इब्रियों

इब्रानियों के लिए प्रेरित पौलुस का पत्र

 

अध्याय 1

ईश्वर का व्यक्तित्व - मसीह ने स्वर्गदूतों से ऊपर पसंद किया - स्वर्ग और पृथ्वी को बदलने के लिए।

1 परमेश्वर, जिस ने बीते समय में पुरखाओं से भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा बातें कीं, और भिन्न-भिन्न प्रकार से बातें कीं,

2 इन अन्तिम दिनों में हम से अपके पुत्र के द्वारा बातें की, जिसे उस ने सब वस्तुओं का वारिस ठहराया, जिस से उस ने जगत भी बनाए;

3 जो अपके तेज का तेज, और अपके व्यक्तित्व का प्रगट स्वरूप होकर, और अपक्की सामर्थ के वचन के द्वारा सब वस्‍तुओं को धारण करके हमारे पापोंको शुद्ध करके महामहिम की दहिनी ओर ऊंचे पर बैठा;

4 वह स्वर्गदूतों से इतना अधिक उत्तम ठहराया गया, जितना कि उस ने निज भाग से उन से अधिक उत्तम नाम प्राप्त किया।

5 क्‍योंकि किस स्‍वर्गदूत से उस ने कभी कहा, कि तू मेरा पुत्र है, मैं ने तुझे आज ही के दिन उत्‍पन्न किया है? और फिर, मैं उसके लिए एक पिता बनूंगा, और वह मेरे लिए एक पुत्र होगा?

6 और फिर जब वह पहिलौठोंको जगत में लाता है, तब वह कहता है, कि परमेश्वर के सब दूत उस की उपासना करें, जो उसके सेवकोंको आग की ज्वाला के समान करता है।

7 और स्वर्गदूतों के विषय में वह कहता है, स्वर्गदूत सेवा टहल करने वाली आत्माएं हैं।

8 परन्तु पुत्र से वह कहता है, हे परमेश्वर, तेरा सिंहासन युगानुयुग है; धर्म का राजदण्ड तेरे राज्य का राजदण्ड है।

9 तू ने धर्म से प्रीति और अधर्म से बैर रखा है; इसलिथे परमेश्वर ने, यहां तक कि तेरे परमेश्वर ने, तेरे संगियोंके ऊपर आनन्द के तेल से तेरा अभिषेक किया है।

10 और, हे यहोवा, तू ने आरम्भ में पृय्वी की नेव डाली; और आकाश तेरे हाथों के काम हैं।

11 वे नाश हो जाएंगे, परन्तु तू बना रहेगा; और वे सब वस्त्र की नाईं पुराने हो जाएंगे;

12 और उन्हें वस्त्र के समान फेरना, और वे बदले जाएंगे; परन्तु तू वही है, और तेरे वर्ष पूरे न होंगे।

13 परन्‍तु किस स्‍वर्गदूत से उस ने कभी कहा, जब तक मैं तेरे बैरियोंको तेरे पांवोंकी चौकी न कर दूं, तब तक मेरे दहिने बैठ जा?

14 क्या वे सब सेवकाई करनेवाली आत्माएं नहीं, जो उद्धार के वारिस होने के लिथे सेवा टहल करने के लिथे भेजी गई हैं?


अध्याय 2

आने वाला संसार - मनुष्य की विरासत - पीड़ा के माध्यम से प्राप्त पूर्णता - उनके उदाहरण से लागू मसीह की आज्ञाकारिता।

1 इस कारण जो बातें हम ने सुनी हैं उन पर और अधिक ध्यान देना चाहिए, ऐसा न हो कि हम उन्हें किसी समय चूकने दें।

2 क्‍योंकि यदि स्‍वर्गदूतों का वचन अटल रहा, और हर एक अपराध और आज्ञा न मानने पर उचित प्रतिफल मिले;

3 यदि हम इतने बड़े उद्धार को अनदेखा करें, तो हम किस रीति से बचेंगे? जो पहिले से प्रभु के द्वारा कहा जाने लगा, और उनके सुननेवालों ने हम से पहिले ही पक्की की।

4 परमेश्वर भी चिन्हों और अद्भुत कामों, और नाना प्रकार के आश्‍चर्यकर्मों, और पवित्र आत्मा के वरदानों के द्वारा अपनी इच्छा के अनुसार उनकी गवाही देता है?

