यिर्मयाह

पैगंबर यिर्मयाह की किताब

अध्याय 1

यिर्मयाह की बुलाहट - बादाम की छड़ और एक सुलगता हुआ बर्तन - यहूदा के खिलाफ संदेश।

1 हिल्किय्याह के पुत्र यिर्मयाह की ये बातें, जो बिन्यामीन के देश के अनातोत में याजक थे;
2 यहूदा के राजा आमोन के पुत्र योशिय्याह के राज्य के तेरहवें वर्ष में यहोवा का यह वचन उसके पास पहुंचा।
3 यहूदा के राजा योशिय्याह के पुत्र यहोयाकीम के दिनों में, यहूदा के राजा योशिय्याह के पुत्र सिदकिय्याह के ग्यारहवें वर्ष के अन्त तक, जब वह यरूशलेम को बन्धुआई में ले जाने के पांचवें महीने में पहुंचा।
4 तब यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि,
5 तेरे पेट में रचने से पहिले मैं ने तुझे पहिचान लिया; और तेरे गर्भ में से निकलने से पहिले मैं ने तुझे पवित्र किया, और जाति जाति के लिथे तुझे भविष्यद्वक्ता ठहराया।
6 तब मैं ने कहा, हे परमेश्वर यहोवा! देखो, मैं बोल नहीं सकता; क्योंकि मैं एक बच्चा हूँ।
7 परन्तु यहोवा ने मुझ से कहा, न कह, मैं बालक हूं; क्‍योंकि जो कुछ मैं तुझे भेजूंगा उस सभ के पास तू जाना, और जो कुछ मैं तुझे आज्ञा दूं वही बोलना।
8 उनके चेहरों से मत डरो; क्योंकि मैं तुझे छुड़ाने को तेरे संग हूं, यहोवा की यही वाणी है।
9 तब यहोवा ने हाथ बढ़ाकर मेरे मुंह को छुआ। और यहोवा ने मुझ से कहा, सुन, मैं ने अपक्की बातें तेरे मुंह में डाल दी हैं।
10 देखो, मैं ने आज के दिन तुम को जाति जाति और राज्य के ऊपर इसलिये ठहराया है, कि जड़ से उखाड़ फेंके, और ढाए, और नाश करूं, और ढा दे, और बनाऊं, और रोपूं।
11 फिर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि यिर्मयाह, तुझे क्या दिखाई देता है? और मैं ने कहा, मैं बादाम के पेड़ की एक छड़ी देखता हूं।
12 तब यहोवा ने मुझ से कहा, तू ने भली भांति देखा है; क्योंकि मैं अपना वचन पूरा करने के लिये शीघ्रता से करूंगा।
13 और यहोवा का यह वचन दूसरी बार मेरे पास पहुंचा, कि तुझे क्या दिखाई देता है? और मैं ने कहा, मुझे एक उबलता हुआ पात्र दिखाई देता है; और उसका मुंह उत्तर की ओर है।
14 तब यहोवा ने मुझ से कहा, उत्तर दिशा से देश के सब रहनेवालोंपर एक विपत्ति पड़ेगी।
15 क्योंकि देखो, मैं उत्तर के राज्योंके सब कुलोंको बुलाऊंगा, यहोवा की यही वाणी है; और वे आकर अपके अपके सिंहासन को यरूशलेम के फाटकोंके द्वार पर, और उसकी चारोंओर की शहरपनाह पर, और यहूदा के सब नगरोंके साम्हने ठहराएंगे।
16 और जिन लोगों ने मुझे छोड़ दिया है, और पराए देवताओं के लिये धूप जलाया है, और अपके ही हाथोंके कामोंको दण्डवत किया है, उन की सारी दुष्टता के विषय में मैं उनके विरुद्ध अपना न्यायदण्ड सुनाऊंगा।
17 इसलिथे तू अपक्की कमर बान्धकर उठ, और जो जो आज्ञा मैं तुझे सुनाता हूं उन से कह; उन के मुख से न डरना, कहीं ऐसा न हो कि मैं उनके साम्हने तुझे झुठला दूं।
18 क्योंकि देखो, मैं ने आज के दिन तुझे यहूदा के राजाओं, और उसके हाकिमों, और उसके याजकों, और देश के लोगोंके साम्हने एक गढ़ा हुआ नगर, और एक लोहे का खम्भा, और सारे देश के साम्हने पीतल की शहरपनाह बना दी है। भूमि।
19 और वे तुझ से लड़ेंगे; परन्तु वे तुझ पर प्रबल न होंगे; क्योंकि मैं तेरे संग हूं, यहोवा की यही वाणी है, कि तुझे छुड़ाऊं।

 

अध्याय 2

परमेश्वर इस्राएल के साथ व्याख्या करता है - वे अपनी विपत्तियों के कारण हैं - यहूदा के पाप।

1 फिर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि
2 जाओ और यरूशलेम के कानों में दोहाई दो, कि यहोवा यों कहता है; मैं तुझे याद करता हूं, तेरी जवानी की करूणा, तेरे गुप्तचरों का प्रेम, जब तू जंगल में मेरे पीछे पीछे चला गया, उस देश में जो बोया नहीं गया था।
3 इस्राएल यहोवा के लिथे पवित्र और उसकी उपज का पहिला फल हुआ; जितने उसे खाएंगे वे सब ठोकर खाएंगे; उन पर विपत्ति आएगी, यहोवा की यही वाणी है।
4 हे याकूब के घराने, और इस्राएल के घराने के सब कुलों, यहोवा का वचन सुनो;
5 यहोवा योंकहता है, तेरे पुरखाओं ने मुझ में ऐसा क्या अधर्म पाया है, कि वे मुझ से दूर चले गए हैं, और व्यर्थ के पीछे चले गए हैं, और व्यर्थ हो गए हैं?
6 उन्होंने न कहा, यहोवा हम को मिस्र देश से निकाल ले आया, जो जंगल में, अर्यात् जंगल और गड्ढोंके देश में, और सूखे के देश में, और मृत्यु की छाया में से होकर हमें ले गया, कहां है? जिस देश से कोई मनुष्य न गुजरा हो, और जहां कोई रहता न हो?
7 और मैं तुझे एक बहुतायत देश में ले आया, कि उसका फल और उसकी भलाई का फल खाए; परन्‍तु प्रवेश करके मेरे देश को अशुद्ध किया, और मेरे निज भाग को घिनौना बना दिया।
8 याजकों ने न कहा, यहोवा कहां है? और व्यवस्था के काम करनेवाले मुझे नहीं जानते थे; याजक भी मेरा अपराध करते थे, और भविष्यद्वक्ता बाल के द्वारा भविष्यद्वाणी करते थे, और उन बातों के पीछे चलते थे जिनसे लाभ नहीं होता।
9 इसलिथे मैं अब तक तुम से याचना करूंगा, यहोवा की यह वाणी है, और तुम्हारे बालबच्चोंसे मैं बिनती करूंगा।
10 क्‍योंकि चित्तीम के टापुओं को पार करके देखो; और केदार को भेज, और यत्न से विचार कर, कि क्या ऐसा कुछ होता है।
11 क्या किसी जाति ने अपके देवताओं को बदल दिया, जो अब तक देवता नहीं? परन्तु मेरी प्रजा ने अपक्की महिमा को उस के लिथे बदल दिया है जो लाभ नहीं करती।
12 हे आकाश, इस पर चकित हो, और बहुत डर के मारे, बहुत उजाड़ हो, यहोवा की यही वाणी है।
13 क्योंकि मेरी प्रजा ने दो बुरे काम किए हैं; उन्होंने मुझे जीवन के जल के सोते को त्याग दिया है, और उन हौदों, और टूटे हुए हौदों को काट डाला है, जिनमें जल ठहर नहीं सकता।
14 क्या इस्राएल एक दास है? क्या वह एक घरेलू गुलाम है? वह क्यों खराब हो गया है?
15 और जवान सिंह उस पर गरजे, और चिल्लाए, और उसके देश को उजाड़ दिया; उसके नगर निवासियों के बिना जला दिए जाते हैं।
16 और नोप और तहपानियोंने तेरे सिर के मुकुट को भी तोड़ डाला है।
17 क्या यह तू ने अपके लिये मोल नहीं लिया, कि अपके परमेश्वर यहोवा को मार्ग में ले चलते समय तू ने उसे त्याग दिया है?
18 और अब तुझे मिस्र के मार्ग में सीहोर का जल पीने को क्या काम? वा अश्शूर के मार्ग में नदी का जल पीने को तुझे क्या काम?
19 तेरी दुष्टता ही तुझे सुधारेगी, और तेरे पीछे खिसकना तुझे ताड़ना देगा; इसलिथे जान ले कि यह बुरी और कड़वी बात है, कि तू ने अपके परमेश्वर यहोवा को त्याग दिया है, और मेरा भय तुझ में नहीं है, सेनाओं के परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
20 क्योंकि मैं ने प्राचीनकाल से तेरा जूआ तोड़ा, और तेरे बन्धन तोड़ दिए हैं; और तू ने कहा, मैं अपराध न करूंगा; जब तू हर ऊँचे पहाड़ पर और सब हरे वृक्षों के तले वेश्‍या का काम करता हुआ फिरता है।
21 तौभी मैं ने तुझ को एक उत्तम दाखलता, अर्थात उत्तम बीज बोया था; फिर तू क्योंकर मेरे लिये पराया दाखलता का पतित पौधा बन गया?
22 क्‍योंकि चाहे तू नाईंत्र से धोए, और बहुत सा साबुन ले ले, तौभी तेरा अधर्म मुझ पर प्रगट है, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है।
23 तू क्योंकर कहता है, कि मैं अशुद्ध नहीं हूं, मैं बालीम के पीछे नहीं गया? तराई में अपना मार्ग देख, और जान ले कि तू ने क्या किया है; तू उसकी राहों पर चलनेवाली तेज़ ड्रोमेडरी है;
24 एक गदहा जो जंगल में रहती या, जो अपक्की इच्छा से पवन को सूंघ लेती है; उसके अवसर में कौन उसे दूर कर सकता है? जितने उसके खोजी हैं वे सब थक जाएंगे; उसके महीने में वे उसे नहीं पाएंगे।
25 अपके पांव को निर्मल होने से, और अपके कंठ को प्यास से बचा ले; परन्तु तू ने कहा, कोई आशा नहीं; नहीं; क्योंकि मैं परदेशियों से प्रीति रखता हूं, और उनके पीछे चलूंगा।
26 जैसे चोर के मिलने से लज्जित होता है, वैसे ही इस्राएल का घराना भी लज्जित होता है; वे, उनके राजा, उनके हाकिम, और उनके याजक, और उनके भविष्यद्वक्ता,
27 काठ से कहा, तू मेरा पिता है; और तू ने मुझे एक पत्यर के साम्हने उत्पन्न किया है; क्‍योंकि उन्‍होंने अपक्की ओर मुंह नहीं वरन मेरी ओर फेर दिया है; परन्‍तु संकट के समय वे कहेंगे, उठ, और हमारा उद्धार कर।
28 परन्तु तेरे देवता कहां हैं जिन्हें तू ने बनाया है? यदि वे तेरे संकट के समय तेरा उद्धार कर सकें, तो वे उठें; क्योंकि हे यहूदा, तेरे देवता तेरे नगरोंकी गिनती के अनुसार हैं।
29 तुम मुझ से क्यों बिनती करोगे? तुम सब ने मेरा अपराध किया है, यहोवा की यही वाणी है।
30 मैं ने तेरे लड़केबालोंको व्यर्थ मारा है; उन्हें कोई सुधार नहीं मिला; तेरी तलवार ने तेरे भविष्यद्वक्ताओं को नाश करने वाले सिंह की नाईं निगल लिया है।
31 हे पीढ़ी के लोगों, तुम यहोवा के वचन को देखो। क्या मैं इस्राएल के लिये जंगल रहा हूं? अंधेरे की भूमि? इसलिए मेरी प्रजा कहो, हम प्रभु हैं; हम फिर तेरे पास नहीं आएंगे?
32 क्या दासी अपके आभूषण भूल सकती है, वा दुल्हिन अपके वस्त्र भूल सकती है? तौभी मेरे लोग मुझे बिना गिनती के दिन भूल गए हैं।
33 तू प्रेम की खोज में अपके मार्ग को क्यों छोटा करता है? इस कारण तू ने दुष्टों को भी अपके मार्ग की शिक्षा दी है।
34 और कंगाल निर्दोषोंके प्राणोंका लोहू तेरे वस्त्रोंमें पाया जाता है; मुझे वह गुप्त खोज से नहीं, परन्तु इन सब पर मिला है।
35 तौभी तू कहता है, कि मैं निर्दोष हूं, निश्चय उसका कोप मुझ पर से हटेगा। देख, मैं तुझ से बिनती करूंगा, क्योंकि तू कहता है, कि मैं ने पाप नहीं किया।
36 तू अपना मार्ग बदलने के लिये इतना व्याकुल क्यों है? जैसे तू अश्शूर से लज्जित हुआ, वैसे ही मिस्र से भी तू लजाएगा।
37 वरन उसके पास से निकल जाना, और अपके हाथ अपके सिर पर चढ़ना; क्योंकि यहोवा ने तेरे भरोसे को ठुकरा दिया है, और तू उन में सफल न होगा।

 

अध्याय 3

परमेश्वर की महान दया - यहूदा की नीच वेश्यावृत्ति - इस्राएल ने ताड़ना दी।

1 वे कहते हैं, कि यदि कोई अपक्की पत्नी को त्याग दे, और वह उसके पास से निकलकर दूसरे पुरूष की हो जाए, तो क्या वह उसके पास फिर जाए? क्या वह भूमि बहुत अपवित्र न हो जाए? परन्तु तू ने बहुत से प्रेमियों के साथ व्यभिचार किया है; तौभी मेरे पास फिर लौट आओ, यहोवा की यही वाणी है।
2 अपनी आंखें ऊंचे स्थानों की ओर उठा, और देख कि कहीं तू कहां पड़ा न पड़ा हो। तू उनके लिथे उन चालचलन में बैठा है, जैसे जंगल में अरबियोंके लिथे; और तू ने अपक्की व्यभिचार और दुष्टता से देश को अशुद्ध किया है।
3 इस कारण तेरी फुहारें रुक गई हैं, और कभी वर्षा नहीं हुई; और तेरा माथा वेश्या का था, तू ने लज्जित होने से इन्कार किया।
4 क्या तू अब से मुझ से दोहाई न देगा, हे मेरे पिता, तू मेरी जवानी का अगुवा है?
5 क्या वह अपना कोप सदा के लिये रोक लेगा? क्या वह इसे अंत तक रखेगा? देख, तू ने ऐसा कहा है, और जैसा तू कर सकता है, वैसा ही बुरा काम किया है।
6 योशिय्याह राजा के दिनों में यहोवा ने मुझ से भी कहा, क्या तू ने देखा है कि जो इस्राएल से पीछे हटता है, वह क्या करता है? वह सब ऊँचे पहाड़ पर और सब हरे वृक्षों के तले चढ़ गई है, और वहां वेश्‍या का काम किया है।
7 और उसके ये सब काम कर लेने के बाद मैं ने कहा, मेरी ओर फिरो। लेकिन वह नहीं लौटी। और उसकी विश्वासघाती बहन यहूदा ने देखा।
8 और मैं ने देखा, कि जब उन सब कारणोंसे जिनके कारण पीछे खिसकने वाले इस्राएल ने व्यभिचार किया, मैं ने उसे त्याग दिया, और त्यागपत्र दे दिया; तौभी उसकी विश्वासघाती बहिन यहूदा न डरी, वरन जाकर वेश्‍या भी करने लगी।
9 और अपने व्यभिचार के हल्केपन के कारण उस ने देश को अशुद्ध किया, और पत्यरोंऔर काठ से व्यभिचार किया।
10 और तौभी उसकी विश्वासघाती बहिन यहूदा इन सब बातोंके कारण अपके सारे मन से मेरी ओर न फिरी, वरन ढोंग की, यहोवा की यही वाणी है।
11 और यहोवा ने मुझ से कहा, भटकनेवाले इस्राएल ने विश्वासघाती यहूदा से अधिक अपने आप को धर्मी ठहराया है।
12 जाकर उत्तर की ओर जाकर इन बातोंका प्रचार कर, और कह, हे इस्राएल को पीछे करके लौट जा, यहोवा की यही वाणी है; और मैं अपना कोप तुझ पर न भड़काऊंगा; क्योंकि मैं दयालु हूं, यहोवा की यही वाणी है, और मैं अपना कोप सर्वदा न रखूंगा।
13 केवल अपके अधर्म को मान, कि तू ने अपके परमेश्वर यहोवा का अपराध किया है, और सब हरे वृक्षोंके तले परदेशियोंके लिथे अपना मार्ग तितर-बितर कर दिया है, और मेरी बात नहीं मानी, यहोवा की यही वाणी है।
14 हे पीछे खिसकनेवाले बालकों, यहोवा की यह वाणी है, फिरो; क्योंकि मैं ने तुम से ब्याह लिया है; और मैं तुझे नगर में से एक, और दो एक घराने को ले जाऊंगा, और मैं तुझे सिय्योन में ले आऊंगा;
15 और मैं अपके मन के अनुसार तुझे पास्टर दूंगा, जो तुझे ज्ञान और समझ से खिलाएंगे।
16 और जब तुम उस देश में बढ़ते और बढ़ते जाओगे, तब यहोवा की यह वाणी है, कि वे फिर न कहना, यहोवा की वाचा का सन्दूक; न ही यह ध्यान में आएगा; वे उसे भी स्मरण न करें; वे उस पर न जाएँ; न ही अब और किया जाएगा।
17 उस समय वे यरूशलेम को यहोवा का सिंहासन कहेंगे, और सब जातियां उस में यहोवा के नाम के लिथे यरूशलेम में इकट्ठी की जाएंगी; और वे अपने बुरे मन की कल्पना के अनुसार फिर न चलेंगे।
18 उन दिनों में यहूदा का घराना इस्राएल के घराने के संग चलेगा, और वे उत्तर के देश से उस देश में जो मैं ने तेरे पुरखाओं को निज भाग करके दिया है, इकट्ठी हो जाएंगे।
19 परन्तु मैं ने कहा, मैं तुझे बालकोंमें क्योंकर रखूं, और तुझे मनोहर देश, और अन्यजातियोंकी सेना का उत्तम निज भाग दूं? और मैं ने कहा, हे मेरे पिता, तू मुझे बुलाएगा; और मुझ से फिर न हटेगा।
20 निश्चय जिस प्रकार पत्नी अपके पति से विश्वासघात करके चली जाती है, वैसे ही हे इस्राएल के घराने, तुम ने मुझ से विश्वासघात किया है, यहोवा की यही वाणी है।
21 ऊँचे स्थानों पर एक शब्‍द सुना गया, और इस्त्राएलियों के रोने और गिड़गिड़ाने का शब्द सुना गया; क्‍योंकि उन्‍होंने अपना चालचलन बिगाड़ा है, और अपने परमेश्वर यहोवा को भूल गए हैं।
22 हे भटकते बालकों, लौट आओ, और मैं तुम्हारे पीछे खिसकने को चंगा करूंगा। देख, हम तेरे पास आते हैं; क्योंकि तू हमारा परमेश्वर यहोवा है।
23 पहाडिय़ों और पहाड़ों की भीड़ से उद्धार की आशा व्यर्थ है; वास्तव में हमारे परमेश्वर यहोवा में इस्राएल का उद्धार है।
24 क्योंकि हमारे पुरखाओं का परिश्रम बचपन से ही लज्जा ने निगल लिया है; उनके भेड़-बकरी और गाय-बैल, उनके बेटे और बेटियां।
25 हम लज्जित होकर लेट जाते हैं, और हमारा भ्रम हम को ढांप लेता है; क्‍योंकि हम ने और अपके पुरखाओं समेत अपके परमेश्वर यहोवा के विरुद्ध बचपन से लेकर आज तक पाप किया है, और अपके परमेश्वर यहोवा की बात न मानी।

 

अध्याय 4

परमेश्वर ने इस्राएल को अपने वादे के द्वारा बुलाया - वह यहूदा को पश्चाताप करने के लिए प्रोत्साहित करता है - एक गंभीर विलाप।

1 यदि तू लौटेगा, तो हे इस्राएल, यहोवा की यह वाणी है, मेरी ओर फिरो; और यदि तू अपके घिनौने कामोंको मेरे साम्हने से दूर करना चाहे, तो दूर न करना।
2 और शपय खाकर कहना, कि यहोवा सत्य, न्याय और धर्म से जीवित है; और जाति-जाति के लोग उस में अपने आप को आशीष देंगे, और उस में महिमा करेंगे।
3 क्योंकि यहूदा और यरूशलेम के लोगोंसे यहोवा योंकहता है, अपक्की बती भूमि को तोड़ दो, और कांटोंमें न बोओ।
4 हे यहूदा के लोगों और यरूशलेम के निवासियों, यहोवा के लिथे अपना खतना करो, और अपके मन की खलड़ी तोड़ लो; कहीं ऐसा न हो कि मेरी जलजलाहट आग की नाईं भड़क उठे, और ऐसा न हो कि तेरे बुरे कामोंके कारण कोई उसे बुझा सके।
5 यहूदा में प्रचार करना, और यरूशलेम में प्रचार करना; और कहो, देश में नरसिंगा फूंकना; रोओ, इकट्ठे हो जाओ, और कहो, इकट्ठे हो जाओ, और हम गढ़वाले नगरों में चलें।
6 सिय्योन की ओर मानक स्थापित करना; रिटायर, नहीं रहना; क्योंकि मैं उत्तर दिशा से विपत्ति और बड़ा विनाश लाऊंगा।
7 सिंह अपके जंगल में से निकला है, और अन्यजातियोंका नाश करनेवाला अपके मार्ग पर है; वह तेरे देश को उजाड़ने के लिथे अपके स्यान से निकला है; और तेरे नगर उजाड़ दिए जाएंगे, और कोई न बसेगा।
8 क्योंकि यह टाट पहिनना, और विलाप करना, और जयजयकार करना; क्‍योंकि यहोवा का कोप हम से दूर नहीं हुआ है।
9 और उस दिन ऐसा होगा, कि यहोवा की यह वाणी है, कि राजा का और हाकिमोंका मन नाश हो जाएगा; और याजक चकित होंगे, और भविष्यद्वक्ता चकित होंगे।
10 तब मैं ने कहा, हे परमेश्वर यहोवा! निश्चय तू ने इन लोगों और यरूशलेम को यह कहकर बहकाया है, कि तुझे शान्ति मिलेगी, जब तक तलवार प्राण तक पहुंच जाती है।
11 उस समय इन लोगोंसे और यरूशलेम से यह कहा जाएगा, कि जंगल में ऊंचे स्थानोंकी सूखी हवा मेरी प्रजा की बेटी की ओर, न तो पंखे चलानेके लिथे, और न शुद्ध करने के लिथे,
12 उन स्थानों से एक तेज आंधी भी मेरे पास आएगी; अब मैं उनके विरुद्ध भी दण्ड दूँगा।
13 देखो, वह बादल की नाईं चढ़ेगा, और उसके रथ बवण्डर के समान होंगे; उसके घोड़े उकाब से भी तेज हैं। हम पर हाय! क्योंकि हम बिगड़े हुए हैं।
14 हे यरूशलेम, अपके मन को दुष्टता से धो ले, कि तेरा उद्धार हो। तेरे व्यर्थ विचार कब तक तेरे भीतर रहेंगे?
15 क्‍योंकि दान की ओर से एक शब्‍द उदघोष करता है, और एप्रैम के पहाड़ से दु:ख का समाचार देता है।
16 अन्यजातियों से चर्चा करना; देखो, यरूशलेम के विरुद्ध प्रचार करो, कि दूर देश से पहरूए आकर यहूदा के नगरोंके विरुद्ध आवाज उठाएं।
17 वे उसके चारोंओर खेत के रखवालोंके साम्हने हैं; क्योंकि उसने मुझ से बलवा किया है, यहोवा की यही वाणी है।
18 तेरे चालचलन और कामोंसे ये वस्तुएं तुझ से मोल ली गई हैं; यह तेरी दुष्टता है, क्योंकि यह कड़वा है, क्योंकि यह तेरे हृदय तक पहुंचती है।
19 मेरी आंत, मेरी आंतें! मुझे अपने दिल में दर्द होता है; मेरा दिल मुझ में शोर करता है; मैं अपनी शांति नहीं रख सकता, क्योंकि तू ने सुना है, हे मेरी आत्मा, तुरही की आवाज, युद्ध का अलार्म।
20 विनाश पर विनाश की जय जयकार होती है; क्योंकि सारी भूमि खराब हो गई है; मेरे डेरे एकाएक और मेरे परदे पल भर में खराब हो जाते हैं।
21 मैं कब तक मानक को देखता रहूंगा, और नरसिंगा का शब्द सुनता रहूंगा?
22 क्योंकि मेरी प्रजा मूढ़ है, उन्होंने मुझे नहीं जाना; वे ओछी सन्तान हैं, और उनमें कोई समझ नहीं; वे बुराई करने में बुद्धिमान हैं, परन्तु भलाई करना उन्हें ज्ञान नहीं।
23 मैं ने पृय्वी को देखा, और क्या वह निराकार और शून्य थी; और आकाश, और उनके पास कोई प्रकाश नहीं था।
24 मैं ने पहाड़ों को देखा, और देखो, वे थरथरा उठे, और सब पहाड़ियां हलके से हिल गईं।
25 मैं ने क्या देखा, कि कोई मनुष्य न था, और आकाश के सब पक्षी भाग गए।
26 मैं ने क्या देखा, कि वह उपजाऊ स्थान जंगल है, और उसके सब नगर यहोवा के साम्हने और उसके भयंकर कोप से नाश हो गए हैं।
27 क्योंकि यहोवा ने योंकहा है, सारा देश उजाड़ हो जाएगा; तौभी मैं उसका अन्त न करूंगा।
28 इस कारण पृय्वी विलाप करेगी, और ऊपर का आकाश काला हो जाएगा; क्‍योंकि मैं ने यह कहा है, मैं ने युक्‍ति की है, और न मन फिराएगा, और न उस से फिरूंगा।
29 सवारों और धनुर्धारियों के शब्द से सारा नगर भाग जाएगा; वे घने जंगलों में जाकर चट्टानों पर चढ़ जाएंगे; सब नगर त्याग दिए जाएंगे, और उस में कोई मनुष्य न बसेगा।
30 और जब तू नाश हो जाए, तब क्या करना? चाहे तू लाल रंग का वस्त्र पहिन ले, चाहे सोने के आभूषणों से तुझे सजाए, तौभी तू अपने चेहरे को रंग-रोगन से रंगे, तौभी तू अपने को गोरा बनाना व्यर्थ करेगा; तेरे प्रेमी तेरा तिरस्कार करेंगे, वे तेरे प्राण के खोजी होंगे।
31 क्योंकि मैं ने संकट में पड़ी स्त्री का सा शब्द सुना है, और उस से जो पहिली सन्तान उत्पन्न करती है उसका वेदना, वह सिय्योन की बेटी का शब्द है, जो अपने हाथ फैलाकर विलाप करती है, और कहती है, कि अब मुझ पर हाय! ! क्योंकि हत्यारों के कारण मेरी आत्मा थक गई है।

 

अध्याय 5

यहूदियों और इस्राएल पर उनके पापों के लिए परमेश्वर का न्याय।

1 यरूशलेम की सड़कों में इधर-उधर भागना, और अब देखना, और जानना, और उसके चौड़े स्थानोंमें ढूंढ़ना, यदि कोई मनुष्य मिले, जो न्याय करनेवाला हो, जो सत्य का खोजी हो; और मैं इसे क्षमा कर दूंगा।
2 और यद्यपि वे कहते हैं, कि यहोवा जीवित है; निश्चित रूप से वे झूठी कसम खाते हैं।
3 हे यहोवा, क्या तेरी दृष्टि सत्य की ओर नहीं है? तू ने उन्हें मारा, परन्तु उन्होंने शोक नहीं किया; तू ने उन्हें भस्म कर दिया, परन्तु उन्होंने ताड़ना लेने से इन्कार किया है; उन्होंने अपना मुख चट्टान से भी कठोर किया है; उन्होंने लौटने से इनकार कर दिया है।
4 इसलिथे मैं ने कहा, निश्चय ये कंगाल हैं; वे मूर्ख हैं; क्योंकि वे न तो यहोवा का मार्ग जानते हैं, और न अपने परमेश्वर का न्याय।
5 मैं मुझे महापुरुषोंके पास ले जाऊंगा, और उन से बातें करूंगा; क्योंकि वे यहोवा की चाल और अपके परमेश्वर के न्याय को जान गए हैं; परन्तु इन ने जूआ तोड़ा, और बन्धन तोड़ डाला है।
6 इसलिथे जब सिंह जंगल में से उनको घात करेगा, और सांझ का भेड़िया उनको लूट लेगा, तब चीता उनके नगरोंकी चौकसी करेगा; जो कोई वहां से निकलेगा, वह टुकड़े टुकड़े किया जाएगा; क्‍योंकि उनके अपराध बहुत हैं, और उनके पीछे खिसकना बढ़ गया है।
7 मैं इसके लिए तुझे कैसे क्षमा करूं? तेरी सन्तान ने मुझे त्याग दिया है, और अपके अपके परमेश्वर की शपय खाई है; और जब मैं ने उनको भरपेट भोजन कराया, तब उन्होंने व्यभिचार किया, और वेश्‍याओं के घरों में सिपाहियों के साथ इकट्ठे हो गए।
8 वे भोर को चराए हुए घोड़ोंके समान थे; हर कोई अपने पड़ोसी की पत्नी के पीछे पड़ गया।
9 क्या मैं इन बातोंके लिथे भेंट न करूं? प्रभु कहते हैं; और क्या ऐसी जाति से मेरे प्राण का पलटा न लिया जाएगा?
10 उसकी शहरपनाह पर चढ़कर नाश करना; लेकिन पूर्ण अंत न करें; उसकी लड़ाइयों को दूर करो; क्योंकि वे यहोवा के नहीं हैं।
11 क्योंकि इस्राएल के घराने और यहूदा के घराने ने मुझ से बड़ा विश्वासघात किया है, यहोवा की यही वाणी है।
12 उन्होंने यहोवा को झुठलाया, और कहा, वह नहीं है; न हम पर विपत्ति आएगी; न हम तलवार देखेंगे, न अकाल;
13 और भविष्यद्वक्ता वायु बन जाएंगे, और वचन उन में नहीं रहेगा; उनके साथ ऐसा ही किया जाए।
14 इसलिथे सेनाओं का परमेश्वर यहोवा योंकहता है, कि तुम यह वचन बोलते हो, कि देखो, मैं अपके वचन तेरे मुंह में आग और इन प्रजा को लकड़ी करूंगा, और वह उन्हें भस्म करेगी।
15 सुन, हे इस्राएल के घराने, मैं तुझ पर दूर से एक जाति लाऊंगा, यहोवा की यही वाणी है; यह एक शक्तिशाली राष्ट्र है, यह एक प्राचीन राष्ट्र है, एक ऐसा राष्ट्र जिसकी भाषा आप नहीं जानते, और न ही वे जो कहते हैं उसे समझते हैं।
16 उनका तरकश खुली हुई कब्र के समान है, वे सब पराक्रमी हैं।
17 और वे तेरी फसल और तेरी रोटी जो तेरे बेटे-बेटियां खाएं, खा जाएंगे; वे तेरी भेड़-बकरियों और गाय-बैलों को खा जाएंगे; वे तेरी दाखलताओं और अंजीर के वृक्षों को खा जाएंगे; वे तेरे गढ़े हुए नगरों को, जिन पर तू ने भरोसा किया है, तलवार से कंगाल कर डालेगा।
18 तौभी उन दिनों में यहोवा की यह वाणी है, कि मैं तेरा अन्त न करूंगा।
19 और जब तुम कहोगे, कि हमारा परमेश्वर यहोवा यह सब बातें हम से क्योंकरता है? तब तू उनको उत्तर देना, जैसे तू ने मुझे त्यागकर अपके देश में पराए देवताओं की उपासना की है, वैसे ही उस देश में जो तेरा नहीं है परदेशियोंकी उपासना करना।
20 यह बात याकूब के घराने में कह, और यहूदा में यह कहकर प्रकाशित कर दे,
21 अब हे मूढ़ लोगों, और बिना समझे लोगों, यह सुनो; जिसके पास आंखें हैं, और नहीं देखता; जिसके कान हों, और सुनते नहीं;
22 क्या तुम मुझ से नहीं डरते? प्रभु कहते हैं; क्या तुम मेरे साम्हने कांपना नहीं चाहोगे, जिन्होंने समुद्र की बालू को समुद्र की सीमा पर सदा की आज्ञा के अनुसार रखा है, कि वह उसे पार न कर सके; और चाहे उसकी लहरें उठें, तौभी प्रबल न हो सकेगी; चाहे वे गरजें, तौभी क्या वे उस पर से नहीं निकल सकते?
23 परन्तु इन लोगों का मन बलवा करनेवाला और बलवा करनेवाला है; वे विद्रोह कर रहे हैं और चले गए हैं।
24 और वे अपके मन में यह न कहें, कि अब हम अपके परमेश्वर यहोवा का भय मानें, जो पहिली और पछली दोनों ऋतुओं में मेंह बरसाता है; वह कटनी के नियत सप्ताह हमारे लिये सुरक्षित रखता है।
25 तेरे अधर्म के कामों ने इन बातों को दूर किया है, और तेरे पापों ने अच्छी वस्तुएं तुझ से दूर रखी हैं।
26 क्योंकि मेरी प्रजा में दुष्ट लोग पाए जाते हैं; वे फन्दों की नाईं घात लगाए बैठे हैं; वे जाल बिछाते हैं, वे मनुष्यों को पकड़ते हैं।
27 जैसे पिंजरा पक्षियों से भरा हुआ है, वैसे ही उनके घर छल से भरे हुए हैं; इसलिए वे महान हो गए हैं, और अमीर हो गए हैं।
28 वे मोटी हो गई हैं, वे चमकती हैं: वे दुष्टों के कामों को पार कर जाते हैं; वे अनाथों के कारण का न्याय नहीं करते, तौभी वे सफल होते हैं; और दरिद्र का न्याय वे नहीं करते।
29 क्या मैं इन बातोंके लिथे भेंट न करूं? प्रभु कहते हैं; क्या ऐसी जाति से मेरे प्राण का पलटा न लिया जाएगा?
30 देश में एक अद्भुत और भयानक काम हुआ है;
31 भविष्यद्वक्ता झूठी भविष्यद्वाणी करते हैं, और याजक अपनी युक्ति से राज्य करते हैं; और मेरी प्रजा के लोग ऐसा ही चाहते हैं; और उसके अन्त में तुम क्या करोगे?

 

अध्याय 6

यहूदा के विरुद्ध शत्रु भेजे गए।

1 हे बिन्यामीनियों, यरूशलेम के बीच से भागने के लिथे अपने आप को इकट्ठा करो, और तकोआ में नरसिंगा फूंकना, और बेत-हस्केरेम में आग का चिन्ह लगाना; क्‍योंकि उत्तर दिशा से विपत्ति प्रकट होती है, और बड़ा विनाश होता है।
2 मैं ने सिय्योन की बेटी की तुलना मनोहर और कोमल स्त्री से की है।
3 चरवाहे अपक्की भेड़-बकरियों समेत उसके पास आएंगे; वे उसके चारोंओर उसके विरुद्ध अपके डेरे खड़े करें; वे उसके स्थान पर सब को खिलाएंगे।
4 उसके विरुद्ध युद्ध करने की तैयारी करो; उठो, और हम दोपहर को ऊपर चलें। हम पर हाय! क्योंकि दिन ढल जाता है, क्योंकि सांझ की छाया फैल गई है।
5 उठ, हम रात को चलें, और उसके महलोंको नाश करें।
6 क्योंकि सेनाओं के यहोवा ने योंकहा है, वृझों को काटकर यरूशलेम पर चढ़ाई चढ़ाई; यह शहर का दौरा किया जाना है; वह उसके बीच में पूरी तरह से उत्पीड़न है।
7 जैसे सोता अपना जल बहाता है, वैसे ही वह अपक्की दुष्टता को दूर करती है; उस में हिंसा और लूट की बातें सुनी जाती हैं; मेरे सामने लगातार दु:ख और घाव हैं।
8 हे यरूशलेम, तू आज्ञा दे, ऐसा न हो कि मेरा प्राण तुझ से दूर हो जाए; कहीं ऐसा न हो कि मैं तुझे उजाड़ दूं, और ऐसा देश न बसे।
9 सेनाओं का यहोवा योंकहता है, वे इस्राएल के बचे हुओं को दाखलता की नाईं अच्छी तरह से बीनेंगे; अंगूर इकट्ठा करने वाले की नाईं अपना हाथ टोकरियों में फेर दे।
10 मैं किस से कहूं, और चितावनी दूं, कि वे सुनें? देख, उनका कान खतनारहित है, और वे सुन नहीं सकते; देखो, यहोवा का वचन उन की निन्दा है; उन्हें इसमें कोई आनंद नहीं है।
11 इस कारण मैं यहोवा के कोप से भर गया हूं; मैं पकड़े हुए थक गया हूं, मैं इसे विदेश के बच्चों पर, और जवानों की मण्डली पर एक साथ उंडेलूंगा; क्‍योंकि पति भी पत्नी समेत ले लिया जाए, अर्यात्‌ वृद्ध उसके साय जो बहुत दिन से भरा हो।
12 और उनके घर अपके खेत और पत्नियां समेत औरोंके लिथे फिर दिए जाएं; क्योंकि मैं देश के निवासियों पर अपना हाथ बढ़ाऊंगा, यहोवा की यही वाणी है।
13 क्‍योंकि उन में से छोटे से ले कर बड़े तक सब लोभ में पड़े रहते हैं; और भविष्यद्वक्ता से लेकर याजक तक सब झूठा काम करते हैं।
14 उन्होंने मेरी प्रजा की बेटी की चोट को भी यह कहकर थोड़ा ठीक किया है, कि शान्ति, शान्ति; जब शांति नहीं होती।
15 क्या वे घिनौने काम करके लज्जित हुए? नहीं, वे बिल्कुल भी लज्जित नहीं हुए, और न ही वे शरमा सकते थे; इस कारण वे गिरनेवालोंके बीच गिरेंगे; जिस समय मैं उन से भेंट करूंगा, वे गिराए जाएंगे, यहोवा की यही वाणी है।
16 यहोवा यों कहता है, मार्गों में खड़े होकर देखो, और पुराने मार्ग पूछो, कि मार्ग कहां है, और उस पर चलो, तब तुम अपने प्राणों के लिये विश्राम पाओगे। परन्तु उन्होंने कहा, हम उस में नहीं चलेंगे।
17 और मैं ने तेरे ऊपर पहरुए ठहराकर कहा, तुरही का शब्द सुन। परन्तु उन्होंने कहा, हम नहीं मानेंगे।
18 इसलिथे हे अन्यजातियों, सुनो, और जान लो, हे मण्डली, उन में क्या है।
19 हे पृय्वी सुन; देख, मैं इन लोगों पर विपत्ति लाऊंगा, यहां तक कि उनके विचारों का फल भी, क्योंकि उन्होंने न तो मेरी बातों पर ध्यान दिया है और न ही मेरी व्यवस्था को, परन्तु इसे अस्वीकार किया है ।
20 शेबा से सुगन्धि और दूर देश से सुगन्धि का मेरे पास क्या प्रयोजन है? तेरा होम-बलियाँ ग्रहण करने योग्य नहीं हैं, और न ही तेरे बलिदान मुझे मीठे लगते हैं।
21 इसलिथे यहोवा योंकहता है, कि देख, मैं इन लोगोंके साम्हने ठोकरें दूंगा, और पिता और पुत्र मिलकर उन पर गिरेंगे; पड़ोसी और उसका मित्र नाश हो जाएंगे।
22 यहोवा योंकहता है, सुन, उत्तर देश से एक लोग आ रहे हैं, और एक बड़ी जाति पृय्वी की छोर से उठकर खड़ी होगी।
23 वे धनुष और भाले को पकड़े रहेंगे; वे क्रूर हैं, और उन पर दया नहीं होती; उनका शब्द समुद्र के समान गरजता है; और हे सिय्योन की बेटी, वे घोड़ों पर सवार होकर तेरे विरुद्ध युद्ध करने के लिथे पांति बान्धी हुई हैं।
24 हम ने उसकी कीर्ति सुनी है; हमारे हाथ मोम कमजोर; वेदना ने हम को, और वेदना में एक स्त्री की नाईं जकड़ लिया है।
25 मैदान में न जाना, और न मार्ग पर चलना; क्‍योंकि शत्रु की तलवार और चारों ओर भय है।
26 हे मेरी प्रजा की बेटी, टाट बान्धो, और राख में लिपटे रहो; अपने इकलौते पुत्र के समान शोक मनाओ; सबसे कड़वा विलाप, क्योंकि बिगाड़ने वाला अचानक हम पर आ जाएगा।
27 मैं ने तुझे अपक्की प्रजा के बीच एक गुम्मट और गढ़ ठहराया है, कि तू जान ले, और उनका मार्ग परख सके।
28 वे सब घोर विद्रोही हैं, जो निन्दा करने वाले हैं; वे पीतल और लोहे के हैं; वे सब भ्रष्टाचारी हैं।
29 धौंकनी जल गई, सीसा आग से भस्म हो गया; संस्थापक व्यर्थ में पिघल गया; क्योंकि दुष्ट निकाले नहीं जाते।
30 लोग उन्हें चाँदी के नाम से पुकारेंगे, क्योंकि यहोवा ने उन्हें तुच्छ जाना है।

 

अध्याय 7

यिर्मयाह को सच्चे पश्चाताप के लिए बुलाने के लिए भेजा जाता है, ताकि यहूदियों की बंधुआई को रोका जा सके।

