकी डालियां लंबी हो गईं।
6 आकाश के सब पझियों ने उसकी डालियों में अपना घोंसला बनाया, और उसकी डालियों के नीचे मैदान के सब जन्तु अपके बच्चे पालते थे, और सब बड़ी जातियां उसकी छाया में रहती थीं।
7 वह अपनी महानता के कारण, और उसकी डालियोंकी लम्बाई में ऐसा ही सुन्दर था; क्योंकि उसकी जड़ बड़े जल के पास थी।
8 परमेश्वर की बारी के देवदार उसे छिपा न सके; न तो उसकी डालियों के साय सन, और न शाहबलूत के वृझ उसकी डालियों के तुल्य थे; परमेश्वर की बारी का कोई वृक्ष उसकी शोभा में उसके समान न था।
9 मैं ने उसकी डालियोंकी भीड़ के द्वारा उसको गोरा किया है; और अदन के सब वृझ जो परमेश्वर की बारी में थे, उस से डाह करने लगे।
10 इसलिथे परमेश्वर यहोवा योंकहता है; क्योंकि तू ने अपने आप को ऊंचाई में उठाया है, और उसने अपनी चोटी को मोटी डालियों के बीच उठाया है, और उसका दिल उसकी ऊंचाई से ऊंचा हो गया है;
11 इसलिथे मैं ने उसको अन्यजातियोंके पराक्रमी के वश में कर दिया है; वह उसके साथ अवश्य व्यवहार करेगा; मैंने उसे उसकी दुष्टता के कारण निकाल दिया है।
12 और अन्यजातियोंमें भयानक परदेशियोंने उसको नाश करके छोड़ दिया है; उसकी डालियां पहाड़ों पर और सब घाटियों पर गिर पड़ी हैं, और उसकी डालियां देश की सब नदियों से टूट गई हैं; और पृय्वी के सब लोग उसकी छाया से उतर गए हैं, और उसे छोड़ गए हैं।
13 आकाश के सब पक्की उसके नाश पर रहेंगे, और सब पशु उसकी डालियोंपर होंगे;
14 ऐसा न हो कि जल के पास के सब वृझोंमें से कोई अपक्की ऊंचाई के कारण ऊंचा न हो, और न घनी टहनियोंके बीच में अपना सिर ऊंचा करे, और जितने जल पीते हैं, वे सब के वृझ अपनी ऊंचाई पर न खड़े हों; क्योंकि वे सब पृय्वी के नीचे के देशों में, और उनके संग जो गड़हे में उतर जाते हैं, मनुष्योंके बीच में मार डाला गया है।
15 परमेश्वर यहोवा यों कहता है; जिस दिन वह कब्र पर उतरा, उस दिन मैं ने विलाप किया; मैं ने उसके लिथे गहिरे जल को ढांप दिया, और उसकी जल-प्रलय को रोक लिया, और बड़ा जल ठहर गया; और मैं ने लबानोन को उसके लिथे विलाप कराया, और मैदान के सब वृझ उसके कारण मूर्छित हो गए।
16 और जब मैं ने उसको गड़हे में उतरनेवालोंके संग अधोलोक में डाल दिया, तब मैं ने जाति जाति को उसके गिरने के शब्द से कांपने दिया; और अदन के सब वृझ, वरन लबानोन के उत्तम और उत्तम वृझ, जितने जल पीते हैं, वे सब पृय्वी के नीचे के भागोंमें शान्ति पाएँगे।
17 वे उसके संग अधोलोक में गए, जो तलवार से मारे गए थे; और जो अन्यजातियों के बीच में उसकी छाया के नीचे रहते थे, वे उसके हाथ थे।
18 इस प्रकार अदन के वृक्षों में से तू किस को महिमा और महानता में पसन्द करता है? तौभी तू अदन के वृक्षों समेत पृय्वी की निचली ओर तक गिराया जाएगा; तू उन खतनारहितों के बीच में जो तलवार से घात किए गए हैं, उनके संग लेटे रहना। यह फिरौन और उसकी सारी भीड़ है, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
अध्याय 32
मिस्र का पतन - इसे नरक में लाया जाएगा।
1 और बारहवें वर्ष के बारहवें महीने के पहिले दिन को, यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा,
2 हे मनुष्य के सन्तान, मिस्र के राजा फिरौन के लिथे विलाप करना, और उस से कहना, कि तू अन्यजातियोंके जवान सिंह के समान है, और तू समुद्र में रहनेवाले मच्छ के समान है; और तू अपनी नदियों समेत निकल आया, और अपने पांवोंसे जल को दु:ख दिया, और उनकी नदियोंको गंदा किया।
3 परमेश्वर यहोवा यों कहता है; इसलिथे मैं बहुत से लोगोंकी मण्डली के द्वारा तुझ पर अपना जाल फैलाऊंगा; और वे तुझे मेरे जाल में फंसाएंगे।
4 तब मैं तुझे देश में छोड़ दूंगा, और मैं तुझे मैदान में फेंक दूंगा, और आकाश के सब पझियोंको तुझ पर बसाऊंगा, और सारी पृय्वी के पशुओं को तुझ से भर दूंगा।
5 और मैं तेरा मांस पहाड़ों पर रखूंगा, और तराइयोंको तेरी ऊंचाई से भर दूंगा।
6 मैं तेरे लोहू से उस देश को भी जिस में तू तैरता है, वरन पहाड़ोंपर भी सींचूंगा; और नदियां तुझ से भर जाएंगी।
7 और जब मैं तुझे बाहर निकालूंगा, तब मैं आकाश को ढांप दूंगा, और उसके तारोंको अन्धेरा कर दूंगा; मैं सूर्य को बादल से ढँक दूंगा, और चन्द्रमा उसे प्रकाश न देगा।
8 मैं आकाश के सब प्रकाशमान ज्योतियों को तेरे ऊपर अन्धेरा करूंगा, और तेरे देश में अन्धेरा करूंगा, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
9 जब मैं तेरा विनाश अन्यजातियोंके बीच उन देशोंमें कर दूंगा, जिन्हें तू नहीं जानता, तब मैं बहुत से लोगोंके मन को भी दुख दूंगा।
10 वरन जब मैं अपक्की तलवार उनके साम्हने चलाऊंगा, तब मैं बहुत से लोगोंको तुझ से चकित करूंगा, और उनके राजा तेरे लिथे बहुत डरेंगे; और वे अपके अपके प्राण के लिथे, अर्थात तेरे गिरने के दिन, हर पल कांप उठेंगे।
11 क्योंकि परमेश्वर यहोवा यों कहता है; बाबुल के राजा की तलवार तुझ पर चलेगी।
12 मैं तेरी भीड़ को शूरवीरोंकी तलवारोंसे मारूंगा, अर्यात् जाति जाति के सब भयानक लोग; और वे मिस्र की शोभा को लूट लेंगे, और उसकी सारी भीड़ नाश हो जाएगी।
13 मैं उसके सब पशुओं को बड़े जल के पास से नाश करूंगा; न तो मनुष्य का पांव उन्हें फिर सताएगा, और न पशुओं के खुर उन्हें कष्ट देंगे।
14 तब मैं उनका जल गहरा कर दूंगा, और उनकी नदियोंको तेल की नाईं बहने दूंगा, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
15 जब मैं मिस्र देश को उजाड़ कर दूंगा, और देश उस से भर जाएगा, जिस में मैं उसके सब रहनेवालोंको मारूंगा, तब वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं।
16 यह वह विलाप है जिस से वे उसके लिथे विलाप करेंगे; जाति-जाति की बेटियां उसके लिथे विलाप करेंगी; वे मिस्र और उसकी सारी भीड़ के लिथे उसके लिथे विलाप करेंगे, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
17 बारहवें वर्ष के पन्द्रहवें दिन को भी ऐसा हुआ कि यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा,
18 हे मनुष्य के सन्तान, मिस्र की भीड़ के लिथे जयजयकार करो, और उसको और प्रसिद्ध जातियोंकी बेटियोंको, जो गड़हे में उतर जाएं, पृय्वी के नीचे तक फेंक दो।
19 तू किस को सुन्दरता से पार करता है? नीचे जा, और खतनारहितों के संग सो जा।
20 वे तलवार से मारे हुओं के बीच में मारे जाएंगे; वह तलवार के हवाले कर दी जाती है; उसे और उसकी सारी भीड़ को खींचो।
21 शूरवीरोंमें से बलवान उस से अधोलोक में से उस से बातें करें, जो उसके सहायक हों; वे नीचे चले गए हैं, वे तलवार से मारे गए खतनारहित पड़े हैं।
22 वहां अश्शूर और उसका सारा मण्डली है; उसकी कब्रें उसके चारों ओर हैं; वे सब के सब तलवार से मारे गए;
23 जिस की कब्रें गड़हे की अलंगोंमें बनी हैं, और उसकी मण्डली उसकी कब्र के चारोंओर बनी है; वे सब के सब उस तलवार से मारे गए, जिस से जीवितोंके देश में भय छा गया।
24 एलाम और उसकी सारी भीड़ उसकी कब्र के चारोंओर है; वे सब के सब तलवार से मारे गए, जो खतनारहित पृय्वी की निचली भूमि में उतर गए, जिस से जीवितोंके देश में उनका भय छा गया; तौभी जो गड़हे में उतर जाते हैं, उनकी लज्जा तो उठाई है।
25 उन्होंने उसकी सारी भीड़ समेत मारे हुओं के बीच में उसके लिये एक बिछौना रखा है; उसकी कब्रें उसके चारों ओर हैं; वे सब के सब खतनारहित, तलवार से मारे गए; भले ही उनका आतंक जीवितों के देश में हुआ हो, तौभी जो गड़हे में उतर जाते हैं, उन से उनकी लज्जा होती है; वह मारे जानेवालों के बीच में डाल दिया जाता है।
26 मेशेक, तूबल और उसकी सारी भीड़ है; उसकी कब्रें उसके चारों ओर हैं; वे सब के सब खतनारहित, तलवार से मारे गए, तौभी वे जीवितोंके देश में अपना आतंक फैलाते थे।
27 और उन खतनारहितोंमें से जो अपके अपके युद्ध के अस्त्रोंके साथ अधोलोक में गिर गए हैं, उन शूरवीरोंके संग लेटना न करना; और उन्होंने अपके सिरोंके नीचे तलवारें रखी हैं, वरन उनके अधर्म के काम उनकी हड्डियोंपर होंगे, वरन जीवितोंके देश में शूरवीरोंका भय उनके लिथे होगा।
28 वरन तुम खतनारहितों के बीच में टूट जाओगे, और तलवार से मारे हुओं के संग सोओगे।
29 एदोम और उसके राजा, और उसके सब हाकिम हैं, जो तलवार से मारे गए लोगोंके हाथ अपके बल से मारे गए हैं; वे खतनारहितों और गड़हे में उतरनेवालोंके संग सोएं।
30 उत्तर दिशा के हाकिम हों, वे सब के सब, और सब सीदोनी जो मारे गए लोगोंके संग चले गए; वे अपने भय से अपने पराक्रम से लज्जित होते हैं; और जो तलवार से मारे जाते हैं, उनके संग खतनारहित लेटे रहते हैं, और जो गड़हे में उतरते हैं, उन से उनका लज्जा सहते हैं।
31 फिरौन उनको देखेगा, और अपक्की सारी भीड़ के कारण शान्ति पाएगा, वरन फिरौन और उसकी सारी सेना जो तलवार से मारी गई है, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
32 क्योंकि मैं ने जीवतोंके देश में अपना भय भड़काया है; और वह उन खतनारहितोंके बीच में जो तलवार से मारे गए हों, वरन फिरौन और उसकी सारी भीड़ के बीच में रखा जाए, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
अध्याय 33
पहरेदार का कर्तव्य, लोगों को चेतावनी देने में - भगवान अपने न्याय को बनाए रखता है - भूमि का उजाड़।
1 फिर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि,
2 आदमी का बेटा, तेरा लोगों के बच्चों से बात करें, और उनसे कहें, जब मैं तलवार को एक जमीन पर लाता हूं, अगर भूमि के लोग उनके तटों के एक आदमी को लेते हैं, और उसे अपने चौकीदार के लिए सेट करते हैं;
3 यदि वह देखता है कि तलवार देश पर पड़ी है, तो वह नरसिंगा फूंककर प्रजा को चिताता है;
4 तब जो कोई नरसिंगा का शब्द सुनता है, और चेतावनी नहीं देता; यदि तलवार आकर उसे ले जाए, तो उसका लोहू उसी के सिर पर लगे।
5 उस ने नरसिंगा का शब्द सुना, और चितौनी न दी; उसका खून उस पर होगा। लेकिन जो उसकी चेतावनी स्वीकार करता है उसीकी आत्मा का उद्धार होगा।
6 परन्तु यदि पहरुए तलवार को आते हुए देखे, और नरसिंगा न फूंकें, और लोग सावधान न हों; यदि तलवार आ कर उन में से किसी को ले ले, तो वह अपके अधर्म के कारण दूर किया जाएगा; परन्तु मैं पहरेदार के हाथ उसका खून मांगूंगा।
7 इसलिथे हे मनुष्य के सन्तान, मैं ने तेरे लिथे इस्राएल के घराने के लिथे एक पहरुआ ठहराया है; इसलिथे तू मेरे मुंह से वचन सुन, और उनको मुझ से चिता दे।
8 जब मैं दुष्ट से कहूं, कि हे दुष्ट, तू निश्चय मर जाएगा; यदि तू दुष्ट को उसके मार्ग से चिताने की बातें न करे, तो वह दुष्ट अपने अधर्म के कारण मारा जाएगा; परन्तु उसका लहू मैं तेरे हाथ मांगूंगा।
9 तौभी यदि तू दुष्ट को उसके मार्ग से फिरने की चितौनी दे; यदि वह अपने मार्ग से न फिरे, तो वह अपके अधर्म के कारण मर जाएगा; परन्तु तू ने अपके प्राण को छुड़ाया है।
10 इसलिथे, हे मनुष्य के सन्तान, इस्राएल के घराने से बातें कर; तुम यों कहते हो, कि यदि हमारे अपराध और हमारे पाप हम पर हों, और हम उन पर तरस जाएं, तो फिर हम कैसे रहें?
11 उन से कहो, परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, मेरे जीवन की सौगन्ध, दुष्टोंके मरने से मुझे कुछ प्रसन्नता नहीं; परन्तु यह कि दुष्ट अपनी चालचलन से फिरकर जीवित रहते हैं; फिरो, अपने बुरे मार्गों से फिरो; हे इस्राएल के घराने, तुम क्यों मरोगे?