5 क्योंकि उस ने आनेवाले जगत को जिस की हम चर्चा करते हैं, उस ने स्वर्गदूतोंके वश में नहीं किया

6 परन्तु किसी स्थान में किसी ने यह गवाही दी, कि मनुष्य क्या है, कि तू उस पर ध्यान रखता है? वा मनुष्य के सन्तान, कि तू उस से भेंट करे?

7 तू ने उसे स्‍वर्गदूतोंसे कुछ ही कम किया; तू ने उसे महिमा और आदर का मुकुट पहनाया, और उसे हाथों के कामों का अधिकारी ठहराया;

8 तू ने सब कुछ उसके पांवों के नीचे कर दिया है। क्‍योंकि उस ने सब को अपने वश में कर लिया, और जो कुछ उसके वश में न हो, वह कुछ न छोड़ा। लेकिन अब हम देखते हैं कि अभी तक सभी चीजें उसके अधीन नहीं हैं।

9 परन्तु हम यीशु को, जो मृत्यु के दु:ख उठाने के लिये स्वर्गदूतों से थोड़ा ही नीचे ठहराया गया था, महिमा और आदर का मुकुट पहने हुए देखते हैं; कि वह परमेश्वर की कृपा से प्रत्येक मनुष्य के लिये मृत्यु का स्वाद चखें।

10 क्‍योंकि वह वही हुआ, जिसके लिथे सब वस्‍तुएं हैं, और उसी के द्वारा सब वस्‍तुएं हैं, जिस से बहुत से पुत्रोंकी महिमा हुई, कि उनके उद्धार के प्रधान को दु:खोंके द्वारा सिद्ध किया जाए।

11 क्योंकि पवित्र करनेवाला और पवित्र करनेवाले सब एक ही हैं; जिस कारण वह उन्हें भाई कहने में लज्जित नहीं होता,

12 यह कहकर, कि मैं अपके भाइयोंके साम्हने तेरे नाम का प्रचार करूंगा, कलीसिया के बीच में मैं तेरा भजन गाऊंगा।

13 और फिर मैं उस पर भरोसा रखूंगा। और फिर, देखो मैं और वे बच्चे जो परमेश्वर ने मुझे दिए हैं।

14 सो जब बालक मांस और लोहू के भागी हुए, तौभी वह आप भी उन में सहभागी हुआ; कि वह मृत्यु के द्वारा उसे, जिसके पास मृत्यु पर अधिकार था, अर्थात् शैतान को नाश करे;

15 और उन्हें छुड़ाओ, जो मृत्यु के भय से जीवन भर दासत्व के अधीन रहे।

16 क्‍योंकि उस ने स्‍वर्गदूतोंके तुल्य अपके साम्हने न लिया; परन्तु उस ने इब्राहीम के वंश को अपने ऊपर ले लिया।

17 इसलिथे सब बातोंमें उसे अपके भाइयोंके तुल्य बनाया जाना था, कि वह परमेश्वर से संबंधित बातोंमें एक दयालु और विश्‍वासयोग्य महायाजक ठहरे, कि लोगोंके पापोंका मेल मिलाप करे।

18 क्‍योंकि वह आप ही परीक्षा में पड़कर दु:ख उठा चुका है, वह उन की जो परीक्षा की जाती है, सहायता कर सकता है।


अध्याय 3

मूसा से अधिक योग्य मसीह।

1 इसलिए, पवित्र भाइयों, स्वर्गीय बुलाहट के सहभागी, हमारे पेशे के प्रेरित और महायाजक, मसीह यीशु पर विचार करें;

2 जो अपके नियुक्‍त करनेवाले का विश्‍वासयोग्य था, जैसा मूसा भी अपके सारे घराने में विश्‍वासयोग्य था।

3 क्योंकि वह मूसा से भी अधिक महिमा के योग्य गिना गया, क्योंकि जिस ने भवन बनाया है, उसका आदर भवन से अधिक है।

4 क्‍योंकि हर घर कोई न कोई मनुष्य बनाता है; परन्तु जिस ने सब कुछ बनाया वह परमेश्वर है।

