छिछोरापन

छिछोरापन

अध्याय 1

जले हुए प्रसाद।

1 तब यहोवा ने मूसा को बुलाकर मिलापवाले तम्बू में से उस से कहा,

2 इस्त्राएलियों से कह, कि यदि तुम में से कोई पुरूष यहोवा के लिथे भेंट ले आए, तो अपक्की गाय-बैल, गाय-बैल, और भेड़-बकरी की भेंट ले आना।

3 यदि वह गाय-बैल का होमबलि हो, तो वह निष्कलंक नर बलि करे; वह उसे अपनी इच्छा से मिलापवाले तम्बू के द्वार पर यहोवा के साम्हने चढ़ाए।

4 और वह अपना हाथ होमबलि के सिर पर रखे; और उसके लिथे प्रायश्चित्त करना ग्रहण किया जाएगा।

5 और वह उस बछड़े को यहोवा के साम्हने बलि करे; और हारून के पुत्र याजक उस लोहू को ले जाकर उस वेदी पर जो मिलापवाले तम्बू के द्वार के पास हो, चारोंओर छिड़के।

6 और वह होमबलि को घात करके अपके टुकड़े टुकड़े कर दे।

7 और हारून याजक के पुत्र वेदी पर आग लगाएं, और लकड़ी को आग के साम्हने रखें;

8 और हारून के पुत्रा याजक अपके सिरोंऔर चरबी को वेदी पर की आग की लकड़ी के साम्हने रखना;

9 परन्‍तु अपके मन और पांव जल से धोए; और याजक सब कुछ वेदी पर जलाए, कि वह होमबलि हो, जो यहोवा के सुगन्धित सुगन्ध का होमबलि हो।

10 और यदि उसकी भेंट होमबलि के लिथे भेड़-बकरियोंके वा बकरोंमें से हो; वह उसे निष्कलंक पुरुष ले आए।

11 और वह उसको वेदी की अलंग पर यहोवा के साम्हने उत्तर की ओर बलि करे; और हारून के पुत्र याजक उसका लोहू वेदी पर चारोंओर छिड़कें;

12 और वह उसको अपके सिर और चरबी समेत अपके टुकड़े टुकड़े करे; और याजक उन्हें उस लकड़ी पर जो वेदी पर की आग पर हो, उसी के अनुसार रखे।

13 परन्तु वह अन्तर्मन और पांवोंको जल से धोए; और याजक इन सब को लाकर वेदी पर जलाए; वह होमबलि, अर्यात् होमबलि है, जो यहोवा के लिये सुगन्धित सुगन्ध देनेवाली हव्य है।

14 और यदि यहोवा की भेंट के लिथे होमबलि पक्की चिडिय़ोंकी हो, तो वह पंडुक वा कबूतरोंके अपके अपके बलि को ले आए।

15 और याजक उसको वेदी के पास ले जाए, और उसके सिर को मरोड़कर वेदी पर जला दे; और उसका लोहू वेदी की अलंग पर फेंका जाए;

16 और वह अपके खेत को अपके पंख समेत तोड़कर वेदी के पास पूर्व की ओर राख के स्थान के पास डाल दे।

17 और वह उसको उसके पंखोंसे तोड़े, तौभी उसे न फाड़े; और याजक उसको वेदी पर, अर्यात्‌ उस लकड़ी पर जो आग पर हो, जलाए; वह होमबलि, अर्यात् होमबलि है, जो यहोवा के लिये सुगन्धित सुगन्ध देनेवाली हव्य है।

अध्याय 2

मांस प्रसाद।

1 और जब कोई यहोवा के लिथे अन्नबलि करे, तब वह मैदे का हो; और वह उस पर तेल डालकर उस पर लोबान रखे।

2 और वह उसको हारून के पुत्र याजकोंके पास पहुंचाए; और वह उस में से अपना मैदा, और उसका तेल, और सब लोबान समेत अपक्की मुट्ठी भर ले; और याजक उसके स्यान को वेदी पर जलाए, कि वह यहोवा के लिथे सुगन्ध देनेवाला हव्य हो;

3 और अन्नबलि में से जो कुछ हारून और उसके पुत्रोंके हों वे ही हों; वह यहोवा के हव्यों में से परमपवित्र वस्तु है।

4 और यदि तू तंदूर में पके हुए अन्नबलि का चढ़ावा ले आए, तो वह तेल से सने हुए मैदे की अखमीरी रोटियां, वा तेल से अभिषिक्त अखमीरी लोइयां हों।

5 और यदि तेरा चढ़ावा कढ़ाही में पकाया हुआ अन्नबलि हो, तो वह तेल से सने हुए अखमीरी मैदे का हो।

6 उसके टुकड़े टुकड़े करके उस पर तेल डालना; यह एक मांस भेंट है।

7 और यदि तेरा चढ़ावा कढ़ाही में पकाया हुआ अन्नबलि हो, तो वह मैदे का तेल से बना हो।

8 और इन वस्तुओं का अन्नबलि यहोवा के पास ले आना; और जब वह याजक को दिया जाए, तब वह उसे वेदी के पास ले आए।

9 और याजक उसके अन्नबलि में से उसका स्मारक ले कर वेदी पर जलाए; वह यहोवा के लिये सुगन्धित सुगन्ध देनेवाली हव्य की भेंट है।

10 और जो अन्नबलि में से बचे वह हारून और उसके पुत्रोंका हो; वह यहोवा के हव्यों में से परमपवित्र वस्तु है।

11 कोई भी अन्नबलि जिसे तुम यहोवा के लिथे ले जाना हो, वह खमीर का न बनाया जाए; क्योंकि यहोवा के हव्य के किसी भी भेंट में तुम न तो खमीर और न मधु को जलाना।

12 पहिली उपज का चढ़ावा यहोवा के लिथे चढ़ाना; परन्तु वे वेदी पर सुगन्धित सुगन्ध के लिये न जलाई जाएं।

13 और अपके अपके अन्नबलि के अन्नबलि पर नमक लगाना; और अपके परमेश्वर की वाचा का नमक अपके अन्नबलि में से घटने न पाए; अपक्की सब भेंट समेत नमक चढ़ाना।

14 और यदि तू अपके पहिली उपज का अन्नबलि यहोवा के लिथे चढ़ाए, तो अपके पहिली उपज के अन्नबलि के लिथे आग में सुखाए गए अन्नबलि के लिथे अर्यात्‌ अपके कान से कूटे हुए अन्नबलि चढ़ाना।

15 और उस पर तेल लगाकर उस पर लोबान रखना; यह एक मांस भेंट है।

16 और याजक उसके स्यान को, अर्यात् कूटी हुई अन्न, और तेल का कुछ भाग, और सब लोबान समेत जलाए; यह यहोवा के लिथे हवन की भेंट है।

अध्याय 3

शांति प्रसाद।

1 और यदि वह मेलबलि का चढ़ावा हो, और गाय-बैल में से चाहे वह नर या मादा हो, तो वह उसे यहोवा के साम्हने निर्दोष चढ़ाए।

2 और वह अपके भेंट के सिर पर हाथ रखे, और मिलापवाले तम्बू के द्वार पर बलि करे; और हारून के पुत्रा याजक वेदी के चारोंओर लोहू छिड़कें।

3 और वह मेलबलि की भेंट यहोवा के लिथे होमबलि करे; वह चरबी जो भीतर को ढँकती है, और वह सब चर्बी जो भीतर की ओर है।

4 और दोनों गुर्दों, और चर्बी जो उन पर हों, और जो पेट के पास हों, और कलेजे के ऊपर की झिल्ली को भी गुर्दे समेत निकाल ले।

5 और हारून के पुत्र उसको वेदी पर होमबलि की उस लकड़ी के ऊपर जलाएं, जो आग पर होगी; वह यहोवा के लिये सुगन्धित सुगन्ध देनेवाली हव्य की भेंट है।

6 और यदि यहोवा के लिथे मेलबलि के लिथे उसका बलिदान भेड़-बकरियोंमें से हो, चाहे नर हो या मादा, वह उसे निष्कलंक चढ़ाए।

7 यदि वह अपक्की भेंट के लिथे एक भेड़ का बच्चा चढ़ाए, तो उसे यहोवा के साम्हने चढ़ाए।

8 और वह अपके बलि के सिर पर हाथ रखे, और मिलापवाले तम्बू के साम्हने बलि करे; और हारून के पुत्र उसके लोहू को वेदी पर चारोंओर छिड़कें।

9 और वह मेलबलि की भेंट यहोवा के लिथे होमबलि करे; उसकी चरबी और पूरी दुम को वह रीढ़ की हड्डी के पास से उठा ले; और वह चरबी जो भीतर को ढांपती है, और वह सब चर्बी जो भीतर की ओर है।

10 और दोनों गुर्दों, और चर्बी जो उन पर हों, और जो पेट के पास हों, और कलेजे के ऊपर की झिल्ली को भी, और गुर्दों समेत निकाल ले।

11 और याजक उसको वेदी पर जलाए; यह यहोवा के लिथे हव्य की भेंट का भोजन है।

12 और यदि उसका बलिदान बकरा हो, तो उसे यहोवा के साम्हने चढ़ाना।

13 और वह उसके सिर पर हाथ रखे, और मिलापवाले तम्बू के साम्हने बलि करे; और हारून के पुत्र उसके लोहू को वेदी पर चारोंओर छिड़कें।

14 और वह अपक्की अपक्की भेंट अर्यात् यहोवा के लिथे होमबलि करे; वह चरबी जो भीतर को ढँकती है, और वह सब चर्बी जो भीतर की ओर है।

15 और दोनों गुर्दों, और चर्बी जो उन पर हों, और जो पेट के पास हों, और कलेजे के ऊपर की झिल्ली को भी गुर्दों समेत निकाल ले।

16 और याजक उनको वेदी पर जलाए; यह हव्य के हवन का भोजन है, जो सुगन्ध के लिथे होता है; सारी चर्बी यहोवा की है।

17 यह तेरी पीढ़ी पीढ़ी के लिये तेरे सारे निवासोंमें सदा की विधि ठहरे, कि न तो चरबी और न लोहू खाना।

अध्याय 4

पाप प्रसाद।

1 और यहोवा ने मूसा से कहा,

2 इस्त्राएलियों से यह कह, कि यदि कोई प्राणी अनजाने में यहोवा की किसी आज्ञा के विषय में जो काम न करने योग्य हों, उनके विरूद्ध पाप करे, और उन में से किसी के विरुद्ध करे;

3 यदि अभिषिक्त याजक प्रजा के पाप के अनुसार पाप करे; तब वह अपके पाप के लिथे जो उस ने पाप किया या, अर्थात निर्दोष बछड़ा यहोवा के लिथे पापबलि करके ले आए।

4 और वह बछड़े को मिलापवाले तम्बू के द्वार पर यहोवा के साम्हने ले जाए; और अपना हाथ बछड़े के सिर पर रखे, और उस बछड़े को यहोवा के साम्हने बलि करे।

5 और अभिषिक्त याजक बछड़े के लोहू में से कुछ लेकर मिलापवाले तम्बू में ले जाए;

6 और याजक अपक्की उंगली लोहू में डुबोए, और लोहू पर सात बार यहोवा के साम्हने पवित्रस्यान के परदे के साम्हने छिड़के।

7 और याजक लोहू में से कुछ मिलापवाले तम्बू में यहोवा के साम्हने मीठी धूप की वेदी के सींगोंपर लगाए; और बछड़े का सारा लोहू होमबलि की वेदी की तली पर जो मिलापवाले तम्बू के द्वार पर हो, उंडेल दे।

8 और वह उस में से पापबलि के बछड़े की सारी चर्बी उतार ले; वह चरबी जो भीतर को ढँकती है, और जितनी चर्बी भीतर की है,

9 और उन दोनों गुर्दों और चर्बी को जो उनके पेट के पास हों, और जो कलेजे के ऊपर के खोल को, और गुर्दों समेत निकाल लें,

10 जैसे मेलबलि के बछड़े में से वह उतार दिया गया; और याजक उन्हें होमबलि की वेदी पर जलाए।

11 और बछड़े की खाल, और उसका सारा मांस, और उसके सिर, और उसके पैर, और उसके भीतर, और उसका गोबर।

12 और सारे बछड़े को वह छावनी के बाहर किसी शुद्ध स्थान पर ले जाए, जहां राख उंडेल दी जाती है, और उसे लकड़ी पर आग लगाकर जला दिया जाए; जहां राख डाली जाए, वहीं वह जलाया जाए।

13 और यदि इस्राएल की सारी मण्डली अज्ञानता के कारण पाप करे, और वह बात मण्डली की आंखों से छिपी रहे, और उन कामोंके विषय में जो यहोवा की आज्ञाओं के अनुसार न किए जाएं, और वे दोषी ठहरें;

14 जब उस पाप के विषय में जो उन्होंने पाप किया है, प्रगट हो जाए, तब मण्डली पाप के बदले एक बछड़ा चढ़ाकर मिलापवाले तम्बू के साम्हने ले जाए।

15 और मण्डली के पुरनिये यहोवा के साम्हने बछड़े के सिर पर हाथ रखें; और बछड़ा यहोवा के साम्हने बलि किया जाए।

16 और अभिषिक्त याजक बछड़े के लोहू में से मिलापवाले तम्बू में पहुंचाए;

17 और याजक उस लोहू में से कुछ अपक्की उँगली डुबोकर परदे के साम्हने यहोवा के साम्हने सात बार छिड़के।

18 और उस लोहू में से कुछ उस वेदी के सींगोंपर जो यहोवा के साम्हने मिलापवाले तम्बू में है, लगाए, और सब लोहू होमबलि की वेदी की तली पर उंडेल दे, मण्डली के तम्बू के द्वार पर।

19 और वह अपक्की सब चरबी अपके पास से लेकर वेदी पर जलाए।

20 और वह बछड़े के साथ वैसा ही करे जैसा उस ने पापबलि के बछड़े से किया, वह वैसा ही करे; और याजक उनके लिथे प्रायश्चित्त करे, और वह उनकी क्षमा की जाएगी।

21 और वह उस बछड़े को छावनी के बाहर ले जाए, और उसे वैसे ही जलाए जैसे उसने पहिले बछड़े को जलाया; यह मण्डली के लिए पापबलि है।

22 जब किसी हाकिम ने पाप किया हो, और अपने परमेश्वर यहोवा की उन आज्ञाओं में से जो उन कामों के विषय में जो न की जानी चाहिएं, और वह दोषी ठहरे, अज्ञानता से किया हो;

23 या यदि उसका पाप, जिसके विषय में उस ने पाप किया हो, उसकी पहिचान में आए; वह अपक्की भेंट ले आए, अर्थात एक निर्दोष बकरा, और एक निर्दोष नर;

24 और वह अपना हाथ बकरे के सिर पर रखे, और उस स्थान में जहां वे यहोवा के साम्हने होमबलि का बलि करें, बलि करें; यह पापबलि है।

25 और याजक अपनी उंगली से पापबलि के लोहू में से कुछ लेकर होमबलि की वेदी के सींगोंपर लगाए, और उसका लोहू होमबलि की वेदी के तले पर उंडेल दे।

26 और वह अपक्की सब चर्बी को मेलबलियोंके मेलबलि की चर्बी के समान वेदी पर जलाए; और याजक उसके पाप के लिथे प्रायश्चित्त करे, और वह क्षमा किया जाएगा।

27 और यदि सामान्य लोगों में से कोई अज्ञानता के कारण पाप करे, जबकि वह उन कामों के विषय में जो यहोवा की आज्ञाओं में से किसी के विरुद्ध कुछ न करें, और दोषी हों;

28 या यदि उसका पाप, जो उस ने किया है, उसकी पहिचान में आए; तब वह अपके पाप के लिथे अपके अपके अपके पाप के लिथे बकरोंका एक बालक, अर्या एक निष्कलंक मादा अपक्की भेंट ले आए।

29 और वह अपना हाथ पापबलि के सिर पर रखे, और पापबलि को होमबलि के स्यान में बलि करे।

30 और याजक उसके लोहू में से अपक्की उँगली से लेकर होमबलि की वेदी के सींगोंपर लगाए, और उसका सारा लोहू वेदी के तले पर उंडेल दे।

31 और जिस प्रकार मेलबलि के मेलबलि में से चरबी उठाई जाती है, वैसे ही उसकी सारी चरबी भी वह ले ले; और याजक उसको वेदी पर जलाए, कि यहोवा का सुगन्ध आए; और याजक उसके लिथे प्रायश्चित्त करे, और वह क्षमा किया जाएगा।

32 और यदि वह पापबलि के लिथे एक भेड़ का बच्चा लाए, तो वह निर्दोष मादा ले आए।

33 और वह अपना हाथ पापबलि के सिर पर रखे, और उसको पापबलि के लिथे उसी स्थान पर बलि करे जहां वे होमबलि को बलि करते हैं।

34 और याजक अपक्की उंगली से पापबलि के लोहू में से कुछ लेकर होमबलि की वेदी के सींगोंपर लगाए, और उसका सब लोहू वेदी के तले पर उंडेल दे;

35 और जिस प्रकार मेलबलि में से भेड़ के बच्चे की चरबी छीन ली जाती है, वैसे ही उसकी सारी चरबी भी वह ले ले; और याजक उन्हें वेदी पर यहोवा के लिये हव्यबलि के अनुसार जलाए; और याजक अपके उस पाप का प्रायश्चित्त करे जो उस ने किया है, और वह क्षमा किया जाएगा।

अध्याय 5

पाप के लिए प्रसाद।

1 और यदि कोई जीव पाप करे, और शपय का शब्द सुनकर साक्षी हो, कि उस ने देखा या जाना है; यदि वह न बोले, तो अपके अधर्म का भार वहन करेगा।

2 या यदि कोई जीव किसी अशुद्ध वस्तु को छूए, चाहे वह अशुद्ध पशु की लोथ, वा अशुद्ध पशुओं की लोथ, वा अशुद्ध रेंगनेवाले पशुओं की लोथ, और उस से छिपी रहे; वह भी अशुद्ध और दोषी ठहरेगा।

3 या यदि वह मनुष्य की अशुद्धता को छुए, चाहे वह किसी भी प्रकार की अशुद्धता हो, तो मनुष्य अशुद्ध होकर उस से छिपा रहे; जब वह यह जानता है, तो वह दोषी होगा।

4 और यदि कोई अपके होठोंसे अपके होठोंसे अपके बुरे काम वा भलाई करने की शपथ खाए, तो जो कुछ कोई शपय से कहे, और वह उस से छिपा रहे; जब वह इसे जानता है, तो वह इनमें से किसी एक में दोषी होगा।

5 और जब वह इन बातोंमें से किसी एक में दोषी ठहरे, तब वह मान ले कि उस ने उस में पाप किया है;

6 और वह अपके पापबलि के लिथे अपके अपके पापबलि, अर्यात् भेड़-बकरी वा भेड़ का बच्चा वा बकरे का बच्चा, अपके पापबलि के लिथे अपके अपके अपराधबलि को अपके लिथे ले आए; और याजक उसके पाप के विषय में उसके लिथे प्रायश्चित्त करे।

7 और यदि वह भेड़ का बच्चा न ले आए, तो अपके अपके अपराध के लिथे जो अपके अपके अपके अपके पंडुक वा पंडुक वा कबूतरी के दो बच्चे यहोवा के लिथे ले आए; एक पापबलि के लिथे, और दूसरा होमबलि के लिथे।

8 और वह उनको याजक के पास ले आए, जो पहिले पापबलि के लिथे चढ़ाए, और अपके सिर को उसके गले से उतार ले, परन्‍तु उसे अलग न करे;

9 और वह पापबलि के लोहू पर से वेदी की अलंग पर छिड़के; और शेष लोहू वेदी की तलहटी में निकाल दिया जाए; यह पापबलि है।

10 और वह दूसरे को होमबलि के लिथे इस रीति के अनुसार चढ़ाए; और याजक उसके उस पाप का प्रायश्चित्त करे जिस से उस ने पाप किया है, और वह क्षमा किया जाएगा।

11 परन्तु यदि वह दो पंडुक वा कबूतरी के दो बच्चे न ला सके, तो पापी अपके अपके अपके अपके लिथे पापबलि करके एपा का दसवां अंश मैदा ले आए; वह उस पर तेल न लगाए, और न लोबान रखे; क्योंकि यह पापबलि है।

12 तब वह उसको याजक के पास ले आए, और याजक उसकी मुट्ठी में से उसका स्मरण करके अपक्की मुट्ठी लेकर वेदी पर यहोवा के लिथे हवनबलि के अनुसार वेदी पर जलाए; यह पापबलि है।

13 और याजक उसके लिथे अपके उस पाप के लिथे प्रायश्चित्त करे, जिस ने इन में से किसी एक के लिथे पाप किया है, और उसका अपराध क्षमा किया जाए; और बचे हुए लोग अन्नबलि करके याजक के हों।

14 तब यहोवा ने मूसा से कहा,

15 यदि कोई प्राण यहोवा के पवित्रा कामोंमें अनभिज्ञ होकर अपराध करे, और पाप करे; तब वह अपके वृक्षोंके लिथे भेड़-बकरियोंमें से एक निष्कलंक मेढ़ा यहोवा के पास ले आए, और तेरा मोल पवित्रस्यान के शेकेल के अनुसार अतिचार के लिथे चांदी के शेकेल हो;

16 और वह अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपके लिथे प्रायश्चित करे, और उसका पांचवां भाग बढ़ाकर याजक को दे; और याजक अपराधबलि के मेढ़े से उसके लिथे प्रायश्चित्त करे, और वह क्षमा किया जाएगा।

17 और यदि कोई प्राणी पाप करे, और इन में से कुछ काम करे जो यहोवा की आज्ञाओं के अनुसार करने से मना है; चाहे वह न चाहे, तौभी वह दोषी है, और अपके अधर्म का भार वहन करेगा।

18 और वह भेड़-बकरी में से एक निर्दोष मेढ़ा याजक के लिथे तेरे गिनने के लिथे अपराधबलि के लिथे ले आए; और याजक अपके उस अज्ञान के लिथे प्रायश्चित्त करे जिस में उस ने भूल की या कि वह न माने, और उसका अपराध क्षमा किया जाएगा।