12 इसलिथे, हे मनुष्य के सन्तान, अपक्की प्रजा के सन्तान से कह, कि धर्मी का धर्म उसके अपराध के दिन में उसका उद्धार न करेगा; जिस दिन वह दुष्ट की दुष्टता से फिरे, उस दिन वह उस से न गिरेगा; न तो धर्मी अपने पाप के दिन अपने धर्म के लिये जीवित रह सकेगा।
13 जब मैं धर्मी से कहूं, कि वह निश्चय जीवित रहेगा; यदि वह अपके धर्म पर भरोसा रखे, और अधर्म करे, तो उसका सब धर्म स्मरण न रखा जाएगा; परन्तु अपने अधर्म के लिये जो उस ने किया है, उसके लिये वह मरेगा।
14 फिर जब मैं दुष्ट से कहूं, कि तू निश्चय मर जाएगा; यदि वह अपने पाप से फिरे, और वह करे जो उचित और उचित है;
15 यदि दुष्ट उस बन्धक को फेर दे, जो उस ने लूटा या है, तो जीवन की विधियों पर बिना कुटिल काम किए चले फिरें; वह निश्चय जीवित रहेगा, वह न मरेगा।
16 उसके किए हुए किसी भी पाप का वर्णन उस से न किया जाए; उस ने वह किया है जो उचित और उचित है; वह अवश्य जीवित रहेगा।
17 तौभी तेरी प्रजा के लोग कहते हैं, यहोवा की चाल तुल्य नहीं है; परन्तु उनका मार्ग समान नहीं है।
18 जब धर्मी अपके धर्म से फिरकर अधर्म करे, तब वह उसी के कारण मरेगा।
19 परन्तु यदि दुष्ट अपनी दुष्टता से फिरे, और उचित और धर्म के काम करे, तो वह उसके द्वारा जीवित रहेगा।
20 तौभी तुम कहते हो, कि यहोवा की चाल तुल्य नहीं है। हे इस्राएल के घराने, मैं तुम सबका न्याय उसके चालचलन के अनुसार करूंगा।
21 और हमारी बंधुआई के बारहवें वर्ष के दसवें पहाड़ पर, महीने के पांचवें दिन को, जो यरूशलेम से बच निकला था, वह मेरे पास आकर कहने लगा, कि नगर पर घात हो गया है।
22 साँझ को जो बच गया था उसके आने से पहिले यहोवा का हाथ मुझ पर रहा; और भोर को मेरे पास आने तक मेरा मुंह खोला था; और मेरा मुंह खुल गया, और मैं फिर गूंगा न रहा।
23 तब यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि,
24 हे मनुष्य के सन्तान, जो इस्राएल देश के उन उजाड़ क्षेत्रों में रहते हैं, वे कहते हैं, कि इब्राहीम एक ही या, और उस को देश का अधिकारी हुआ; लेकिन हम बहुत हैं; भूमि हमें विरासत के लिए दी गई है।
25 इसलिथे उन से कहो, परमेश्वर यहोवा योंकहता है; तुम लोहू समेत खाओ, और अपनी मूरतों की ओर आंखें उठा कर लोहू बहाओ; और क्या तुम भूमि के अधिकारी होगे?
26 तुम अपक्की तलवार पर खड़े हो; तुम घिनौने काम करते हो, और उसके पड़ोसी की पत्नी को अशुद्ध करते हो; और क्या तुम भूमि के अधिकारी होगे?
27 तू उन से यों कहना, परमेश्वर यहोवा यों कहता है; मेरे जीवन की सौगन्ध, निश्चय वे जो उजाड़ में होंगे, तलवार से मारे जाएंगे, और जो खुले मैदान में होंगे, मैं उन्हें उन पशुओं को दूंगा, जो वे खा जाएंगे, और जो किलों और गुफाओं में होंगे, वे उन में से मर जाएंगे। महामारी
28 क्योंकि मैं देश को अत्यन्त उजाड़ कर दूंगा, और उसके बल का प्रताप मिट जाएगा, और इस्राएल के पहाड़ ऐसे उजड़ जाएंगे, कि कोई वहां से न गुजरेगा।
29 तब वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं, जब मैं ने देश को उनके सब घिनौने कामोंके कारण उजाड़ कर दिया है, जो उन्होंने किए हैं।
30 और, हे मनुष्य के सन्तान, तेरी प्रजा अब भी शहरपनाह और घरोंके किवाड़ोंमें तुझ से बातें करती है, और अपके भाई से अपके अपके भाई से बातें कर, कि आ, मैं तुझ से बिनती करता हूं, और सुन यहोवा की ओर से जो वचन निकला है वह क्या है?
31 और जैसे लोग आते हैं वैसे ही वे तेरे पास आते हैं, और मेरी प्रजा की नाई तेरे साम्हने बैठते हैं, और तेरी बातें सुनते हैं, परन्तु उन पर नहीं चलते; क्योंकि वे अपके मुंह से बहुत प्रेम करते हैं, परन्तु उनका मन अपने लोभ पर लगा रहता है।
32 और देखो, तू उनके लिथे उसका बहुत ही मनोहर गीत है, जिसका शब्द मधुर है, और जो वादन पर अच्छा बजा सकता है; क्योंकि वे तेरी बातें सुनते तो हैं, पर उन पर नहीं चलते।
33 और जब यह हो जाएगा, (देखो, यह आ जाएगा), तब वे जानेंगे कि उनके बीच एक नबी था।
अध्याय 34
चरवाहों की फटकार - अपने झुंड के लिए भगवान की व्यवस्था।
1 और यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि,
2 हे मनुष्य के सन्तान, इस्राएल के चरवाहोंके विषय में भविष्यद्वाणी करके उन से कह, परमेश्वर यहोवा चरवाहोंसे योंकहता है; धिक्कार है इस्राएल के उन चरवाहों पर, जो अपना पेट पालते हैं! क्या चरवाहों को भेड़-बकरियों को चराना नहीं चाहिए?
3 तुम चरबी खाते हो, और ऊन पहिनाते हो, और जो पाले जाते हो उन्हें मार डालते हो; परन्तु तुम भेड़-बकरियों को नहीं खिलाते।
4 रोगग्रस्तों को न तो तुम ने दृढ़ किया, और न रोगी को चंगा किया, और न टूटे हुए को बान्धा, और जो दूर किया गया था उसे फिर नहीं लाया, और खोई हुई वस्तु को नहीं खोजा; परन्तु तुम ने उन पर बल और क्रूरता से शासन किया है।
5 और वे तित्तर बित्तर हो गए, क्योंकि कोई चरवाहा नहीं; और जब वे तित्तर बित्तर हो गए, तब वे मैदान के सब पशुओं के मांस बन गए।
6 मेरी भेड़-बकरियां सब पहाड़ों और सब ऊंचे पहाड़ों पर फिरती रही; हां, मेरी भेड़-बकरियां पूरी पृथ्वी पर तितर-बितर हो गई हैं, और किसी ने उनकी खोज या खोज नहीं की ।
7 इसलिथे हे चरवाहों, यहोवा का वचन सुनो;
8 परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, मेरे जीवन की सौगन्ध निश्चय इसलिथे कि मेरी भेड़-बकरियां शिकार बन गईं, और मेरी भेड़-बकरियां मैदान के सब पशुओं का मांस बन गईं, क्योंकि न तो कोई चरवाहा था, और न मेरे चरवाहे मेरी भेड़-बकरियोंको ढूंढ़ते थे, परन्तु चरवाहे अपना पेट पालते थे। , और मेरी भेड़-बकरियोंको न खिलाया;
9 इस कारण हे चरवाहों, यहोवा का वचन सुनो;
10 परमेश्वर यहोवा यों कहता है; देख, मैं चरवाहों के विरुद्ध हूं; और मैं अपक्की भेड़-बकरियोंको उनके हाथ पकड़ूंगा, और उन्हें भेड़-बकरियोंको चराने से रोकूंगा; और न चरवाहे फिर अपना पेट भरेंगे, क्योंकि मैं अपक्की भेड़-बकरियोंको उनके मुंह से छुड़ाऊंगा, कि वे उनके लिथे मांस न हों।
11 क्योंकि परमेश्वर यहोवा यों कहता है; देख, मैं, मैं भी अपनी भेड़-बकरियोंको ढूंढ़कर ढूंढ़ूंगा।
12 जैसे चरवाहा अपक्की भेड़-बकरियोंमें से तितर-बितर होने के दिन में अपक्की भेड़-बकरियोंको ढूंढ़ता है; तब मैं अपक्की भेड़-बकरियोंको ढूंढ़ूंगा, और उन सब स्थानोंमें से जहां तेरी तित्तर बित्तर हुई, और अन्धकारमय दिन में तित्तर बित्तर कर दूंगा, उनको छुड़ाऊंगा।
13 और मैं उनको प्रजा में से निकालकर देश देश से बटोरूंगा, और उनके निज देश में पहुंचाऊंगा, और इस्त्राएल के पहाड़ोंपर नदियोंके पास, और देश के सब बसे हुए स्थानोंमें चराऊंगा।
14 मैं उन्हें अच्छी चरागाह में चराऊंगा, और इस्राएल के ऊंचे पहाड़ोंपर उनका चरा होगा; वे अच्छी भेड़शाला में लेटेंगे, और इस्राएल के पहाड़ोंपर चराई करेंगे।
15 मैं अपक्की भेड़-बकरियोंको चराऊंगा, और उनको लेटा दूंगा, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
16 मैं खोई हुई को ढूंढ़ूंगा, और जो खोई हुई हूं, उसे फिर लाऊंगा, और जो टूटी हुई को बान्धूंगा, और रोगी को दृढ़ करूंगा; परन्तु मैं चरबी और बलवानोंको नाश करूंगा; मैं उन्हें न्याय के साथ खिलाऊंगा।
17 और हे मेरे झुण्ड, तू यहोवा परमेश्वर यों कहता है; देख, मैं गाय-बैल और भेड़-बकरियों का, और मेढ़ों और बकरों का न्याय करता हूं।
18 क्या तुम को यह छोटी बात लगती है कि तुम अच्छी चराई खा चुके हो, परन्तु अपक्की बची हुई चराइयोंको अपके पांवोंसे रौंद देना? और गहिरे जल में से पिया हो, परन्तु बचे हुए को अपने पांवों से अशुद्ध करना?
19 और मेरी भेड़-बकरियां वही खाते हैं, जिसे तुम ने अपके पांवोंसे रौंदा है; और जो कुछ तुम ने अपके पांवोंसे अशुद्ध किया है, वे पीते हैं।
20 इस कारण परमेश्वर यहोवा उन से यों कहता है; निहारना, मैं, यहाँ तक कि मैं, मोटे मवेशियों के बीच और दुबले मवेशियों के बीच न्याय करूंगा।
21 इसलिथे कि तुम ने पांव और कंधा से मार डाला, और सब रोगग्रस्तोंको अपके सींगोंसे यहां तक धकेला, कि उन्हें इधर-उधर तितर-बितर कर दिया;
22 इस कारण मैं अपक्की भेड़-बकरियोंको बचाऊंगा, और वे फिर शिकार न होंगी; और मैं पशुओं और पशुओं का न्याय करूंगा।
23 और मैं उनके ऊपर एक चरवाहा ठहराऊंगा, और वह अपके दास दाऊद को चराएगा; वह उन्हें चराएगा, और वह उनका चरवाहा होगा।
24 और मैं यहोवा उनका परमेश्वर ठहरूंगा, और मेरा दास दाऊद उन में प्रधान होगा; मैं यहोवा ने यह बात कही है।
25 और मैं उन से मेल की वाचा बान्धूंगा, और दुष्ट पशुओं को देश में से मिटा दूंगा; और वे जंगल में निडर बसेंगे, और जंगल में सोएंगे।
26 और मैं उनको और अपक्की पहाड़ी के चारोंओर के स्यानोंको आशीष दूंगा; और मैं उसके समय पर नहा-धोकर बरसाऊंगा; आशीर्वाद की वर्षा होगी।
27 और मैदान का वृझ अपना फल देगा, और भूमि अपक्की उपज देगी, और वे अपके देश में सुरक्षित रहेंगे, और जब मैं उनके जूए के बंधनोंको तोड़कर छुड़ाऊंगा, तब वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं। उन लोगों के हाथ से जो उनकी सेवा करते थे।
28 और वे फिर कभी अन्यजातियोंके शिकार न होंगे, और न देश के पशु उन्हें खा सकेंगे; परन्तु वे निडर बसेंगे, और कोई उन्हें डराने न पाएगा।
29 और मैं उनके लिथे यश का एक पौधा उगाऊंगा, और वे देश में फिर भूखे न रहेंगे, और न अन्यजातियोंकी लज्जा फिर सहेगी।
30 इस प्रकार वे जान लेंगे कि मैं उनका परमेश्वर यहोवा उनके संग हूं, और वे इस्राएल का घराना मेरी प्रजा हैं, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
31 और तुम मेरी भेड़-बकरी, अर्थात् मेरी चराई की भेड़-बकरी मनुष्य हो, और मैं तेरा परमेश्वर हूं, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
अध्याय 35
माउंट सेर का निर्णय।
1 फिर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि
2 हे मनुष्य के सन्तान, अपना मुंह सेईर पर्वत के साम्हने कर, और उसके विरुद्ध भविष्यद्वाणी कर,
3 और उस से कहना, परमेश्वर यहोवा योंकहता है; देख, हे सेईर पर्वत, मैं तेरे विरुद्ध हूं, और मैं तुझ पर हाथ बढ़ाकर तुझे बहुत उजाड़ दूंगा।
4 मैं तेरे नगरोंको उजाड़ दूंगा, और तू उजाड़ हो जाएगा, और तू जान लेगा कि मैं यहोवा हूं।
5 क्योंकि तू ने सदा बैर रखा है, और इस्राएलियोंका लोहू तलवार के बल से बहाया है, जब वे विपत्ति के समय उनके अधर्म का अन्त हुआ;
6 इसलिथे परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, कि मेरे जीवन की सौगन्ध मैं तुझे लोहू के लिथे तैयार करूंगा, और लोहू तेरा पीछा करेगा; क्योंकि तू ने लोहू से बैर नहीं रखा, वरन लोहू भी तेरा पीछा करेगा।
7 इस प्रकार मैं सेईर पर्वत को अति उजाड़ कर दूंगा, और उस में से निकलने वाले को और लौटने वाले को नाश करूंगा।
8 और मैं उसके पहाड़ोंको उसके मारे हुओं से भर दूंगा; तेरी पहाड़ियों में, और तेरी घाटियों में, और तेरी सारी नदियों में, वे तलवार से मारे गए हैं।
9 मैं तुझे सदा उजाड़ दूंगा, और तेरे नगर फिर न फिरेंगे; और तुम जान लोगे कि मैं यहोवा हूं।
10 क्योंकि तू ने कहा है, कि ये दोनों जातियां और ये दोनों देश मेरे हो जाएंगे, और हम उस पर अधिकार कर लेंगे; जबकि यहोवा वहाँ था;