5 और मूसा अपके सारे घराने में दास की नाईं विश्वासयोग्य रहा, कि उन बातोंकी गवाही देने के लिथे जिनकी चर्चा की जानी थी;

6 परन्तु मसीह पुत्र के समान अपके घर का अधिकारी होगा; हम उसी का घराना हैं, यदि हम आशा के विश्वास और आनन्द को अन्त तक दृढ़ बनाए रखें।

7 इसलिथे जैसा पवित्र आत्मा योंकहता है, कि यदि आज तुम उसका शब्द सुनोगे,

8 अपने मन को कठोर न करो, जैसा कि उहापोह के दिन जंगल में परीक्षा के दिन होता है;

9 जब तेरे पुरखाओं ने मेरी परीक्षा ली, तब मेरी परीक्षा ली, और चालीस वर्ष तक मेरे कामोंको देखा।

10 इसलिथे मैं उस पीढ़ी के लोगोंसे उदास हुआ, और कहा, वे तो अपने मन में सदा पाप करते हैं; और उन्होंने मेरे मार्ग को नहीं जाना।

11 इसलिथे मैं ने अपके कोप की शपय खाई, कि वे मेरे विश्राम में प्रवेश न करने पाएंगे।

12 हे भाइयो, चौकस रहो, कहीं ऐसा न हो कि तुम में से किसी के मन में ऐसा बुरा मन हो, जो जीवते परमेश्वर से हटकर अविश्वासी हो।

13 परन्तु प्रति दिन एक दूसरे को समझाते रहो, जब कि आज का दिन है; ऐसा न हो कि तुम में से कोई पाप के छल के कारण कठोर हो जाए।

14 क्‍योंकि यदि हम अपने पहिले हियाव को अन्त तक दृढ़ बनाए रखें, तो हम मसीह के सहभागी ठहरे;

15 जबकि कहा जाता है, कि यदि आज तुम उसका शब्द सुनो, तो अपने मनोंको कठोर न करो, जैसा कि भड़काने पर होता है।

16 क्‍योंकि कितनों ने सुन कर चिढ़ाया; तौभी जो कुछ मूसा के द्वारा मिस्र से निकला, वह सब नहीं।

17 परन्‍तु वह किसके साथ चालीस वर्ष तक शोकित रहा? क्या पाप करने वालों की लोथें जंगल में न गिरीं थीं?

18 और उस ने किस से शपय खाई, कि हम उसके विश्राम में प्रवेश न करेंगे, परन्तु उन से जो विश्वास नहीं करते?

19 सो हम देखते हैं कि वे अविश्वास के कारण भीतर प्रवेश न कर सके।


अध्याय 4

बाकी संत विश्वास से प्राप्त हुए - परमेश्वर के वचन की शक्ति - हमारे महायाजक, यीशु, परमेश्वर के पुत्र।

1 सो हम डरें, कहीं ऐसा न हो कि उसके विश्राम में प्रवेश करने से कोई प्रतिज्ञा छूट गई हो, और तुम में से कोई उसे पूरा न कर पाए।

2 क्‍योंकि औरों ने भी हमें और उन को भी प्रचार किया था; परन्‍तु प्रचार किए हुए वचन से उन्‍हें कुछ लाभ न हुआ, और सुननेवालों पर विश्‍वास न मिला।

3 क्योंकि हम ने विश्वास करने वालों ने विश्राम में प्रवेश किया है, जैसा कि उसने कहा, जैसा कि मैंने अपने क्रोध की शपथ ली है, यदि वे अपने दिलों को कठोर करते हैं, तो वे मेरे विश्राम में प्रवेश नहीं करेंगे; और मैं ने शपय खाई है, कि यदि वे अपना मन कठोर न करें, तो मेरे विश्राम में प्रवेश करेंगे; यद्यपि परमेश्वर के कार्य संसार की उत्पत्ति से तैयार (या समाप्त) किए गए थे।

4 क्योंकि उस ने सातवें दिन के किसी स्थान में इसी दिन बातें कीं, और सातवें दिन परमेश्वर ने अपके सब कामोंसे विश्राम किया।