19 यह अतिचार है; उसने निश्चय यहोवा के विरुद्ध अपराध किया है।

अध्याय 6

विविध प्रसाद।

1 और यहोवा ने मूसा से कहा,

2 यदि कोई जीव पाप करे, और यहोवा का अपराध करे, और अपके पड़ोसी से झूठ बोलकर, जो उसको पकड़वाने के लिथे छुड़ाया गया है, वा संगति में, वा हिंसा से छीनी गई वस्तु में, वा अपके पड़ोसी को धोखा दिया है;

3 वा खोई हुई को पाकर उसके विषय में झूठ बोलता, और झूठी शपथ खाता हूं; इन सब में से जो कुछ मनुष्य करता है, उस में वह पाप करता है;

4 तब यह होगा, कि उस ने पाप किया है, और दोषी है, कि जो कुछ उस ने छीन लिया है, वा वह वस्तु जिसे उसने छल से प्राप्त किया है, या जो उसे रखने के लिए दिया गया है, या वह खोई हुई वस्तु जिसे उसने वापस ले लिया है मिल गया,

5 वा वह सब जिसके विषय में उस ने झूठी शपय खाई हो; वह उसे मूलधन में फेर दे, और उस में पांचवां भाग और बढ़ाए, और जिस को वह मिले, उसे अपके अतिचार के दिन दे।

6 और वह अपके अपके दोषबलि को यहोवा के लिथे याजक के लिथे अपके झुण्ड में से एक निर्दोष मेढ़ा अपके साय अपके दोषबलि करके याजक के लिथे ले आए;

7 और याजक उसके लिथे यहोवा के साम्हने प्रायश्चित्त करे; और जो कुछ उस ने उस में अपराध करके किया हो, वह सब उसके सब कामोंके लिथे क्षमा किया जाए।

8 और यहोवा ने मूसा से कहा,

9 हारून और उसके पुत्रोंको आज्ञा दे, कि होमबलि की व्यवस्था यह है; यह होमबलि है, क्योंकि वेदी पर रात भर भोर तक जलते रहे, और वेदी की आग उस में जलती रहे।

10 और याजक अपके सन का वस्त्र पहिने, और अपक्की सनी की जांघिया अपके शरीर पर पहिए, और वे राख जो आग ने होमबलि के साथ वेदी पर भस्म की हो, उठाकर वेदी के पास रखे।

11 और वह अपके वस्त्र उतारे, और दूसरे वस्त्र पहिने, और राख को छावनी के बाहर किसी शुद्ध स्थान पर ले जाए।

12 और वेदी पर की आग उस में धधकती रहे; इसे बाहर नहीं रखा जाएगा; और याजक प्रतिदिन भोर को उस पर लकडिय़ां जलाए, और होमबलि को उसके ऊपर व्यवस्थित करके रखे; और वह उस पर मेलबलि की चर्बी को जलाए।

13 वेदी पर आग सदा जलती रहेगी; यह कभी बाहर नहीं जाएगा।

14 और अन्नबलि की व्यवस्था यह है; हारून के पुत्र उसको वेदी के साम्हने यहोवा के साम्हने चढ़ाएं।

15 और वह अपक्की मुट्ठी में से अन्नबलि का मैदा, और उसका तेल, और सब लोबान जो अन्नबलि पर हो, ले कर वेदी पर सुगन्ध के लिथे जलाए, अर्थात स्मारक उसमें से, यहोवा को।

16 और उस में से जो बचा रहे वह हारून और उसके पुत्रों समेत खाए; अखमीरी रोटी पवित्र स्थान में खाई जाए; वे उसे मिलापवाले तम्बू के आंगन में खाएंगे।

17 वह खमीर से नहीं पकाना चाहिए। मैं ने उन्हें हवन के द्वारा अपक्की भेंटोंमें से उनके भाग के लिथे दिया है; वह पापबलि और अपराधबलि के समान परमपवित्र है।

18 हारून की सन्तान में से जितने पुरूष उस में से खाएं। यहोवा के हव्यों के विषय में तुम्हारी पीढ़ी पीढ़ी में वह सदा की विधि ठहरे; जो कोई उनको छूए वह पवित्र ठहरे।

19 और यहोवा ने मूसा से कहा,

20 हारून और उसके पुत्रोंकी यह भेंट यह है, जिसे यहोवा के अभिषेक के दिन उसके लिथे चढ़ाना; एपा का दसवां भाग मैदा का अन्नबलि के लिथे सदा के लिथे अर्यात् आधा भोर को, और आधा रात को।

21 वह कड़ाही में तेल से बनायी जाए; और जब वह बेक हो जाए, तब उसे भीतर ले जाना; और मांसबलि के पके हुए टुकड़े यहोवा को सुगन्धित करने के लिथे चढ़ाना।

22 और उसके पुत्रोंका जो उसके स्थान पर अभिषिक्त हो उसका याजक उसको चढ़ाए; यह यहोवा के लिथे सदा की विधि है; वह पूरी तरह जल जाएगा।

23 क्योंकि याजक के लिथे सब अन्नबलि हवन किया जाए; इसे नहीं खाया जाना चाहिए।

24 और यहोवा ने मूसा से कहा,

25 हारून और उसके पुत्रों से कह, कि पापबलि की व्यवस्था यह है; जिस स्थान पर होमबलि का वध किया जाए वह पापबलि यहोवा के साम्हने बलि किया जाए; यह सबसे पवित्र है।

26 जो याजक उसे पाप के लिथे चढ़ाए, वह उसे खाए; वह पवित्र स्थान में मिलापवाले तम्बू के आंगन में खाया जाए।

27 जो कोई उसके मांस को छूए वह पवित्र ठहरे; और जब उसके लोहू में से किसी वस्त्र पर छिड़का जाए, तब जिस पर वह पवित्रस्यान में छिड़का गया हो, उसे धोना।

28 परन्तु जिस मिट्टी के पात्र में वह बोया गया हो, वह तोड़ दिया जाए; और यदि वह पीतल के पात्र में भिगोया जाए, तो वह कोड़े और जल से धोए जाएं।

29 याजकों में से सब पुरूष उस में से खाएं; यह सबसे पवित्र है।

30 और जिस लोहू में से कोई मेल मिलाप करने के लिथे पवित्रस्यान में मेल करने के लिथे मिलापवाले तम्बू में लाया जाए, उसका कोई पापबलि न खाया जाए; वह आग में जल जाएगा।

अध्याय 7

प्रसाद का विधान।

1 वैसे ही अपराधबलि की व्यवस्था भी यह है; यह सबसे पवित्र है।

2 जिस स्थान पर वे होमबलि को बलि करें उसी में अपराधबलि को भी बलि करें; और उसके लोहू को वेदी पर चारोंओर छिड़के।

3 और उसकी सारी चरबी उस में से चढ़ाए; दुम, और चरबी जो भीतरी भाग को ढँकती है।

4 और दोनों गुर्दों, और चर्बी जो उन पर हों, और जो पेट के पास हों, और जो कलेजे के ऊपर के खोल पर हों, उन्हें वह गुर्दों समेत दूर करे;

5 और याजक उनको वेदी पर यहोवा के लिथे हव्य के लिथे जलाए; यह एक अतिचार की भेंट है।

6 याजकों में से हर एक पुरूष उसका भोजन करे; वह पवित्र स्थान में खाया जाए; यह सबसे पवित्र है।

7 जैसा पापबलि है, वैसा ही अपराधबलि भी है; उनके लिए एक कानून है; जो याजक उस से प्रायश्चित्त करे, वह उसको मिले।

8 और जो याजक किसी मनुष्य के होमबलि को चढ़ाए, वह उस होमबलि की खाल जो उस ने चढ़ाई हो, अपके अपके लिथे हो।

9 और वह सब अन्नबलि जो तंदूर में और तवा और कड़ाही के पहिने हुए हों, वे सब भेंट चढ़ानेवाले याजक के हों।

10 और हारून की सन्तान के सब अन्नबलि, जो तेल से सने हुए और सूखे हों, वे एक दूसरे के समान हों।

11 और मेलबलि की जो व्‍यवस्‍था वह यहोवा के लिथे चढ़ाए वह यह है।

12 और यदि वह धन्यवाद के लिथे उसको चढ़ाए, तो वह धन्यवाद के मेलबलि के साथ तेल से सने हुए अखमीरी रोटियां, और तेल से अभिषिक्त अखमीरी खीर, और तेल से सने हुए मैदे की तली हुई रोटियां चढ़ाए।

13 रोटियों के अतिरिक्त वह अपके मेलबलि के लिथे अपक्की मेलबलि के धन्यवादबलि के लिथे खमीरी रोटी भी चढ़ाए।

14 और उस में से वह सारे हवन में से एक को यहोवा के लिथे होमबलि के लिथे चढ़ाए, और वह मेलबलि के लोहू पर छिड़कनेवाले याजक का हो।

15 और उसके मेलबलि का मांस धन्यवाद के लिथे जिस दिन वह चढ़ाया जाए उसी दिन खाया जाए; वह उसमें से किसी को भोर तक न छोड़े।

16 परन्तु यदि उसका बलिदान मन्नत वा स्वेच्छाबलि हो, तो वह उसी दिन खाया जाए जिस दिन वह अपके बलिदान को चढ़ाए; और उसका शेष भाग कल को भी खाया जाए;

17 परन्तु तीसरे दिन बलि के मांस में से जो बचा रहे वह आग में जलाया जाए।

18 और यदि उसके मेलबलि का मांस तीसरे दिन कुछ भी खाया जाए, तो वह ग्रहण न किया जाए, और न उसके चढ़ानेवाले के लिथे कुछ भी ठहराया जाए; वह घृणित होगा, और जो प्राणी उसमें से खाए वह अपके अधर्म का भार उठाएगा।

19 और जो मांस किसी अशुद्ध वस्तु को छूए वह न खाया जाए; वह आग में जला दिया जाएगा; और मांस के लिथे जितने शुद्ध हों, वे सब उस में से खाएंगे।

20 परन्तु जो प्राणी मेलबलि के मेलबलि का मांस खाए, जो यहोवा के लिथे अशुद्ध हो, वह जीव अपके लोगोंमें से नाश किया जाए।

21 और जो प्राणी किसी अशुद्ध वस्तु को, अर्थात मनुष्य की अशुद्धता, वा अशुद्ध पशु, वा घिनौनी अशुद्ध वस्तु को छूए, और मेलबलि के मांस में से जो यहोवा का हो, खाए, वह जीव भी अपने लोगों से कट जाए।

22 और यहोवा ने मूसा से कहा,

23 इस्त्राएलियों से कह, कि तुम किसी प्रकार की चरबी, वा बैल, वा भेड़, वा बकरी का कुछ न खाना।

24 और उस पशु की चर्बी जो अपके मर जाए, और उसकी चर्बी जो पशुओं द्वारा फाड़ दी गई हो, सब काम में ली जाए; परन्तु तुम उसमें से कुछ भी न खाना।

25 क्‍योंकि जो कोई उस पशु की चरबी को खाए, जिस में से मनुष्य यहोवा के लिथे हव्य चढ़ाए, वह जो उसका खाए, वह अपके लोगोंमें से नाश किया जाए।

26 और तुम अपके किसी घर में किसी प्रकार का लोहू न खाना, चाहे वह पक्षी का हो, चाहे पशु का हो।

27 जो कोई प्राणी किसी प्रकार का लोहू खाए, वह जीव अपके लोगोंमें से नाश किया जाए।

28 और यहोवा ने मूसा से कहा,

29 इस्त्राएलियों से यह कह, कि जो अपके मेलबलि का मेल यहोवा के लिथे चढ़ाए, वह अपके मेलबलियोंके मेलबलि का अपक्की भेंट यहोवा के लिथे ले आए।

30 अपके ही हाथ यहोवा के हव्योंको, अर्यात् छाती समेत चरबी ले आए; वह ले आए, जिस से हिलाई हुई भेंट के लिथे छाती यहोवा के साम्हने हिलाई जाए।

31 और याजक चरबी को वेदी पर जलाए; परन्तु छाती हारून और उसके पुत्रों की हो।

32 और अपके मेलबलियोंके मेलबलि के लिथे दहिना कंधा याजक को देना।

33 हारून की सन्तान में से जो मेलबलियोंके लोहू और चरबी को चढ़ाए, उसका दहिना कंधा अपके भाग का हो।

34 क्योंकि मैं ने इस्राएलियोंके मेलबलि में से हिलाई हुई छाती और कंधे उठाकर हारून याजक और उसके पुत्रोंके लिथे अपके सन्तान में से सदा की एक विधि के अनुसार दे दी है। इजराइल।

35 जिस दिन यहोवा ने उन्हें याजक के काम में यहोवा की सेवा टहल करने के लिथे ठहराया या, उस दिन यहोवा के हव्योंमें से हारून के अभिषेक और उसके पुत्रोंके अभिषेक का यह भाग;

36 जिसे यहोवा ने इस्त्राएलियोंमें से जिस दिन अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके लिथे पीढ़ी पीढ़ी में युगानुयुग की विधि के अनुसार दी हो, दी जाए।

37 होमबलि, और अन्नबलि, और पापबलि, और अपराधबलि, और अभिषेक, और मेलबलि की व्यवस्था यह है;

38 जिस दिन यहोवा ने सीनै पर्वत पर मूसा को आज्ञा दी, कि उस ने इस्राएलियोंको सीनै के जंगल में यहोवा के लिथे अपके हव्य चढ़ाने की आज्ञा दी।

अध्याय 8

मूसा ने हारून और उसके पुत्रों को उनकी भेंटें अर्पित कीं।

1 और यहोवा ने मूसा से कहा,

2 हारून और उसके पुत्रों को, और वस्त्र, और अभिषेक का तेल, और पापबलि का एक बछड़ा, और दो मेढ़े, और अखमीरी रोटी की एक टोकरी ले लेना;

3 और सारी मण्डली को मिलापवाले तम्बू के द्वार पर इकट्ठा करना।

4 और मूसा ने यहोवा की आज्ञा के अनुसार किया; और मण्डली मिलापवाले तम्बू के द्वार पर इकट्ठी हुई।

5 तब मूसा ने मण्डली से कहा, जिस काम के करने की आज्ञा यहोवा ने दी है वह यह है।

6 तब मूसा ने हारून और उसके पुत्रोंको ले जाकर जल से नहाया।

7 और उस ने उस को अंगरखा पहिनाया, और उसका पहिरावा पहिनाया, और उस को चोगा पहिनाया, और एपोद को पहिनाया, और एपोद की कुटिल कमर से उसको बान्धा, और उस से उस से बान्धा।

8 और उस ने चपरास अपके लिथे रखा; और उस ने ऊरीम और तुम्मीम को भी चपरास में रखा।

9 और उस ने पगड़ी उसके सिर पर धर दी; और उसके आगे के भाग पर भी उस ने सोने का प्याला, पवित्र मुकुट लगाया; जैसा यहोवा ने मूसा को आज्ञा दी थी।

10 तब मूसा ने अभिषेक का तेल लेकर निवास का और जो कुछ उस में था, उस पर अभिषेक करके उन्हें पवित्र किया।

11 और उस ने उस को वेदी पर सात बार छिड़का, और वेदी और उसके सब पात्र हौदी और उसके पांवोंको पवित्र करने के लिथे उनका अभिषेक किया।

12 तब उस ने अभिषेक के तेल में से हारून के सिर पर उंडेलकर उसका अभिषेक किया, कि वह उसे पवित्र करे।

13 तब मूसा ने हारून के पुत्रोंको पास ले जाकर अंगरखे पहिनाए, और कमरबन्द बान्धे, और बोनट पहिनाए; जैसा यहोवा ने मूसा को आज्ञा दी थी।

14 और वह पापबलि के बछड़े को ले आया; और हारून और उसके पुत्रोंने अपके अपके हाथ पापबलि के लिये बछड़े के सिर पर रखे।

15 और उस ने उसको घात किया; तब मूसा ने लोहू लेकर अपक्की उंगली से वेदी के चारोंओर के सींगोंपर लगाया, और वेदी को शुद्ध किया, और लोहू को वेदी की तलहटी पर उंडेलकर पवित्र किया, कि उस पर मेल मिलाप करे।

16 और उस ने सब चर्बी जो भीतर की ओर थी, और कलेजे के ऊपर की झिल्ली, और दोनोंगुर्दे, और उनकी चरबी को लेकर मूसा ने वेदी पर जला दिया।

17 परन्तु वह बछड़ा, और उसकी खाल, और उसका मांस, और उसका गोबर, छावनी के बाहर आग में जला दिया; जैसा यहोवा ने मूसा को आज्ञा दी थी।

18 और वह होमबलि के लिथे मेढ़े को ले आया; और हारून और उसके पुत्रों ने मेढ़े के सिर पर हाथ रखे।

19 और उस ने उसको घात किया; और मूसा ने लोहू को वेदी पर चारोंओर छिड़का।

20 और उस ने मेढ़े को टुकड़े टुकड़े कर दिया; और मूसा ने सिर, और टुकड़े, और चरबी को जला दिया।

21 और उस ने अन्तर्मन और पांव जल से धोए; और मूसा ने सारे मेढ़े को वेदी पर जला दिया; वह सुगन्धित सुगन्ध के लिये होमबलि, और यहोवा के लिथे हव्य था; जैसा यहोवा ने मूसा को आज्ञा दी थी।

22 और वह दूसरे मेढ़े को ले आया, जो अभिषेक का मेढ़ा था; और हारून और उसके पुत्रों ने मेढ़े के सिर पर हाथ रखे।

23 और उस ने उसको घात किया; और मूसा ने उसके लोहू में से कुछ लेकर हारून के दाहिने कान के सिरे पर, और उसके दाहिने हाथ के अंगूठे पर, और उसके दाहिने पैर के अंगूठे पर लगा दिया।

24 और वह हारून के पुत्रोंको ले आया, और मूसा ने लोहू में से उनके दाहिने कान के सिरे पर, और उनके दाहिने हाथ के अँगूठोंपर, और उनके दाहिने पैर के अंगूठे पर लगाया; और मूसा ने लोहू को वेदी पर चारोंओर छिड़का।

25 और उस ने चरबी, और दुम, और सब चर्बी जो भीतर की ओर थी, और कलेजे के ऊपर की दुम, और दोनोंगुर्दे, और उनकी चरबी, और दहिना कंधा ले लिया;

26 और उस अखमीरी रोटी की टोकरी में से जो यहोवा के साम्हने थी, उस ने एक अखमीरी रोटी, और तेल से सने रोटी की एक टिकिया, और एक पटिया लेकर चरबी पर और दाहिने कंधे पर रख दी;

27 और उस ने सब कुछ हारून के और उसके पुत्रोंके हाथों पर रखकर हिलाने की भेंट के लिथे यहोवा के साम्हने हिलाया।

28 तब मूसा ने उन को उनके हाथ से उठाकर वेदी पर होमबलि पर जलाया; वे एक मीठे स्वाद के लिए अभिषेक थे; यह यहोवा के लिथे हवन की भेंट है।

29 तब मूसा ने छाती को लेकर हिलाई हुई भेंट के लिथे यहोवा के साम्हने हिलाया; क्योंकि अभिषेक के मेढ़े में से वह मूसा का भाग था; जैसा यहोवा ने मूसा को आज्ञा दी थी।

30 तब मूसा ने अभिषेक के तेल और वेदी पर के लोहू में से कुछ लेकर हारून, और उसके वस्त्रों, और उसके पुत्रोंऔर उसके पुत्रोंके वस्त्रोंपर छिड़का; और हारून, और उसके वस्त्र, और उसके पुत्रों, और उसके पुत्रों के वस्त्रों को उसके संग पवित्र किया।

31 तब मूसा ने हारून और उसके पुत्रोंसे कहा, मांस मिलापवाले तम्बू के द्वार पर उबालो; और उस रोटी के साथ जो अभिषेक की टोकरी में है, खाओ, जैसा मैं ने आज्ञा दी, कि हारून और उसके पुत्र उसको खाएंगे।

32 और जो मांस और रोटी में से बचा रहे, उसे तुम आग में जलाना।

33 और जब तक तुम्हारे पवित्राकरण के दिन पूरे न हो जाएं, तब तक सात दिन तक मिलापवाले तम्बू के द्वार से बाहर न निकलना; वह सात दिन तक तुझे पवित्र करेगा।

34 जैसा उस ने आज के दिन किया है, वैसा ही करने की आज्ञा यहोवा ने दी है, कि तुम्हारे लिथे प्रायश्चित्त करे।

35 इस कारण सात दिन रात मिलापवाले तम्बू के द्वार पर रहना, और यहोवा की आज्ञा का पालन करना, ऐसा न हो कि मरना पड़े; इसलिए कि मुझे आज्ञा दी गई है।

36 तब हारून और उसके पुत्रों ने वे सब काम किए जिनकी आज्ञा यहोवा ने मूसा से दी थी।

अध्याय 9

हारून की पहली भेंट - आग यहोवा की ओर से आती है।

1 आठवें दिन को मूसा ने हारून और उसके पुत्रों, और इस्राएल के पुरनियोंको बुलवा भेजा;

2 और उस ने हारून से कहा, पापबलि के लिथे एक बछड़ा, और होमबलि के लिथे एक निर्दोष मेढ़ा ले कर यहोवा के साम्हने चढ़ाना।

3 और इस्त्राएलियोंसे यह कहना, कि पापबलि के लिथे एक बकरे का बच्चा ले जाना; और होमबलि के लिथे एक पहिले वर्ष का एक निर्दोष बछड़ा और एक मेमना।

4 और मेलबलि के लिथे एक बछड़ा और एक मेढ़ा यहोवा के साम्हने मेलबलि करने को; और तेल से सना हुआ मांसबलि; क्‍योंकि आज के दिन यहोवा तुझ को दिखाई देगा।

5 और वे जो आज्ञा मूसा ने मिलापवाले तम्बू के साम्हने ले आए; और सारी मण्डली समीप आकर यहोवा के साम्हने खड़ी हो गई।