1 वह वचन जो यहोवा की ओर से यिर्मयाह के पास पहुंचा, कि वह कहता है,
2 यहोवा के भवन के फाटक में खड़े होकर वहां यह वचन सुनाओ, कि हे यहूदा के सब लोगो, यहोवा का वचन सुनो, जो इन फाटकोंसे भीतर होकर यहोवा को दण्डवत करने के लिथे प्रवेश करते हैं।
3 इस्राएल का परमेश्वर सेनाओं का यहोवा योंकहता है, अपक्की चालचलन और काम सुधार ले, तब मैं तुझे इस स्यान में रहने दूंगा।
4 झूठ की बातों पर विश्वास न करना, कि यहोवा का भवन, यहोवा का भवन, यहोवा का भवन ये ही हैं।
5 क्‍योंकि यदि तुम अपके चालचलन और अपने कामोंको अच्छी रीति से सुधारो; यदि तुम किसी मनुष्य और उसके पड़ोसी के बीच न्याय पूरी रीति से करते हो;
6 यदि तुम परदेशी, अनाथ, और विधवा पर अन्धेर न करो, और इस स्थान में निर्दोष का लोहू न बहाओ, और अपक्की हानि के लिथे पराए देवताओं के पीछे न चलो;
7 तब मैं तुझे इस स्यान में, अर्थात उस देश में जो मैं ने तेरे पुरखाओं को दिया है, सदा सर्वदा रहने दूंगा।
8 देखो, तुम फूठी बातों पर भरोसा रखते हो, जिनसे लाभ नहीं हो सकता।
9 क्या तुम चोरी, और हत्या, और व्यभिचार, और झूठी शपथ खाकर बाल के लिये धूप जलाओगे, और पराए देवताओं के पीछे चलोगे जिन्हें तुम नहीं जानते;
10 और इस भवन में जो मेरा कहलाता है, मेरे साम्हने खड़े होकर कह, कि हम इन सब घिनौने कामोंके लिथे छुड़ाए गए हैं?
11 क्या यह भवन, जो मेरा कहलाता है, तेरी दृष्टि में डाकुओं का अड्डा बन गया है? देख, मैं ने भी इसे देखा है, यहोवा की यही वाणी है।
12 परन्तु अब तुम मेरे स्थान को जो शीलो में था, जहां पहिले मैं ने अपना नाम ठहराया या, और देखो, कि मैं ने अपक्की प्रजा इस्राएल की दुष्टता के कारण उसके साथ क्या क्या किया।
13 और अब, क्योंकि तुम ने ये सब काम किए हैं, यहोवा की यह वाणी है, और मैं ने तुम से कहा, सवेरे उठकर बातें की, परन्तु तुम ने नहीं सुना; और मैं ने तुझे पुकारा, परन्तु तू ने उत्तर न दिया;
14 इस कारण मैं इस भवन से जो मेरा कहलाता है, जिस पर तुम भरोसा करते हो, और जो स्थान मैं ने तुम को और तुम्हारे पुरखाओं को दिया है उसके साथ वैसा ही करूंगा जैसा मैं ने शीलो से किया है।
15 और जैसा मैं ने तेरे सब भाइयोंको, अर्यात् एप्रैम के सारे वंश को भी निकाल दिया है, वैसे ही मैं तुझे अपके साम्हने से दूर कर दूंगा।
16 इसलिथे तू इन प्रजा के लिथे बिनती न करना, और न उनके लिथे बिनती करना, और न मुझ से बिनती करना; क्योंकि मैं तेरी नहीं सुनूंगा।
17 क्या तू नहीं देखता कि वे यहूदा के नगरोंऔर यरूशलेम की सड़कोंमें क्या करते हैं?
18 और बच्चे लकड़ियां बटोरते हैं, और पिता आग सुलगाते हैं, और स्त्रियां आटा गूँथती हैं, कि स्वर्ग की रानी के लिथे रोटियां बनाकर पराए देवताओं के लिथे अर्घ उंडेल दें, जिस से वे मुझे रिस दिलाएं।
19 क्या वे मुझे क्रोधित करते हैं? प्रभु कहते हैं; क्‍या वे अपके ही चेहरों की उलझन के कारण अपने को भड़काते नहीं हैं?
20 इसलिथे परमेश्वर यहोवा योंकहता है; देख, मेरा कोप और मेरी जलजलाहट इस स्थान पर, अर्थात् मनुष्य, और पशु, और मैदान के वृक्षों, और भूमि की उपज पर भड़क उठेगी; और वह जल जाएगा, और न बुझेगा।
21 सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर यों कहता है; अपके होमबलि को अपके मेलबलि में रख, और मांस खा।
22 क्योंकि मैं ने तेरे पुरखाओं से होमबलि वा मेलबलि के विषय में बात न की, और न उस दिन उन्हें आज्ञा दी, कि मैं उन्हें मिस्र देश से निकाल ले आया;
23 परन्तु मैं ने उन्हें यह आज्ञा दी, कि मेरी बात मान, तो मैं तेरा परमेश्वर ठहरूंगा, और तू मेरी प्रजा ठहरेगा; और उन सब मार्गों पर चलना जिनकी मैं ने तुम को आज्ञा दी है, कि तुम्हारा भला हो।
24 परन्तु उन्होंने न सुनी, और न कान लगाया, वरन युक्‍तियों, और अपके बुरे मन की कल्पना पर चले, और आगे नहीं, परन्तु पीछे चले गए।
25 जिस दिन से तुम्हारे पुरखा मिस्र देश से निकलकर आए हैं, उस दिन से आज तक मैं ने अपके सब दास भविष्यद्वक्ताओंको तेरे पास निज दिन भोर को उठकर भेजने को भेजा है।
26 तौभी उन्होंने मेरी न सुनी, और न कान लगाया, वरन हठ किया; उन्होंने अपने पुरखाओं से भी बुरा किया।
27 इसलिथे तू ये सब बातें उन से कहना; तौभी वे तेरी न मानेंगे; तू उन्हें भी बुलाना; परन्तु वे तुझे उत्तर न देंगे।
28 परन्तु उन से कहना, यह ऐसी जाति है जो अपने परमेश्वर यहोवा की बात नहीं मानती, और न ताड़ना ग्रहण करती है; सत्य नाश हो जाता है, और उनके मुंह से नाश हो जाता है।
29 हे यरूशलेम, अपके बाल काटकर फेंक दे, और ऊंचे स्यानोंपर विलाप करना; क्योंकि यहोवा ने अपके क्रोध के समय के लोगोंको ठुकरा दिया है, और त्याग दिया है।
30 क्योंकि यहूदा के बच्चों ने मेरी दृष्टि में बुरा किया है, यहोवा की यही वाणी है; उन्होंने अपके घिनौने कामोंको उस भवन में जो मेरा नाम कहलाता है, अशुद्ध करने के लिथे रखा है।
31 और उन्होंने तोपेत के ऊंचे स्यानोंको जो हिन्नोम के पुत्र की तराई में है, अपके बेटे-बेटियोंको आग में जलाने के लिथे बनवाया है; जिसकी आज्ञा मैं ने उन्हें न दी, और न वह मेरे मन में आई।
32 इसलिथे देखो, यहोवा की यह वाणी है, ऐसे दिन आते हैं, कि वह फिर तोपेत न कहलाएगा, और न हिन्नोम के पुत्र की तराई, वरन वध की तराई कहलाएगी; वे तोपेत में मिट्टी देंगे, जब तक कि कोई स्थान न रहे।
33 और इन लोगोंकी लोथें आकाश के पझियोंऔर पृय्वी के पशुओं का मांस ठहरेंगी; और कोई उन्हें दूर न करेगा।
34 तब मैं यहूदा के नगरोंमें से, और यरूशलेम के चौकोंमें से आनन्द का शब्द, और आनन्द का शब्द, और दूल्हे का शब्द, और दुल्हिन का शब्द बन्द कर दूंगा; क्योंकि देश उजाड़ हो जाएगा।

 

अध्याय 8

यहूदियों की विपत्ति - उनका घोर न्याय।

1 उस समय यहोवा की यह वाणी है, कि वे यहूदा के राजाओं की हड्डियां, और उसके हाकिमोंकी हड्डियां, और याजकोंकी हड्डियां, और भविष्यद्वक्ताओंकी हड्डियां, और यरूशलेम के निवासियोंकी हडि्डयोंको बाहर निकालेंगे। , हमारी उनकी कब्रों का;
2 और वे उन्हें सूर्य, और चन्द्रमा, और आकाश की सारी सेना के साम्हने फैला दें, जिन से उन्होंने प्रेम रखा है, और जिनकी वे सेवा करते हैं, और जिनके पीछे वे चले हैं, और जिनकी उन्होंने खोज की है, और जिन्हें उन्होंने दण्डवत किया है ; वे न तो इकट्ठे किए जाएं, और न गाड़े जाएं, वे पृय्वी पर गोबर के लिथे बने रहें।
3 और इस दुष्ट घराने के बचे हुओं के सब बचे हुओं के लिथे जीवन के बदले मृत्यु को चुन लिया जाएगा, जो उन सब स्थानों में जहां मैं ने उन्हें खदेड़ दिया है, सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है।
4 फिर उन से कहना, यहोवा योंकहता है; क्या वे गिरेंगे, और उठेंगे नहीं? क्या वह फिर जाए, और न लौट जाए?
5 फिर यह यरूशलेम के लोग क्यों सदा के लिथे पीछे खिसके हुए हैं? वे धूर्त छल करते हैं, वे लौटने से इन्कार करते हैं।
6 मैं ने सुना और सुना, परन्तु उन्होंने ठीक नहीं कहा; किसी ने अपक्की दुष्टता से पश्‍चाताप न करके कहा, कि मैं ने क्या किया है? जैसे ही घोड़ा युद्ध में भागता है, सब लोग अपने मार्ग की ओर मुड़े।
7 वरन आकाश का सारस अपने नियत समय को जानता है; और कछुआ, सारस और निगल उनके आने का समय देखते हैं; परन्तु मेरी प्रजा यहोवा का न्याय नहीं जानती।
8 तुम कैसे कहते हो, कि हम बुद्धिमान हैं, और यहोवा की व्यवस्था हमारे पास है? देखो, निश्चय ही व्यर्थ ही उसने उसे बनाया; शास्त्रियों की कलम व्यर्थ है।
9 बुद्धिमान लोग लज्जित होते हैं, वे विस्मित होकर पकड़े जाते हैं; देखो, उन्होंने यहोवा के वचन को ठुकरा दिया है; और उनमें क्या बुद्धि है;
10 इस कारण मैं उनकी पत्नियां औरोंको दूंगा, और उनके खेत जो उनके वारिस होंगे उनको दे दूंगा; क्‍योंकि छोटे से ले कर बड़े तक सब लोभ के लिथे दिए जाते हैं, और भविष्यद्वक्ता से लेकर याजक तक सब झूठा काम करते हैं।
11 क्‍योंकि उन्होंने मेरी प्रजा की बेटी के दु:ख को यह कहकर थोड़ा ठीक किया है, कि कुशल से कुशल; जब शांति नहीं होती।
12 क्या वे घिनौने काम करके लज्जित हुए? नहीं, वे बिल्कुल भी लज्जित नहीं हुए, और न ही वे शरमा सकते थे; इस कारण वे गिरनेवालोंके बीच गिरेंगे; यहोवा की यह वाणी है, कि वे उनके दर्शन के समय गिरा दिए जाएं।
13 मैं निश्चय उनका अन्त कर डालूंगा, यहोवा की यही वाणी है; न दाखलता पर दाख, और न अंजीर के वृक्ष पर अंजीर, और पत्तियाँ मुरझा जाएँगी; और जो कुछ मैं ने उन्हें दिया है वह उन में से टल जाएगा।
14 हम क्यों बैठे रहते हैं? हम इकट्ठे होकर गढ़वाले नगरों में प्रवेश करें, और वहां चुप रहें; क्योंकि हमारे परमेश्वर यहोवा ने हम को चुप करा दिया है, और हम को पीने के लिये पित्त का जल दिया है, क्योंकि हम ने यहोवा के विरुद्ध पाप किया है।
15 हम ने शान्ति की खोज की, परन्तु कुछ भला न हुआ; और स्वास्थ्य के समय के लिए, और संकट को निहारना!
16 दान से उसके घोड़ों के खर्राटे लेने की बात सुनी गई; उसके बलवन्तों के शत्रु के शब्द से सारा देश कांप उठा; क्योंकि उन्होंने आकर देश को, और जो कुछ उस में है, सब को खा लिया है; शहर, और जो उसमें रहते हैं।
17 क्योंकि देख, मैं तेरे बीच में सांप, और मुर्गियां भेजूंगा, जो मोहित न होंगे, और वे तुझे डसेंगे, यहोवा की यही वाणी है।
18 जब मैं दु:ख के साम्हने ढांढस बंधाता हूं, तो मेरा मन उदास हो जाता है।
19 सुन, मेरी प्रजा की बेटी दूर देश के रहनेवालोंके कारण उसकी दोहाई दे; क्या यहोवा सिय्योन में नहीं है? क्या उसका राजा उसमें नहीं है? उन्होंने अपनी खुदी हुई मूरतों और विचित्र व्यर्थ वस्तुओं से मुझे क्यों क्रोध दिलाया है?
20 कटनी हो चुकी है, ग्रीष्मकाल समाप्त हो गया है, और हम बचाए नहीं गए हैं।
21 क्योंकि मेरी प्रजा की बेटी की हानि हुई है; मैं अश्वेत हूं; विस्मय ने मुझे पकड़ लिया है।
22 क्या गिलाद में बाम नहीं है? क्या वहां कोई चिकित्सक नहीं है? फिर मेरे लोगों की बेटी की तबीयत ठीक क्यों नहीं हुई?

 

अध्याय 9

यिर्मयाह लैमेंटेथ — आज्ञा न मानना कड़वी विपत्ति का कारण।

1 भला होता कि मेरा सिर जल होता, और मेरी आंखें आँसुओं का सोता होतीं, कि मैं अपनी प्रजा की बेटी की घात किए हुए के लिये दिन रात रोता!
2 भला होता कि मेरे पास जंगल में पथिकोंके ठहरने का स्थान होता; कि मैं अपक्की प्रजा को छोड़ कर उनके पास से चला जाऊं! क्‍योंकि वे सब व्यभिचारी, और विश्‍वासघातियोंकी मण्डली हैं।
3 और वे फूठ के लिथे अपक्की जीभ को अपके धनुष की नाई झुकाते हैं; परन्तु वे पृय्वी पर सत्य के लिये पराक्रमी नहीं हैं; क्योंकि वे बुराई से बुराई की ओर बढ़ते जाते हैं, और वे मुझे नहीं जानते, यहोवा की यही वाणी है।
4 उसके पड़ोसी की चौकसी करना, और किसी भाई पर भरोसा न रखना; क्‍योंकि हर एक भाई सत्यानाश करेगा, और हर एक पड़ोसी निन्दा करेगा।
5 और वे सब अपने पड़ोसी को भरमाएंगे, और सत्य न बोलेंगे; उन्होंने अपनी जीभ को झूठ बोलना सिखाया है, और अधर्म करने के लिए अपने आप को थका दिया है।
6 तेरा निवास छल के बीच में है; वे छल के द्वारा मुझे जानने से इन्कार करते हैं, यहोवा की यही वाणी है।
7 इसलिथे सेनाओं का यहोवा योंकहता है, देख, मैं उनको पिघलाकर परखूंगा; क्योंकि मैं अपक्की प्रजा की बेटी के लिथे क्या करूं?
8 उनकी जीभ निकली हुई तीर की नाईं है; यह छल बोलता है; कोई अपके पड़ोसी से अपके मुंह से शान्ति से बातें करता है, परन्तु मन ही मन घात लगाए रहता है।
9 क्या मैं इन बातों के कारण उनके पास न जाऊं? प्रभु कहते हैं; क्या ऐसी जाति से मेरे प्राण का पलटा न लिया जाएगा?
10 क्योंकि मैं पहाड़ों पर विलाप और विलाप करूंगा, और जंगल के निवासोंके लिथे विलाप करूंगा, क्योंकि वे ऐसे जल गए हैं, कि कोई उन में से होकर न निकल सकेगा; न तो मनुष्य पशुओं की शब्‍द सुन सकते हैं; आकाश के पक्षी और पशु दोनों भाग गए; वे चले गए हैं।
11 और मैं यरूशलेम को ढेर और अजगरों की मांद बनाऊंगा; और मैं यहूदा के नगरोंको उजाड़ दूंगा, और उनका कोई निवासी न रहेगा।
12 बुद्धिमान कौन है, जो इस बात को समझ सके? और वह कौन है जिस से यहोवा के मुख से बातें हुई हैं, कि वह उसका वर्णन करे, क्योंकि वह देश नाश हो जाता है, और जंगल की नाईं जलकर राख हो जाता है, और कोई वहां से होकर नहीं जाता?
13 और यहोवा योंकहता है, कि उन्होंने मेरी व्यवस्था को जो मैं ने उनके साम्हने रखी है, त्याग दिया, और न मेरी बात मानी, और न उस पर चले;
14 परन्‍तु अपके मन की समझ, और बालीम के अनुसार चले हैं, जो उनके पुरखाओं ने उन्‍हें सिखाया या;
15 इसलिथे इस्राएल का परमेश्वर सेनाओं का यहोवा योंकहता है; देख, मैं इन लोगोंको, वरन इन लोगोंको कीड़ा लकडिय़ां खिलाऊंगा, और पीने को पित्त का जल दूंगा।
16 मैं उन्हें अन्यजातियों में भी तितर-बितर करूंगा, जिन्हें न वे जानते थे और न उनके पुरखा जानते थे, और जब तक मैं उनका अन्त न कर लूं, तब तक मैं उनके पीछे तलवार चलाऊंगा।
17 सेनाओं का यहोवा योंकहता है, ध्यान कर, और विलाप करनेवाली स्त्रियोंको बुलवा, कि वे आ जाएं; और चालाक स्त्रियों को बुलवा भेज, कि वे आ जाएं।
18 और वे फुर्ती करें, और हमारे लिथे विलाप करें, कि हमारी आंखों से आंसू बहें, और हमारी पलकें जल से बहने लगे।
19 क्‍योंकि सिय्योन में से विलाप की शब्‍द सुनाई देती है, कि हम कैसे बिगड़ गए हैं! हम बहुत लज्जित हुए हैं, क्योंकि हम ने देश को त्याग दिया है, क्योंकि हमारे घरों ने हमें निकाल दिया है।
20 तौभी, हे स्त्रियों, यहोवा का वचन सुनो, और उसके मुंह का वचन अपके कानोंको सुनाओ, और अपक्की बेटियोंको विलाप करना, और सब अपने पड़ोसी को विलाप करना सिखा।
21 क्योंकि मृत्यु हमारी खिड़कियों में चढ़ आई है, और हमारे महलोंमें प्रवेश कर गई है, कि बाहर के बालकोंको, और जवानोंको सड़कोंसे नाश करे।
22 यहोवा यों कहता है, कि मनुष्योंकी लोथें गोबर की नाईं खुले मैदान पर, और मुट्ठी भर काटनेवाले के समान गिरेंगी, और कोई उनको बटोरने न पाएगा।
23 यहोवा योंकहता है, कि बुद्धिमान अपनी बुद्धि से घमण्ड न करे, और न शूरवीर अपने पराक्रम से घमण्ड करे, और न धनवान अपके धन से घमण्ड करे;
24 परन्तु जो इस में घमण्ड करे, वह मुझे समझे, और मुझे जान ले, कि मैं यहोवा हूं, जो पृथ्वी पर करूणा, न्याय और धर्म के काम करता हूं; क्योंकि मैं इन्हीं बातों से प्रसन्न होता हूं, यहोवा की यही वाणी है।
25 देख, यहोवा की यह वाणी है, ऐसे दिन आते हैं, कि मैं उन सब को जो खतनारहितोंके साथ खतना किए हुए हैं, दण्ड दूंगा;
26 मिस्र, यहूदा, एदोम, और अम्मोनियों, और मोआबियों, और सब कोनोंमें जो जंगल में रहते हैं, वे सब; क्योंकि ये सब जातियां खतनारहित हैं, और इस्राएल का सारा घराना मन में खतनारहित है।

 

अध्याय 10

परमेश्वर और मूर्तियों की असमान तुलना — भविष्यद्वक्ता निवासस्थान की लूट पर विलाप करता है।

1 हे इस्राएल के घराने, जो वचन यहोवा तुम से कहता है, उसे सुनो;
2 यहोवा यों कहता है, अन्यजातियों का मार्ग न सीख, और आकाश के चिन्हों से न डरना; क्योंकि अन्यजाति उन से घबराते हैं।
3 क्योंकि प्रजा की रीतियां व्यर्थ हैं; क्‍योंकि कोई एक वृझ को जंगल में से, अर्थात काम करनेवाले के काम को कुल्हाड़ी से काटता है।
4 वे उसको चान्दी और सोने से अलंकृत करते हैं; वे उसे कीलों और हथौड़ों से जकड़ लेते हैं, कि वह हिलता नहीं।
5 वे खजूर की नाईं सीधे तो हैं, परन्तु बोलते नहीं; उन्हें वहन करना होगा, क्योंकि वे नहीं जा सकते। उनसे डरो मत; क्योंकि वे बुराई नहीं कर सकते, और न भलाई करना उन में है।
6 क्योंकि हे यहोवा, तेरे तुल्य कोई नहीं है; तू महान है, और तेरा नाम पराक्रम में महान है।
7 हे राष्ट्रों के राजा, कौन तुझ से न डरेगा? क्‍योंकि यह तुझ से प्रतीत होता है; क्योंकि अन्यजातियों के सब पण्डितों में, और उनके सब राज्यों में तेरे तुल्य कोई नहीं है।
8 परन्तु वे तो बिलकुल पशुवत और मूर्ख हैं; स्टॉक वैनिटी का एक सिद्धांत है।
9 तर्शीश से चान्दी पटकी गई, और ऊफाज से, जो काम करनेवाले और संस्थापक के हाथ का काम है, लाया जाता है; उनके वस्त्र नीले और बैंजनी हैं; वे सब चालाक आदमियों के काम हैं।
10 परन्तु यहोवा ही सच्चा परमेश्वर है, वही जीवित परमेश्वर, और युग युग का राजा है; उसके कोप से पृय्वी कांप उठेगी, और जाति जाति उसके कोप को सह न सकेगी।
11 तुम उन से यों कहना, जिन देवताओं ने आकाश और पृय्वी को नहीं बनाया, वे पृय्वी पर से और इन आकाश के नीचे से नाश हो जाएंगे।
12 उसी ने पृय्वी को अपक्की शक्ति से बनाया, उस ने जगत को अपक्की बुद्धि से दृढ़ किया, और आकाश को अपके विवेक से तान दिया है।
13 जब वह अपक्की शब्‍द कहता है, तब आकाश में जल का बहुत जल होता है, और वह पृय्‍वी की छोर से धुंआ उड़ा देता है; वह मेंह से बिजली बनाता, और अपके भण्डार में से आँधी उड़ाता है।
14 हर एक मनुष्य अपके ज्ञान में पशु है; हर संस्थापक गढ़ी हुई छवि से भ्रमित है; क्योंकि उसकी ढली हुई मूरत मिथ्या है, और उन में श्वास नहीं।
15 वे व्यर्थ और अधर्म के काम हैं; उनके दर्शन के समय में वे नाश हो जाएंगे।
16 याकूब का भाग उनके समान नहीं है; क्योंकि वह सब वस्तुओं में पहिला है; और इस्राएल उसके निज भाग की छड़ी है; सेनाओं का यहोवा उसका नाम है।
17 हे गढ़ के निवासियों, देश में से अपना माल बटोर ले।
18 क्योंकि यहोवा योंकहता है, कि देख, मैं इसी समय देश के निवासियोंको घात करके उन्हें ऐसा संकट दूंगा, कि वे ऐसा पाएं।
19 धिक्कार है मुझ पर अपक्की चोट के कारण! मेरा घाव गंभीर है; परन्‍तु मैं ने कहा, सचमुच यह शोक है, और मुझे इसे सहना ही होगा।
20 मेरा निवासस्थान खराब हो गया है, और मेरी सब रस्सियां टूट गई हैं; मेरे बच्चे मेरे पास से निकल गए हैं, और वे नहीं हैं; अब कोई मेरा डेरे को तानने, और मेरे परदे लगाने वाला नहीं।
21 क्योंकि चरवाहे पशुवत हो गए हैं, और उन्होंने यहोवा को नहीं ढूंढ़ा; इस कारण उनका काम सुफल न होगा, और उनके सब भेड़-बकरियां तितर-बितर हो जाएंगी।
22 देख, यहूदा के नगरोंको उजाड़ देने के लिये, और अजगरोंकी मांद को उजाड़ने के लिथे उत्तर देश से जंगली जानवरोंका कोलाहल, और बड़ा कोलाहल मच गया है।
23 हे यहोवा, मैं जानता हूं, कि मनुष्य का मार्ग उसके वश में नहीं है; यह मनुष्य में नहीं है जो अपने कदमों को निर्देशित करने के लिए चलता है।
24 हे यहोवा, मुझे सुधार ले, परन्तु न्याय से; अपने क्रोध में नहीं, ऐसा न हो कि तू मुझे निष्फल कर दे।
25 अपना जलजल उन अन्यजातियों पर जो तुझे नहीं जानते, और उन परिवारों पर जो तेरा नाम नहीं लेते; क्योंकि उन्होंने याकूब को खा लिया, और उसे खा लिया, और उसका अन्त कर डाला है, और उसके निवास को उजाड़ दिया है।

 

अध्याय 11

परमेश्वर की वाचा की घोषणा की।

1 वह वचन जो यहोवा की ओर से यिर्मयाह के पास पहुंचा, कि वह कहता है,
2 इस वाचा की बातें सुनो, और यहूदा के लोगों, और यरूशलेम के निवासियों से कहो;
3 और उन से कहना, इस्राएल का परमेश्वर यहोवा योंकहता है; शापित हो वह मनुष्य जो इस वाचा के वचनों को न माने,
4 जिस दिन मैं ने तुम्हारे पुरखाओं को मिस्र देश से लोहे के भट्ठे में से निकाल लाने की आज्ञा दी थी, कि मेरी बात मानो, और जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, उसके अनुसार करो; इसी प्रकार तुम मेरी प्रजा ठहरोगे, और मैं तुम्हारा परमेश्वर ठहरूंगा;
5 कि जिस शपय को मैं ने तेरे पुरखाओं से खाई या, उस में दूध और मधु की धाराएं देने की शपथ खाई है, वैसा ही आज के दिन भी पूरा करूं। तब मैं ने उत्तर दिया, और कहा, हे यहोवा, ऐसा ही हो।
6 तब यहोवा ने मुझ से कहा, यह सब बातें यहूदा के नगरोंऔर यरूशलेम की सड़कोंमें प्रचार करके कह, कि इस वाचा की बातें सुनो, और उन पर करो।
7 क्योंकि जिस दिन मैं उन्हें मिस्र देश से निकाल ले आया, उस दिन तक मैं ने तेरे पुरखाओं से गम्भीरता से विरोध किया, और सवेरे उठकर यह कहकर विरोध किया, कि मेरी बात मानो।
8 तौभी उन्होंने न मानी, और न कान लगाया, वरन अपके अपके बुरे मन की कल्पना में सब पर चले; इस कारण इस वाचा की जो आज्ञा मैं ने उन्हें करने की आज्ञा दी है, वे सब मैं उन पर लाऊंगा; लेकिन उन्होंने उन्हें नहीं किया।
9 और यहोवा ने मुझ से कहा, यहूदा के पुरूषोंमें और यरूशलेम के निवासियोंके बीच एक षडय़ंत्र पाया गया है।
10 वे अपके पुरखाओं के अधर्म के कामोंकी ओर फिरे, जिन ने मेरी बातें न सुनीं; और वे पराए देवताओं के पीछे उनकी उपासना करने को गए; इस्राएल के घराने और यहूदा के घराने ने मेरी वाचा को तोड़ दिया, जो मैं ने उनके पुरखाओं से बान्धी थी।
11 इसलिथे यहोवा योंकहता है, सुन, मैं उन पर ऐसी विपत्ति डालूंगा, कि वे बच न सकेंगे; और चाहे वे मेरी दोहाई दें, तौभी मैं उनकी न सुनूंगा।
12 तब यहूदा के नगर और यरूशलेम के निवासी जाकर उन देवताओं की दोहाई देंगे जिनके लिथे वे धूप चढ़ाते हैं; परन्तु संकट के समय वे उनका उद्धार न करेंगे।
13 क्योंकि हे यहूदा, तेरे देवता तेरे नगरोंकी गिनती के अनुसार हैं; और यरूशलेम की सड़कों की गिनती के अनुसार तुम ने उस लज्जा की वस्तु के लिथे वेदियां, अर्थात् बाल के लिथे धूप जलाने के लिथे वेदियां खड़ी की हैं।
14 इसलिथे तू इन लोगोंके लिथे बिनती न करना, और न उनके लिथे दोहाई देना, और न उनके लिथे बिनती करना; क्योंकि जब वे अपके संकट के लिथे मेरी दोहाई देंगे तब मैं उनकी न सुनूंगा।
15 मेरी प्रियतमा को मेरे घर में क्या करना, क्योंकि उस ने बहुतोंसे व्यभिचार किया है, और पवित्र शरीर तुझ से दूर हो गया है? जब तू बुराई करता है, तब मगन होता है।
16 यहोवा ने तेरा नाम यह रखा, कि जलपाई का एक हरा वृक्ष, जो सुन्दर और अच्छे फल वाला है; उस ने बड़े कोलाहल के शब्द से उस में आग फूंक दी, और उसकी डालियां टूट गईं।
17 क्योंकि सेनाओं के यहोवा ने, जिस ने तुझे रोपा है, उस ने इस्राएल के घराने और यहूदा के घराने की जो बुराई उन्होंने अपके विरुद्ध की है, उस ने बाल के लिथे धूप चढ़ाने के लिथे मुझ को भड़काने के लिथे अपके विरुद्ध किया है।
18 और यहोवा ने मुझे उसका ज्ञान दिया है, और मैं उसे जानता हूं; तब तू ने मुझे उनके काम दिखाए।
19 परन्तु मैं उस भेड़ के बच्चे वा बैल के समान था, जो घात करने के लिथे लाया जाता है; और मैं न जानता था, कि उन्होंने मेरे विरुद्ध युक्ति युक्‍ति की या, कि हम उस वृक्ष को उसके फल समेत नाश करें, और उसे जीवतोंके देश में से नाश करें, कि उसका नाम फिर स्मरण न किया जाए।
20 परन्तु, हे सेनाओं के यहोवा, जो लगाम और मन को परखता है, वह धर्मी का न्यायी है, मैं उन से अपना पलटा लेने की आज्ञा देखूं; क्‍योंकि मैं ने अपके कारण तुझ पर प्रगट किया है।
21 इसलिथे अनातोत के मनुष्योंका जो तेरे प्राण के खोजी हैं, यहोवा योंकहता है, कि यहोवा के नाम से भविष्यद्वाणी न करना, कि तू हमारे हाथ से न मरे;
22 इसलिथे सेनाओं का यहोवा योंकहता है, देख, मैं उनको दण्ड दूंगा; वे जवान तलवार से मारे जाएंगे; उनके बेटे-बेटियाँ अकाल से मरेंगे;
23 और उन में से कोई न बचेगा; क्योंकि मैं अनातोत के लोगोंकी दण्ड देने का वर्ष भी उन पर विपत्ति डालूंगा।

 

अध्याय 12

यिर्मयाह दुष्टों की समृद्धि की शिकायत करता है - कैद से लौटने के लिए पश्चाताप करने वाला।

1 हे यहोवा, जब मैं तुझ से बिनती करता हूं, तब तू धर्मी है; तौभी मैं तुझ से तेरे नियमों की चर्चा करूं; दुष्टों का मार्ग क्यों सफल होता है? इसलिए वे सब खुश हैं जो बहुत विश्वासघाती व्यवहार करते हैं;
2 तू ने उन्हें लगाया है, वरन उन्होंने जड़ पकड़ ली है; वे बढ़ते हैं, हां, वे फल लाते हैं; तू उनके मुंह के निकट है, और उनकी लगाम से दूर है।
3 परन्तु हे यहोवा, तू मुझे जानता है; तू ने मुझे देखा है, और मेरे मन को अपक्की ओर ताड़ लिया है; उन्हें वध के लिये भेड़ों की नाईं खींच ले, और वध के दिन के लिये तैयार कर।
4 देश कब तक विलाप करता रहेगा, और उसके रहनेवालोंकी दुष्टता के कारण सब प्रकार के जड-बूटियां सूख जाएंगी? पशु, और पक्षी भस्म हो जाते हैं; क्योंकि उन्होंने कहा, वह हमारा अन्तिम छोर न देखेगा।
5 यदि तू हमारे प्यादोंके संग दौड़ा, और उन्होंने तुझे थका दिया है, तो तू घोड़ोंसे क्‍योंकर युद्ध कर सकता है? और यदि शान्ति के देश में, जिस पर तू ने भरोसा किया, उन्होंने तुझे थका दिया, तो यरदन के जल में तू क्या करेगा?
6 क्योंकि तेरे भाई और तेरे पिता के घराने ने भी तुझ से विश्वासघात किया है; हां, उन्होंने तेरे पीछे एक भीड़ को बुलाया है; भले ही वे तुझ से ठीक-ठीक बातें करें, तौभी उन पर विश्वास न करें।
7 मैं ने अपके घर को छोड़ दिया है, मैं ने अपके निज भाग को छोड़ दिया है; मैंने अपने प्राण के प्रिय को उसके शत्रुओं के वश में कर दिया है।
8 मेरा निज भाग वन में सिंह के समान मेरे लिथे है; वह मेरे विरुद्ध चिल्लाता है; इसलिए क्या मुझे इससे नफरत है।
9 मेरा निज भाग धब्बेदार पक्षी के समान है, और चारोंओर के पक्षी उसके साम्हने हैं; आओ, मैदान के सब पशुओं को इकट्ठा करो, और खाने को आओ।
10 बहुत से याजकों ने मेरी दाख की बारी को नाश किया है, उन्होंने मेरे भाग को पांवों से रौंदा है, उन्होंने मेरे सुखद भाग को उजाड़ जंगल बना दिया है।
11 उन्होंने उसे उजाड़ दिया है, और वह उजाड़ होकर मेरे लिये विलाप करता है; सारी भूमि उजाड़ हो गई है, क्योंकि कोई उसे मन से नहीं लगाता।
12 जंगल के सब ऊँचे स्थानों पर लूट करनेवाले आ गए हैं; क्योंकि देश की एक छोर से दूसरी छोर तक यहोवा की तलवार भस्म हो जाएगी; किसी भी मांस को शांति नहीं होगी।
13 उन्होंने गेहूँ तो बोया, परन्तु काँटे काटेंगे; उन्होंने अपके आप को दु:ख दिया है, परन्तु कुछ लाभ न होगा; और वे यहोवा के भयंकर कोप के कारण तेरे राजस्व से लज्जित होंगे।
14 मेरे सब बुरे पड़ोसियों के विषय में यहोवा यों कहता है, कि जो निज भाग मैं ने अपक्की प्रजा इस्राएल से करावा दिया है उसे छू ले; देख, मैं उनको उनके देश में से निकाल डालूंगा, और यहूदा के घराने को उनके बीच में से निकाल डालूंगा।
15 और ऐसा होगा, कि जब मैं उनको उखाड़ डालूंगा, तब फिर उन पर तरस खाऊंगा, और अपके अपके अपके निज भाग, और अपके देश में अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके निज भाग में फिर ले आऊंगा।
16 और ऐसा होगा, कि यदि वे मेरी प्रजा की चाल यत्न से सीखें, कि मेरे नाम की शपय खाएँ, यहोवा जीवित है; जैसे उन्होंने मेरी प्रजा को बाल की शपथ खिलाना सिखाया; तब वे मेरी प्रजा के बीच में बनाए जाएंगे।
17 परन्तु यदि वे न मानें, तो मैं उस जाति को पूरी रीति से उखाड़कर नाश कर दूंगा, यहोवा की यही वाणी है।

 

अध्याय 13

लिनन की कमरबंद का प्रकार - शराब से भरी बोतलों का दृष्टांत - भविष्य के निर्णय - घृणा इसके कारण हैं।

1 यहोवा ने मुझ से योंकहा है, जा, और अपक्की मलमल का प्याला लाकर अपक्की कमर पर पहिना, और जल में न रखना।
2 इसलिथे मैं ने यहोवा के वचन के अनुसार एक कमरबन्द ले कर अपके सिंहोंको पहिनाया।।
3 और यहोवा का यह वचन दूसरी बार मेरे पास पहुंचा, और कहा,
4 अपक्की कमर पर जो कमरबंद तुझे मिला है उसे ले कर फरात के पास जा, और वहां चट्टान के एक छेद में छिपा दे।
5 तब मैं ने जाकर उस को परात के पास छिपा दिया, जैसा यहोवा ने मुझे आज्ञा दी थी।
6 बहुत दिनों के बाद यहोवा ने मुझ से कहा, उठ, फुरात के पास जा, और वह कमर कस ले, जिसे मैं ने तुझे वहीं छिपाने की आज्ञा दी है।
7 तब मैं ने फरात को जा कर खुदाई की, और जिस स्थान पर मैं ने उसको मारा या, उस में से कमरबंद को ले लिया; और देखो, कमर फट गई, और उसका कोई लाभ नहीं हुआ।
8 तब यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि
9 यहोवा यों कहता है, इस रीति से मैं यहूदा के घमण्ड, और यरूशलेम के बड़े घमण्ड से नाश करूंगा।
10 यह दुष्ट लोग जो मेरे वचनों को सुनने से इन्कार करते हैं, जो अपके मन की कल्पना पर चलते हैं, और पराए देवताओं के पीछे उनकी उपासना करने, और उनकी उपासना करने को चलते हैं, वे इस पटिया की नाईं ठहरेंगे, जो व्यर्थ है।
11 क्योंकि जिस प्रकार मनुष्य की कमर में कमर बान्धी रहती है, वैसे ही मैं ने इस्राएल के सारे घराने और यहूदा के सारे घराने को मुझ से लगा रखा है, यहोवा की यही वाणी है; कि वे मेरे लिथे प्रजा, और नाम, और स्तुति, और महिमा के लिथे ठहरें; लेकिन उन्होंने नहीं सुना।
12 इसलिथे तू उन से यह वचन कहना; इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है, सब प्याले दाखमधु से भरे जाएं; और वे तुझ से कहेंगे, क्या हम निश्चय नहीं जानते, कि हर प्याला दाखमधु से भरा होगा?
13 तब तू उन से कहना, यहोवा योंकहता है, कि देख, मैं इस देश के सब निवासियोंको जो दाऊद की गद्दी पर विराजमान हैं, और याजकों, और भविष्यद्वक्ताओं, और यरूशलेम के सब निवासियोंको भी भर दूंगा; मद्यपान।
14 और मैं उनको पितरोंऔर पुत्रों समेत एक दूसरे पर धावा दूंगा, यहोवा की यही वाणी है; मैं न तो तरस खाऊंगा, न छोड़ूंगा, और न दया करूंगा, वरन उनका नाश करूंगा।
15 सुनो, और कान लगाओ; गर्व मत करो; क्योंकि यहोवा ने कहा है।
16 अपने परमेश्वर यहोवा की महिमा करो, इससे पहले कि वह अन्धेरा करे, और तुम्हारे पांव अन्धकारमय पहाड़ों पर ठोकर खाए, और जब तुम उजियाले की खोज में रहो, तो वह उसे मृत्यु की छाया बना देता है, और उसे घोर अन्धियारा बना देता है।
17 परन्तु यदि तुम न सुनोगे, तो मेरा प्राण तुम्हारे घमण्ड के कारण गुप्त स्थानों में रोएगा; और मेरी आंख फूट-फूट कर रोएगी, और आंसू बहाएगी, क्योंकि यहोवा की भेड़-बकरी बंधुआई में ले ली गई है।
18 राजा और रानी से कह, कि दीन होकर बैठ; क्‍योंकि तेरी प्रधानताएं वरन तेरी महिमा का मुकुट भी गिरेंगी।
19 दक्खिन देश के नगर बन्द किए जाएं, और कोई उनको न खोले; यहूदा उसके सब को बन्धुआई में ले जाएगा, वह सर्वथा बंधुआई में जाएगा।
20 अपनी आंखें उठाकर उत्तर दिशा से आने वालों को देख; जो भेड़-बकरी तुझे दी गई थी, वह कहां है, तेरी सुन्दर भेड़-बकरी कहां है?
21 जब वह तुझे दण्ड देगा, तब तू क्या कहेगा? क्‍योंकि तू ने उन्‍हें प्रधान और अपके प्रधान होने की शिक्षा दी है; क्या दु:ख तुझे त्राहि-त्राहि करनेवाली स्त्री की नाईं नहीं ले जाएगा?
22 और यदि तू अपके मन में कहता है, कि ये बातें मुझ पर क्योंहोीं? तेरे अधर्म की महानता के कारण तेरा चोगा खोजा गया है, और तेरी एड़ी नंगे हो गई है।
23 क्या कूशी अपक्की खाल बदल सकता है, वा चीता अपने धब्बे बदल सकता है? तो तुम भी भलाई करो, जो बुराई करने के आदी हैं।
24 इस कारण मैं उन्हें जंगल की आँधी के द्वारा उड़ती हुई पराली की नाईं तितर-बितर करूँगा।
25 यहोवा की यह वाणी है, तेरा चिट्ठा यह है; क्योंकि तू ने मुझे भुला दिया है, और असत्य पर भरोसा रखा है।
26 इसलिथे मैं तेरे आंचल को तेरे मुंह पर पाऊंगा, कि तेरी लज्जा प्रगट हो।
27 मैं ने तेरे परस्त्रीगमन, और तेरे शत्रुओं, तेरी व्यभिचार की धूर्तता, और तेरे घिनौने कामोंको जो मैदान में पहाड़ोंपर देखे हैं। हे यरूशलेम, तुझ पर हाय! क्या तू शुद्ध नहीं ठहरेगा? यह एक बार कब होगा?

