इफिसियों

इफिसियों के लिए प्रेरित पौलुस का पत्र

 

अध्याय 1

मसीह के द्वारा छुटकारे - समय की परिपूर्णता का युग - आत्मा की मुहर।

1 पौलुस, जो परमेश्वर की इच्छा से यीशु मसीह का प्रेरित है, और उन पवित्र लोगों के नाम जो इफिसुस में हैं, और जो मसीह यीशु में विश्वासयोग्य हैं;

2 हमारे पिता परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शान्ति मिले।

3 हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर और पिता का धन्यवाद हो, जिस ने हमें मसीह में स्वर्गीय स्थानों में सब प्रकार की आत्मिक आशीषें दी हैं;

4 जैसे उस ने हमें जगत की उत्पत्ति से पहिले उस में चुन लिया है, कि हम उसके साम्हने प्रेम में पवित्र और निर्दोष ठहरें;

5 और हमें पहिले से ठहराया, कि यीशु मसीह के द्वारा उस की इच्छा के भली भाँति हम से सन्तान ले ले,

6 अपने उस अनुग्रह की महिमा की स्तुति करने के लिथे, जिस में उस ने हम को अपक्की प्रीति में ग्रहण किया है;

7 जिस में हमें उसके लोहू के द्वारा छुटकारा मिला है, अर्थात उसके अनुग्रह के धन के अनुसार पापों की क्षमा;

8 उस ने हम में सब प्रकार की बुद्धि और विवेक से भरपूरी की है;

9 और हम को उसकी इच्छा का भेद उसकी उस प्रसन्नता के अनुसार जो उस ने अपने आप में ठानी है, प्रगट किया है;

10 कि समय की परिपूर्णता के समय में वह सब कुछ जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर हैं, सब कुछ मसीह में एक साथ इकट्ठा कर सकता है; उसमें भी;

11 जिस में हम ने भी उसका भाग पाया है, जो उस की इच्छा के अनुसार पहिले से ठहराया गया है, जो अपनी इच्छा से सब कुछ करता है;

12 कि हम उसकी महिमा की स्तुति करें, जिस ने पहिले मसीह पर भरोसा रखा।

13 जिस पर तुम ने भी भरोसा किया, उसके बाद सत्य का वचन सुना, जो तुम्हारे उद्धार का सुसमाचार है; जिस पर भी विश्वास करने के बाद उस प्रतिज्ञा के पवित्र आत्मा से तुम पर मुहर लगाई गई,

14 जो मोल ली गई सम्पत्ति के छुटकारे तक हमारे निज भाग में से उसकी महिमा की स्तुति के लिथे अर्या हुआ है।

15 इस कारण मैं ने भी, जब मैं ने प्रभु यीशु में तुम्हारे विश्वास और सब पवित्र लोगों से प्रेम के विषय में सुना,

16 और मेरी प्रार्थनाओं में तेरा स्मरण करके तेरा धन्यवाद न करना;

17 कि हमारे प्रभु यीशु मसीह का परमेश्वर, जो महिमा का पिता है, तुम्हें अपने ज्ञान में ज्ञान और रहस्योद्घाटन की आत्मा दे;

18 तेरी समझ की आंखें ज्योतिर्मय होती जा रही हैं; ताकि तुम जान सको कि उसके बुलाए जाने की आशा क्या है, और पवित्र लोगों के पास उसके निज भाग की महिमा का क्या धन है,

19 और हम लोगों के लिये उसकी शक्ति की महानता क्या है, जो उसकी पराक्रमी शक्ति के काम के अनुसार विश्वास करते हैं,

20 जो उस ने मसीह में गढ़ा, जब उस ने उसको मरे हुओं में से जिलाया, और अपके दहिने हाथ पर स्‍वर्ग में खड़ा किया,

21 सब प्रधानता, और पराक्रम, और प्रभुता, और हर एक नाम जो न केवल इस जगत में, वरन आनेवाले समय में भी कहलाता है, से कहीं बढ़कर है;

22 और सब कुछ अपके पांवोंके तले रख दिया, और उसे सब वस्तुओंका प्रधान कलीसिया को दे दिया,

23 उसकी देह क्या है, उसी की परिपूर्णता जो सब में सब कुछ भरती है।


अध्याय 2

हवा की शक्ति का राजकुमार - अनुग्रह से मुक्ति, और मसीह के माध्यम से गोद लेना - चर्च की नींव।

1 और उस ने तुझे जिलाया है, जो अपराधों और पापोंके कारण मरे हुए थे;