11 इसलिथे परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, कि मेरे जीवन की सौगन्ध है, मैं तेरे कोप और डाह के अनुसार वैसा ही करूंगा जैसा तू ने अपक्की बैर के कारण उन से किया है; और जब मैं तेरा न्याय कर चुका हूं, तब मैं उनके बीच अपना प्रगट करूंगा।
12 और तू जान लेगा, कि मैं यहोवा हूं, और तेरी सब निन्दा जो तू ने इस्राएल के पहाड़ोंके विषय में कही हैं, सुन ली हैं, कि वे उजाड़ दी गई हैं, वे हम को खा लेने के लिथे दी गई हैं।
13 इस प्रकार तुम ने अपके मुंह से मुझ पर घमण्ड किया है, और मेरे विरुद्ध अपनी बातें बहुत बढ़ाई हैं; मैंने उन्हें सुना है।
14 परमेश्वर यहोवा यों कहता है; जब सारी पृथ्वी आनन्दित होगी, तब मैं तुझे उजाड़ दूंगा।
15 जैसा तू ने इस्राएल के घराने के निज भाग के उजाड़ होने के कारण आनन्द किया या, वैसा ही मैं भी तुझ से करूंगा; हे सेईर पर्वत, और सब इदुमिया, वरन उसका सब कुछ उजाड़ हो जाएगा; और वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं।
अध्याय 36
इस्राएल की भूमि को शान्ति मिली है - इस्राएल को फिर से स्थापित किया जाएगा।
1 फिर हे मनुष्य के सन्तान, इस्राएल के पहाड़ोंसे भविष्यद्वाणी करके कह, हे इस्राएल के पर्वत यहोवा का वचन सुनो;
2 परमेश्वर यहोवा यों कहता है; क्योंकि शत्रु ने तेरे विरुद्ध कहा है, अहा, प्राचीन ऊंचे स्थान भी हमारे अधिकार में हैं;
3 इसलिथे भविष्यद्वाणी करके कह, कि परमेश्वर यहोवा योंकहता है; क्योंकि उन्होंने तुझे उजाड़ कर दिया है, और चारोंओर से निगल लिया है, कि अन्यजातियों के बचे हुए लोगों के अधिकार में रहना, और बातें करने वालों के मुंह में जाना, और लोगों की बदनामी है;
4 इसलिथे हे इस्राएल के पर्वतों, परमेश्वर यहोवा का वचन सुनो; पहाड़ों और पहाड़ियों, नदियों और घाटियों, उजाड़ उजाड़ और छोड़े गए नगरों से, जो चारों ओर की अन्यजातियों के बचे हुए लोगों का शिकार और उपहास बन गए हैं, उन से परमेश्वर यहोवा यों कहता है;
5 इसलिथे परमेश्वर यहोवा योंकहता है; निश्चय ही मैं ने अपक्की जलन की आग में, बचे हुए अन्यजातियोंके विरुद्ध, और उन सब इदुमिया के विरुद्ध कहा है, जिन्होंने मेरे देश को अपके सारे मन के आनन्द के साथ, और द्वेषपूर्ण मन से अपके अधिकार में कर लिया है, कि उसे शिकार के लिथे निकाल दिया जाए।
6 सो इस्त्राएल देश के विषय में भविष्यद्वाणी कर, और पहाड़ोंऔर पहाड़ोंसे, और नदियोंऔर घाटियोंसे कह, परमेश्वर यहोवा योंकहता है; देख, मैं ने अपके जलजलाहट और जलजलाहट में बातें की हैं, क्योंकि तुम ने अन्यजातियोंकी लज्जा उठाई है;
7 इसलिथे परमेश्वर यहोवा योंकहता है, कि मैं ने हाथ उठाया है, निश्चय जो अन्यजातियां तेरे आस पास हैं, वे अपक्की लज्जित होंगी।
8 परन्तु हे इस्राएल के पर्वतों, तुम अपनी डालियां फूंकना, और अपना फल मेरी इस्त्राएलियोंको देना; क्योंकि वे आने वाले हैं।
9 क्योंकि देख, मैं तेरे लिथे हूं, और तेरी ओर फिरूंगा, और तू जोता और बोया जाएगा;
10 और हे इस्राएल के सारे घराने के लिथे मैं तुझ पर बहुत से पुरूष करूंगा; यहां तक कि यह सब; और नगर आबाद होंगे, और उजाड़ बनेंगे;
11 और मैं तुम में मनुष्य और पशु दोनों को बढ़ाऊंगा; और वे बढ़ेंगे और फल लाएंगे; और मैं तुम को तुम्हारे पुराने ठिकाने के अनुसार बसाऊंगा, और तुम्हारे आरम्भ से भी अच्छा करूंगा; और तुम जान लोगे कि मैं यहोवा हूं।
12 वरन मैं अपक्की प्रजा इस्राएल को अपके अपके ऊपर चलने के लिथे चलाऊंगा; और वे तेरे अधिकारी होंगे, और तू उनका निज भाग होगा, और तू उन्हें आगे से मनुष्योंसे न छीनना।
13 परमेश्वर यहोवा यों कहता है; क्योंकि वे तुम से कहते हैं, कि तू ने मनुष्योंको भस्म किया, और अपनी जातियोंको नाश किया है;
14 इसलिथे तू फिर मनुष्योंको न खाया करना, और न अपक्की जातियोंको फिर शोक करना, यहोवा परमेश्वर की यही वाणी है।
15 न तो मैं तुझ में अन्यजातियों की लज्जा फिर मनुष्यों को सुनाऊंगा, और न तुम लोगों की नामधराई फिर सहोगे, और अपनी जातियों को फिर कभी न गिराने दोगे, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
16 फिर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि
17 हे मनुष्य के सन्तान, जब इस्राएल का घराना अपके ही देश में रहता या, तब अपके अपके अपके चालचलन और कामोंसे उसको अशुद्ध किया; उनका मार्ग मेरे साम्हने उस स्त्री की अशुद्धता के समान था।
18 इसलिथे मैं ने उन पर अपक्की जलजलाहट उस लहू के लिथे जो उन्होंने देश पर बहाई या, और उनकी मूरतोंके लिथे जिन से उन्होंने उसको अशुद्ध किया या;
19 और मैं ने उनको अन्यजातियोंमें तित्तर बित्तर दिया, और वे देश देश में तित्तर बित्तर हो गए; मैं ने उनके चालचलन और उनके कामोंके अनुसार उनका न्याय किया।
20 और जब वे अन्यजातियों के पास गए, जहां वे गए थे, तो उन्होंने मेरे पवित्र नाम को अपवित्र किया, जब उन्होंने उन से कहा, ये यहोवा के लोग हैं, और इस देश से निकल गए हैं।
21 परन्तु मुझे अपके पवित्र नाम पर तरस आया, जिसे इस्राएल के घराने ने अन्यजातियोंके बीच जहां वे गए या, अपवित्र किया या।।
22 इसलिथे इस्राएल के घराने से कह, कि परमेश्वर यहोवा योंकहता है; हे इस्राएल के घराने, मैं यह तुम्हारे निमित्त नहीं करता, परन्तु अपने पवित्र नाम के निमित्त करता हूं, जिसे तुम ने अन्यजातियोंके बीच जहां तुम गए थे, अपवित्र किया है।
23 और मैं अपने उस बड़े नाम को पवित्र करूंगा, जो अन्यजातियोंके बीच अपवित्र हुआ या, जिन्हें तुम ने उनके बीच अपवित्र ठहराया; और अन्यजाति तब जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है, जब मैं उनकी आंखोंके साम्हने तुम में पवित्र ठहरूंगा।
24 क्योंकि मैं तुम को अन्यजातियों में से ले कर सब देशों में से इकट्ठा करूंगा, और तुम्हारे निज देश में पहुंचाऊंगा।
25 तब मैं तुम पर शुद्ध जल छिड़कूंगा, और तुम शुद्ध ठहरोगे; मैं तेरी सारी मलिनता से, और तेरी सब मूरतोंमें से तुझे शुद्ध करूंगा।
26 मैं तुझे नया मन दूंगा, और तेरे भीतर नई आत्मा उत्पन्न करूंगा; और मैं तेरे शरीर में से पत्यरी मन को दूर करूंगा, और तुझे मांस का मन दूंगा।
27 और मैं अपना आत्मा तुम्हारे भीतर रखूंगा, और तुम को मेरी विधियों पर चलने के लिए प्रेरित करूंगा, और तुम मेरे नियमों को मानोगे और उन पर चलोगे।
28 और तुम उस देश में रहना जो मैं ने तुम्हारे पुरखाओं को दिया था; और तुम मेरी प्रजा ठहरोगे, और मैं तुम्हारा परमेश्वर ठहरूंगा।
29 मैं तुझे तेरी सारी अशुद्धता से भी छुड़ाऊंगा; और मैं अन्न मांगूंगा, और उसे बढ़ाऊंगा, और तुम पर अकाल न डालूंगा।
30 और मैं वृक्ष के फल और खेत की उपज को बढ़ाऊंगा, कि अन्यजातियोंके बीच तुम अकाल की नामधराई फिर न पाओगे।
31 तब तुम अपके अपके बुरे कामोंको, और अपके उन कामोंको जो अच्छे न थे स्मरण करना, और अपके अधर्म के कामोंऔर घिनौने कामोंके कारण अपके साम्हने अपने आप से घृणा करना।
32 परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, मैं यह तेरे निमित्त नहीं करता, क्या यह तुझे मालूम हो; हे इस्राएल के घराने, लज्जित हो और अपक्की चालचलन के कारण लज्जित हो।
33 परमेश्वर यहोवा यों कहता है; जिस दिन मैं तुझे तेरे सब अधर्म के कामों से शुद्ध करूंगा, तब भी मैं तुझे नगरों में बसाऊंगा, और उजाड़ बनाया जाएगा।
34 और उजाड़ देश जोताई किया जाएगा, और वह सब आने जानेवालोंके साम्हने उजाड़ पड़ा रहेगा।
35 और वे कहेंगे, यह देश जो उजाड़ था, अदन की बारी के समान हो गया है; और उजाड़ और उजाड़ और उजड़े हुए नगर चारों ओर से घेरे हुए और आबाद हो गए हैं।
36 तब जो अन्यजातियां तेरे आस पास रह जाएंगी, वे जान लेंगी, कि मैं यहोवा खण्डहरोंको गढ़ता, और उजाड़ को रोपता हूं; मैं यहोवा ने यह कहा है, और मैं इसे करूंगा।
37 परमेश्वर यहोवा यों कहता है; इस्राएल का घराना मुझ से इसलिथे अब भी पूछ लेगा, कि उनके लिथे यह करूं; मैं उन्हें झुण्ड के समान मनुष्यों के साथ बढ़ाऊँगा।
38 पवित्र भेड़-बकरियों की नाईं यरूशलेम की भेड़-बकरियों की नाईं उसके पर्वों में; इस प्रकार उजड़े हुए नगर मनुष्यों की भेड़-बकरियों से भर जाएंगे; और वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं।
अध्याय 37
इज़राइल का पुनरुत्थान - दो लाठी - इज़राइल से वादा करता है।
1 यहोवा का हाथ मुझ पर था, और यहोवा के आत्मा में मुझे उठाकर हड्डियोंसे भरी तराई के बीच में बैठा दिया,
2 और मुझे उनके पास से इधर-उधर घुमाया; और देखो, खुली तराई में बहुत थे; और, देखो, वे बहुत शुष्क थे।
3 उस ने मुझ से कहा, हे मनुष्य के सन्तान, क्या ये हड्डियां जीवित रह सकती हैं? और मैं ने उत्तर दिया, हे परमेश्वर यहोवा, तू जानता है।
4 फिर उस ने मुझ से कहा, इन हड्डियोंके विषय में भविष्यद्वाणी करके उन से कह, हे सूखी हड्डियों, यहोवा का वचन सुनो।
5 परमेश्वर यहोवा इन हड्डियों से यों कहता है; देख, मैं तुझ में श्वास भरूंगा, और तू जीवित रहेगा;
6 और मैं तुम पर नसें लगाऊंगा, और तुम पर मांस लाऊंगा, और तुम को खाल से ढांपूंगा, और तुम में फूंक लूंगा, तब तुम जीवित रहोगे; और तुम जान लोगे कि मैं यहोवा हूं।
7 इस प्रकार मैं ने आज्ञा के अनुसार भविष्यद्वाणी की; और जैसा मैं नबूवत कर रहा था, तब एक कोलाहल हुआ, और क्या देखा कि एक कंपकंपी हुई, और हड्डियां आपस में जुड़ गईं, और उसकी हड्डी से हड्डी लग गई।
8 और जब मैं ने देखा, तो क्या देखा, कि नसें और मांस उन पर चढ़ गए, और चमड़े ने उन को ऊपर से ढांप दिया, परन्तु उन में श्वास न रही।
9 तब उस ने मुझ से कहा, हे मनुष्य के सन्तान, वायु से भविष्यद्वाणी कर, और वायु से कह, परमेश्वर यहोवा योंकहता है; चार हवाओं से आओ, हे सांस, और इन मारे गए लोगों पर सांस लो, कि वे जीवित रह सकते हैं।
10 तब मैं ने उस की आज्ञा के अनुसार भविष्यद्वाणी की, और उन में श्वास भर गया, और वे जीवित रहे, और अपने पांवोंके बल खड़े हो गए, जो एक बहुत बड़ी सेना है।
11 तब उस ने मुझ से कहा, हे मनुष्य के सन्तान, इस्राएल का सारा घराना ये हडि्डयां हैं; देखो, वे कहते हैं, कि हमारी हडि्डयां सूख गई हैं, और हमारी आशा टूट गई है; हम अपने हिस्से के लिए कटे हुए हैं।
12 इसलिथे भविष्यद्वाणी करके उन से कह, परमेश्वर यहोवा योंकहता है; देख, हे मेरी प्रजा, मैं तेरी कबरें खोलूंगा, और तुझे अपक्की कब्रोंमें से निकालकर इस्राएल देश में पहुंचाऊंगा।
13 और हे मेरी प्रजा, जब मैं तेरी कबरें खोलकर तुझे अपक्की कब्रोंमें से निकाल ले आऊंगा, तब तुम जान लोगे कि मैं यहोवा हूं।
14 और अपना आत्मा तुम में डालूंगा, और तुम जीवित रहोगे, और मैं तुम्हें तुम्हारे निज देश में रखूंगा; तब तुम जान लोगे कि मैं यहोवा ने यह कहा, और किया है, यहोवा की यही वाणी है।
15 यहोवा का यह वचन फिर मेरे पास पहुंचा, कि,
16 फिर हे मनुष्य के सन्तान, एक लाठी लेकर उस पर यहूदा और उसके संगी इस्राएलियोंके लिथे लिख; तब एक और छड़ी ले, और उस पर यूसुफ के लिथे एप्रैम की छड़ी, और उसके संगी इस्राएल के सारे घराने के लिथे लिख;
17 और उन को आपस में मिलाओ, और एक ही लाठी बनाओ; और वे तेरे हाथ में एक हो जाएंगे।
18 और जब तेरी प्रजा के लोग तुझ से कहें, कि क्या तू हमें न बताएगा, कि इन से तेरा क्या अभिप्राय है?