 

अध्याय 14

भयानक अकाल - लोगों के लिए यहोवा से बिनती नहीं की जाएगी - झूठ बोलने वाले भविष्यद्वक्ता।

1 यहोवा का वह वचन जो कमी के विषय में यिर्मयाह के पास पहुंचा।
2 यहूदा विलाप करता है, और उसके फाटक सुस्त पड़ जाते हैं; वे भूमि तक काले हैं; और यरूशलेम की दुहाई टल गई है।
3 और उनके रईसोंने अपके बालबच्चोंको जल के पास भेजा है; वे गड़हों में आए, और उन्हें पानी न मिला; वे अपने पात्र खाली लिये हुए लौट गए; वे लज्जित और लज्जित हुए, और अपने सिर ढांपे।
4 क्योंकि भूमि टूट गई है, क्योंकि भूमि में मेंह न हुई, और हल चलानेवाले लज्जित हुए, और सिर ढांपे।
5 वरन हिन्द भी मैदान में बछड़ा और घास न होने के कारण उसे छोड़ गया।
6 और जंगली गदहे ऊँचे स्थानों पर खड़े रहे, उन्होंने ड्रेगन की नाईं हवा को उड़ा दिया; घास न होने के कारण उनकी आंखें नम हो गईं।
7 हे यहोवा, चाहे हमारे अधर्म के काम हमारे साम्हने गवाही दें, तौभी अपके नाम के निमित्त ऐसा ही करना; हमारे पीछे बहुत हैं; हम ने तेरे विरुद्ध पाप किया है।
8 हे इस्राएल की आशा, संकट के समय उसके उद्धारकर्ता, तू क्यों इस देश में परदेशी, और पथभ्रष्ट मनुष्य के समान रात बिताने के लिथे क्यों ठहरे?
9 तू क्यों चकित होकर वीर की नाईं, जो उद्धार न कर सके? तौभी, हे यहोवा, तू हमारे बीच में है, और हम तेरे नाम से कहलाते हैं; हमें मत छोड़ो।
10 यहोवा इन लोगों से यों कहता है, कि वे भटकना पसन्द करते हैं, वे अपने पांव नहीं रोकते, इस कारण यहोवा उन्हें ग्रहण नहीं करता; वह अब उनके अधर्म को स्मरण करेगा, और उनके पापों को देखेगा।
11 तब यहोवा ने मुझ से कहा, इन लोगोंके लिथे उनके भले के लिथे प्रार्थना न करो।
12 जब वे उपवास करेंगे, तब मैं उनकी दोहाई न सुनूंगा; और जब वे होमबलि और भेंट चढ़ाएं, तब मैं उनको ग्रहण न करूंगा; परन्तु मैं उन्हें तलवार, और अकाल, और मरी से नष्ट कर दूंगा।
13 तब मैं ने कहा, हे परमेश्वर यहोवा! देखो, भविष्यद्वक्ता उन से कहते हैं, कि तुम न तलवार देखने पाओगे, और न अकाल पड़ेगा; परन्तु मैं तुम्हें इस स्थान में निश्चय शान्ति दूंगा।
14 तब यहोवा ने मुझ से कहा, भविष्यद्वक्ता मेरे नाम से भविष्यद्वाणी करते हैं; मैं ने उन्हें नहीं भेजा, और न मैं ने उन्हें आज्ञा दी, और न उन से कुछ कहा; वे तुझ से मिथ्या दर्शन और भविष्यद्वाणी, और व्यर्थ की बात, और अपके मन के छल की नबूवत करते हैं।
15 इसलिथे यहोवा उन भविष्यद्वक्ताओंके विषय जो मेरे नाम से भविष्यद्वाणी करते हैं योंकहते हैं, और मैं ने उन्हें न भेजा, तौभी वे कहते हैं, कि इस देश में तलवार और अकाल न पड़ेगा; वे भविष्यद्वक्ता तलवार और अकाल से नाश किए जाएंगे।
16 और जिन लोगों से वे भविष्यद्वाणी करेंगे वे अकाल और तलवार के कारण यरूशलेम की सड़कों पर फेंक दिए जाएंगे; और न तो उनको मिट्टी देने के लिथे उनकी पत्नियां, न उनके बेटे, और न बेटियां; क्योंकि मैं उनकी दुष्टता उन पर उण्डेलूंगा।
17 इसलिथे तू उन से यह वचन कहना; मेरी आँखों से दिन-रात आँसू बहते रहें, और वे न रुकें, क्योंकि मेरी प्रजा की कुँवारी पुत्री बड़ी दरार से टूट गई है, और वह बहुत ही घोर प्रहार से टूट गई है।
18 यदि मैं मैदान में जाऊं, तो तलवार से मारे हुओं को देख! और यदि मैं नगर में प्रवेश करूं, तो जो लोग अकाल से पीड़ित हैं, उन्हें देख! हां, भविष्यद्वक्ता और याजक दोनों एक ऐसे देश में जाते हैं जिसे वे नहीं जानते ।
19 क्या तू ने यहूदा को पूरी रीति से ठुकरा दिया है? क्या तेरा मन सिय्योन से घृणा करता है? तू ने हम को क्यों मारा, और हमारे लिथे कोई चंगा नहीं हुआ? हम ने शान्ति की खोज की, और कोई भलाई नहीं; और चंगाई के समय के लिथे, और संकट को निहारना!
20 हे यहोवा, हम ने अपक्की दुष्टता और अपके पुरखाओं के अधर्म को मान लिया है; क्योंकि हम ने तेरे विरुद्ध पाप किया है।
21 अपने नाम के निमित्त हम से घृणा न करना; अपनी महिमा के सिंहासन का अपमान न करना; याद रख, हम से अपनी वाचा न तोड़।
22 क्या अन्यजातियों की व्यर्थताओं में से कोई हैं जो वर्षा करा सकती हैं? या आकाश वर्षा दे सकता है? हे हमारे परमेश्वर यहोवा, क्या तू नहीं है? इसलिथे हम तेरी बाट जोहेंगे; क्योंकि तू ने ये सब वस्तुएं बनाई हैं।

 

अध्याय 15

यहूदियों की अस्वीकृति - उनके लिए एक धमकी।

1 तब यहोवा ने मुझ से कहा, चाहे मूसा और शमूएल मेरे साम्हने खड़े रहे, तौभी मेरा मन इन लोगोंकी ओर न लगा रहा; उन्हें मेरे साम्हने से निकाल दे, और निकल जाने दे।
2 और ऐसा होगा, कि यदि वे तुझ से कहें, कि हम कहां जाएं? तब तू उन से कहना, यहोवा योंकहता है; जैसे मृत्यु के लिए हैं, मृत्यु के लिए; और जो तलवार के लिथे, और तलवार के लिथे हैं; और जो अकाल और अकाल के लिथे हैं; और जैसे बन्धुवाई के लिथे, बन्धुआई के लिथे हैं।
3 और मैं उनके ऊपर चार प्रकार ठहराऊंगा, यहोवा की यही वाणी है; तलवार घात करने के लिथे, और कुत्ते फाड़ डालने के लिथे, और आकाश के पझियों, और पृय्वी के जन्तु, खा डालने और नाश करने के लिथे।
4 और यहूदा के राजा हिजकिय्याह के पुत्र मनश्शे के कारण जो उस ने यरूशलेम में किया, उसके कारण मैं उनको पृय्वी के सब राज्योंमें मिटा दूंगा।
5 क्योंकि हे यरूशलेम, कौन तुझ पर दया करेगा? वा कौन तुझ पर विलाप करेगा? वा कौन अलग जाकर पूछे कि तू कैसा है?
6 यहोवा की यह वाणी है, कि तू ने मुझे त्याग दिया है, तू पीछे छूट गया है; इसलिथे मैं तुझ पर हाथ बढ़ाकर तुझे नाश करूंगा; मैं पश्चाताप से थक गया हूँ।
7 और मैं उन्हें देश के फाटकोंमें पंखे से उड़ाऊंगा; मैं उनकी सन्तान उत्पन्‍न करूंगा, और अपक्की प्रजा का नाश करूंगा, क्योंकि वे अपके मार्ग से न फिरेंगे।
8 उनकी विधवाएं मेरे लिथे समुद्र की बालू के ऊपर बढ़ गई हैं; मैं उन जवानों की माता के विरुद्ध दोपहर के समय लूटने वाला लाऊंगा; मैं ने उसे अचानक उस पर गिरा दिया, और नगर पर भय छा गया।
9 जिस ने सात जने हैं वह मर गई; उसने भूत छोड़ दिया है; उसका सूरज ढल चुका था, जबकि दिन था; वह शर्मिंदा और भ्रमित हो गई है; और उनके बचे हुओं को मैं उनके शत्रुओं के साम्हने तलवार से मारूंगा, यहोवा की यही वाणी है।
10 हाय, हे मेरी माता, मुझ पर हाय, कि तू ने मेरे लिथे एक झगड़ालू और सारी पृय्वी के लिथे विवाद करनेवाला उत्पन्न किया है! मैं ने न तो सूद पर उधार दिया, और न मनुष्यों ने मुझे सूद पर उधार दिया; तौभी वे सब मुझे शाप देते हैं।
11 यहोवा ने कहा, निश्चय तेरे बचे हुओं का भला ही होगा; निश्चय मैं विपत्ति के समय और क्लेश के समय में शत्रु को तुझ से बिनती करूंगा।
12 क्या लोहा उत्तरी लोहे और स्टील को तोड़ देगा?
13 मैं तेरा धन और तेरा भण्डार लूट में बिना दाम के दूंगा, और तेरे सब पापोंके लिथे वरन तेरे सब सिवानोंमें भी दूंगा।
14 और मैं तुझे तेरे शत्रुओं के संग उस देश में पहुंचा दूंगा जिसे तू नहीं जानता; क्योंकि मेरे कोप में आग भड़क उठी है, जो तुम पर भड़केगी।
15 हे यहोवा, तू जानता है; मेरी सुधि ले, और मुझ से भेंट कर, और मेरे सतानेवालोंसे बदला ले; मुझे अपनी सहनशक्ति में दूर मत करो; जान लो कि तेरे निमित्त मुझे ताड़ना मिली है।
16 तेरे वचन मिले, और मैं ने उनको खा लिया; और तेरा वचन मेरे मन का आनन्द और आनन्द था; क्योंकि हे सेनाओं के परमेश्वर यहोवा, मैं तेरे नाम से पुकारा जाता हूं।
17 मैं ठट्ठा करनेवालोंकी सभा में न बैठा, और न आनन्द किया; मैं तेरे हाथ के कारण अकेला बैठा हूं; क्योंकि तू ने मुझे क्रोध से भर दिया है।
18 क्यों मेरी पीड़ा सदा बनी रहती है, और मेरा घाव, जो चंगा होने से इन्कार करता है, लाइलाज क्यों है? क्या तू मेरी दृष्टि में झूठा, और जल की नाईं नाईं ठहरेगा?
19 इसलिथे यहोवा योंकहता है, कि यदि तू लौट आए, तो मैं तुझे फिर ले आऊंगा, और तू मेरे साम्हने खड़ा रहेगा; और यदि तू व्यर्थ में से अनमोल वस्तु निकाल ले, तो मेरे मुंह के समान ठहरेगा; वे तेरी ओर फिरें; परन्तु तू उनके पास न लौट।
20 और मैं तुझे इन लोगोंके लिथे पीतल की गढ़ी हुई शहरपनाह बनाऊंगा; और वे तुझ से लड़ेंगे, परन्तु तुझ पर प्रबल न होंगे; क्योंकि मैं तेरा उद्धार करने और तुझे छुड़ाने के लिथे तेरे संग हूं, यहोवा की यही वाणी है।
21 और मैं तुझे दुष्टोंके हाथ से छुड़ाऊंगा, और उस भयानक के हाथ से तुझे छुड़ाऊंगा।

 

अध्याय 16

नबी यहूदियों के विनाश को दिखाता है - उनकी कैद से वापसी।

1 यहोवा का यह वचन भी मेरे पास पहुंचा, कि,
2 इस स्यान में न तो तुम को ब्याह करना, और न बेटे बेटियां उत्पन्न करना।
3 क्योंकि यहोवा इस स्थान में उत्पन्न हुए पुत्रों और पुत्रियों के विषय में, और उनकी माताओं के विषय में, जिन्होंने उन्हें जन्म दिया, और उनके पूर्वजों के विषय में जो इस देश में उत्पन्न हुए थे, यों कहता है;
4 वे घोर मृत्यु से मरेंगे; वे विलाप न करें; न तो वे दफनाए जाएंगे; परन्तु वे पृय्वी के ऊपर गोबर के समान हों; और वे तलवार, और अकाल से नाश किए जाएंगे; और उनकी लोथें आकाश के पझियों, और पृय्वी के पशुओं का मांस होंगी।
5 क्योंकि यहोवा योंकहता है, कि शोक करनेवाले के घर में प्रवेश न करना, और न विलाप करने को जाना, और न उन पर विलाप करना; क्योंकि यहोवा की यह वाणी है, कि मैं ने अपक्की शान्ति इन लोगोंसे छीन ली है, यहां तक कि करूणा और करूणा भी मैं ने छीन ली है।
6 बड़े क्या छोटे इस देश में मरेंगे; वे न गाड़े जाएंगे, और न मनुष्य उनके लिथे विलाप करेंगे, और न अपने आप को काटेंगे, और न उनके लिथे अपने को गंजा करेंगे।
7 और न लोग अपके अपके लिथे अपके अपके अपके अपके अपके अपके लिथे अपके अपके अपके लिथे अपके अपके लिथे अपके अपके लिथे अपके लिथे अपके अपके लिथे अपके अपके लि‍य अपके अपके लिथे अपके अपके लिथे अपके अपके अपके लि‍ म अपके अपके अपके अपके लि मे ना य करे; न तो लोग उन्हें अपने पिता के लिए पीने के लिए सांत्वना का प्याला दें, न ही उनकी माँ के लिए।
8 और जेवनार के घर में उनके संग खाने-पीने के लिथे न जाना।
9 क्योंकि सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर यों कहता है; देख, मैं तेरी दृष्टि में इस स्थान से, और तेरे दिनोंमें, हर्ष का शब्द, और हर्ष का शब्द, दूल्हे का शब्द, और दुल्हन का शब्द बंद कर दूंगा।
10 और ऐसा होगा, जब तू इन लोगोंको ये सब बातें दिखायेगा, और वे तुझ से कहेंगे, यहोवा ने यह सब बड़ी विपत्ति हम पर क्योंकर दी है? या हमारा अधर्म क्या है? वा हमारा पाप क्या है जो हम ने अपके परमेश्वर यहोवा के विरुद्ध किया है?
11 तब तू उन से कहना, यहोवा की यह वाणी है, कि तेरे पुरखाओं ने मुझे त्याग दिया है, और पराए देवताओं के पीछे चलकर उनकी उपासना की है, और उनकी उपासना की है, और मुझे त्याग दिया है, और मेरी व्यवस्या का पालन नहीं किया है;
12 और तुम ने अपके पुरखाओं से भी बुरा काम किया है; क्योंकि देखो, तुम सब उसके बुरे मन की कल्पना के अनुसार चलते हो, कि वे मेरी न सुनें;
13 इसलिथे मैं तुम को इस देश से निकालकर ऐसे देश में डाल दूंगा जिसे तुम नहीं जानते, और न तुम को और न तुम्हारे पुरखाओं को; और वहां रात दिन दूसरे देवताओं की उपासना करना; जहाँ मैं तुम पर कृपा नहीं करूँगा।
14 इसलिथे देखो, यहोवा की यह वाणी है, ऐसे दिन आते हैं, कि फिर यह न कहा जाएगा, कि यहोवा जीवित है, जो इस्राएलियोंको मिस्र देश से निकाल ले आया;
15 परन्तु यहोवा जीवित है, जो इस्राएलियोंको उत्तर के देश से, और उन सब देशोंसे जहां उस ने उनको भगाया या, फिर ले आया; और मैं उनको उनके देश में फिर ले आऊंगा जो मैं ने उनके पूर्वजोंको दिया था।
16 यहोवा की यह वाणी है, देख, मैं बहुत से मछुआरे बुलवाऊंगा, और वे उनको मछुवाएंगे; और उसके पीछे मैं बहुत से शिकारियों को बुलवाऊंगा, और वे सब पहाड़ पर से, और सब पहाड़ी पर, और चट्टानों की दरारोंमें से उनका अहेर करेंगे।।
17 क्योंकि मेरी दृष्टि उनकी सब गति पर लगी रहती है; वे मेरे साम्हने से छिपे नहीं, और न उनका अधर्म मेरी आंखोंसे छिपा है।
18 और पहिले मैं उनके अधर्म का और उनके पाप का दुगना पलटा दूंगा; क्योंकि उन्होंने मेरे देश को अशुद्ध किया है, उन्होंने मेरे निज भाग को अपक्की घिनौनी और घिनौनी वस्तुओं की लोथों से भर दिया है।
19 हे यहोवा, मेरा बल, और मेरा गढ़, और दु:ख के दिन में मेरा गढ़, पृय्वी की छोर से अन्यजाति तेरे पास आएंगे, और कहेंगे, निश्चय हमारे पुरखाओं को झूठ, व्यर्थता, और उन वस्तुओं का उत्तराधिकार मिला है जिनमें कोई लाभ नहीं है।
20 क्या कोई मनुष्य अपके लिये देवता बनाएगा, और वे देवता नहीं?
21 इसलिथे सुन, मैं एक बार उन्हें यह बताऊंगा, कि मैं उन्हें अपके हाथ और अपके पराक्रम का ज्ञान कराऊंगा; और वे जान लेंगे कि मेरा नाम यहोवा है।

 

अध्याय 17

मनुष्य पर भरोसा शापित है, परमेश्वर में आशीष है — परमेश्वर का उद्धार — सब्त का दिन।

1 यहूदा का पाप लोहे की कलम और हीरे की नोक से लिखा हुआ है; वह उनके हृदय की मेज पर, और तुम्हारी वेदियों के सींगों पर खुदा हुआ है;
2 और उनकी सन्तान अपक्की वेदियोंऔर उपवनोंको, जो ऊंचे पहाड़ोंपर हरे वृक्षोंके पास हैं, स्मरण करते हैं।
3 हे मेरे पहाड़ जो मैदान में है, मैं तेरा धन और तेरा सब धन लूट के लिथे, और तेरे पाप के ऊंचे स्यान तेरे सब सिवाने पर दूंगा।
4 और तू अपके निज भाग से जो मैं ने तुझे दिया है, छोड़ देना; और जिस देश को तू नहीं जानता उस में मैं तुझे तेरे शत्रुओं के आधीन कराऊंगा; क्‍योंकि तुम ने मेरे कोप में आग सुलगाई है, जो सदा तक जलती रहेगी।
5 यहोवा यों कहता है; शापित हो वह मनुष्य जो मनुष्य पर भरोसा करे, और अपना हाथ मांस बनाए; और वह मनुष्य जिसका मन यहोवा से हट गया हो।
6 क्‍योंकि वह जंगल के स्‍थिर के समान हो जाएगा, और कब भला होगा, यह देखने न पाएगा; परन्तु जंगल के सूखे स्थानों में, और खारे देश में बसे रहेंगे, और बसे हुए नहीं होंगे।
7 क्या ही धन्य है वह पुरुष जो यहोवा पर भरोसा रखता है, और जिसकी आशा यहोवा है।
8 क्योंकि वह उस वृक्ष के समान होगा जो जल के किनारे लगाया गया है, और उसकी जड़ें महानद के पास फैलती हैं, और जब गर्मी आती है तब वह नहीं देखेगा, परन्तु उसका पत्ता हरा रहेगा; और सूखे के वर्ष में चौकस न रहना, और फल देने से न रुकना।
9 मन सब वस्तुओं से अधिक धोखा देने वाला, और अति दुष्ट है; इसे कौन जान सकता है?
10 मैं यहोवा मन की जांच करता हूं, मैं लगाम को परखता हूं, कि हर एक मनुष्य को उसकी चालचलन और उसके कामोंके अनुसार फल दे।
11 जैसे तीतर अण्डों पर बैठता है, और उनसे नहीं खाता; इसलिथे जो धनी न हो, परन्तु अपके दिनोंके बीच में उसको छोड़ दे, और उसका अन्त मूर्ख ठहरेगा।।
12 हमारे पवित्रस्थान का स्थान आरम्भ से ही एक महिमामय ऊंचा सिंहासन है।
13 हे इस्राएल के आशा यहोवा, जितने तुझे छोड़ गए हैं वे सब लज्जित होंगे, और जो मेरे पास से चले जाते हैं वे पृय्वी पर लिखे जाएंगे, क्योंकि उन्होंने जीवन के जल के सोते यहोवा को त्याग दिया है।
14 हे यहोवा, मुझे चंगा कर, तो मैं चंगा हो जाऊंगा; मुझे बचा ले, तो मैं उद्धार पाऊंगा; क्योंकि तू मेरी स्तुति है।
15 देखो, वे मुझ से कहते हैं, यहोवा का वचन कहां है ? इसे अब आने दो।
16 मैं ने तेरे पीछे चलने में फुर्ती नहीं की; न तो मैं ने शोक का दिन चाहा है; आप जानते हैं; जो मेरे होठों से निकला वह तेरे साम्हने था।
17 मेरे लिये भय न हो; तू बुराई के दिन में मेरी आशा है।
18 जो मुझे सताते हैं, वे लज्जित हों, परन्तु मेरी निन्दा न हो; वे विस्मित हों, तौभी मैं निराश न होऊं; उन पर विपत्ति का दिन लाओ, और उन्हें दुगने विनाश से नाश करो।
19 यहोवा ने मुझ से योंकहा; जाकर प्रजा के लोगों के फाटक में खड़े हो जाओ, जिस से यहूदा के राजा भीतर आते हैं, और जिस से वे निकलते हैं, और यरूशलेम के सब फाटकों में;
20 और उन से कहो, हे यहूदा के राजाओं, और सारे यहूदा के लोगों, और यरूशलेम के सब निवासियों, जो इन फाटकोंसे प्रवेश करते हैं, तुम यहोवा का वचन सुनो;
21 यहोवा यों कहता है; अपक्की चौकसी करना, और सब्त के दिन कोई बोझ न उठाना, और न यरूशलेम के फाटकोंसे भीतर ले जाना;
22 सब्त के दिन न तो अपके घर में कोई बोझ उठाना, और न कोई काम करना, वरन सब्त के दिन को पवित्र करना, जैसा मैं ने तुम्हारे पुरखाओं को दी थी।
23 परन्तु उन्होंने न माना, और न कान लगाया, वरन अपना गला ऐसा दृढ़ किया कि न सुनें, और न उपदेश पाएं।
24 और यहोवा की यह वाणी है, कि यदि तुम यत्न से मेरी सुनोगे, तो सब्त के दिन इस नगर के फाटकोंमें से कोई बोझ न डालना, परन्तु विश्रामदिन को पवित्र मानना, कि उस में कोई काम न करना;
25 तब राजा और हाकिम जो रथों और घोड़ों पर सवार होकर दाऊद की गद्दी पर विराजमान हैं, वे इस नगर के फाटकों में प्रवेश करेंगे, और उनके हाकिम, यहूदा के लोग, और यरूशलेम के निवासी; और यह नगर सदा बना रहेगा।
26 और वे यहूदा के नगरों से, और यरूशलेम के आस पास के स्थानों से, और बिन्यामीन के देश से, और अराबा, और पहाड़ों, और दक्खिन से होमबलि, और मेलबलि, और अन्नबलि ले आएंगे, , और धूप, और स्तुतिरूपी बलिदानों को यहोवा के भवन में लाना।
27 परन्तु यदि तुम सब्त के दिन को पवित्र मानने, और बोझ न उठाने की मेरी न मानो, और विश्रामदिन को यरूशलेम के फाटकोंसे भीतर प्रवेश न करो; तब मैं उसके फाटकों में आग लगाऊंगा, और वह यरूशलेम के महलोंको भस्म कर देगी, और वह बुझने न पाएगी।

 

अध्याय 18

कुम्हार का प्रकार - यिर्मयाह अपने षड्यंत्रकारियों के खिलाफ प्रार्थना करता है।

1 वह वचन जो यहोवा की ओर से यिर्मयाह के पास पहुंचा, और कहा,
2 उठ, और कुम्हार के घर जा, और वहां मैं तुझे अपके वचन सुनाऊंगा।

3 तब मैं कुम्हार के घर गया, और क्या देखा, कि वह पहियों पर काम कर रहा है।
4 और जो पात्र उस ने मिट्टी का बनाया, वह कुम्हार के हाथ में सड़ गया; इसलिथे उस ने उसे फिर से एक और पात्र बनाया, जैसा कुम्हार को बनाना अच्छा लगा।
5 तब यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि
6 हे इस्राएल के घराने, क्या मैं इस कुम्हार की नाई तेरे साथ नहीं कर सकता? प्रभु कहते हैं। देख, जैसे मिट्टी कुम्हार के हाथ में होती है, वैसे ही हे इस्राएल के घराने, तुम मेरे हाथ में हो।
7 किस घड़ी मैं किसी जाति, और राज्य के विषय में कहूं, कि उसको उखाड़ फेंकूं, और गिरा दूं, और नाश कर दूं;
8 यदि वह जाति, जिसके विरुद्ध मैं ने चर्चा की है, अपनी बुराई से फिरे, तो जो विपत्ति मैं ने उन से करने की सोची थी, उसे मैं रोकूंगा।
9 और मैं किस घड़ी किसी जाति, और राज्य के विषय में कहूं, कि उसको बनाऊं, और लगाऊं;
10 यदि वह मेरी दृष्टि में बुरा करे, और मेरी बात न माने, तो जिस भलाई से मैं ने कहा या, कि मैं उनका भला करूंगा, उसे मैं रोकूंगा।
11 सो अब जाकर यहूदा के पुरूषोंऔर यरूशलेम के निवासियोंसे कह, यहोवा योंकहता है; देख, मैं तेरे विरुद्ध बुराई गढ़ता हूं, और तेरे विरुद्ध युक्ति युक्‍त करता हूं; अब तुम सब को उसके बुरे मार्ग से लौटा दो, और अपनी चालचलन और अपने काम अच्छे करो।
12 उन्होंने कहा, कोई आशा नहीं; परन्‍तु हम अपक्की युक्ति पर चलेंगे, और हम सब उसके बुरे मन की कल्पना करेंगे।
13 इसलिथे यहोवा योंकहता है; अब उन अन्यजातियों में से पूछो, जिन्होंने ऐसी बातें सुनी हैं; इस्राएल की कुँवारी ने बहुत ही भयानक काम किया है।
14 क्या तू लबानोन के खेतों की हिम को न छोड़ेगा; क्या चट्टान से दूसरे स्थान से आने वाला ठण्डा जल त्याग न किया जाए?
15 क्योंकि मेरी प्रजा ने मुझे भुला दिया है, उन्होंने व्यर्थ के लिये धूप जलाई है, और उन्हें अपने पथोंमें प्राचीन पथोंसे ठोकर खिलाई है, और पथों पर चलते हैं, ऐसा नहीं है;
16 ताकि उनका देश उजाड़ हो जाए, और वे सदा ताली बजाते रहें; जो कोई उसके पास से गुजरेगा वह चकित होगा, और अपना सिर हिलाएगा।
17 मैं उनको पुरवाई की नाईं शत्रु के साम्हने तितर-बितर करूंगा; मैं उनकी विपत्ति के दिन उनकी पीठ दिखाऊंगा, न कि चेहरा।
18 तब उन्होंने कहा, आओ, हम यिर्मयाह के विरुद्ध युक्ति करें; क्‍योंकि न तो याजक की ओर से व्‍यवस्‍था, और न बुद्धिमानोंकी सम्मति, और न भविष्यद्वक्ता का वचन नाश न होगा। आओ, हम उसे जीभ से मारें, और उसकी किसी बात पर ध्यान न दें।
19 हे यहोवा, मेरी सुन ले, और जो मुझ से झगड़ते हैं, उनकी बात सुन।
20 क्या भलाई का बदला बुराई का होगा? क्‍योंकि उन्‍होंने मेरे प्राण के लिथे गड्ढा खोदा है। स्मरण रख कि मैं तेरे साम्हने खड़ा हुआ हूं, कि मैं उनका भला करूं, और तेरा कोप उन पर से दूर करूं।
21 इसलिथे उनके लड़केबालोंको अकाल के हाथ में कर दे, और उनका लोहू तलवार के बल से उंडेल दे; और उनकी पत्नियां अपके सन्तान से वंचित रहें, और विधवा हों; और उनके आदमियोंको मार डाला जाए; उनके जवान युद्ध में तलवार से मारे जाएं।
22 जब तू उन पर एक दल चढ़ाई करेगा, तब उनके घरोंमें से दोहाई सुनाई देगी; क्योंकि उन्होंने मुझे पकड़ने के लिये गड्ढा खोदा, और मेरे पांवोंके लिथे फन्दे छिपाए हैं।
23 तौभी, हे यहोवा, तू ने मुझ से घात करने की उनकी सब युक्ति को जान लिया है; उनका अधर्म न क्षमा करना, और न उनका पाप अपके साम्हने से मिटा देना, वरन वे तेरे साम्हने उलट दिए जाएं; अपने क्रोध के समय में उनके साथ इस प्रकार व्यवहार करें।

 

अध्याय 19

कुम्हार के बर्तन को तोड़ने का प्रकार — यहूदियों का उजाड़।

1 यहोवा योंकहता है, जा, और कुम्हार की मिट्टी का कटोरा ले, और प्रजा के पुरनियोंऔर याजकोंके पुरनियोंसे ले ले;
2 और हिन्नोम के पुत्र की तराई में जो पूर्व फाटक के द्वार पर है, वहां जाकर उन बातोंका प्रचार जो मैं तुझ से कहूं;
3 और कह, हे यहूदा के राजाओं, हे यरूशलेम के निवासियों, यहोवा का वचन सुनो; सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर यों कहता है; देख, मैं इस स्थान पर विपत्ति लाऊंगा, जो कोई सुनेगा, उसके कान झुनझुने लगेंगे।
4 क्योंकि उन्होंने मुझे त्याग दिया है, और इस स्थान को अलग कर दिया है, और इसमें अन्य देवताओं के लिए धूप जला दी है, जिन्हें न तो वे और न ही उनके पिता जानते हैं, और न ही यहूदा के राजा, और इस स्थान को निर्दोषों के खून से भर दिया है;
5 उन्होंने बाल के ऊंचे स्यान भी बनाए हैं, कि अपके पुत्रोंको बाल के होमबलि के लिथे आग में फूंक दें, जिसकी मैं ने आज्ञा न दी, और न कहा, और न मेरे मन में आया;
6 इसलिथे, यहोवा की यह वाणी है, ऐसे दिन आते हैं, कि यह स्थान फिर तोपेत न कहलाएगा, और न हिन्नोम के पुत्र की तराई, वरन वध की तराई कहलाएगी।
7 और मैं इस स्थान में यहूदा और यरूशलेम की सम्मति को व्यर्थ ठहराऊंगा; और मैं उनको उनके शत्रुओं, और उनके प्राण के खोजियोंके हाथ से तलवार से मार डालूंगा; और मैं उनकी लोथों को आकाश के पझियों, और पृय्वी के पशुओं का मांस होने के लिथे दूंगा।
8 और मैं इस नगर को उजाड़ और फूंक-फूंक कर कर दूंगा; जो कोई उस से होकर जाए वह उस की सब विपत्तियों के कारण चकित और फुफकारेगा।
9 और मैं उनको उनके पुत्रोंका मांस और उनकी पुत्रियोंका मांस खाने को दूंगा, और वे उसके मित्र का मांस उस घेरे में और तंगी में खाएंगे, जिस से उनके शत्रु और उनके प्राण के खोजी उन्हें मार डालेंगे। .
10 तब उस पात्र को अपके संग चलनेवालोंके साम्हने तोड़ देना,
11 और उन से कहो, सेनाओं का यहोवा योंकहता है; वैसे ही मैं इस प्रजा को और इस नगर को वैसे ही तोड़ दूंगा जैसे कोई कुम्हार के उस पात्र को तोड़ देता है, जो फिर कभी नहीं भर सकता; और वे उनको तोपेत में मिट्टी देंगे, जब तक कि उन्हें मिट्टी देने का स्थान न रहे।
12 यहोवा की यह वाणी है, कि मैं इस स्यान से और उसके निवासियोंसे ऐसा करूंगा, और इस नगर को तोपेत बना दूंगा;
13 और यरूशलेम के घराने, और यहूदा के राजाओं के घराने तोपेत के स्थान के समान अशुद्ध हो जाएंगे, क्योंकि जिन घरोंकी छतोंपर उन्होंने आकाश की सारी सेना के लिथे धूप जलाई, और अर्घ्य चढ़ाए हैं, वे सब तोपेत के स्थान की नाईं अशुद्ध हो जाएंगे। अन्य देवताओं को।
14 तब यिर्मयाह तोपेत से आया, जहां यहोवा ने उसे भविष्यद्वाणी करने को भेजा या; और वह यहोवा के भवन के आंगन में खड़ा होकर सब लोगोंसे कहने लगा,
15 सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर यों कहता है; देख, मैं इस नगर और उसके सब नगरोंपर वह सब विपत्ति लाऊंगा, जो मैं ने उसके विरुद्ध कह दी हैं, क्योंकि उन्होंने अपने हठोंको कठोर कर लिया है, कि वे मेरी बातें न सुनें।

 

अध्याय 20

पशूर का भयानक कयामत - यिर्मयाह शिकायत करता है।

1 इम्मेर याजक का पुत्र पशूर, जो यहोवा के भवन का प्रधान हाकिम या, यह सुनकर कि यिर्मयाह ने ये बातें कहीं।
2 तब पशूर ने यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता को मारकर उन काठोंमें जो बिन्यामीन के ऊंचे फाटक के पास थे, जो यहोवा के भवन के पास था, धर दिया।
3 दूसरे दिन पशूर यिर्मयाह को काठ में से निकाल लाया। तब यिर्मयाह ने उस से कहा, यहोवा ने तेरा नाम पशूर नहीं, परन्तु मागोर-मिसाबीब रखा है।
4 क्योंकि यहोवा योंकहता है, कि देख, मैं तेरे लिथे और तेरे सब मित्रोंके लिथे तुझे आतंकित करूंगा; और वे अपके शत्रुओं की तलवार से मारे जाएंगे, और उस पर तेरी आंखें लगी होंगी; और मैं सारे यहूदा को बाबुल के राजा के वश में कर दूंगा, और वह उनको बन्धुआई में बाबुल में ले जाएगा, और तलवार से मार डालेगा।
5 फिर मैं इस नगर की सारी शक्ति, और उसके सब परिश्रम, और उसकी सब बहुमूल्य वस्तुओं, और यहूदा के राजाओं का सब भण्डार उनके शत्रुओं के वश में कर दूंगा, जो उन्हें लूट लेंगे, और उन्हें ले जाओ, और उन्हें बाबुल ले जाओ।
6 और हे पशूर, और अपके घर के सब रहनेवालोंको बन्धुआई में जाना; और तू बाबुल में आना, और वहां तू मर जाएगा, और तुझे और तेरे सब मित्रों समेत, जिन से तू ने झूठी भविष्यद्वाणी की या, वहीं मिट्टी दी जाएगी।
7 हे यहोवा, तू ने मुझे धोखा दिया, और मैं छल किया गया; तू मुझ से बलवन्त है, और प्रबल हुआ है; मैं रोज उपहास में हूं, हर कोई मेरा मजाक उड़ाता है।
8 क्‍योंकि जब से मैं ने बातें कीं, तब से मैं ने दोहाई दी, और मैं ने उपद्रव और लूट की दोहाई दी; क्योंकि यहोवा का वचन प्रतिदिन मेरी निन्दा और ठट्ठा करता या।
9 तब मैं ने कहा, मैं उस की चर्चा न करूंगा, और न उसके नाम से फिर कुछ बोलूंगा। परन्तु उसका वचन मेरे हृदय में ऐसा था, मानो मेरी हड्डियों में धधकती हुई आग बन्द हो गई हो, और मैं धीरज से थक गया, और ठहर न सका।
10 क्योंकि मैं ने बहुतों की निन्दा सुनी है, चारों ओर भय है। रिपोर्ट करें, वे कहें, और हम इसकी रिपोर्ट करेंगे। मेरे सब परिचितों ने मेरे रुकने की ओर देखते हुए कहा, वह फुर्ती से फुसलाएगा, और हम उस पर प्रबल होंगे, और हम उस से बदला लेंगे।
11 परन्‍तु यहोवा मेरे संग एक भयानक बलवन्त के समान रहता है; इस कारण मेरे सतानेवाले ठोकर खाएंगे, और वे प्रबल न होंगे; वे बहुत लज्जित होंगे; क्योंकि वे सफल नहीं होंगे; उनके चिरस्थायी भ्रम को कभी नहीं भुलाया जाएगा।
12 परन्तु, हे सेनाओं के यहोवा, जो धर्मियोंको परखता है, और लगाम और मन को देखता है, मैं उन से अपना पलटा लेने पाऊंगा; क्‍योंकि मैं ने तेरे लिथे अपना मुकद्दमा खोल दिया है।
13 यहोवा का गीत गाओ, यहोवा की स्तुति करो; क्योंकि उस ने कंगालों के प्राण को कुकर्मियों के हाथ से छुड़ाया है।
14 शापित हो वह दिन जिस में मैं उत्पन्न हुआ; जिस दिन मेरी माता ने मुझे उत्पन्न किया वह दिन धन्य न हो।
15 शापित हो वह मनुष्य, जो मेरे पिता को यह समाचार सुनाता है, कि तेरे लिये एक बालक उत्पन्न हुआ है; उसे बहुत खुश करना।
16 और वह मनुष्य उन नगरोंके समान हो जिन्हें यहोवा ने ढा दिया, और मन फिराया नहीं; और भोर को उसकी दोहाई, और दोपहर के समय उसकी ललकार सुने;
17 क्‍योंकि उस ने मुझे गर्भ से ही घात नहीं किया; वा मेरी माता मेरी कब्र ठहरती, और उसका गर्भ सदा मेरे साथ महान बना रहता है।
18 क्‍यों मैं गर्भ में से इसलिये निकला, कि परिश्र्म और दु:ख को देखने के लिथे मेरे दिन लज्जित हो जाएं?