2 उस समय तुम इस जगत की सी चाल के अनुसार चलते थे, और आकाश के अधिकार के हाकिम, अर्थात् उस आत्मा के अनुसार जो अब आज्ञा न माननेवालोंमें कार्य करता है;

3 जिन के बीच में हम सब ने अपने शरीर की अभिलाषाओं में, शरीर और मन की अभिलाषाओं को पूरा करने के लिए, बातें कीं; और स्वभाव से ही औरों की नाईं क्रोध की सन्तान थे।

4 परन्तु परमेश्वर, जो दया का धनी है, अपने उस बड़े प्रेम के कारण जिस से उस ने हम से प्रेम रखा,

5 जब हम पापों में मरे हुए थे, तब भी हमें मसीह के साथ जिलाया, (अनुग्रह से तुम बच गए हो;)

6 और हम को एक संग जिलाया, और स्वर्ग में मसीह यीशु में बिठाया है;

7 कि आनेवाले युगोंमें वह अपके अनुग्रह के अथाह धन को हम पर अपनी करूणा के द्वारा मसीह यीशु के द्वारा प्रगट करे।

8 क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है; और वह आपकी नहीं; परन्तु यह परमेश्वर का उपहार है;

9 कामों के कारण नहीं, ऐसा न हो कि कोई घमण्ड करे।

10 क्‍योंकि हम उसके बनाए हुए हैं, और उन भले कामों के लिथे मसीह यीशु में सृजे गए हैं, जिन पर परमेश्वर ने पहिले ठहराया, कि हम उन पर चलें।

11 इसलिए याद रखो, कि तुम शरीर में अन्यजातियों से पहले थे, जो हाथ से बने शरीर में खतना कहलाते हैं, जो खतनारहित कहलाते हैं;

12 कि उस समय तुम इस्त्राएल के देश से परदेशी होकर, और प्रतिज्ञा की वाचाओं से परदेशी होकर, और आशा न रखते हुए, और जगत में परमेश्वर से रहित होकर, मसीह से रहित थे;

13 परन्तु अब तुम जो कभी दूर थे, मसीह यीशु में मसीह के लोहू के निकट हो गए हो।

14 क्योंकि वही हमारा मेल है, जिस ने दोनोंको एक कर दिया, और हमारे बीच की दीवार के बीच की शहरपनाह को तोड़ डाला;

15 और उसके शरीर से बैर को, अर्थात विधियों में दी हुई आज्ञाओं की व्यवस्था को भी दूर कर दिया; क्‍योंकि अपने आप में दो नये पुरूष उत्पन्न करना, और मेल मिलाप करना;

16 और यह कि वह क्रूस के द्वारा एक ही देह में दोनोंका मेल परमेश्वर से करे, और उसके द्वारा शत्रुता का नाश किया जाए;

17 और आकर तुम्हें जो दूर थे, और जो निकट थे, उन्हें शान्ति का उपदेश दिया।

18 क्‍योंकि उसी के द्वारा हम दोनों की एक ही आत्मा के द्वारा पिता तक पहुंच होती है।

19 इसलिथे अब तुम परदेशी और परदेशी नहीं रहे, वरन पवित्र लोगोंके संगी नागरिक और परमेश्वर के घराने के हो गए;

20 और प्रेरितों और भविष्यद्वक्ताओं की नेव पर बने हैं, और कोने का मुख्य पत्थर यीशु मसीह आप ही है;

21 जिस में सब भवन सभोंके गढ़े गए हों, यहोवा के पवित्र मन्दिर में विकसित हो जाएं;

22 जिस में तुम भी आत्मा के द्वारा परमेश्वर के निवास के लिये एक साथ बने हो।


अध्याय 3

सुसमाचार का रहस्य — स्वर्ग और पृथ्वी पर परिवार (राज्य) — मसीह का प्रेम।

1 इस कारण मैं, पौलुस, तुम अन्यजातियों में से यीशु मसीह का बंदी हूं।

2 परमेश्वर के उस अनुग्रह के लिए जो मुझे तुम पर दिया गया है- वार्ड;

3 जैसा तुम ने सुना है, कि उस ने प्रकाशन के द्वारा मुझे मसीह का भेद बताया; जैसा कि मैंने पहले कुछ शब्दों में लिखा था;