19 उन से कहो, परमेश्वर यहोवा यों कहता है; देख, मैं यूसुफ की उस छड़ी को, जो एप्रैम के हाथ में है, और इस्राएल के गोत्रोंके गोत्रोंके लोगोंको, वरन यहूदा की छड़ी समेत उसके संग रखूंगा, और उनके लिये एक ही छड़ी बनाऊंगा, और वे मेरे हाथ में एक।
20 और वे लाठियां जिन पर तू लिखे, उनकी आंखोंके साम्हने तेरे हाथ में रहे।
21 और उन से कहो, परमेश्वर यहोवा योंकहता है; देख, मैं इस्राएलियोंको अन्यजातियोंमें से जहां वे जाएंगे, वहां से ले जाऊंगा, और चारोंओर से इकट्ठा करूंगा, और उनके निज देश में पहुंचाऊंगा;
22 और मैं इस्राएल के पहाड़ोंपर के देश में उन से एक जाति बनाऊंगा; और उन सब का राजा एक ही राजा होगा; और वे फिर दो जातियां न होंगी, और न वे फिर कभी दो राज्यों में विभाजित होंगी;
23 न तो वे अपक्की मूरतोंसे, और न अपके घिनौने कामोंके द्वारा, और न अपके किसी अपराध से अपके आप को अशुद्ध करेंगे; परन्तु मैं उनको उनके सब निवास स्यानोंमें से जहां उन्होंने पाप किया या, उनका उद्धार करूंगा, और उन्हें शुद्ध करूंगा; उसी प्रकार वे मेरी प्रजा ठहरेंगे, और मैं उनका परमेश्वर ठहरूंगा।
24 और मेरा दास दाऊद उनका राजा होगा; और उन सबका एक ही चरवाहा हो; वे मेरे नियमों पर चलेंगे, और मेरी विधियों को मानेंगे, और उन पर चलेंगे।
25 और उस देश में जो मैं ने अपके दास याकूब को दिया या, जिस में तेरे पुरखा रहते या, बसेंगे; और वे, और उनकी सन्तान, और उनकी सन्तान भी उस में सदा बसे रहेंगे; और मेरा दास दाऊद सदा उनका प्रधान बना रहेगा।
26 और मैं उनके साथ मेल की वाचा बान्धूंगा; वह उनके साथ सदा की वाचा ठहरेगी; और मैं उन्हें रखूंगा, और बढ़ाऊंगा, और उनके बीच में अपना पवित्रस्थान सदा के लिथे स्थिर करूंगा।
27 मेरा तम्बू भी उनके संग रहेगा; हां, मैं उनका परमेश्वर ठहरूंगा, और वे मेरे लोग होंगे ।
28 और जब मेरा पवित्रस्थान उनके बीच में सदा बना रहेगा तब तक अन्यजाति लोग जान लेंगे कि मैं यहोवा इस्राएल को पवित्र करता हूं।
अध्याय 38
गोग की सेना — उसके विरुद्ध परमेश्वर का न्याय।
1 और यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि,
2 हे मनुष्य के सन्तान, मेशेक और तूबल के प्रधान मागोग देश गोग के साम्हने अपना मुंह कर, और उसके विरुद्ध भविष्यद्वाणी कर,
3 और कहो, परमेश्वर यहोवा योंकहता है; हे गोग, मेशेक और तूबल के प्रधान, देख, मैं तेरे विरुद्ध हूं;
4 और मैं तुझे लौटा दूंगा, और तेरे जबड़ोंमें काँटे लगाऊंगा, और तेरी सारी सेना, और घोड़े, और सवार, जो सब प्रकार के हथियार पहिने हुए हैं, और एक बड़ी मण्डली, जिसके पास ढालें और ढालें हैं, तुझे ले आऊंगा। वे सब तलवारें संभालते हुए;
5 उनके संग फारस, कूश और लीबिया; वे सब के सब ढाल और टोप लिये हुए;
6 गोमेर और उसके सब दल; उत्तर दिशा के तोगर्मा का घराना, और उसके सब दल; और आपके साथ बहुत से लोग।
7 और अपक्की सारी मण्डली समेत जो अपक्की इकट्ठी हैं, तैयारी कर, और उन के पहरेदार बन।
8 बहुत दिन के बाद तेरी सुधि ली जाएगी; अन्त के वर्षों में तू उस देश में जो तलवार से फेर लाया गया है, और बहुत से लोगोंमें से इस्राएल के पहाड़ोंपर जो सदा उजाड़ पड़ा है, इकट्ठा किया जाएगा, उस में प्रवेश करना; परन्तु वह अन्यजातियों में से निकल आया है, और वे सब के सब निडर बसेंगे।
9 तू उठकर आँधी की नाईं आ जाएगा, तू बादल के समान हो जाएगा कि तू देश को ढांप ले, और अपके सब दल, और बहुत से लोग जो तेरे संग हैं।
10 परमेश्वर यहोवा यों कहता है; ऐसा भी होगा, कि उसी समय तेरे मन में बातें आएंगी, और तू बुरा विचार करेगा;
11 और तू कहना, मैं बिना शहरपनाह वाले गांवोंके देश पर चढ़ाई करूंगा; मैं उनके पास जाऊँगा जो विश्राम में हैं, जो निडर रहते हैं, वे सब बिना शहरपनाह के रहते हैं, और जिनके पास न बेंड़े हैं और न फाटक,
12 लूट लेना, और लूट लेना; अपना हाथ उन उजाड़ स्थानों पर जो अब बसे हुए हैं, और उन लोगों पर जो अन्यजातियों में से इकट्ठे हुए हैं, जिन्होंने पशु और माल प्राप्त किया है, जो देश के बीच में रहते हैं।
13 शबा, ददान, और तर्शीश के व्योपारी, और उसके सब जवान सिंहों समेत तुझ से कहेंगे, क्या तू लूट लेने आया है? क्या तू ने अपक्की मण्डली को अहेर करने को इकट्ठी की है? चाँदी और सोना ले जाने के लिए, गाय-बैल और माल ले जाने के लिए, एक बड़ी लूट लेने के लिए?
14 इसलिथे हे मनुष्य के सन्तान, भविष्यद्वाणी करके गोग से कह, परमेश्वर यहोवा योंकहता है; उस दिन जब मेरी इस्राएली प्रजा निडर बसेगी, तब क्या तू उसे न जान सकेगा?
15 और तू अपके स्थान से उत्तर दिशा से निकलेगा, और बहुत से लोग जो तेरे संग हैं, वे सब के सब घोड़ोंपर सवार, और बड़ी मण्डली, और एक शक्तिशाली सेना है;
16 और तू मेरी इस्त्राएलियोंके साम्हने उस बादल की नाईं चढ़ाई करेगा, जिस से देश ढंप जाएगा; वह अन्त के दिनों में होगा, और मैं तुझे अपके देश पर चढ़ाई कराऊंगा, कि अन्यजाति मुझे जानेंगे, जब हे गोग, मैं तेरे कारण उनकी आंखोंके साम्हने पवित्र ठहरूंगा।
17 परमेश्वर यहोवा यों कहता है; क्या तू वही है जिसके विषय में मैं ने पुराने समय में अपके दास इस्राएल के भविष्यद्वक्ताओंके द्वारा कहा या, जो उन दिनोंमें बहुत वर्ष तक भविष्यद्वाणी करते थे, कि मैं तुझे उनके विरुद्ध ले आऊंगा?
18 और जब गोग इस्राएल के देश पर चढ़ाई करेगा, तब परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है, कि मेरी जलजलाहट मेरे मुंह पर भड़क उठेगी।
19 क्योंकि मैं ने अपके जलजलाहट और जलजलाहट की आग में कहा है, निश्चय उस समय इस्राएल देश में बड़ा कंपकंपी होगी;
20 और समुद्र की मछलियां, और आकाश के पक्षी, और मैदान के पशु, और सब रेंगनेवाले जन्तु जो पृय्वी पर रेंगते हैं, और जितने मनुष्य पृय्वी पर हैं वे सब मेरे कारण कांप उठेंगे। उपस्थिति, और पहाड़ों को गिरा दिया जाएगा, और खड़ी जगह गिर जाएगी, और हर दीवार जमीन पर गिर जाएगी।
21 और मैं अपके सब पहाड़ोंमें उसके विरुद्ध तलवार बुलवाऊंगा, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है; हर एक की तलवार उसके भाई पर लगेगी।
22 और मैं मरी और लोहू से उस से बिनती करूंगा; और मैं उस पर, और उसके बन्धुओं पर, और बहुत से लोगों पर जो उसके संग हैं, वर्षा करूंगा, और बड़े बड़े ओले, आग और गन्धक बरसाऊंगा।
23 इस प्रकार मैं अपनी बड़ाई करूंगा, और अपने आप को पवित्र करूंगा; और बहुत सी जातियों की दृष्टि में मेरी पहचान होगी, और वे जानेंगे कि मैं यहोवा हूं।
अध्याय 39
गोग पर परमेश्वर का न्याय — इस्राएल की विजय — इस्राएल इकट्ठा होगा।
1 इसलिथे हे मनुष्य के सन्तान, गोग के विषय में भविष्यद्वाणी करके कह, कि परमेश्वर यहोवा योंकहता है; हे गोग, मेशेक और तूबल के प्रधान, देख, मैं तेरे विरुद्ध हूं;
2 और मैं तुझ को फेरकर छठवें भाग को छोड़ कर छोड़ दूंगा, और उत्तर दिशा से तुझे ले आऊंगा, और इस्राएल के पहाड़ोंपर पहुंचाऊंगा;
3 और मैं तेरे धनुष को तेरे बायें हाथ से मारूंगा, और तेरे तीरोंको तेरे दहिने हाथ से गिराऊंगा।
4 तू इस्राएल के पहाड़ोंपर, और अपके सब दल वरन अपने संग के लोगोंपर गिर पड़ेगा; मैं तुझे सब प्रकार के उबड़-खाबड़ पक्षियों, और मैदान के जानवरों को खा जाने के लिए दे दूंगा।
5 तू खुले मैदान में गिर पड़ेगा; क्योंकि मैं ने यह कहा है, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
6 और मैं मागोग में, और द्वीपोंमें लापरवाह रहनेवालोंमें से आग भेजूंगा; और वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं।
7 इस प्रकार मैं अपक्की प्रजा इस्राएल के बीच में अपना पवित्र नाम प्रगट करूंगा; और मैं उन्हें अपना पवित्र नाम फिर अशुद्ध न करने दूंगा; और अन्यजाति लोग जान लेंगे कि मैं यहोवा, इस्राएल का पवित्र हूं।
8 देख, आ गया, और हो गया, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है; यह वह दिन है जिसके विषय में मैं ने बात की है।
9 और इस्राएल के नगरोंमें रहनेवाले निकलकर आग लगाकर अस्त्रों, ढालोंऔर बन्धनों, धनुष और तीरों, और डंडों, और भालोंको आग लगाकर जला देंगे, और वे सात वर्ष तक उन्हें आग में जला देना;
10 ऐसा न हो कि वे मैदान में से लकड़ियां उठाएं, और न वनोंमें से किसी को काटे; क्योंकि वे शस्त्रोंको आग से जला देंगे; और वे अपके लूटनेवालोंको लूट लेंगे, और लूटनेवालोंको लूटेंगे, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
11 और उस समय मैं गोग को इस्राएल में कब्रों का स्थान दूंगा, जो समुद्र के पूर्व की ओर यात्रियों की तराई है; और वह यात्रियों की नाक बंद कर देगा; और वहां वे गोग और उसकी सारी भीड़ को मिट्टी देंगे; और वे उसका नाम हामोनगोग की तराई कहेंगे।
12 और इस्राएल का घराना सात महीने तक उनको मिट्टी देगा, कि वे देश को शुद्ध करें।
13 हां, देश के सब लोग उनको मिट्टी देंगे; और जिस दिन मेरी महिमा होगी उस दिन उनकी ख्याति होगी, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
14 और वे देश में से होकर जानेवाले नित्य काम करनेवालोंको अलग करें, कि वे पृय्वी पर के रहनेवालोंके संग मिट्टी दें, कि उसको शुद्ध करें; वे सात महीने के अंत के बाद खोज करेंगे।
15 और जो यात्री उस देश में से होकर जाएं, जब कोई मनुष्य की हड्डी देखे, तब वह उसके पास एक चिन्ह खड़ा करे, जब तक कि गाड़ने वाले उसे हामोनगोग की तराई में गाड़ न दें।
16 और नगर का नाम हमोना भी होगा। इस प्रकार वे भूमि को शुद्ध करेंगे।
17 और, हे मनुष्य के सन्तान, परमेश्वर यहोवा यों कहता है; सब पंछियों, और मैदान के सब पशुओं से कहो, तुम इकट्ठे हो कर आओ; मेरे बलिदान के लिये चारों ओर से अपने आप को इकट्ठा करो, कि मैं तुम्हारे लिए बलिदान करता हूं, यहां तक कि इस्राएल के पहाड़ों पर एक महान बलिदान, कि तुम मांस खा सकते हो और खून पी सकते हो।
18 तुम शूरवीरों का मांस खाओगे, और पृय्वी के हाकिमों, मेढ़ों, मेमनों, और बकरों, और बैलों, सब के सब बाशान के मोटे पशुओं का लोहू पीओगे।
19 और जब तक तुम तृप्त न हो जाओ तब तक चर्बी खाओगे, और मेरे उस बलिदान में से जो मैं ने तुम्हारे लिथे बलिदान किया है, मतवाले होने तक लोहू पीओ।
20 इस प्रकार तुम मेरी मेज पर घोड़ों और रथों, और शूरवीरों, और सब योद्धाओं से तृप्त हो जाओगे, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
21 और मैं अन्यजातियोंके बीच अपनी महिमा प्रगट करूंगा, और सब अन्यजाति मेरे न्याय को जो मैं ने किया है, और अपना हाथ जो मैं ने उन पर रखा है, देखेंगे।
22 तब इस्राएल का घराना जान लेगा कि उस दिन से लेकर आगे तक मैं उनका परमेश्वर यहोवा हूं।