 

अध्याय 21

यिर्मयाह ने एक कठिन घेराबंदी और दयनीय कैद की भविष्यवाणी की।

1 जब सिदकिय्याह राजा ने मल्किय्याह के पुत्र पशूर और मासेयाह याजक के पुत्र सपन्याह के पास यह कहला भेजा, कि यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुंचा,
2 हे हमारे लिथे यहोवा से पूछ, मैं तुझ से बिनती करता हूं; क्योंकि बाबुल का राजा नबूकदनेस्सर हम से युद्ध करता है; यदि ऐसा हो, कि यहोवा अपके सब आश्‍चर्यकर्मोंके अनुसार हम से ऐसा व्यवहार करे, कि वह हमारे पास से चढ़ जाए।
3 तब यिर्मयाह ने उन से कहा, तुम सिदकिय्याह से यों कहना;
4 इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है; देख, जो हथियार तेरे हाथ में हैं, उन को मैं लौटा दूंगा, और उन से तुम बाबुल के राजा और कसदियोंसे जो तुम को शहरपनाह के बिना घेर लेते हो, और मैं उनको इस नगर के बीच में इकट्ठा करूंगा।
5 और मैं आप ही विस्तारित हाथ और बलवन्त भुजा से, यहां तक कि क्रोध, और जलजलाहट, और बड़े जलजलाहट में, तुझ से लड़ूंगा।
6 और मैं क्या मनुष्य क्या पशु इस नगर के निवासियोंको मारूंगा; वे बड़ी महामारी से मरेंगे।
7 और इसके बाद, यहोवा की यह वाणी है, मैं यहूदा के राजा सिदकिय्याह, और उसके कर्मचारियों, और लोगों को, और जो लोग इस नगर में रह गए हैं, उन्हें मरी से, तलवार से, और अकाल से, नबूकदनेस्सर के हाथ में कर दूंगा बाबुल का राजा, और उनके शत्रुओं, और उनके प्राण के खोजियों के हाथ में; और वह उन्हें तलवार से मार डालेगा; वह उन्हें न बख्शेगा, और न तरस खाएगा, और न दया करेगा।
8 और इन लोगोंसे तू कहना, यहोवा योंकहता है; देख, मैं ने तेरे आगे जीवन का मार्ग और मृत्यु का मार्ग ठहराया है।
9 जो कोई इस नगर में रहे, वह तलवार, और अकाल, और मरी से मारा जाएगा; परन्तु जो कोई निकलकर उन कसदियोंके हाथ जो तुझे घेरे हुए हैं, गिर जाए, वह जीवित रहेगा, और उसका प्राण उसके लिथे अहेर किया जाएगा।
10 क्योंकि मैं ने इस नगर के साम्हने भलाई के लिथे नहीं, वरन बुराई ही की है, यहोवा की यही वाणी है; वह बाबुल के राजा के हाथ में कर दिया जाएगा, और वह उसे आग में झोंक देगा।
11 और यहूदा के राजा के घराने को छूकर कह, कि यहोवा का वचन सुनो;
12 हे दाऊद के घराने, यहोवा योंकहता है; भोर को न्याय करना, और लूटे हुए को अन्धेर करनेवाले के हाथ से छुड़ाना, ऐसा न हो कि मेरा जलजलाहट आग की नाईं भड़क जाए, और ऐसा न हो कि तेरे कामोंके कारण कोई उसे न बुझा सके।
13 देख, हे तराई के निवासी, और तराई की चट्टान, मैं तेरे विरुद्ध हूं, यहोवा की यही वाणी है; कौन कहता है, कौन हम पर चढ़ाई करेगा? वा हमारे निवासों में कौन प्रवेश करेगा?
14 परन्तु मैं तेरे कामोंके अनुसार तुझे दण्ड दूंगा, यहोवा की यही वाणी है; और मैं उसके जंगल में आग लगाऊंगा, और वह चारोंओर का सब कुछ भस्म कर देगी।

 

अध्याय 22

पश्चाताप के लिए प्रोत्साहन - शल्लूम, यहोयाकीम और कोन्याह का न्याय।

1 यहोवा यों कहता है; यहूदा के राजा के भवन में जा, और वहां यह वचन कह,
2 और कह, हे यहूदा के राजा, यहोवा का वचन सुन, जो दाऊद की गद्दी पर विराजमान है, तू और तेरे कर्मचारी और तेरी प्रजा जो इन फाटकोंसे प्रवेश करती है;
3 यहोवा यों कहता है; न्याय और धर्म का पालन करो, और लूटे हुओं को अन्धेर करनेवाले के हाथ से छुड़ाओ; और न अन्धेर करना, और न परदेशी, न अनाथ, और न विधवा पर उपद्रव करना, और न निर्दोष का लोहू इस स्यान में बहा देना।
4 क्‍योंकि यदि तुम सचमुच ऐसा काम करो, तो उस भवन के फाटकोंके पास से राजा दाऊद की गद्दी पर विराजमान, रथोंऔर घोड़ोंपर सवार होकर, और अपके सेवकों, और प्रजा समेत भीतर प्रवेश करेंगे।
5 परन्तु यदि तुम इन वचनों को न सुनोगे, तो यहोवा की यह वाणी है, कि मैं अपक्की शपय खाकर कहता हूं, कि यह भवन उजाड़ हो जाएगा।
6 क्योंकि यहोवा यहूदा के राजभवन से यों कहता है; तू मेरे लिथे गिलाद, और लबानोन का प्रधान है; तौभी निश्चय मैं तुझे जंगल और ऐसे नगर बनाऊंगा जो बसे हुए न हों।

7 और मैं अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके साम्हने नाश करनेवाले तैयार करूंगा; और वे तेरे उत्तम देवदारोंको काट डालेंगे, और आग में झोंक देंगे।
8 और बहुत सी जातियां इस नगर के पास से होकर जाएंगी, और अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की बातें कहेंगी, कि यहोवा ने इस बड़े नगर से ऐसा क्योंकरा?
9 तब वे उत्तर देंगे, कि उन्होंने अपके परमेश्वर यहोवा की वाचा को तोड़ दिया, और पराए देवताओं को दण्डवत किया, और उनकी उपासना की।
10 मरे हुओं के लिथे मत रोओ, और न उस से विलाप करो; परन्‍तु जो चला जाता है उसके लिथे रोओ; क्योंकि वह फिर न लौटेगा, और न अपके देश को देखेगा।
11 क्योंकि यहूदा के राजा योशिय्याह के पुत्र शल्लूम को यहोवा यों कहता है, जो उसके पिता योशिय्याह के स्थान पर राज्य करता या, जो इस स्थान से निकला या; वह फिर वहां न लौटेगा;
12 परन्तु जिस स्यान में वे उसे बन्धुआई में ले आए हैं उसी में वह मर जाएगा, और इस देश को फिर देखने न पाएगा।
13 हाय उस पर जो अपके घर को अधर्म से, और अपक्की कोठरियोंको अन्याय से बनाता है; जो बिना मजदूरी के अपने पड़ोसी की सेवा करता है, और उसे उसके काम के लिए नहीं देता है;
14 उस ने कहा, मैं अपके लिये एक चौड़ा घर और बड़ी कोठरियां बनाऊंगा, और उसके खिड़कियो को काट डालूंगा; और उसकी छत देवदारु से, और सिन्दूर से रंगी हुई है।
15 क्या तू राज्य करेगा, क्योंकि तू देवदार के वश में है? क्या तेरे पिता ने खाया-पिया, और न्याय और न्याय नहीं किया, और तब उसका भला हुआ?
16 उसने कंगालों और दरिद्रों का न्याय किया; तब उसका भला हुआ; क्या यह मुझे जानने के लिए नहीं था? प्रभु कहते हैं।
17 परन्तु तेरी आंखें और तेरा मन तेरे लोभ और निर्दोष का लोहू बहाने, और अन्धेर और उपद्रव के लिथे नहीं, परन्तु करने के लिथे हैं।
18 इस कारण यहोवा यहूदा के राजा योशिय्याह के पुत्र यहोयाकीम के विषय में यों कहता है; वे उसके लिये यह कहकर विलाप न करें, कि हे मेरे भाई! या, आह बहन! वे उसके लिये यह कहकर विलाप न करें, कि हे प्रभु! या, आह उसकी महिमा!
19 वह गदहे के गाड़े जाने समेत मिट्टी दी जाएगी, और उसे खींचकर यरूशलेम के फाटकोंके पार फेंक दिया जाएगा।
20 लबानोन को जाकर दोहाई दे; और बाशान में अपना शब्द ऊंचा करो, और मार्ग में से दोहाई दो; क्योंकि तेरे सब प्रेमी नाश हो गए हैं।
21 तेरे यश के विषय में मैं ने तुझ से बातें कीं; परन्तु तू ने कहा, मैं नहीं सुनूंगा। तेरी जवानी से तेरी चाल ऐसी रही है, कि तू ने मेरी बात न मानी।
22 तेरे सब चरवाहे वायु नाश करेंगे, और तेरे प्रेमी बन्धुआई में चले जाएंगे; निश्चय तू अपनी सारी दुष्टता के कारण लज्जित और लज्जित होगा।
23 हे लबानोन के निवासी, जो देवदारों में अपना घोसला बनाता है, उस समय तू क्या ही अनुग्रहकारी होगा, जब तुझे पीड़ा होगी, और स्त्री के समान पीड़ा होगी!
24 यहोवा की यह वाणी है, मेरे जीवन की सौगन्ध, तौभी यहूदा के राजा यहोयाकीम का पुत्र कोन्याह मेरे दहिने हाथ का चिन्ह होता, तौभी मैं तुझे वहीं तोड़ देता;
25 और जो तेरे प्राण के खोजी हैं, और जिन से तू डरता है, उनके वश में मैं तुझे बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर और कसदियोंके वश में कर दूंगा।
26 और मैं तुझे और तेरी जननी माता को निकाल कर दूसरे देश में डाल दूंगा जहां तू पैदा न हुआ था; और वहां तुम मरोगे।
27 परन्तु जिस देश में वे लौटना चाहते हैं, वहां वे फिर न लौटेंगे।
28 क्या यह कोन्याह तुच्छ टूटी हुई मूरत है? क्या वह ऐसा पात्र है जिसमें सुख नहीं है? वे उसे और उसके वंश को क्यों निकाल कर उस देश में डाल दिए जाते हैं जिसे वे नहीं जानते?
29 हे पृय्वी, हे पृय्वी, यहोवा का वचन सुन।
30 यहोवा योंकहता है, इस निःसंतान मनुष्य को लिख, जो अपके दिनोंमें सुफल न होगा; क्योंकि उसके वंश में से कोई भी व्यक्ति दाऊद की गद्दी पर विराजमान होकर यहूदा में फिर राज्य करने में सफल न होगा।

 

अध्याय 23

वह एक बहाली की भविष्यवाणी करता है - मसीह शासन करेगा और उन्हें बचाएगा - झूठे भविष्यद्वक्ता।

1 हाय उन पादरियों पर जो मेरी चराई की भेड़-बकरियों को नाश और तितर-बितर करते हैं! प्रभु कहते हैं।
2 इसलिथे इस्राएल का परमेश्वर यहोवा उन पादरियोंके विषय में जो मेरी प्रजा को चराते हैं, योंकहता है; तुम ने मेरी भेड़-बकरियों को तितर-बितर कर दिया, और उन्हें भगा दिया, और उनकी सुधि नहीं ली; देख, मैं तेरे कामोंके बुरे कामोंको तुझ पर फेर दूंगा, यहोवा की यही वाणी है।
3 और मैं अपक्की भेड़-बकरियोंमें से बचे हुओं को उन सब देशोंमें से जहां मैं ने उनको भगा दिया है, इकट्ठा करूंगा, और उनकी भेड़शाला में फिर ले आऊंगा; और वे फलदायी और बढ़ेंगे।
4 और मैं उनके लिये चरवाहे ठहराऊंगा, जो उनकी चरवाही करेंगे; और वे फिर न डरेंगे, और न निराश होंगे, और न उन्हें घटी होगी, यहोवा की यही वाणी है।
5 देख, यहोवा की यह वाणी है, ऐसे दिन आते हैं, कि मैं दाऊद के लिथे एक धर्मी डाली उठाऊंगा, और एक राजा राज्य करके सुफल होगा, और पृय्वी पर न्याय और न्याय का काम करेगा।
6 उसके दिनोंमें यहूदा उद्धार पाएगा, और इस्राएल निडर बसेगा; और उसका नाम यह है, जिस से वह हमारा धर्म यहोवा कहलाएगा।
7 इसलिथे, यहोवा की यह वाणी है, ऐसे दिन आते हैं, कि वे फिर यह न कहें, कि यहोवा जीवित है, जिस ने इस्राएलियोंको मिस्र देश से निकाल लाया;
8 परन्तु यहोवा जीवित है, जिस ने इस्राएल के घराने के वंश को उत्तर देश से, और उन सब देशोंमें जहां मैं ने उनको भगाया या, ले आया या; और वे अपके ही देश में बसेंगे।
9 मेरा मन भविष्यद्वक्ताओं के कारण टूट गया है; मेरी सारी हड्डियाँ काँप जाती हैं; मैं यहोवा के कारण, और उसकी पवित्रता के वचनों के कारण, शराबी के समान, और उस मनुष्य के समान हूं, जिस पर दाखमधु ने जीत हासिल कर ली है।
10 क्योंकि देश व्यभिचारियों से भरा हुआ है; क्योंकि शपथ खाकर देश विलाप करता है; जंगल के मनभावने स्थान सूख गए हैं, और उनका मार्ग बुरा है, और उनका बल ठीक नहीं है।
11 क्योंकि भविष्यद्वक्ता और याजक दोनों ही अपवित्र हैं; हाँ, मैं ने अपने घर में उनकी दुष्टता पाई है, यहोवा की यही वाणी है।
12 इस कारण उनका मार्ग अन्धकार में फिसलन भरा मार्ग होगा; वे उस पर चढ़कर उस में गिर पड़ेंगे; क्योंकि उनके दण्ड का वर्ष मैं उन पर विपत्ति डालूंगा, यहोवा की यही वाणी है।
13 और मैं ने शोमरोन के भविष्यद्वक्ताओं में मूढ़ता देखी है; उन्होंने बाल में भविष्यद्वाणी की, और मेरी प्रजा इस्राएल को भटका दिया।
14 मैं ने यरूशलेम के भविष्यद्वक्ताओं में भी एक भयानक बात देखी है; वे व्यभिचार करते हैं, और झूठ पर चलते हैं; वे कुकर्मियों के हाथ भी दृढ़ करते हैं, ऐसा न हो कि कोई अपक्की दुष्टता से फिरे; वे सब मेरे लिये सदोम के समान, और उसके निवासी अमोरा के समान हैं।
15 इस कारण सेनाओं का यहोवा भविष्यद्वक्ताओं के विषय में यों कहता है; देख, मैं उनको कड़वे की लकड़ी खिलाऊंगा, और पित्त का जल पिलाऊंगा; क्योंकि यरूशलेम के भविष्यद्वक्ताओं की ओर से सारे देश में अपवित्रता फैल गई है।
16 सेनाओं का यहोवा यों कहता है, कि जो भविष्यद्वक्ता तुम से भविष्यद्वाणी करते हैं, उन की बातों को मत सुनो; वे तुम्हें व्यर्थ बनाते हैं; वे अपके मन का दर्शन बोलते हैं, न कि यहोवा के मुंह से।
17 जो मेरा तिरस्कार करते हैं, वे अब भी उन से कहते हैं, कि यहोवा ने कहा है, कि तुम को शान्ति मिलेगी; और जितने अपके मन की कल्पना पर चलते हैं उन से वे कहते हैं, कि तुम पर कोई विपत्ति न पड़ेगी।
18 क्‍योंकि कौन यहोवा की सम्मति पर खड़ा हुआ है, और उस ने उसका वचन देखा और सुना है? किस ने उसके वचन को चिन्हित करके सुना है?
19 देख, यहोवा का एक बवण्डर जलजलाहट के साथ, और एक भयंकर बवण्डर भी निकल गया है; वह दुष्टों के सिर पर बुरी तरह गिरेगा।
20 यहोवा का कोप उस समय तक न लौटेगा, जब तक वह पूरा न कर ले, और अपने मन की बातें पूरी न कर ले; अन्त के दिनों में तुम इस पर पूरी तरह विचार करना।
21 मैं ने इन भविष्यद्वक्ताओं को नहीं भेजा, तौभी वे दौड़े चले आए; मैंने उनसे बात नहीं की, फिर भी उन्होंने भविष्यवाणी की।
22 परन्तु यदि वे मेरी सम्मति पर स्थिर रहते, और मेरी प्रजा को मेरी बातें सुनाते, तो अपके बुरे कामोंसे और अपके बुरे कामोंसे उन्हें दूर करते।
23 क्या मैं निकट का परमेश्वर हूं, यहोवा की यही वाणी है, दूर का परमेश्वर नहीं?
24 क्या कोई अपने आप को गुप्त स्थानों में छिपा सकता है कि मैं उसे न देखूं? प्रभु कहते हैं। क्या मैं स्वर्ग और पृथ्वी को नहीं भरता? प्रभु कहते हैं।
25 मैं ने भविष्यद्वक्ताओं की बातें सुनी हैं, कि मेरे नाम से भविष्यद्वाणी झूठी है, कि मैं ने स्वप्न देखा है, मैं ने स्वप्न देखा है।
26 जो भविष्यद्वक्ता झूठी भविष्यद्वाणी करते हैं, उनके मन में यह बात कब तक बनी रहेगी? हां, वे अपने ही मन के छल के भविष्यद्वक्ता हैं;
27 जो सोचते हैं, कि मेरी प्रजा के लोग अपके उन स्वप्नोंके द्वारा मेरा नाम भूल जाएं, जो वे अपके अपके अपके अपके अपके पड़ोसी से कहते हैं, जैसे उनके बाप दादे बाल के लिथे मेरा नाम भूल गए हैं।
28 जो भविष्यद्वक्ता स्वप्न देखे, वह स्वप्न बताए; और जिसके पास मेरा वचन है, वह मेरा वचन सच्चाई से कहे। गेहूँ के लिए भूसा क्या है? प्रभु कहते हैं।
29 क्या मेरा वचन आग के समान नहीं है? प्रभु कहते हैं; और उस हथौड़े के समान जो चट्टान को टुकड़े-टुकड़े कर देता है?
30 इसलिथे देखो, यहोवा की यह वाणी है, कि मैं उन भविष्यद्वक्ताओंके विरुद्ध हूं, जो मेरे सब वचन अपके पड़ोसी से चुराते हैं।
31 देख, मैं भविष्यद्वक्ताओं के विरुद्ध हूं, यहोवा की यह वाणी है, जो अपक्की वाणी बोलते हैं, और कहते हैं, वह कहता है।
32 देखो, यहोवा की यह वाणी है, कि जो फूठे स्वप्न भविष्यद्वाणी करते हैं, और अपक्की प्रजा के लोगोंको उनके झूठ और उनके हल्केपन से भटकाते हैं, मैं उनके विरुद्ध हूं; तौभी मैं ने उन्हें न तो भेजा, और न आज्ञा दी; इस कारण इन लोगों को कुछ लाभ न होगा, यहोवा की यही वाणी है।
33 और जब यह लोग वा नबी वा याजक तुझ से पूछें, कि यहोवा का भार क्या है? तब तू उन से कहना, कैसा बोझ? मैं तुझे भी त्याग दूंगा, यहोवा की यही वाणी है।
34 और नबी, और याजक, और वे लोग जो कहेंगे, यहोवा का भार मैं उस पुरूष को और उसके घराने को भी दण्ड दूंगा।
35 तुम अपके अपके पड़ोसी से और अपके अपके भाई से योंकहना, यहोवा ने क्या उत्तर दिया है? और, यहोवा ने क्या कहा है?
36 और यहोवा के बोझ की चर्चा फिर न करना; क्योंकि हर एक का वचन उसका बोझ होगा; क्योंकि तुम ने जीवते परमेश्वर के वचनों को, जो हमारे परमेश्वर सेनाओं के यहोवा की बातें हैं, बिगाड़ दिया है।
37 तू भविष्यद्वक्ता से यों कहना, यहोवा ने तुझे क्या उत्तर दिया है? और, यहोवा ने क्या कहा है?
38 परन्तु जब से तुम कहते हो, यहोवा का भार; इसलिए यहोवा यों कहता है; क्योंकि तुम यह वचन कहते हो, कि यहोवा का भार, और मैं ने तुम्हारे पास यह कहला भेजा है, कि तुम यह न कहना, कि यहोवा का भार;
39 इसलिथे सुन, मैं तुझे पूरी रीति से भूल जाऊंगा, और उस नगर को जिसे मैं ने तुझे और तेरे पुरखाओं को दिया है, और तुझे अपके साम्हने से दूर कर दूंगा;
40 और मैं तुम्हारी सदा की निन्दा और सदा की लज्जा का कारण बनूंगा, जिसे भुलाया न जाएगा।

 

अध्याय 24

अच्छे और बुरे अंजीर के प्रकार — सिदकिय्याह का उजाड़।

1 यहोवा ने मुझे दिखाया, और क्या देखा, कि अंजीरों की दो टोकरियां यहोवा के भवन के साम्हने रखी गई हैं, उसके बाद बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ने यहूदा के राजा यहोयाकीम के पुत्र यकोन्याह और यहूदा के हाकिमोंको बन्धुआई में ले लिया या, बढ़ई और लोहार, यरूशलेम से, और उन्हें बाबुल ले आए थे।
2 एक टोकरे में पहिले पके हुए अंजीर के समान बहुत अच्छे अंजीर थे; और दूसरी टोकरी में बहुत ही नटखट अंजीर थे, जो खाए नहीं जा सकते थे, वे कितने घटिया थे।
3 तब यहोवा ने मुझ से कहा, हे यिर्मयाह, तुझे क्या दिखाई देता है? और मैं ने कहा, अंजीर; अच्छे अंजीर, बहुत अच्छे; और दुष्ट, बहुत दुष्ट, जो खाया नहीं जा सकता, वे बहुत बुरे हैं।
4 फिर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, कि,
5 इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है; इन अच्छे अंजीरों की तरह, मैं उन लोगों को स्वीकार करूंगा जो यहूदा के बंधुआई में हैं, जिन्हें मैंने इस जगह से कसदियों के देश में उनकी भलाई के लिए भेजा है।
6 क्योंकि मैं उनकी भलाई के लिथे उनकी ओर दृष्टि करूंगा, और उन्हें इस देश में फिर ले आऊंगा; और मैं उनको बनाऊंगा, और न गिराऊंगा; और मैं उन्हें रोपूंगा, और न तोड़ूंगा।
7 और मैं उनको अपके जानने का मन दूंगा, कि मैं यहोवा हूं; और वे मेरी प्रजा ठहरेंगे, और मैं उनका परमेश्वर ठहरूंगा; क्योंकि वे पूरे मन से मेरी ओर फिरेंगे।
8 और वे बुरे अंजीर के समान हैं, जो खाए नहीं जा सकते, वे भी उतने ही बुरे हैं; निश्चय यहोवा यों कहता है, मैं यहूदा के राजा सिदकिय्याह, और उसके हाकिमों, और यरूशलेम के बचे हुओं को जो इस देश में रह गए हैं, और मिस्र देश के रहनेवालोंको भी दूंगा;
9 और मैं उन्हें पृय्वी के सब राज्योंमें उनकी हानि के लिथे अपके हाथ से छुड़ाऊंगा, कि जहां कहीं मैं उनको भगाऊंगा, वहां वे नामधराई और नीतिवचन, और ताने और शाप ठहरेंगे।
10 और मैं उनके बीच तलवार, और अकाल, और मरी तब तक भेजूंगा, जब तक कि वे उस देश में से जो मैं ने उन्हें और उनके पुरखाओं को दे दिए थे, नाश न हो जाएं।

 

अध्याय 25

यिर्मयाह ने सत्तर वर्ष की बन्धुवाई, और बाबुल और सब जातियोंके नाश होने की पूर्व सूचना दी।

1 यहूदा के राजा योशिय्याह के पुत्र यहोयाकीम के चौथे वर्ष में जो यहूदा के सब लोगोंके विषय में यिर्मयाह के पास पहुंचा, वह बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर का पहिला वर्ष या;
2 वह बात जो यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता ने यहूदा के सब लोगों, और यरूशलेम के सब निवासियोंसे कही, और कहा,
3 यहूदा के राजा आमोन के पुत्र योशिय्याह के राज्य के तेरहवें वर्ष से लेकर आज के दिन तक जो तीन बीसवां वर्ष है, यहोवा का वचन मेरे पास पहुंचा, और मैं ने तुम से सवेरे उठकर बातें की हैं; परन्तु तुम ने नहीं सुना।
4 और यहोवा ने अपके सब दास भविष्यद्वक्ताओंको तुम्हारे पास भोर को उठकर भेज दिया है; तौभी तुम ने न सुनी, और न सुनने को कान लगाया।
5 उन्होंने कहा, अब तुम सब को उसके बुरे कामों, और अपने बुरे कामों से फिरो, और उस देश में रहो जिसे यहोवा ने तुम को और तुम्हारे पुरखाओं को युगानुयुग दिया है;
6 और पराए देवताओं के पीछे पीछे उनकी उपासना करने, और उन्हें दण्डवत करने को न जाना, और न अपके हाथोंके कामोंसे मुझे क्रोध दिलाना; और मैं तुझे कोई हानि नहीं पहुंचाऊंगा।
7 तौभी तुम ने मेरी नहीं सुनी, यहोवा की यही वाणी है; जिस से तुम अपके हाथोंके कामोंके द्वारा अपके अपके ही अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके कामोंके कारण मुझ को कोप ा ।
8 इस कारण सेनाओं का यहोवा यों कहता है; क्योंकि तुम ने मेरी बातें नहीं सुनीं,
9 यहोवा की यह वाणी है, कि देख, मैं उत्तर के सब कुलोंको भेजूंगा, और अपके दास बेबीलोन के राजा नबूकदनेस्सर को बुलवाऊंगा, और उन्हें इस देश पर, और इसके निवासियोंपर, और चारोंओर की इन सब जातियोंके साम्हने ले आऊंगा। , और उनका सत्यानाश कर देगा, और उन्हें विस्मय, और फुसफुसाहट, और सदा के लिये उजाड़ देगा।
10 फिर मैं उन में से आनन्द का शब्द, और आनन्द का शब्द, दूल्हे का शब्द, और दुल्हिन का शब्द, चक्की के पाटों का शब्द, और मोमबत्ती का प्रकाश दूर करूंगा।
11 और यह सारा देश उजाड़ और विस्मय का कारण होगा; और ये जातियाँ सत्तर वर्ष तक बाबुल के राजा की सेवा करेंगी।
12 और जब सत्तर वर्ष पूरे होंगे, तब मैं बाबुल के राजा और उस जाति को उनके अधर्म के कारण और कसदियोंके देश को दण्ड दूंगा, और उसे सदा उजाड़ दूंगा।
13 और जितने वचन मैं ने उसके विषय में सुनाए हैं, वे सब मैं उस देश पर लाऊंगा, वरन वह सब जो इस पुस्तक में लिखा है, जिसकी भविष्यद्वाणी यिर्मयाह ने सब जातियोंके विषय में की है।
14 क्‍योंकि बहुत सी जातियां और बड़े राजा उनकी भी सेवा करेंगे; और मैं उनको उनके कामों का, और उन्हीं के हाथों के कामों का बदला दूंगा।
15 क्योंकि इस्राएल का परमेश्वर यहोवा मुझ से यों कहता है; इस जलजलाहट का दाखरस का प्याला मेरे हाथ से ले, और उन सब जातियोंको, जिनके पास मैं तुझे भेजता हूं, पिला दे।
16 और जो तलवार मैं उनके बीच भेजूंगा, उसके कारण वे पीएंगे, और कांपेंगे, और पागल हो जाएंगे।
17 तब मैं ने यहोवा के हाथ से कटोरा लेकर उन सब जातियोंको पिलाया, जिनके पास यहोवा ने मुझे भेजा है;
18 हे यरूशलेम, और यहूदा के नगर, और उसके राजा, और उसके हाकिम, कि वे उजाड़, विस्मय, फुसफुसाहट, और शाप का कारण हों; जैसा आज है;
19 मिस्र का राजा फिरौन, और उसके कर्मचारी, और उसके हाकिम, और उसकी सारी प्रजा;
20 और सब मिले हुए लोग, और ऊस देश के सब राजा, और पलिश्तियोंके देश के सब राजा, और अशकलोन, अज्जा, एक्रोन, और अशदोद के बचे हुए लोग,
21 एदोम, मोआब, और अम्मोनियों,
22 और सोर के सब राजा, और सीदोन के सब राजा, और समुद्र के पार के द्वीपोंके सब राजा,
23 ददान, तेमा, बूज, और वे सब जो कोने के कोने में हों,
24 और अरब के सब राजा, और जंगल में रहनेवाले मिले जुले लोगोंके सब राजा,
25 और जिम्री के सब राजा, और एलाम के सब राजा, और मादियोंके सब राजा,

26 और दूर-दूर तक उत्तर देश के सब राजा एक दूसरे से, और पृय्वी भर के जगत के सब राज्योंके सब राज्य; और उनके पीछे शेषक का राजा पीएगा।
27 इस कारण तू उन से कहना, सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर योंकहता है; पी लो, और मतवाले रहो, और थूको, और गिरो, और फिर न उठो, उस तलवार के कारण जो मैं तुम्हारे बीच भेजूंगा।
28 और यदि वे तेरे हाथ के प्याले को पीने से इन्कार करें, तब तू उन से कहना, सेनाओं का यहोवा योंकहता है; तुम जरूर पी जाओगे।
29 क्‍योंकि सुन, मैं अपके नाम से पुकारे जानेवाले नगर पर विपत्ति डालना आरम्भ करता हूं, और क्‍या तुम निश्‍चय निर्दोष ठहरोगे? तुम्हें दण्डित नहीं किया जाएगा; क्योंकि मैं पृय्वी के सब रहनेवालोंपर तलवार बुलवाऊंगा, सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है।
30 इसलिथे तू इन सब बातोंके विषय में भविष्यद्वाणी करके उन से कहना, कि यहोवा ऊपर से गरजेगा, और अपके पवित्र निवास में से अपना शब्द सुनाएगा; वह अपने निवास स्थान पर गरजेगा; वह दाख रौंदने वालों की नाईं पृय्वी के सब रहनेवालोंके विरुद्ध जयजयकार करेगा।
31 पृय्वी की छोर तक कोलाहल होगा; क्योंकि यहोवा का अन्यजातियोंसे विवाद है; वह सब प्राणियों से याचना करेगा; वह दुष्टों को तलवार से देगा, यहोवा की यही वाणी है।
32 सेनाओं का यहोवा यों कहता है, देख, एक जाति से दूसरी जाति में विपत्ति फैल जाएगी, और पृय्वी के छोर पर से एक बड़ा बवण्डर उठेगा।
33 और उस दिन यहोवा के मारे हुए लोग पृय्वी की एक छोर से लेकर पृय्वी की दूसरी छोर तक होंगे; वे न विलाप करेंगे, न बटोरेंगे, और न गाड़े जाएंगे; वे भूमि पर गोबर किए जाएं।
34 हे चरवाहों, विलाप करो, और दोहाई दो; हे भेड़-बकरियों के प्रधानो, राख में लोट जाओ; क्योंकि तेरे वध और तितर-बितर होने के दिन पूरे हो गए हैं; और तुम मनभावने पात्र की नाईं गिरोगे।
35 और चरवाहों के पास भागने का कोई मार्ग न होगा, और न भेड़-बकरियों के प्रधान के बचने का कोई मार्ग होगा।
36 चरवाहों की दोहाई का शब्द, और भेड़-बकरियों के प्रधान का शब्द सुना जाएगा; क्‍योंकि यहोवा ने उनकी चराई बिगाड़ दी है।
37 और यहोवा के प्रचण्ड कोप के कारण शान्ति के निवास स्थान नष्ट हो गए।
38 वह सिंह की नाईं अपके ढेले को छोड़ गया है; क्‍योंकि अन्धेर करनेवाले के प्रचण्ड कोप और उसके भयंकर कोप के कारण उनका देश उजड़ गया है।

 

अध्याय 26

यिर्मयाह पश्चाताप के लिए प्रोत्साहित करता है - उसे पकड़ लिया जाता है और बरी कर दिया जाता है।

1 यहूदा के राजा योशिय्याह के पुत्र यहोयाकीम के राज्य के आरम्भ में यहोवा की ओर से यह वचन निकला,
2 यहोवा यों कहता है; यहोवा के भवन के आंगन में खड़े होकर यहूदा के सब नगरों से जो यहोवा के भवन में दण्डवत करने को आते हैं, वे सब बातें जो मैं तुझे सुनाने की आज्ञा देता हूं; एक शब्द कम नहीं।
3 यदि ऐसा हो, तो वे सुनकर अपके अपके बुरे मार्ग से फिरें, और मन फिराएं, मैं उस बुराई को दूर करूंगा, जो मैं उन के बुरे कामोंके कारण उन से करना चाहता हूं।
4 और उन से कहना, यहोवा योंकहता है; यदि तुम मेरी बात नहीं मानोगे, कि मेरी व्यवस्था पर चलो, जिसे मैं ने तुम्हारे आगे रखा है,
5 और अपके दास भविष्यद्वक्ताओं की बातें सुनकर, जिन्हें मैं ने तुम्हारे पास भेजा है, कि उन्हें भोर में उठकर भेजने की आज्ञा दी जाए;
6 तब मैं इस भवन को शीलो के समान बनाऊंगा, और इस नगर को पृय्वी की सारी जातियोंके लिथे शाप दूंगा; क्योंकि तुम ने मेरे दास भविष्यद्वक्ताओं की नहीं सुनी।
7 तब याजकों और भविष्यद्वक्ताओं और सब लोगों ने यिर्मयाह को यहोवा के भवन में ये बातें बोलते सुना।
8 अब ऐसा हुआ कि जब यिर्मयाह वह सब बातें कह चुका जो यहोवा ने उसे सब लोगोंसे कहने की आज्ञा दी या, तब याजकोंऔर भविष्यद्वक्ताओंऔर सब लोगोंने उसको यह कहकर पकड़ लिया, कि तू निश्चय मर जाएगा।

9 तू ने यहोवा के नाम से यह भविष्यद्वाणी क्यों की है, कि यह भवन शीलो के समान होगा, और यह नगर निर्जन के बिना उजाड़ हो जाएगा? और सब लोग यहोवा के भवन में यिर्मयाह के विरुद्ध इकट्ठे हुए।
10 जब यहूदा के हाकिमोंने ये बातें सुनीं, तब वे राजभवन से निकलकर यहोवा के भवन को गए, और यहोवा के भवन के नए फाटक के द्वार पर बैठ गए।
11 तब याजकों और भविष्यद्वक्ताओं ने हाकिमों और सब लोगों से कहा, यह मनुष्य मरने के योग्य है; क्योंकि उस ने इस नगर के विरुद्ध भविष्यद्वाणी की है, जैसा तुम ने कानों से सुना है।
12 तब यिर्मयाह ने सब हाकिमोंऔर सब लोगोंसे कहा, यहोवा ने मुझे इस भवन और इस नगर के विषय में जितनी बातें तुम ने सुनी हैं भविष्यद्वाणी करने को भेजा है।
13 इसलिथे अब अपक्की चालचलन और काम सुधार, और अपके परमेश्वर यहोवा की बात मान, और मन फिरा, तब यहोवा उस विपत्ति को दूर करेगा जो उस ने तेरे विरुद्ध की है।
14 देख, मैं तेरे हाथ में हूं; जैसा अच्छा लगे वैसा ही मेरे साथ करो और तुम से मिलो।
15 परन्तु तुम निश्चय जान लो, कि यदि तुम मुझे मार डालोगे, तो निश्चय निर्दोषोंके लोहू को अपने ऊपर, और इस नगर और उसके निवासियोंके लिथे मार डालना; क्योंकि यहोवा ने मुझे तुम्हारे पास ये सब बातें कहने को सच ही भेजा है।
16 तब हाकिमोंऔर सब लोगोंने याजकोंऔर भविष्यद्वक्ताओंसे कहा; यह आदमी मरने के योग्य नहीं है; क्योंकि उस ने हम से हमारे परमेश्वर यहोवा के नाम से बातें की हैं।
17 तब उस देश के पुरनियोंमें से कितनोंने उठकर प्रजा की सारी मण्डली से कहा,
18 यहूदा के राजा हिजकिय्याह के दिनोंमें मोरास्ती मीका ने भविष्यद्वाणी की, और यहूदा के सब लोगोंसे कहा, सेनाओं का यहोवा योंकहता है; सिय्योन खेत की नाईं जोता जाएगा, और यरूशलेम ढेर हो जाएगा, और यहोवा के भवन का पर्वत वन के ऊंचे स्थानोंके समान हो जाएगा।
19 क्या यहूदा के राजा हिजकिय्याह और सारे यहूदा ने उसे मार डाला? क्या वह यहोवा से नहीं डरता और यहोवा से बिनती करके मन फिराता नहीं? और यहोवा ने उस विपत्ति को दूर किया जो उस ने उन से कहा या। इस प्रकार यिर्मयाह को मार डालने के द्वारा हम अपने प्राणों पर बड़ी विपत्ति डाल सकते हैं।
20 परन्तु याजकों में से एक मनुष्य ने उठकर कहा, कि किर्यत्यारीम के शमायाह के पुत्र ऊरिय्याह ने यहोवा के नाम से भविष्यद्वाणी की, जिस ने इस नगर और इस देश के विषय में सब कुछ के अनुसार भविष्यद्वाणी की या। यिर्मयाह के शब्द;
21 और जब यहोयाकीम राजा, और उसके सब शूरवीरों, और सब हाकिमोंने उसकी बातें सुनीं, तब राजा ने उसे मार डालने का यत्न किया; परन्तु यह सुनकर ऊरिय्याह डर गया, और भाग गया, और मिस्र को चला गया;
22 और यहोयाकीम राजा ने मिस्र में पुरूषोंको, अर्यात् अकबोर के पुत्र एलनातान को, और उसके संग कुछ पुरूषोंको मिस्र में भेज दिया।
23 और वे ऊरिय्याह को मिस्र से निकाल कर राजा यहोयाकीम के पास ले आए; जिसने उसे तलवार से घात किया, और उसकी लोय को साधारण लोगों की कबर में डाल दिया।
24 तौभी शापान के पुत्र अहीकाम का हाथ यिर्मयाह पर या, कि वे उसे मार डालने के लिथे लोगोंके वश में न कर दें।

 

अध्याय 27

बन्धन और जूए के प्रकार - वह भविष्यवाणी करता है कि बचे हुए पात्रों को बाबुल ले जाया जाएगा।

1 यहूदा के राजा योशिय्याह के पुत्र यहोयाकीम के राज्य के आरम्भ में यहोवा की ओर से यह वचन यिर्मयाह के पास पहुंचा,
2 यहोवा मुझ से यों कहता है, बन्धन और जूए बनवाकर अपक्की गरदन पर पहिना,
3 और एदोम के राजा, और मोआब के राजा, और अम्मोनियोंके राजा, और सोर के राजा, और सीदोन के राजा के पास दूतोंके द्वारा जो यरूशलेम को यहां आते हैं उन्हें भेज दो। यहूदा का राजा सिदकिय्याह;
4 और उन्हें आज्ञा दे, कि अपके स्‍वामियोंसे कहें, सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर योंकहता है; तुम अपने स्वामियों से यों कहना;
5 मैं ने पृय्वी को, क्या मनुष्य क्या, क्या पशु जो भूमि पर हैं, अपक्की बड़ी सामर्य और बढ़ाई हुई भुजा से बनाया है, और जिस को वह मुझे मिला है, उसे मैं ने दे दिया है।
6 और अब मैं ने यह सब देश अपके दास बेबीलोन के राजा नबूकदनेस्सर के हाथ कर दिया है; और मैं ने उसे मैदान के पशुओं को भी उसकी सेवा करने के लिथे दिया है।
7 और सब जातियां उसके, और उसके पुत्र, और उसके पुत्र की उपासना तब तक करेंगी, जब तक उनका अन्त न हो जाए; और उसके बाद बहुत सी जातियां और बड़े राजा उनके अधीन हो जाएंगे।
8 और ऐसा होगा, कि जो जाति और राज्य बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर के अधीन नहीं होंगे, और जो बाबुल के राजा के जूए में अपना गला नहीं रखेंगे, उस जाति को मैं दण्ड दूंगा, यहोवा की यही वाणी है . तलवार, और अकाल, और मरी से, जब तक कि मैं उसके हाथ से उन को नाश न कर लूं।
9 इसलिथे न अपके भविष्यद्वक्ताओंकी, न अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की सुन, जो तुझ से कहते हैं, कि तू बाबेल के राजा की उपासना न करना;
10 क्योंकि वे तुझ से झूठ की नबूवत करते हैं, कि तुझे तेरे देश से दूर कर दे; और कि मैं तुझे निकाल दूं, और तू नाश हो जाए।
11 परन्तु वे जातियां जो बाबुल के राजा के जूए के नीचे अपना गला घोंटकर उसकी सेवा करेंगी, उन्हें मैं उनके ही देश में रहने दूंगा, यहोवा की यही वाणी है; और वे उस में जोतेंगे, और उसमें बसेंगे।
12 और मैं ने यहूदा के राजा सिदकिय्याह से भी इन सब बातोंके अनुसार कहा, अपक्की गर्दनोंको बाबुल के राजा के जूए के तले ले आ, और उसकी और उसकी प्रजा की उपासना कर, और जीवित रह।
13 जिस प्रकार यहोवा ने उस जाति के विरुद्ध जो बाबुल के राजा की उपासना नहीं करेगी, तुम तलवार, अकाल, और मरी से क्यों मरोगे?
14 इसलिथे जो भविष्यद्वक्ता तुम से कहते हैं, कि तुम बेबीलोन के राजा की उपासना न करना, उन की बात न मानना; क्योंकि वे तुझ से झूठ की नबूवत करते हैं।
15 क्योंकि मैं ने उन्हें नहीं भेजा, यहोवा की यह वाणी है, तौभी वे मेरे नाम से झूठी भविष्यद्वाणी करते हैं; कि मैं तुझे निकाल दूं, और तू और भविष्यद्वक्ता जो तुझ से भविष्यद्वाणी करते हैं, नाश हो जाएं।
16 फिर मैं ने याजकोंऔर इन सब लोगोंसे कहा, यहोवा योंकहता है; अपके भविष्यद्वक्ताओं की बातें न सुनना जो तुझ से भविष्यद्वाणी करके कहती हैं, कि देख, यहोवा के भवन के पात्र अब शीघ्र ही बाबेल से फिर लाए जाएंगे; क्योंकि वे तुझ से झूठ की नबूवत करते हैं।
17 उनकी न मानी; बाबुल के राजा की उपासना करो, और जीवित रहो; इस शहर को क्यों उजाड़ दिया जाए?
18 परन्तु यदि वे भविष्यद्वक्ता हों, और यदि यहोवा का वचन उनके पास हो, तो वे सेनाओं के यहोवा से बिनती करें, कि जो पात्र यहोवा के भवन और उसके राजा के भवन में बचे हैं, वे यहूदा और यरूशलेम में बाबुल को न जाना।
19 क्योंकि खम्भों, समुद्र, और कुर्सियों, और इस नगर में बचे हुए पात्रोंके विषय में सेनाओं का यहोवा यों कहता है।
20 जिसे बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ने यहूदा के राजा यहोयाकीम के पुत्र यकोन्याह को बन्धुआई में करके यरूशलेम से बाबेल को, और यहूदा और यरूशलेम के सब रईसोंको बन्धुआई करके न ले लिया;
21 सेनाओं का यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर यहोवा के भवन में और यहूदा के राजा और यरूशलेम के भवन में बचे हुए पात्रोंके विषय में यों कहता है;
22 वे बाबेल को ले जाए जाएं, और जब तक मैं उन से भेंट न करूं, तब तक वे वहीं रहेंगे, यहोवा की यही वाणी है; तब मैं उनको उठाकर इस स्थान पर फेर दूंगा।

 

अध्याय 28

हनन्याह झूठी भविष्यद्वाणी करता है — यिर्मयाह ने हनन्याह की मृत्यु की भविष्यवाणी की।

1 और उसी वर्ष यहूदा के राजा सिदकिय्याह के राज्य के आरम्भ के चौथे वर्ष, और पांचवें महीने में, अजूर भविष्यद्वक्ता के पुत्र हनन्याह ने जो गिबोन का या, मुझ से बातें कीं यहोवा के भवन में याजकों और सब लोगोंके साम्हने यह कहकर,
2 इस्राएल का परमेश्वर सेनाओं का यहोवा यों कहता है, कि मैं ने बेबीलोन के राजा का जूआ तोड़ डाला है।
3 पूरे दो वर्ष के भीतर मैं यहोवा के भवन के जितने पात्र बाबुल का राजा नबूकदनेस्सर इस स्थान से उठाकर बाबुल को ले गया, उन सभोंको मैं फिर इस स्थान में ले आऊंगा;
4 और मैं यहूदा के राजा यहोयाकीम के पुत्र यकोन्याह को, यहूदा के सब बन्धुओं सहित, जो बाबुल को गए थे, फिर इस स्थान पर पहुंचाऊंगा, यहोवा की यही वाणी है; क्योंकि मैं बाबुल के राजा का जूआ तोड़ डालूंगा।
5 तब यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता ने याजकों और उन सब लोगोंके साम्हने जो यहोवा के भवन में खड़े थे, हनन्याह भविष्यद्वक्ता से कहा,
6 यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता ने भी कहा, आमीन; प्रभु ऐसा करें; जो बातें तू ने भविष्यद्वाणी की हैं, उन्हें यहोवा पूरा करे, कि यहोवा के भवन के पात्र, और जो कुछ बन्धुआई में ले जाया जाए, वह सब बाबुल से इस स्थान में फिर ले आए।
7 तौभी अब जो वचन मैं तेरे और सब लोगोंसे कहता हूं, वह तू सुन;
8 जो भविष्यद्वक्ता मुझ से पहिले और तुझ से पहिले हुए थे, वे बहुत देशों, और बड़े राज्योंके विरुद्ध युद्ध, और बुराई, और मरी के विषय में भविष्यद्वाणी करते थे।
9 जो भविष्यद्वक्ता शान्ति की भविष्यद्वाणी करता है, जब भविष्यद्वक्ता का वचन पूरा होगा, तब भविष्यद्वक्ता जाना जाएगा, कि यहोवा ने सचमुच उसे भेजा है।
10 तब हनन्याह भविष्यद्वक्ता ने यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के गले से जूआ उठाकर तोड़ दिया।
11 और हनन्याह ने सब लोगोंके साम्हने कहा, यहोवा योंकहता है; तौभी मैं बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर के जूए को पूरे दो वर्ष के भीतर सब जातियों के गले से उतार डालूंगा। और भविष्यद्वक्ता यिर्मयाह अपने मार्ग पर चला गया।
12 तब यहोवा का यह वचन यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के पास पहुंचा, उसके बाद हनन्याह भविष्यद्वक्ता ने यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के गले का जूआ यह कहकर तोड़ दिया,
13 जाकर हनन्याह से कह, यहोवा योंकहता है; तू ने लकड़ी के जूए तोड़े हैं; परन्तु उनके लिये लोहे का जूआ बनाना।
14 क्योंकि सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर यों कहता है; मैं ने इन सब जातियोंके गरदन पर लोहे का जूआ रखा है, कि वे बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर की उपासना करें; और वे उसकी उपासना करेंगे; और मैं ने उसे मैदान के पशु भी दिए हैं।
15 तब यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता ने हनन्याह भविष्यद्वक्ता से कहा, हे हनन्याह, सुन; यहोवा ने तुझे नहीं भेजा; परन्तु तू इन लोगों को फूठे का भरोसा दिलाता है।
16 इसलिथे यहोवा योंकहता है; देख, मैं तुझे पृय्वी पर से दूर कर दूंगा; इस वर्ष तू मरेगा, क्योंकि तू ने यहोवा से बलवा करना सिखाया है।
17 इस प्रकार हनन्याह भविष्यद्वक्ता उसी वर्ष सातवें महीने में मर गया।