4 इसलिथे जब तुम पढ़ो, तब तुम मसीह के भेद के विषय में मेरे ज्ञान को समझ सको,

5 जो अन्य युगों में मनुष्यों पर प्रगट नहीं किया गया, जैसा कि अब आत्मा के द्वारा उसके पवित्र प्रेरितों और भविष्यद्वक्ताओं पर प्रगट किया गया है;

6 कि अन्यजाति संगी वारिस हों, और एक ही देह के हों, और उस की प्रतिज्ञा में जो सुसमाचार के द्वारा मसीह में दी गई है, सहभागी हों;

7 परमेश्वर के उस अनुग्रह के अनुसार जो उसकी सामर्थ के प्रभावपूर्ण कार्य के द्वारा मुझे दिया गया है, मैं उसका सेवक बना ।

8 मुझ पर जो सब पवित्र लोगों में से छोटे से छोटा है, यह अनुग्रह दिया गया है, कि मैं अन्यजातियों में मसीह के अथाह धन का प्रचार करूं;

9 और सब मनुष्य देखें, कि उस भेद की संगति क्या है, जो जगत के आरम्भ से उस परमेश्वर में छिपी रही, जिस ने सब कुछ यीशु मसीह के द्वारा रचा है;

10 इसलिथे कि अब कलीसिया स्‍वर्ग के प्रधानोंऔर शक्‍तियोंको परमेश्वर का नाना प्रकार का ज्ञान जाने पाए,

11 उस सनातन प्रयोजन के अनुसार जो उस ने हमारे प्रभु मसीह यीशु में किया था;

12 जिस पर उस के विश्वास के द्वारा हम को हियाव और भरोसा है।

13 इसलिथे मैं चाहता हूं, कि तुम अपके लिथे मेरे क्लेशोंके कारण जो तेरी महिमा है, मूर्छित न हो।

14 इस कारण मैं अपने प्रभु यीशु मसीह के पिता के सामने घुटने टेकता हूं,

15 उसी में से आकाश और पृय्वी के सारे घराने का नाम लिया गया है,

16 कि वह तुम्हें अपनी महिमा के धन के अनुसार प्रदान करे, कि तुम अपने आत्मा के द्वारा भीतरी मनुष्यत्व में पराक्रम से दृढ़ होते जाओ;

17 कि विश्वास के द्वारा मसीह तुम्हारे हृदय में बसे; कि तुम प्रेम में जड़े और बंधे हुए हो,

18 सब पवित्र लोगों से समझ सको कि चौड़ाई, और लम्बाई, और गहराई, और ऊंचाई क्या है;

19 और मसीह के उस प्रेम को जानो, जो ज्ञान से परे है, कि तुम परमेश्वर की सारी परिपूर्णता से परिपूर्ण हो जाओ।

20 अब जो सामर्थ्य हम में काम करता है, उसके अनुसार जो कुछ हम मांगते या सोचते हैं, उससे कहीं अधिक करने में सक्षम है,

21 उसकी कलीसिया में मसीह यीशु के द्वारा सब युगों में महिमा हो, जगत का अन्त न हो। तथास्तु।


अध्याय 4

एक शरीर; एक आत्मा; एक उम्मीद; एक भगवान; एक विश्वास; एक बपतिस्मा - चर्च के अधिकारी, मसीह प्रमुख - आत्मा की मुहर।

1 सो मैं, यहोवा के बन्धुए, तुम से बिनती करता हूं, कि तुम उस काम के योग्य चलो, जिस से तुम बुलाए गए हो,

2 सारी दीनता और नम्रता के साथ, और धीरज से, और प्रेम से एक दूसरे को सहते हुए;

3 आत्मा की एकता को मेल के बन्धन में बनाए रखने का यत्न करना,

4 एक ही देह और एक ही आत्मा में, जैसा कि तुम को अपके बुलाए जाने की एक ही आशा में बुलाया गया है;

5 एक ही प्रभु, एक ही विश्वास, एक ही बपतिस्मा,

6 एक ही परमेश्वर और सबका पिता, जो सब से ऊपर है, और सब के द्वारा, और तुम सब में।

7 परन्तु हम में से प्रत्येक को मसीह के दान के नाप के अनुसार अनुग्रह दिया गया है।

8 इस कारण वह कहता है, कि जब वह ऊंचे पर चढ़ा, तो बन्धुआई में ले जाकर मनुष्योंको दान दिया।

9 (अब जब वह चढ़ गया, तो इस से क्या हुआ कि वह पहिले पृय्वी की निचली भूमि में उतरा?