23 और अन्यजाति लोग जान लेंगे कि इस्राएल का घराना अपके अधर्म के कारण बन्धुआई में गया; क्योंकि उन्होंने मेरा अपराध किया, इसलिथे मैं ने उन से अपना मुंह फेर लिया, और उन्हें उनके शत्रुओं के वश में कर दिया; सो वे सब तलवार से मारे गए।
24 मैं ने उनकी अशुद्धता और उनके अपराधोंके अनुसार उन से किया है, और उन से अपना मुंह फेर लिया है।
25 इसलिथे परमेश्वर यहोवा योंकहता है, अब मैं याकूब की बन्धुआई में फिर लाऊंगा, और इस्राएल के सारे घराने पर दया करूंगा, और अपके पवित्र नाम के लिथे डाह करूंगा;
26 इसके बाद जब वे अपके देश में निडर रहते थे, तब वे अपक्की लज्जा, और अपके सब अपराधोंके कारण जो उन्होंने मेरे विरुद्ध किए या, और किसी ने उनको न डराया।
27 जब मैं उन्हें लोगोंके पास से फिर ले आया, और उनके शत्रुओं के देश में से इकट्ठा करके बहुत सी जातियोंके साम्हने उन में पवित्र किया गया हूं;
28 तब वे जानेंगे कि मैं उनका परमेश्वर यहोवा हूं, जिस ने उन्हें अन्यजातियों के बीच बंधुआई में डाल दिया; परन्तु मैं ने उनको उनके निज देश में इकट्ठा किया है, और उन में से किसी को भी वहां नहीं छोड़ा।
29 और मैं फिर उन से अपना मुंह न छिपाऊंगा; क्योंकि मैं ने अपना आत्मा इस्राएल के घराने पर उण्डेला है, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
अध्याय 40
शहर और मंदिर का दर्शन।
1 हमारी बंधुआई के पच्चीसवें वर्ष के आरम्भ में, महीने के दसवें दिन में, उसके बाद चौदहवें वर्ष में, जब नगर पर विजय प्राप्त हुई, उसी दिन यहोवा का हाथ मुझ पर था। और मुझे वहाँ ले आया।
2 परमेश्वर के दर्शन के अनुसार वह मुझे इस्राएल के देश में ले गया, और मुझे एक बहुत ऊंचे पहाड़ पर खड़ा किया, जिसके पास दक्खिन की ओर एक नगर का ढाँचा था।
3 और वह मुझे वहां ले गया, और क्या देखा, कि एक मनुष्य का रूप पीतल का सा था, और उसके हाथ में सन की डोरी, और नापने का सरकण्डा था; और वह फाटक में खड़ा हो गया।
4 उस ने मुझ से कहा, हे मनुष्य के सन्तान, अपनी आंखों से देख, और कानों से सुन, और जो कुछ मैं तुझे दिखाऊं उस पर अपना मन लगा; क्योंकि इसलिथे कि तू यहां लाए गए हैं, कि मैं उन्हें तुझ को दिखाऊं; जो कुछ तू ने देखा है, वह सब इस्राएल के घराने को बता।
5 और देखो, भवन के बाहर चारोंओर एक शहरपनाह है, और उस मनुष्य के हाथ में एक हाथ में छ: हाथ का एक नाप और एक हाथ की चौड़ाई है; तब उस ने भवन की चौड़ाई एक ही सरकण्डा नापी; और ऊंचाई, एक ईख।
6 तब वह उस फाटक के पास आया, जो पूर्व की ओर है, और उसकी सीढ़ियों पर चढ़कर उस फाटक की डेवढ़ी को नाप लिया, जो एक सरकण्डा चौड़ा था; और फाटक की दूसरी दहलीज, जो एक सरकण्डा चौड़ा था।
7 और हर एक कोठरी की लम्बाई एक सरकण्डी, और एक सरकण्ड चौड़ी थी; और छोटी कोठरियों के बीच पांच हाथ थे; और भीतर फाटक के ओसारे के पास फाटक की डेवढ़ी एक ही सरकण्डा या।
8 उस ने भीतर के फाटक के ओसारे को भी नापा, अर्थात एक ही सरकण्डा।
9 फिर उस ने फाटक के ओसारे को नापा, जो आठ हाथ का हो; और उसके खम्भे भी दो हाथ के हों; और फाटक का ओसारे भीतर की ओर था।
10 और फाटक की पूर्व की ओर की छोटी कोठरियां इस ओर तीन, और तीन उस ओर थीं; वे तीनों एक ही नाप के थे; और खम्भों की इस ओर और उस ओर एक नाप था।
11 और उस ने फाटक के द्वार की चौड़ाई दस हाथ मापी; और फाटक की लम्बाई तेरह हाथ की हो।
12 और उस अलंग की कोठरियोंके साम्हने एक हाथ और उस अलंग की ओर भी एक हाथ का स्थान था; और छोटी कोठरियां इस ओर छ: हाथ की और उस अलंग की छ: हाथ की थीं।
13 तब उस ने फाटक की एक छोटी सी कोठरी की छत से लेकर दूसरे की छत तक नाप लिया; चौडाई पच्चीस हाथ की थी, और किवाड़ द्वार के साम्हने था।
14 उस ने फाटक के चारोंओर आंगन के खम्भे तक भी साठ हाथ के खम्भे बनाए।
15 और फाटक के साम्हने से भीतरी फाटक के ओसारे के साम्हने तक पचास हाथ थे।
16 और छोटी कोठरियोंके लिथे और उनके खम्भोंके चारोंओर फाटक के भीतर, और इसी प्रकार मेहराबोंतक भी संकरी खिड़कियाँ थीं; और खिड़कियाँ भीतर की ओर गोल थीं; और एक एक खम्भे पर खजूर के पेड़ थे।
17 तब वह मुझे बाहर के आंगन में ले गया, और क्या देखो, आंगन के चारोंओर कोठरियां, और फुटपाथ बने हैं; फुटपाथ पर तीस कक्ष थे।
18 और फाटकों की एक ओर का फुटपाथ फाटकों की लंबाई के साम्हने नीचे का फुटपाथ था।
19 तब उस ने नीचे के फाटक के आगे से भीतरी आंगन के आगे के भाग तक की चौड़ाई को पूर्व और उत्तर की ओर सौ हाथ नाप लिया।
20 और उस बाहरी आंगन के फाटक का जो उत्तर की ओर देखता या, उस ने उसकी लम्बाई और चौड़ाई नाप ली।
21 और उसकी छोटी-सी कोठरियां तीन इस ओर और तीन उस अलंग की ओर थीं; और उसके खम्भे और उसके मेहराब पहिले फाटक के नाप के अनुसार हों; उसकी लम्बाई पचास हाथ और चौड़ाई पच्चीस हाथ की थी।
22 और उनकी खिड़कियाँ, और उनके मेहराब, और खजूर के वृक्ष उस फाटक के नाप के अनुसार थे, जो पूर्व की ओर है; और वे उस तक सात सीढ़ियां चढ़ गए; और उसके मेहराब उनके साम्हने थे।
23 और भीतरी आंगन का फाटक उत्तर की ओर, और पूर्व की ओर फाटक के साम्हने था; और उस ने फाटक से फाटक तक सौ हाथ नाप लिया।
24 इसके बाद वह मुझे दक्खिन की ओर ले गया, और क्या देखा, कि दक्खिन की ओर एक फाटक है; और उस ने उसके खम्भोंऔर उसके मेहराबोंको इन नापोंके अनुसार नापा।
25 और उस में और उसके चारोंओर के मेहराबोंमें उन खिड़कियोंके समान खिड़कियाँ थीं; उसकी लम्बाई पचास हाथ और चौड़ाई पच्चीस हाथ की थी।
26 और उस तक जाने के लिये सात सीढ़ियां बनीं, और उनके आगे उसके मेहराब बने रहे; और उसके खम्भों पर खजूर के पेड़ थे, एक उस ओर, और दूसरा उस ओर।
27 और भीतरी आंगन में दक्खिन की ओर एक फाटक था; और उस ने फाटक से दक्खिन की ओर सौ हाथ नाप लिया।
28 और वह मुझे दक्खिन फाटक के भीतरी आंगन में ले गया; और उस ने दक्खिन फाटक को इन नापोंके अनुसार नापा;
29 और उसकी सब कोठरियां, और उसके खम्भे, और उसके मेहराब, इन नापोंके अनुसार; और उस में खिड़कियाँ, और उसके चारोंओर मेहराबोंमें; वह पचास हाथ लम्बा और पच्चीस हाथ चौड़ा था।
30 और चारोंओर की मेहराबें पच्चीस हाथ लंबी और पांच हाथ चौड़ी थीं।
31 और उसके मेहराब बाहरी आंगन की ओर थे; और उसके खम्भों पर खजूर के पेड़ थे; और उस तक जाने में आठ सीढ़ियाँ थीं।
32 और वह मुझे भीतरी आंगन में पूर्व की ओर ले गया; और उसने इन उपायों के अनुसार फाटक को नापा।
33 और उसकी सब कोठरियां, और उसके खम्भे, और उसके मेहराब इन नापोंके अनुसार बने; और उसके चारोंओर खिड़कियाँ और उसके मेहराबोंमें थे; वह पचास हाथ लम्बा और पच्चीस हाथ चौड़ा था।
34 और उसके मेहराब बाहरी आंगन की ओर थे; और उसके खम्भों पर, इस ओर, और उस अलंग पर खजूर के वृक्ष थे; और उस तक जाने में आठ सीढ़ियाँ थीं।
35 और वह मुझे उत्तरी फाटक पर ले गया, और इन नापोंके अनुसार नाप लिया;
36 उसकी सब कोठरियां, और उसके खम्भे, और उसके मेहराब, और उसके चारोंओर की खिड़कियाँ; उसकी लम्बाई पचास हाथ और चौड़ाई पच्चीस हाथ की थी।
37 और उसके खम्भे बाहरी आंगन की ओर थे; और उसके खम्भों पर, इस ओर, और उस अलंग पर खजूर के वृक्ष थे; और उस तक जाने में आठ सीढ़ियाँ थीं।
38 और कोठरियां और उसके द्वार फाटकोंके खम्भोंके पास थे, जहां वे होमबलि को धोते थे।
39 और फाटक के ओसारे में इस अलंग की दो मेजें, और उस अलंग पर दो मेजें थीं, कि उस पर होमबलि और पापबलि और अतिचार की बलि चढ़ाएं।
40 और बाहर की अलंग में जैसे कोई उत्तरी फाटक के द्वार पर चढ़ता है, वे दो मेजें थीं; और दूसरी ओर, जो फाटक के ओसारे पर थी, वे दो मेजें थीं।
41 इस अलंग में चार मेजें, और चार मेजें फाटक के पास उस ओर थीं; आठ मेजें, जिन पर उन्होंने अपके बलि चढ़ाए।
42 और वे चारों पटिया होमबलि के लिथे तराशे हुए पत्यर के बने, जो डेढ़ हाथ लम्बे, और डेढ़ हाथ चौड़े, और एक हाथ ऊंचे हों; तब उन्होंने होमबलि और मेलबलि को घात करनेवाले साज-सामान भी रखे।
43 और भीतर चारोंओर बन्धी हुई एक घुंडी, एक हाथ चौड़ा था; और मेजों पर भेंट का मांस था।
44 और भीतरी फाटक के बाहर भीतरी आंगन में गवैयोंकी कोठरियां थीं, जो उत्तरी फाटक की अलंग पर थीं; और उनकी दृष्टि दक्खिन की ओर थी; एक पूर्वी फाटक की एक ओर, जिसका मुख उत्तर की ओर है।
45 उस ने मुझ से कहा, यह कोठरी, जिसका मुंह दक्खिन की ओर है, भवन के प्रधान याजकोंके लिथे है।
46 और जिस कोठरी की उत्तर दिशा की ओर है, वह वेदी की रखवाली करनेवाले याजकोंके लिथे ठहरे; लेवी की सन्तान में से सादोक के पुत्र ये ही हैं, जो यहोवा की सेवा टहल करने के लिथे उसके निकट आते हैं।
47 तब उस ने आंगन को नापा, जो सौ हाथ लम्बा, और सौ हाथ चौड़ा, और चौखट था; और वेदी जो घर के साम्हने थी।
48 और वह मुझे भवन के ओसारे में ले गया, और ओसारे के एक एक खम्भे को इस अलंग में पांच हाथ, और उस अलंग की ओर पांच हाथ नापा; और फाटक की इस ओर की चौड़ाई तीन हाथ, और उस ओर तीन हाथ की हो।
49 ओसारे की लम्बाई बीस हाथ और चौड़ाई ग्यारह हाथ की थी; और वह मुझे उन सीढ़ियों से ले आया जहां से वे उस पर चढ़े थे; और खम्भों के पास खम्भे थे, एक इस ओर, और दूसरा उस ओर।
अध्याय 41
मंदिर के उपाय, भाग, कक्ष और आभूषण।
1 फिर वह मुझे मन्दिर में ले गया, और खम्भोंको एक ओर से छ: हाथ चौड़ा और दूसरी ओर छ: हाथ चौड़ा किया, जो निवास की चौड़ाई या।
2 और द्वार की चौड़ाई दस हाथ की या; और द्वार की एक अलंग पांच हाथ की और दूसरी ओर पांच हाथ की थी; और उस ने उसकी लम्बाई मापी, चालीस हाथ और चौड़ाई बीस हाथ की।
3 तब उस ने भीतर जाकर द्वार के खम्भे को दो हाथ नाप लिया; और द्वार छ: हाथ का; और द्वार की चौड़ाई सात हाथ की हो।
4 तब उस ने उसकी लम्बाई मापी, वह बीस हाथ की थी; और उसकी चौड़ाई भवन के साम्हने बीस हाथ की हो; और उस ने मुझ से कहा, यह परमपवित्र स्थान है।
5 और भवन की शहरपनाह नापने के बाद वह छ: हाथ का हो; और चारोंओर चारोंओर चारोंओर की कोठरियोंकी चौड़ाई चार हाथ की हो।
6 और अगल-बगल के कोठरियां तीन एक के ऊपर एक, और तीस एक क्रम में थीं; और वे उस शहरपनाह में, जो चारोंओर की कोठरियोंके भवन की थी, में घुसे
के बारे में, कि वे पकड़ सकते थे, लेकिन उन्होंने घर की शहरपनाह में नहीं रखा था।
7 और अलंगों की कोठरियों तक चारोंओर ऊपर की ओर एक चौड़ा, और एक घुमावदार झोंका था; क्योंकि भवन का घेरा भवन के चारोंओर ऊपर की ओर जाता था; इसलिथे भवन की चौड़ाई अब भी ऊपर की ओर थी, और इस प्रकार नीचे की कोठरी से बीच में ऊंचे स्थान तक बढ़ती गई।