 

अध्याय 29

यिर्मयाह ने बाबुल के बन्धुओं को एक पत्र भेजा - अहबंद सिदकिय्याह का अंत, दो झूठे भविष्यद्वक्ता।

1 अब जो पत्र यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता ने यरूशलेम से बन्धुआई में से बचे हुए पुरनियों, और याजकों, और भविष्यद्वक्ताओं, और उन सब लोगों के पास जिन्हें नबूकदनेस्सर बन्धुआई में से ले गया था, ये हैं। यरूशलेम से बाबुल;
2 उसके बाद यकोन्याह राजा, रानी, खोजे, यहूदा और यरूशलेम के हाकिम, और बढ़ई, और लोहार यरूशलेम से चले गए;
3 शापान के पुत्र एलासा और हिल्किय्याह के पुत्र गमर्याह के द्वारा (जिन्हें यहूदा के राजा सिदकिय्याह ने बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर के पास बाबुल को भेज दिया,)
4 सेनाओं का यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर उन सभोंसे योंकहता है, जिन्हें मैं बन्धुआई में करके यरूशलेम से ले जाकर बाबेल ले गया हूं;
5 घर बनाकर उनमें बसना; और बाग लगाओ, और उनके फल खाओ;
6 तुम ब्याह करो, और बेटे बेटियां उत्पन्न करो; और अपने बेटों के लिये स्त्रियां ब्याह लेना, और अपनी बेटियां पतियों के ब्याह देना, कि वे बेटे बेटियां उत्पन्न करें; कि तुम वहां बढ़े, और घटे नहीं।
7 और जिस नगर में मैं ने तुम को बन्धुआई में करा दिया है उस में शान्ति ढूंढ़ो, और उसके लिथे यहोवा से बिनती करो; क्योंकि उस की शान्ति से तुम्हें शान्ति मिलेगी।
8 क्योंकि सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर यों कहता है; तेरे भविष्यद्वक्ता और भविष्यद्वक्ता जो तेरे बीच में हों, तुझे धोखा न दें, और न अपके उन स्वप्नोंकी सुनें, जिन्हें तू स्वप्न दिखाता है।
9 क्योंकि वे मेरे नाम से तुझ से झूठी भविष्यद्वाणी करते हैं; मैंने उन्हें नहीं भेजा, यहोवा की यही वाणी है।
10 क्योंकि यहोवा योंकहता है, कि बाबुल में सत्तर वर्ष पूरे होने पर मैं तुझ से भेंट करूंगा, और अपक्की भलाई का वचन तेरे साम्हने पूरा करूंगा, कि तू इस स्यान में फिर लौट जाए।
11 क्योंकि यहोवा की यह वाणी है, कि जो विचार मैं तुम्हारे विषय में सोचता हूं, उन्हें मैं जानता हूं, कि तुम्हारा भला होने के लिथे भलाई की नहीं, परन्‍तु शान्ति की बातें हैं।
12 तब तुम मुझे पुकारोगे, और जाकर मुझ से प्रार्यना करोगे, और मैं तुम्हारी सुनूंगा।
13 और जब तुम अपके सारे मन से मुझे ढूंढ़ोगे, तब मुझे ढूंढ़कर पाओगे।
14 और मैं तुझ से मिलूंगा, यहोवा की यही वाणी है; और मैं तेरी बन्धुआई को दूर करूंगा, और सब जातियोंमें से और उन सब स्थानों में से जहां मैं ने तुझे भगा दिया है, इकट्ठा करूंगा, यहोवा की यही वाणी है; और मैं तुझे उस स्यान में फिर ले आऊंगा, जहां से मैं ने तुझे बन्धुआई में कराया था।
15 क्योंकि तुम ने कहा है, कि यहोवा ने हम को बाबुल में भविष्यद्वक्ता खड़ा किया है;
16 यह जान ले कि दाऊद की गद्दी पर विराजमान राजा का यहोवा यों कहता है, और उन सब लोगोंके विषय जो इस नगर में रहते हैं, और तुम्हारे भाई जो तुम्हारे संग बन्धुआई में नहीं गए हैं;
17 सेनाओं का यहोवा यों कहता है; देख, मैं उन पर तलवार, और अकाल, और मरी भेजूंगा, और उन्हें घटिया अंजीर के समान कर दूंगा, जो खाए नहीं जा सकते, वे कितने बुरे हैं।
18 और मैं उन्हें तलवार, और अकाल, और मरी से सताऊंगा, और पृय्वी के सब राज्योंमें दूर करने के लिथे उन्हें छुड़ाऊंगा, कि वे शाप, और विस्मय, और फुसफुसाहट, और नामधराई हों . उन सब जातियोंमें जहां मैं ने उनको भगा दिया है;
19 यहोवा की यह वाणी है, कि जो बातें मैं ने अपके दास भविष्यद्वक्ताओंके द्वारा उनके पास भोर को उठकर भेजने की आज्ञा देकर उनके पास भेजीं, वे मेरी न मानी हैं; परन्तु तुम ने न सुना, यहोवा की यही वाणी है।
20 इसलिये हे बन्धुवाई के सब लोगों, जिन्हें मैं ने यरूशलेम से बाबुल को भेजा है, यहोवा का वचन सुनो;
21 सेनाओं का यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर, कोलैयाह का पुत्र अहाब, और मासेयाह का पुत्र सिदकिय्याह, जो मेरे नाम से तुझ से झूठी भविष्यद्वाणी करता है, यों कहता है; देख, मैं उनको बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर के हाथ कर दूंगा; और वह उन्हें तेरी आंखोंके साम्हने घात करेगा;
22 और यहूदा की सारी बन्धुवाई जो बाबुल में हैं, उन में से यह शाप लिया जाएगा, कि यहोवा तुझे सिदकिय्याह और अहाब के समान करे, जिसे बाबुल के राजा ने आग में भूनाया;
23 क्योंकि उन्होंने इस्राएल में व्यभिचार किया है, और अपक्की पड़ोसियोंकी स्त्रियोंके संग व्यभिचार किया है, और मेरे नाम से ऐसी झूठी बातें कही हैं जिनकी आज्ञा मैं ने उन्हें नहीं दी; मैं भी जानता हूं, और साक्षी हूं, यहोवा की यही वाणी है।
24 तू नहेलामवासी शमायाह से भी यों कहना,
25 सेनाओं का यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर यों कहता है, कि तू ने अपके नाम से यरूशलेम के सब लोगोंको, और मासेयाह के पुत्र सपन्याह याजक को, और सब याजकोंको अपके नाम से चिट्ठियां भेजी हैं,
26 यहोवा ने तुझे यहोयादा याजक के स्थान पर याजक ठहराया है, कि तुम यहोवा के भवन में हाकिम बनो, क्‍योंकि वह पागल है, और अपने आप को भविष्यद्वक्ता बनाता है, कि तू उसे बन्दीगृह में डाल दे, और स्टॉक।
27 सो अब तू ने अनातोत के यिर्मयाह को, जो अपके आप को तेरा भविष्यद्वक्ता ठहराता है, ताड़ना क्यों नहीं दी?
28 इसलिथे उस ने हमारे पास बाबुल में यह कहला भेजा, कि यह बन्धुआई बहुत पुरानी है; घर बनाकर उनमें बसना; और बाग लगाओ, और उनके फल खाओ।
29 और सपन्याह याजक ने यह पत्र यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के कानों में पढ़ा।
30 तब यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुंचा, कि,
31 बन्धुवाई के सब लोगों के पास यह कहला भेजो, कि नहेलामवासी शमायाह के विषय में यहोवा यों कहता है; क्‍योंकि शमायाह ने तुम से नबूवत की, और मैं ने उसे नहीं भेजा, और उस ने तुम को फूठ का भरोसा दिलाया;
32 इसलिथे यहोवा योंकहता है; देख, मैं नहेलामवासी शमायाह और उसके वंश को दण्ड दूंगा; उसके पास इन लोगों के बीच रहने के लिए एक आदमी नहीं होगा; यहोवा की यह वाणी है, कि जो भलाई मैं अपक्की प्रजा के लिथे करूंगा, उस को वह न देखेगा; क्योंकि उसने यहोवा के विरुद्ध विद्रोह करना सिखाया है।

 

अध्याय 30

यहूदियों की वापसी - दुष्टों पर क्रोध आएगा।

1 वह वचन जो यहोवा की ओर से यिर्मयाह के पास पहुंचा, कि वह कहता है,
2 इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है, कि जितने वचन मैं ने तुझ से कहे हैं उन सभोंको पुस्तक में लिख ले।
3 क्योंकि देखो, यहोवा की यह वाणी है, ऐसे दिन आते हैं, कि मैं अपक्की प्रजा इस्राएल और यहूदा को बन्धुआई में फिर ले आऊंगा, यहोवा की यही वाणी है; और मैं उनको उस देश में लौटा दूंगा जो मैं ने उनके पूर्वजोंको दिया था, और वे उसके अधिकारी होंगे।
4 और जो वचन यहोवा ने इस्राएल और यहूदा के विषय में कहे वे ये हैं।
5 क्योंकि यहोवा योंकहता है; हमने कांपने की, भय की, शांति की नहीं, थरथराती हुई आवाज सुनी है।
6 अब तुम से पूछो, और देखो, कि क्या मनुष्य को सन्तान की पीड़ा होती है? मैं क्यों देखता हूं कि हर एक पुरूष अपनी कमर पर हाथ रखे हुए है, और वह स्त्री जो कष्ट में है, और सब का मुख पीलापन में बदल गया है?
7 काश! क्‍योंकि वह दिन ऐसा महान् है, कि उसके समान कोई न होगा; यह याकूब के संकट का समय भी है; परन्तु वह उस से बचाया जाएगा।
8 क्योंकि उस दिन ऐसा होगा, कि सेनाओं के यहोवा की यह वाणी है, कि मैं उसका जूआ तेरी गर्दन पर से तोड़ डालूंगा, और तेरे बन्धन को तोड़ डालूंगा, और परदेशी फिर उसकी सेवा न करने पाएंगे;
9 परन्तु वे अपके परमेश्वर यहोवा और अपके राजा दाऊद की उपासना करेंगे, जिन्हें मैं उनके लिथे खड़ा करूंगा।
10 इसलिथे हे मेरे दास याकूब, तू मत डर, यहोवा की यही वाणी है; हे इस्राएल, निराश न हो; क्योंकि देखो, मैं तुझे दूर से, और तेरे वंश को उनके बन्धुआई के देश से छुड़ाऊंगा; और याकूब लौटकर चैन से रहेगा, और चुप रहेगा, और कोई उसे डराने न पाएगा।
11 क्योंकि तेरा उद्धार करने के लिथे मैं तेरे संग हूं, यहोवा की यह वाणी है; तौभी मैं उन सब जातियोंको जिन में मैं ने तुझे तित्तर बित्तर कर दिया है, सत्यानाश कर डालूंगा, तौभी तेरा अन्त न करूंगा; तौभी मैं तुझे ठीक कर दूंगा, और तुझे पूरी रीति से दण्डित न होने दूंगा।
12 क्योंकि यहोवा योंकहता है, तेरा घाव लाइलाज नहीं, तौभी तेरे घाव दु:ख के हैं।
13 क्या तेरा मुकद्दमा करने वाला कोई नहीं, कि तू बान्धे जाए? क्या आपके पास उपचार की कोई दवा नहीं है?
14 क्या तेरे सब प्रेमी तुझे भूल गए हैं, क्या वे तुझे ढूंढ़ते नहीं हैं? क्योंकि मैं ने तेरे बहुत से अधर्म के कामोंके लिथे शत्रु के घाव से, और क्रूर की ताड़ना से तुझे घायल किया है; क्योंकि तेरे पाप बढ़ गए हैं।
15 तू अपके दु:ख के लिथे क्‍यों चिल्लाता है? क्या आपका दुःख लाइलाज है? यह तो तेरे अधर्म के कामोंके कारण हुआ, और तेरे पापोंके बढ़ने के कारण मैं ने तुझ से ये काम किए हैं।
16 परन्तु जितने तुझे खाएंगे वे सब भस्म किए जाएंगे; और तेरे सब विरोधी वरन उनमें से एक एक बन्धुआई में चले जाएंगे; और जो तुझे लूटेंगे, वे लूटेंगे, और जो तेरे अहेर करेंगे वे सब मैं अपके अपके लिथे दूँगा।
17 क्योंकि मैं तेरा स्वास्थ्य फेर दूंगा, और तेरे घावों को चंगा करूंगा, यहोवा की यही वाणी है; क्‍योंकि उन्हों ने तुझे बहिष्कृत कह कर कहा, यह सिय्योन है, जिसे कोई ढूंढ़ता नहीं।
18 यहोवा यों कहता है; देख, मैं याकूब के डेरों की बंधुआई में फिर लाऊंगा, और उसके निवासस्थानों पर दया करूंगा; और नगर उसी के ढेर पर बनाया जाएगा, और महल उसी के अनुसार बना रहेगा।
19 और उन में से धन्यवाद और आनन्द करनेवालोंका शब्द होगा; और मैं उन्हें बढ़ाऊंगा, और वे थोड़े न होंगे; मैं उनकी महिमा भी करूंगा, और वे छोटे न हों।
20 उनकी सन्तान भी पहिले की नाई होगी, और उनकी मण्डली मेरे साम्हने स्थिर की जाएगी, और मैं उन सभोंको दण्ड दूंगा, जो उन पर अन्धेर करते हैं।
21 और उनके रईस आप ही में से होंगे, और उनका अधिपति उनके बीच से निकलेगा; और मैं उसको समीप लाऊंगा, और वह मेरे पास आएगा; क्‍योंकि यह कौन है, जिस ने मेरे पास आने के लिथे अपने मन को लगा रखा है? प्रभु कहते हैं।
22 और तुम मेरी प्रजा ठहरोगे, और मैं तुम्हारा परमेश्वर ठहरूंगा।
23 देखो, यहोवा का बवण्डर जलजलाहट के साथ और लगातार बवंडर के साथ निकल रहा है; वह दुष्‍टों के सिर पर दु:ख के साथ गिरेगा।
24 यहोवा का कोप तब तक न लौटा होगा, जब तक वह उसे पूरा न कर ले, और अपने मन की इच्छा पूरी न कर ले; अन्त के दिनों में तुम उस पर विचार करना।

 

अध्याय 31

इस्राएल की पुनर्स्थापना — राहेल ने सांत्वना दी — नई वाचा।

1 उसी समय, यहोवा की यह वाणी है, क्या मैं इस्राएल के सब कुलोंका परमेश्वर रहूंगा, और वे मेरी प्रजा ठहरेंगे।
2 यहोवा योंकहता है, कि जो प्रजा तलवार से बची रही, उस पर जंगल में अनुग्रह हुआ; यहाँ तक कि इस्राएल भी, जब मैं उसे विश्राम देने गया था।
3 यहोवा ने मुझे प्राचीनकाल से दर्शन दिया है, कि हां, मैं ने तुझ से सदा प्रेम रखा है; इस कारण मैं ने तुझ को करूणा से खींच लिया है।
4 हे इस्राएल के कुँवारी, मैं तुझे फिर बनाऊंगा, और तू बनाया जाएगा; तू फिर अपके ताबीजोंसे शोभायमान होगा, और आनन्द करनेवालोंके नाच में निकलेगा।
5 और शोमरोन के पहाड़ोंपर दाखलताएं बान्धना; बोने वाले रोपेंगे, और उन्हें साधारण वस्तुओं की नाईं खाएंगे।
6 क्‍योंकि एक दिन ऐसा होगा, कि एप्रैम पर्वत पर पहरुए पुकारेंगे, कि उठ, हम अपके परमेश्वर यहोवा के पास सिय्योन को जाएं।
7 क्योंकि यहोवा यों कहता है; याकूब के लिथे आनन्द से गाओ, और अन्यजातियोंके प्रधानोंके बीच जयजयकार करो; प्रकाशित करो, और स्तुति करो, और कहो, हे यहोवा, अपनी प्रजा, इस्राएल के बचे हुओं को बचा।
8 सुन, मैं उनको उत्तर देश से ले आऊंगा, और पृय्वी के छोर से ले आऊंगा, और अन्धे और लंगड़े, और गर्भवती स्त्री, और जो गर्भवती होंगी, उन के संग इकट्ठा करूंगा; एक बड़ी कंपनी वहाँ लौटेगी।
9 वे रोते हुए आएंगे, और मैं गिड़गिड़ाकर उनकी अगुवाई करूंगा; मैं उन्हें जल की नदियों के पास सीधा मार्ग पर चलाऊंगा, जिस में वे ठोकर न खाएंगे; क्योंकि मैं इस्राएल का पिता हूं, और एप्रैम मेरा जेठा है।
10 हे जाति जाति के लोगों, यहोवा का वचन सुनो, और दूर के द्वीपों में उसका प्रचार करो, और कहो, कि जिस ने इस्राएल को तित्तर बित्तर किया, वह उसे बटोर लेगा, और जैसा चरवाहा अपक्की भेड़-बकरियोंकी रक्षा करता है, वैसे ही उसकी रक्षा भी करेगा।
11 क्योंकि यहोवा ने याकूब को छुड़ा लिया है, और उसके हाथ से जो उस से अधिक सामर्थी है, छुड़ाया है।
12 इसलिथे वे आकर सिय्योन की ऊंचाई में गाएंगे, और यहोवा की भलाई के लिथे गेहूँ, और दाखमधु, और तेल, और भेड़-बकरियोंऔर गाय-बैल के बच्चोंके लिथे एक संग बहेंगे; और उनका प्राण सींची हुई बारी के समान होगा; और वे फिर कभी शोक न करेंगे।
13 तब कुँवारी क्या जवान क्या बूढ़े सब मिलकर नाचने से आनन्दित होंगे; क्योंकि मैं उनके शोक को आनन्द में बदल दूंगा, और उन्हें शान्ति दूंगा, और उनके शोक से आनन्दित करूंगा।
14 और मैं याजकों के मन को मोटापे से तृप्त करूंगा, और मेरी प्रजा मेरी भलाई से तृप्त होगी, यहोवा की यही वाणी है।
15 यहोवा यों कहता है; रामा में एक शब्द सुना गया, विलाप, और कड़वा रोना, राहेल अपने बच्चों के लिए रो रही थी, अपने बच्चों के लिए सांत्वना पाने से इनकार कर दिया, क्योंकि वे नहीं थे।
16 यहोवा यों कहता है; अपक्की वाणी को रोने से, और अपक्की आंखोंको आंसू बहाने से रोक; क्योंकि तेरे काम का प्रतिफल मिलेगा, यहोवा की यही वाणी है; और वे शत्रु के देश से फिर आएंगे।
17 और यहोवा की यह वाणी है, कि तेरे अन्त में आशा है, कि तेरे लड़केबाल अपक्की सीमा पर फिर आएंगे।
18 मैं ने निश्चय एप्रैम को ऐसा विलाप करते सुना है; तू ने मुझे ताड़ना दी, और मुझे उस बछड़े की नाईं ताड़ना दी गई, जो जूए का आदी नहीं था; तू मेरी ओर फिरा, और मैं फिरा जाऊँगा; क्योंकि तू मेरा परमेश्वर यहोवा है।
19 निश्चय उसके बाद मैं फिरा, मैं ने मन फिरा; और उसके बाद मुझे यह शिक्षा दी गई, कि मैं ने अपक्की जांघ पर मारा; मैं लज्जित हुआ, हां, यहां तक कि भ्रमित भी हुआ, क्योंकि मैंने अपनी युवावस्था की निन्दा को सहन किया था ।
20 क्या एप्रैम मेरा प्रिय पुत्र है? क्या वह एक सुखद बच्चा है? क्योंकि जब से मैं ने उसके विरुद्ध बातें कीं, तब से मैं उसे अब भी गम्भीरता से स्मरण करता हूं; इस कारण मेरी आंतें उसके लिथे व्याकुल हैं; मैं निश्चय उस पर दया करूंगा, यहोवा की यही वाणी है।
21 मार्ग के चिन्ह खड़ा करना, और ऊँचे ढेर लगाना; अपना मन राजमार्ग की ओर लगा, जिस मार्ग से तू गया था; हे इस्राएल के कुँवारी, फिर से अपने इन नगरों की ओर फिरो।
22 हे पीछे खिसकती हुई बेटी, तू कब तक घूमती रहेगी? क्योंकि यहोवा ने पृय्वी पर एक नई वस्तु उत्पन्न की है, कि स्त्री पुरूष को घेरे रहेगी।
23 सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर यों कहता है; जब तक मैं यहूदा के देश में और उसके नगरोंमें, जब तक मैं उन को बन्धुआई में न लाऊंगा, तब तक वे यह वचन सुनाएंगे; हे न्याय के निवास, और पवित्रता के पर्वत, यहोवा तुझे आशीष दे।
24 और यहूदा में, और उसके सब नगरोंमें, हे पुरूष, और जो भेड़-बकरियां लिये हुए निकलेंगे, बसेंगे।
25 क्योंकि मैं ने थके हुओं को तृप्त किया है, और सब दु:खियोंको भर दिया है।
26 इस पर मैं ने जागकर क्या देखा; और मेरी नींद मुझे मीठी लगी।
27 देख, यहोवा की यह वाणी है, ऐसे दिन आते हैं, कि मैं इस्राएल के घराने और यहूदा के घराने को मनुष्य के वंश और पशु के वंश समेत बोऊंगा।
28 और ऐसा होगा, कि जैसा मैं ने उन पर पहिचान किया है, वैसा ही तोड़ना, और तोड़ना, और ढा देना, और नाश करना, और दु:ख देना; इस प्रकार मैं उन पर चौकसी करूंगा, कि मैं निर्माण करूं, और रोपूं, यहोवा की यही वाणी है।
29 उन दिनों में वे फिर यह न कहना, कि पुरखाओं ने खट्टा दाख खाया है, और बच्चों के दांत फड़फड़ाते हैं।
30 परन्तु हर एक अपने ही अधर्म के कारण मरेगा; जो कोई खट्टा दाख खाए, उसके दाँतों की धार काट दी जाए।
31 देख, यहोवा की यह वाणी है, ऐसे दिन आते हैं, कि मैं इस्राएल के घराने और यहूदा के घराने से नई वाचा बान्धूंगा;
32 उस वाचा के अनुसार नहीं जो मैं ने उनके पुरखाओं से उस दिन बान्धी या, जिस दिन मैं ने उनका हाथ पकड़कर उन्हें मिस्र देश से निकाल लाया; जिस वाचा को उन्होंने तोड़ा, तौभी मैं उनका पति या, यहोवा की यही वाणी है;
33 परन्तु जो वाचा मैं इस्राएल के घराने से बान्धूंगा वह यह होगी; उन दिनों के बाद यहोवा की यह वाणी है, कि मैं अपक्की व्यवस्था को उनके मन में रखूंगा, और उनके हृदय में लिखूंगा; और उनका परमेश्वर ठहरेगा, और वे मेरी प्रजा ठहरेंगे।
34 और वे अपके अपके पड़ोसी, वरन अपके भाई अपके अपके अपके भाई को फिर यह न शिक्षा दें, कि यहोवा को जानो; क्योंकि छोटे से ले कर बड़े तक सब मुझे जानेंगे, यहोवा की यही वाणी है; क्योंकि मैं उनका अधर्म क्षमा करूंगा, और उनका पाप फिर स्मरण न करूंगा।
35 यहोवा योंकहता है, जो सूर्य को दिन को उजियाला देता है, और चान्द और तारोंकी विधियोंको रात को उजियाला देता है, जो समुद्र की लहरोंके गरजने पर दो भागोंमें बांट देता है; उसका नाम सेनाओं का यहोवा है;
36 यदि वे नियम मेरे साम्हने से हट जाएं, यहोवा की यह वाणी है, तो इस्राएल का वंश भी मेरे साम्हने सदा के लिये जाति न रहेगा।
37 यहोवा यों कहता है; यदि ऊपर के आकाश को नापा जाए, और पृय्वी की नेव नीचे खोजी जाए, तो मैं इस्त्राएल के सब वंश को जो कुछ उन्होंने किया है उसके कारण दूर कर दूंगा, यहोवा की यही वाणी है।
38 देखो, यहोवा की यह वाणी है, ऐसे दिन आते हैं, कि हननेल के गुम्मट से लेकर कोने के फाटक तक यहोवा के लिथे नगर बनाया जाएगा।
39 और नापने की डोरी उसके साम्हने गारेब पहाड़ी पर चढ़े, और गोआत के चारोंओर घूमे।
40 और लोथों की सारी तराई, और राख, और किद्रोन के नाले तक के सब खेत, अर्यात् घोड़े के फाटक के कोने तक जो पूर्व की ओर है, यहोवा के लिथे पवित्र ठहरे; वह फिर न तोड़ा जाएगा, और न हमेशा के लिए गिराया जाएगा।

 

अध्याय 32

यिर्मयाह को कैद किया गया - परमेश्वर ने एक अनुग्रहपूर्ण वापसी का वादा किया है।

1 यहूदा के राजा सिदकिय्याह के दसवें वर्ष में जो नबूकदनेस्सर का अठारहवां वर्ष या, वह वचन यहोवा की ओर से यिर्मयाह के पास पहुंचा।
2 तब बाबुल के राजा ने यरूशलेम को घेर लिया; और यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता बन्दीगृह के आंगन में, जो यहूदा के राजा के घर में था, बन्द रखा गया।
3 क्योंकि यहूदा के राजा सिदकिय्याह ने यह कहकर उसे बन्द कर दिया था, कि तू भविष्यद्वाणी क्योंकर कहता है, कि यहोवा योंकहता है, देख, मैं इस नगर को बाबुल के राजा के वश में कर दूंगा, और वह उसे ले लेगा;
4 और यहूदा का राजा सिदकिय्याह कसदियोंके हाथ से न बचेगा, वरन बाबुल के राजा के वश में कर दिया जाएगा, और वह उससे आमने-सामने बातें करेगा, और उसकी आंखोंसे उसकी आंखें लगी रहेंगी;
5 और वह सिदकिय्याह को बाबेल को ले जाएगा, और जब तक मैं उसके पास न पहुंचूं, तब तक वह वहीं रहेगा, यहोवा की यही वाणी है; चाहे तुम कसदियों से लड़ो, तौभी तुम सफल न होओगे।
6 तब यिर्मयाह ने कहा, यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा,
7 सुन, तेरा चाचा शल्लूम का पुत्र हनमेल तेरे पास आकर कहेगा, कि मेरा खेत जो अनातोत में है मोल ले; छुटकारे के अधिकार के लिए इसे खरीदना तेरा है।
8 तब मेरे चाचा का पुत्र हनमेल यहोवा के वचन के अनुसार बन्दीगृह के आंगन में मेरे पास आया, और मुझ से कहा, मेरा खेत मोल ले, जो बिन्यामीन देश के अनातोत में है; क्योंकि निज भाग का अधिकार तेरा है, और छुटकारा तेरा है; इसे अपने लिए खरीदें। तब मैं जान गया कि यह यहोवा का वचन है।
9 और मैं ने अपके चाचा के पुत्र हनमेल का जो खेत अनातोत में या, मोल लिया, और उसका तौल करके सत्तर शेकेल चान्दी तौल ली।
10 और मैं ने साक्षियों को मान लिया, और उस पर मुहर लगा दी, और गवाहों को ले लिया, और रुपयों को डंडों में तौल दिया।
11 सो मैं ने मोल लेने का प्रमाण ले लिया, जो व्यवस्था और रीति के अनुसार मुहर लगाई गई, और जो खुली थी;
12 और मैं ने नेरिय्याह के पुत्र बारूक को, जो मासेयाह का पुत्र था, मोल लेने का प्रमाण अपके चाचा के पुत्र हनमेल और उन गवाहोंके साम्हने दिया, जिन्होंने मोल की पुस्तक को सब यहूदियोंके साम्हने ले लिया। जेल के दरबार में बैठ गया।
13 और मैं ने बारूक को उनके साम्हने आज्ञा दी,
14 सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर यों कहता है; ये सबूत लें, खरीद का यह सबूत, दोनों जो मुहरबंद हैं, और यह सबूत जो खुला है; और उन्हें मिट्टी के पात्र में रखना, कि वे बहुत दिन तक रहें।
15 क्योंकि सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर यों कहता है; इस देश में घर और खेत और दाख की बारियां फिर से अधिकारी हो जाएंगी।
16 जब मैं ने नेरिय्याह के पुत्र बारूक को मोल लेने का प्रमाण दे दिया, तब मैं ने यहोवा से यह कहकर प्रार्थना की,
17 हे परमेश्वर यहोवा! देख, तू ने आकाश और पृय्वी को अपक्की बड़ी सामर्य और बढ़ाई हुई भुजा से बनाया है, और कुछ भी तेरे लिथे कठिन नहीं है;
18 तू हज़ारों पर करूणा करता, और पितरों के अधर्म का प्रतिफल उनकी सन्तान के पीछे उनकी गोद में देता है; उसका नाम महान, पराक्रमी परमेश्वर, सेनाओं का यहोवा है;
19 युक्ति में महान, और काम में पराक्रमी; क्योंकि तेरी आंखें मनुष्यों की सब चालचलन पर लगी रहती हैं, कि सब को उसकी चालचलन और उसके कामोंके अनुसार फल दे;
20 जो मिस्र देश में, और इस्राएल में, और और मनुष्योंके बीच में आज तक चिन्ह और आश्चर्यकर्म करते आए हैं; और तेरा ऐसा नाम किया, जैसा आज के दिन है;
21 और तेरी प्रजा इस्राएल को चिन्हों, और अद्भुत कामों, और बलवन्त हाथ, और बढ़ाई हुई भुजा, और बड़े भय के द्वारा मिस्र देश से निकाल लाया है;
22 और जिस देश में दूध और मधु की धाराएं बहती हैं, वह देश जिसे तू ने उनके पुरखाओं को देने की शपय खाकर खाई थी, वह उनको भी दिया है;
23 और वे भीतर आकर उसके अधिकारी हो गए; परन्तु उन्होंने तेरी बात नहीं मानी, और न तेरी व्यवस्था पर चले; जो कुछ करने की आज्ञा तू ने उन्हें दी है उन में से उन्होंने कुछ नहीं किया; इस कारण तू ने उन पर यह सब विपत्ति डाली है।
24 देखो, पहाड़ को लेने के लिथे वे नगर में आए हैं; और नगर तलवार, और अकाल, और मरी के कारण उस से लड़नेवाले कसदियोंके हाथ में कर दिया गया है; और जो कुछ तू ने कहा है वह हुआ है; और देखो, तू इसे देखता है।
25 और तू ने मुझ से कहा, हे परमेश्वर यहोवा, उस खेत को रुपयोंके लिथे मोल ले, और गवाह ले; क्योंकि नगर कसदियों के हाथ में कर दिया गया है।
26 तब यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुंचा, कि,
27 देख, मैं यहोवा, सब प्राणियोंका परमेश्वर हूं; क्या मेरे लिए कुछ भी कठिन है?
28 इसलिथे यहोवा योंकहता है; देख, मैं इस नगर को कसदियों और बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर के वश में कर दूंगा, और वह इसे ले लेगा;
29 और कसदी जो इस नगर से लड़ेंगे, आकर इस नगर में आग लगाएंगे, और जिन घरोंकी छतोंपर उन्होंने बाल को धूप चढ़ाई, और पराये देवताओं के लिथे अर्घ्य चढ़ाए थे, उन के घरोंसे फूंक देंगे, और मुझ को भड़काने के लिथे अर्घ डालेंगे। क्रोध।
30 क्योंकि इस्राएलियोंऔर यहूदाहियोंने बचपन से ही मेरे साम्हने बुरा ही किया है; क्योंकि इस्त्राएलियों ने अपके हाथ के कामोंसे ही मुझे क्रोध दिलाया है, यहोवा की यही वाणी है।
31 क्योंकि यह नगर उस दिन से लेकर आज तक मेरे कोप और मेरी जलजलाहट का कारण बना हुआ या, कि मैं उसे अपके साम्हने से दूर कर दूं;
32 इस्त्राएलियों और यहूदाहियों के सब बुरे कामों के कारण जो उन्होंने मुझे क्रोधित करने के लिथे किए हैं, वे, उनके राजा, उनके हाकिम, उनके याजक, और उनके भविष्यद्वक्ता, और यहूदा के लोग, और यरूशलेम के निवासी।
33 और उन्होंने मेरी ओर मुंह नहीं वरन पीठ फेर दी है; तौभी मैं ने उन्हें सवेरा उठकर उपदेश दिया, तौभी उन्होंने उपदेश की बात न मानी।
34 परन्तु उन्होंने अपके घिनौने काम उस भवन में, जो मेरा कहलाता है, उसको अशुद्ध करने के लिथे रखा।
35 और उन्होंने बाल के ऊंचे स्यानोंको जो हिन्नोम के पुत्र की तराई में हैं, इसलिथे बनवाया, कि अपके बेटे बेटियां आग में से मोलेक तक चले जाएं; जिसकी आज्ञा मैं ने उन्हें न दी, और न मेरे मन में यह विचार आया, कि वे यह घिनौना काम करें, कि यहूदा से पाप करवाएं।
36 और अब इस नगर के विषय में इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है, कि वह तलवार, और अकाल, और मरी के द्वारा बाबुल के राजा के वश में कर दिया जाएगा;
37 देख, मैं उनको उन सब देशोंमें से जहां मैं ने अपके कोप, और अपक्की जलजलाहट, और बड़े जलजलाहट में निकाल दिया है, इकट्ठा करूंगा; और मैं उनको इस स्यान में फिर ले आऊंगा, और उनको निडर बसाऊंगा;
38 और वे मेरी प्रजा ठहरेंगे, और मैं उनका परमेश्वर ठहरूंगा;
39 और मैं उनको एक ही मन और एक ही मार्ग दूंगा, कि वे अपके और उनके बाद उनके वंश की भलाई के लिथे सदा मेरा भय मानते रहें;
40 और मैं उन से सदा की वाचा बान्धूंगा, कि मैं उन से दूर न रहूंगा, कि उनका भला करूं; परन्तु मैं उनके मन में अपना भय उत्पन्न करूंगा, कि वे मेरे पास से न हटें।
41 हां, मैं उन से भलाई करने के लिथे आनन्द करूंगा, और अपके सारे मन और अपके सारे प्राण से निश्चय इस देश में उन्हें रोपूंगा।
42 क्योंकि यहोवा यों कहता है; जैसे मैं ने इस प्रजा पर यह सब बड़ी विपत्ति डाली है, वैसे ही मैं उन पर वह सब भलाई भी लाऊंगा, जिसका वचन मैं ने उन से दिया है।
43 और इस देश में खेत मोल लिये जाएंगे, जिसके विषय में तुम कहते हो, कि वह मनुष्य वा पशु न तो उजाड़ है; कसदियों के हाथ में दे दिया जाता है।
44 और लोग रुपयों के लिथे खेत मोल ले, और चिट्ठी लिखकर उन पर मुहर लगाकर उन पर मुहर लगाकर, और बिन्यामीन के देश में, और यरूशलेम के आस पास के स्थानोंमें, और यहूदा के नगरोंमें, और पहाड़ोंके नगरोंमें, और उन पर साझी ठहरें; तराई के नगरों में, और दक्खिन के नगरोंमें; क्योंकि मैं उनकी बन्धुआई में लौट आऊंगा, यहोवा की यही वाणी है।

 

अध्याय 33

इस्राएल और यहूदा की पुनर्स्थापना — धार्मिकता की शाखा।

1 फिर यहोवा का यह वचन दूसरी बार यिर्मयाह के पास पहुंचा, जब वह बन्दीगृह के आंगन में बन्द था, और कहा,
2 उसका रचनेवाला यहोवा, उसे बनाने वाला यहोवा योंकहता है, कि उसको स्थिर करे; उसका नाम यहोवा है;
3 मुझे पुकार, और मैं तेरी सुनूंगा, और तुझे बड़ी-बड़ी और पराक्रमी बातें दिखाऊंगा, जिन्हें तू नहीं जानता।
4 क्योंकि इस्राएल का परमेश्वर यहोवा, इस नगर के घरोंके विषय में, और यहूदा के राजाओं के घरोंके विषय में, जो पहाड़ोंपर और तलवार से ढाए गए हैं, योंकहते हैं;
5 वे कसदियों से लड़ने को आते हैं, परन्तु उन मनुष्यों की लोथों से जिन्हें मैं ने अपके कोप और अपक्की जलजलाहट से घात किया है, और उन सभोंकी लोथोंसे भरने के लिथे जिनकी ओर मैं ने अपके अपके नगर से मुंह छिपा रखा है।
6 सुन, मैं उसको चंगा और चंगा करूंगा, और उनको चंगा करूंगा, और उन पर बहुतायत की शान्ति और सच्चाई प्रगट करूंगा ।
7 और मैं यहूदा की बंधुआई और इस्राएल की बंधुआई को लौटा दूंगा, और उन्हें पहिले की नाईं दृढ़ करूंगा।
8 और मैं उनको उनके सब अधर्म से शुद्ध करूंगा, जिस से उन्होंने मेरे विरुद्ध पाप किया है; और मैं उनके सब अधर्म के कामों को क्षमा करूंगा, जिनके कारण उन्होंने पाप किया है, और जिस से उन्होंने मेरे विरुद्ध अपराध किया है।
9 और यह मेरे लिये पृय्वी की सब जातियोंके साम्हने आनन्द का नाम, और स्तुति और आदर ठहरेगा, जो जो भलाई मैं उन से करता हूं, वे सब सुनेंगे; और वे सब भलाई और उस सारी समृद्धि के कारण जो मैं उस से प्राप्त करता हूं, डरेंगे और थरथराएंगे।
10 यहोवा यों कहता है; फिर इस स्यान में यह सुना जाएगा, कि तुम कहते हो कि मनुष्य और पशु न तो यह उजाड़ होगा, न यहूदा के नगरोंमें, और यरूशलेम की सड़कोंमें जो उजाड़ हैं, और न मनुष्य, और न कोई रहनेवाला, और न पशु,
11 आनन्द का शब्द, और हर्ष का शब्द, दूल्हे का शब्द, और दुल्हिन का शब्द, उनका शब्द जो कहेंगे, सेनाओं के यहोवा की स्तुति करो; क्योंकि यहोवा भला है; क्योंकि उसकी करूणा उन पर सदा की है जो स्तुतिरूपी बलिदान को यहोवा के भवन में पहुंचाएंगे। क्योंकि मैं पहिले की नाईं देश की बन्धुआई में लौटा दूंगा, यहोवा की यही वाणी है।
12 सेनाओं का यहोवा यों कहता है; फिर इस स्यान में, जो मनुष्य और बिना पशु के उजाड़ है, और उसके सब नगरोंमें चरवाहोंका निवास होगा, जो अपक्की भेड़-बकरियोंको लेटा देंगे।
13 पहाड़ों के नगरों में, तराई के नगरों में, और दक्खिन के नगरों में, और बिन्यामीन के देश में, और यरूशलेम के आस पास के स्थानों में, और यहूदा के नगरों में, भेड़-बकरी फिर नीचे से गुजरेंगे उसके हाथ जो उन्हें बताता है, यहोवा की यही वाणी है।
14 देखो, यहोवा की यह वाणी है, ऐसे दिन आते हैं, कि मैं उस भलाई के काम को करूंगा, जिसकी प्रतिज्ञा मैं ने इस्राएल के घराने और यहूदा के घराने से की है।
15 उन दिनों में, और उस समय, मैं दाऊद के पास धर्म की डाली उगाऊंगा; और वह देश में न्याय और धर्म के काम करेगा।
16 उन दिनों में यहूदा उद्धार पाएगा, और यरूशलेम निडर बसेगा, और उसका नाम इसी से रखा जाएगा, कि हमारा धर्म यहोवा।
17 क्योंकि यहोवा योंकहता है; दाऊद कभी नहीं चाहेगा कि इस्राएल के घराने की गद्दी पर कोई व्यक्ति विराजमान हो;
18 और न तो लेवीय याजक मेरे साम्हने होमबलि चढ़ाने, और अन्नबलि चढ़ाने, और नित्य बलि चढ़ाने के लिथे एक पुरूष की इच्छा करें।
19 और यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुंचा, और कहा,
20 यहोवा यों कहता है; यदि तुम मेरी दिन की वाचा, और मेरी रात की वाचा को तोड़ सको, और उनके समय में दिन रात न हो;
21 तब मेरी वाचा भी अपके दास दाऊद से तोड़ी जाए, कि उसके सिंहासन पर राज्य करने के लिथे उसके कोई पुत्र न हो; और लेवियों के संग याजक, मेरे सेवक।
22 जैसे आकाश के गण की गिनती नहीं की जा सकती, और न समुद्र की बालू की गिनती की जा सकती है; इस प्रकार मैं अपके दास दाऊद के वंश को, और लेवियोंको जो मेरी सेवा टहल करेंगे, बढ़ा दूंगा।
23 फिर यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुंचा, कि,
24 क्या तू नहीं समझता कि इन लोगों ने यह कहकर क्या कहा, कि जिन दो कुलों को यहोवा ने चुन लिया है, उन्हें भी उस ने दूर कर दिया है? इस प्रकार उन्होंने मेरी प्रजा को तुच्छ जाना, कि वे फिर उनके साम्हने कोई जाति न रहें।
25 यहोवा यों कहता है; यदि मेरी वाचा दिन और रात से न बान्धी जाए, और मैं ने आकाश और पृथ्वी की विधियोंको न ठहराया हो;
26 तब मैं याकूब के वंश को, और अपके दास दाऊद को दूर करूंगा, ऐसा न हो कि मैं उसके वंश में से किसी को इब्राहीम, इसहाक और याकूब के वंश पर अधिकारी होने के लिथे ग्रहण करूं; क्योंकि मैं उनकी बन्धुआई में लौट आऊंगा, और उन पर दया करूंगा।

 