6 तब मूसा ने कहा, जिस काम के करने की आज्ञा यहोवा ने दी है वह यह है; और यहोवा का तेज तुझे दिखाई देगा।

7 तब मूसा ने हारून से कहा, वेदी पर जाकर अपके पापबलि और होमबलि को चढ़ा, और अपके और अपके अपके और प्रजा के लिथे प्रायश्चित्त कर; और लोगों की भेंट चढ़ाकर उनके लिथे प्रायश्चित्त करना; जैसा कि यहोवा ने आज्ञा दी थी।

8 तब हारून ने वेदी के पास जाकर उस पापबलि के बछड़े को जो अपके लिथे घात किया या।।

9 और हारून के पुत्र लोहू को उसके पास ले आए; और उस ने अपक्की उंगली लोहू में डुबोई, और वेदी के सींगोंपर लगाई, और लोहू को वेदी की तलहटी पर उंडेल दिया।

10 परन्तु चरबी और गुर्दों, और पापबलि के कलेजे के ऊपर की कली को उस ने वेदी पर जलाया, जिस प्रकार यहोवा ने मूसा को आज्ञा दी थी।

11 और मांस और खाल को उस ने छावनी के बाहर आग में जला दिया।

12 और उस ने होमबलि को घात किया; और हारून के पुत्रों ने उस लोहू को उसके पास पहुंचा दिया, जिसे उस ने वेदी पर चारोंओर छिड़का था।

13 और उन्होंने होमबलि के टुकड़े और सिर समेत उसके लिथे भेंट चढ़ाई; और उस ने उन्हें वेदी पर जला दिया।

14 और उस ने अन्तर्मन और टांगोंको धोकर वेदी पर होमबलि पर जलाया।

15 और वह लोगों की भेंट ले आया, और उस बकरे को, जो लोगोंके लिथे पापबलि या, ले कर घात किया, और पहिले के समान पापबलि करके उसको चढ़ाया।

16 और वह होमबलि को ले आया, और उसके अनुसार भेंट चढ़ा।

17 और वह अन्नबलि को ले आया, और उसकी एक मुट्ठी लेकर भोर के होमबलि के अतिरिक्त वेदी पर जला दिया।

18 उस ने मेलबलि के लिथे जो लोगोंके लिथे या, उस ने बछड़े और मेढ़े को भी घात किया; और हारून के पुत्रों ने उस लोहू को, जिसे उस ने वेदी पर चारोंओर छिड़का या, उसके आगे चढ़ाया,

19 और बछड़े की चर्बी, और मेढ़े की चर्बी, और दुम, और भीतरी भाग को, और गुर्दोंको, और कलेजे के ऊपर की दुम को;

20 और उन्होंने चरबी को छाती पर लगाया, और उस ने चरबी को वेदी पर जलाया;

21 और छाती और दाहिने कंधे को हारून ने हिलाने की भेंट के लिथे यहोवा के साम्हने हिलाया; जैसा कि मूसा ने आज्ञा दी थी।

22 और हारून ने प्रजा की ओर हाथ बढ़ाकर उन्हें आशीर्वाद दिया; और पापबलि, और होमबलि, और मेलबलि करके नीचे उतर आए।

23 तब मूसा और हारून ने मिलापवाले तम्बू में जाकर निकलकर प्रजा को आशीर्वाद दिया; और यहोवा का तेज सब लोगों को दिखाई दिया।

24 और यहोवा के साम्हने से आग निकली, और वेदी पर होमबलि और चरबी भस्म कर दी; जिसे सब लोगों ने देखकर ललकार कर मुंह के बल गिरे।

अध्याय 10

नादाब और अबीहू जलाए जाते हैं—याजकों को दाखमधु वर्जित है।

1 और हारून के पुत्र नादाब और अबीहू ने अपके धूपदान में से किसी एक को लेकर उस में आग लगाकर उस में धूप डाली, और यहोवा के साम्हने पराई आग की, जिसकी आज्ञा उस ने उन्हें नहीं दी।

2 और यहोवा की ओर से आग निकलकर उन को भस्म कर गई, और वे यहोवा के साम्हने मर गए।

3 तब मूसा ने हारून से कहा, जो यहोवा ने कहा या, वह यह है, कि जो मेरे समीप आएंगे, उनके कारण मैं पवित्र ठहरूंगा, और सब लोगोंके साम्हने मेरी महिमा होगी। और हारून चुप रहा।

4 तब मूसा ने हारून के चाचा उज्जीएल के पुत्र मीशाएल और एल्सापान को बुलाकर उन से कहा, निकट आ, अपके भाइयोंको पवित्रस्थान के साम्हने से छावनी में से निकाल ले।

5 तब वे समीप जाकर अपके अपके अंगरखे पहिने हुए छावनी से बाहर ले गए; जैसा मूसा ने कहा था।

6 तब मूसा ने हारून, और एलीआजर, और उसके पुत्र ईतामार से कहा, अपके सिर न ढांपना, और न अपके वस्त्र फाड़ना; ऐसा न हो कि तुम मर जाओ, और ऐसा न हो कि सब लोगों पर कोप भड़क उठे; परन्तु अपके भाई इस्राएल का सारा घराना उस आग के लिथे जो यहोवा ने जलाया है जयजयकार करें।।

7 और मिलापवाले तम्बू के द्वार से बाहर न जाना, ऐसा न हो कि तुम मर जाओ; क्योंकि यहोवा के अभिषेक का तेल तुम्हारे ऊपर है। और उन्होंने मूसा के वचन के अनुसार किया।

8 और यहोवा ने हारून से कहा,

9 जब तू मिलापवाले तम्बू में जाए, तब तू न तो दाखमधु पीना, और न अपने पुत्रोंके संग, ऐसा न हो कि मर जाएं; वह तेरी पीढ़ी पीढ़ी में सदा की विधि ठहरे;

10 और तुम पवित्र और अपवित्र में, और अशुद्ध और शुद्ध के बीच भेद कर सकते हो;

11 और इसलिथे कि तुम इस्राएलियोंको वे सब विधियां सिखाओ, जो यहोवा ने मूसा के द्वारा उन से कही यीं।

12 तब मूसा ने हारून और एलीआजर और उसके बचे हुए पुत्र ईतामार से कहा, यहोवा के होमबलि के बचे हुए अन्नबलि को लेकर वेदी के पास बिना खमीर खाओ; क्योंकि वह परम पवित्र है।

13 और उसको पवित्रस्थान में खाना, क्योंकि यहोवा के हव्योंमें से जो तेरा और तेरे पुत्रोंका हक है, वह तुझे मिले; क्योंकि मुझे आज्ञा दी गई है।

14 और हिलाई हुई छाती और कन्धा उठाकर शुद्ध स्थान में खाना; तू और तेरे बेटे, और तेरी बेटियां तेरे संग; क्योंकि जो इस्राएलियों के मेलबलियों में से दिए जाते हैं, वे तेरा और तेरे पुत्रों का हक हैं।

15 वे कंधे उठाकर और हिलाई हुई छाती को चरबी की आग के हव्यबलि समेत यहोवा के साम्हने हिलाने की भेंट के लिथे हिलाने के लिथे ले आएं; और वह तेरी और तेरे पुत्रोंके संग सदा की विधि के अनुसार ठहरे; जैसा यहोवा ने आज्ञा दी है।

16 तब मूसा ने पापबलि के बकरे की यत्न से खोज की, और क्या देखा, कि वह जल गया; और वह हारून के जीवित बचे पुत्र एलीआजर और ईतामार पर यह कहकर क्रोधित हुआ,

17 क्‍योंकि तुम ने पापबलि को पवित्रस्‍थान में नहीं खाया, क्‍योंकि वह परम पवित्र है, और परमेश्वर ने तुझे मण्डली के अधर्म का भार उठाने, और उनके लिथे यहोवा के साम्हने प्रायश्चित्त करने को दिया है?

18 देखो, उसका लोहू पवित्रस्यान में नहीं लाया गया; जैसा मैं ने आज्ञा दी थी, तुम उसे पवित्र स्थान में खा लेना चाहिए था।

19 और हारून ने मूसा से कहा, सुन, आज के दिन उन्होंने अपके पापबलि और अपके होमबलि को यहोवा के साम्हने चढ़ाया है; और ऐसी बातें मुझ पर पड़ी हैं; और यदि मैं ने आज के दिन पापबलि को खाया होता, तो क्या वह यहोवा के साम्हने ग्रहण किया जाता?

20 जब मूसा ने यह सुना तो वह सन्तुष्ट हुआ।

अध्याय 11

क्या खा सकते हैं और क्या नहीं खा सकते हैं।

1 और यहोवा ने मूसा और हारून से उन से कहा,

2 इस्त्राएलियों से कह, कि जितने पशु तुम पृय्वी के सब पशुओं में से खाओगे ये वे पशु हैं।

3 जो कोई खुर को फाड़े, और पांव फाड़े, और पशुओं में से पाग को चबाए, वही तुम खाओ।

4 तौभी पागुर वा खुर के फांकने वालों में से ये न खाना; ऊँट की नाईं, क्योंकि वह पाग को तो चबाता है, परन्तु खुर को नहीं बाँटता; वह तुम्हारे लिए अशुद्ध है।

5 और शंकु, क्योंकि वह पाग को तो चबाता है, परन्तु खुर को नहीं तोड़ता; वह तुम्हारे लिए अशुद्ध है।

6 और खरगोश, क्योंकि वह पाग को तो चबाता है, परन्तु खुर को नहीं फाड़ता; वह तुम्हारे लिए अशुद्ध है।

7 और सूअर चाहे वह खुर को फाड़े, और पांव फाड़े, तौभी वह पाग को नहीं चबाता; वह तुम्हारे लिए अशुद्ध है।

8 उनके मांस में से न खाना, और न उनकी लोथ को छूना; वे तुम्हारे लिये अशुद्ध हैं।

9 जितने जल में हों उन सभों में से तुम उन्हें खाओगे; जो जल, समुद्र और नदियों में पंख और शल्क हों, उन्हें तुम खाओ।

10 और समुद्र, और नदियोंमें, और जितने जल में रेंगते हैं, और जितने प्राणी जल में रहते हैं उन सभोंमें से जिनके पंख और तराजू न हों, वे सब तुम्हारे लिथे घृणित ठहरेंगे;

11 वे तेरे लिथे घृणित ठहरेंगे; उनके मांस में से कुछ न खाना, परन्तु उनकी लोथों को घिनौनी वस्तु देना।

12 जिस किसी के जल में पंख और तराजू न हों, वह तुम्हारे लिथे घृणित ठहरेगा।

13 और जो पझियोंके बीच तुम घिनौनी रीति से पाओगे वे ये हैं; वे खाए न जाएं, वे घृणित हैं; चील, और ossifrage, और ospray।

14 और गिद्ध, और उसके जाति के अनुसार पतंग;

15 हर एक कौवे अपनी जाति के अनुसार;

16 और उल्लू, और सांझ, और कोयल, और अपनी जाति के अनुसार बाज,

17 और छोटा उल्लू, और जलकाग, और बड़ा उल्लू,

18 और हंस, और पेलिकन, और गीर उकाब,

19 और सारस, और उसकी जाति के अनुसार बगुला, और चिड़िया, और बल्ला।

20 सब पक्षी जो रेंगते हुए चारोंओर पर चढ़ें, वे सब तेरे लिथे घृणित ठहरेंगे।

21 तौभी जो उड़नेवाले रेंगने वाले जन्तुओं के सब चारोंपर चढ़ते हैं, और जिनके पांव ऊपर से पृय्वी पर उछलने को हैं, उन में से तुम इन्हें खा सकते हो:

22 इन में से तुम भी खा सकते हो; अपनी जाति के अनुसार टिड्डे, और अपनी जाति के अनुसार गंजा टिड्डे, और अपनी जाति के बाद भृंग, और टिड्डे अपनी जाति के अनुसार।

23 और सब उड़नेवाले रेंगनेवाले जन्तु, जिनके चार पांव हैं, तुम से घृणित ठहरेंगे।

24 और इनके लिये तुम अशुद्ध ठहरोगे; जो कोई उनकी लोथ को छूए वह सांफ तक अशुद्ध रहे।

25 और जो कोई उनकी लोय में से कुछ उठाए वह अपके वस्त्र धोए, और सांफ तक अशुद्ध रहे।

26 जितने पशु खुर को बाँटते हैं, और न पाँवोंवाले, और न पाग को चबाते हैं, वे सब तुम्हारे लिथे अशुद्ध हैं; जो कोई उन्हें छूए वह अशुद्ध ठहरे।

27 और सब प्रकार के पशुओं में से जो चारोंओर पर चलते हैं, जो कुछ उसके पंजों पर चलता है, वह तुम्हारे लिए अशुद्ध है; जो कोई उनकी लोथ को छूए वह सांफ तक अशुद्ध रहे।

28 और जो उनकी लोय उठाए वह अपके वस्त्र धोए, और सांफ तक अशुद्ध रहे; वे तुम्हारे लिये अशुद्ध हैं।

29 ये भी पृय्वी पर रेंगनेवाले रेंगनेवाले जन्तुओं में से तुम्हारे लिथे अशुद्ध ठहरें; नेवला, और चूहा, और कछुआ अपनी तरह का।

30 और फेर्रेट, गिरगिट, छिपकली, और घोंघा, और तिल।

31 सब रेंगनेवालोंमें से ये तेरे लिथे अशुद्ध हैं; जो कोई उन्हें छूए, जब वे मर जाएं, वह सांफ तक अशुद्ध रहे।

32 और उन में से जो कोई मरे हुए उस पर गिरे, वह अशुद्ध ठहरे; चाहे लकड़ी का कोई पात्र वा वस्त्र वा खाल वा बोरी का कोई पात्र हो, जिस में कोई काम हो, वह जल में डाला जाए, और सांफ तक अशुद्ध रहे; इसलिए इसे शुद्ध किया जाएगा।

33 और मिट्टी का सब पात्र जिस में उन में से कोई गिरे, वह सब अशुद्ध ठहरे; और तुम उसे तोड़ोगे।

34 जितने मांस खाए जाएं उन सभोंमें से जिस पर ऐसा जल आए वह अशुद्ध ठहरे; और जितने पात्र ऐसे किसी पात्र में पिए जाएं वे सब अशुद्ध ठहरें।

35 और जिस वस्तु में उनकी लोय का कुछ भाग निकले वह सब अशुद्ध ठहरे; चाहे वह भट्टी हो, वा बर्तनों के लिये बाड़े, वे तोड़े जाएं; क्योंकि वे अशुद्ध हैं, और तुम्हारे लिये अशुद्ध ठहरेंगे।

36 तौभी कोई सोता वा गड्ढा जिस में बहुत जल हो, वह शुद्ध रहे; परन्तु जो उनकी लोथ को छूए वह अशुद्ध ठहरे।

37 और यदि उनकी लोय का कोई भाग किसी बोए जानेवाले बीज पर पड़े, तो वह शुद्ध ठहरे।

38 परन्तु यदि बीज पर कोई जल डाला जाए, और उनकी लोय में से कुछ उस पर पड़े, तो वह तुम्हारे लिथे अशुद्ध ठहरे।

39 और यदि कोई पशु जिस में से तुम खाओ, वह मर जाए; जो कोई उसकी लोय को छूए वह सांफ तक अशुद्ध रहे।

40 और जो कोई उसकी लोय में से खाए वह अपके वस्त्र धोए, और सांफ तक अशुद्ध रहे; और जो उसकी लोय उठाए वह अपके वस्त्र धोए, और सांफ तक अशुद्ध रहे।

41 और जितने रेंगनेवाले जन्तु पृय्वी पर रेंगते हैं वे सब घृणित ठहरें; इसे नहीं खाया जाना चाहिए।

42 जो कुछ पेट पर पड़े, और जो सब चारों पर चढ़े, वा पृय्वी पर रेंगनेवाले सब रेंगनेवाले जन्तुओं में से जिस के पांव अधिक हों, उन को तुम न खाना; क्योंकि वे घृणित हैं।

43 किसी रेंगनेवाले जन्तु के द्वारा जो रेंगता है अपने आप को घृणित न करना, और न उनके साथ अपने आप को अशुद्ध करना, कि उसके द्वारा तुम अशुद्ध हो जाओ।

44 क्योंकि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं; इसलिथे तुम अपने आप को पवित्र करना, और पवित्र ठहरना; क्योंकि मैं पवित्र हूँ; और पृय्वी पर रेंगनेवाले किसी प्रकार के रेंगनेवाले जन्तु से अपके आप को अशुद्ध न करना।

45 क्योंकि मैं यहोवा हूं, जो तुम को मिस्र देश से निकालकर तुम्हारा परमेश्वर होने के लिथे ले आया हूं; इसलिये तुम पवित्र ठहरो, क्योंकि मैं पवित्र हूं।

46 पशुओं, और पक्षियों, और जल में रेंगने वाले सब जन्तुओं, और पृय्वी पर रेंगने वाले सब जन्तुओं की व्यवस्था यह है;

47 अशुद्ध और शुद्ध, और खानेवाले पशु और खाने योग्य पशु के बीच भेद करना।

अध्याय 12

शुद्धि के नियम।

1 और यहोवा ने मूसा से कहा,

2 इस्त्राएलियों से यह कह, कि यदि कोई स्त्री गर्भवती हो, और उसके एक पुरूष हो, तो वह सात दिन तक अशुद्ध रहे; अपक्की दुर्बलता के कारण अलगाव के दिनोंके अनुसार वह अशुद्ध ठहरे।

3 और आठवें दिन लड़के का खतना किया जाए।

4 तब वह अपने शुद्ध किए जाने के समय, जो साढ़े तीन दिन का होगा, में बनी रहेगी; जब तक उसके शुद्ध करने के दिन पूरे न हों, तब तक वह किसी पवित्र वस्तु को न छूए, और न पवित्रस्थान में आए।

5 परन्तु यदि वह लौंडी उत्पन्न करे, तो वह दो सप्ताह तक अशुद्ध रहे, जैसा कि उसके अलग रहने के समय हुआ था; और वह साठ छ: दिन तक शुद्ध होती रहे।

6 और जब उसके शुद्ध होने के दिन पूरे हों, तो पुत्र वा बेटी के लिथे वह होमबलि के लिथे पहिले वर्ष का एक मेमना, और पापबलि के लिथे कबूतर का बच्चा, वा पंडुक का बच्चा ले आए। मिलापवाले तम्बू का द्वार याजक के पास;

7 जो उसे यहोवा के साम्हने चढ़ाए, और उसके लिथे प्रायश्चित्त करे; और वह अपके लोहू के कारण से शुद्ध की जाएगी। यह उसके लिए कानून है जिसने एक पुरुष या एक महिला को जन्म दिया है।

8 और यदि वह भेड़ का बच्चा न ला सके, तो दो कछुए वा कबूतरी के दो बच्चे लाए; एक होमबलि के लिथे, और दूसरा पापबलि के लिथे; और याजक उसके लिथे प्रायश्चित्त करे, और वह शुद्ध ठहरे।

अध्याय 13

कुष्ठ रोग के नियम और संकेत।

1 और यहोवा ने मूसा और हारून से कहा,

2 जब किसी मनुष्य के शरीर की खाल पर कोई उभरी हुई पपड़ी, वा चमकीला धब्बा हो, और वह उसके शरीर पर कोढ़ के व्याधि के समान हो; तब वह हारून याजक के पास या उसके पुत्रोंमें से एक याजक के पास ले जाए;

3 और याजक उस व्याधि को जो मांस के चर्म पर है देखे; और जब व्याधि के बाल सफेद हो जाएं, और व्याधि उसके शरीर की खाल से भी अधिक गहरी हो जाए, तब वह कोढ़ की व्याधि होती है; और याजक उस पर दृष्टि करके उसको अशुद्ध ठहराए।

4 यदि उसके शरीर की चमड़ी का चमकीला धब्बा उजला हो, और देखने में वह चर्म से गहरा न हो, और उसके बाल सफेद न हों; तब याजक उस व्याधि को सात दिन तक बन्द रखे;

5 और सातवें दिन याजक उस पर दृष्टि करे; और देखो, यदि व्याधि उसकी दृष्टि में बनी रहे, और व्याधि चर्म पर न फैली हो; तब याजक उसे सात दिन और बन्द करके रखे;

6 और सातवें दिन याजक उस पर फिर दृष्टि करे; और देखो, यदि व्याधि कुछ अन्धियारी हो, और व्याधि चर्म पर न फैली हो, तो याजक उसे शुद्ध ठहराए; यह केवल एक पपड़ी है; और वह अपके वस्त्र धोकर शुद्ध ठहरे।

7 परन्तु यदि पपड़ी चर्म में बहुत फैल जाए, और जब वह शुद्ध होने के लिथे याजक को दिखाई दे, तब वह याजक के साम्हने फिर दिखाई देगा;

8 और यदि याजक देखे, कि पपड़ी चर्म पर फैल गई है, तो याजक उसको अशुद्ध ठहराए; यह एक कुष्ठ रोग है।

9 जब किसी मनुष्य को कोढ़ की व्याधि हो, तब वह याजक के पास ले जाए;

10 और याजक उसको देखे; और देखो, यदि उन की खाल उजली हो गई है, और उस से बाल सफेद हो गए हैं, और उठने में शीघ्र कच्चा मांस है;

11 यह उसके शरीर में पुराना कोढ़ है, और याजक उसको अशुद्ध ठहराए, और उसे बन्द न करे; क्योंकि वह अशुद्ध है।

12 और यदि चर्म में कोढ़ फैल जाए, और जिस को व्याधि है उसके सिर से लेकर पांव तक, जहां कहीं याजक की दृष्टि हो, कोढ़ से कोढ़ ढंप जाए;

13 तब याजक विचार करे; और देखो, यदि कोढ़ ने उसके सारे शरीर को ढांप दिया हो, तो वह व्याधि वाले को शुद्ध ठहराए; यह सब सफेद हो गया है; वह साफ है।