8 मैं ने भवन की चारोंओर की ऊंचाई भी देखी; बगल की कोठरियों की नेव छ: बड़े हाथ के पूरे सरकण्डे थे।
9 दीवार की मोटाई, जो अलंग की कोठरी के बाहर की थी, वह पांच हाथ की या; और जो कुछ रह गया वह भीतर की कोठरियों का स्थान था।
10 और कोठरियों के बीच में भवन की चारों ओर बीस हाथ की चौड़ाई थी।
11 और अगल-बगल की कोठरियों के द्वार उस स्थान की ओर थे जो उस स्थान की ओर था, एक द्वार उत्तर की ओर, और दूसरा द्वार दक्षिण की ओर; और जो स्थान बचा था उसकी चौड़ाई चारोंओर पांच हाथ की थी।
12 जो भवन उस अलग स्यान के आगे पच्छिम की ओर था, वह सत्तर हाथ चौड़ा था; और भवन की शहरपनाह चारोंओर पांच हाथ मोटी और उसकी लंबाई नब्बे हाथ की या।
13 तब उस ने भवन को नापा, जो सौ हाथ लम्बा या; और अलग स्यान, और भवन, और उसकी शहरपनाह समेत सौ हाथ लम्बा;
14 और भवन के मुख की चौड़ाई और अलग स्थान की पूर्व की ओर सौ हाथ हो।
15 और उस ने भवन की लम्बाई उस अलग स्यान के साम्हने, जो उसके पीछे था, और उसके अलंगोंकी एक ओर और दूसरी अलंग की लम्बाई मापी, और भीतरी भवन और आंगन के ओसारे भी सौ हाथ थे;
16 चौखट, और संकरी खिड़कियाँ, और उनके चारोंओर तीन मंजिलोंके अलंकार, द्वार के साम्हने, और चारोंओर काठ से, और भूमि से लेकर खिड़कियों तक, और खिड़कियाँ ढँकी हुई थीं;
17 उस तक द्वार के ऊपर, अर्यात् भीतरी भवन तक, और बाहर तक, और भीतर और बाहर चारोंओर की शहरपनाह तक, नाप के द्वारा।
18 और वह करूबों और खजूरोंसे ऐसा बनाया गया, कि करूब और करूब के बीच में एक खजूर का वृझ बना या; और हर एक करूब के दो मुख थे;
19 और मनुष्य का मुख एक ओर के खजूर के पेड़ की ओर, और जवान सिंह का मुंह दूसरी ओर के खजूर के पेड़ की ओर हो; यह चारों ओर से घर के चारों ओर बनाया गया था।
20 भूमि से ऊपर द्वार तक करूब और खजूर के वृक्ष बने हुए थे, और भवन की शहरपनाह पर भी बने थे।
21 भवन के खम्भोंको चौकोर बनाया गया, और पवित्रस्थान का मुख बनाया गया; एक की उपस्थिति दूसरे की उपस्थिति के रूप में।
22 और लकड़ी की वेदी तीन हाथ ऊंची, और उसकी लंबाई दो हाथ की या; और उसके कोने, और उसकी लम्बाई, और उसकी शहरपनाह लकड़ी के बने; और उस ने मुझ से कहा, यह वह मेज़ है जो यहोवा के साम्हने है।
23 और मन्दिर और पवित्रस्थान के दो द्वार थे।
24 और किवाड़ों में दो दो पत्ते थे, और दो मुड़ने वाले पत्ते थे; एक दरवाजे के लिए दो पत्ते और दूसरे दरवाजे के लिए दो पत्ते।
25 और उन पर भवन के किवाड़ोंपर करूब और खजूर के पेड़ जैसे शहरपनाह पर बनाए गए थे, वैसे ही उन पर भी बने थे; और ओसारे के मुख पर बाहर के ओसारे पर मोटी पटियां थीं।
26 और एक ओर और दूसरी ओर ओसारे की अलंगोंपर, और भवन की अलंग की कोठरियोंपर संकरी खिड़कियाँ, और खजूर के वृक्ष थे, और मोटी तख़्तें थीं।
अध्याय 42
याजकों के लिए कोठरियां — बाहरी आंगन के उपाय।
1 तब वह मुझे बाहरी आंगन में ले गया, जो उत्तर की ओर है; और वह मुझे उस कोठरी में ले गया जो उस अलग स्थान के साम्हने थी, और जो भवन के साम्हने उत्तर की ओर थी।
2 साम्हने उत्तर का द्वार सौ हाथ लम्बा था, और चौड़ाई पचास हाथ की थी।
3 उसके साम्हने जो भीतरी आंगन के लिथे बीस हाथ का या, और उस चौखट के साम्हने जो बाहरी आंगन के साम्हने था, वह तीन मंजिलोंमें दीर्घा के साम्हने था।
4 और कोठरियों के साम्हने भीतर की ओर दस हाथ चौड़ा एक हाथ था; और उनके द्वार उत्तर की ओर।
5 अब ऊपरी कोठरियां छोटी थीं; क्योंकि दीर्घाएं इन से ऊंची थीं, और नीचे से और भवन के बीच से भी ऊंची थीं।
6 क्योंकि वे तीन मंजिलों में थे, परन्तु आंगनों के खम्भों के समान उनके खम्भे न थे; इसलिए इमारत जमीन से सबसे नीचे और बीच में से अधिक तंग हो गई थी।
7 और कोठरियोंके साम्हने जो बाहरी शहरपनाह थी, वह कोठरियोंके साम्हने बाहरी आंगन की ओर, और उसकी लम्बाई पचास हाथ की या।
8 क्योंकि कोठरियां जो बाहरी आंगन में थीं, उनकी लम्बाई पचास हाथ की या; और देखो, मन्दिर के साम्हने सौ हाथ थे।
9 और इन कोठरियोंके नीचे से पूर्व की ओर का वह प्रवेश द्वार था, जिस प्रकार बाहरी आंगन से कोई उन में जाता है।
10 और कोठरियां आंगन की शहरपनाह की मोटाई में पूर्व की ओर, और अलग स्यान के साम्हने, और भवन के साम्हने थे।
11 और उनके साम्हने का मार्ग उन कोठरियोंका सा दिखाई दिया, जो उत्तर की ओर, जितनी लम्बी और उतनी ही चौड़ी थीं; और उनका सब प्रस्थान अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके द्वार के अनुसार या।।
12 और कोठरियोंके फाटकोंके लिथे जो दक्खिन की ओर थे, उसके साम्हने मार्ग के सिरोंपर एक द्वार था, अर्थात वह मार्ग जो शहरपनाह के साम्हने पूर्व की ओर जाता या, जैसे कोई उन में जाता या।
13 तब उस ने मुझ से कहा, उत्तर कोठरियां और दक्खिन कोठरियां, जो अलग स्थान के साम्हने हैं, वे पवित्र कोठरियां हैं, जहां यहोवा के पास आनेवाले याजक परमपवित्र वस्तुएं खाएंगे; वे परमपवित्र वस्तु, और अन्नबलि, और पापबलि, और अपराधबलि वहीं रखे; क्योंकि वह स्थान पवित्र है।
14 जब याजक उस में प्रवेश करें, तब वे पवित्र स्थान से निकलकर बाहरी आंगन में न जाएं, परन्तु जहां वे सेवा टहल करें वहां अपके वस्त्र रखे; क्योंकि वे पवित्र हैं; और दूसरे वस्त्र पहिनकर उन वस्तुओं को जो प्रजा के लिथे हैं साय जाएं।
15 और जब उस ने भीतरी भवन को नाप लिया, तब वह मुझे उस फाटक की ओर ले गया, जिसका भविष्य पूर्व की ओर है, और उसे चारोंओर नाप दिया।
16 और उस ने पूर्व की ओर को नापने वाले सरकण्डे से, और पांच सौ सरकण्डोंको, और नापने वाले सरकण्ड को चारोंओर नापा।
17 उस ने उत्तर की ओर पांच सौ सरकण्डे नाप लिये, और नापने वाले सरकण्डों को चारों ओर से नापा।
18 और उस ने दक्खिन की ओर, पांच सौ नरकट, नापने वाले सरकण्डे से नाप दिए।
19 फिर वह पश्चिम की ओर फिरा, और नापने वाले सरकण्डे से पांच सौ सरकण्डे नापा।
20 उस ने उसको चारोंओर से नापा; उसके चारों ओर पांच सौ सरकण्डों की लंबी और पांच सौ चौड़ी एक शहरपनाह थी, जो पवित्रस्थान और अपवित्र स्थान के बीच में एक भेद करे।
अध्याय 43
मंदिर में भगवान की महिमा की वापसी - पाप ने भगवान की उपस्थिति में बाधा डाली - घर की व्यवस्था का पालन - वेदी।
1 फिर वह मुझे फाटक पर ले गया, अर्यात् उस फाटक पर जो पूर्व की ओर है;
2 और देखो, इस्राएल के परमेश्वर का तेज पूर्व दिशा से निकला; और उसका शब्द बहुत जल के शब्द के समान था; और पृथ्वी उसके तेज से चमक उठी।
3 और जो दर्शन मैं ने देखा, वैसा ही हुआ, अर्यात् उस दर्शन के अनुसार जो मैं ने नगर को नाश करने को आते समय देखा था; और वे दर्शन उस दर्शन के समान थे जो मैं ने कबार नदी के पास देखे थे; और मैं मुंह के बल गिर पड़ा।
4 और यहोवा का तेज उस फाटक के मार्ग से होकर भवन में पहुंचा, जिसका मुंह पूर्व की ओर है।
5 तब आत्मा ने मुझे उठाकर भीतरी आंगन में पहुंचाया; और देखो, यहोवा का तेज भवन में भर गया है।
6 और मैं ने उसे घर में से मुझ से बातें करते सुना; और वह आदमी मेरे पास खड़ा रहा।
7 और उस ने मुझ से कहा, हे मनुष्य के सन्तान, मेरे सिंहासन का स्थान, और मेरे पांवोंके तलवों का स्थान, जहां मैं इस्राएलियोंके बीच सदा वास करूंगा, और मेरा पवित्र नाम यहोवा का घराना होगा। इस्राएल न तो वे, और न उनके राजा अपके व्यभिचार से, और न अपके राजाओं की लोथोंके द्वारा अपके ऊंचे स्थानोंपर अशुद्ध हो जाएंगे।
8 अपक्की डेढियोंके साम्हने, और अपक्की चौकियोंके साम्हने, और अपके पद के लिथे मेरे और अपके बीच की शहरपनाह में अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की द्रोही के कामोंके कारण मेरे पवित्रा नाम को अशुद्ध किया है; इसलिथे मैं ने अपके क्रोध में उनको भस्म कर दिया है।
9 अब वे अपके व्यभिचार और अपके राजाओं की लोथोंको मुझ से दूर रखें, और मैं उनके बीच सर्वदा वास करूंगा।।
10 हे मनुष्य के सन्तान, इस्राएल के घराने को अपना भवन दिखा, कि वे अपके अधर्म के कामोंसे लज्जित हों; और उन्हें पैटर्न को मापने दें।
11 और यदि वे अपने सब कामोंके कारण लज्जित हों, तो उन्हें भवन का स्वरूप, और उसका ढंग, और उसका रूप, और उसका आना, और उसके सब रूप, और उसके सब नियम दिखा, और उसके सभी रूप, और उसके सभी कानून; और उसको उनके साम्हने लिख देना, कि वे उसके सारे रूप को, और उसके सब नियमोंका पालन करें, और उन पर चलें।
12 घर की व्यवस्था यह है; पहाड़ की चोटी पर उसके चारोंओर का सारा सिवाना परमपवित्र ठहरे। निहारना, यह घर का कानून है।
13 और वेदी की माप हाथ के अनुसार ये हैं; हाथ एक हाथ और एक हाथ है; नीचे का भाग भी एक हाथ का हो, और उसकी चौड़ाई एक हाथ की हो, और उसका सिवाना चारोंओर एक छोर से सटा हुआ हो; और यह वेदी का ऊंचा स्थान होगा।
14 और नीचे से लेकर नीचे तक भूमि से नीचे तक दो हाथ, और चौड़ाई एक हाथ की हो; और छोटी से बड़ी बस्ती तक चार हाथ, और चौड़ाई एक हाथ की हो।
15 और वेदी चार हाथ की हो; और वेदी से ऊपर और ऊपर की ओर चार सींग हों।
16 और वेदी बारह हाथ लम्बी, बारह चौड़ी, और चारोंओर चौकोंमें चौकोर हो।
17 और वह बसेरा चौदह हाथ लम्बा और चौदह हाथ चौड़ा हो, जो उसके चारों चौकोंमें हो; और उसके चारोंओर का सिवाना आधा हाथ का हो; और उसका तल लगभग एक हाथ का हो; और उसकी सीढ़ियाँ पूर्व की ओर देखें।
18 उस ने मुझ से कहा, हे मनुष्य के सन्तान, परमेश्वर यहोवा यों कहता है; जिस दिन वे वेदी बनाकर उस पर होमबलि चढ़ाने, और उस पर लोहू छिड़कने की विधियाँ ये हैं।
19 और लेवीय याजकोंको जो सादोक के वंश में से हों, जो मेरे पास आकर मेरी सेवा टहल करने को हों, उन्हें देना, यहोवा परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है, कि पापबलि का एक बछड़ा।
20 और उसके लोहू में से कुछ लेकर उसके चारों सींगों पर, और बसने के चारों कोनों पर, और चारोंओर की सीमा पर लगाना; इस प्रकार तू उसे शुद्ध और शुद्ध करना।
21 और पापबलि के बछड़े को भी लेना, और वह उसे भवन के नियुक्त स्थान में, अर्थात पवित्रस्थान के बाहर जलाए।
22 और दूसरे दिन निर्दोष बकरियोंका एक बच्चा पापबलि करके चढ़ाना; और वे वेदी को वैसा ही शुद्ध करें जैसा उन्होंने बछड़े से किया है।
23 जब तू उसे शुद्ध कर चुका, तब निर्दोष बछड़ा, और भेड़-बकरी में से एक निष्कलंक मेढ़ा चढ़ाना।
24 और उन्हें यहोवा के साम्हने चढ़ाना, और याजक उन पर नमक छिड़के, और वे यहोवा के होमबलि के लिथे चढ़ाएं।
25 सात दिन तक पापबलि के लिथे प्रतिदिन एक बकरा तैयार करना; वे भेड़-बकरियों में से एक निर्दोष बछड़ा, और एक निर्दोष मेढ़ा भी तैयार करें।