10 जो उतरा, वही स्वर्ग पर भी चढ़ा, कि उसकी महिमा करे, जो सारे आकाश पर राज्य करता है, कि वह सब कुछ भर दे।)

11 और उस ने प्रेरितोंको कुछ दिया; और कुछ, भविष्यद्वक्ता; और कुछ, इंजीलवादी; और कुछ, पादरी और शिक्षक;

12 पवित्र लोगों के सिद्ध होने के लिथे, और सेवकाई के काम के लिथे, और मसीह की देह की उन्नति के लिथे;

13 जब तक हम सब विश्वास की एकता में होकर परमेश्वर के पुत्र की पहिचान में न आ जाएं, अर्थात एक सिद्ध मनुष्य, और मसीह की परिपूर्णता का नाप लें;

14 कि अब से हम मनुष्यों की चाल, और धूर्त धूर्तता के द्वारा, जिस से वे धोखा देने के लिथे घात में पड़े रहते हैं, इधर-उधर फेंके हुए और इधर-उधर फेंके जाने वाले बालक न रहें;

15 परन्‍तु प्रेम से सच्‍चा बोलना, सब बातोंमें जो सिर है, अर्थात मसीह भी उसके भीतर बढ़ते जाएं;

16 जिस से सारा देह जो कुछ मिला हुआ है, और जिस से सब जोड़ मिलाते हैं, वह सब अंग के नाप के प्रभाव के अनुसार देह की वृद्धि करता है, और प्रेम से उसकी उन्नति करता है।

17 इसलिथे मैं यह कहता हूं, और यहोवा में गवाही देता हूं, कि अब से तुम अन्यजातियोंकी नाईं उनके व्यर्थ मन के नहीं चले,

18 और उनके मन के अन्धे होने के कारण उनकी समझ को अन्धेरा कर दिया, और उस अज्ञानता के कारण जो उन में है, परमेश्वर के जीवन से अलग हो गए;

19 जिन्होंने भूतकाल की भावना से अपने आप को कामवासना के हवाले कर दिया है, कि लालच से सब अशुद्धता का काम करें।

20 परन्तु तुम ने मसीह को ऐसा नहीं सीखा;

21 यदि ऐसा है, कि तुम ने उसे सीखा है, और उसके द्वारा सिखाया गया है, जैसा कि यीशु में सच्चाई है;

22 और अब मैं तुम से पहिली बातचीत के विषय में उपदेश देकर कहता हूं, कि तुम उस बूढ़े को, जो छल की अभिलाषाओं के अनुसार भ्रष्ट है, दूर कर;

23 और आत्मा के मन में नया हो जाना;

24 और तुम उस नए मनुष्य को पहिन लो, जो परमेश्वर के बाद धर्म और सच्ची पवित्रता में रचा गया है।

25 सो झूठ बोलना छोड़कर अपके अपके पड़ोसी से सच बोल; क्योंकि हम एक दूसरे के सदस्य हैं।

26 क्या तुम क्रोधित हो सकते हो, पाप नहीं? तेरा क्रोध सूर्य अस्त न हो;

27 और न शैतान को स्थान दो।

28 जो चोरी करे वह फिर कभी चोरी न करे; परन्‍तु वह अच्‍छी वस्‍तुओं के लिथे अपके हाथों से परिश्रम करके परिश्रम करे, कि उसे जरूरतमंद को देना पड़े।

29 तेरे मुंह से कोई भ्रष्ट बात न निकले, परन्तु जो उन्नति के काम आए, कि वह सुननेवालों पर अनुग्रह करे।

30 और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित न करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन तक मुहर लगी रहती है।

31 सब प्रकार की कड़वाहट, और कोप, और कोप, और बुरी बातें सब प्रकार के बैरभाव समेत तुझ से दूर की जाएं;

32 और तुम एक दूसरे पर कृपालु, और कोमल हृदय वाले हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह के निमित्त तुम्हें क्षमा किया है, वैसे ही एक दूसरे के अपराध भी क्षमा करते रहो।


अध्याय 5

आत्मा के फल - पति पत्नी का मुखिया - मसीह चर्च का मुखिया।

1 सो प्यारे बच्चों की नाईं परमेश्वर के अनुयायी बनो;

2 और प्रेम से चलो, जैसा मसीह ने भी हम से प्रेम रखा है, और अपने आप को एक सुगन्धित सुगन्ध के लिथे परमेश्वर को भेंट और मेलबलि हमारे लिथे दे दिया है।