14 परन्तु जब उस में कच्चा मांस दिखाई दे, तब वह अशुद्ध ठहरे।

15 और याजक कच्चा मांस देखकर उसे अशुद्ध ठहराए; क्योंकि कच्चा मांस अशुद्ध है; यह एक कुष्ठ रोग है।

16 या यदि कच्चा मांस फिर से फिरकर सफेद हो जाए, तो वह याजक के पास आए;

17 और याजक उसको देखे; और देखो, यदि व्याधि सफेद हो जाए; तब याजक व्याधि वाले को शुद्ध ठहराए; वह साफ है।

18 मांस भी, जिस के चमड़े में फोड़ा हुआ या, और वह चंगा हो गया है,

19 और फोड़े के स्थान पर एक श्वेत, वा चमकीला धब्बा, जो श्वेत, और कुछ लाल रंग का हो, और वह याजक को दिखाया जाए;

20 और जब याजक उसे देखे, तो वह चमड़े से भी नीचे दिखाई दे, और उसके बाल सफेद हो जाएं; याजक उसे अशुद्ध ठहराए; यह फोड़े से फूटे कोढ़ की एक विपत्ति है।

21 परन्तु यदि याजक उस पर दृष्टि करे, और क्या देखे, उस में कोई सफेद बाल न हों, और वह चमड़े से कम न हो, परन्तु कुछ अन्धकारमय हो; तब याजक उसे सात दिन तक बन्द रखे;

22 और यदि वह चर्म में बहुत फैल जाए, तो याजक उसको अशुद्ध ठहराए; यह एक प्लेग है।

23 परन्तु यदि उसका उजियाला उसके स्थान पर बना रहे, और फैल न जाए, तो वह धधकता हुआ फोड़ा है; और याजक उसे शुद्ध ठहराए।

24 या यदि त्वचा पर कोई मांस हो, जिस का जलता हुआ जलता हो, और जो जलता हुआ मांस जलता हो, उसका एक सफेद चमकीला धब्बा हो, चाहे वह कुछ लाल या सफेद हो;

25 तब याजक उस पर दृष्टि करे; और देखो, यदि उजले स्थान के बाल सफेद हो जाएं, और वे चर्म से भी अधिक गहरे हों; यह एक कोढ़ है जो जलने से टूट गया है; इस कारण याजक उसको अशुद्ध ठहराए; यह कुष्ठ रोग है।

26 परन्तु यदि याजक उस पर दृष्टि करे, और क्या देखे, कि उस उजले स्थान पर कोई सफेद बाल न हों, और वह दूसरी खाल से कम न हो, परन्तु कुछ अन्धकारमय हो; तब याजक उसे सात दिन तक बन्द रखे;

27 और सातवें दिन याजक उस पर दृष्टि करे; और यदि वह चर्म में बहुत फैल जाए, तो याजक उसको अशुद्ध ठहराए; यह कुष्ठ रोग है।

28 और यदि उसका चमकीला धब्बा उसके स्थान पर बना रहे, और चर्म में न फैल जाए, परन्तु कुछ अन्धियारा हो; वह जलती हुई आग है, और याजक उसको शुद्ध ठहराए; क्योंकि यह जलन की सूजन है।

29 यदि किसी पुरूष वा स्त्री के सिर वा दाढ़ी पर व्याधि हो;

30 तब याजक उस मरी को देखे; और देखो, यदि वह चर्म से भी अधिक गहरी अन्तर्दृष्टि हो, और उस में पतले पीले बाल हों; तब याजक उसको अशुद्ध ठहराए; यह एक सूखी खोपड़ी है, यहाँ तक कि सिर या दाढ़ी पर कोढ़ भी है।

31 और यदि याजक खोपड़ी की व्याधि पर दृष्टि करे, और देखो, वह चर्म से अधिक गहरी न दिखाई दे, और उस में कोई काले बाल न हों; तब याजक सात दिन तक जिस को सिर की व्याधि हो, उसको बन्द कर;

32 और सातवें दिन याजक उस व्याधि पर दृष्टि करे; और देखो, यदि लट्ठा न फैल जाए, और उस में बाल पीले न हों, और उसका सिरा चर्म से अधिक गहरा न हो;

33 वह मुंडाया जाए, परन्तु सिर के बाल मुंडाए न जाए; और याजक उस लज्जा को सात दिन तक बन्द रखे;

34 और सातवें दिन याजक उस खोपड़ी को देखे; और देखो, यदि पपड़ी चर्म पर फैल न जाए, और न चर्म से अधिक गहरी दिखाई दे; तब याजक उसको शुद्ध ठहराए; और वह अपके वस्त्र धोकर शुद्ध ठहरे।

35 परन्तु यदि उसके शुद्ध होने के पश्चात् उसके चर्म में बहुत अधिक छाल फैल जाए;

36 तब याजक उस पर दृष्टि करे; और देखो, यदि पपड़ी चर्म में फैल जाए, तो याजक पीले बाल न ढूंढ़ेगा; वह अशुद्ध है।

37 परन्तु यदि लट्ठा उसके साम्हने ठहरे, और उस में काले बाल उग आए हों; खोपड़ी चंगा है, वह शुद्ध है; और याजक उसे शुद्ध ठहराए।

38 यदि किसी पुरूष वा स्त्री के चर्म पर उनके शरीर पर चमकीले धब्बे हों, यहां तक कि सफेद भी चमकीले धब्बे हों;

39 तब याजक देखेगा; और देखो, यदि उनके मांस के चर्म पर के चमकीले धब्बे गहरे उजले हो जाएं, तो वह चर्म में झाइयां उगता है; वह साफ है।

40 और जिसके सिर के बाल झड़ गए हैं, वह गंजा है; फिर भी वह साफ है।

41 और जिसके सिर के बाल गिरे हुए सिर से मुंह की ओर गिरे हों, वह माथा गंजा है; फिर भी वह साफ है।

42 और यदि सिर के गंजे, वा गंजे माथे पर लाल लाल सफेद घाव हो; यह उसके गंजे सिर, या उसके गंजे माथे पर उग आया कोढ़ है।

43 तब याजक उस पर दृष्टि करे; और देखो, यदि उसके गंजे सिर पर या उसके गंजे माथे पर व्याधि का घाव सफेद लाल रंग का हो, जैसा शरीर की त्वचा पर कोढ़ का होता है;

44 वह कोढ़ है, वह अशुद्ध है; याजक उसे सर्वथा अशुद्ध ठहराए; उसका प्लेग उसके सिर में है।

45 और जिस कोढ़ी में व्याधि हो, उसके वस्त्र फटे, और उसका सिर उजला हो, और वह अपके ऊपर के होंठ पर ओढ़े, और यह पुकार, कि अशुद्ध, अशुद्ध हो।

46 जितने दिन व्याधि उस में रहे, जितने दिन वह अशुद्ध रहे; वह अशुद्ध है; वह अकेला रहेगा; बिना छावनी के उसका वास होगा।

47 जिस वस्त्र में कोढ़ की व्याधि होती है, वह ऊनी वस्त्र वा सनी का वस्त्र हो;

48 चाहे वह ताने की हो, वा ऊन की, वा सनी की, वा ऊनी की; चाहे त्वचा में, या त्वचा से बनी किसी चीज में;

49 और यदि व्याधि पहिरे, वा चर्म, वा ताने वा ताने वा चमड़ेकी किसी वस्तु में हरी, वा लाल हो जाए; वह कोढ़ की व्याधि है, और वह याजक को दिखाया जाएगा;

50 और याजक उस व्याधि पर दृष्टि करके उस व्याधि को सात दिन तक बन्द कर;

51 और वह सातवें दिन व्याधि पर दृष्टि करे; यदि व्याधि वस्त्र पर, वा ताने पर, वा ताने पर, वा चमड़े में, वा चमड़े के किसी काम में फैल जाए; प्लेग एक झल्लाहट कोढ़ है; यह अशुद्ध है।

52 सो वह उस वस्त्र को, चाहे ताना-बाना हो, चाहे ऊनी हो, चाहे सनी का, वा चमड़े का, जिस में व्याधि हो, उसको जलाए; क्‍योंकि वह भयंकर कोढ़ है; वह आग में जल जाएगा।

53 और यदि याजक दृष्टि करे, और देखो, व्याधि न तो वस्त्र पर, न ताने पर, और न ऊन में, वा चमड़े की किसी वस्तु में फैले;

54 तब याजक आज्ञा दे, कि जिस वस्तु में व्याधि हो उस वस्तु को वे धो लें, और वह उसको सात दिन और बन्द करे;

55 और याजक उस व्याधि पर दृष्टि करे, जब वह धुल जाए; और देखो, यदि व्याधि अपना रंग न बदले, और व्याधि फैल न जाए, तो वह अशुद्ध है; उसे आग में जलाना; यह भीतर की ओर झल्लाहट है, चाहे वह भीतर या बाहर नंगे हो।

56 और यदि याजक दृष्टि करे, और देखो, व्याधि उसके धोने के पश्चात् कुछ अन्धकारमय हो जाएगी; तब वह उसको वस्त्र में से, वा चमड़े में से, वा ताने में से, वा ताने में से फाड़ डाले;

57 और यदि वह वस्त्र में, वा ताने, वा ताने वा चमड़े की किसी वस्तु में स्थिर दिखाई दे; यह एक फैलता हुआ प्लेग है; जिस में व्याधि आग से लगी हो, उसको तू जला देना।

58 और वह वस्त्र चाहे ताना वा ऊन वा चमड़े का कुछ भी हो, जिसे तू धो ले, यदि उन पर से व्याधि दूर हो जाए, तो वह दूसरी बार धोकर शुद्ध ठहरे।

59 यह है कोढ़ की व्याधि की व्यवस्या, जो ऊनी वा सनी के वस्त्र पहिने, वा ताने वा ऊन वा चमड़े वा चमड़े की किसी वस्तु में पहिने हो, कि वह शुद्ध ठहरे, वा अशुद्ध ठहरे।

अध्याय 14

कुष्ठ रोग की सफाई।

1 और यहोवा ने मूसा से कहा,

2 कोढ़ी के शुद्ध होने के दिन की व्यवस्था यह होगी; वह याजक के पास लाया जाए;

3 और याजक छावनी से निकल जाए; और याजक दृष्टि करे, और क्या कोढ़ी कोढ़ का व्याधि ठीक हो जाए;

4 तब याजक आज्ञा दे, कि जो शुद्ध किया जाए, उसके लिथे दो जीवित और शुद्ध पक्षी, और देवदारु की लकड़ी, और लाल रंग, और जूफा ले लेना;

5 और याजक आज्ञा दे, कि पक्षियों में से एक बहते जल के ऊपर मिट्टी के पात्र में मारा जाए।

6 और जीवित पक्षी, और देवदार की लकड़ी, और लाल रंग, और जूफा को लेकर उन्हें और जीवित पक्षी को उस पक्षी के लोहू में जो बहते जल के ऊपर मारा गया हो, डुबाए;

7 और वह कोढ़ से शुद्ध होनेवाले पर सात बार छिड़के, और उसे शुद्ध ठहराए, और जीवित पक्षी को खुले मैदान में छोड़ दे।

8 और जो शुद्ध किया जाए वह अपके वस्त्र धोए, और सब बाल मुंड़ाए, और जल से धोए, कि वह शुद्ध हो जाए; और उसके बाद वह छावनी में आए, और अपने डेरे में से सात दिन तक परदेश में रहे।

9 परन्तु सातवें दिन वह अपके सिर, और दाढ़ी, और भौहोंके सब बाल मुंड़ाए, वरन अपके सब बाल भी मुंडवाए; और वह अपके वस्त्र धोए, और अपके मांस को जल से धोए, और वह शुद्ध ठहरे।

10 और आठवें दिन वह दो निर्दोष भेड़ के बच्चे, और एक बेदाग एक वर्ष की भेड़ की बछिया, और तेल से सने हुए अन्नबलि के लिथे तीन दसवां अंश मैदा, और एक लोज तेल ले;

11 और जो याजक उसे शुद्ध करे, वह शुद्ध किए जानेवाले पुरूष और उन वस्तुओं को मिलापवाले तम्बू के द्वार पर यहोवा के साम्हने खड़ा करे।

12 और याजक एक भेड़ का बच्चा लेकर अपराधबलि और तेल की लोज के लिथे चढ़ाए, और हिलाने की भेंट के लिथे यहोवा के साम्हने हिलाए;

13 और जिस स्यान में वह पापबलि और होमबलि को बलि करे, उसी में वह पवित्रस्थान में बलि करे; क्योंकि जैसा पापबलि याजक का है, वैसा ही अपराधबलि भी; वह परम पवित्र है;

14 और याजक अपराधबलि के लोहू में से कुछ ले, और याजक शुद्ध होनेवाले के दाहिने कान के सिरे पर, और उसके दाहिने हाथ के अंगूठे पर, और बड़े पाँव पर लगाए। उसके दाहिने पैर से।

15 और याजक तेल की लट्ठे में से कुछ लेकर अपके बायें हाथ की हथेली पर उंडेल दे;

16 और याजक अपक्की दहिनी उँगली अपके बायें हाथ के तेल में डुबोए, और उस तेल को अपक्की उँगली से यहोवा के साम्हने सात बार छिड़के;

17 और शेष तेल जो उसके हाथ में हो, उस में से याजक शुद्ध होनेवाले के दाहिने कान के सिरे पर, और उसके दाहिने हाथ के अंगूठे पर, और उसके दाहिने पैर के अंगूठे पर लगाए। , अपराधबलि के लहू पर;

18 और जो तेल याजक के हाथ में रह जाए वह शुद्ध होनेवाले के सिर पर उंडेल दे; और याजक उसके लिथे यहोवा के साम्हने प्रायश्चित्त करे।

19 और याजक पापबलि और अपक्की अशुद्धता से शुद्ध होनेवाले के लिथे प्रायश्चित्त करे; और उसके बाद वह होमबलि को बलि करे;

20 और याजक होमबलि और अन्नबलि को वेदी पर चढ़ाए; और याजक उसके लिथे प्रायश्चित्त करे, और वह शुद्ध ठहरे।

21 और यदि वह कंगाल हो, और इतना न पा सके; तब वह अपके अपके अपके लिथे प्रायश्चित्त करने के लिथे अतिचार के लिथे एक भेड़ का बच्चा, और अन्नबलि के लिथे तेल से सना हुआ मैदा का दसवां अंश, और एक लोज तेल ले;

22 और दो पंडुक, वा कबूतरी के दो बच्चे, जो उसके पास हो सकते हैं; और एक पापबलि, और दूसरा होमबलि हो।

23 और वह आठवें दिन अपके शुद्ध होने के लिथे उन्हें मिलापवाले तम्बू के द्वार पर याजक के पास यहोवा के साम्हने ले आए।

24 और याजक अपराधबलि की भेड़ का बच्चा, और तेल का लट्ठा लेकर हिलाने की भेंट के लिथे यहोवा के साम्हने हिलाए;

25 और वह अपराधबलि के भेड़ के बच्चे को बलि करे, और याजक अपराधबलि के लोहू में से कुछ लेकर शुद्ध होनेवाले के दाहिने कान के सिरे पर, और उसके अंगूठे पर लगाए। दाहिना हाथ, और उसके दाहिने पैर के बड़े पैर के अंगूठे पर।

26 और याजक उस तेल में से अपके बायें हाथ की हथेली पर उंडेल दे;

27 और याजक अपक्की दहिनी उंगली से अपके बायें हाथ के तेल में से कुछ यहोवा के साम्हने सात बार छिड़के;

28 और याजक अपके हाथ के तेल में से शुद्ध होनेवाले के दाहिने कान के सिरे पर, और उसके दाहिने हाथ के अंगूठे पर, और उसके दाहिने पैर के अंगूठे पर, अपराधबलि के लोहू का स्थान;

29 और शेष तेल जो याजक के हाथ में हो, वह शुद्ध होनेवाले के सिर पर इसलिथे लगाए कि उसके लिथे यहोवा के साम्हने प्रायश्चित्त करे।

30 और वह पंडुकों वा कबूतरोंके बच्चोंमें से, जो उसे मिले, उसको वह बलि चढ़ाए;

31 जो वह पाने के योग्य हो, वह एक पापबलि के लिथे, और दूसरा होमबलि के लिथे अन्नबलि के लिथे; और याजक उसके लिथे जो यहोवा के साम्हने शुद्ध किया जाना है प्रायश्चित्त करे।

32 जिस में कोढ़ की व्याधि होती है, उसकी व्यवस्था यह है, जिसके हाथ से शुद्ध होने की वस्तु नहीं मिलती।

33 और यहोवा ने मूसा और हारून से कहा,

34 जब तुम कनान देश में पहुंचो, जिसे मैं तुम को निज भाग करके देता हूं, और मैं ने कोढ़ की व्याधि को तुम्हारे निज देश के भवन में डाल दिया है;

35 और जो घर का स्वामी हो वह आकर याजक से कहे, मुझे ऐसा लगता है, जैसे भवन में कोई व्याधि हुई हो;

36 तब याजक आज्ञा दे, कि व्याधि देखने को याजक के उस में उसके भीतर जाने से पहिले उस भवन को खाली कर दिया जाए, कि जो कुछ घर में हो वह अशुद्ध न हो; और उसके बाद याजक भवन देखने को भीतर जाए;

37 और वह उस व्याधि पर दृष्टि करे, और यदि वह व्याधि घर की शहरपनाह पर हो, जिस में हरी या लाल रंग की खोखली लकीरें हों, जो देखने में शहरपनाह से नीची हों;

38 तब याजक घर से निकलकर भवन के द्वार पर जाए, और सात दिन तक भवन को बन्द रखा रहे;

39 और सातवें दिन याजक फिर आकर देखे, कि क्या व्याधि भवन की शहरपनाह पर फैल गई है;

40 तब याजक आज्ञा दे, कि जिन पत्यरोंमें व्याधि है उन्हें उठाकर नगर के बाहर किसी अशुद्ध स्थान में डाल दें;

41 और वह उस भवन को चारोंओर से उजाड़ दे, और वे उस मिट्टी को जिसे वे नगर के बाहर कूचकर अशुद्ध स्थान में उंडेल दें;

42 और वे और पत्यर लेकर उन पत्यरोंके स्थान पर लगाएं; और वह दूसरा गारा लेकर भवन को उस पर चिपकाए।

43 और यदि व्याधि फिर आए, और घर में फूट पड़े, तब उस ने पत्यरोंको उठा लिया, और घर को चकनाचूर कर दिया, और उसके लेपने के बाद;

44 तब याजक आकर देखे, और यदि व्याधि घर में फैल जाए, तो वह घर में भयानक कोढ़ है; यह अशुद्ध है।

45 और वह भवन को, और उसके पत्यरोंको, और उसकी लकड़ी को, और भवन की सारी मणियोंको ढा दे; और वह उन्हें नगर से निकालकर अशुद्ध स्थान में ले जाए।

46 और जो कोई भवन के बन्द रहने के समय तक भीतर जाए वह सांफ तक अशुद्ध रहे।

47 और जो कोई घर में सोए, वह अपके वस्त्र धोए; और जो कोई घर में खाए वह अपके वस्त्र धोए।

48 और यदि याजक भीतर आकर उस पर दृष्टि करे, और देखो, घर के प्लास्टर के बाद व्याधि घर में नहीं फैली है; तब याजक घर को शुद्ध ठहराए, क्योंकि व्याधि ठीक हो गई है।

49 और वह भवन को शुद्ध करने के लिथे दो पक्षी, और देवदारू की लकड़ी, और लाल रंग, और जूफा ले ले;

50 और वह पक्षियों में से एक को बहते जल के ऊपर मिट्टी के पात्र में घात करे;

51 और वह देवदार की लकड़ी, और जूफा, और लाल रंग, और जीवित पक्षी को लेकर मारे गए पक्षी के लोहू और बहते जल में डुबाकर उस घर पर सात बार छिड़के;

52 और वह पक्षी के लोहू, और बहते जल, और जीवित पक्षी, और देवदार की लकड़ी, और जूफा, और लाल रंग के वस्त्र से घर को शुद्ध करे;

53 परन्तु वह जीवित पक्षी को नगर से निकलकर मैदानोंमें जाने दे, और घर के लिथे प्रायश्चित्त करे; और वह शुद्ध हो।

54 कोढ़, और सब प्रकार की व्याधि, और सब प्रकार की पपड़ी के लिये यह व्यवस्था है,

55 और वस्त्र, और घर के कोढ़ के कारण,

56 और उठने के लिथे, और पपड़ी के लिथे, और उजियाले के लिथे;

57 कि वह कब अशुद्ध, और कब शुद्ध हो, यह शिक्षा दे; यह कुष्ठ रोग का नियम है।

अध्याय 15

अशुद्ध मुद्दे - उनकी सफाई।

1 और यहोवा ने मूसा और हारून से कहा,

2 इस्त्राएलियों से कह, कि जब किसी मनुष्य को अपके शरीर में से कोई रोग हो, तो वह अपके अपके विषय के कारण अशुद्ध है।

3 और उसके विषय में उसकी अशुद्धता यह होगी; चाहे उसका शरीर उसके मुद्दे के साथ बहता है, या उसका मांस उसके मुद्दे से रोक दिया जाता है, यह उसकी अशुद्धता है।

4 जिस जिस बिछौने पर वह लेटे है, वह सब अशुद्ध है; और जिस वस्तु में वह बैठा हो वह सब अशुद्ध ठहरे।

5 और जो कोई अपके बिछौने को छूए वह अपके वस्त्र धोकर जल से स्नान करे, और सांफ तक अशुद्ध रहे।

6 और जिस किसी वस्तु पर वह बैठा हो, जिस के पास समस्या हो वह अपके वस्त्र धोकर जल से स्नान करे, और सांफ तक अशुद्ध रहे।

7 और जो व्यक्‍ति उसके मांस को छूए वह अपके वस्त्र धोए, और जल से स्नान करे, और सांफ तक अशुद्ध रहे।

8 और यदि किसी शुद्ध के विषय में विवाद हो, तो वह उस पर थूके; तब वह अपके वस्त्र धोए, और जल से स्नान करे, और सांफ तक अशुद्ध रहे।