26 सात दिन तक वे वेदी को शुद्ध करके उसे शुद्ध करें; और वे अपने आप को पवित्र करें।
27 और जब वे दिन पूरे हो जाएं, तब आठवें दिन और इससे आगे के दिन याजक तेरे होमबलि और मेलबलि वेदी पर चढ़ाएं; और मैं तुझे ग्रहण करूंगा, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
अध्याय 44
पूर्वी फाटक राजकुमार को सौंपा गया - याजकों ने पवित्रस्थान को अपवित्र करने के लिए फटकार लगाई - याजकों के लिए अध्यादेश।
1 तब वह मुझे बाहरी पवित्रस्यान के फाटक के मार्ग से लौटा ले गया, जो पूर्व की ओर है; और यह बंद था।
2 तब यहोवा ने मुझ से कहा; यह फाटक बन्द किया जाए, वह खोला न जाए, और कोई उसमें प्रवेश न करे; क्योंकि इस्राएल का परमेश्वर यहोवा उस में से प्रवेश कर गया है, इसलिथे वह बन्द किया जाए।
3 यह हाकिम के लिथे है; हाकिम, वह उस में यहोवा के साम्हने रोटी खाने को बैठे; वह उस फाटक के ओसारे से होकर प्रवेश करेगा, और उसी के मार्ग से निकलेगा।
4 तब वह मुझे उत्तरी फाटक के मार्ग पर भवन के साम्हने ले गया; और मैं ने दृष्टि की, और क्या देखा, कि यहोवा का तेज यहोवा के भवन में भर गया है; और मैं मुंह के बल गिर पड़ा।
5 और यहोवा ने मुझ से कहा, हे मनुष्य के सन्तान, अच्छी तरह से देख, और अपनी आंखों से देख, और जो कुछ मैं तुझ से यहोवा के भवन की सब विधियोंऔर उसकी सब विधियोंके विषय में कहता हूं, वह सब अपने कानोंसे सुन; और भवन के प्रवेश द्वार को, और पवित्रस्थान के हर जाने वाले मार्ग को अच्छी तरह से चिन्हित कर लेना।
6 और इस्राएल के घराने से बलवा करनेवालोंसे कहना, परमेश्वर यहोवा योंकहता है; हे इस्राएल के घराने, तेरे सब घिनौने कामोंके लिथे वह तेरे लिये पर्याप्त हो,
7 इसलिथे कि जब तुम मेरी रोटी, चरबी और लोहू चढ़ाते हो, तब अपके मन के खतनारहित और मांस के खतनारहित परदेशियोंको मेरे पवित्रस्यान में आकर मेरे भवन को अशुद्ध करने के लिथे ले आए हो, और वे मेरे भवन को अपवित्र करते हैं, तेरे सब घिनौने कामों के कारण मेरी वाचा।
8 तुम ने मेरी पवित्र वस्तुओं की रखवाली नहीं की; परन्तु तुम ने मेरे पवित्रस्थान में मेरे रक्षकोंको अपके लिथे ठहराया है।
9 परमेश्वर यहोवा यों कहता है; कोई परदेशी, जो मन से खतनारहित, और मांस में खतनारहित न हो, मेरे पवित्रस्थान में प्रवेश न करेगा, जो इस्राएलियों में से किसी परदेशी हो।
10 और जब इस्राएली अपक्की मूरतोंके पीछे मेरे पास से भटक गए या, तब लेवीय मेरे पास से दूर चले गए; वे अपना अधर्म भी सहेंगे।
11 तौभी वे मेरे पवित्रस्यान में सेवक ठहरेंगे, और भवन के फाटकोंके अधिकारी होंगे, और भवन की सेवा टहल करेंगे; वे लोगों के होमबलि और मेलबलि को बलि करें, और वे उनकी सेवा टहल करने को उनके साम्हने खड़े हों।
12 क्योंकि उन्होंने अपक्की मूरतोंके साम्हने उनकी सेवा टहल की, और इस्त्राएल के घराने को अधर्म का काम कराया; इस कारण मैं ने उन पर हाथ उठाया है, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है, और वे अपना अधर्म सहेंगे।
13 और वे मेरे निकट न आएं, कि मेरे लिथे याजक का काम करें, और न मेरे किसी पवित्रा वस्तु के निकट परमपवित्र स्थान में जाएं; परन्तु वे अपक्की लज्जा, और घिनौने काम जो उन्होंने किए हैं, सहेंगे।
14 परन्तु मैं उनको भवन की सारी सेवा और उस में किए जाने वाले सब कामोंके लिथे रखवाला ठहराऊंगा।
15 परन्तु सादोक की सन्तान लेवीय याजक, जो मेरे पवित्रस्थान की रखवाली करते थे, जब इस्राएली मेरे पास से भटक गए थे, तब वे मेरी सेवा टहल करने को मेरे निकट आएंगे, और वे मेरे साम्हने खड़े होकर मेरी भेंट चढ़ाएंगे। चरबी और लोहू, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है;
16 वे मेरे पवित्रस्थान में प्रवेश करेंगे, और मेरी मेज के पास मेरी सेवा टहल करने को आएंगे, और वे मेरी सेवा करेंगे।
17 और जब वे भीतरी आंगन के फाटकोंसे भीतर जाएं, तब वे सन के वस्त्र पहिने हुए हों; और जब तक वे भीतरी आंगन के फाटकोंमें और भीतर सेवा टहल करें, तब तक उन पर ऊन न आने पाए।
18 और उनके सिरों पर सन के बोनट हों, और कमर पर सन की जांघिया हों; वे किसी ऐसी वस्तु से कमर न बाँधें जिससे पसीना निकलता हो।
19 और जब वे अपके अपके वस्त्र अपके अपके वस्त्र पहिनकर पवित्र कोठरियोंमें रखें, और अपके अपके वस्त्र पहिने हुए अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके वस्त्र अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके आंगन के आंगन में, या; और वे अपने वस्त्रोंसे प्रजा को पवित्र न करें।
20 और न तो वे अपके सिर मुंड़ाएं, और न अपक्की लटोंको लंबा होने पाए; वे केवल अपने सिर का चुनाव करेंगे।
21 और कोई याजक भीतरी आंगन में प्रवेश करते समय दाखमधु न पिए।
22 वे न अपक्की पत्नियोंके लिथे विधवा ब्याह लें, और न ब्याई हुई स्त्री को ब्याह लें; परन्तु वे इस्त्राएल के घराने के वंश में से दासियां वा उस विधवा को, जिसका पहिले याजक था, ले लें।
23 और वे मेरी प्रजा को पवित्र और अपवित्र का भेद सिखाएंगे, और अशुद्ध और शुद्ध का भेद समझेंगे।
24 और वे विवाद में न्याय के लिये खड़े होंगे; और वे उसका न्याय मेरे नियमोंके अनुसार करेंगे; और वे मेरी सब मण्डली में मेरी व्यवस्थाओं और विधियोंका पालन करेंगे; और वे मेरे विश्रामदिन को पवित्र ठहराएंगे।
25 और वे अपके आप को अशुद्ध करने के लिथे किसी मरे हुए मनुष्य के पास न आएं; परन्तु पिता, वा माता, वा पुत्र, वा पुत्री, भाई, वा बहिन जिसका पति न हो, वे अपके आप को अशुद्ध करें।
26 और उसके शुद्ध होने के बाद वे उसके लिये सात दिन गिनें।
27 और जिस दिन वह पवित्रस्थान में, भीतरी आंगन में सेवा टहल करने को जाए, तब वह अपके पापबलि को चढ़ाए, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
28 और वह उनका निज भाग हो; मैं उनकी विरासत हूँ; और उन्हें इस्राएल में कोई अधिकार न देना; मैं उनका अधिकार हूँ।
29 वे अन्नबलि, और पापबलि, और अपराधबलि को खाएं; और इस्राएल में सब समर्पित वस्तु उन्हीं की होगी।
30 और सब वस्तुओं की सब पहिली उपज, और सब प्रकार की भेंट, अर्यात् अपके सब प्रकार की भेंट याजक की हो; और अपके आटे में से पहिला याजक को भी देना, कि वह तेरे भवन में आशीष बनाए रखे।
31 याजक किसी मरी हुई वा फटी हुई वस्तु में से कुछ भी न खाएं, चाहे वह पक्षी हो या पशु।
अध्याय 45
भूमि का बंटवारा - राजकुमार के लिए अध्यादेश।
1 और जब तुम चिट्ठी डालकर देश को निज भाग करके बांट दो, तब यहोवा के लिथे भूमि का पवित्र भाग चढ़ाना; लंबाई पच्चीस हजार नरकटों की हो, और चौड़ाई दस हजार हो। यह उसके चारोंओर के सब सिवानोंमें पवित्र ठहरे।
2 और पवित्रस्यान के लिथे उसकी लम्बाई पांच सौ हो, जिसकी चौड़ाई पांच सौ और चारोंओर चौकोर हो; और उसके चरागाहोंके लिथे चारोंओर पचास हाथ।
3 और इसी नाप में से तू पच्चीस हजार लम्बा और दस हजार चौड़ा नाप लेना; और उसी में पवित्रस्थान और परमपवित्र स्थान होगा।
4 और भूमि का पवित्र भाग पवित्रस्थान के याजकोंके लिथे हो, जो यहोवा की सेवा टहल करने के लिथे समीप आएं; और वह उनके घरोंके लिथे स्यान, और पवित्रस्यान के लिथे पवित्र स्यान हो।
5 और लम्बाई के पच्चीस हजार चौडाई, और भवन के सेवकोंके लिथे लेवीय भी बीस कोठरियोंके लिथे अपके लिथे अपके लिथे रहें।।
6 और पवित्र भाग की भेंट के साम्हने उस नगर के अधिकार को पांच हजार चौड़ा, और पच्चीस हजार लंबा ठहराना; वह इस्राएल के सारे घराने के लिथे हो।
7 और एक भाग हाकिम के लिथे एक ओर हो, और दूसरी ओर पवित्र भाग की भेंट का, और नगर का निज भाग पवित्र भाग की भेंट के साम्हने, और नगर के निज भाग के साम्हने हो। पच्छिम से पच्छिम की ओर, और पूर्व से पूर्व की ओर; और उसकी लम्बाई पच्छिम सीमा से पूर्व सीमा तक किसी एक भाग के साम्हने हो।
8 उस देश में इस्राएलियोंके लिथे उसकी निज भूमि होगी; और मेरे हाकिम फिर मेरी प्रजा पर अन्धेर न करेंगे; और शेष देश इस्राएल के घराने को अपके गोत्रोंके अनुसार देना।
9 परमेश्वर यहोवा यों कहता है; हे इस्राएल के हाकिमों, यह तुम्हारे लिए पर्याप्त है; हिंसा और लूट को दूर करो, और न्याय और न्याय को अंजाम दो, मेरे लोगों से अपनी कमाई को दूर करो, भगवान भगवान की यही वाणी है।
10 तुम्हारे पास न्याय का संतुलन, और एक धर्मी एपा, और एक धर्मी स्नान होगा।
11 एपा और बत एक ही नाप का हो, जिस से होमेर का दसवां भाग, और होमेर का दसवां भाग एपा हो; उसका नाप होमर के पीछे हो।
12 और शेकेल बीस गेरा का हो; तुम्हारा माने बीस शेकेल, पच्चीस शेकेल, और पन्द्रह शेकेल हो।
13 जो भेंट तुम चढ़ाओ वह यह है; एपा का छठा भाग गेहूँ के एक होमेर का, और एपा का छठा भाग जौ के एक होमेर का देना।
14 तेल की विधि के विषय में तेल का स्नान, स्नान के दसवें भाग को कोर में से, जो दस स्नान का होमेर है, चढ़ाना; दस स्नान के लिए एक होमर हैं;
15 और इस्त्राएल की मोटी चराइयोंमें से दो सौ भेड़-बकरियोंमें से एक भेड़ का बच्चा; और उनका मेलबलि, और होमबलि, और मेलबलि, और मेलबलि के लिथे उनका मेल हो, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
16 देश के सब लोग इस्राएल के प्रधान के लिथे यह भेंट चढ़ाएं।
17 और पर्ब्बों, और अमावस्याओं, और विश्रामदिनोंमें, और इस्राएल के घराने के सब महापर्वोंमें होमबलि, और अन्नबलि, और अर्घ करना प्रधान का भाग हो; वह पापबलि, और अन्नबलि, और होमबलि, और मेलबलि को इस्राएल के घराने के लिथे मेल करने के लिथे तैयार करे।
18 परमेश्वर यहोवा यों कहता है; पहिले महीने के पहिले दिन को तू निर्दोष बछड़ा लेकर पवित्रस्थान को शुद्ध करना;
19 और याजक पापबलि के लोहू में से कुछ लेकर भवन के खम्भोंपर, और वेदी की कोठरी के चारोंकोनोंपर, और भीतरी आंगन के फाटक के खम्भोंपर लगाए।
20 और इस प्रकार महीने के सातवें दिन को जो कोई भूल करे, और जो साधारण है, उसके लिथे करना; इस प्रकार तुम घर का मेल मिलाप करना।
21 पहिले महीने के चौदहवें दिन को तुम फसह हो, जो सात दिन का हो; अखमीरी रोटी खाई जाए।
22 और उस दिन प्रधान अपके लिथे और देश के सब लोगोंके लिथे पापबलि के लिथे एक बछड़ा तैयार करे।
23 और सात दिन तक वह पर्ब्ब के सात दिन तक यहोवा के लिथे होमबलि अर्थात सात बछड़े और सात निर्दोष मेढ़े प्रतिदिन सातोंदिन तैयार करना; और प्रतिदिन एक बकरा पापबलि के लिथे।
24 और वह बछड़े के लिथे एपा का अन्नबलि, और मेढ़े के लिथे एपा का अन्नबलि, और एपा के लिथे हीन हीन तेल तैयार करे।
25 सातवें महीने के पन्द्रहवें दिन को वह सात दिन के पर्ब्ब के समान पापबलि, होमबलि, अन्नबलि और तेल के अनुसार करे। .