अध्याय 34

यिर्मयाह सिदकिय्याह और नगर के बन्दी होने की नबूवत करता है।

1 वह वचन जो यहोवा की ओर से यिर्मयाह के पास पहुंचा, जब बेबीलोन का राजा नबूकदनेस्सर, और उसकी सारी सेना, और उसके राज्य की सारी पृथ्वी के राज्य, और सब लोग, और सब लोग यरूशलेम और उसके सब नगरोंसे यह कहते हुए लड़े, कि ,
2 इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है; जाकर यहूदा के राजा सिदकिय्याह से कह, कि यहोवा योंकहता है; देख, मैं इस नगर को बाबुल के राजा के वश में कर दूंगा, और वह उसे आग से फूंक देगा;
3 और तू उसके हाथ से बच न पाएगा, परन्तु निश्चय पकड़ा जाएगा, और उसके वश में कर दिया जाएगा; और तेरी आंखें बाबुल के राजा की आंखों पर लगी रहेंगी, और वह तुझ से मुंह से बातें करेगा, और तू बाबुल को जाएगा।
4 तौभी, हे यहूदा के राजा सिदकिय्याह, यहोवा का वचन सुन; तेरा यहोवा यों कहता है, तू तलवार से न मरेगा;
5 परन्तु तू कुशल से मरेगा; और तेरे पुरखाओं को जो तेरे पहिले पहिले राजा थे, वे जलकर तेरे लिथे सुगन्धि जलाएंगे; और वे तुझ से विलाप करेंगे, और कहेंगे, हे प्रभु! क्योंकि मैं ने वचन का उच्चारण किया है, यहोवा की यही वाणी है।
6 तब यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता ने यरूशलेम में यहूदा के राजा सिदकिय्याह से ये सब बातें कहीं,
7 जब बाबुल की सेना का राजा यरूशलेम से, और यहूदा के बचे हुए सब नगरोंसे, अर्थात लाकीश और अजेका से लड़ा; क्योंकि ये रक्षित नगर यहूदा के नगरों में से रह गए हैं।
8 यह वचन यहोवा की ओर से यिर्मयाह के पास पहुंचा, जब सिदकिय्याह राजा ने उन सब लोगोंसे जो यरूशलेम में थे, वाचा बान्धी, कि उनके लिथे स्वतन्त्रता का प्रचार करें;
9 कि सब अपके अपके दास, और अपक्की दासी, चाहे इब्रानी वा इब्री हो, स्वतन्त्र हो जाए; कि कोई अपने भाई के यहूदी की सेवा न करे।
10 जब सब हाकिमोंऔर सब प्रजा के लोगोंने जो वाचा में बान्धे थे, यह सुना, कि अपके अपके दास, वरन अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की अपक्की दासी को अपके अपके अपके अपके अपके लिथे जाने दे, कि कोई अपके अपके अपके अपके लिथे काम न करे; तब उन्होंने आज्ञा मानी, और उन्हें जाने दिया।
11 परन्तु बाद में उन्होंने फिरकर उन दासोंऔर दासियोंको, जिन्हें उन्होंने स्वतन्त्र करके जाने दिया था, लौटा दिया, और दासोंऔर दासियोंके वश में कर लिया।
12 इसलिथे यहोवा का यह वचन यहोवा की ओर से यिर्मयाह के पास पहुंचा, कि,
13 इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है; जिस दिन मैं उन्हें मिस्र देश से दासियों के घराने से निकाल लाया, उस दिन मैं ने तुम्हारे पुरखाओं से वाचा बान्धी थी, और कहा,
14 और सात वर्ष के बीतने पर अपके अपके भाई इब्री को जो तुझ को बेच दिया गया या; और जब वह छ: वर्ष तक तेरी सेवा करे, तब उसे अपके पास से स्वतंत्र करके जाने देना; परन्तु तुम्हारे पुरखाओं ने मेरी न सुनी, और न कान लगाया।
15 परन्तु अब तुम ने फिरकर मेरे साम्हने ठीक किया, और अपके अपके पड़ोसी को स्वतन्त्रता का समाचार सुनाया; और जो भवन मेरा कहलाता है, उस में तुम ने मुझ से वाचा बान्धी थी।
16 परन्‍तु तुम ने फिरकर मेरे नाम को अशुद्ध किया, और अपके अपके दास, वरन अपक्की दासी, जिन को उस ने अपनी इच्छा से स्‍वतंत्र किया था, लौटकर अपने वश में कर लिया, कि वे अपके दास और दासियां हों। .
17 इसलिथे यहोवा योंकहता है; तुम ने मेरी न सुनी, और अपके अपके भाई को, और अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके भाई को स्‍वतंत्रता का प्रचार किया; यहोवा की यह वाणी है, कि देख, मैं तेरे लिथे तलवार, मरी, और अकाल के लिथे स्वतन्त्रता का प्रचार करता हूं; और मैं तुझे पृय्वी के सब राज्योंमें अपके लिथे कर दूंगा।
18 और मैं उन पुरूषोंको दूंगा, जिन्होंने मेरी वाचा का उल्लंघन किया है, जिन्होंने उस वाचा के वचनोंको पूरा नहीं किया है, जो उन्होंने मुझसे पहले किए थे, जब वे बछड़े को दो टुकड़ों में काट लेंगे, और उसके हिस्सों के बीच से गुजरेंगे,
19 यहूदा के हाकिम, और यरूशलेम के हाकिम, खोजे, और याजक, और देश के सब लोग, जो बछड़े के अंगोंके बीच से होकर जाते थे;
20 मैं उनको उनके शत्रुओं, और उनके प्राण के खोजियोंके वश में कर दूंगा; और उनकी लोथें आकाश के पझियोंऔर पृय्वी के पशुओं के मांस के लिथे होंगी।
21 और मैं यहूदा के राजा सिदकिय्याह और उसके हाकिमोंको उनके शत्रुओं, और उनके प्राण के खोजियोंके हाथ, और बाबुल की सेना के राजा के वश में कर दूंगा, जो तुम्हारे पास से चले गए हैं।
22 देख, यहोवा की यह वाणी है, मैं आज्ञा दूंगा, और उन्हें इस नगर में फिर लौटा दूंगा; और वे उस से लड़ेंगे, और उसे ले लेंगे, और आग में जला देंगे; और मैं यहूदा के नगरोंको ऐसा उजाड़ दूंगा, जिस में कोई न बसेगा।

 

अध्याय 35

परमेश्वर रेकाबियों को उनकी आज्ञाकारिता के लिए आशीष देता है।

1 यहूदा के राजा योशिय्याह के पुत्र यहोयाकीम के दिनों में यह वचन यहोवा की ओर से यिर्मयाह के पास पहुंचा,
2 रेकाबियों के घराने के पास जा, और उन से बातें कर, और उन्हें यहोवा के भवन में एक कोठरियों में ले जाकर दाखमधु पिला।
3 तब मैं ने यिर्मयाह के पुत्र याजन्याह को, जो हबजीनियाह का पोता, और उसके भाइयोंको, और उसके सब पुत्रोंको, और रेकाबियोंके सारे घराने को, समेत ले लिया;
4 और मैं उनको यहोवा के भवन में इग्दल्याह के पुत्र हानान की उस कोठरी में ले गया, जो परमेश्वर का जन या, जो हाकिमोंकी उस कोठरी के पास या, जो उसके पुत्र मासेयाह की कोठरी के ऊपर थी या। चौल्लम, द्वारपाल;
5 और मैं ने रेकाबियोंके घराने के लोगोंके साम्हने दाखमधु से भरे हुए मटके, और प्याले रखे; और मैं ने उन से कहा, तुम दाखमधु पी लो।
6 परन्तु उन्होंने कहा, हम दाखमधु नहीं पीएंगे; क्‍योंकि हमारे पिता रेकाब के पुत्र योनादाब ने हमें यह आज्ञा दी थी, कि तुम न तो दाखमधु पीना, और न अपने पुत्रोंको सदा पीना;
7 न घर बनाना, न बीज बोना, न दाख की बारी लगाना, और न कोई रखना; परन्‍तु अपके सारे दिन अपके अपके डेरे में रहना; कि जिस देश में तुम परदेशी हो, उस में बहुत दिन तक रहो।
8 इस प्रकार हम ने अपके पिता रेकाब के पुत्र योनादाब की जो आज्ञा उस ने हम से मानी है, कि हम दिन भर दाखमधु न पीना, क्या हम अपके पत्नियां, क्या बेटे, क्या बेटियां;
9 और न हमारे रहने के लिथे घर बनाना; हमारे पास न तो दाख की बारी है, न खेत, न बीज;
10 परन्‍तु हम तो डेरे में रहे, और जो आज्ञा हमारे पिता योनादाब ने हम को दी उस के अनुसार हम ने माना, और किया है।
11 परन्तु जब बाबुल का राजा नबूकदनेस्सर उस देश में आया, तब हम ने कहा, आ, हम कसदियोंकी सेना और अरामियोंकी सेना के भय से यरूशलेम को चलें; इसलिए हम यरूशलेम में रहते हैं।
12 तब यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुंचा, कि,
13 सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर यों कहता है; जाकर यहूदा के लोगों और यरूशलेम के निवासियों से कहो, क्या तुम को मेरी बातें मानने की शिक्षा न मिलेगी? प्रभु कहते हैं।
14 रेकाब के पुत्र योनादाब की वे बातें पूरी हुई हैं, जिन्हें उस ने अपके पुत्रोंको दाखमधु न पीने की आज्ञा दी थी; क्‍योंकि आज तक वे कुछ नहीं पीते, वरन अपने पिता की आज्ञा को मानते हैं; तौभी मैं ने तुम से बातें की हैं, और तुम्हें आज्ञा दी है, कि तुम सवेरे उठो, और तुम से बातें करो, परन्तु तुम ने मेरी न सुनी।
15 और मैं ने अपके सब दास भविष्यद्वक्ताओंको भी तुम्हारे पास यह आज्ञा दी है, कि वे भोर से उठकर यह कहलाएं, कि अब तुम अपके अपके बुरे मार्ग से लौट आओ, और अपके काम सुधारो, और पराए देवताओं के पीछे उनकी उपासना करने को न जाना। . और उस देश में जो मैं ने तुम को और तुम्हारे पुरखाओं को दिया है उस में बसना; परन्तु तुम ने न तो कान लगाया, और न मेरी सुनी।
16 क्योंकि रेकाब के पुत्र योनादाब के वंश ने अपके पिता की जो आज्ञा उस ने उनको दी या, वह पूरी की है; परन्तु इन लोगों ने मेरी नहीं सुनी;
17 इसलिथे इस्राएल का परमेश्वर सेनाओं का परमेश्वर यहोवा योंकहता है; देख, मैं यहूदा पर और यरूशलेम के सब निवासियों पर वह सब विपत्ति डालूंगा जो मैं ने उन से कह दी है; क्योंकि मैं ने उन से बातें की हैं, परन्तु उन्होंने नहीं सुना; और मैं ने उनको पुकारा, परन्तु उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया।
18 तब यिर्मयाह ने रेकाबियोंके घराने से कहा, सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर योंकहता है; क्योंकि तुम ने अपके पिता योनादाब की आज्ञा मानी, और उसके सब उपदेशोंको माना, और जो आज्ञा उस ने तुझे दी है उसके अनुसार किया है;
19 इसलिथे इस्राएल का परमेश्वर सेनाओं का यहोवा योंकहता है; रेकाब का पुत्र योनादाब नहीं चाहेगा कि कोई मनुष्य सदा मेरे साम्हने खड़ा रहे।

 

अध्याय 36

यिर्मयाह की भविष्यवाणी सार्वजनिक रूप से पढ़ी जाती है, राजा द्वारा जला दी जाती है - यहोयाकीम की सजा।

1 यहूदा के राजा योशिय्याह के पुत्र यहोयाकीम के चौथे वर्ष में यहोवा की ओर से यह वचन यिर्मयाह के पास पहुंचा,
2 एक पुस्तक की एक लोई लेकर उस में वे सब बातें लिख जो मैं ने इस्राएल और यहूदा और सब जातियोंके विषय में तुझ से कही हैं, जिस दिन से मैं ने योशिय्याह के दिनों तक तुझ से कहा है, तब तक इस दिन।
3 हो सकता है कि यहूदा का घराना उन सब विपत्तियों की सुन ले जो मैं उन से करूंगा; कि वे हर एक मनुष्य को उसके बुरे मार्ग से लौटा दें; कि मैं उनका अधर्म और उनका पाप क्षमा करूं।
4 तब यिर्मयाह ने नेरिय्याह के पुत्र बारूक को बुलाया; और बारूक ने यहोवा के सब वचन जो उस ने उस से कहे थे, वे सब यिर्मयाह के मुंह से एक पुस्तक पर लिख दिए।
5 और यिर्मयाह ने बारूक को आज्ञा दी, कि मैं चुप हूं; मैं यहोवा के भवन में नहीं जा सकता;
6 इसलिथे जाकर उस सूची में जो तू ने मेरे मुंह से लिखी है, अर्थात उपवास के दिन यहोवा के भवन की प्रजा के लोगोंके कानोंमें यहोवा के वचन पढ़कर पढ़ना; और उन सब यहूदियों के कानों में जो उनके नगरों से निकलते हैं, पढ़कर सुनाना।
7 हो सकता है कि वे यहोवा के साम्हने अपनी बिनती करें, और सब को उसके बुरे मार्ग से लौटा दें; क्योंकि यहोवा ने इन लोगों पर जो क्रोध और कोप भड़काया है वह बड़ा है।
8 और नेरिय्याह के पुत्र बारूक ने यहोवा के भवन में यहोवा के वचनोंको पुस्तक में पढ़कर जितनी आज्ञाएं यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता को दीं उसके अनुसार किया।
9 और यहूदा के राजा योशिय्याह के पुत्र यहोयाकीम के पांचवें वर्ष के नौवें महीने में उन्होंने यरूशलेम के सब लोगोंको, और उन सब लोगोंके लिथे जो नगरोंसे आए थे, यहोवा के साम्हने उपवास का प्रचार किया या। यहूदा से यरूशलेम तक।

10 तब बारूक ने यहोवा के भवन में यिर्मयाह के वचनों को पुस्तक में पढ़कर सुना, जो शापान शास्त्री के पुत्र गमर्याह की कोठरी में, और ऊंचे आंगन में, यहोवा के भवन के नए फाटक के द्वार पर, कानों में लगा। सभी लोगों की।
11 जब शापान के पोते गमर्याह के पुत्र मीकायाह ने यहोवा की सब बातें उस पुस्तक में से सुनीं,
12 तब वह राजभवन में जाकर शास्त्री की कोठरी में गया; और देखो, सब हाकिम, अर्यात् एलीशामा मन्त्री, और शमायाह का पुत्र दलायाह, अकबोर का पुत्र एलनातान, और शापान का पुत्र गमर्याह, और हनन्याह का पुत्र सिदकिय्याह, और सब हाकिम वहीं बैठे थे।
13 जब बारूक ने लोगों के कानों में वह पुस्तक पढ़ी, तब मीकायाह ने वे सब बातें जो उस ने सुनी थीं, उन को बता दीं।
14 इसलिथे सब हाकिमोंने नतन्याह के पुत्र यहूदी को, जो शेलेम्याह का पोता, और कूशी का पोता, और कूशी का पोता, बारूक के पास यह कहला भेजा, कि जिस सूची को तू ने लोगोंके कानोंमें पढ़ा है, उसे अपके हाथ में ले, और आ। तब नेरिय्याह का पुत्र बारूक उस रोल को अपने हाथ में लेकर उनके पास आया।
15 और उन्होंने उस से कहा, अब बैठ, और हमारे कानोंमें इसे पढ़। सो बारूक ने उनके कानों में पढ़ लिया।
16 अब ऐसा हुआ कि जब उन्होंने सब बातें सुनीं, तो आपस में डरकर बारूक से कहने लगे, कि हम इन सब बातों के विषय में राजा को निश्चय ही बता देंगे।
17 और उन्होंने बारूक से पूछा, अब हम से कह, तू ने ये सब वचन उसके मुंह पर कैसे लिख दिए?
18 तब बारूक ने उन को उत्तर दिया, कि उस ने ये सब बातें अपके मुंह से मुझ से कह सुनाईं, और मैं ने उन्हें उस पुस्तक में स्याही से लिख दिया।
19 तब हाकिमोंने बारूक से कहा, जा, तू जाकर यिर्मयाह को छिपा ले; और किसी को पता न चलने देना कि तुम कहां हो।
20 और वे राजा के पास आंगन में गए, और उस लिथे को एलीशामा शास्त्री की कोठरी में रखा, और सब बातें राजा को सुनाईं।
21 तब राजा ने यहूदी को रोल लाने के लिथे भेजा; और उस ने उसे एलीशामा शास्त्री की कोठरी में से निकाल लिया। और यहूदी ने राजा के कानों में, और उन सब हाकिमों के कानों में जो राजा के पास खड़े थे, पढ़कर सुनाया।
22 नौवें महीने में राजा शीतगृह में बैठा; और उसके साम्हने धधकती आग में आग लगी थी।
23 और ऐसा हुआ, कि जब यहूदी ने तीन या चार पत्ते पढ़ लिए, तब उस ने उसे चाकू से काटा, और उस आग में जो चूल्हे पर थी, तब तक डाल दिया, जब तक कि सब रोल आग में भस्म न हो गया, .
24 तौभी वे न डरे, और न अपके वस्त्र फाड़े, और न राजा, और न उसके किसी कर्मचारी ने, जिस ने ये सब बातें सुनीं।
25 तौभी एलनातान, दलायाह और गमर्याह ने राजा से बिनती की, कि वह उस सूची को न जलाएगा; परन्तु उसने उनकी नहीं सुनी।
26 परन्तु राजा ने हम्मेलेक के पुत्र यरहमेल, अज्रीएल के पुत्र सरायाह, और अब्देल के पुत्र शेलेम्याह को आज्ञा दी, कि बारूक मन्त्री और यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता को पकड़ ले; परन्तु यहोवा ने उन्हें छिपा दिया।

27 तब यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुंचा, उसके बाद राजा ने उस सूची को जला दिया, और जो बातें बारूक ने यिर्मयाह के मुंह पर लिखीं, और कहा,
28 फिर एक और लोई लेकर उस में वे सब पहिली बातें लिख देना, जो पहिली पहिली में थीं, जिन्हें यहूदा के राजा यहोयाकीम ने जला दिया था।
29 और यहूदा के राजा यहोयाकीम से कहना, यहोवा योंकहता है; तू ने इस सूची को यह कहते हुए जला दिया है, कि तू ने उस में यह क्यों लिखा है, कि बाबुल का राजा निश्चय आकर इस देश को नाश करेगा, और वहां से मनुष्य और पशु दोनोंको मिटा देगा?
30 इसलिथे यहोवा यहूदा के राजा यहोयाकीम से योंकहता है; उसके पास दाऊद के सिंहासन पर बैठने के लिए कोई न होगा; और उसकी लोय को दिन में तपती, और रात को पाले में फेंक दी जाए।
31 और मैं उसको और उसके वंश और उसके कर्मचारियोंको उनके अधर्म का दण्ड दूंगा; और जो विपत्ति मैं ने उन पर और यरूशलेम के निवासियों, और यहूदा के लोगोंपर डाली है, वे सब मैं उन पर लाऊंगा; परन्तु उन्होंने नहीं सुना।
32 तब यिर्मयाह ने एक और चिट्ठी लेकर नेरिय्याह के पुत्र बारूक शास्त्री को दी; उस ने उस में उस पुस्तक की सब बातें जो यहूदा के राजा यहोयाकीम ने आग में जला दी थी, यिर्मयाह के मुंह से लिख दीं; और उनके सिवा और भी ऐसे ही बहुत से शब्द जुड़ गए।

 

अध्याय 37

यिर्मयाह कसदियों की जीत की भविष्यवाणी करता है - उसे पीटा जाता है और जेल में डाल दिया जाता है।

1 और यहोयाकीम के पुत्र कोन्याह के स्थान पर योशिय्याह का पुत्र सिदकिय्याह राजा, जिसे बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ने यहूदा देश में राजा ठहराया या।
2 परन्तु न तो उस ने, और न उसके कर्मचारियोंने, और न देश के लोगों ने यहोवा की उन बातों को माना, जो उस ने यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा कही थीं।
3 तब सिदकिय्याह राजा ने शेलेम्याह के पुत्र यहूकल और मासेयाह के पुत्र सपन्याह याजक को यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के पास यह कहला भेजा, कि हमारे लिथे हमारे परमेश्वर यहोवा से प्रार्थना कर।
4 तब यिर्मयाह भीतर आकर लोगोंके बीच में निकल गया; क्योंकि उन्होंने उसे बन्दीगृह में नहीं डाला था।
5 तब फिरौन की सेना मिस्र से निकली; और जब कसदियोंने यरूशलेम को घेर लिया था, तब उनका समाचार सुनकर वे यरूशलेम से चल दिए।
6 तब यहोवा का यह वचन यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के पास पहुंचा, कि,
7 इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है; तुम यहूदा के राजा से यों कहना, जिस ने तुम को मुझ से पूछने को मेरे पास भेजा था; देख, फिरौन की सेना जो तेरी सहायता के लिथे आगे आई है, अपके देश को मिस्र को लौट जाएगी।
8 और कसदी फिर आकर इस नगर से लड़ेंगे, और उसको ले लेंगे, और आग में जला देंगे।
9 यहोवा यों कहता है; यह कहकर अपने आप को धोखा न देना, कि कसदी निश्चय हमारे पास से चले जाएंगे; क्योंकि वे प्रस्थान नहीं करेंगे।
10 क्‍योंकि तुम ने अपके साम्हने लड़नेवाले कसदियोंकी सारी सेना को मार डाला, और उन में से केवल घायल पुरूष रह गए, तौभी वे अपके अपके डेरे में उठकर इस नगर को आग में झोंक दें।
11 और ऐसा हुआ कि जब कसदियों की सेना फिरौन की सेना के डर से यरूशलेम से अलग की गई,
12 तब यिर्मयाह यरूशलेम से निकलकर बिन्यामीन के देश में चला गया, कि वहां से लोगोंके बीच अलग हो जाए।
13 और जब वह बिन्यामीन के फाटक में या, तब एक सरदार या, जिसका नाम यिरिय्याह या, यह शेलेम्याह का पुत्र, और हनन्याह का पुत्र या; और उस ने यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता को पकड़कर कहा, कि तू कसदियोंके हाथ में पड़ गया है।
14 तब यिर्मयाह ने कहा, यह मिथ्या है; मैं कसदियों से दूर नहीं जाता। परन्तु उस ने उसकी न सुनी; तब यिरिय्याह यिर्मयाह को ले गया, और हाकिमोंके पास ले आया।
15 इस कारण हाकिमोंने यिर्मयाह से क्रोधित होकर उसे मारा, और उसे योनातान शास्त्री के घर में बन्दीगृह में डाल दिया; क्‍योंकि उन्‍होंने उसको कारागार बना दिया था।
16 और यिर्मयाह गड़हे और कोठरी में गया, और वहां बहुत दिन तक रहा।
17 तब सिदकिय्याह राजा ने बुलवा भेजा, और उसे निकाल ले गया; तब राजा ने अपके घर में उस से चुपके से पूछा, क्या यहोवा की ओर से कोई वचन है? यिर्मयाह ने कहा, है; क्योंकि उस ने कहा, तू बेबीलोन के राजा के वश में कर दिया जाएगा।
18 फिर यिर्मयाह ने सिदकिय्याह राजा से कहा, मैं ने तुझ से वा तेरे कर्मचारियोंका वा इस प्रजा का क्या अपराध किया है, कि तू ने मुझे बन्दीगृह में डाल दिया है?
19 तुम्हारे भविष्यद्वक्ता अब कहां हैं जिन्होंने तुम से यह भविष्यद्वाणी की थी, कि बाबुल का राजा न तो तुम पर चढ़ाई करेगा, और न इस देश पर?
20 इसलिथे अब सुन, हे मेरे प्रभु, राजा, मैं तुझ से बिनती करता हूं; मेरी बिनती, मैं तुझ से बिनती करता हूं, तेरे साम्हने ग्रहण किया जाए; कि तू मुझे शास्त्री योनातान के घर न लौटा ले, ऐसा न हो कि मैं वहीं मर जाऊं।
21 तब सिदकिय्याह राजा ने आज्ञा दी, कि वे यिर्मयाह को बन्दीगृह के आंगन में डाल दें, और जब तक नगर की सारी रोटियां समाप्त न हो जाएं, तब तक वे उसे पकानेवालोंके बीच में से प्रतिदिन एक रोटी देते रहें। इस प्रकार यिर्मयाह कारागार के आंगन में रहा।

 

अध्याय 38

यिर्मयाह को कालकोठरी में डाल दिया गया है।

1 तब मत्तन के पुत्र शपत्याह, पशूर के पुत्र गदल्याह, और शेलेम्याह के पुत्र जुकल, और मल्किय्याह के पुत्र पशूर ने ये बातें सुनीं जो यिर्मयाह ने सब लोगोंसे कही थीं।
2 यहोवा योंकहता है, कि जो कोई इस नगर में रह जाए, वह तलवार, और अकाल, और मरी से मारा जाएगा; परन्तु जो कसदियों के पास चला जाए वह जीवित रहेगा; क्‍योंकि वह अपके जीवन का शिकार होगा, और जीवित रहेगा।
3 यहोवा योंकहता है, यह नगर निश्चय बाबुल की सेना के राजा के वश में कर दिया जाएगा, जो उस पर अधिकार करेगी।
4 इसलिथे हाकिमोंने राजा से कहा, हम तुझ से बिनती करते हैं, कि यह मनुष्य मार डाला जाए; क्योंकि वह इस प्रकार इस नगर में रहने वाले योद्धाओं के हाथों को और सब लोगों के हाथों को उन से ऐसी बातें कहकर कमजोर करता है; क्योंकि यह मनुष्य इन लोगों का कल्याण नहीं, वरन दुख चाहता है।
5 तब सिदकिय्याह राजा ने कहा, सुन, वह तेरे हाथ में है; क्‍योंकि राजा वह नहीं जो तेरे विरुद्ध कुछ कर सके।
6 तब उन्होंने यिर्मयाह को पकड़कर हम्मेलेक के पुत्र मल्किय्याह की कोठरी में, जो बन्दीगृह के आंगन में या, डलवा दिया; और उन्होंने यिर्मयाह को रस्सियोंसे उतार दिया। और उस कालकोठरी में जल न था, वरन कीच; इसलिथे यिर्मयाह कीचड़ में धंस गया।
7 जब एबेदमेलेक नाम कूशी ने यह सुना, कि उन्होंने यिर्मयाह को अखाड़े में डाल दिया है; तब राजा बिन्यामीन के फाटक पर बैठा;
8 तब एबेदमेलेक राजभवन से निकलकर राजा से कहने लगा,
9 हे मेरे प्रभु, राजा, इन लोगों ने यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता से जो कुछ किया है, वह सब बुरा किया है, जिसे उन्होंने अखाड़े में डाल दिया है; और वह अपने स्थान में भूखा मरने के समान है; क्‍योंकि नगर में फिर रोटी नहीं रही।
10 तब राजा ने कूशी एबेदमेलेक को यह आज्ञा दी, कि यहां से तीस पुरूषोंको साय ले, और यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता को मरने से पहिले उस कालकोठरी में से निकाल ले।
11 तब एबेदमेलेक उन आदमियोंको संग ले कर राजभवन के भण्डार के नीचे गया, और वहां से पुराने ढले हुए ढेले और पुराने सड़े हुए टुकड़े ले कर रस्सियोंके द्वारा यिर्मयाह की कोठरी में डाल दिए।
12 तब एबेदमेलेक नाम कूशी ने यिर्मयाह से कहा, इन पुराने ढले हुए लट्ठोंऔर सड़े हुए लट्ठोंको रस्सियोंके नीचे अपके हाथ के छेदोंके नीचे रख दे। और यिर्मयाह ने वैसा ही किया।
13 तब उन्होंने यिर्मयाह को रस्सियोंसे बटोर लिया, और उसे अखाड़े में से निकाल लिया; और यिर्मयाह बन्दीगृह के आंगन में रहा।
14 तब सिदकिय्याह राजा ने दूत भेजकर यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता को यहोवा के भवन के तीसरे प्रवेश द्वार पर अपके पास ले लिया; और राजा ने यिर्मयाह से कहा, मैं तुझ से एक बात मांगूंगा; मुझसे कुछ न छिपाओ।
15 तब यिर्मयाह ने सिदकिय्याह से कहा, यदि मैं तुझ से कहूं, तो क्या तू निश्चय मुझे न मार डालेगा? और यदि मैं तुझे सम्मति दूं, तो क्या तू मेरी न सुनेगा?
16 तब सिदकिय्याह राजा ने यिर्मयाह से गुप्त शपय खाकर कहा, यहोवा जिस ने हम को उत्पन्न किया है उसके जीवन की शपय मैं तुझे न मारूंगा, और न उन मनुष्योंके हाथ जो तेरे प्राण के खोजी हैं, मैं तुझे न दूंगा।
17 तब यिर्मयाह ने सिदकिय्याह से कहा, सेनाओं का परमेश्वर यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर यहोवा योंकहता है; यदि तू निश्चय बाबुल के हाकिमोंके राजा के पास चला जाए, तो तेरा प्राण जीवित रहेगा, और यह नगर आग से न जलेगा; और अपके घराने समेत जीवित रहना;
18 परन्तु यदि तू बाबुल के हाकिमोंके राजा के पास न जाने पाए, तो यह नगर कसदियोंके वश में कर दिया जाएगा, और वे उसे आग से फूंक देंगे, और तू उनके हाथ से बच न सकेगा।
19 सिदकिय्याह राजा ने यिर्मयाह से कहा, मैं उन यहूदियोंसे डरता हूं, जो कसदियोंके हाथ में पड़ गए हैं, कहीं ऐसा न हो कि वे मुझे अपने हाथ में कर लें, और मेरा उपहास करें।
20 यिर्मयाह ने कहा, वे तुझे न छुड़ाएंगे। यहोवा की वह वाणी, जो मैं तुझ से कहता हूं, मैं तुझ से बिनती करता हूं; तब तेरा भला होगा, और तेरा प्राण जीवित रहेगा।
21 परन्तु यदि तू जाने से इन्कार करे, तो जो वचन यहोवा ने मुझे दिखाया है वह यह है;
22 और देखो, जितनी स्त्रियां यहूदा के घराने के राजा के पास रह जाएं, वे सब बेबीलोन के हाकिमोंके राजा के पास पहुंचाई जाएंगी, और वे स्त्रियां कहेंगी, कि तेरे मित्रोंने तुझ पर चढ़ाई की है, और तुझ पर प्रबल हुई हैं; तेरे पांव कीचड़ में धंस गए हैं, और वे पीछे हट गए हैं।
23 इसलिथे वे तेरी सब पत्नियोंऔर लड़केबालोंको कसदियोंके पास ले आएं; और तू उनके हाथ से न बचेगा, वरन बाबुल के राजा के हाथ से पकड़ लिया जाएगा; और इस नगर को आग से जलाना।
24 तब सिदकिय्याह ने यिर्मयाह से कहा, इन वचनोंको कोई जानने न पाए, और तू न मरेगा।
25 परन्तु यदि हाकिम सुन लें कि मैं ने तुझ से बातें की हैं, और वे तेरे पास आकर तुझ से कहें, कि जो कुछ तू ने राजा से कहा है, उसे हम से कह, तो हम से न छिपा, और हम तुझे मार न डालेंगे। ; और जो कुछ राजा ने तुझ से कहा, वह भी;
26 तब तू उन से कहना, कि मैं ने अपक्की बिनती राजा के साम्हने की, कि वह मुझे योनातान के घर में फिर मरने के लिथे न करवाए।
27 तब सब हाकिमोंने यिर्मयाह के पास आकर उस से पूछा; और उन सब बातों के अनुसार जो राजा ने आज्ञा दी या। सो उन्होंने उस से बातें करना छोड़ दिया; क्योंकि मामला समझ में नहीं आया।
28 तब यिर्मयाह बंदीगृह के आंगन में उस दिन तक रहा, जिस दिन यरूशलेम ले लिया गया; और जब यरूशलेम ले लिया गया तब वह वहीं था।

 

अध्याय 39

यरूशलेम ले लिया गया है - सिदकिय्याह को अंधा कर दिया गया है, और बेबीलोन भेजा गया है - यिर्मयाह का अच्छा उपयोग।

1 यहूदा के राजा सिदकिय्याह के नौवें वर्ष के दसवें महीने में बाबुल का राजा नबूकदनेस्सर अपनी सारी सेना समेत यरूशलेम पर चढ़ाई करके उसको घेर लिया।
2 और सिदकिय्याह के ग्यारहवें वर्ष के चौथे महीने के नौवें दिन को नगर उजाड़ दिया गया।
3 और बाबुल के राजा के सब हाकिम भीतर आए, और बीच के फाटक पर बैठ गए, अर्यात् नेर्गलशरेसेर, समगारनबो, सरसेकीम, रबसारिस, नर्गलशरेसेर, रबमाग, और सब हाकिमोंके सब बचे हुए बाबुल के राजा की।
4 और ऐसा हुआ, कि जब यहूदा के राजा सिदकिय्याह ने उन्हें और सब योद्धाओं को देखा, तब वे भाग गए, और रात को राजा की बारी के मार्ग से, जो बीच के फाटक के पास से होकर नगर से निकल गए थे, निकल गए। दो दीवारें; और वह मैदान के मार्ग से निकल गया।
5 परन्तु कसदियों की सेना ने उनका पीछा किया, और सिदकिय्याह को यरीहो के अराबा में ले लिया; और उसे पकड़कर हमात देश के रिबला में बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर के पास ले गए, जहां उस ने उस का न्याय किया।
6 तब बाबुल के राजा ने सिदकिय्याह के पुत्रोंको रिबला में अपक्की आंखोंके साम्हने घात किया; बाबुल के राजा ने यहूदा के सब रईसोंको भी घात किया।
7 फिर उस ने सिदकिय्याह की आंखें फूंक दी, और उसे बाबुल को ले जाने के लिथे जंजीरोंसे बांध दिया।
8 और कसदियोंने राजभवन और प्रजा के घरोंको फूंक दिया, और यरूशलेम की शहरपनाह को तोड़ डाला।
9 तब जल्लादों का प्रधान नबूजर-अदान, जो लोग नगर में रह गए थे, और जो उसके पास गिर गए थे, और जो लोग उसके पास रह गए थे, उन्हें बन्धुआई में ले गया।
10 परन्तु जल्लादों के प्रधान नबूजर-अदान ने प्रजा के कंगालों में से, जिनके पास कुछ न था, यहूदा देश में छोड़ दिया, और उसी समय उन्हें दाख की बारियां और खेत दिए।
11 बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ने यिर्मयाह के विषय में जल्लादोंके प्रधान नबूजर-अदान को यह आज्ञा दी,
12 उसे ले जाकर उस पर दृष्टि कर, और उसकी हानि न करना; परन्तु जैसा वह तुझ से कहे, वैसा ही उसके साथ भी करो।
13 तब जल्लादोंके प्रधान नबूजर-अदान ने, और नबूशासबान, रबसारिस, नेर्गलशरेसेर, रबमाग और बाबुल के सब हाकिमोंके सब राजाओं को भेजा;
14 तब उन्होंने भेजकर यिर्मयाह को बन्दीगृह के आंगन से बाहर ले जाकर शापान के पुत्र अहीकाम के पुत्र गदल्याह को सौंप दिया, कि वह उसे अपके घर ले जाए; इसलिए वह लोगों के बीच रहने लगा।
15 जब यिर्मयाह बन्दीगृह के आंगन में बन्द रहा या, तब यहोवा का यह वचन उसके पास पहुंचा,
16 जा कर कूशी एबेदमेलेक से कह, सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर यों कहता है; देख, मैं अपक्की बातें इस नगर पर भलाई के लिथे नहीं, वरन बुराई के लिथे ले आऊंगा; और वे उस दिन तेरे साम्हने पूरे किए जाएंगे।
17 परन्तु उस दिन मैं तुझे छुड़ाऊंगा, यहोवा की यही वाणी है; और जिन लोगों से तू डरता है उनके हाथ में न पड़ना।
18 क्योंकि मैं निश्चय तुझे छुड़ाऊंगा, और तू तलवार से न मारा जाएगा, वरन तेरा प्राण तेरे वश में होगा; क्योंकि तू ने मुझ पर भरोसा रखा है, यहोवा की यही वाणी है।

 

अध्याय 40

यिर्मयाह मुक्त हो गया है - बिखरे हुए यहूदी उसकी मरम्मत करते हैं - इश्माएल की साजिश।

1 जो वचन यहोवा की ओर से यिर्मयाह के पास पहुंचा, उसके पश्‍चात् जल्लादोंके प्रधान नबूजर-अदान ने उसे रामा के पास से जाने दिया, जब वह उसे उन सभोंके बीच जो यरूशलेम और यहूदा के बन्धुआई में बँधे हुए ले गए थे, ले गए थे। बन्दी बनाकर बाबुल ले जाया गया।
2 और जल्लादोंके प्रधान ने यिर्मयाह को पकड़कर उस से कहा, तेरे परमेश्वर यहोवा ने इस स्यान पर यह विपत्ति कह दी है।
3 अब यहोवा ने उसे लाकर अपने वचन के अनुसार किया है; क्योंकि तुम ने यहोवा के विरुद्ध पाप किया है, और उसकी बात नहीं मानी है, इस कारण यह बात तुम पर आई है।
4 और अब सुन, मैं आज तुझे उन बन्धनोंसे जो तेरे हाथ में थे, छुड़ाता हूं। यदि तुझे मेरे संग बाबुल में आना अच्छा लगे, तो आ; और मैं तेरी ओर अच्छी दृष्टि करूंगा; परन्तु यदि तुझे मेरे संग बाबेल में आना बुरा लगे, तो धीरज धर; देख, सारा देश तेरे साम्हने है; जहाँ जाना तुझे अच्छा और सुविधाजनक लगे, वहीं जा।
5 जब वह अभी तक न गया या, तब उस ने कहा, गदल्याह के पास जो अहीकाम का पुत्र है, शापान का पोता, जिसे बाबुल के राजा ने यहूदा के नगरोंका अधिपति ठहराया है, लौट जा, और उसके संग प्रजा के बीच निवास कर; वा जहां जाना तुझे सुविधाजनक लगे वहां जा। तब जल्लादों के प्रधान ने उसे भोजन और प्रतिफल दिया, और उसे जाने दिया।
6 तब यिर्मयाह अहीकाम के पुत्र गदल्याह के पास मिस्पा को गया; और उसके साथ उन लोगों के बीच रहने लगे जो देश में रह गए थे।
7 जब सेना के सब प्रधान जो मैदान में थे, वरन अपके जनोंने यह सुना, कि बाबुल के राजा ने अहीकाम के पुत्र गदल्याह को देश पर हाकिम ठहराया है, और उसके लिये पुरूषों, और स्त्रियों, और बालकों, और देश के कंगालों में से, जो बन्धुआई में बाबुल को नहीं ले गए थे;
8 तब वे गदल्याह के पास मिस्पा में आए, और नतन्याह का पुत्र इश्माएल, योहानान, कारेह के पुत्र योनातान, तन्हूमेत के पुत्र सरायाह, और नतोपावासी एपै के पुत्र, और माकावासी का पुत्र याजन्याह, उनके आदमी।
9 और अहीकाम के पुत्र गदल्याह ने शापान के पुत्रा से यह शपय खाई, कि कसदियोंकी सेवा करने से मत डर; देश में निवास कर, और बाबुल के राजा की उपासना कर, तब तेरा भला होगा।
10 देखो, मैं मिस्पा में निवास करूंगा, कि उन कसदियोंकी सेवा करूं जो हमारे पास आएंगे; परन्तु तुम दाखमधु, और ग्रीष्मकाल के फल, और तेल बटोरकर अपके पात्रोंमें रखना, और अपके उन नगरोंमें रहना जिन्हें तू ने ले लिया है।
11 इसी प्रकार जब मोआब और अम्मोनियों, और एदोम और सब देशों के रहने वाले यहूदियों ने सुना, कि बाबुल के राजा ने यहूदा के बचे हुओं को छोड़ दिया है, और उस ने गदल्याह को उन पर अधिकार कर लिया है। अहीकाम का पुत्र शापान का पुत्र;
12 और सब यहूदी जहां से भगाए गए थे वहां से लौट गए, और यहूदा देश में गदल्याह को मिस्पा में आए, और दाखमधु और ग्रीष्मकाल के फल बहुत बटोर लिए।
13 फिर कारेह का पुत्र योहानान और सेना के सब प्रधान जो मैदान में थे, गदल्याह के पास मिस्पा को आए।
14 और उस से कहा, क्या तू निश्चय जानता है, कि अम्मोनियोंके राजा बालिस ने तुझे घात करने के लिथे नतन्याह के पुत्र इश्माएल को भेजा है? परन्तु अहीकाम के पुत्र गदल्याह ने उन की प्रतीति न की।
15 तब कारेह के पुत्र योहानान ने मिस्पा में गदल्याह से चुपके से कहा, मुझे जाने दे, कि मैं नतन्याह के पुत्र इश्माएल को घात करूंगा, और कोई उसे न जानेगा; वह तुझे क्यों मार डाले, कि जितने यहूदी तेरे पास इकट्ठे हुए हैं, वे तित्तर बित्तर हो जाएं, और बचे हुए यहूदा में नाश हों?
16 परन्तु अहीकाम के पुत्र गदल्याह ने कारेह के पुत्र योहानान से कहा, ऐसा काम न करना; क्योंकि तू इश्माएल की झूठी बातें कहता है।

 