9 और जिस किसी के सिर पर काठी हो, वह अशुद्ध ठहरे।

10 और जो कोई उसके नीचे की किसी वस्तु को छूए वह सांफ तक अशुद्ध रहे; और जो कोई उन में से कुछ उठाए वह अपके वस्त्र धोए, और जल से स्नान करे, और सांफ तक अशुद्ध रहे।

11 और जिस किसी को वह छूए जिस के विषय में कोई बात हो, और जिस ने अपके हाथ जल से न धोए हों, वह अपके वस्त्र धोए, और जल से स्नान करे, और सांफ तक अशुद्ध रहे।

12 और पृय्वी का जिस पात्र को वह छूए, जिस में रोग हो, वह टूट जाए; और लकड़ी के सब पात्र जल से धोए जाएं।

13 और जब जिस का मुकद्दमा शुद्ध हो, तब वह अपके शुद्ध होने के लिथे सात दिन गिन ले, और अपके वस्त्र धोए, और अपके शरीर को बहते जल से स्नान करे, और शुद्ध ठहरे।

14 और आठवें दिन वह अपके पास दो पंडुक वा कबूतरी के दो बच्चे ले कर मिलापवाले तम्बू के द्वार पर यहोवा के साम्हने आकर याजक को दे;

15 और याजक उनको एक को पापबलि और दूसरे को होमबलि के लिथे चढ़ाए; और याजक यहोवा के साम्हने उसके लिथे उसके लिथे प्रायश्चित्त करे।

16 और यदि किसी पुरूष के मैथुन का बीज उस में से निकले, तो वह अपके सब मांस को जल से धोए, और सांफ तक अशुद्ध रहे।

17 और सब वस्त्र, और सब खाल, जिस में मैथुन का बीज हो, जल से धोकर सांफ तक अशुद्ध रहे।

18 और जिस स्त्री के संग पुरूष मैथुन के वंश के साथ सोए, वे दोनों जल से स्नान करें, और सांफ तक अशुद्ध रहें।

19 और यदि किसी स्त्री को कोई क्लेश हो, और उसके शरीर में लोहू हो, तो वह सात दिन तक अलग रखा जाए; और जो कोई उसे छूए वह सांफ तक अशुद्ध रहे।

20 और जो कुछ वह अपके न्यारे रहने के समय लेटे, वह सब अशुद्ध ठहरे; वह सब वस्तु जिस पर वह बैठी हो वह भी अशुद्ध ठहरे।

21 और जो कोई उसके बिछौने को छूए वह अपके वस्त्र धोए, और जल से स्नान करे, और सांफ तक अशुद्ध रहे।

22 और जो कोई किसी वस्तु को जिस पर वह बैठी हो छूए, वह अपके वस्त्र धोकर जल से स्नान करे, और सांफ तक अशुद्ध रहे।

23 और यदि वह उसके बिछौने पर वा किसी वस्तु पर जिस पर वह बैठी हो, उसे छूए, तो वह सांफ तक अशुद्ध रहे।

24 और यदि कोई उसके पास कभी सोए, और उसके फूल उस पर हों, तो वह सात दिन तक अशुद्ध रहे; और जिस जिस बिछौने पर वह लेटे वह सब अशुद्ध ठहरे।

25 और यदि किसी स्त्री को उसके विच्छेद के समय से बहुत दिनों तक खून की समस्या हो, वा वह उसके अलग होने के समय से अधिक समय तक चलती हो; उसकी अशुद्धता के सब दिन उसके अलग होने के दिनों के समान होंगे; वह अशुद्ध होगी।

26 जिस जिस बिछौने पर वह अपके जीवन भर लेटे वह उसके लिथे अपके बिछौने के समान बिछौना ठहरे; और जो कुछ वह बैठे, वह उसके अलग होने की अशुद्धता के समान अशुद्ध ठहरे।

27 और जो कोई उन वस्तुओं को छूए वह अशुद्ध ठहरे, और अपके वस्त्र धोकर जल से स्नान करे, और सांफ तक अशुद्ध रहे।

28 परन्तु यदि वह अपक्की समस्या से शुद्ध हो जाए, तो वह सात दिन तक गिन ले, और उसके बाद वह शुद्ध ठहरे।

29 और आठवें दिन वह अपके दो पछुए वा कबूतरी के दो बच्चे ले जाकर मिलापवाले तम्बू के द्वार पर याजक के पास ले जाए।

30 और याजक एक को पापबलि और दूसरे को होमबलि के लिथे चढ़ाए; और याजक उसकी अशुद्धता के कारण यहोवा के साम्हने उसके लिथे प्रायश्चित्त करे।

31 इस प्रकार इस्राएलियोंको उनकी अशुद्धता से अलग करना; ऐसा न हो कि जब वे मेरे निवास को जो उनके बीच में है अशुद्ध करके अशुद्ध होकर मरें।

32 जिसके पास मुकद्दमा है, और जिसका वंश उसके पास से निकलकर अशुद्ध हो जाता है, उसकी व्यवस्था यह है;

33 और उस में से जो उसके फूल से बीमार है, और उस में से जिसे कोई समस्या है, पुरुष, और स्त्री, और जो उसके साथ अशुद्ध है।

अध्याय 16

महायाजक को पवित्र स्थान में कैसे प्रवेश करना चाहिए - बलि का बकरा - प्रायश्चित का वार्षिक पर्व।

1 और हारून के दोनों पुत्रों के मरने के पश्चात् जब वे यहोवा के साम्हने बलि चढ़ाकर मर गए, तब यहोवा ने मूसा से बातें की;

2 और यहोवा ने मूसा से कहा, अपके भाई हारून से कह, कि वह प्रायश्चित्त के आसन के साम्हने जो सन्दूक के ऊपर है, उस परदे के भीतर के पवित्र स्यान में हर समय न आना; कि वह मरे नहीं; क्योंकि मैं प्रायश्चित के आसन पर बादल में दिखाई दूंगा।

3 इस प्रकार हारून पवित्रस्थान में प्रवेश करे; पापबलि के लिथे एक बछड़ा, और होमबलि के लिथे एक मेढ़ा।

4 वह पवित्रा सनी का अंगरखा पहिने, और उसके शरीर पर सनी की जांघिया पहिनी, और वह सनी के कमरबन्द से बान्धी जाए, और वह सनी का कपड़ा पहिनाए; ये पवित्र वस्त्र हैं; इसलिथे वह अपके मांस को जल से धोए, और इस प्रकार उन्हें पहिन ले।

5 और वह इस्त्राएलियोंकी मण्डली में से पापबलि के लिथे दो बकरोंके सन्तान, और होमबलि के लिथे एक मेढ़ा ले।

6 और हारून अपके अपके और अपके घराने के लिथे पापबलि का अपना बछड़ा चढ़ाकर अपके लिथे प्रायश्चित्त करे।

7 और वह उन दोनों बकरोंको लेकर मिलापवाले तम्बू के द्वार पर यहोवा के साम्हने खड़ा करे।

8 और हारून उन दोनों बकरों पर चिट्ठी डाले; एक चिट्ठी यहोवा के लिथे, और दूसरी बलि के बकरे के लिथे।

9 और हारून उस बकरे को जिस पर यहोवा की चिट्ठी पड़ी हो, ले जाकर पापबलि करके चढ़ाए।

10 परन्तु जिस बकरे की चिट्ठी बलि का बकरा ठहरे, वह यहोवा के साम्हने जीवित रखी जाए, कि उसके साथ प्रायश्चित्त करे, और वह बलि का बकरा बन कर जंगल में जाए।

11 और हारून उस पापबलि के बछड़े को जो अपके लिथे हो ले आए, और अपके और अपके घराने के लिथे प्रायश्चित्त करे, और पापबलि के बछड़े को जो अपके लिथे हो बलि करे;

12 और वह यहोवा के साम्हने वेदी पर से धधकते अंगारोंसे भरा एक धूपदान ले, और अपके हाथ की छोटी छोटी मीठी धूप से भरकर परदे में ले आए;

13 और वह धूप को यहोवा के साम्हने आग पर रखे, कि धूप का बादल उस प्रायश्चित्त के ढकनेके लिथे जो साक्षीपत्र पर है, ढांप ले, कि वह न मरे;

14 और वह बछड़े के लोहू में से कुछ लेकर अपक्की उँगली से प्रायश्चित के आसन पर पूर्व की ओर छिड़के; और प्रायश्चित के आसन के साम्हने लोहू पर अपक्की उंगली से सात बार छिड़के।

15 तब वह पापबलि के बकरे को अर्थात प्रजा के लिथे घात करे, और उसका लोहू पर्दे में ले आए, और उस लोहू से वैसा ही करे जैसा उस ने बछड़े के लोहू से किया, और प्रायश्चित के आसन पर छिड़के, और दया आसन से पहले;

16 और वह इस्त्राएलियोंकी अशुद्धता, और उनके सब पापोंके अपराधोंके कारण पवित्रस्थान के लिथे प्रायश्चित्त करे; और वह मिलापवाले तम्बू के लिथे जो उनके बीच उनकी अशुद्धता के बीच रह जाए, वैसा ही करे।

17 और जब मिलापवाले तम्बू में कोई पुरूष पवित्रस्यान में प्रायश्चित्त करने को जाए, तब तक वह बाहर न आए, और अपके और अपके घराने के लिथे प्रायश्चित्त न कर ले, और उस की सारी मण्डली के लिथे प्रायश्चित्त न कर ले। इजराइल।

18 और वह उस वेदी के पास जो यहोवा के साम्हने है निकलकर उसके लिथे प्रायश्चित्त करे; और बछड़े के लोहू और बकरे के लोहू में से कुछ लेकर वेदी के चारोंओर के सींगों पर लगाना।

19 और वह लोहू में से अपनी उँगली से सात बार छिड़के, और उसे शुद्ध करके इस्राएलियोंकी अशुद्धता से पवित्र करे।

20 और जब वह पवित्रस्थान, और मिलापवाले तम्बू, और वेदी का मेल मिला ले, तब जीवित बकरे को ले आए;

21 और हारून अपके दोनों हाथ जीवित बकरे के सिर पर रखे, और इस्राएलियोंके सब अधर्म के काम, और सब पापोंके सब अपराधोंको उस से मान ले, और उन्हें बकरे के सिर पर रखकर भेजे, और उसे किसी योग्य मनुष्य के हाथ से जंगल में ले जाना;

22 और बकरा अपके सब अधर्म के काम उस देश में जो उस पर बसा न रहे, वह उठाएगा; और वह बकरे को जंगल में जाने दे।

23 और हारून मिलापवाले तम्बू में आकर उन सनी के वस्त्रोंको, जिन्हें वह पवित्रस्थान में जाने के समय पहिनाए, उतारकर वहीं छोड़ दे;

24 और वह अपके मांस को पवित्रस्यान में जल से धोए, और अपके वस्त्र पहिने, और निकलकर अपके होमबलि और प्रजा के होमबलि को चढ़ाए, और अपके और प्रजा के लिथे प्रायश्चित्त करे।

25 और पापबलि की चरबी को वह वेदी पर जलाए।

26 और जो उस बकरे को बलि के बकरे के लिथे छोड़ दे, वह अपके वस्त्र धोए, और जल से स्नान करे, और उसके बाद छावनी में आए।

27 और पापबलि का बछड़ा, और पापबलि का बकरा, जिसका लोहू पवित्रस्यान में प्रायश्चित्त के लिथे लाया गया हो, वे छावनी के बाहर ले जाएं; और वे अपक्की खाल, और मांस, और गोबर आग में जलाएं।

28 और जो उनको जलाए वह अपके वस्त्र धोए, और जल से स्नान करे, और उसके बाद वह छावनी में आए।

29 और यह तुम्हारे लिये सदा की विधि ठहरे; कि सातवें महीने के दसवें दिन को तुम अपके मन को दु:ख देना, और कोई काम न करना, चाहे वह अपके देश का हो, वा परदेशी हो जो तुम्हारे बीच में रहता हो;

30 क्योंकि उस दिन याजक तुझे शुद्ध करने के लिथे तेरे लिथे प्रायश्चित्त करे, कि तू यहोवा के साम्हने अपके सब पापोंसे शुद्ध हो जाए,

31 वह तुम्हारे लिये विश्राम का दिन होगा, और तुम अपने प्राणों को एक नियम के अनुसार सदा के लिये दु:ख देना।

32 और जिस याजक का अभिषेक करे, और जिसे वह अपके पिता के स्थान पर याजक के पद पर सेवा टहल करने के लिथे पवित्र करे, वह प्रायश्चित्त करे, और सनी के वस्त्र, अर्यात् पवित्रा वस्त्र पहिने;

33 और वह पवित्रस्यान के लिथे प्रायश्चित्त करे, और मिलापवाले तम्बू और वेदी के लिथे प्रायश्चित्त करे; और वह याजकों और मण्डली के सब लोगोंके लिथे प्रायश्चित्त करे।

34 और इस्त्राएलियोंके लिथे उनके सब पापोंके लिथे वर्ष में एक बार प्रायश्चित्त करने के लिथे यह सदा की विधि ठहरे। और उसने वैसा ही किया जैसा यहोवा ने मूसा को आज्ञा दी थी।

अध्याय 17

चढ़ाने का तरीका - क्या नहीं खाया जा सकता है।

1 और यहोवा ने मूसा से कहा,

2 हारून, और उसके पुत्रों, और सब इस्राएलियोंसे कह, और उन से कह; यह वह बात है जिसे यहोवा ने यह कहते हुए आज्ञा दी है,

3 इस्त्राएल के घराने में से कोई कोई ऐसा पुरूष हो, जो छावनी में किसी बैल वा भेड़ के बच्चे वा बकरी को बलि करे, वा जो उसे छावनी में से घात करे,

4 और उसे मिलापवाले तम्बू के द्वार में यहोवा के निवास के साम्हने यहोवा के लिथे भेंट चढ़ाने के लिथे न ले जाना; उस मनुष्य पर लोहू लगाया जाएगा; उसने खून बहाया है; और वह मनुष्य अपके लोगोंमें से नाश किया जाए;

5 इसलिथे कि इस्राएली अपके अपके बलिदानोंको जो वे खुले मैदान में चढ़ाएं, यहां तक ले जाएं, कि वे यहोवा के पास मिलापवाले तम्बू के द्वार पर याजक के पास ले जाएं, और उसके लिथे चढ़ाएं। यहोवा को शांति भेंट।

6 और याजक लोहू को मिलापवाले तम्बू के द्वार पर यहोवा की वेदी पर छिड़के, और चरबी को यहोवा के सुगन्ध के लिये जलाए।

7 और वे अपना बलिदान फिर उन दुष्टात्माओं के लिथे न चढ़ाएं, जिनके पीछे वे व्यभिचार हो गए हैं। यह उनकी पीढ़ी पीढ़ी में युगानुयुग की विधि ठहरे।

8 और उन से कहना, कि इस्राएल के घराने में से वा परदेशियोंमें से जो कोई अर्यात् होमबलि वा मेलबलि करे, वह कोई हो,

9 और उसे मिलापवाले तम्बू के द्वार पर यहोवा के लिथे चढ़ाने के लिथे न ले जाना; वह मनुष्य भी अपके लोगोंमें से नाश किया जाए।

10 और इस्त्राएल के घराने में से वा परदेशियोंमें से जो कोई अपके लोहू खाता हो, चाहे वह परदेशी हो; मैं उस प्राण के साम्हने मुंह फेर लूंगा जो लोहू खाता है, और उसे उसके लोगोंमें से नाश कर डालूंगा।

11 क्योंकि शरीर का प्राण लोहू में है; और मैं ने वेदी पर तुझे दिया है, कि तेरे प्राणोंके लिथे प्रायश्चित्त करे; क्‍योंकि वह लहू है जो प्राण के लिथे प्रायश्चित्त करता है।

12 इसलिथे मैं ने इस्त्राएलियोंसे कहा, तुम में से कोई प्राणी लोहू न खाए, और न कोई परदेशी जो तुम्हारे बीच में रहकर लोहू खाए।

13 और जो कोई इस्त्राएलियोंमें से वा परदेशियोंमें से जो तुम्हारे बीच में परदेशी हों, और जो किसी पशु वा पक्षी को जो खाया जाए, पकड़कर पकड़ ले; वह उसके लोहू को उंडेलकर धूलि से ढांप देगा।

14 क्‍योंकि सब प्राणियों का प्राण वही है; उसका लहू उसके जीवन के लिथे है; इसलिथे मैं ने इस्राएलियोंसे कहा, तुम किसी प्रकार का मांस का लोहू न खाना; क्‍योंकि सब प्राणियों का प्राण उसी का लहू है; जो कोई उसे खाए वह नाश किया जाए।

15 और जो प्राणी अपके अपने देश वा परदेशी वा अपके अपके अपके अपके वस्त्र धोकर जल से स्नान करे, और जब तक अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके वस्त्र धोए, और तब तक अशुद्ध रहे, सम; तो वह शुद्ध होगा।

16 परन्तु यदि वह उनको न धोए, और न अपके शरीर को स्नान करे; तब वह अपके अधर्म का भार वहन करेगा।

अध्याय 18

अवैध विवाह - अवैध वासनाएं।

1 और यहोवा ने मूसा से कहा,

2 इस्त्राएलियों से कह, कि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा हूं।

3 मिस्र देश के जिन कामों में तुम रहते थे, उन के कामों के अनुसार न करना; और कनान देश के कामोंके अनुसार जहां मैं तुझे ले आऊंगा वह न करना; न उनकी विधियों पर चलना।

4 तुम मेरे न्याय के काम करना, और मेरी विधियों को मानना, उस पर चलना; मैं तुम्हारा स्वामी, परमेश्वर हूँ।

5 इसलिथे तुम मेरी विधियोंऔर मेरे नियमोंको मानना; जो यदि कोई करे, तो उन में बसेगा; मैं प्रभु हूँ।

6 तुम में से कोई अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके तन को उघाड़ने के लिथे समीप न जाना; मैं प्रभु हूँ।

7 अपके पिता का तन, वा अपनी माता का तन न उघाड़ना; वह तेरी माता है; तू उसका तन न उघाड़ना।

8 अपके पिता की पत्नी का तन न उघाड़ना; यह तेरे पिता का नंगापन है।

9 तेरी बहिन, जो तेरे पिता की बेटी, वा तेरी माता की बेटी है, चाहे वह घर में उत्पन्न हो, वा परदेश में उत्पन्न हुई हो, उनका तन न उघाड़ना।

10 वा अपक्की बेटी वा अपक्की बेटी का नंगापन, उनका तन न उघाड़ना; क्योंकि तेरा ही नंगापन उन्हीं का है।

11 अपके पिता की बेटी का तन जो अपके पिता से उत्पन्न हुआ है, वह तेरी बहिन है, उसका तन न उघाड़ना।

12 अपके पिता की बहिन का तन न उघाड़ना; वह तेरे पिता की निकट कुटुम्बी है।

13 अपनी माता की बहिन का तन न उघाड़ना; क्योंकि वह तेरी माता की निकट कुटुम्बी है।

14 अपके पिता के भाई का तन न उघाड़ना, और उसकी पत्नी के पास न जाना; वह तुम्हारी चाची है।

15 अपक्की बहू का तन न उघाड़ना; वह तेरे पुत्र की पत्नी है; तू उसका तन न उघाड़ना।

16 तू अपके भाई की पत्नी का तन न उघाड़ना; यह तेरे भाई का नंगापन है।

17 किसी स्त्री और उसकी बेटी का तन न उघाड़ना, और न उसके बेटे की बेटी वा उसकी बेटी को उसका तन उघाड़ना; क्योंकि वे उसके निकट कुटुम्बी हैं; यह दुष्टता है।

18 और उसकी बहिन के लिथे किसी स्त्री को न ले जाना, कि उसको चिढ़ाए, और दूसरे को छोड़ उसके जीवन में उसका तन उघाड़ने पाए।

19 और जब तक वह अपक्की अशुद्धता के कारण अलग की जाए, तब तक किसी स्त्री के पास उसका तन उघाड़ने के लिथे न जाना,

20 और अपक्की पड़ोसी की पत्नी के संग व्यभिचार न करना, कि उसके संग अपने आप को अशुद्ध करना।

21 और अपके वंश में से किसी को आग में से मोलेक के पास जाने न देना, और अपके परमेश्वर का नाम अपवित्र करना; मैं प्रभु हूँ।

22 तू मनुष्यों की नाईं स्त्रीजाति से झूठ न बोलना; यह घृणित है।

23 और किसी पशु के संग अपने आप को अशुद्ध करने के लिथे लेटना न करना; और न कोई स्त्री पशु के साम्हने उसके लिथे लेटने के लिथे खड़ी हो; यह भ्रम है।

24 इन बातों में से किसी बात में अपके आप को अशुद्ध न करना; क्योंकि इन सब जातियोंमें वे जातियां अशुद्ध हैं, जिन्हें मैं ने तेरे साम्हने से निकाल दिया है;

25 और देश अशुद्ध हो गया है; इस कारण मैं उस पर उसके अधर्म का दण्ड देता हूं, और देश ही उसके निवासियों को उगल देता है।

26 इसलिथे तुम मेरी विधियोंऔर मेरे नियमोंको मानना, और इनमें से कोई घिनौना काम न करना; न तो तुम्हारी अपनी जाति का, और न तुम्हारे बीच में रहने वाला कोई परदेशी;

27 (क्योंकि देश के लोगों ने जो तुझ से पहिले थे, ये सब घिनौने काम किए हैं, और देश अशुद्ध हो गया है;)

28 यह कि जब तुम उस देश को अशुद्ध करते हो, जिस प्रकार उस ने उन जातियोंको जो तुम से पहिले थे, उगल दी, तो तुम में से भी न उगलें।

29 क्‍योंकि जो कोई इन घिनौने कामोंमें से कुछ करे, वरन जो जीव भी उन्हें करें वे अपके लोगोंमें से नाश किए जाएं।