5 और इस स्थान में यदि वे अपने मन को कठोर न करें, तो वे मेरे विश्राम में प्रवेश करेंगे।

6 सो यह रह गया कि उस में कितने लोग प्रवेश करेंगे, और जिन को पहिले प्रचार किया गया, वे अविश्वास के कारण प्रवेश न किए;

7 फिर एक दिन को वह दाऊद के विषय में यह कहकर ठहराता है, कि आज इतने दिन के बाद; जैसा कहा जाता है, कि यदि आज तुम उसका शब्द सुनो, तो अपने मन को कठोर न करो।

8 क्‍योंकि यदि यीशु ने उन्‍हें विश्रम दिया होता, तो फिर किसी और दिन की चर्चा न करता।

9 इसलिथे परमेश्वर की प्रजा के लिथे विश्राम शेष है।

10 क्‍योंकि जो उसके विश्राम में प्रवेश कर गया है, वह भी अपके ही कामोंसे छूट गया, जैसा परमेश्वर ने अपके से किया।

11 सो आओ, हम उस विश्राम में प्रवेश करने के लिथे परिश्रम करें, ऐसा न हो कि कोई मनुष्य उसी अविश्वास की चाल में पड़ जाए।

12 क्योंकि परमेश्वर का वचन तेज, और बलवन्त, और सब दोधारी तलवार से भी चोखा है, और शरीर और आत्मा को, और जोड़ों और गूदे को अलग करनेवाले को भी भेदता है, और मन और बुद्धि को भेदने वाला है; हृदय।

13 और न कोई प्राणी ऐसा है जो उसकी दृष्टि में प्रगट न हो; परन्तु जिस से हमें काम करना है, उसकी आंखों के लिथे सब कुछ नंगा और खुला है।

14 सो यह देखकर कि हमारा एक बड़ा महायाजक है, जो स्वर्ग पर चढ़ गया है, हे परमेश्वर के पुत्र यीशु, हम अपके काम को स्थिर रखें।

15 क्‍योंकि हमारा ऐसा कोई महायाजक नहीं, जो हमारी दुर्बलताओंसे छू न सके; तौभी हमारी नाईं सब बातों पर परखा गया, तौभी पाप रहित।

16 सो आओ, हम अनुग्रह के सिंहासन के पास हियाव से आएं, कि हम पर दया करें, और आवश्यकता के समय अनुग्रह पाने के लिथे अनुग्रह पाएं।


अध्याय 5

पुरोहित का।

1 क्योंकि हर एक महायाजक मनुष्यों में से लिया जाता है, वह परमेश्वर के विषय में मनुष्यों के लिथे ठहराया जाता है, कि वह पापोंके लिथे दान और मेलबलि दोनों चढ़ाए;

2 अज्ञानियों पर और मार्ग से भटके हुओं पर कौन तरस खा सकता है; क्योंकि वह आप भी दुर्बलता से घिरा हुआ है।

3 और इसी कारण से उसे चाहिए कि वह लोगोंके लिथे वैसा ही अपके लिथे भी पापोंके लिथे चढ़ाए।

4 और कोई इस सम्मान को अपके लिथे नहीं लेता, केवल वही जो परमेश्वर का कहलाता है, अर्यात् हारून के समान।

5 इसी प्रकार मसीह ने भी महायाजक बनने के लिये अपनी महिमा न की; परन्तु जिस ने उस से कहा, तू मेरा पुत्र है, उसी ने आज तुझे उत्पन्न किया है।

6 जैसा वह दूसरे स्थान पर भी कहता है, कि तू मलिकिसिदक की रीति पर सदा का याजक है।

7 (जिस ने अपने शरीर के दिनों में, जब उस ने अपक्की मृत्यु से बचाने के योग्य हो, तो उस ने बड़ी पुकार और आंसू बहाते हुए प्रार्थना और बिनती की, और उसकी सुनी गई, कि वह डरता है;

8 यद्यपि वह एक पुत्र था, तौभी उसने सीखा कि जो कुछ उसने सहा है, उसके अनुसार आज्ञा मानता है।)

9 और सिद्ध होकर, वह उन सभोंके लिथे जो उसकी आज्ञा का पालन करते हैं, अनन्त उद्धार का कर्ता हुआ;