अध्याय 41

इश्माएल की साजिश।

1 सातवें महीने में राजघराने में से नतन्याह का पुत्र इश्माएल, जो एलीशामा का पोता, और राजा के हाकिमों समेत दस पुरूष अपके संग अहीकाम के पुत्र गदल्याह के पास मिस्पा में आए; और वहाँ उन्होंने मिस्पा में एक साथ रोटी खाई।
2 तब नतन्याह के पुत्र इश्माएल ने और उसके संग के दस पुरूषों ने उठकर शापान के पुत्र अहीकाम के पुत्र गदल्याह को तलवार से मार डाला, और जिसे बाबुल के राजा ने देश का अधिकारी ठहराया या, उसे मार डाला।
3 और इश्माएल ने अपने संग के सब यहूदियोंको, अर्यात् गदल्याह के संग मिस्पा में, और कसदियोंको जो वहां मिले, और जो योद्धा थे, घात किया।
4 और गदल्याह को घात करने के दूसरे दिन ऐसा हुआ, कि किसी को पता न चला,
5 कि शकेम, और शीलो, और शोमरोन से कुछ ऐसे पुरूष आए हैं, जो अपनी दाढ़ी मुंडवाए, और अपने वस्त्र फाड़े हुए हैं, और अपके अपके अपके हाथ में बलि और धूप लिये हुए अपके अपके को काटे हुए हैं, कि अपके अपके अपके घर को ले जाएं। भगवान।
6 और नतन्याह का पुत्र इश्माएल उन से भेंट करने को मिस्पा से निकला, और चलते-चलते रोता रहा; और जब वह उन से मिला, तब उस ने उन से कहा, अहीकाम के पुत्र गदल्याह के पास आओ।
7 और जब वे नगर के बीच में आए, तब नतन्याह के पुत्र इश्माएल ने उन्हें घात करके गड़हे के बीच में डाल दिया, और उन लोगोंको जो उसके संग थे।
8 परन्तु उन में दस पुरूष मिले, जो इश्माएल से कहने लगे, कि हम को न मार; क्‍योंकि हमारे पास खेत में गेहूं, जव, तेल, और मधु का भण्डार है। इसलिए उसने मना किया, और उन्हें उनके भाइयों के बीच में नहीं मारा।
9 जिस गड़हे में इश्माएल ने गदल्याह के कारण मारे हुए पुरूषोंकी सब लोथें डालीं, वही वह गड़हा था, जिसे राजा आसा ने इस्राएल के राजा बाशा के डर से बनवाया था; और नतन्याह के पुत्र इश्माएल ने उसे मारे हुओं से भर दिया।
10 तब इश्माएल उन सब लोगोंको जो मिस्पा में रह गए थे, वरन राजपुत्रियोंको, और मिस्पा में रहने वाले सब लोगोंको, जिन्हें जल्लादोंके प्रधान नबूजर-अदान ने अहीकाम के पुत्र गदल्याह को सौंप दिया या, बन्धुआई में ले गया; और नतन्याह का पुत्र इश्माएल उन्हें बन्धुआई में ले गया, और अम्मोनियोंके पास जाने को चला।
11 जब कारेह के पुत्र योहानान ने और उसके संगी सेना के सब प्रधानोंने उस सब विपत्ति के विषय में जो नतन्याह के पुत्र इश्माएल ने की या, सुनीं,
12 तब वे सब पुरूषोंको लेकर नतन्याह के पुत्र इश्माएल से लड़ने को गए, और उसे गिबोन के बड़े जल के पास पाया।
13 जब इश्माएल के संग के सब लोगोंने कारेह के पुत्र योहानान और उसके संगी सेना के सब प्रधानोंको देखा, तब वे आनन्दित हुए।
14 तब जितने लोग इश्माएल को बन्धुआई में मिस्पा से ले गए थे, वे सब घूमकर कारेह के पुत्र योहानान के पास चले गए।
15 परन्तु नतन्याह का पुत्र इश्माएल आठ पुरूषों समेत योहानान से बच निकला, और अम्मोनियों के पास चला गया।
16 तब कारेह के पुत्र योहानान, और उसके संगी सेना के सब प्रधानोंको, और उन सब बचे हुओं को, जिन्हें उस ने नतन्याह के पुत्र इश्माएल के हाथ से मिस्पा से छुड़ा लिया या, और उसके बाद उसके पुत्र गदल्याह को घात किया या। अहीकाम, यहाँ तक कि वीर योद्धा, और स्त्रियाँ, बालक, और खोजे, जिन्हें वह गिबोन से फिर ले आया था;
17 और वे चले गए, और किम्हाम के निवास स्थान में, जो बेतलेहेम के पास है, रहने लगे, कि मिस्र में प्रवेश करें,
18 कसदियों के कारण; क्योंकि वे उन से डरते थे, क्योंकि नतन्याह के पुत्र इश्माएल ने अहीकाम के पुत्र गदल्याह को मार डाला था, जिसे बाबुल के राजा ने देश में राज्यपाल बनाया था।

 

अध्याय 42

यिर्मयाह यहूदिया में योहानान की सुरक्षा और मिस्र में विनाश का आश्वासन देता है।

1 तब सब सेनापति, और कारेह का पुत्र योहानान, और होशैया का पुत्र याजन्याह, और छोटे से लेकर बड़े तक सब लोग निकट आए,
2 और यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता से कहा, हम तुझ से बिनती करते हैं, कि हमारी बिनती तेरे साम्हने मान ली जाए, और इन सब बचे हुओंके लिथे अपके परमेश्वर यहोवा से हमारे लिथे प्रार्यना करे; (क्योंकि हम बचे हुए हैं, परन्तु बहुतों में से थोड़े ही हैं, जैसे तेरी आंखों से हम पर दृष्टि पड़ती है;)
3 कि तेरा परमेश्वर यहोवा हमें वह मार्ग दिखाए जिस में हम चलें, और जो काम हम करें।
4 तब यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता ने उन से कहा, मैं ने तुम्हारी सुन ली है; देख, मैं तेरे वचनोंके अनुसार तेरे परमेश्वर यहोवा से प्रार्यना करूंगा; और ऐसा होगा, कि जो कुछ यहोवा तुझे उत्तर देगा, वही मैं तुझे बताऊंगा; मैं तुमसे कुछ भी वापस नहीं रखूंगा।
5 तब उन्होंने यिर्मयाह से कहा, यहोवा हमारे बीच में सच्चा और विश्वासयोग्य साक्षी ठहरे, यदि हम उन सब बातोंके अनुसार न करें जिनके लिये तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे हमारे पास भेजे।
6 चाहे अच्छा हो, चाहे बुरा हो, हम अपके परमेश्वर यहोवा की बात मानेंगे, जिसके पास हम तुझे भेजते हैं; कि जब हम अपके परमेश्वर यहोवा की बात मानें, तब हमारा भला हो।
7 दस दिन के बाद ऐसा हुआ कि यहोवा का वचन यिर्मयाह के पास पहुंचा।
8 तब उस ने कारेह के पुत्र योहानान को, और सब सेनापतियोंको जो उसके संग थे, और सब लोगोंको जो छोटे से ले कर बड़े तक थे, बुलवा भेजा,
9 और उन से कहा, इस्राएल का परमेश्वर यहोवा योंकहता है, जिस के पास तुम ने मुझे अपनी बिनती करने को उसके साम्हने भेजा था;
10 यदि तू अब भी इस देश में बना रहेगा, तो मैं तुझे दृढ़ करूंगा, और ढा न दूंगा; मैं तुझे रोपूंगा, और न तोड़ूंगा; और जो विपत्ति मैं ने तुझ से की है उसको मैं दूर करूंगा।
11 बाबुल के राजा से मत डरना, जिस से तुम डरते हो; उस से मत डरो, यहोवा की यही वाणी है; क्योंकि मैं तेरा उद्धार करने और तुझे उसके हाथ से छुड़ाने के लिथे तेरे संग हूं।
12 और मैं तुझ पर दया करूंगा, कि वह तुझ पर दया करे, और तुझे अपके देश में फिर लौटा दे।
13 परन्तु यदि तुम कहते हो, कि हम इस देश में निवास न करेंगे, और न अपने परमेश्वर यहोवा की बात मानेंगे,
14 कहा, नहीं; परन्‍तु हम मिस्र देश में जाएंगे, जहां हम न युद्ध देखेंगे, और न नरसिंगा का शब्द सुनेंगे, और न रोटी के भूखे होंगे; और हम वहीं रहेंगे;
15 और अब हे यहूदा के बचे हुओं, यहोवा का वचन सुनो; सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर यों कहता है; यदि तुम अपना मुंह मिस्र में प्रवेश करने के लिए पूरी तरह से निर्धारित करते हो, और वहां रहने के लिए जाते हो;
16 तब ऐसा होगा कि जिस तलवार से तुम डरते हो, वह वहां मिस्र देश में तुम्हें पकड़ लेगी; और जिस अकाल से तुम डरते हो, वह मिस्र देश में तुम्हारे पीछे पीछे होगा; और वहीं तुम मरोगे।
17 ऐसा ही सब पुरूषोंके साथ होगा, जो मिस्र में रहने के लिथे अपके मुंह के बल चले जाएं; वे तलवार, अकाल, और मरी से मरेंगे; और उन में से कोई न बचेगा, और न उस विपत्ति से बचा रहेगा जो मैं उन पर लाऊंगा।
18 क्योंकि सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर यों कहता है; जैसे मेरा कोप और मेरी जलजलाहट यरूशलेम के निवासियों पर भड़क उठी है; जब तुम मिस्र में प्रवेश करोगे तब मेरा जलजलाहट तुम पर भड़केगा; और तुम एक दण्ड, और एक विस्मय, और एक शाप, और एक नामधराई होगे; और तुम इस स्थान को फिर कभी न देखोगे।
19 यहोवा ने तुम्हारे विषय में कहा है, हे यहूदा के बचे हुओं; मिस्र में मत जाओ; निश्चय जान लो, कि मैं ने आज के दिन तुम्हें चिताया है।
20 क्योंकि जब तुम ने अपके परमेश्वर यहोवा के पास यह कहके मेरे लिथे अपके लिथे अपके परमेश्वर यहोवा से बिनती करके मुझे अपके मन में खोया या; और जो कुछ हमारा परमेश्वर यहोवा कहे, उसी के अनुसार हम से कह, और हम उसे करेंगे।
21 और अब मैं ने आज के दिन तुम से यह कहा है, कि तुम ने अपके परमेश्वर यहोवा की बात नहीं मानी, और जो कुछ उस ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है, उस पर तुम ने नहीं माना।
22 सो अब निश्चय जान लो, कि जिस स्यान में तुम जाना और परदेश जाना चाहते हो, उस में तुम तलवार, और अकाल, और मरी से मरोगे।

 

अध्याय 43

योहानान यिर्मयाह की भविष्यवाणी को बदनाम करता है - यिर्मयाह बेबीलोनियों द्वारा मिस्र पर विजय की भविष्यवाणी करता है।

1 और ऐसा हुआ, कि जब यिर्मयाह ने सब लोगों से उनके परमेश्वर यहोवा की सारी बातें कहनी समाप्त कर दीं, जिसके लिए उनके परमेश्वर यहोवा ने उन के पास ये सब बातें कह सुनाईं,
2 तब होशायाह के पुत्र अजर्याह, कारेह के पुत्र योहानान, और सब घमण्डियोंने यिर्मयाह से कहा, कि तू झूठ बोलता है; हमारे परमेश्वर यहोवा ने तुझे यह कहने के लिथे नहीं भेजा है, कि मिस्र में रहने को न जाना;
3 परन्तु नेरिय्याह का पुत्र बारूक तुझ को हमारे विरुद्ध चढ़ाई करता है, कि हम को कसदियोंके वश में कर दे, कि वे हम को मार डालें, और बन्धुओं को बाबेल ले जाएं।
4 तब कारेह के पुत्र योहानान, और सब सेनापतियों, और सब लोगोंने यहोवा की यह बात न मानी, कि यहूदा देश में बसे।
5 परन्तु कारेह के पुत्र योहानान और सेना के सब प्रधानोंने यहूदा के सब बचे हुओं को, जो सब जातियोंसे जहां वे भगाए गए थे, यहूदा देश में रहने के लिथे ले लिया;
6 क्या पुरूष, क्या औरत, क्या लड़के, और राजकुमारियां, और जितने पुरूष नबूजर-अदान प्रधान सेनापति, शापान के पुत्र अहीकाम के पुत्र गदल्याह, और यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता, और बारूक के पुत्र बारूक के संग छोड़ गए थे, नेरिया।
7 सो वे मिस्र देश में आए; क्योंकि उन्होंने यहोवा की बात नहीं मानी; इस प्रकार वे तहपन्हेस को भी आए।
8 तब यहोवा का यह वचन तहपन्हेस में यिर्मयाह के पास पहुंचा,
9 बड़े बड़े मणि अपके हाथ में ले, और उस मिट्टी में जो यहूदा के लोगोंके साम्हने तहपन्हेस में फिरौन के भवन के द्वार पर है उस भट्ठे में छिपा दे;
10 और उन से कहो, सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर योंकहता है; देख, मैं अपके दास बेबीलोन के राजा नबूकदनेस्सर को भेजूंगा, और अपक्की राजगद्दी उन पत्यरोंपर जो मैं ने छिपाए हैं, रखूंगा; और वह उन पर अपना राजभवन फैलाए।
11 और जब वह आयेगा, तब वह मिस्र देश को ऐसा मार डालेगा, और जो मारे जाने के लिथे हैं उन्हें छुड़ाएगा; और जैसे कि कैद में कैद के लिए हैं; और जैसे तलवार से तलवार के लिथे हैं।
12 और मैं मिस्र के देवताओं के घरोंमें आग लगाऊंगा; और वह उन्हें जलाकर बन्धुआई में ले जाएगा; और जिस प्रकार चरवाहा अपके वस्त्र पहिनाता है, वैसे ही वह मिस्र देश के साम्हने पांति बान्धे; और वह कुशल से वहां से निकल जाएगा।
13 वह बेतशेमेश की मूरतोंको जो मिस्र देश में है तोड़ डालेगा; और वह मिस्रियोंके देवताओं के घरोंको आग में झोंक देगा।

 

अध्याय 44

उनकी मूर्तिपूजा के लिए यहूदा का उजाड़ - यहूदियों का हठ।

1 मिस्र देश के मिगदोल, तहपन्हेस, नोप और पत्रोस के देश में रहनेवाले सब यहूदियोंके विषय में यह वचन यिर्मयाह के पास पहुंचा,
2 सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर यों कहता है; जो विपत्ति मैं ने यरूशलेम और यहूदा के सब नगरोंमें डाल दी है, उन सभोंको तुम ने देखा है; और देखो, वे आज के दिन उजाड़ हैं, और कोई उस में नहीं रहता;
3 अपनी उस दुष्टता के कारण जो उन्होंने मुझे भड़काने के लिथे की या, और धूप जलाने, और पराए देवताओं की उपासना करने को गए, जिन्हें वे न तो तुम जानते थे, और न तुम्हारे पुरखा।
4 तौभी मैं ने अपके सब दास भविष्यद्वक्ताओंको तेरे पास यह आज्ञा देकर भोर को उठकर यह कहला भेजा, कि हे घिनौने काम न कर, जिस से मैं बैर रखता हूं।
5 तौभी उन्होंने न तो सुनी, और न अपक्की दुष्टता से फिरने को, और पराए देवताओं के लिथे धूप न जलाने की ओर कान लगाया।
6 इसलिथे मेरी जलजलाहट और कोप भड़क उठे, और यहूदा के नगरोंऔर यरूशलेम की सड़कोंमें भड़क उठे; और वे आज के दिन के समान उजाड़ और उजाड़ हो गए हैं।
7 इसलिथे अब सेनाओं का परमेश्वर यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर यहोवा योंकहता है; इसलिथे तुम अपने प्राणोंके विरुद्ध यह बड़ी बुराई करते हो, कि तुम में से पुरूष, और स्त्री, क्या बालक, और दूध पिलानेवाले, को यहूदा में से नाश करो, कि कोई तुम्हारे रहने के लिथे न बचे।
8 इसलिथे कि तुम अपके हाथ के कामोंके द्वारा मुझ पर क्रोध करके पराए देवताओं के लिथे मिस्र देश में जहां तुम रहने को जाओगे, धूप जलाओगे, जिस से तुम अपने आप को नाश कर सको, और तुम शाप और नामधर जाओ। पृथ्वी के सभी राष्ट्रों के बीच?
9 क्या तुम अपने पुरखाओं की दुष्टता, और यहूदा के राजाओं की दुष्टता, और उनकी पत्नियों की दुष्टता, और अपक्की दुष्टता, और अपक्की पत्नियोंकी दुष्टता को भूल गए हो, जो उन्होंने यहूदा देश में और देश में की हैं। यरूशलेम की सड़कों?
10 वे आज के दिन तक दीन नहीं हुए, न वे डरते हैं, और न मेरी व्यवस्था, और न मेरी विधियों पर चलते हैं, जिन्हें मैं ने तेरे और तेरे पुरखाओं के साम्हने रखा है।
11 इसलिथे इस्राएल का परमेश्वर सेनाओं का यहोवा योंकहता है; देख, मैं तेरे विरुद्ध अपना मुंह बुराई करके करूंगा, और सारे यहूदा को नाश कर डालूंगा।
12 और मैं यहूदा के बचे हुओं को, जो मिस्र देश में रहने के लिथे जाने के लिथे अपके मुंह के बल खड़े हैं, ले लूंगा, और वे सब नाश होकर मिस्र देश में गिर जाएंगे; वे तलवार और अकाल से भी नाश किए जाएंगे, और वे छोटे से ले कर बड़े तक तलवार और अकाल से मरेंगे; और वे दण्ड, और विस्मय, और शाप, और नामधराई ठहरेंगे।
13 क्योंकि मैं मिस्र देश में रहनेवालोंको दण्ड दूंगा, जैसा मैं ने यरूशलेम को तलवार, और अकाल, और मरी से दण्ड दिया है;
14 और यहूदा के बचे हुओं में से जो मिस्र देश में परदेश जाने को गए हैं, वे न बचेंगे और न रहेंगे, कि वे यहूदा देश में लौट जाएं, जिस में वे रहने के लिथे फिर लौटना चाहते हैं; क्योंकि कोई नहीं लौटेगा, परन्तु जो बच निकलेगा।
15 तब जितने पुरूष यह जानते थे, कि उनकी पत्नियां दूसरे देवताओं के लिये धूप जलाती हैं, और जितनी स्त्रियां पास में खड़ी रहती हैं, वे सब वरन मिस्र देश के पत्रोस में रहनेवाले सब लोगोंने यिर्मयाह को उत्तर देकर कहा,
16 जो वचन तू ने यहोवा के नाम से हम से कहा है, हम उसकी न मानेंगे।
17 परन्तु जो कुछ अपके मुंह से निकले वही हम करेंगे, कि स्वर्ग की रानी के लिथे धूप जलाएं, और अर्घ्यबलि चढ़ाएं, जैसा हम ने और अपके पुरखाओं, राजाओं, हाकिम, यहूदा के नगरों में, और यरूशलेम की सड़कों में; क्‍योंकि उस समय हमारे पास बहुत से भोजन थे, और हम चंगे थे, और कोई बुराई नहीं देखी,
18 परन्तु जब से हम स्वर्ग की रानी के लिथे धूप जलाने, और अर्घ करने को निकले हैं, तब से हम सब कुछ चाहते हैं, और तलवार और अकाल से भस्म हो गए हैं।
19 और जब हम ने स्वर्ग की रानी के लिथे धूप जलाया, और अर्यात्‌ उसके लिथे अर्घ्य डाला, तब क्या अपके आदमियोंके बिना उसकी उपासना के लिथे उसकी रोटियां बनाकर उसके लिथे अर्घ उंडेल दिया?
20 तब यिर्मयाह ने सब लोगों से, क्या पुरूषों, स्त्रियों से, और उन सब लोगों से जिन्होंने उसे उत्तर दिया था, कहा,
21 जो धूप तुम ने यहूदा के नगरों में, और यरूशलेम के चौकोंमें जलाई, और अपके पुरखाओं, राजाओं, हाकिमोंऔर देश के लोगोंने यहोवा ने उनको स्मरण न रखा, और न भीतर आए उसका मन?
22 इसलिथे कि तेरे बुरे कामों, और घिनौने कामोंके कारण जो तू ने किए हैं, यहोवा फिर सह न सके; इस कारण तेरा देश उजाड़, और विस्मय, और अभिशाप है, जिसका कोई निवासी न रहा, जैसा कि आज के दिन है।
23 क्योंकि तुम ने धूप जलाई, और यहोवा के विरुद्ध पाप किया है, और न तो यहोवा की बात मानी है, और न उसकी व्यवस्या, न उसकी विधियों, और चितौनियोंपर नहीं चले; इस कारण यह विपत्ति आज के दिन की नाई तुम्हारे साथ हुई है।
24 फिर यिर्मयाह ने सब लोगोंसे, और सब स्त्रियोंसे कहा, हे मिस्र देश के सब यहूदी, यहोवा का वचन सुनो;
25 इस्राएल का परमेश्वर सेनाओं का यहोवा योंकहता है, कि तुम और तुम्हारी पत्नियोंने अपके अपके मुंह से बातें की हैं, और अपके ही हाथ से यह वचन पूरा किया है, कि हम अपक्की मन्नतें पूरी करेंगे, कि हम ने अपक्की अपक्की मन्नतें मानी हैं, कि हम उनके लिथे धूप जलाएं। स्वर्ग की रानी, और उसके लिथे अर्घ उंडेलने को; तुम निश्चय अपनी मन्नतें पूरी करोगे, और अपनी मन्नतें अवश्य पूरी करोगे।
26 इसलिथे मिस्र देश में रहने वाले सब यहूदी, यहोवा का वचन सुनो; देख, यहोवा की यह वाणी है, मैं ने अपके बड़े नाम की शपथ खाई है, कि सारे मिस्र देश में यहूदा के किसी पुरूष के मुंह में फिर मेरा नाम यह कहकर न रखा जाएगा, कि परमेश्वर यहोवा जीवित है।
27 देख, मैं भलाई के लिये नहीं, परन्तु बुराई के लिये उन की चौकसी करूंगा; और यहूदा के जितने पुरूष मिस्र देश में हों, वे सब तलवार और अकाल से तब तक नाश किए जाएंगे, जब तक उनका अन्त न हो जाए।
28 तौभी तलवार से बचनेवाले थोड़े ही मिस्र देश से निकलकर यहूदा देश में लौट आएंगे; और यहूदा के सब बचे हुए लोग जो मिस्र देश में रहने को चले गए हैं, वे जानेंगे कि मेरी वा उनकी बातें किसकी ठहरेंगी।
29 और यहोवा की यह वाणी है, तेरे लिथे यह एक चिन्ह ठहरेगा, कि मैं तुझे इस स्यान में दण्ड दूंगा, कि तू जान ले, कि मेरे वचन निश्चय ही तेरे विरुद्ध खड़े होंगे;
30 यहोवा यों कहता है; देख, मैं मिस्र के राजा फिरौन-होप्रा को उसके शत्रुओं, और उसके प्राण के खोजियोंके वश में कर दूंगा; जैसा कि मैं ने यहूदा के राजा सिदकिय्याह को उसके शत्रु बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर के हाथ में कर दिया, और जो उसके प्राण का खोजी था।

 

अध्याय 45

बारूक निराश।

1 वह वचन जो यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता ने नेरिय्याह के पुत्र बारूक से कहा या, जब वह यहूदा के राजा योशिय्याह के पुत्र यहोयाकीम के चौथे वर्ष में यिर्मयाह के मुख पर एक पुस्तक में लिखे हुए यह कह चुका,
2 हे बारूक, इस्राएल का परमेश्वर यहोवा तुझ से यों कहता है;
3 तू ने कहा, अब मुझ पर हाय! क्योंकि यहोवा ने मेरे शोक को और बढ़ा दिया है; मैं अपनी आहें भरते हुए बेहोश हो गया, और मुझे कोई आराम नहीं मिला।
4 उस से यों कहना, यहोवा योंकहता है; देख, जो मैं ने बनाया है, उसे मैं तोड़ डालूंगा, और जो मैं ने बोया है, उसे मैं इस सारे देश को भी तोड़ दूंगा।
5 और क्या तू अपके लिथे बड़ी वस्तुएं ढूंढता है? उनकी तलाश नहीं; क्योंकि देख, मैं सब प्राणियों पर विपत्ति डालूंगा, यहोवा की यही वाणी है; परन्‍तु जितने स्‍थानोंमें तू जाएगा वहां मैं तेरा प्राण तुझे अहेर करूंगा।

 

अध्याय 46

यिर्मयाह फिरौन की सेना को उखाड़ फेंकने और मिस्र पर विजय प्राप्त करने की भविष्यवाणी करता है - वह याकूब को दिलासा देता है।

1 यहोवा का वह वचन जो अन्यजातियों के विरुद्ध यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के पास पहुंचा;
2 मिस्र के विरुद्ध, मिस्र के राजा फिरौन-नको की सेना के खिलाफ, जो चार्केमिश में फरात नदी के किनारे था, जिसे बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ने यहूदा के राजा योशिय्याह के पुत्र यहोयाकीम के चौथे वर्ष में मारा था।
3 बन्धन और ढाल को आज्ञा दे, और युद्ध करने को निकट आ।
4 घोड़ों की कमर कस लो; और हे सवारों, उठ, और अपके टोप पहिने हुए खड़े हो; भालों को उजाड़ देना, और लुटेरों को पहिनाना।
5 मैं ने उन्हें क्यों निराश और पीछे मुड़ते देखा है? और उनके शूरवीरों को पीटा जाता है, और वे भागे जाते हैं, और पीछे मुड़कर नहीं देखते; क्योंकि चारों ओर भय था, यहोवा की यही वाणी है।
6 न फुर्ती से भागे, और न शूरवीर भागे; वे ठोकर खाकर उत्तर दिशा की ओर परात महानद के पास गिर पड़ेंगे।
7 यह कौन है जो जलप्रलय की नाईं ऊपर आता है, जिसका जल नदियों की नाईं बह जाता है?
8 मिस्र जलप्रलय की नाईं उठ खड़ा होता है, और उसका जल नदियोंके नाईं बह जाता है; और उस ने कहा, मैं चढ़कर पृय्वी को ढंपूंगा; मैं उस नगर और उसके निवासियोंको नाश करूंगा।
9 हे घोड़ों, ऊपर आ; हे रथों, और क्रोध करो; और शूरवीरोंको आगे आने दो; कूशी और लिबियाई, जो ढाल को संभालते हैं; और लिडियन, जो धनुष को संभालते और मोड़ते हैं।
10 क्योंकि सेनाओं के परमेश्वर यहोवा का यह दिन पलटा लेने का दिन है, कि वह अपके द्रोहियोंसे पलटा ले; और तलवार भस्म हो जाएगी, और वह उनके लोहू से तृप्त और मतवाला हो जाएगी; क्योंकि सेनाओं का परमेश्वर यहोवा उत्तर देश में परात नदी के किनारे बलि चढ़ाता है।
11 हे मिस्र की बेटी, गिलाद को जाकर बलसान ले ले; व्यर्थ ही बहुत सी औषधियों का प्रयोग करना; क्योंकि तू चंगा नहीं होगा।
12 अन्यजातियों ने तेरी लज्जा के विषय में सुना है, और तेरी दोहाई से देश भर गया है; क्योंकि पराक्रमी ने पराक्रमी से ठोकर खाई है, और वे दोनों एक साथ गिरे पड़े हैं।
13 जो वचन यहोवा ने यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता से कहा या, कि बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ने आकर मिस्र देश को क्या मारा।
14 मिस्र में प्रचार करना, और मिग्दोल में प्रकाशित करना, और नोप और तहपन्हेस में प्रकाशित करना; तुम कहो, स्थिर खड़े होकर तैयार हो जाओ; क्योंकि तलवार तेरे चारोंओर भस्म करेगी।
15तेरे शूरवीर क्यों नाश हो गए? वे खड़े नहीं रहे, क्योंकि यहोवा ने उन्हें भगा दिया।
16 उस ने बहुतों को गिराया, हां, एक दूसरे पर गिर पड़ा; और उन्होंने कहा, उठ, हम अपके अपके लोगोंको, और अपके जन्म के देश में अन्धेर करनेवाली तलवार के साम्हने फिर जाएं।
17 वहां वे दोहाई देने लगे, कि मिस्र का राजा फिरौन तो केवल एक कोलाहल है; वह नियत समय बीत चुका है।
18 राजा, जिसका नाम सेनाओं का यहोवा है, उसकी यह वाणी है, मेरे जीवन की सौगन्ध, निश्चय जैसे ताबोर पहाड़ोंमें से है, और जैसा कर्मेल समुद्र के किनारे है, वैसा ही वह आएगा।
19 हे मिस्र की रहनेवाली बेटी, बन्धुआई में जाने के लिथे अपने को सुसज्जित कर; क्योंकि नोप उजाड़ और उजाड़ हो जाएगा और उसका कोई निवासी न होगा।
20 मिस्र तो बहुत सुन्दर बछिया के समान है, परन्तु विनाश आनेवाला है; वह उत्तर से निकलती है।
21 और उसके भाड़े के लोग उसके बीच में पले हुए बछड़ों के समान हैं; क्‍योंकि वे भी पीछे मुड़े हुए हैं, और साथ-साथ भाग गए हैं; वे खड़े न रहे, क्योंकि उन पर विपत्ति का दिन और उनके दर्शन का समय आ पहुंचा।
22 उसका शब्द सर्प की नाईं चलेगा; क्योंकि वे एक सेना के साथ चढ़ाई करेंगे, और कुल्हाड़ियों के साथ उसके खिलाफ आएंगे, जैसे लकड़ी काटने वाले।
23 वे उसके जंगल को काट डालेंगे, यहोवा की यह वाणी है, यद्यिप उसकी खोजी न जा सकती; क्योंकि वे टिड्डियों से बढ़कर हैं, और असंख्य हैं।
24 मिस्र की बेटी लज्जित होगी; वह उत्तर के लोगों के हाथ में कर दी जाएगी।
25 सेनाओं का यहोवा, इस्राएल का परमेश्वर योंकहता है; देख, मैं नो, और फिरौन, और मिस्र की भीड़ को उनके देवताओं, और उनके राजाओं समेत दण्ड दूंगा; फिरौन, और जितने उस पर भरोसा रखते हैं, वे सब हैं;
26 और उनको उनके प्राण के खोजियोंके वश में, और बाबुल और उसके कर्मचारियोंके वश में कर देगा; और उसके बाद वह पुराने दिनों की नाई बसा रहेगा, यहोवा की यही वाणी है।
27 परन्तु हे मेरे दास याकूब, तू मत डर, और हे इस्राएल, निराश न हो; क्योंकि देख, मैं तुझे दूर से, और तेरे वंश को उनके बन्धुआई के देश से छुड़ाऊंगा; और याकूब लौटकर चैन और चैन से रहेगा, और कोई उसे डराने न पाएगा।
28 हे मेरे दास याकूब, मत डर, यहोवा की यही वाणी है; क्योंकि मैं तेरे संग हूं; क्योंकि मैं उन सब जातियोंका अन्त कर डालूंगा, जिन में मैं ने तुझ को भगा दिया है; तौभी मैं तेरा अन्त न करूंगा, वरन तुझे ठीक कर दूंगा; तौभी मैं तुझे निर्दोष न छोड़ूंगा।

 

अध्याय 47

पलिश्तियों का विनाश।

1 यहोवा का वह वचन जो यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के पास पलिश्तियोंके विरुद्ध पहुंचा, उसके पहिले फिरौन ने गाजा को मार लिया।
2 यहोवा यों कहता है; देखो, जल उत्तर दिशा से ऊपर उठेगा, और जल-प्रलय होगा, और देश और जो कुछ उस में है, सब बह जाएगा; नगर, और जो उस में रहते हैं; तब लोग दोहाई देंगे, और देश के सब निवासी जयजयकार करेंगे।
3 अपके बलवन्त घोड़ोंके खुरोंके चलने, और रथोंके गरजने, और पहिए के गड़गड़ाहट के शब्द से पिता अपके बालकोंकी दुर्बलता देखकर उनकी ओर फिर न देखे;
4 उस दिन के कारण जो सब पलिश्तियोंको लूटने, और सोर और सीदोन के सब बचे हुए सहायकोंको नाश करने के लिथे आएगा; क्योंकि यहोवा कप्तोर देश के बचे हुओं पलिश्तियोंको नाश करेगा।
5 गाजा में गंजापन आ गया है; अशकलोन उनकी तराई के बचे हुओं समेत नाश हो गया; तू कब तक अपने आप को काटेगा?
6 हे यहोवा की तलवार, तू कब तक चुप रहेगा? अपने आप को अपनी म्यान में रखो, आराम करो, और शांत रहो।
7 यह क्योंकर शान्त हो सकता है, कि यहोवा ने उसको अश्कलोन और समुद्रतट पर आज्ञा दी है? वहाँ उन्होंने इसे नियुक्त किया है।

 

अध्याय 48

मोआब का न्याय — मोआब की पुनर्स्थापना।

1 सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर मोआब के विरुद्ध यों कहता है; नीबो पर हाय! क्योंकि यह खराब हो गया है; किर्यतैम भ्रमित और पकड़ा गया है; मिसगैब हैरान और निराश है।
2 फिर मोआब की स्तुति न होगी; उन्होंने हेशबोन में उसके विरुद्ध बुराई की युक्ति की है; आओ, और हम इसे एक राष्ट्र होने से काट दें। हे पागलों, तू भी नाश किया जाएगा; तलवार तेरा पीछा करेगी।
3 होरोनैम की ओर से दोहाई देने का शब्द होगा, वह विनाश और बड़े विनाश का होगा।
4 मोआब नाश हो गया; उसके छोटों ने रोने की आवाज सुनी है।
5 क्‍योंकि लूहीत की चढ़ाई में नित्य रोना-धोना होगा; क्योंकि होरोनैम के पतन में शत्रुओं ने विनाश की दोहाई सुनी है।
6 भागो, अपके प्राणोंको बचा, और जंगल में रहनेवाले हीथ के समान हो।
7 क्योंकि तू ने अपके कामोंऔर अपने भण्डार पर भरोसा रखा है, इसलिए तू पकड़ा जाएगा; और कमोश अपके याजकोंऔर हाकिमोंके संग बन्धुआई में जाएगा।
8 और हर एक नगर पर लूट करने वाला आ पड़ेगा, और कोई नगर न छूटेगा; तराई भी नाश हो जाएगी, और मैदान नाश हो जाएगा, जैसा यहोवा ने कहा है।
9 मोआब को पंख दो, कि वह भागकर भाग जाए; क्योंकि उसके नगर उजाड़ हो जाएंगे, और उनमें कोई रहने का स्थान न रहेगा।
10 शापित हो वह जो छल से यहोवा का काम करे, और वह शापित हो जो अपनी तलवार को लोहू से बचाए रखता है।
11 मोआब तो बचपन से ही पूर्व की ओर रहा, और वह अपके पांवोंपर बस गया, और न तो पात्र से पात्र में गिरा, और न बंधुआई में गया; इस कारण उसका स्वाद उसी में बना रहा, और उसकी सुगन्ध नहीं बदली।
12 इसलिथे देखो, यहोवा की यह वाणी है, ऐसे दिन आते हैं, कि मैं उसके पास ऐसे पथिकोंको भेजूंगा, जो उसे भटकाएंगे, और उसके पात्र खाली कर देंगे, और उनके प्याले तोड़ डालेंगे।
13 और मोआब कमोश से लज्जित होगा, जैसे इस्राएल का घराना बेतेल के भरोसे के कारण लज्जित हुआ।
14 तुम क्योंकर कहते हो, कि हम युद्ध के लिये पराक्रमी और बलवान हैं?
15 मोआब नाश हो गया, और अपके नगरोंमें से निकल गया, और उसके चुने हुए जवान घात करने को गए हैं, राजा, जिसका नाम सेनाओं का यहोवा है, उसकी यही वाणी है।
16 मोआब की विपत्ति निकट है, और उसका क्लेश शीघ्र ही आने वाला है।
17 हे उसके चारोंओर के सब उस पर विलाप करो; और जो उसका नाम जानते हैं, वे सब कहते हैं, कि बलवन्त लाठी, और सुन्दर लाठी कैसे टूट गई है!
18 हे दीबोन की रहनेवाली बेटी, अपके तेज से उतरकर प्यासी बैठी; क्योंकि मोआब का बिगाड़ने वाला तुझ पर चढ़ाई करेगा, और वह तेरे गढ़ोंको नाश करेगा।
19 हे अरोएर के निवासी, मार्ग में खड़े होकर जासूसी करो; जो भागता है, और जो बच जाता है, उस से पूछ, कि क्या हुआ है?
20 मोआब चकित है; क्योंकि वह टूट गया है; चीखना और रोना; अर्नोन में तुम से कहना, कि मोआब लूट लिया गया है,
21 और तराई देश में न्याय आ गया है; होलोन पर, और यहजा पर, और मेपात पर,
22 और दीबोन, और नबो, और बेतदिबलतैम पर,
23 और किर्यतैम, और बेतगामूल, और बेतमोन पर,
24 और करिय्योत पर, और बोस्रा पर, और मोआब देश के सब नगरोंपर, चाहे वह दूर या निकट हो।
25 मोआब का सींग काट दिया गया, और उसका हाथ टूट गया, यहोवा की यही वाणी है।
26 उसे मतवाला बनाओ; क्योंकि उसने यहोवा के विरुद्ध अपनी बड़ाई की; मोआब भी अपक्की उल्टी करके लोटपोट हो जाएगा, और वह भी ठट्ठोंमें उड़ाएगा।
27 क्‍योंकि इस्राएल तेरा उपहास नहीं करता था? क्या वह चोरों के बीच पाया गया था? क्‍योंकि जब से तू ने उस की चर्चा की, तब से तू आनन्‍द के लिथे लपका।
28 हे मोआब के निवासियों, नगरोंको छोड़ कर चट्टान में निवास करो, और उस कबूतरी के समान हो जाओ, जो अपने मुंह के चारोंओर अपना घोंसला बनाती है।
29 हम ने मोआब का घमण्ड, उसका घमण्ड, और उसका अहंकार, और उसका घमण्ड, और उसके मन का घमण्ड सुना है।
30 यहोवा की यह वाणी है, मैं उसके कोप को जानता हूं; परन्तु ऐसा न हो; उसके झूठ का उस पर कोई असर नहीं होगा।
31 इसलिथे मैं मोआब के लिथे जयजयकार करूंगा, और सब मोआबियोंके लिथे दोहाई दूंगा; मेरा मन कीरहेरेस के लोगों के लिये विलाप करेगा।
32 हे सिबमा की दाखलता, मैं याजेर के रोने के संग तेरे लिथे रोऊंगा; तेरे पौधे समुद्र के पार चले गए हैं, वे याजेर के समुद्र तक पहुंच गए हैं; स्पॉइलर आपके गर्मियों के फलों और आपके विंटेज पर गिर गया है।
33 और बहुतायत के मैदान से, और मोआब के देश से आनन्द और आनन्द लिया जाता है; और मैं ने कुण्डों में से दाखरस गिरा दिया है; कोई ललकारते हुए न चलेगा; उनका ललकारना कोई ललकार न होगा।
34 हेशबोन की दुहाई से लेकर एलाले तक, और यहस तक वे सोअर से होरोनैम तक तीन वर्ष की बछिया की नाई अपके शब्द बोले हैं; क्योंकि निम्रीम का जल भी उजाड़ हो जाएगा।
35 यहोवा की यह वाणी है, कि ऊँचे स्थानों पर बलि चढ़ानेवाले, और अपके देवताओं के लिथे धूप जलानेवाले की यह वाणी है, मैं मोआब में न रहने दूंगा।
36 इसलिथे मेरा मन मोआबियोंके लिथे नलोंकी नाईं, और मेरा मन कीर-हेरेस के लोगोंके लिथे नलियोंके नाईं ललकारेगा; क्‍योंकि उसके पास जो धन है, वह नाश हो गया है।
37 क्‍योंकि सबका सिर गंजा, और सब दाढ़ी कटी हुई हो; सब हाथों पर कटोरियां हों, और कमर पर टाट लगे।
38 मोआब के सब घरों की छतों पर और उसकी गलियों में प्राय: विलाप होगा; क्योंकि मैं ने मोआब को ऐसे पात्र की नाईं तोड़ दिया है, जिसमें सुख नहीं, यहोवा की यही वाणी है।
39 वे यह कहते हुए जयजयकार करेंगे, कि यह कैसे टूट गया है! मोआब ने लज्जा से कैसे मुंह मोड़ लिया है! इस प्रकार मोआब उसके विषय में सब लोगों के लिये ठट्ठा और ठट्ठा करेगा।
40 क्योंकि यहोवा यों कहता है; देख, वह उकाब की नाईं उड़ेगा, और मोआब पर अपने पंख फैलाएगा।
41 करिय्योत ले लिया गया है, और गढ़ चकित हो गए हैं, और उस दिन मोआब के वीरोंके मन उस स्त्री के समान हो जाएंगे, जो पीड़ा में है।
42 और मोआब प्रजा होकर नाश किया जाएगा, क्योंकि उस ने यहोवा के विरुद्ध बड़ाई की है।
43 हे मोआब के रहने वालो, डर, और गड़हा और फन्दा तुझ पर होगा, यहोवा की यही वाणी है।
44 जो भय से भागे, वह गड़हे में गिरेगा; और जो कोई गड़हे में से निकले वह फन्दे में फंस जाए; क्योंकि मैं उस पर मोआब को वरन उनके दण्ड के वर्ष में ले आऊँगा, यहोवा की यही वाणी है।
45 जो भाग गए वे बल के कारण हेशबोन की छाया में खड़े रहे; परन्तु हेशबोन से आग, और सीहोन के बीच से एक ज्वाला निकलकर मोआब के कोने को, और उपद्रव करनेवालोंके सिर के मुकुट को भस्म कर देगी।
46 हे मोआब, तुझ पर हाय! कमोश के लोग नाश हो गए; क्योंकि तेरे बेटे बन्धुआई में हैं, और तेरी बेटियां बन्धुआई में हैं।
47 तौभी अन्त के दिनोंमें मैं मोआब की बन्धुआई में फिर लाऊंगा, यहोवा की यही वाणी है। मोआब का न्याय अब तक का है।

 

अध्याय 49

अम्मोनियों का न्याय - उनकी बहाली - एदोम का न्याय, दमिश्क का, केदार का, हासोर का, और एलाम का - एलाम का पुनस्थापन।