30 इसलिथे तुम मेरी विधि को मानना, कि इन घिनौने कामोंमें से जो तुम से पहिले हुए या, और उस में अपके आप को अशुद्ध न करना; मैं तुम्हारा स्वामी, परमेश्वर हूँ।

अध्याय 19

विविध कानूनों की पुनरावृत्ति।

1 और यहोवा ने मूसा से कहा,

2 इस्त्राएलियों की सारी मण्डली से कह, कि तुम पवित्र ठहरो; क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा पवित्र हूं।

3 तुम अपके अपके अपके माता और पिता का भय मानना, और मेरे विश्रामदिनोंको मानना; मैं तुम्हारा स्वामी, परमेश्वर हूँ।

4 न तो मूरतों की ओर फिरो, और न अपने लिये ढले हुए देवता बनाओ; मैं तुम्हारा स्वामी, परमेश्वर हूँ।

5 और यदि तुम यहोवा के लिथे मेलबलि का बलिदान चढ़ाओ, तो अपक्की इच्छा से उसे चढ़ाना।

6 वह उसी दिन और दूसरे दिन खाया जाए; और यदि तीसरे दिन तक कुछ बचा रहे, तो वह आग में जला दिया जाए।

7 और यदि वह तीसरे दिन भी खाया जाए, तो वह घिनौना है; इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।

8 इसलिथे जो कोई उसका खाए वह अपके अधर्म का भार वहन करे, क्योंकि उस ने यहोवा की पवित्र वस्तु को अपवित्र ठहराया है; और वह जीव अपके लोगोंमें से नाश किया जाएगा।

9 और जब तू अपके देश की कटनी काटेगा, तब अपके खेत के कोनोंको पूरी न काटना, और न अपक्की कटनी की उपज बटोरना।

10 और अपक्की दाख की बारी न तोड़ना, और न अपक्की दाख की बारी की सब दाख बटोरना; उन्हें कंगालों और परदेशियों के लिथे छोड़ देना; मैं तुम्हारा स्वामी, परमेश्वर हूँ।

11 न चोरी करना, और न झूठ बोलना, और न आपस में झूठ बोलना।

12 और मेरे नाम की झूठी शपथ न खाना, और न अपके परमेश्वर के नाम का अपवित्रा करना; मैं प्रभु हूँ।

13 तू अपके पड़ोसी को धोखा न देना, और न उसे लूटना; जो मजदूरी पर रखा जाए वह रात भर भोर तक तेरे पास न रहे।

14 तू बहरों को शाप न देना, और न अन्धे के साम्हने ठोकर लगाना, वरन अपके परमेश्वर का भय मानना; मैं प्रभु हूँ।

15 तुम न्याय के समय अधर्म न करना; तू कंगाल का आदर न करना, और न शूरवीर का आदर करना; परन्तु अपने पड़ोसी का न्याय धर्म से करना।

16 तू अपक्की प्रजा के बीच में कथावाचक की नाईं ऊपर-नीचे न जाना; तू अपके पड़ोसी के लोहू के साम्हने खड़ा न होना; मैं प्रभु हूँ।

17 अपके भाई से अपके मन में बैर न रखना; तू अपने पड़ोसी को किसी प्रकार से ताड़ना देना, और उस पर पाप न करना।

18 तू पलटा न लेना, और न अपक्की प्रजा से बैर रखना, वरन अपके पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना; मैं प्रभु हूँ।

19 तुम मेरी विधियों को मानना। तू अपने पशुओं के लिंग को विविध प्रकार के साथ नहीं होने देना; अपके खेत में मिले हुए बीज न बोना; न तो सनी और ऊनी का मिला हुआ वस्त्र तुझ पर उतरेगा।

20 और जो कोई किसी स्त्री के संग व्यभिचार करता है, जो दासी है, उसका पति से ब्याह हो गया है, और न तो उसे छुड़ाया गया है, और न ही उसे स्वतंत्रता दी गई है; उसे कोड़ा जाएगा; उन्हें मार डाला न जाए, क्योंकि वह स्वतंत्र नहीं थी।

21 और वह अपके अपराधबलि को यहोवा के लिथे मिलापवाले तम्बू के द्वार पर अपके अपके अपके अपके दोषबलि के लिथे एक मेढ़ा ले आए।

22 और याजक अपके अपके उस पाप के लिथे जो उस ने किया या, यहोवा के साम्हने अपराधबलि के मेढ़े से प्रायश्चित्त करे; और जो पाप उस ने किया है वह क्षमा किया जाएगा।

23 और जब तुम उस देश में पहुंचकर सब प्रकार के वृक्षोंको खाने के लिथे लगाओ, तब उसके फलोंको खतनारहित गिनना; तीन वर्ष तुम्हारे लिये खतनारहित के समान रहे; से नहीं खाना चाहिए।

24 परन्तु चौथे वर्ष में उसका सब फल साय यहोवा की स्तुति करने के लिथे पवित्र ठहरे।

25 और पांचवें वर्ष में उसका फल खाया करना, जिस से उसकी उपज की उपज तुम्हें दी जाए; मैं तुम्हारा स्वामी, परमेश्वर हूँ।

26 तुम लोहू समेत कुछ न खाना; न तो जादू का प्रयोग करना, और न ही समय का पालन करना।

27 अपके सिरोंके कोनोंको न लगाना, और न अपक्की दाढ़ी के कोनोंको तोड़ना।

28 मरे हुओं के लिथे अपके शरीर में न तो कुछ काटना, और न अपने ऊपर कोई चिन्ह छापना; मैं प्रभु हूँ।

29 अपक्की बेटी को वेश्‍या न बनाना, कि वह व्यभिचारी हो; ऐसा न हो कि देश व्यभिचार में पड़ जाए, और देश दुष्टता से भर जाए।

30 तुम मेरे विश्रामदिनों को मानना, और मेरे पवित्रस्थान का भय मानना; मैं प्रभु हूँ।

31 उन को न समझो, जिनमें जान पहचान हो, और न तो जादूगरों को ढूंढ़ो, कि वे उनके द्वारा अशुद्ध हो जाएं; मैं तुम्हारा स्वामी, परमेश्वर हूँ।

32 और ऊंचे सिर के साम्हने उठकर उस बूढ़े का आदर करना, और अपके परमेश्वर का भय मानना; मैं प्रभु हूँ।

33 और यदि कोई परदेशी तेरे साय तेरे देश में परदेशी रहे, तो उसको चिता न करना।

34 परन्‍तु जो परदेशी तेरे संग रहेगा, वह तेरे लिथे वैसा ही ठहरेगा जैसा तेरे बीच में उत्पन्न हुआ है, और तू उस से अपने समान प्रेम रखना; क्योंकि तुम मिस्र देश में परदेशी थे; मैं तुम्हारा स्वामी, परमेश्वर हूँ।

35 तुम न्याय में, नाप के बाग में, तौल में, वा नाप में अधर्म न करना।

36 तो तुम में तौल, एक एपा, और एक धर्मी हीन, एक ही मोल लेना; मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं, जो तुम्हें मिस्र देश से निकाल लाया है।

37 इस कारण तुम मेरी सब विधियों, और मेरे सब नियमोंका पालन करना, और उन पर चलना; मैं प्रभु हूँ।

अध्याय 20

मोलेक की - जादूगरों की - पवित्रता की - जो अपने माता-पिता को शाप देती है - व्यभिचार की - अनाचार की - व्यभिचार की - पशुता की - अशुद्धता की - आज्ञाकारिता की आवश्यकता होती है।

1 और यहोवा ने मूसा से कहा,

2 फिर इस्त्राएलियोंसे कहना, कि जो कोई इस्त्राएलियोंमें से वा इस्राएल में परदेशी परदेशी हो, वह अपके वंश में से कुछ मोलेक को दे; वह निश्चय मार डाला जाएगा; देश के लोग उस पर पत्यरवाह करेंगे।

3 और मैं उस मनुष्य के साम्हने अपना मुंह फेरूंगा, और उसे उसके लोगोंमें से नाश करूंगा; क्योंकि उस ने अपके वंश में से मोलेक को मेरे पवित्रस्थान को अशुद्ध करने, और मेरे पवित्र नाम को अपवित्र करने के लिथे दिया है।

4 और यदि उस देश के लोग अपके वंश में से मोलेक को देने के समय किसी रीति से उस से आंखें फेर लें, और उसे मार न डालें;

5 तब मैं उस मनुष्य और उसके घराने के साम्हने अपना मुंह फेरूंगा, और उसे, और जितने उसके पीछे व्यभिचार करेंगे, उन सभोंको मोलेक के साथ व्यभिचार करने के लिथे उनकी प्रजा में से नाश करूंगा।

6 और जो जीव जान पहचानवालोंऔर जादूगरोंके पीछे फिरता है, कि उनके पीछे व्यभिचार करे, मैं उस जीव के साम्हने अपना मुंह फेरूंगा, और उसे उसके लोगोंमें से नाश करूंगा।

7 इसलिये अपने आप को पवित्र करो और पवित्र बनो; क्योंकि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं।

8 और तुम मेरी विधियोंको मानना, और उन पर चलना; मैं यहोवा हूँ जो तुम्हें पवित्र करता है।

9 क्योंकि जो कोई अपके पिता वा माता को शाप दे वह निश्चय मार डाला जाए; उसने अपने पिता वा अपनी माता को शाप दिया है; उसका खून उस पर होगा।

10 और जो पुरूष किसी दूसरे की पत्नी से व्यभिचार करे, अर्यात् जो अपक्की पत्नी के संग व्यभिचार करे, वह व्यभिचारी और व्यभिचारिणी निश्चय मार डाला जाए।

11 और जो अपके पिता की पत्नी के संग सोता है, उस ने अपके पिता का तन उघाड़ा है; वे दोनों निश्चय मार डाले जाएंगे; उनका खून उन पर होगा।

12 और यदि कोई अपक्की बहू के संग सोए, तो वे दोनों निश्चय मार डाले जाएं; उन्होंने भ्रम पैदा किया है; उनका खून उन पर होगा।

13 यदि कोई पुरूष भी मनुष्योंके संग सोए जैसा वह स्त्री के साथ सोए, तो उन दोनोंने घृणित काम किया है; वे निश्चय मार डाले जाएंगे; उनका खून उन पर होगा।

14 और यदि कोई पुरूष अपनी पत्नी और अपनी माता को ब्याह ले, तो वह दुष्टता है; वे और वे दोनों आग में जला दिए जाएंगे; कि तुम में कोई दुष्टता न हो।

15 और यदि कोई मनुष्य पशु के संग सोए, तो वह निश्चय मार डाला जाए; और उस पशु को घात करना।

16 और यदि कोई स्त्री किसी पशु के पास जाकर उस के पास लेटे, तो उस स्त्री और उस पशु को भी घात करना; वे निश्चय मार डाले जाएंगे; उनका खून उन पर होगा।

17 और यदि कोई अपक्की बहिन, वा अपने पिता की बेटी वा अपनी माता की बेटी को ब्याह ले, और उसका नंगापन देखे, और वह उसका नंगापन देखे; यह एक दुष्ट वस्तु है; और वे अपके लोगोंके साम्हने नाश किए जाएं; उसने अपनी बहन का नंगापन उघाड़ा है; वह अपने अधर्म का भार वहन करेगा।

18 और यदि कोई पुरूष किसी रोगी स्त्री के संग सोए, और उसका नंगापन उघाड़े; उस ने उसका सोता ढूंढ़ लिया, और उस ने अपके लोहू के सोते को उघाड़ा है; और वे दोनों अपके लोगोंमें से नाश किए जाएं।

19 और अपक्की माता, और न अपक्की बहिन का तन न उघाड़ना; क्‍योंकि वह अपके निकट संबंधी को उघाड़ता है; वे अपना अधर्म सहेंगे।

20 और यदि कोई अपके चाचा की पत्नी के संग सोए, तो वह अपके चाचा का तन उघाड़ता है; वे अपना पाप सहेंगे; वे निःसंतान मरेंगे।

21 और यदि कोई अपके भाई की पत्नी को ब्याह ले, तो वह अशुद्ध वस्तु है; उस ने अपके भाई का नंगापन उघाड़ा है; वे निःसंतान होंगे।

22 इसलिथे तुम मेरी सब विधियोंऔर सब नियमोंको मानना, और उन पर चलना; कि जिस देश में मैं तुझे रहने के लिथे ले आऊंगा, वह तुझे न उगलेगा।

23 और जिस जाति को मैं ने तुम्हारे साम्हने से निकाल दिया है, उन पर तुम न चलना; क्योंकि उन्होंने ये सब काम किए, और इस कारण मैं ने उन से घृणा की।

24 परन्तु मैं ने तुम से कहा है, कि तुम उनके देश के अधिकारी हो जाओगे, और उस देश को जिस में दूध और मधु की धाराएं बहती हैं, मैं उसे उसके अधिकारी करने को दूंगा; मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं, जिस ने तुम्हें और लोगों से अलग किया है।

25 इसलिथे तुम शुद्ध और अशुद्ध पशु, और अशुद्ध पक्की और शुद्ध में भेद करना; और तुम अपके मन को पशु वा पक्की वा पक्की वा भूमि पर रेंगनेवाले जन्तुओं के द्वारा जिन्हें मैं ने तुझ से अलग किया है अशुद्ध करके घिनौना न करना।

26 और तुम मेरे लिथे पवित्र ठहरोगे; क्योंकि मैं यहोवा पवित्र हूं, और मैं ने तुम को अन्य लोगोंसे अलग कर दिया है, कि तुम मेरे हो जाओ।

27 कोई पुरूष वा स्त्री जिस में कोई जानी पहचान हो, वा जादूगर हो, वह निश्चय मार डाला जाए; वे उन पर पत्यरवाह करेंगे; उनका खून उन पर होगा।

अध्याय 21

पुजारी योग्यता।

1 और यहोवा ने मूसा से कहा, हारून की सन्तान के याजकोंसे कह, कि अपक्की प्रजा में कोई मरे हुओं के संग अशुद्ध न हो;

2 परन्‍तु उसके कुटुम्ब के लिथे जो उसके निकट है, अर्यात् उसकी माता, और उसके पिता, और उसके पुत्र, और उसकी बेटी, और उसके भाई के लि‍ए,

3 और उसकी बहिन के लिथे जो उसके पास है, जिसका कोई पति न हो; क्योंकि वह अशुद्ध हो जाए।

4 परन्तु वह अपके लोगोंमें प्रधान होकर अपके आप को अपवित्र करने के लिथे अपके आप को अशुद्ध न करे।

5 वे अपने सिर के बाल न गंजा करें, और न अपनी दाढ़ी का कोना मुंड़ाएं, और न अपने मांस को काटे।

6 वे अपके परमेश्वर के लिथे पवित्र ठहरें, और अपके परमेश्वर का नाम अपवित्र न करें; वे यहोवा के हव्य और अपके परमेश्वर की रोटियोंके लिथे चढ़ाए जाते हैं; इसलिए वे पवित्र होंगे।

7 वे वैश्या वा अपवित्र स्त्री से ब्याह न करें; और वे किसी स्त्री को उसके पति से दूर न करें; क्योंकि वह अपके परमेश्वर के लिथे पवित्र है।

8 इसलिथे तू उसको पवित्र करना; क्योंकि वह तेरे परमेश्वर की रोटी चढ़ाता है; वह तेरे लिथे पवित्र ठहरे; क्योंकि मैं यहोवा, जो तुझे पवित्र करता हूं, पवित्र हूं।

9 और किसी याजक की बेटी, यदि वह व्यभिचार करके अपके आप को अपवित्र करे, तो वह अपके पिता को अपवित्र करती है; वह आग से जल जाएगी।

10 और जो अपके भाइयोंमें महायाजक हो, जिस के सिर पर अभिषेक का तेल डाला गया हो, और जो वस्त्र पहिनने के लिथे पवित्र किया गया हो, वह अपके सिर न उघाड़े, और न अपके वस्त्र फाड़े;

11 न तो वह किसी लोय को छूने को भीतर जाए, और न अपके पिता वा माता के कारण अपके आप को अशुद्ध करे;

12 वह न तो पवित्रस्यान से बाहर जाए, और न अपके परमेश्वर के पवित्रस्थान को अपवित्र करे; क्योंकि उसके परमेश्वर के अभिषेक के तेल का मुकुट उस पर है; मैं प्रभु हूँ।

13 और वह उसके कौमार्य में एक पत्नी ब्याह करे।

14 कोई विधवा, वा त्यागी हुई स्त्री, वा अपवित्र, वा वेश्या, इन को वह न लेना; परन्तु वह अपके ही लोगोंमें से किसी कुँवारी को ब्याह ले।

15 और अपके वंश को अपके लोगोंके बीच में अपवित्र न करे; क्योंकि मैं यहोवा उसे पवित्र करता हूं।

16 और यहोवा ने मूसा से कहा,

17 हारून से यह कह, कि पीढ़ी पीढ़ी में तेरे वंश में से जिस किसी में कोई दोष हो, वह अपके परमेश्वर की रोटी चढ़ाने के लिथे समीप न आए।

18 क्‍योंकि जिस पुरूष में कोई दोष हो, वह उसके पास न आने पाए; अन्धा, या लंगड़ा, या जिसकी नाक चपटी हो, या कोई फालतू वस्तु हो,

19 वा टूटे पांव वा टूटे हाथ का मनुष्य,

20 वा टेढ़े-मेढ़े वा बौना, वा जिसकी आंख में कोई दोष हो, वा स्कर्वी हो, वा चकनाचूर हो, वा उसके पत्यर टूट गए हों;

21 हारून याजक के वंश में से जिस में कोई दोष हो वह यहोवा के हव्य को चढ़ाने के लिथे समीप न आए; उसके पास एक दोष है; वह अपके परमेश्वर की रोटी चढ़ाने के लिथे समीप न आए।

22 वह अपके परमेश्वर की रोटी परमपवित्र और पवित्र दोनोंमें से खाए।

23 केवल वह परदे के भीतर न जाए, और न वेदी के समीप आए, क्योंकि उस में दोष है; कि वह मेरे पवित्रस्थानोंको अपवित्र न करे; क्योंकि मैं यहोवा उन्हें पवित्र करता हूं।

24 और मूसा ने यह बात हारून, और उसके पुत्रों, और सब इस्राएलियोंसे कह दी।

अध्याय 22

पुरोहित; उनके कर्तव्य और विशेषाधिकार - बलिदानों के।

1 और यहोवा ने मूसा से कहा,

2 हारून और उसके पुत्रों से कह, कि वे इस्राएलियों की पवित्र वस्तुओं से अपने आप को अलग कर लें, और जिन वस्तुओं को वे मुझ को पवित्र ठहराएं वे मेरे पवित्र नाम को अपवित्र न करें; मैं प्रभु हूँ।

3 उन से कहो, तेरी पीढ़ी पीढ़ी में से जो कोई तेरे सब वंश में से जो पवित्र वस्तुओं को जाए, जिन्हें इस्राएलियोंने यहोवा की अशुद्धता के कारण पवित्र ठहराया हो, वह प्राणी मेरे साम्हने से नाश किया जाए; मैं प्रभु हूँ।

4 हारून के वंश में से जो कोई मनुष्य कोढ़ी हो, वा उसके दौड़ने का रोग हो; जब तक वह शुद्ध न हो जाए, तब तक वह पवित्र वस्तुओं में से कुछ न खाए। और जो कोई किसी ऐसी वस्तु को जो मरे हुओं के द्वारा अशुद्ध हो, वा मनुष्य जिसका वंश उसके पास से निकल जाए, छूए;

5 या जो कोई किसी रेंगनेवाले जन्तु को छूए, जिस से वह अशुद्ध ठहरे, वा कोई मनुष्य जिस से वह अशुद्ध हो जाए, चाहे वह किसी भी प्रकार की अशुद्धता हो;

6 जो प्राणी ऐसे किसी को छूए वह सांफ तक अशुद्ध रहे, और जब तक वह अपके मांस को जल से न धोए, तब तक वह पवित्र वस्तुओं में से कुछ न खाए।

7 और जब सूर्य अस्त हो, तब वह शुद्ध ठहरे, और उसके बाद पवित्र वस्तुओं में से खाए; क्योंकि यह उसका भोजन है।

8 जो अपके आप मर जाए, वा पशुओं से फाड़ा जाए, वह उस से अशुद्ध न हो; मैं प्रभु हूँ।

9 इसलिथे वे मेरी विधि का पालन करें, ऐसा न हो कि वे उसके लिथे पाप उठाकर मर जाएं; सो यदि वे मेरी विधियोंको अपवित्र न करें, तो मैं यहोवा उनको पवित्र करूंगा।

10 कोई परदेशी पवित्र वस्तु में से कुछ न खाए; याजक का परदेशी वा भाड़े का दास पवित्र वस्तु में से कुछ न खाए।

11 परन्तु यदि याजक किसी प्राणी को उसके रुपए से मोल ले, तो वह उस में से अपके घर में उत्पन्न होनेवाले को भी खाए; वे उसका मांस खाएंगे।

12 यदि याजक की बेटी का ब्याह किसी परदेशी से हो, तो वह पवित्र वस्तुओं के बलिदान में से कुछ न खाए।

13 परन्तु यदि याजक की बेटी विधवा या तलाकशुदा हो, और उसके कोई बच्चा न हो, और अपने पिता के घर में अपनी जवानी की नाईं लौट जाए, तो वह अपके पिता का मांस खाए; परन्तु कोई परदेशी उसका भोजन न करे।

14 और यदि कोई मनुष्य पवित्र वस्तु में से अनजाने में खाए, तो उसका पांचवां भाग उसके पास रखकर पवित्र वस्तु के साथ याजक को दे।

15 और इस्राएलियोंकी जो पवित्र वस्तुएं यहोवा के लिथे चढ़ाएं वे उनको अपवित्र न करें;

16 या जब वे अपक्की पवित्र वस्तुओं को खाएं, तब उन्हें अपराध के अधर्म का भार सहने देना; क्योंकि मैं यहोवा उन्हें पवित्र करता हूं।