अध्याय 46
राजकुमार के लिए उसकी पूजा में, और लोगों के लिए अध्यादेश।
1 परमेश्वर यहोवा यों कहता है; भीतरी आंगन का फाटक जो पूर्व की ओर हो, वह छ: दिन तक बन्द रहे; परन्तु सब्त के दिन वह खोला जाए, और अमावस्या के दिन खोला जाए।
2 और प्रधान उस फाटक के ओसारे से होकर भीतर प्रवेश करे, और फाटक के खम्भे के पास खड़ा हो, और याजक उसका होमबलि और मेलबलि तैयार करके फाटक की डेवढ़ी पर दण्डवत् करे। ; तब वह निकलेगा; परन्तु फाटक सांफ तक बन्द न किया जाए।
3 इसी प्रकार देश के लोग विश्रामदिनों और अमावस्या के दिनोंमें भी इस फाटक के द्वार पर यहोवा के साम्हने दण्डवत् करें।
4 और जो होमबलि सब्त के दिन यहोवा के लिथे चढ़ाए, वह छ: निर्दोष भेड़ के बच्चे, और एक निर्दोष मेढ़ा हो।
5 और मेढ़े के लिथे अन्नबलि एपा, और मेम्नोंके लिथे अन्नबलि जो वह दे सके, और एपा के लिथे हीन हीन तेल हो।
6 और अमावस्या के दिन वह निर्दोष बछड़ा, और छ: भेड़ के बच्चे, और एक मेढ़ा हो; वे दोषरहित होंगे।
7 और वह बछड़े के लिथे एपा एपा, और मेढ़े के लिथे एक एपा, और अपके हाथ के अनुसार भेड़ के बच्चे, और एपा तक हीन हीन तेल तैयार करे।
8 और जब प्रधान भीतर जाए, तब वह उस फाटक के ओसारे के मार्ग से होकर भीतर जाए, और उसके मार्ग से निकल जाए।
9 परन्तु जब उस देश के लोग पर्वोंमें यहोवा के साम्हने आएं, तब जो कोई उत्तरी फाटक से दण्डवत् करने को प्रवेश करे, वह दक्खिन फाटक के मार्ग से निकल जाए; और जो दक्खिन फाटक के मार्ग से प्रवेश करे वह उत्तरी फाटक के मार्ग से निकले; जिस फाटक से वह भीतर आया था, उस से होकर न लौटेगा, वरन उसके साम्हने पार निकलेगा।
10 और जब प्रधान उनके बीच में जाएं, तब वे भीतर जाएं; और जब वे निकलेंगे, तब निकलेंगे।
11 और पर्वों और पर्वोंमें एक बछड़े के लिथे एपा, और मेढ़े के लिथे एपा, और भेड़ के बच्चे के लिथे जो वह दे सके, और एपा के लिथे हीन हीन तेल हो।
12 अब जब प्रधान यहोवा के लिथे स्वेच्छा से होमबलि वा मेलबलि या मेलबलि तैयार करे, तब उसके लिये पूर्व की ओर का फाटक खोलकर अपके होमबलि और मेलबलि को वैसे ही तैयार किया जाए जैसा उस ने विश्रामदिन के दिन किया था। दिन; तब वह निकलेगा; और उसके जाने के बाद कोई फाटक बन्द करे।
13 तू प्रति दिन पहले वर्ष के निर्दोष मेमने का होमबलि यहोवा के लिथे तैयार करना; हर सुबह उसे तैयार करना।
14 और उसके लिथे भोर को तड़के के लिये एपा का छठा भाग, और एक हीन तेल का तीसरा भाग मैदे से तड़के के लिये अपके अपके लिथे अर्यात् अपके अपके अपके अपके अपके लिथे अपके अपके अपके अपके लिथे अपके अपके अपके लिथे अपके अपके अपके लिथे अपके अपके लिथे अपके लिथे करना; यहोवा के लिये सदा की विधि के द्वारा नित्य मांसबलि।
15 इस प्रकार वे नित्य होमबलि के लिथे भेड़ का बच्चा, और अन्नबलि, और तेल हर भोर को तैयार करें।
16 परमेश्वर यहोवा यों कहता है; यदि हाकिम अपके किसी पुत्र को भेंट दे, तो उसका भाग उसके पुत्रोंका होगा'; यह उनका उत्तराधिकार हो जाएगा।
17 परन्तु यदि वह अपके किसी दास को अपके निज भाग में से भेंट दे, तो वह स्वाधीनता के वर्ष तक उसी का ठहरे; उसके बाद, वह राजकुमार के पास वापस आ जाएगा; परन्तु उसका भाग उसके पुत्रोंके लिथे उसका भाग होगा।
18 और प्रधान प्रजा के भाग में से अन्धेर करके उन्हें अपके निज भाग से निकालने न पाए; परन्तु वह अपके पुत्रोंको अपके निज भाग में से भाग करे; कि मेरी प्रजा हर एक मनुष्य को उसके निज भाग से तितर-बितर न करे।
19 फिर वह मुझे फाटक के अलंग के द्वार से याजकोंकी उन पवित्र कोठरियोंमें जो उत्तर दिशा की ओर थीं, ले गया; और देखो, दोनों ओर पच्छिम की ओर एक स्थान है।
20 तब उस ने मुझ से कहा, यह वह स्थान है जहां याजक अपराधबलि और पापबलि को उबालेंगे, जहां वे अन्नबलि को पकाएंगे; कि वे लोगों को पवित्र करने के लिथे उन्हें बाहरी आंगन में न ले जाएं।
21 तब वह मुझे बाहरी आंगन में ले गया, और आंगन के चारोंकोनोंके पास से होकर ले गया; और देखो, आंगन के कोने-कोने में एक आंगन था।
22 आंगन के चारों कोनों में चालीस हाथ लम्बे और तीस चौड़े आंगन थे; ये चारों कोने एक ही माप के थे।
23 और उनके चारोंओर चारोंओर भवन की एक पंक्ति बनी या, और वह चारोंओर चारोंओर की पंक्तियोंके नीचे उबलने के स्थान से बनी हुई थी।
24 तब उस ने मुझ से कहा, उबालने वालों के स्थान ये हैं, जहां घर के सेवक प्रजा के मेलबलि को उबालेंगे।
अध्याय 47
पवित्र जल का दर्शन—उनका पुण्य—भूमि की सीमा—चिट्ठी से उसका विभाजन।
1 उसके बाद वह मुझे फिर घर के द्वार पर ले आया; और देखो, भवन की डेवढ़ी के नीचे से पूरब की ओर जल निकला; क्योंकि भवन का आगे का भाग पूर्व की ओर था, और जल नीचे से, अर्थात् भवन की दहिनी ओर से, और वेदी की दक्खिन ओर से उतरता था।
2 तब वह मुझे उत्तर फाटक के मार्ग से बाहर ले गया, और बाहरी फाटक के उस मार्ग से जो पूर्व की ओर है, ले गया; और देखो, दाहिनी ओर जल बह रहा है।
3 और जिस मनुष्य के हाथ में डोरी थी, वह पूर्व की ओर चला, और एक हजार हाथ नापकर मुझे जल के बीच में ले गया; पानी टखनों तक था।
4 फिर उस ने एक हजार नापकर मुझे जल के बीच में पहुंचाया; पानी घुटनों तक था। फिर उस ने एक हजार नापकर मुझे पार किया; कमर में पानी था।
5 उसके बाद उस ने एक हजार नाप लिये; और वह एक नदी थी जिसे मैं पार नहीं कर सकता था; क्योंकि जल बढ़ गया, और तैरने के लिये जल, और ऐसी नदी जो पार न हो सकती थी।
6 उस ने मुझ से कहा, हे मनुष्य के सन्तान, क्या तू ने यह देखा है? तब वह मुझे ले आया, और मुझे नदी के किनारे पर लौटा दिया।
7 जब मैं लौटा, तो क्या देखा, कि नदी के किनारे एक ओर और दूसरी ओर बहुत से वृक्ष हैं।
8 तब उस ने मुझ से कहा, ये जल पूरब की ओर बहकर जंगल में जाकर समुद्र में मिल जाता है; जो समुद्र में बहाए जाने से जल चंगा हो जाएगा।
9 और ऐसा होगा, कि जो कुछ जीवित है, और जहां कहीं नदियां आती हैं, वे सब जीवित रहें; और मछलियां बहुत बड़ी होंगी, क्योंकि ये जल वहां पहुंचेगा; क्योंकि वे चंगे हो जाएंगे; और सब कुछ वहीं रहेगा जहां नदी आएगी।
10 और ऐसा होगा, कि एनगेदी से लेकर एन-एग्लैम तक मछुए उस पर खड़े होंगे; वे जाल फैलाने का स्थान हों; और उनकी मछलियां अपके जाति के अनुसार होंगी, जैसे बड़े समुद्र की मछलियां बहुत अधिक हैं।
11 तौभी उसके दलदली स्थान और उसके दलदल ठीक न होंगे; उन्हें नमक दिया जाएगा।
12 और नदी के किनारे उसके तट पर, और उस पार मांस के लिये सब वृझ उगेंगे, जिनके पत्ते न मुरझाएंगे, और न उनके फल भस्म होंगे; वह उसके महीनों के अनुसार नया फल लाएगा, क्योंकि उनका जल उन्होंने पवित्रस्थान में से निकाला है; और उसका फल मांस के लिथे, और उसका पत्ता औषधि के लिथे हो।
13 परमेश्वर यहोवा यों कहता है; यह सीमा इस्त्राएल के बारह गोत्रों के अनुसार उस देश के अधिकारी होने चाहिए, जिस से तुम देश के अधिकारी हो; यूसुफ के दो भाग होंगे।
14 और तुम एक के समान दूसरे के अधिकारी होगे; जिसके विषय में मैं ने हाथ बढ़ाकर तेरे पुरखाओं को दिया है; और यह देश तेरे लिथे निज भाग हो जाएगा।
15 और देश की सीमा उत्तर की ओर बड़े समुद्र से ले कर हेतलोन का मार्ग हो, जिस प्रकार मनुष्य सीदाद को जाते हैं;
16 हमात, बेरोता, सिब्राईम, जो दमिश्क के सिवाने और हमात के सिवाने के बीच में है; हजार-हैटीकॉन, जो हौरान के तट पर है।
17 और समुद्र के सिवाने का सिवाना हसरनान, और दमिश्क का सिवाना, और उत्तर की ओर का सिवाना और हमात का सिवाना हो। और यह उत्तर की ओर है।
18 और पूर्व की ओर से हौरान, और दमिश्क, और गिलाद, और यरदन के पास के इस्राएल के देश से लेकर पूर्व समुद्र तक नाप लेना। और यह पूर्व दिशा है।
19 और दक्खिन की ओर दक्खिन की ओर, तामार से ले कर कादेश में झगड़ोंके जल तक, और महान् समुद्र तक का जल। और यह दक्षिण की ओर दक्षिण की ओर है।
20 जब तक कोई हमात पर चढ़ाई न करे, तब तक पच्छिम की ओर का सिवाना बड़ा समुद्र होगा। यह पश्चिम की ओर है।
21 इसलिथे इस देश को इस्राएल के गोत्रोंके अनुसार अपके लिथे बांट लेना।
22 और ऐसा होगा, कि उसको चिट्ठी डालकर अपके निज भाग के लिथे बांट देना, और अपके बीच रहनेवाले परदेशियोंके लिथे जो तुम में सन्तान उत्पन्न करेंगे; और वे तेरे लिथे इस्त्राएलियोंके बीच उस देश में उत्पन्न हुए हों; इस्राएल के गोत्रों में से वे तेरे संग भाग होंगे।
23 और ऐसा होगा, कि परदेशी किस गोत्र में परदेशी हो, उसका निज भाग उसको देना, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
अध्याय 48
बारह गोत्रों के भाग, पवित्रस्थान, नगर और उपनगरों का, और राजकुमार का भाग, नगर के आयाम और फाटक।
1 अब गोत्रों के नाम ये हैं। उत्तर की ओर से हेतलोन के मार्ग के सिवाने तक, जो हमात को जाता है, हसर-एनान, जो उत्तर की ओर दमिश्क का सिवाना, और हमात के सिवाने तक जाता है; क्योंकि उसकी पूर्व और पश्चिम की भुजाएँ ये हैं; दान के लिए एक हिस्सा।
2 और दान के सिवाने से लगा हुआ पूर्व से पच्छिम तक आशेर का एक भाग।
3 और आशेर के सिवाने से लगा हुआ पूर्व से पच्छिम तक नप्ताली का एक भाग।
4 और नप्ताली के सिवाने से लगा हुआ पूर्व से पच्छिम तक मनश्शे का एक भाग।
5 और मनश्शे के सिवाने से लगा हुआ पूर्व से पच्छिम तक एप्रैम का एक भाग।
6 और एप्रैम के सिवाने से लगा हुआ पूर्व से पच्छिम तक रूबेन का एक भाग।
7 और रूबेन के सिवाने से लगा हुआ पूर्व से पच्छिम तक यहूदा का एक भाग।
8 और यहूदा के सिवाने से लगा हुआ पूर्व से पच्छिम तक वह बलि हो, जो पच्चीस हजार नरकटों की चौड़ाई में, और पूर्व से लेकर पच्छिम छोर तक दूसरे भागों में से एक की लंबाई में चढ़ाए जाए। पश्चिम की ओर; और पवित्रस्थान उसके बीच में रहे।
9 और जो हवन तुम यहोवा को चढ़ाओ, वह पच्चीस हजार लम्बा और दस हजार चौड़ा हो।
10 और उनके लिथे याजकोंके लिथे यह पवित्रा बलि ठहरे; उत्तर की ओर लम्बाई में पच्चीस हजार, और पश्चिम की ओर चौड़ाई में दस हजार, और पूर्व की ओर चौड़ाई में दस हजार, और दक्खिन की ओर लंबाई में पच्चीस हजार; और उसके बीच में यहोवा का पवित्रस्थान हो।
11 वह सादोक की सन्तान में से पवित्र किए गए याजकोंके लिथे हो; जिन्होंने मेरी आज्ञा का पालन किया है, और लेवियोंकी नाईं इस्त्राएलियोंके भटकने से न भटके।
12 और जो भूमि भेंट की जाए वह लेवियोंके सिवाने पर उनके लिथे परमपवित्र ठहरे।
13 और याजकोंके सिवाने के साम्हने लेवियोंकी लम्बाई पच्चीस हजार और चौड़ाई दस हजार हो; सब की लम्बाई पच्चीस हजार और चौड़ाई दस हजार हो।
14 और वे उसको न तो बेचेंगे, और न उसकी अदला-बदली करेंगे, और न देश की पहिली उपज को अलग करेंगे; क्योंकि वह यहोवा के लिथे पवित्र है।
15 और जितने पच्चीस हजार के साम्हने की चौड़ाई में पांच हजार बचे हों, वे नगर, निवास और चरागाहोंके लिथे अपवित्र स्थान ठहरें; और नगर उसके बीच में हो।
16 और उसके उपाय ये हों; उत्तर की ओर चार हजार पांच सौ, और दक्षिण की ओर चार हजार पांच सौ, और पूर्व की ओर चार हजार पांच सौ, और पश्चिम की ओर चार हजार पांच सौ।
17 और नगर के चरागाह उत्तर की ओर दो सौ पचास, और दक्खिन की ओर दो सौ पचास, और पूर्व की ओर दो सौ पचास, और पश्चिम की ओर दो सौ पचास हों।
18 और पवित्रा भाग के हवन के साम्हने जो बचा रहे उसकी लम्बाई पूर्व की ओर दस हजार, और पच्छिम की ओर दस हजार हो; और वह पवित्र भाग की भेंट के साम्हने हो; और उसकी वृद्धि नगर के सेवकोंके खाने के लिथे हो।
19 और इस्राएल के सब गोत्रोंमें से जो नगर की उपासना करेंगे, वे उसकी उपासना करेंगे।
20 और सब भेंट की रकम पच्चीस हजार बटा पच्चीस हजार हो; और नगर के निज भाग के साथ पवित्रा बलि चौंका देना।
21 और जो बचा रहे वह एक ओर, और दूसरी ओर पवित्रा बलि का, और नगर का निज भाग हो, अर्यात् पच्चीस हजार बलि के लिथे पूर्व सीमा की ओर, और पच्छिम की ओर हो। पच्छिम की सीमा की ओर पच्चीस हजार, प्रधान के भाग के साम्हने; और वह पवित्रा बलि हो; और भवन का पवित्रस्यान उसके बीच में हो।
22 और यहूदा के सिवाने और बिन्यामीन के सिवाने के बीच में लेवियोंके निज भाग में से, और नगर के निज भाग में से जो हाकिम का हो, वह भी प्रधान के लिथे ठहरे।
23 और बाकी गोत्रोंके लिथे पूर्व से पच्छिम तक बिन्यामीन का एक भाग हो।
24 और बिन्यामीन के सिवाने से लगे पूर्व से पच्छिम तक शिमोन का एक भाग हो।
25 और शिमोन के सिवाने से लगा हुआ पूर्व से पच्छिम तक इस्साकार का एक भाग।
26 और इस्साकार के सिवाने से लगा हुआ पूर्व से पच्छिम तक जबूलून का एक भाग।
27 और जबूलून के सिवाने से लगा हुआ पूर्व से पच्छिम तक गाद का एक भाग।
28 और गाद के सिवाने से दक्खिन की ओर का सिवाना तामार से लेकर कादेश के झगडे के जल तक, और महानद तक बड़े समुद्र तक हो।
29 यह वह देश है जिसे चिट्ठी डालकर इस्राएल के गोत्रोंके लिथे भाग करके बांट देना, और उनका भाग यही है, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
30 और उत्तर की ओर के नगर से निकलने के मार्ग ये हैं, अर्थात साढ़े चार हजार पांच सौ नाप।
31 और नगर के फाटक इस्राएल के गोत्रोंके नाम के अनुसार हों; उत्तर की ओर तीन द्वार; एक रूबेन का फाटक, एक यहूदा का फाटक, एक लेवी का फाटक।
32 और पूर्व की ओर चार हजार पांच सौ; और तीन द्वार; और एक यूसुफ का फाटक, एक बिन्यामीन का फाटक, एक दान का फाटक।
33 और दक्खिन की अलंग में साढ़े चार हजार पांच सौ नाप; और तीन द्वार; एक शिमोन का फाटक, एक इस्साकार का फाटक, एक जबूलून का फाटक।
34 पच्छिम की अलंग में चार हजार पांच सौ, और उनके तीन फाटक; एक गाद का फाटक, एक आशेर का फाटक, एक नप्ताली का फाटक।
35 वह लगभग अठारह हजार माप का था; और उस दिन से नगर का नाम पवित्र रखा जाएगा; क्योंकि वहां यहोवा रहेगा।
शास्त्र पुस्तकालय: बाइबिल का प्रेरित संस्करण
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