10 परमेश्वर को मलिकिसिदक की रीति पर महायाजक कहा गया।

11 जिस के विषय में हम को बहुत सी बातें कहना और कहना कठिन है, क्योंकि तुम सुनने में मूढ़ हो।

12 क्‍योंकि जब तुम को शिक्षक होना चाहिए, तब तुम्हें यह चाहिए कि वह तुम्हें फिर से सिखाए जो परमेश्वर के वचनों के पहले सिद्धांत हैं; और वे ऐसे हो जाते हैं, जिन्हें दूध की आवश्यकता होती है, न कि बलवान मांस के।

13 क्‍योंकि जो कोई दूध का प्रयोग करता है, वह धर्म के वचन में अकुशल है; क्योंकि वह बालक है।

14 परन्तु बलवन्त भोजन उन्हीं का होता है, जो पूर्ण आयु के होते हैं, यहां तक कि जिन्होंने भले बुरे का भेद करने के लिये बुद्धि का प्रयोग किया है। * 7वीं और 8वीं आयतें मलिकिसिदक की ओर संकेत करती हैं, न कि मसीह की।


अध्याय 6

मसीह के सिद्धांत के सिद्धांत - बहाली - भगवान के वादे की गारंटी।

1 सो हम मसीह की शिक्षा के सिद्धान्तों को छोड़कर सिद्धता की ओर चलें; मरे हुए कामों से मन फिराव की और परमेश्वर पर विश्वास की नेव फिर न डालें।

2 बपतिस्मे की, हाथ रखने की, और मरे हुओं के जी उठने की, और अनन्त दण्ड की शिक्षा के विषय में।

3 और यदि परमेश्वर अनुमति देता है तो हम सिद्धता की ओर बढ़ते जाएंगे ।

4 क्‍योंकि उस ने उन के लिथे जो पहिले प्रबुद्ध हुए थे, और स्वर्गीय वरदान का स्वाद चखा है, और पवित्र आत्मा के सहभागी हुए हैं, यह असम्भव कर दिया है,

5 और परमेश्वर के अच्छे वचन का, और आने वाले जगत की शक्तियों का स्वाद चख लिया है,

6 यदि वे भटक जाएं, और मन फिराव के लिथे फिर से नए हो जाएं; यह देखकर कि वे अपने लिये परमेश्वर के पुत्र को नये सिरे से क्रूस पर चढ़ाते हैं, और उसे लज्जित करते हैं।

7 क्‍योंकि वह पृय्वी जो उस पर बरसती हुई वर्षा में से पीती, और जड़ी-बूटी उगाती है, उन के लिये जो उस में निवास करते हैं, और जिसके द्वारा वह पहिनता है, और जो अब परमेश्वर की ओर से आशीष पाता है, वह आग से शुद्ध की जाएगी।

8 क्योंकि जो कांटों और कांटों वाला है, वह तुच्छ है, और शाप देने के निकट है; इसलिए जो अच्छे फल नहीं लाते, वे आग में डाले जाएंगे; क्‍योंकि उनका अंत जलना है।

9 परन्तु हे प्रियो, हम तुम से उत्तम बातों और उद्धार के साथ आनेवाली बातों के विषय में यक़ीन रखते हैं, यद्यपि हम ऐसा कहते हैं।

10 क्योंकि परमेश्वर अधर्मी नहीं है, इसलिए वह तुम्हारे काम और प्रेम के परिश्रम को नहीं भूलेगा, जो तुम ने उसके नाम पर दिखाया है, कि तुम पवित्र लोगों की सेवा करते हो, और सेवा करते हो।

11 और हम चाहते हैं कि आप में से हर एक अंत तक आशा के पूर्ण आश्वासन के लिए समान परिश्रम प्रदर्शित करे;

12 कि तुम आलसी न हो, परन्तु उनके अनुयायी बनो, जो विश्वास और धीरज के द्वारा प्रतिज्ञाओं के वारिस होते हैं।

13 क्योंकि जब परमेश्वर ने इब्राहीम से प्रतिज्ञा की, कि उस से बड़ी कोई शपथ न ले सका, तब उस ने अपक्की ही शपय खाई,