17 तब यहोवा ने मूसा से कहा,

18 हारून, और उसके पुत्रों, और सब इस्त्राएलियोंसे कह, कि वह इस्राएल के घराने में से वा इस्राएल में परदेशियोंमें से जो कुछ हो, जो उसकी सब मन्नतोंके लिथे अपके बलि चढ़ाए, और उसकी सब स्वेच्छाबलि जो वे होमबलि के लिथे यहोवा के लिथे चढ़ाएंगे;

19 तुम अपक्की इच्छा से निर्दोष नर नर, चाहे वह मधुमक्खियों, वा भेड़ों, वा बकरियों में से हो, बलि करना।

20 परन्तु जिस किसी में कोई दोष हो, जिसे तुम न चढ़ाना; क्‍योंकि वह तुझे स्‍वीकार्य नहीं होगा।

21 और जो कोई अपक्की मन्नत पूरी करने के लिथे यहोवा के लिथे मेलबलि वा भेड़-बकरी वा भेड़ोंके लिथे मेलबलि चढ़ाए, वह ग्रहण योग्य ठहरे; उसमें कोई दोष न हो।

22 अन्धे, वा टूटे, वा लंगड़े, वा वेन, वा स्कर्वी, वा छिले हुए, ये यहोवा को न चढ़ाना, और न वेदी पर यहोवा के लिथे होमबलि करना।

23 चाहे वह बछड़ा हो, वा भेड़ का बच्चा, जिस के कुछ फालतू या घटी हों, जिसे तू स्वेच्छाबलि करके चढ़ाए; परन्तु मन्नत के लिथे ग्रहण न किया जाए।

24 जो कुछ कुचला हुआ, या कुचला हुआ, या टूटा हुआ, या काटा गया हो, उसे तुम यहोवा को न चढ़ाना; और न अपके देश में उसकी भेंट चढ़ाना।

25 किसी परदेशी के हाथ से अपके परमेश्वर की रोटी इन में से किसी में से न चढ़ाना; क्‍योंकि उन में भ्रष्‍टाचार है, और दोष उन में हैं; वे तुम्हारे लिये ग्रहण न किए जाएंगे।

26 और यहोवा ने मूसा से कहा,

27 जब बछड़ा वा भेड़ वा बकरी निकले, तब वह सात दिन तक बांध के नीचे रहे; और आठवें दिन से लेकर उसके बाद वह यहोवा के लिथे हव्य के लिथे ग्रहण किया जाए।

28 और चाहे गाय हो वा भेड़, उसको और उसके बच्चे दोनों को एक ही दिन में घात न करना।

29 और जब तुम यहोवा के लिथे धन्यवाद का बलिदान चढ़ाओ, तब अपक्की इच्छा से उसे चढ़ाओ।

30 उसी दिन वह खाया जाए; उस में से किसी को भी दूसरे दिन तक न छोड़ना; मैं प्रभु हूँ।

31 इस कारण तुम मेरी आज्ञाओं को मानना, और उन पर चलना; मैं प्रभु हूँ।

32 और न मेरे पवित्र नाम को अपवित्र करना; परन्तु मैं इस्त्राएलियोंके बीच पवित्र ठहरूंगा; मैं यहोवा हूँ जो तुम्हें पवित्र करता है,

33 वह तुझे मिस्र देश से निकालकर तेरा परमेश्वर होने के लिथे ले आया; मैं प्रभु हूँ।

अध्याय 23

प्रभु के पर्व - विश्राम का दिन - बची रहने वाली उपज - प्रायश्चित का दिन।

1 और यहोवा ने मूसा से कहा,

2 इस्त्राएलियों से कह, कि यहोवा के जिन पर्ब्बों को तुम पवित्र सभा कहोगे, उनके विषय में मेरे पर्ब्ब भी यही हैं।

3 छ: दिन तक काम किया जाए; परन्तु सातवाँ दिन विश्राम का विश्रामदिन है, जो एक पवित्र सभा है; उस में कोई काम न करना; यह तुम्हारे सब घरों में यहोवा का विश्रामदिन है।

4 यहोवा के पर्ब्ब, अर्यात् पवित्र सभाएं ये हैं, जिनका प्रचार तुम उनके समयोंमें करना।

5 पहिले महीने के चौदहवें दिन को सांझ को यहोवा का फसह है।

6 और उसी महीने के पन्द्रहवें दिन को यहोवा के लिथे अखमीरी रोटी का पर्ब्ब है; सात दिन तक अखमीरी रोटी खाना।

7 पहिले दिन तुम्हारी पवित्र सभा हो; उस में कोई दासता का काम न करना।

8 परन्तु तुम सात दिन तक यहोवा के लिथे हव्य चढ़ाना; सातवें दिन एक पवित्र दीक्षांत समारोह है; उस में कोई दासता का काम न करना।

9 और यहोवा ने मूसा से कहा,

10 इस्त्राएलियों से कह, कि जब तुम उस देश में पहुंचो जो मैं तुम्हें देता हूं, और उसकी कटनी काटोगे, तब अपक्की कटनी की पहिली उपज का एक पूला याजक के पास ले जाना। ;

11 और वह पूले को यहोवा के साम्हने हिलाए, कि वह तुम्हारे लिथे ग्रहण योग्य हो; दूसरे दिन विश्राम के दिन के बाद याजक उसे हिलाए।

12 और जिस दिन तुम पूले को हिलाने के लिथे एक पहिले वर्ष की निर्दोष भेड़ का बच्चा होमबलि करके यहोवा के लिथे चढ़ाना।

13 और उसका अन्नबलि तेल से सना हुआ मैदा का दो दसवां अंश मैदा, और सुगन्ध के लिये यहोवा के लिथे हव्य हो; और उसका अर्घ हीन का चौथा भाग दाखमधु का हो।

14 और जिस दिन तुम अपके परमेश्वर के लिथे भेंट चढ़ाओ, उस दिन तक न तो रोटी, और न सूखा हुआ अन्न, और न हरी बालियां खाना; वह तेरी पीढ़ी पीढ़ी में तेरे सब घरों में सदा की विधि ठहरे।

15 और जिस दिन से तुम मिलापबलि का पूला ले आए हो, उस दिन से दूसरे दिन विश्राम के दिन के बाद से तुम अपके लिथे गिनना; सात विश्रामदिन पूरे हों;

16 सातवें विश्रामदिन के बाद दूसरे दिन तक तुम पचास दिन तक गिनते रहना; और तुम यहोवा के लिथे नया अन्नबलि चढ़ाना।

17 तुम अपके अपने निवासोंमें से दो दहाई की दो रोटियां हिलाकर ले आना; वे मैदे के हों; वे खमीर से पकेंगे; वे यहोवा के लिये पहिले फल हैं।

18 और अपके अपके वर्ष के सात निर्दोष भेड़ के बच्चे, और एक बछड़ा, और दो मेढ़े रोटियोंके साथ चढ़ाना; वे अपके अन्नबलि और अर्घ समेत यहोवा के लिथे होमबलि के लिथे हों, अर्यात् यहोवा के लिथे मधुर सुगन्ध का हव्य।

19 तब पापबलि के लिथे एक बकरा, और मेलबलि के लिथे एक एक वर्ष के दो भेड़ के बच्चे बलि करना।

20 और याजक उन्हें पहिली उपज की रोटियोंके लिथे हिलाए जाने के लिथे यहोवा के साम्हने हिलाए जाने के लिथे उन दोनोंमेम्नोंके साथ हिलाए; वे याजक के लिथे यहोवा के लिथे पवित्र ठहरें।

21 और उसी दिन तुम यह प्रचार करना, कि वह तुम्हारे लिये पवित्र सभा हो; उस में कोई दासता का काम न करना; वह तेरी पीढ़ी पीढ़ी में तेरे सब निवासोंमें युगानुयुग की विधि ठहरे।

22 और जब तू अपके देश की कटनी काटे, तब अपके खेत के कोनोंको काटकर अलग न करना, और न अपनी कटनी में से कुछ बटोरना; उन्हें कंगालों और परदेशियोंके लिथे छोड़ देना; मैं तुम्हारा स्वामी, परमेश्वर हूँ।

23 और यहोवा ने मूसा से कहा,

24 इस्त्राएलियों से यह कहना, कि सातवें महीने के पहले दिन को तुम को विश्रामदिन देना, अर्यात् नरसिंगा फूंकने का स्मरण, और पवित्र सभा।

25 उस में कोई दासत्व का काम न करना; परन्तु तुम यहोवा के लिथे हव्य की भेंट चढ़ाना।

26 और यहोवा ने मूसा से कहा,

27 और इसी सातवें महीने के दसवें दिन को प्रायश्चित्त का दिन हो; वह तुम्हारे लिये पवित्र सभा ठहरेगा; और तुम अपके मन को दु:ख देना, और यहोवा के लिथे हव्य चढ़ाना।

28 और उस दिन कोई काम न करना; क्योंकि वह प्रायश्चित्त का दिन है, कि अपके परमेश्वर यहोवा के साम्हने तेरे लिथे प्रायश्चित्त करे।

29 क्‍योंकि जो प्राणी उस दिन दु:ख न पाए, वह अपके लोगोंमें से नाश किया जाए।

30 और जो कोई प्राणी उस दिन कोई काम करेगा, उसी जीव को मैं उसके लोगोंमें से नाश करूंगा।

31 तुम किसी प्रकार का काम न करना; वह तेरी पीढ़ी पीढ़ी में तेरे सब घरों में सदा की विधि ठहरे।

32 वह तुम्हारे लिये विश्राम का दिन होगा, और तुम अपके मन को दु:ख दोगे; महीने के नौवें दिन को सांझ से सांझ तक अपना विश्रामदिन मानना।

33 और यहोवा ने मूसा से कहा,

34 इस्त्राएलियों से कह, कि इस सातवें महीने का पन्द्रहवां दिन यहोवा के लिथे सात दिन निवासोंका पर्ब्ब हो।

35 पहिले दिन पवित्र सभा हो; उस में कोई दासता का काम न करना।

36 सात दिन तक यहोवा के लिथे होमबलि करना; और आठवें दिन तुम्हारी पवित्र सभा हो, और तुम यहोवा के लिथे हव्य चढ़ाना; यह एक पवित्र सभा है; और उस में कोई दासता का काम न करना।

37 यहोवा के वे पर्ब्ब हैं, जिन को तुम पवित्र सभा ठहराना, अर्थात यहोवा के लिथे होमबलि, होमबलि, और अन्नबलि, और अर्घ, सब कुछ उसके दिन के सब कुछ चढ़ाने के लिथे चढ़ाना;

38 यहोवा के विश्रामदिनों को छोड़, और अपक्की भेंटों, और सब मन्नतोंको छोड़, और अपक्की सब स्वेच्छाबलि जो तुम यहोवा को देते हो, छोड़।

39 और सातवें महीने के पन्द्रहवें दिन को जब तुम देश की उपज बटोर चुके हो, तब सात दिन तक यहोवा के लिथे पर्ब्ब मानना; पहिले दिन विश्राम का दिन होगा, और आठवें दिन विश्रामदिन होगा।

40 और पहिले दिन तुम को अच्छे वृक्षों की डालियां, और खजूर की डालियां, और घने वृक्षों की डालियां, और नाले की टहनियां लेना; और तुम अपने परमेश्वर यहोवा के साम्हने सात दिन तक मगन रहना।

41 और वर्ष में सात दिन यहोवा के लिथे उसका पर्ब्ब मानना; वह तेरी पीढ़ी पीढ़ी में सदा की विधि ठहरे; सातवें महीने में उसका उत्सव मनाना।

42 तुम सात दिन तक झोंपडिय़ों में रहना; जितने इस्राएली उत्पन्न हों वे सब झोंपडिय़ों में बसेंगे;

43 जिस से तेरी पीढ़ियां जान लें, कि जब मैं इस्राएलियोंको मिस्र देश से निकाल ले आया, तब मैं ने उन को झोंपडिय़ोंमें बसा दिया; मैं तुम्हारा स्वामी, परमेश्वर हूँ।

44 तब मूसा ने इस्राएलियोंको यहोवा के पर्ब्बोंके विषय में बताया।

अध्याय 24

तेल - शो-रोटी - ईशनिंदा का कानून - हत्या का - क्षति का।

1 और यहोवा ने मूसा से कहा,

2 इस्त्राएलियोंको आज्ञा दे, कि वे ज्योति के लिथे कूटे हुए जलपाई का शुद्ध तेल तेरे पास ले आएं, जिस से दीपक नित्य जलते रहें।

3 साझी के परदे के बिना, जो मिलापवाले तम्बू में है, हारून सांफ से भोर तक यहोवा के साम्हने नित्य उसकी आज्ञा दे; वह तेरी पीढ़ी पीढ़ी में सदा की विधि ठहरे।

4 वह यहोवा के साम्हने शुद्ध दीवट पर दीपकोंको नित्य ठहराए।

5 और मैदा लेकर उसकी बारह रोटियां बनाना; दो दसवें सौदे एक केक में होंगे।

6 और उन्हें यहोवा के साम्हने पवित्र मेज़ पर दो पांति, छ: पांति करके खड़ा करना।

7 और हर एक पंक्ति में चोखा लोबान रखना, जिस से वह स्मरण के लिथे रोटियोंपर, अर्यात् यहोवा के लिथे हव्य के लिथे हो।

8 हर सब्त के दिन को वह यहोवा के साम्हने नित्य ठहराए, और वह इस्राएलियोंसे सदा की वाचा के द्वारा ले लिया जाए।

9 और वे हारून और उसके पुत्रोंके हों; और वे उसको पवित्रस्यान में खाएं; क्‍योंकि वह सदा की विधि के अनुसार यहोवा के हव्योंमें से उसके लिथे परमपवित्र ठहरे।

10 और एक इस्राएली स्त्री का पुत्र, जिसका पिता मिस्री या, इस्राएलियोंमें से निकला; और इस्राएली स्त्री का यह पुत्र और इस्राएल का एक पुरूष छावनी में आपस में भिड़े;

11 और इस्राएली स्त्री के पुत्र ने यहोवा के नाम की निन्दा की, और शाप दिया। और वे उसे मूसा के पास ले आए; (और उसकी माता का नाम शलोमीत या, जो दान के गोत्र के दिबरी की बेटी या;)

12 और उन्होंने उसे बन्दीगृह में रखा, कि यहोवा का मन उन पर प्रगट हो।

13 तब यहोवा ने मूसा से कहा,

14 शाप देनेवाले को छावनी के बाहर निकाल ले; और जितनों ने उसकी बात सुनी, वह उसके सिर पर हाथ रखे, और सारी मण्डली के लोग उस पर पत्यरवाह करें।

15 और इस्त्राएलियोंसे यह कहना, कि जो कोई अपके परमेश्वर को कोसता है, उसका पाप वहन होगा।

16 और जो कोई यहोवा के नाम की निन्दा करे वह निश्चय मार डाला जाए, और सारी मण्डली उस पर पत्यरवाह करे; परदेशी की नाईं जो उस देश में उत्पन्न हो, जब वह यहोवा के नाम की निन्दा करे, वह मार डाला जाए।

17 और जो कोई किसी मनुष्य को घात करे वह निश्चय मार डाला जाए।

18 और जो पशु का घात करे, वह उसको अच्छा करे; जानवर के लिए जानवर।

19 और यदि कोई अपके पड़ोसी पर दोष करे; जैसा उस ने किया है, वैसा ही उसके साथ भी किया जाएगा;

20 भंग की सन्ती तोड़, आंख की सन्ती आंख, और दांत की सन्ती दांत; जैसा उस ने मनुष्य में दोष उत्पन्न किया है, वैसा ही उसके साथ फिर किया जाएगा।

21 और जो कोई पशु का घात करे, वह उसको फेर दे; और जो मनुष्य को मार डाले, वह मार डाला जाए।

22 और परदेशियोंके लिथे भी एक ही प्रकार की व्‍यवस्‍था करना, मानो अपके देश में से किसी एक के लिथे; क्योंकि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं।

23 तब मूसा ने इस्राएलियोंसे कहा, कि शाप देनेवालोंको छावनी में से निकाल ले, और उस पर पत्यरवाह करें; और इस्राएलियोंने वैसा ही किया जैसा यहोवा ने मूसा को आज्ञा दी थी।

अध्याय 25

सातवां वर्ष - जुबली - जुल्म का - आज्ञाकारिता का - भूमि का मोचन - घरों का - सेवकों का।

1 और यहोवा ने सीनै पर्वत पर मूसा से कहा,

2 इस्त्राएलियों से कह, कि जब तुम उस देश में पहुंचो जो मैं तुम्हें देता हूं, तब उस देश में यहोवा के लिथे विश्राम का दिन माना जाएगा।

3 छ: वर्ष अपके खेत में बोना, और छ: वर्ष तक अपक्की दाख की बारी छांटना, और उसकी उपज बटोरना;

4 परन्तु सातवें वर्ष में वह देश के लिये विश्राम का विश्रामदिन और यहोवा के लिथे विश्रामदिन ठहरे; तू अपना खेत न बोना, और न अपनी दाख की बारी छांटना।

5 जो तेरी कटनी से अपने आप उगे वह न काटना, और न अपक्की दाखलता के दाख बिना कपड़े बटोरना; क्योंकि वह देश के लिये विश्राम का वर्ष है।

6 और देश का विश्रामदिन तुम्हारे लिथे मांस ठहरेगा; तेरे लिये, और तेरे दास, और तेरी दासी, और तेरे किराए के दास, और तेरे संग रहनेवाले परदेशी के लिथे,

7 और तेरे पशुओं, और जो पशु तेरे देश में हों, उनकी सब उपज मांस ही ठहरे।

8 और अपके लिथे सात विश्रामदिन अर्थात सात गुणा सात वर्ष गिना करना; और उन सात विश्रामदिनोंकी अवधि तुम्हारे लिये उनतालीस वर्ष की होगी।

9 और सातवें महीने के दसवें दिन को जुबली की नरसिंगा फूंकना, अर्थात प्रायश्चित्त के दिन अपके सारे देश में नरसिंगा फूंकना।

10 और तुम पचासवें वर्ष को पवित्र ठहराना, और सारे देश में उसके सब रहनेवालोंके लिथे स्वाधीनता का प्रचार करना; वह तुम्हारे लिये जुबली होगा; और अपके अपके अपके निज भाग में फेर देना, और अपके अपके कुल को फेर देना।

11 तुम्हारे लिये वह पचासवां वर्ष जुबली हो; तुम न बोना, और जो उस में अपने आप उगता है उसे काटना, और अपनी दाखलता में से अंगूर न तोड़ना।

12 क्योंकि वह जुबली का दिन है; वह तेरे लिथे पवित्र ठहरे; तुम उसकी उपज को मैदान में से खाओगे।

13 इस जुबली के वर्ष में तुम अपके अपके अपके निज भाग में फेर देना।

14 और यदि तू अपके पड़ोसी को कुछ बेच दे, वा अपके पड़ोसी के हाथ से कुछ मोल ले, तो एक दूसरे पर अन्धेर न करना।

15 जुबली के वर्ष के जितने वर्ष अपके पड़ोसी से तू मोल लेना, और जितने वर्ष उसके फल वह तेरे लिथे बेचेगा उसके अनुसार वह तुझे मोल लेना;

16 तू बहुत वर्ष के अनुसार उसका दाम बढ़ा देना, और थोड़े से वर्ष के अनुसार उसका दाम घटा देना; क्‍योंकि जितने वर्ष के फल वह तुझे बेचता है, उसके अनुसार वह तेरे लिथे बिकता है।

17 सो तुम एक दूसरे पर अन्धेर न करना; परन्तु तू अपके परमेश्वर का भय मानना; क्योंकि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं।

18 इसलिथे तुम मेरी विधियोंको मानना, और मेरे नियमोंको मानना, और उन पर चलना; और तुम उस देश में निडर बसोगे।

19 और देश में उसकी उपज होगी, और तुम अपना पेट भरकर खाओगे, और उस में निडर बसोगे।

20 और यदि तुम कहो, कि सातवें वर्ष हम क्या खाएं? देख, हम न बोएंगे, और न अपनी उपज बटोरेंगे;

21 तब मैं छठवें वर्ष में तुझ पर अपनी आशीष की आज्ञा दूंगा, और वह तीन वर्ष तक फल देगा।

22 और आठवां वर्ष बोना, और नवें वर्ष तक पुराना फल खाया करना; जब तक उसके फल न आ जाएँ तब तक तुम पुराने भण्डार में से कुछ खाओगे।

23 भूमि सदा के लिये न बिकेगी; क्योंकि भूमि मेरी है; क्योंकि तुम मेरे साथ परदेशी और परदेशी हो।

24 और अपक्की निज भूमि के सारे देश में उस देश के लिथे छुटकारे देना।

25 यदि तेरा भाई कंगाल हो गया हो, और अपक्की निज भूमि में से कुछ बेच डाला हो, और उसका कोई परिजन उसे छुड़ाने आए, तो जो उसके भाई ने बेच दिया हो, वह उसे छुड़ा ले।

26 और यदि मनुष्य के पास उसे छुड़ाने वाला कोई न हो, और वह आप ही उसे छुड़ाने के योग्य हो;

27 तब वह उसके विक्रय के वर्ष गिन ले, और उस को जिस को उस ने उसको बेचा या, फेर दे; कि वह अपने अधिकार में लौट जाए।

28 परन्तु यदि वह उसे उसके लिये फेर न दे सके, तो जो बेचा जाए वह उसके मोल लेनेवाले के हाथ में जुबली के वर्ष तक बना रहे; और वह जुबली के दिन निकलकर अपक्की निज भाग में लौट जाए।

29 और यदि कोई अपना घर शहरपनाह में बेच दे, तो वह बिक जाने के एक वर्ष के भीतर उसे छुड़ा ले; एक पूरे वर्ष के भीतर वह इसे भुना सकता है।

30 और यदि वह पूरे एक वर्ष के भीतर न छुड़ाया जाए, तो जो घर शहरपनाह में है वह उसके मोल लेनेवाले की पीढ़ी पीढ़ी में सदा स्थिर रहेगा; वह जुबली में न निकले।