3 परन्‍तु व्यभिचार, और सब अशुद्धता, वा लोभ, एक बार तुम में उसका नाम न लिया जाए, जैसा पवित्र लोग ठहरते हैं;

4 न गन्दगी, न मूढ़ता की बातें, और न ठट्ठा करना, जो शोभा नहीं देता; बल्कि धन्यवाद देना।

5 क्योंकि तुम यह जानते हो, कि न व्यभिचारी, न अशुद्ध, और न लोभी, जो मूर्तिपूजक है, उसका मसीह और परमेश्वर के राज्य में कोई भाग नहीं होता।

6 कोई तुझे व्यर्थ की बातों से धोखा न दे; क्योंकि इन बातों के कारण आज्ञा न माननेवालों पर परमेश्वर का क्रोध भड़कता है।

7 इसलिए तुम उनके सहभागी न बनो।

8 क्‍योंकि तुम कभी अन्धेरे थे, परन्तु अब प्रभु में ज्योति हो; प्रकाश के बच्चों के रूप में चलो;

9 (क्योंकि आत्मा का फल सब प्रकार की भलाई, और धार्मिकता और सच्चाई में है;)

10 जो कुछ यहोवा को भाता है उसे सिद्ध करना।

11 और अन्धकार के निष्फल कामों में सहभागी न होना, वरन उन्हें ताड़ना देना।

12 क्‍योंकि जो काम उन से गुप्‍त में किए जाते हैं, उन की चर्चा करना भी लज्जा की बात है।

13 परन्तु जो कुछ झुठलाया जाता है, वह ज्योति के द्वारा प्रगट होता है; क्योंकि जो कुछ प्रकट करता है वह प्रकाश है।

14 इस कारण वह कहता है, कि सोए हुओं को जगा, और मरे हुओं में से जी उठ, और मसीह तुझे उजियाला देगा।

15 तो देखो, कि तुम मूर्खोंकी नाईं नहीं परन्तु बुद्धिमानोंकी नाईं चौकस होकर चलो,

16 समय को छुड़ाना, क्योंकि दिन बुरे हैं।

17 इस कारण तुम मूर्ख न बनो, परन्तु यह समझो कि यहोवा की इच्छा क्या है।

18 और दाखमधु के साथ मतवाले मत बनो, जिसमें अधिकता हो; परन्तु आत्मा से परिपूर्ण हो जाओ;

19 स्तोत्र और स्तुतिगान, और आत्मिक गीत गाते हुए, और अपने मन में यहोवा के लिये गाते, और कीर्तन करते हुए आपस में बातें करते;

20 हमारे प्रभु यीशु मसीह के नाम से सब बातों के लिये सदा परमेश्वर और पिता का धन्यवाद करते रहो;

21 परमेश्वर के भय के मारे एक दूसरे के आधीन हो जाओ।

22 हे पत्नियों, अपने अपने पतियों के आधीन रहो, मानो यहोवा के अधीन हो।

23 क्योंकि पति पत्नी का सिर है, जैसे मसीह कलीसिया का मुखिया है; और वह शरीर का उद्धारकर्ता है।

24 इसलिए जैसे कलीसिया मसीह के आधीन है, वैसे ही पत्नियाँ हर बात में अपने अपने पति के आधीन रहें।

25 हे पतियो, अपनी अपनी पत्नी से प्रेम रखो, जैसा मसीह ने भी कलीसिया से प्रेम करके अपने आप को उसके लिये दे दिया;

26 कि वह उसे वचन के द्वारा जल के स्नान से पवित्र और शुद्ध करे,

27 जिस से वह उसे एक ऐसी महिमामयी कलीसिया के सामने रखे जिस में दाग, या झुर्रियां, वा ऐसी कोई वस्तु न हो; परन्तु यह कि वह पवित्र और दोषरहित हो।

28 इसी प्रकार पुरुषों को चाहिए कि वे अपनी पत्नियों से अपनी देह के समान प्रेम रखें। वह जो अपनी पत्नी से प्यार करता है, अपने आप से प्यार करता है।

29 क्‍योंकि अब तक किसी ने अपके शरीर से बैर नहीं रखा; परन्‍तु प्रभु कलीसिया के समान उसका पालन-पोषण और पालन-पोषण करता है;

30 क्योंकि हम उसके शरीर के अंग, उसके मांस और हड्डियों के अंग हैं।

31 इस कारण पुरूष अपके माता पिता को छोड़कर अपक्की पत्नी से मिला रहेगा, और वे दोनों एक तन होंगे।