14 यह कहते हुए, कि निश्चय मैं तुझे आशीष दूंगा, और तुझे बहुत बढ़ाऊंगा।

15 और इसलिए, धैर्यपूर्वक सहने के बाद, उसे प्रतिज्ञा प्राप्त हुई ।

16 क्‍योंकि मनुष्य बड़े की शपय खाते हैं; और उनके लिये दृढ़ करने की शपथ सब प्रकार के झगड़ों का अन्त है।

17 उस समय परमेश्वर ने प्रतिज्ञा के उत्तराधिकारियों को अपनी युक्ति की अपरिवर्तनीयता दिखाने के लिए और अधिक इच्छा से, शपथ के द्वारा इसकी पुष्टि की;

18 कि दो अपरिवर्तनीय वस्तुओं के द्वारा, जिनमें परमेश्वर का झूठ बोलना अनहोना था, हमें एक दृढ़ सांत्वना मिल सकती है, जो हमारे सामने रखी आशा को पकड़ने के लिए शरण के लिए भाग गए हैं;

19 वह कौन सी आशा है जो हमारे प्राण के लंगर की नाई पक्की और दृढ़ है, और जो उस परदे में प्रवेश करती है;

20 जिस में हमारी ओर से अग्रदूत आया है, उस में यीशु ने मलिकिसिदक की रीति के अनुसार सदा के लिये महायाजक ठहराया।


अध्याय 7

मलिकिसिदक और हारूनी याजकवर्ग में से।

1 क्योंकि यह मेल्कीसेदेक, जो शालेम का राजा या, परमप्रधान परमेश्वर का याजक था, जो राजाओं के वध से लौटकर आए इब्राहीम से मिला, और उसे आशीष दी;

2 जिसे इब्राहीम ने भी सब का दसवां अंश दिया; पहले व्याख्या के अनुसार धर्म का राजा, और उसके बाद सलेम का राजा, जो शांति का राजा है;

3 क्योंकि मेल्कीसेदेक परमेश्वर के पुत्र की उस रीति के अनुसार याजक ठहराया गया, जो न पिता, और न माता, और न वंश, और न उन दिनों का आदि और न जीवन का अन्त था। और जितने इस याजकपद के लिये ठहराए गए हैं, वे सब परमेश्वर के पुत्र के समान ठहरे हुए हैं, जो नित्य याजक का बना रहता है।

4 अब विचार करो कि यह मनुष्य कितना बड़ा था, जिसे कुलपिता इब्राहीम ने लूट का दसवां अंश दिया था।

5 और लेवी की सन्तान में से जो याजकपद का पद ग्रहण करते हैं, उन्हें आज्ञा है कि वे व्यवस्था के अनुसार अर्थात अपने भाइयों से, चाहे वे इब्राहीम की देह से निकले हुए हों, लोगों से दशमांश लें। ;

6 परन्तु जिस के वंश की गिनती उन में से नहीं हुई, उसने इब्राहीम का दशमांश प्राप्त किया, और जिस को प्रतिज्ञा की थी उसे आशीष दी।

7 और बिना किसी विरोध के जो छोटा है, वह अच्छा है।

8 और यहां मरने वाले को दशमांश मिलता है; परन्तु वहाँ वह उन्हें ग्रहण करता है, जिनके विषय में यह गवाही दी जाती है कि वह जीवित है।

9 और जैसा मैं कह सकता हूं, लेवी ने भी, जो दशमांश प्राप्त करता है, इब्राहीम में दशमांश दिया।

10 क्योंकि जब मलिकिसिदक उस से मिला तब वह अपके पिता की गोद में था।

11 सो यदि लेवीय याजकपद के द्वारा सिद्धता पाई जाती, (क्योंकि उसके अधीन लोगों को व्यवस्था मिलती थी), तो फिर क्या आवश्यकता थी कि मलिकिसिदक की रीति पर एक और याजक उठे, और हारून की रीति पर न कहलाए?