31 परन्तु जिन गांवों के चारों ओर शहरपनाह न हो, उनके घर देश के खेत गिने जाएं; वे छुड़ाए जा सकते हैं, और वे जुबली पर निकलेंगे।

32 लेवीय लेवियोंके नगर, और अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके नगरोंके घरानोंके तौभी लेवीय कभी भी छुड़ा ले।

33 और यदि कोई लेवियोंमें से मोल ले, तो वह घर जो बिका हुआ हो, और अपके निज भाग का नगर जुबली के वर्ष में निकल जाए; क्‍योंकि लेवियोंके नगरोंके घराना इस्राएलियोंके बीच में उनकी निज भूमि है।

34 तौभी उनके नगरोंके चराइयोंकी भूमि बिक न सकेगी; क्‍योंकि यह उनका नित्य अधिकार है।

35 और यदि तेरा भाई कंगाल होकर तेरे संग सड़कर सड़ जाए; तब तू उसे छुड़ाना; हां, चाहे वह परदेशी हो या परदेशी; कि वह तुम्हारे साथ रहे।

36 उस से कोई सूद न लेना, और न बढ़ाना; परन्तु अपने परमेश्वर का भय मानना; कि तेरा भाई तेरे संग रहे।

37 तू उसे अपना रूपया सूद पर न देना, और न अपना भोजन बढ़ा देना।

38 मैं तेरा परमेश्वर यहोवा हूं, जो तुझे कनान देश देने और तेरा परमेश्वर होने के लिथे मिस्र देश से निकाल लाया हूं।

39 और यदि तेरा भाई जो तेरे पास रहता है, कंगाल होकर तुझे बेच दिया जाए; तू उसे दास के रूप में सेवा करने के लिए विवश नहीं करना;

40 परन्तु भाड़े के दास और परदेशी की नाईं वह तेरे संग रहे, और जुबली के वर्ष तक तेरी सेवा करे;

41 और तब वह अपके बच्चों समेत तेरे पास से चला जाए, और अपके घराने को लौट जाए, और अपके पुरखाओं के हाथ में फिर जाए।

42 क्योंकि वे मेरे दास हैं, जिन्हें मैं मिस्र देश से निकाल लाया हूं; उन्हें बंधुआ-पुरुषों के रूप में नहीं बेचा जाएगा।

43 तू उस पर कठोरता से शासन न करना; परन्तु अपने परमेश्वर का भय मानना।

44 तेरे दास, और तेरी दासियां, जो तेरे पास होंगी, वे दोनों उसी की होंगी।

तुम्हारे चारों ओर के अन्यजाति; उनमें से तुम बंधुआ और दासी मोल लेना।

45 और जो परदेशी तुम्हारे बीच रहते हैं, उन से तुम मोल लेना; और वे तेरे अधिकार में होंगे।

46 और अपके बाद अपके अपके अपके पुत्रोंके लिथे उनको निज भाग करके लेना; वे सदा के लिये तेरे दास बने रहेंगे; परन्तु अपने भाइयों इस्त्राएलियोंके ऊपर तुम एक दूसरे पर कठोरता से शासन न करना।

47 और यदि कोई परदेशी वा परदेशी तेरे कारण धनी हो जाए, और तेरा भाई जो उसके पास रहता है कंगाल हो जाए, और अपके आप को परदेशी वा परदेशी के हाथ, वा परदेशी के घराने के कांटोंके हाथ बेच डाले;

48 उसके बिक जाने के बाद वह फिर छुड़ाया जाए; उसका कोई भाई उसे छुड़ा सकता है;

49 या तो उसका चाचा वा उसके चाचा का पुत्र उसे छुड़ा ले, वा उसके घराने का कोई निकट का कोई उसे छुड़ा ले; वा यदि वह समर्थ हो, तो अपने आप को छुड़ा सकता है।

50 और जिस वर्ष से वह उसके हाथ बेचा गया, उस वर्ष से लेकर जुबली के वर्ष तक उसका हिसाब अपके मोल लेनेवाले से करे; और उसकी बिक्री का मूल्य उसके संग रहने वाले कर्मचारी के समय के अनुसार हो।

51 यदि और बहुत वर्ष शेष रह जाएं, तो वह अपके छुटकारे का जो रुपया उस से मोल लिया गया हो, उन के अनुसार उनके अनुसार फिर दे।

52 और यदि जुबली के वर्ष तक थोड़े ही वर्ष बचे हों, तो वह उसके संग गिन ले, और उसके छुटकारे का दाम उसके वर्ष के अनुसार उसे फिर दे।

53 और वह उसके संग प्रति वर्ष भाड़े का दास हो; और दूसरा तेरी दृष्टि में उस पर कठोरता से शासन न करेगा।

54 और यदि वह इन वर्षोंमें छुड़ाया न जाए, तो वह अपक्की सन्तान समेत जुबली के वर्ष में निकल जाए।

55 क्योंकि इस्राएली मेरे दास हैं; वे मेरे दास हैं, जिन्हें मैं मिस्र देश से निकाल लाया हूं; मैं तुम्हारा स्वामी, परमेश्वर हूँ।

अध्याय 26

मूर्तिपूजा की - धार्मिकता - आज्ञाकारी को आशीर्वाद।

1 तुम अपके देश में न मूरतें बनवाना, और न खुदी हुई मूरत बनाना, और न अपनी खड़ी मूरत बनवाना, और अपने देश में दण्डवत् करने के लिथे पत्यर की कोई मूरत न बनाना; क्योंकि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं।

2 तुम मेरे विश्रामदिनोंको मानना, और मेरे पवित्रस्थान का भय मानना; मैं प्रभु हूँ।

3 यदि तुम मेरी विधियों पर चलो, और मेरी आज्ञाओं को मानो, और उन पर चलो;

4 तब मैं तुम को नियत समय में मेंह दूंगा, और भूमि उसकी उपज उपजाएगी, और मैदान के वृक्ष अपने फल देंगे।

5 और तेरा दहाई का पौधा पुराने तक पहुंच जाएगा, और विंटेज बोने के समय तक पहुंच जाएगा; और अपक्की रोटी भर पेट खाना, और अपके देश में निडर रहना।

6 और मैं देश में शान्ति दूंगा, और तुम लेटोगे, और कोई तुम्हें डराएगा नहीं; और मैं दुष्ट जन्तुओं को देश में से निकाल दूंगा, और तलवार तेरे देश में न चलेगी।

7 और अपके शत्रुओं का पीछा करना, और वे तलवार से तेरे साम्हने मारे जाएंगे।

8 और तुम में से पांच पुरूष एक सौ का पीछा करें, और एक सौ दस हजार को भगाएं; और तुम्हारे शत्रु तुम्हारे आगे तलवार से मारे जाएंगे।

9 क्योंकि मैं तेरा आदर करूंगा, और तुझे फूला करूंगा, और बढ़ाऊंगा, और अपक्की वाचा बान्धूंगा।

10 और तुम पुराने भण्डार खाओगे, और नये के कारण पुराने को निकालोगे।

11 और मैं अपके निवास को तेरे बीच में स्थापित करूंगा; और मेरा प्राण तुझ से घृणा न करेगा;

12 और मैं तुम्हारे बीच चलूंगा, और तुम्हारा परमेश्वर ठहरूंगा, और तुम मेरी प्रजा ठहरोगे।

13 मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं, जो तुम को मिस्र देश से निकाल लाया, कि तुम उनके दास न बनो; और मैं ने तेरे जूए के बन्धन तोड़ दिए, और तुझे सीधा कर दिया है।

14 परन्तु यदि तुम मेरी न मानो, और इन सब आज्ञाओं को न मानोगे;

15 और यदि तुम मेरी विधियों को तुच्छ जाने, वा मेरे नियमों से घृणा करने लगे, कि मेरी सब आज्ञाओं को न मानना, परन्तु मेरी वाचा को तोड़ना;

16 मैं भी तुझ से ऐसा करूंगा; मैं तेरे ऊपर भय, भस्म, और जलती हुई आग को भी नियुक्त करूंगा, जो आंखों को भस्म कर देगा, और मन को दु:ख देगा; और अपना बीज व्यर्थ बोना, क्योंकि तेरे शत्रु उसे खा जाएंगे।

17 और मैं तेरे साम्हने खड़ा रहूंगा, और तू अपके शत्रुओं के साम्हने घात किया जाएगा; जो तुझ से बैर रखते हैं वे तुझ पर राज्य करेंगे; और जब कोई तुम्हारा पीछा न करे तब तुम भाग जाओगे।

18 और यदि तुम अब तक इन सब बातोंके कारण मेरी न मानो, तो मैं तुम्हारे पापोंके लिथे सात गुणा अधिक दण्ड दूंगा।

19 और मैं तेरे सामर्थ के घमण्ड को तोड़ डालूंगा; और मैं तेरे आकाश को लोहे की नाईं, और तेरी पृय्वी को पीतल की नाईं बनाऊंगा;

20 और तेरा बल व्यर्थ जाएगा; क्‍योंकि तेरी भूमि से उसकी उपज न होगी, और न देश के वृक्ष उपजाएंगे।

21 और यदि तुम मेरे विरोध में चलो, और मेरी न मानो; मैं तुम्हारे पापों के अनुसार तुम पर सात गुना और विपत्तियां लाऊंगा।

22 और मैं तुम्हारे बीच में वनपशु भेजूंगा, जो तुम्हारे लड़केबालोंमें से तुम को लूटेंगे, और तुम्हारे पशुओं को नाश करेंगे, और तुम को गिने जाएंगे; और तुम्हारे राजमार्ग उजाड़ हो जाएंगे।

23 और यदि तुम इन बातोंके द्वारा मेरे द्वारा सुधार न करोगे, वरन मेरे साम्हने चलोगे;

24 तब मैं भी तेरे साम्हने चलूंगा, और तेरे पापोंके लिथे सात बार तुझे दण्ड दूंगा।

25 और मैं तुम पर तलवार चलाऊंगा, जो मेरी वाचा के झगड़े का पलटा लेगी; और जब तुम अपके नगरोंमें इकट्ठे हो जाओगे, तब मैं तुम्हारे बीच मरी भेजूंगा; और तुम शत्रु के वश में कर दिए जाओगे।

26 और जब मैं तेरी रोटी की लाठी को तोड़ डालूं, तब दस स्त्रियां तेरी रोटी एक ही तंदूर में सेंकेंगी, और वे तेरी रोटी तौल कर तुझे लौटा देंगी; और तुम खाओगे, और तृप्त न होओगे।

27 और यदि तुम इन सब बातोंके कारण मेरी न मानो, वरन मेरे साम्हने चलो;

28 तब मैं भी जलजलाहट के साथ तेरे साम्हने चलूंगा; और मैं, मैं भी, तेरे पापोंके लिथे सात बार तुझे ताड़ना दूंगा।

29 और अपके पुत्रोंका मांस और अपक्की पुत्रियोंका मांस अपके अपके अपके अपके अपके पुत्रियोंका मांस अप खाओ।

30 और मैं तेरे ऊंचे स्यानोंको नाश करूंगा, और तेरी मूरतोंको नाश करूंगा, और तेरी लोथोंको तेरी मूरतोंकी लोथोंपर डालूंगा, और मेरा प्राण तुझ से घृणा करेगा।

31 और मैं तेरे नगरोंको उजाड़ दूंगा, और तेरे पवित्रस्थानोंको उजाड़ दूंगा, और तेरी सुगन्ध का सुगन्ध न सूंघूंगा।

32 और मैं देश को उजाड़ दूंगा; और तेरे शत्रु जो उस में रहते हैं, उस से चकित होंगे।

33 और मैं तुम को अन्यजातियोंमें तितर-बितर करूंगा, और तुम्हारे पीछे तलवार खींचूंगा; और तेरा देश उजाड़ हो जाएगा, और तेरे नगर उजाड़ हो जाएंगे।

34 तब जब तक देश उजाड़ पड़ा रहेगा, और तू अपके शत्रुओं के देश में रहेगा, तब तक उसके विश्रामदिन भोगेंगे; तब भी देश विश्राम करेगा, और अपने विश्रामदिनों का आनन्द उठाएगा।

35 जब तक वह उजाड़ पड़ा रहे, तब तक वह विश्राम करेगा; क्योंकि जब तुम उस में रहते थे, तब वह तुम्हारे विश्रामदिनों में विश्राम नहीं करता था।

36 और जो तुम में से बचे हुए हैं, मैं उनके शत्रुओं के देश में उनके मन में मूर्छा भेजूंगा; और हिलते हुए पत्ते का शब्द उनका पीछा करेगा; और वे तलवार से भागकर भागेंगे; और जब कोई पीछा न करे तब वे गिर पड़ेंगे।

37 और जब कोई पीछा न करे, तब वे तलवार के साम्हने एक दूसरे पर गिरेंगे; और तुझे अपने शत्रुओं के साम्हने खड़े होने का अधिकार न होगा।

38 और तुम अन्यजातियों के बीच नष्ट हो जाओगे, और तुम्हारे शत्रुओं का देश तुम्हें खा जाएगा।

39 और जो तुम में से बचे रहेंगे वे अपके अधर्म के कारण अपके शत्रुओं के देश में मारे जाएंगे; और उनके पिता के अधर्म में भी वे उनके साथ दूर रहेंगे।

40 यदि वे अपके अधर्म का काम, और अपके पितरोंके अधर्म को मान लें, और अपके उस अपराध के साथ जो उन्होंने मुझ से किया या, और यह भी कि वे मेरे साम्हने चले हैं;

41 और मैं भी उनके साम्हने चलकर उनके शत्रुओं के देश में पहुंचा हूं; यदि उनका खतनारहित मन नम्र हो जाए, और वे अपके अधर्म का दण्ड ग्रहण करें;

42 तब मैं याकूब के साथ अपनी वाचा को, और इसहाक के साथ अपनी वाचा को, और इब्राहीम के साथ अपनी वाचा को भी याद करूंगा; और मैं देश को स्मरण रखूंगा।

43 देश भी उन में से बचा रहेगा, और जब तक वह उनके बिना उजाड़ पड़ी रहे, तब तक वह अपने विश्रामदिनों का आनन्द उठाएगा; और वे अपके अधर्म का दण्ड ग्रहण करेंगे; क्योंकि उन्होंने मेरे नियमों को तुच्छ जाना, और उनके प्राण मेरी विधियों से घृणा करते थे।

44 और तौभी जब वे अपके शत्रुओं के देश में होंगे, तब मैं उनको न तो त्यागूंगा, और न उनसे घिन करूंगा, कि उन्हें सत्यानाश कर डालूं, और अपक्की वाचा को तोड़ दूं; क्योंकि मैं उनका परमेश्वर यहोवा हूं।

45 परन्तु मैं उनके निमित्त उनके पुरखाओं की वाचा को स्मरण करूंगा, जिन्हें मैं अन्यजातियोंके साम्हने मिस्र देश से निकाल लाया, कि मैं उनका परमेश्वर ठहरूं; मैं प्रभु हूँ।

46 जो विधि और नियम और व्यवस्था यहोवा ने उसके और इस्त्राएलियोंके बीच सीनै पर्वत पर मूसा के हाथ से बनाई वे ये हैं।

अध्याय 27

मन्नतें - दशमांश नहीं बदला जा सकता है।

1 और यहोवा ने मूसा से कहा,

2 इस्त्राएलियों से कह, कि जब कोई पुरूष एक ही मन्नत माने, तब वे लोग तेरे विचार से यहोवा के लिथे हों।

3 और तेरा मोल बीस वर्ष से लेकर साठ वर्ष तक के पुरूष का हो, अर्यात् पवित्रस्‍थान के शेकेल के अनुसार तेरा मोल पचास शेकेल चांदी का हो।

4 और यदि वह स्त्री हो, तो तेरा मोल तीस शेकेल हो।

5 और यदि पांच वर्ष से लेकर बीस वर्ष तक की अवस्था हो, तो पुरूषोंके लिथे बीस शेकेल, और स्त्रियोंके लिथे दस शेकेल ठहरे।

6 और यदि वह एक महीने की अवस्था से लेकर पांच वर्ष तक की हो, तो तेरा मोल पांच शेकेल चान्दी का हो, और स्त्री के लिए तेरा मोल तीन शेकेल चांदी का हो।

7 और यदि वह साठ वर्ष वा उस से अधिक का हो; यदि पुरूष हो, तो पन्द्रह शेकेल, और स्त्री के लिथे दस शेकेल ठहरे।

8 परन्तु यदि वह तेरी दृष्टि से कंगाल हो, तो वह याजक के साम्हने उपस्थित हो, और याजक उसका मूल्यांकन करे; याजक अपनी मन्नत के अनुसार उसकी मान करे।

9 और यदि वह पशु हो, जिस में मनुष्य यहोवा के लिथे भेंट चढ़ाए, तो जो कुछ मनुष्य ऐसे में से यहोवा को दे वह सब पवित्र ठहरे।

10 वह न तो उसे बदलेगा, और न भला उसे बुरे के बदले बदलेगा, और न बुरे को भले के बदले बदलेगा; और यदि वह पशु के बदले पशु को सब कुछ बदल दे, तो वह और उसका विनिमय पवित्र ठहरे।

11 और यदि कोई अशुद्ध पशु हो, जिसके विषय में वे यहोवा के लिथे बलिदान न करें, तो वह उस पशु को याजक के साम्हने ले जाए;

12 और याजक उसका मूल्यांकन करे, चाहे वह अच्छा हो या बुरा; जो याजक है, उसका तू जैसा समझता है, वैसा ही होगा।

13 परन्तु यदि वह उसे कुछ भी छुड़ा ले, तो वह उसका पांचवां भाग तेरे अनुमान के अनुसार बढ़ाए।

14 और जब कोई अपके भवन को यहोवा के लिथे पवित्र करने के लिथे पवित्र करे, तब याजक उसका विचार करे, कि वह भला है वा बुरा; जैसा याजक उसका अनुमान लगाए, वैसा ही वह स्थिर रहे।

15 और यदि उसका पवित्र करनेवाला अपके घराने को छुड़ा ले, तो वह तेरे गिनने के रुपए का पांचवां भाग उस में मिला दे, और वह उसका हो।

16 और यदि कोई अपक्की निज भूमि का कोई भाग यहोवा के लिथे पवित्र करे, तो तेरा मोल उसके वंश के अनुसार ठहरे; एक होमेर जव के बीज का मोल चान्दी के पचास शेकेल हो।

17 यदि वह अपके खेत को जुबली के वर्ष से पवित्र करे, तो वह तेरे विचार के अनुसार स्थिर ठहरेगा।

18 परन्तु यदि वह जुबली के पश्चात् अपके खेत को पवित्र करे, तब जितने वर्ष जुबली के वर्ष तक या, उतने का हिसाब याजक उसके लिथे गिन ले, और वह तेरे विचार से घट जाए।

19 और यदि कोई खेत को पवित्र करनेवाला उसको किसी रीति से छुड़ा ले, तो वह तेरे गिनने के रुपए का पांचवां भाग उस में मिला दे, और वह उसके लिथे निश्चय हो जाए।

20 और यदि वह खेत को छुड़ाने न पाए, वा उस ने किसी दूसरे के हाथ बेच दिया हो, तो वह फिर कभी न छुड़ाया जाएगा।

21 परन्तु जब वह भूमि जुबली के दिन निकल जाए, तब वह यहोवा के लिथे अर्पण किए हुए खेत की नाईं पवित्र ठहरे; उसका अधिकार याजक का हो।

22 और यदि कोई मनुष्य किसी ऐसे खेत को जिसे उस ने मोल लिया हो, यहोवा के लिथे पवित्र करे, जो उसके निज भूमि में से न हो;

23 तब याजक अपके अपके लिथे जुबली के वर्ष तक अपके गिनने के योग्य ठहराए; और उस दिन वह तेरा मूल्यांकन यहोवा के लिथे पवित्र ठहराए।

24 जुबली के वर्ष में खेत उसके मोल लिया जाए, अर्यात् जिस के पास भूमि की भूमि का अधिकार हो उसी के हाथ में फिर जाए।

25 और तेरा कुल गिनना पवित्रस्थान के शेकेल के अनुसार हो; शेकेल बीस गेरा हो।

26 केवल पशुओं में से जो पहिलौठा यहोवा का पहिलौठा ठहरे, उसको कोई मनुष्य पवित्र न करे; चाहे वह बैल हो, या भेड़; यह प्रभु का है।

27 और यदि वह अशुद्ध पशु का हो, तो वह तेरे विचार के अनुसार उसको छुड़ा ले, और उसका पांचवां भाग उस में मिला दे; या यदि वह छुड़ाया न जाए, तो वह तेरे विचार के अनुसार बिक जाए।

28 तौभी कोई अर्पण वस्तु न हो, कि मनुष्य क्या पशु, क्या अपक्की भूमि में से अपना सब कुछ यहोवा को अर्पित करे, वह बेचा या छुड़ाया जाए; हर अर्पण की हुई वस्तु यहोवा के लिथे परमपवित्र है।

29 कोई अर्पण न किया जाए, जो मनुष्योंके अर्पण किया जाए; परन्तु निश्चय मार डाला जाएगा।

30 और देश का सब दशमांश, चाहे भूमि के बीज का, वा वृक्ष के फल का, यहोवा ही का है; वह यहोवा के लिथे पवित्र है।

31 और यदि कोई अपके दशमांश में से कुछ भी छुड़ाना चाहे, तो उसका पांचवां भाग उस में मिला दे।

32 और गाय-बैल वा भेड़-बकरी के दशमांश का, जो लाठी के नीचे से निकले उसका दशमांश यहोवा के लिथे पवित्र ठहरे।

33 वह न तो अच्छे या बुरे की खोज करेगा, और न उसे बदलेगा; और यदि वह उसे कुछ भी बदल दे, तो वह और उसका बदला दोनों पवित्र ठहरें; उसे छुड़ाया नहीं जाएगा।

34 जो आज्ञाएं यहोवा ने सीनै पर्वत पर इस्राएलियोंके लिथे मूसा को दी थीं वे ये ही हैं।

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