1 अम्मोनियों के विषय में यहोवा यों कहता है; क्या इस्राएल के कोई पुत्र नहीं है? क्या उसका कोई वारिस नहीं है? फिर उनका राजा गाद का वारिस क्यों हो गया, और उसकी प्रजा उसके नगरोंमें क्यों रहती है?
2 इसलिथे, यहोवा की यह वाणी है, ऐसे दिन आते हैं, कि मैं अम्मोनियोंके रब्बा में युद्ध का भय सुनाऊंगा; और वह उजाड़ ढेर हो जाए, और उसकी बेटियां आग में झोंक दी जाएं; तब इस्राएल उनके वारिस होंगे जो उसके वारिस थे, यहोवा की यही वाणी है।
3 हे हेशबोन, हाय, क्योंकि ऐ लूट लिया गया है; हे रब्बा की पुत्रियों, रोओ, टाट बान्धो, और विलाप करो, और बाड़ों के पास इधर-उधर भागो; क्‍योंकि उनका राजा और उसके याजक और उसके हाकिम एक संग बंधुआई में जाएंगे।
4 हे अपनी बहती हुई तराई, हे ढलती हुई बेटी, तू तराई में क्यों महिमा करता है? उस ने अपके भण्डार पर भरोसा रखते हुए कहा, मेरे पास कौन आएगा?
5 देख, सेनाओं के परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, कि मैं तेरे साय के सब लोगोंसे डरूंगा; और तुम में से हर एक को तुरन्त निकाल दिया जाएगा; और कोई भटकने वाले को इकट्ठा न करेगा।
6 और उसके बाद मैं अम्मोनियोंको बन्धुआई में फिर लाऊंगा, यहोवा की यही वाणी है।
7 एदोम के विषय में सेनाओं का यहोवा यों कहता है; क्या तेमान में बुद्धि नहीं रही? क्या सलाह विवेकपूर्ण से नष्ट हो गई है? क्या ज्ञान गायब हो गया है?
8 हे ददान के निवासियों, भाग जाओ, लौट आओ, गहरे में बसो; क्योंकि जिस समय मैं उस से भेंट करूंगा उस समय मैं उस पर एसाव की विपत्ति डालूंगा।
9 यदि अंगूर इकट्ठा करनेवाले तेरे पास आते, तो क्या वे कुछ फलते हुए अंगूरोंको न छोड़ देते? वे रात को चोर हैं, वे तब तक नाश करेंगे जब तक कि उनके पास पर्याप्त न हो।
10 परन्तु मैं ने एसाव को नंगा किया है, मैं ने उसके गुप्त स्थानोंको उघाड़ दिया है, और वह छिप न सकेगा; उसका वंश, और उसके भाई, और उसके पड़ोसी, और वह नहीं है।
11 अपके अनाथोंको छोड़ दे, मैं उनको जीवित रखूंगा; और तेरी विधवाएं मुझ पर भरोसा रखें।
12 क्योंकि यहोवा योंकहता है; देखो, जिन लोगों ने प्याला न पीने का निर्णय किया है, वे निश्चय ही मतवाले हुए हैं; और क्या तू वह है जो सर्वथा निर्दोष ठहरेगा? तू निर्दोष न ठहरेगा, वरन उसका पान अवश्य करना।
13 क्योंकि यहोवा की यह वाणी है, मैं ने अपक्की अपक्की शपय खाई है, कि बोस्रा उजाड़, नामधराई, उजाड़, और शाप ठहरेगा; और उसके सब नगर सदा के लिये उजाड़ हो जाएंगे।
14 मैं ने यहोवा की ओर से एक अफवाह सुनी है, और अन्यजातियोंके पास एक दूत यह कहकर भेजा जाता है, कि एक साथ इकट्ठा होकर उस पर चढ़ाई कर, और लड़ाई के लिथे उठ खड़ा हो।
15 क्योंकि देख, मैं तुझे अन्यजातियोंमें छोटा और मनुष्योंमें तुच्छ ठहराऊंगा।
16 हे चट्टान की दरारों में रहनेवाले, जो पहाड़ी की ऊंचाई को पकड़े हुए है, तेरे भय ने तुझे और तेरे मन के घमण्ड ने धोखा दिया है; चाहे तू अपना घोंसला उकाब के समान ऊंचा करे, तौभी मैं तुझे वहां से नीचे ले आऊंगा, यहोवा की यही वाणी है।
17 एदोम भी उजाड़ हो जाएगा; जो कोई उसके पास से चले वह चकित होगा, और उसकी सब विपत्तियों पर ताली बजाएगा।
18 जैसा सदोम और अमोरा और उसके पड़ोसी नगरों के ढाए जाने के समय यहोवा की यह वाणी है, कि वहां कोई मनुष्य न रहेगा, और न उस में कोई मनुष्य बसेगा।
19 देख, वह सिंह की नाईं यरदन के जल में से बलवानोंके निवास पर चढ़ाई करेगा; परन्तु मैं उसे एकाएक उस से दूर भगा दूंगा; और कौन चुना हुआ पुरूष है, कि मैं उसके ऊपर नियुक्‍त करूं? मेरे जैसा कौन है? और मुझे समय कौन ठहराएगा? और वह चरवाहा कौन है जो मेरे साम्हने खड़ा रहेगा?
20 इसलिथे यहोवा की उस युक्ति को सुनो, जो उस ने एदोम के विरुद्ध की है; और उसके उद्देश्य, कि उसने तेमान के निवासियों के विरुद्ध षड्यन्त्र रचा है; निःसन्देह भेड़-बकरियों में से छोटा ही उनको निकाल लेगा; निश्चय वह उनके निवासोंको उनके साथ उजाड़ देगा।
21 उनके गिरने के शब्द से पृय्वी कांप उठती है; उसके रोने का शब्द लाल समुद्र में सुना गया।
22 देखो, वह ऊपर आकर उकाब की नाईं उड़ेगा, और बोस्रा पर अपने पंख फैलाएगा; और उस समय एदोम के शूरवीरोंका मन उस स्त्री की नाईं होगा, जो पीड़ा में पड़ी रहती है।
23 दमिश्क के विषय में। हमात लज्जित हुआ, और अर्पाद; क्योंकि उन्होंने बुरा समाचार सुना है; वे बेहोश दिल हैं; समुद्र पर दु:ख है; यह शांत नहीं हो सकता।
24 दमिश्क निर्बल हो गया है, और भागने को हो गया है, और उस पर भय छा गया है; पीड़ा और दुखों ने उसे एक महिला के रूप में पीड़ा में ले लिया है।
25 स्तुति का नगर, मेरे आनन्द का नगर, कैसे नहीं बचा!
26 इस कारण उसके जवान उसके चौकोंमें गिरेंगे, और सब योद्धा उस दिन नाश किए जाएंगे, सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है।
27 और मैं दमिश्क की शहरपनाह में आग लगाऊंगा, और वह बेन्हदद के महलोंको भस्म कर देगी।
28 केदार के विषय में, और हासोर के राज्यों के विषय में, जिन्हें बाबुल का राजा नबूकदनेस्सर मार डालेगा, यहोवा की यही वाणी है; उठ, केदार को जा, और पूर्व के लोगोंको लूट ले।
29 वे उनके डेरे और भेड़-बकरी ले लेंगे; वे अपके अपके परदे, और अपके सब पात्र, और ऊंट अपके अपके लिथे ले लें; और वे उन से दोहाई देंगे, चारों ओर भय है।
30 हे हासोर के निवासियों, भाग जाओ, दूर हो जाओ, गहरे बसे रहो, यहोवा की यही वाणी है; क्योंकि बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ने तेरे विरुद्ध युक्‍ति की है, और तेरे विरुद्ध युक्ति की है।
31 उठ, उस धनवान जाति के पास चढ़ जो बिना चिन्ता किए रहती है, यहोवा की यही वाणी है, जिसके न तो फाटक हैं और न बेंड़े, और वे अकेले रहते हैं।
32 और उनके ऊंट लूट, और उनके पशुओं की भीड़ लूट हो जाएगी; और जो छोर छोर पर हों उनको मैं सब पवनोंमें तितर-बितर करूंगा; और मैं उनकी विपत्ति उसके चारों ओर से लाऊंगा, यहोवा की यही वाणी है।
33 और हासोर अजगरों का निवास, और सदा उजाड़ रहेगा; वहाँ कोई मनुष्य न रहे, और न कोई मनुष्य का पुत्र उसमें बसे।
34 यहूदा के राजा सिदकिय्याह के राज्य के आरम्भ में यहोवा का यह वचन एलाम के विरुद्ध यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के पास पहुंचा,
35 सेनाओं का यहोवा यों कहता है; देख, मैं उनके पराक्रम के प्रधान एलाम के धनुष को तोड़ डालूंगा।
36 और मैं एलाम पर आकाश के चारोंओर से चारों वायु चलाकर उन सब पवनोंकी ओर तितर-बितर करूंगा; और ऐसी कोई जाति न होगी, जिसमें एलाम के बहिष्कृत लोग न आएंगे।
37 क्योंकि मैं एलाम को उनके शत्रुओं, और उनके प्राण के खोजियोंके साम्हने डरा दूंगा; और मैं उन पर विपत्ति डालूंगा, अर्थात अपके कोप को, यहोवा की यही वाणी है; और जब तक मैं उनका अन्त न कर लूं, तब तक मैं उनके पीछे तलवार चलाऊंगा;
38 और मैं अपना सिंहासन एलाम में स्थापित करूंगा, और वहां से राजा और हाकिमोंको सत्यानाश करूंगा, यहोवा की यही वाणी है।
39 परन्तु अन्त के दिनों में ऐसा होगा, कि मैं एलाम को बन्धुआई में फिर लाऊंगा, यहोवा की यही वाणी है।

 

अध्याय 50

बाबुल का न्याय - इस्राएल का छुटकारे।

1 वह वचन जो यहोवा ने बेबीलोन और कसदियोंके देश के विषय में यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा या।
2 जाति-जाति में प्रचार कर, और प्रकाशित करना, और मानक ठहराना; प्रकाशित करें, और छुपाएं नहीं; कहो, बाबुल ले लिया गया, बेल लहूलुहान हो गया, मरोदक टुकड़े टुकड़े हो गया; उसकी मूरतें चकनाचूर हो गई हैं, उसकी मूरतें टुकड़े-टुकड़े कर दी गई हैं।
3 क्योंकि उत्तर दिशा से एक जाति उसके विरुद्ध चढ़ाई करेगी, जो उसके देश को उजाड़ देगी, और उस में कोई रहने न पाएगा; वे हटा देंगे, मनुष्य क्या पशु दोनों दूर हो जाएंगे।
4 उन दिनों में, और उस समय, यहोवा की यह वाणी है, कि इस्राएल के लोग और यहूदा के लोग एक साथ जाकर रोते हुए आएंगे; वे जाकर अपने परमेश्वर यहोवा को ढूंढ़ेंगे।
5 वे वहां मुंह करके सिय्योन का मार्ग पूछेंगे, और कहेंगे, आ, और हम यहोवा के साथ ऐसी सदा की वाचा बान्धें जो कभी न भूली जाए।
6 मेरी प्रजा खोई हुई भेड़ें हैं; उनके चरवाहों ने उन्हें भटका दिया है, उन्होंने उन्हें पहाड़ों पर भगा दिया है; वे पहाड़ से पहाड़ पर चले गए हैं, वे अपने विश्राम स्थान को भूल गए हैं।
7 जितनों ने उन्हें पाया, वे सब उन्हें खा गए; और उनके द्रोहियोंने कहा, हम को कुछ भी नहीं, क्योंकि उन्होंने यहोवा के विरुद्ध पाप किया है, जो न्याय का निवास स्थान है, यहां तक कि यहोवा, जो अपके पुरखाओं का आशा है।
8 बाबुल के बीच में से निकल, और कसदियोंके देश में से निकल, और भेड़-बकरियोंके आगे बकरोंके समान हो।
9 क्योंकि देखो, मैं उत्तर देश से बड़ी जातियोंकी एक सभा को खड़ा करके बाबुल पर चढ़ाई करवाऊंगा; और वे उसके साम्हने पांति बान्धें; वह वहीं से ले ली जाएगी; उनके तीर एक शक्तिशाली विशेषज्ञ के रूप में होंगे; कोई भी व्यर्थ नहीं लौटेगा।
10 और कसदिया लूट हो जाएगा; जो कुछ उसे लूटेगा वह सब तृप्त होगा, यहोवा की यही वाणी है।
11 हे मेरे निज भाग को नाश करनेवाले, आनन्दित होने के कारण तुम आनन्दित हुए;
12 तेरी माता को बहुत दुख होगा; जिस ने तुझे जन्म दिया वह लज्जित होगी; निहारना, राष्ट्रों में सबसे कठिन एक जंगल, एक सूखी भूमि और एक रेगिस्तान होगा।
13 यहोवा के कोप के कारण वह बसा न रहेगा, वरन वह पूरी रीति से उजाड़ हो जाएगा; जो कोई बाबुल के पास से चले वह चकित होगा, और उसकी सब विपत्तियों पर ताली बजाएगा।
14 चारोंओर बाबुल के साम्हने पांति बान्धो; तुम सब जो धनुष को झुकाते हो, उस पर गोली चलाओ, कोई तीर मत छोड़ो; क्योंकि उसने यहोवा के विरुद्ध पाप किया है।
15 चारोंओर उसके विरुद्ध जयजयकार करो; उसने अपना हाथ दिया है; उसकी नेव गिरी, उसकी शहरपनाह गिरा दी गई; क्योंकि यह यहोवा का प्रतिशोध है; उससे बदला लेना; जैसा उसने किया है, वैसा ही उसके साथ करो।
16 बाबुल में से बोनेवाले को और कटनी के समय हंसिया चलानेवाले को नाश करो; वे अन्धेर करनेवाली तलवार के भय से सब को अपक्की प्रजा की ओर फिरेंगे, और अपके अपके देश को भाग जाएंगे।
17 इस्राएल एक तितर-बितर भेड़ है जिसे सिंहों ने दूर भगाया है; पहिले अश्शूर के राजा ने उसको खा लिया; और अन्त में इसी बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ने उसकी हड्डियां तोड़ दी हैं।
18 इसलिथे इस्राएल का परमेश्वर सेनाओं का यहोवा योंकहता है; देख, मैं बाबुल के राजा और उसके देश को वैसा ही दण्ड दूंगा जैसा मैं ने अश्शूर के राजा को दण्ड दिया है।
19 और मैं इस्राएल को उसके निवास में फिर ले आऊंगा, और वह कर्मेल और बाशान से चराएगा, और उसका जी एप्रैम और गिलाद पर्वत पर तृप्त होगा।
20 उन दिनों में, और उस समय यहोवा की यह वाणी है, कि इस्राएल का अधर्म ढूंढ़ा जाएगा, और कोई न होगा; और यहूदा के पाप, और वे पाए न जाएं; क्‍योंकि मैं उन्‍हें क्षमा करूंगा जिन्‍हें मैं सुरक्षित रखूंगा।
21 मरातैम के देश पर चढ़ाई कर, और उस पर और पकोद के निवासियोंपर चढ़ाई कर; यहोवा की यह वाणी है, कि उनके पीछे नाश करो, और सत्यानाश करो, और जो आज्ञा मैं ने तुम को दी है उसके अनुसार करो।
22 देश में युद्ध का शब्द और बड़े विनाश का शब्द है।
23 सारी पृय्वी का हथौड़ा कैसे चकनाचूर और चकनाचूर हो गया है! बाबुल कैसे अन्यजातियों के बीच उजाड़ हो गया है!
24 हे बाबुल, मैं ने तेरे लिथे फन्दा लगाया है, और तू भी पकड़ा गया है, और तू न जानता था; तू ने पाया, और पकड़ा भी गया, क्योंकि तू ने यहोवा के विरुद्ध यत्न किया है।
25 यहोवा ने अपके शस्त्रागार खोलकर अपक्की जलजलाहट के हथियार निकाल दिए हैं; क्योंकि कसदियों के देश में सेनाओं के परमेश्वर यहोवा का यह काम है।
26 उस पर सीमा से आगे आ, और उसके भण्डार खोल दे; उसे ढेर की नाईं फेंक दो, और उसका सत्यानाश करो; उसका कुछ न बचे।
27 उसके सब बैलोंको घात करो; वे वध करने के लिथे उतर जाएं; उन पर हाय! क्योंकि उनका दिन आ गया है, उनके दर्शन का समय आ गया है,
28 जो लोग बाबुल के देश से भागकर भाग जाते हैं, उनका शब्द सिय्योन में हमारे परमेश्वर यहोवा का पलटा लेने, उसके मन्दिर का पलटा लेने का समाचार है।
29 धनुर्धारियों को बाबुल के विरुद्ध बुलवाओ; तुम सब जो धनुष को झुकाते हो, उसके चारोंओर डेरे खड़े करो; उसका कोई भाग न निकले; उसे उसके काम के अनुसार बदला दे; जो कुछ उस ने किया है उसके अनुसार उसके साथ करो; क्योंकि वह यहोवा, इस्राएल के पवित्र पर घमण्ड करती है।
30 इस कारण उसके जवान सड़कों पर गिरेंगे, और उसके सब योद्धा उस दिन नाश किए जाएंगे, यहोवा की यही वाणी है।
31 देख, हे सेनाओं के परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, मैं तेरे विरुद्ध हूं; क्योंकि तेरा दिन आ गया है, वह समय जब मैं तुझ से भेंट करूंगा।
32 और अति घमण्डी ठोकर खाकर गिर पड़ेगा, और कोई उसको जिलाने न पाएगा; और मैं उसके नगरोंमें आग लगाऊंगा, और वह उसके चारोंओर भस्म कर देगी।
33 सेनाओं का यहोवा यों कहता है; इस्राएल के बच्चे और यहूदा के बच्चे एक साथ पीड़ित थे; और जितनों ने उन्हें बन्धुआई में रखा, वे सब ने उन्हें थामे रखा; उन्होंने उन्हें जाने से मना कर दिया।
34 उनका छुड़ानेवाला बलवन्त है; उसका नाम सेनाओं का यहोवा है; वह उनका मुकद्दमा लड़ेगा, कि वह देश को विश्राम दे, और बाबुल के निवासियोंको अशांत करे।
35 यहोवा की यह वाणी है, कसदियों पर, और बाबुल के निवासियों, और उसके हाकिमों, और उसके पण्डितों पर भी तलवार चलेगी।
36 झूटों पर तलवार चलती है; और वे दोगे; उसके शूरवीरों पर तलवार है; और वे निराश हो जाएंगे।
37 उनके घोड़ों, और उनके रथों, और सब मिले जुले लोगोंपर, जो उसके बीच में हैं, तलवार चलेगी; और वे स्त्रियां हो जाएंगी; उसके खज़ाने पर तलवार है; और वे लूट लिए जाएंगे।
38 उसके जल पर अकाल पड़ा है; और वे सूख जाएंगे; क्योंकि वह खुदी हुई मूरतों का देश है, और वे अपक्की मूरतोंके दीवाने हैं
39 इसलिथे जंगल के वनपशु और द्वीपोंके वनपशु वहां रहेंगे, और उल्लू उस में बसेंगे; और वह फिर कभी बसा न रहेगा; वह पीढ़ी से पीढ़ी तक न बसे।
40 जैसे परमेश्वर ने सदोम और अमोरा और उसके पड़ोसी नगरों को उलट दिया, यहोवा की यही वाणी है; इस प्रकार कोई वहां न रहेगा, और न कोई मनुष्य का पुत्र उस में निवास करेगा।
41 देखो, उत्तर दिशा से एक प्रजा और एक बड़ी जाति आ जाएगी, और बहुत से राजा पृय्वी के छोर पर से उठ खड़े होंगे।
42 वे धनुष और भाले को पकड़े रहें; वे क्रूर हैं, और दया न दिखाएंगे; हे बाबुल की बेटी, उनका शब्द समुद्र की नाईं गरजेगा, और वे घोड़ोंपर सवार होंगे;
43 बाबुल के राजा ने उनका समाचार सुना, और उसके हाथ ढीले पड़ गए; वेदना ने उसे पकड़ लिया, और एक स्त्री की सी वेदना से तड़प उठी।
44 देखो, वह यरदन के उफान पर से सिंह के समान बलवन्तोंके निवास पर चढ़ेगा; परन्तु मैं उन्हें अचानक उसके पास से दूर भगा दूंगा; और कौन चुना हुआ पुरूष है, कि मैं उसके ऊपर नियुक्‍त करूं? मेरे जैसा कौन है? और मुझे समय कौन ठहराएगा? और वह चरवाहा कौन है जो मेरे साम्हने खड़ा रहेगा?
45 इसलिथे यहोवा की उस सम्मति को सुनो, जो उस ने बाबुल के विरुद्ध की है; और कसदियों के देश के विरुद्ध उसकी युक्‍ति जो उस ने युक्‍त की है; निःसन्देह भेड़-बकरियों में से छोटा ही उनको निकाल लेगा; निश्चय वह उनके निवास को उनके संग उजाड़ देगा।
46 बाबुल के ले लेने के शब्द से पृय्वी कांप उठती है, और अन्यजातियोंमें दोहाई सुनाई देती है।

 

अध्याय 51

भविष्यवाणी की किताब फरात में डाली गई।

1 यहोवा यों कहता है; देख, मैं बाबुल पर, और उनके बीच में रहनेवालोंके विरुद्ध जो मेरे साम्हने उठ खड़े होते हैं, एक नाश करनेवाली वायु चढ़ाई करूंगा;
2 और बाबुल के पास उसके पंखे भेजेंगे, जो उसको पंखे से उड़ाएंगे, और उसके देश को खाली कर देंगे; क्योंकि संकट के दिन वे उसके चारोंओर उसके विरुद्ध होंगे।
3 जो झुके, उसके विरुद्ध धनुर्धर अपके धनुष को, और अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके अपके लिथे झुकाए; और उसके जवानोंको मत छोड़ो; उसके सारे यजमान को सत्यानाश करो।
4 इस प्रकार कसदियोंके देश में मारे हुए लोग गिरेंगे, और जो उसके चौकोंमें मारे गए हैं।
5 क्योंकि इस्राएल, और न अपके परमेश्वर के यहूदा, जो सेनाओं के यहोवा का है, न छोड़ा गया; यद्यपि उनका देश इस्राएल के पवित्र के विरुद्ध पाप से भर गया था।
6 बाबुल के बीच में से निकल भाग, और अपके अपके प्राण का उद्धार कर; उसके अधर्म में कट न जाना; क्योंकि यह यहोवा के प्रतिशोध का समय है; वह उसे बदला देगा।
7 बाबुल यहोवा के हाथ में सोने का कटोरा है, जिस ने सारी पृय्वी को मतवाला किया है; अन्यजातियों ने उसका दाखमधु पीया है; इसलिए राष्ट्र पागल हैं।
8 बाबुल अचानक गिर पड़ा और नाश हो गया; उसके लिए चिल्लाओ; उसके दर्द के लिए बाम ले लो, यदि ऐसा हो तो वह ठीक हो सकती है।
9 हम ने बाबुल को चंगा किया होता, परन्तु वह चंगी नहीं हुई; उसे छोड़, हम सब को उसके अपने देश में जाने दें; क्योंकि उसका न्याय स्वर्ग तक पहुंच गया है, और आकाश तक ऊंचा किया गया है।
10 यहोवा ने हमारा धर्म प्रगट किया है; आओ, और हम सिय्योन में अपके परमेश्वर यहोवा के कामोंका वर्णन करें।
11 तीरों को चमकाओ; ढाल इकट्ठा करो; यहोवा ने मादियों के राजाओं के मन को जिलाया है; क्योंकि उसकी युक्ति बाबुल के विरुद्ध है, कि उसको नाश करे; क्‍योंकि यह तो यहोवा का प्रतिशोध है, और उसके मन्‍दिर का पलटा लेना है।
12 बाबुल की शहरपनाह पर झण्डा खड़ा करना, पहरोंको दृढ़ करना, पहरुए ठहराना, घात लगानेवालोंको तैयार करना; क्योंकि जो कुछ उस ने बाबुल के निवासियोंके विरुद्ध कहा या, उसी ने यहोवा ने युक्ति की है, और वही किया है।
13 हे बहुत जल के ऊपर रहनेवाले, और बहुत अधिक भण्डारों के रहने वाले, तेरा अन्त आ गया है, और तेरे लोभ का अन्त आ गया है।
14 सेनाओं के यहोवा ने अपक्की अपक्की शपय खाकर कहा है, कि निश्चय मैं तुझे मनुष्योंसे ऐसे भर दूंगा जैसे कैटरपिलर; और वे तेरे विरुद्ध ललकारेंगे।
15 उसी ने पृय्वी को अपक्की शक्ति से बनाया, उस ने जगत को अपक्की बुद्धि से दृढ़ किया, और आकाश को अपक्की समझ से तान दिया है।
16 जब वह अपना शब्द बोलता है, तब आकाश में बहुत जल होता है; और वह पृय्वी की छोर से भाप को उड़ाता है; वह मेंह से बिजली बनाता, और अपके भण्डार में से आँधी उड़ाता है।
17 हर एक मनुष्य अपके ज्ञान से पशुवत होता है; हर संस्थापक गढ़ी हुई छवि से भ्रमित है; क्योंकि उसकी ढली हुई मूरत मिथ्या है, और उन में श्वास नहीं।
18 वे व्यर्थ हैं, और अधर्म के काम हैं; उनके दर्शन के समय में वे नाश हो जाएंगे।
19 याकूब का भाग उनके समान नहीं है; क्योंकि वह सब वस्तुओं में पहिला है; और इस्राएल उसके निज भाग की छड़ी है; उसका नाम सेनाओं का यहोवा है।
20 तू मेरा युद्ध का कुल्हाड़ा और युद्ध का हथियार है; क्योंकि मैं तेरे द्वारा अन्यजातियोंको टुकड़े टुकड़े करूंगा, और तेरे द्वारा राज्योंको नाश करूंगा।
21 और मैं तेरे संग उस घोड़े और उसके सवार को टुकड़े टुकड़े कर दूंगा; और मैं तेरे द्वारा रथ और उसके सवार को टुकड़े टुकड़े कर दूंगा;
22 मैं तेरे साथ स्त्री-पुरुषोंको भी टुकड़े टुकड़े कर दूंगा; और मैं तेरे द्वारा जवान और बूढ़े को टुकड़े टुकड़े कर दूंगा; और मैं तेरे द्वारा जवान और दासी को टुकड़े टुकड़े कर दूंगा;
23 मैं तेरे संग चरवाहे और भेड़-बकरियोंको भी टुकड़े टुकड़े कर दूंगा; और मैं तेरे द्वारा किसान और उसके बैलोंके जूए को टुकड़े टुकड़े कर दूंगा; और मैं तेरे द्वारा हाकिमोंऔर हाकिमोंको टुकड़े टुकड़े कर दूंगा।
24 और मैं बाबुल को और कसदिया के सब निवासियोंको उनका सब बुरा काम दूंगा, जो उन्होंने सिय्योन में तेरे साम्हने किए हैं, यहोवा की यही वाणी है।
25 सुन, मैं तेरे विरुद्ध हूं, हे नाश करनेवाले पर्वत, यहोवा की यह वाणी है, जो सारी पृय्वी को नाश करनेवाला है; और मैं अपना हाथ तुझ पर बढ़ाऊंगा, और तुझे चट्टानों पर से लुढ़कूंगा, और तुझे जलता हुआ पहाड़ बना दूंगा।
26 और वे तुझ में से न तो कोने के लिथे पत्यर, और न नेव के लिथे पत्यर लेना; परन्तु तू सदा उजाड़ रहेगा, यहोवा की यही वाणी है।
27 देश में झण्डा खड़ा करना, अन्यजातियोंमें नरसिंगा फूंकना, अन्यजातियोंको उसके विरुद्ध तैयार करना, और अरारात, मिन्नी और अशकनज के राज्योंको उसके विरुद्ध बुलवा लेना; उसके खिलाफ एक कप्तान नियुक्त करें; घोड़ों को खुरदुरे कैटरपिलर के रूप में आने का कारण।
28 मादियों के राजाओं, और उसके प्रधानों, और उसके सब हाकिमों, और उसके राज्य के सारे देश समेत अन्यजातियों को उसके विरुद्ध तैयार करो।
29 और देश कांप उठेगा और शोक मनाएगा; क्योंकि बाबुल के विरुद्ध यहोवा की हर एक युक्ति पूरी की जाएगी, कि वह बाबुल देश को निर्जन उजाड़ डाले।
30 बाबुल के शूरवीरों ने युद्ध करना छोड़ दिया, वे अपके गढ़ में बने रहे; उनका पराक्रम विफल हो गया है; वे महिलाओं के रूप में बन गईं; उन्होंने उसके निवासस्थानोंको फूंक दिया है; उसकी सलाखों को तोड़ दिया गया है।
31 बाबुल के राजा को यह दिखाने के लिथे कि उसका नगर एक छोर पर ले लिया गया है, एक चौकी दूसरे से मिलने को, और एक दूत दूसरे से मिलने को दौड़े;
32 और मार्ग बन्द हो गए, और सरकण्डोंको उन्होंने आग में जला दिया, और योद्धा डर गए।
33 क्योंकि सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर यों कहता है; बाबुल की बेटी खलिहान के समान है, उसे कूटने का समय आ गया है; तौभी थोड़ी देर और उसके कटनी का समय आ जाएगा।
34 बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ने मुझे खा लिया, उस ने मुझे कुचल डाला, उसने मुझे एक खाली पात्र बनाया, उसने मुझे अजगर की तरह निगल लिया, उसने अपना पेट मेरी नाजुकता से भर दिया, उसने मुझे निकाल दिया।
35 सिय्योन के निवासी यह कहें, कि जो उपद्रव मुझ पर और मेरे शरीर पर हुआ है, वह बाबुल पर होगा; और कसदियों के निवासियों पर मेरा लोहू, यरूशलेम कहेगा।
36 इसलिथे यहोवा योंकहता है; देख, मैं तेरा मुकद्दमा लड़ूंगा, और तेरा पलटा लूंगा; और मैं उसके समुद्र को सुखा दूंगा, और उसके सोतोंको सुखा दूंगा।
37 और बाबुल ढेर हो जाएगा, और अजगरों का निवास स्थान, और विस्मय और फुसफुसाहट, और कोई न रहने वाला होगा।
38 वे सिंहों की नाईं गरजेंगे; वे सिंहों की भेड़ियों की नाईं चिल्लाएंगे।
39 मैं उनके जेवनार जलाऊंगा, और उनको मतवाला करूंगा, कि वे आनन्दित रहें, और सदा की नींद सोएं, और न उठें, यहोवा की यही वाणी है।
40 मैं उन्हें भेड़ के बच्चे की नाईं, और मेढ़ोंके साथ बकरियोंके साम्हने घात करूंगा।
41 शेषक कैसे लिया जाता है! और सारी पृय्वी की स्तुति कैसी चकित करती है! बाबुल कैसे अन्यजातियों के बीच विस्मय का कारण बन गया है!
42 बाबुल पर समुद्र चढ़ आया है; वह उसकी बहुत सी लहरों से आच्छादित है।
43 उसके नगर उजाड़, सूखी भूमि, और जंगल हैं, ऐसा देश जिस में न कोई रहता है, और न कोई मनुष्य का पुत्र वहां से गुजरता है।
44 और मैं बाबुल में बेल को दण्ड दूंगा, और जो कुछ उस ने निगल लिया है, उसे मैं उसके मुंह से निकालूंगा; और जाति-जाति के लोग फिर उसके पास न बहेंगे; वरन बाबुल की शहरपनाह गिर जाएगी।
45 हे मेरी प्रजा, तुम उसके बीच में से निकल जाओ, और अपके अपके प्राण को यहोवा के कोप से छुड़ाओ।
46 कहीं ऐसा न हो कि तेरा मन उदास हो जाए, और उस अफवाह से जो देश में सुनी जाए, डरना; एक वर्ष तक अफवाह फैलेगी, और उसके बाद एक और वर्ष में एक अफवाह, और देश में उपद्रव, शासक के विरुद्ध शासक का आगमन होगा।
47 इसलिथे देखो, ऐसे दिन आते हैं, कि मैं बाबुल की खुदी हुई मूरतोंका न्याय करूंगा; और उसका सारा देश लज्जित हो जाएगा, और उसके सब मारे हुए उसके बीच में पड़े रहेंगे।
48 तब आकाश और पृय्वी और जो कुछ उस में है, वे सब बेबीलोन के लिथे जयजयकार करेंगे; क्योंकि उत्तर दिशा से लुटेरे उसके पास आएंगे, यहोवा की यही वाणी है।
49 जैसे बाबुल ने इस्त्राएलियोंको मार डाला, वैसे ही सारी पृय्वी के लोग बाबुल में मारे जाएंगे।
50 तुम जो तलवार से बच गए हो, चले जाओ, खड़े मत रहो; यहोवा को दूर से स्मरण करना, और यरूशलेम को तेरे मन में आने दे।
51 हम लज्जित हुए हैं, क्योंकि हम ने नामधराई सुनी है; शर्म ने हमारे चेहरे को ढक लिया है; क्‍योंकि परदेशी यहोवा के भवन के पवित्र स्‍थानों में आए हैं।
52 इसलिथे देखो, यहोवा की यह वाणी है, ऐसे दिन आते हैं, कि मैं उसकी खुदी हुई मूरतोंका न्याय करूंगा; और उसके सारे देश में घायल कराहेंगे।
53 चाहे बाबुल स्वर्ग पर चढ़ जाए, और चाहे वह अपने बल की ऊंचाई को दृढ़ करे, तौभी मेरे पास से लुटेरे उसके पास आएंगे, यहोवा की यही वाणी है।
54 बाबुल से ललकारने का शब्द, और कसदियोंके देश से बड़ा नाश हो रहा है;
55 क्योंकि यहोवा ने बाबुल को नाश किया है, और उस में से बड़ा शब्द नाश किया है; जब उसकी लहरें बड़े जल के समान गरजती हैं, तब उनका शब्द सुनाई देता है;
56 क्योंकि उस पर बिगाड़ने वाला बाबुल पर आ गया है, और उसके शूरवीर ले लिए गए हैं, उनका एक एक धनुष टूट गया है; क्योंकि बदला लेने वाला परमेश्वर यहोवा निश्चय बदला लेगा।
57 और मैं उसके हाकिमों, और उसके पण्डितों, उसके प्रधानों, और हाकिमों, और उसके शूरवीरों को मतवाला करूंगा; राजा, जिसका नाम सेनाओं का यहोवा है, उसकी यह वाणी है, और वे सदा की नींद में सोएंगे, और न जागेंगे।
58 सेनाओं का यहोवा यों कहता है; बाबुल की चौड़ी शहरपनाह सत्यानाश कर दी जाएगी, और उसके ऊंचे फाटक आग से जला दिए जाएंगे; और वे लोग व्यर्थ परिश्रम करेंगे, और लोग आग में, और वे थक जाएंगे।
59 वह वचन जो यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता ने नेरिय्याह के पुत्र सरायाह को, जो मासेयाह का पोता था, आज्ञा दी, जब वह यहूदा के राजा सिदकिय्याह के साथ अपके राज्य के चौथे वर्ष में बाबुल को गया। और सरायाह शांत हाकिम था।
60 इसलिथे यिर्मयाह ने जितनी विपत्ति बाबुल पर आने वाली है, वे सब बातें जो बेबीलोन के विरुद्ध लिखी हैं, वे सब बातें पुस्तक में लिख दीं।
61 और यिर्मयाह ने सरायाह से कहा, जब तू बेबीलोन में आए, और देख, और इन सब बातोंको पढ़ ले;
62 तब तू कहना, हे यहोवा, तू ने इस स्यान के विरोध में यह कहा है, कि इसे नाश कर डालूं, कि इसमें न तो कोई मनुष्य रहेगा, और न पशु, वरन यह सदा के लिए उजाड़ रहेगा।
63 और जब तू इस पुस्तक को पढ़ना समाप्त कर ले, तब उस में एक पत्यर बान्धकर फरात के बीच में डाल देना;
64 और तू कहना, कि बाबुल इस प्रकार डूब जाएगा, और उस विपत्ति से जो मैं उस पर लाऊंगा फिर न उठेगा; और वे थके हुए होंगे। यिर्मयाह की बातें अब तक की हैं।

 

अध्याय 52

सिदकिय्याह विद्रोही - यरूशलेम को ले लिया गया - सिदकिय्याह की आंखें फोड़ दी गईं।

1 सिदकिय्याह जब राज्य करने लगा, तब वह एक बीस वर्ष का या, और ग्यारह वर्ष तक यरूशलेम में राज्य करता रहा। और उसकी माता का नाम हमूताल या, जो लिब्ना के यिर्मयाह की बेटी थी।
2 और जो कुछ यहोयाकीम ने किया या, उसके अनुसार उस ने वही किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा या।
3 क्योंकि यहोवा के कोप के कारण यरूशलेम और यहूदा में जब तक वह उन्हें अपके साम्हने से निकाल न चुका या, तब तक सिदकिय्याह ने बाबुल के राजा से बलवा किया।
4 और अपके राज्य के नौवें वर्ष के दसवें महीने के दसवें दिन के दसवें दिन को बाबुल का राजा नबूकदनेस्सर अपक्की सारी सेना समेत यरूशलेम पर चढ़ाई करके उसके विरुद्ध खड़ा हुआ, और उसे बनाने लगा इसके खिलाफ किले चारों ओर।
5 इस प्रकार सिदकिय्याह राजा के ग्यारहवें वर्ष तक नगर घेर लिया गया।
6 और चौथे महीने के नौवें दिन को नगर में ऐसा अकाल पड़ा, कि देश के लोगोंके लिथे रोटी न रही।
7 तब नगर को तोड़ दिया गया, और सब योद्धा भाग गए, और रात को दोनों शहरपनाह के बीच के फाटक से होकर, जो राजा की बारी के पास या, नगर से निकल गए; (अब कसदी नगर के चारों ओर थे;) और वे तराई के मार्ग से चले।
8 परन्तु कसदियों की सेना ने राजा का पीछा किया, और सिदकिय्याह को यरीहो के अराबा में ले लिया; और उसकी सारी सेना उसके पास से तितर-बितर हो गई।
9 तब वे राजा को पकड़कर हमात देश के रिबला में बाबुल के राजा के पास ले गए; जहां उन्होंने उस पर फैसला सुनाया।
10 और बाबुल के राजा ने सिदकिय्याह के पुत्रोंको अपक्की आंखोंके साम्हने घात किया; उसने रिबला में यहूदा के सब हाकिमों को भी घात किया।
11 तब उस ने सिदकिय्याह की आंखें बुझा दीं; और बाबुल के राजा ने उसको जंजीरों में जकड़ा, और बाबेल को ले गया, और उसके मरने के दिन तक बन्दीगृह में रखा।
12 बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर के उन्नीसवें वर्ष के पांचवें महीने के दसवें दिन को जल्लादों का प्रधान नबूजरदान, जो बाबुल के राजा की सेवा करता या, यरूशलेम को आया।
13 और यहोवा के भवन और राजभवन को फूंक दिया; और यरूशलेम के सब घरानोंऔर महापुरुषोंके सब घरोंको उस ने आग में झोंक दिया;
14 और कसदियोंकी सारी सेना ने, जो जल्लादोंके प्रधान के संग या, यरूशलेम की चारोंओर की शहरपनाह को ढा दिया।
15 तब जल्लादों का प्रधान नबूजर-अदान प्रजा के कंगालों में से कितनों को, और जो लोग नगर में रह गए थे, और जो बचे हुए थे, और जो बाबुल के राजा के हाथ मारे गए थे, और जो शेष रह गए थे, उन्हें बन्धुआई में ले गया। भीड़ का।
16 परन्तु जल्लादों के प्रधान नबूजर-अदान ने देश के कंगालों में से कितनों को दाख की बारी और किसानों के लिथे छोड़ दिया।
17 और जो पीतल के खम्भे यहोवा के भवन में थे, और कुसिर्यां, और पीतल का समुद्र जो यहोवा के भवन में था, उन को कसदियोंने तोड़ दिया, और सब पीतल को बाबेल को ले गए।
18 और हथौड़े, फावड़े, फूंघे, और कटोरे, और चम्मच, और पीतल के जितने पात्र वे सेवा टहल करते थे, वे सब ले गए।
19 और कटोरे, और धूपदान, और कटोरे, और हौदें, और दीवट, और धूपदान, और कटोरे; जो सोने में सोने का था, और जो चाँदी में चाँदी का था, वह जल्लादों के प्रधान को ले गया।
20 वे दो खम्भे, एक समुद्र, और पीतल के बारह बैल, जो उन कुओं के नीचे थे, जिन्हें राजा सुलैमान ने यहोवा के भवन में बनवाया था; इन सब पात्रों का पीतल भारहीन था।
21 और उन खम्भोंके विषय में एक खम्भे की ऊंचाई अट्ठारह हाथ की या; और उसके चारों ओर बारह हाथ की एक पट्टिका लगी हुई थी; और उसकी मोटाई चार अंगुल थी; यह खोखला था।
22 और उस पर पीतल का एक कंधा था; और एक एक प्याले की ऊंचाई पांच हाथ की या, और चारोंओर के पटलोंपर जाल और अनार थे, और सब पीतल के थे। दूसरा खम्भा और अनार भी इनके समान थे।
23 और एक अलंग में छियानवे अनार थे; और जाल के सब अनार चारोंओर एक सौ थे।
24 और जल्लादोंके प्रधान ने सरायाह प्रधान याजक, और सपन्याह दूसरे याजक, और द्वारपालोंके तीनोंको पकड़ लिया;
25 उस ने एक खोजे को भी नगर में से निकाल लिया, जिस पर योद्धाओं का अधिकार था; और उन में से सात पुरूष जो राजा के भवन के निकट थे, जो नगर में पाए गए; और सेना का प्रधान शास्त्री, जिस ने देश के लोगोंको इकट्ठा किया; और उस देश के लोगों में से साठ पुरुष जो नगर के बीच में पाए गए।
26 तब जल्लादों का प्रधान नबूजर-अदान उन्हें ले कर बाबुल के राजा के पास रिबला ले आया।
27 तब बाबेल के राजा ने हमात देश के रिबला में उनको मार डाला, और मार डाला। इस प्रकार यहूदा अपने ही देश से बंधुआई में ले जाया गया।
28 जिन लोगों को नबूकदनेस्सर बन्धुआई में ले गया, वे ये हैं: सातवें वर्ष में तीन हजार यहूदी, और साढ़े तीन:
29 नबूकदनेस्सर के अठारहवें वर्ष में वह यरूशलेम से आठ सौ बत्तीस व्यक्तियों को बन्दी बना कर ले गया;
30 नबूकदनेस्सर के तेईसवें वर्ष में जल्लादों का प्रधान नबूजर-अदान यहूदियों को सात सौ पैंतालीस लोगों को बन्धुआई में ले गया; सभी व्यक्ति चार हजार छह सौ थे।
31 और यहूदा के राजा यहोयाकीन की बंधुआई के सात तीसवें वर्ष के बारहवें महीने के बारहवें महीने के पच्चीसवें दिन को बाबुल का राजा एविलमेरोदक अपके राज्य के पहिले वर्ष में, यहूदा के राजा यहोयाकीन का सिर उठाकर बन्दीगृह से निकाल लाया,
32 और उस से प्रीति की बातें की, और उसका सिंहासन राजाओं के सिंहासन के ऊपर रखा
जो उसके साथ बाबुल में थे।
33 और अपने बन्दीगृह के वस्त्र बदले; और वह जीवन भर उसके साम्हने रोटी खाता रहा।
34 और उसके आहार के लिथे बाबुल के राजा की ओर से नित्य भोजन दिया जाता या, अर्थात उसके मरने के दिन तक, अर्थात उसके जीवन भर के लिये नित्य भोजन किया जाता था।

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