12 क्‍योंकि याजकपद के बदले जाने से व्‍यवस्‍था का भी परिवर्तन आवश्‍यक है।

13 क्योंकि जिस के विषय में ये बातें कही गई हैं, वह दूसरे गोत्र का है, जिसके विषय में किसी ने वेदी के पास जाने न दिया।

14 क्‍योंकि यह प्रगट है, कि हमारा प्रभु यहूदा में से निकला है; जिस गोत्र के विषय में मूसा ने याजकपद के विषय में कुछ नहीं कहा।

15 और यह और भी अधिक स्पष्ट है; क्‍योंकि मल्कीसेदेक की समानता के बाद एक और याजक उत्‍पन्‍न हुआ,

16 जो शारीरिक आज्ञा की व्यवस्था के अनुसार नहीं, पर अनन्त जीवन की शक्ति के अनुसार बनाया गया है।

17 क्योंकि वह गवाही देता है, कि तू मलिकिसिदक की रीति पर सदा का याजक है।

18 क्योंकि जो आज्ञा पहिले चल रही है, उस की निर्बलता और हानि के कारण नि:सन्देह झुठलाया जाता है।

19 क्‍योंकि व्‍यवस्‍था बिना शपय खिलाई गई, और कुछ भी सिद्ध नहीं हुई, परन्‍तु यह तो केवल एक उत्तम आशा की प्राप्ति थी; जिससे हम ईश्वर के निकट आते हैं।

20 क्योंकि यह महायाजक बिना शपथ के न था, उसी से यीशु ने एक उत्तम वसीयतनामा का निश्चय किया।

21 (क्योंकि वे याजक बिना शपय के बनाए गए थे, परन्‍तु जिस ने उस से कहा था, कि यहोवा शपय खाकर मन फिराएगा, उस की शपय खाकर तू मल्कीसेदेक की रीति पर सदा के लिथे याजक है;)

22 और वे सचमुच बहुत से याजक थे, क्योंकि मृत्यु के कारण उन्हें बने रहने का कष्ट नहीं हुआ;

23 परन्तु यह मनुष्य, क्योंकि वह सदा बना रहता है, एक अपरिवर्तनीय याजकपद प्राप्त करता है।

24 इसलिथे जो उसके द्वारा परमेश्वर के पास आते हैं, उनका भी वह पूरी रीति से उद्धार कर सकता है, क्योंकि वह उनके लिथे बिनती करने को सर्वदा जीवित है।

25 क्‍योंकि ऐसा महायाजक हम बने, जो पवित्र, निष्कलंक, निर्मल, पापियोंसे अलग, और आकाश का अधिकारी हुआ;

26 और उन महायाजकों की नाईं नहीं, जो पहिले अपके अपके और फिर प्रजा के पापोंके लिथे प्रतिदिन बलिदान चढ़ाते थे; क्‍योंकि उसे अपके पापोंके लिथे बलिदान चढ़ाने की आवश्‍यकता नहीं, क्‍योंकि वह पापोंको न जानता था; लेकिन लोगों के पापों के लिए। और यह उसने एक बार किया, जब उसने खुद को पेश किया।

27 क्‍योंकि व्‍यवस्‍था दुर्बल लोगों को महायाजक बनाती है; परन्‍तु शपय का वचन, जो व्‍यवस्‍था के समय से था, पुत्र को, जो युगानुयुग पवित्र किया जाता है, बना देता है।


अध्याय 8

पौरोहित्य की - नई वाचा ।

1 अब जो बातें हम ने कही हैं उनका सार यह है; हमारा ऐसा महायाजक है, जो स्वर्ग में महामहिम के सिंहासन के दाहिने हाथ पर विराजमान है;

2 पवित्रस्थान और सच्चे तम्बू का सेवक, जिसे यहोवा ने खड़ा किया है, परन्तु मनुष्य नहीं।

3 क्योंकि हर एक महायाजक भेंट और मेलबलि चढ़ाने के लिथे ठहराया जाता है; इसलिए यह आवश्यक है कि इस आदमी के पास कुछ न कुछ देने को भी हो।

4 इसलिथे जब वह पृय्वी पर था, तब उस ने प्रजा के पापोंके लिथे अपके प्राण की आहुति दी। अब व्यवस्था के अधीन हर याजक को व्यवस्या के अनुसार भेंट वा मेलबलि चढ़ाने की अवश्यकता है।