32 यह बड़ा भेद है; परन्तु मैं मसीह और कलीसिया के विषय में बातें करता हूं।

33 तौभी तुम में से हर एक अपनी पत्नी से अपने समान प्रेम रखे; और पत्नी देखती है कि वह अपने पति का आदर करती है।


अध्याय 6

बच्चों और नौकरों का कर्तव्य - हमारा जीवन एक युद्ध - ईसाई का कवच।

1 हे बालको, यहोवा में अपके माता पिता की आज्ञा मानो; इसके लिए सही है।

2 अपके पिता और माता का आदर करना; जो वचन के साथ पहली आज्ञा है;

3 कि तेरा भला हो, और तू पृथ्वी पर बहुत दिन जीवित रहे।।

4 और तुम पुरखा अपने बच्चों को क्रोध न दिलाते; परन्तु यहोवा की शिक्षा और चितावनी देकर उनका पालन-पोषण करो।

5 हे सेवकों, शरीर के अनुसार अपने स्वामी की आज्ञा का पालन करो, और भय और कांपते हुए, अपने मन की एकता में, जैसे मसीह के प्रति आज्ञाकारी रहो;

6 आंख की सेवा से नहीं, मनुष्यों को प्रसन्न करने वालों की नाईं; परन्तु मसीह के सेवकों की नाईं मन से परमेश्वर की इच्छा पर चलते;

7 मनुष्यों की नहीं, परन्‍तु यहोवा की सेवा भक्‍ति से करते रहो;

8 यह जानकर कि जो कोई भलाई का काम करेगा, वह प्रभु से प्राप्त करेगा, चाहे वह बन्धुआ हो या स्वतन्त्र।

9 और हे स्वामियों, धमकाते हुए उनके साथ भी वैसा ही करो; यह जानते हुए कि तुम्हारा स्वामी भी स्वर्ग में है; न ही उसके साथ व्यक्तियों का सम्मान है।

10 अन्त में, हे मेरे भाइयो, यहोवा में और उसके पराक्रम के कारण बलवन्त बनो।

11 परमेश्वर के सारे हथियार बान्ध लो, जिस से तुम शैतान की युक्तियों के साम्हने खड़े हो सको।

12 क्‍योंकि हम मांस और लोहू से नहीं, पर प्रधानोंसे, और इस जगत के अन्‍धकार के हाकिमोंसे, और ऊँचे स्‍थानों पर आत्मिक दुष्टता से मल्लयुद्ध करते हैं।

13 इसलिथे परमेश्वर के सारे हथियार अपके पास ले लो, कि तुम बुरे दिन में सामना कर सको, और सब कुछ करके स्थिर रह सको।

14 सो सत्य से कमर बान्धकर, और धर्म की झिलम पहिने हुए खड़े हो;

15 और तुम्हारे पांव मेल के सुसमाचार की तैयारी से चमकते रहे;

16 सबसे बढ़कर, विश्वास की ढाल लेकर, जिस से तुम दुष्टों के सब जलते हुए तीरों को बुझा सको।

17 और उद्धार का टोप, और आत्मा की तलवार जो परमेश्वर का वचन है, ले लो;

18 आत्मा में सब प्रकार की प्रार्थना और बिनती के साथ सर्वदा प्रार्थना करना, और सब पवित्र लोगों के लिथे सब लगन, और बिनती के उस पर ध्यान देना;

19 और मेरे लिथे इसलिये कि मुझे वचन दिया जाए, कि मैं हियाव से अपना मुंह खोलूं, कि सुसमाचार का भेद प्रगट करूं,

20 जिसके बन्धन में मैं दूत हूं; कि उसमें मैं हियाव से बोलूं, जैसा मुझे बोलना चाहिए।

21 परन्तु इसलिथे कि तुम भी मेरे कामोंको और मैं कैसे करूं, यह जान लो, कि तुखिकुस जो प्रिय भाई और यहोवा का विश्वासयोग्य सेवक है, वह सब बातें तुम्हें बताएगा;

22 जिसे मैं ने तुम्हारे पास इसी प्रयोजन से भेजा है, कि तुम हमारे कामोंको जानो, और वह तुम्हारे मन को शान्ति दे।

23 पिता परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से भाइयों को शान्ति और विश्वास सहित प्रेम मिले।

24 उन सब पर अनुग्रह हो जो हमारे प्रभु यीशु मसीह से सच्चाई से प्रेम रखते हैं। तथास्तु। रोम से इफिसियों तक तुखिकुस द्वारा लिखित।

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