5 जो स्वर्ग की दृष्टान्त और छाया के साम्हने सेवा करते हैं, जैसा कि मूसा को उस समय परमेश्वर ने चिताया था, जब वह निवासस्थान बनाने पर था; क्योंकि देखो, वह कहता है, कि तुम सब वस्तुओं को उस नमूने के अनुसार बनाते हो, जो पर्वत पर तुझे दिखाया गया है।

6 परन्तु अब तो उस ने और भी उत्तम सेवकाई पाई है, और उस उत्तम वाचा का मध्यस्थ भी कितना अधिक है, जो उत्तम प्रतिज्ञाओं पर स्थिर की गई है।

7 क्‍योंकि यदि वह पहिली वाचा निर्दोष होती, तो दूसरी वाचा के लिथे कोई स्थान न मांगा जाता।

8 क्योंकि उन में दोष पाकर वह कहता है, देख, यहोवा की यह वाणी है, ऐसे दिन आते हैं, जब मैं इस्राएल के घराने और यहूदा के घराने से नई वाचा बान्धूंगा;

9 उस वाचा के अनुसार नहीं, जो मैं ने उनके पुरखाओं से उस दिन बान्धी या, जिस दिन मैं ने उनका हाथ पकड़कर उन्हें मिस्र देश से निकाल लाया; क्योंकि वे मेरी वाचा में न बने रहे, और न मैं ने उनकी सुधि ली, यहोवा की यही वाणी है।

10 क्योंकि उन दिनों के पश्चात् जो वाचा मैं इस्राएल के घराने से बान्धूंगा वह यह है, यहोवा की यही वाणी है; मैं अपनी व्यवस्था उनके मन में रखूंगा, और उनके हृदय में लिखूंगा; और मैं उनके लिये परमेश्वर ठहरूंगा, और वे मेरी प्रजा ठहरेंगे;

11 और वे अपके अपके पड़ोसी, और अपके भाई अपके अपके भाई को यह शिक्षा न दें, कि यहोवा को जानो; क्योंकि छोटे से लेकर बड़े तक सब मुझे जानेंगे।

12 क्योंकि मैं उनके अधर्म पर दया करूंगा, और उनके पापोंऔर अधर्म के कामोंको मैं फिर स्मरण न करूंगा।

13 उस में वह कहता है, कि उस ने पहिली वाचा को नई वाचा बान्धी है। अब जो सड़ता और बूढा हो जाता है, वह मिटने को तैयार है।


अध्याय 9

पहली वाचा के नियम - नई वाचा के द्वारा सिद्ध मनुष्य।

1 तब सचमुच पहिली वाचा में भी दैवीय सेवा की विधियां, और एक सांसारिक पवित्रस्थान था।

2 क्योंकि एक तम्बू बनाया गया था; पहिले, जिस में दीवट, और मेज़, और भेंट की रोटी थी; जिसे अभयारण्य कहा जाता है।

3 और दूसरे परदे के बाद वह निवास जो सब से पवित्र कहलाता है;

4 जिस में सोने का धूपदान, और वाचा का सन्दूक चारोंओर सोने से मढ़ा हुआ था, जिस में मन्ना का सोने का पात्र, और हारून की छड़ी जिस पर फूल निकले थे, और वाचा की पटियाएं थीं;

5 और उसके ऊपर प्रायश्चित्त के ढकने के साम्हने महिमा के करूब हों; जिनमें से अब हम विशेष रूप से नहीं बोल सकते हैं।

6 जब ये बातें इस प्रकार ठहराई गईं, तब याजक सर्वदा पहिले तम्बू में जाकर परमेश्वर की उपासना करते थे।

7 परन्तु महायाजक प्रति वर्ष अकेले एक बार जाता था, न कि उस लोहू के, जिसे वह अपके लिथे और प्रजा के अधर्म के लिथे चढ़ाता था;

8 पवित्र आत्मा ने इस बात का बोध कराया, कि पहिले तम्बू के खड़े होने तक सब से पवित्र में जाने का मार्ग अभी तक प्रगट नहीं हुआ था;

9 जो उस समय के समय के लिए एक आकृति थी, जिसमें भेंट और बलिदान दोनों चढ़ाए जाते थे, जो सेवा करने वाले को विवेक के अनुसार सिद्ध नहीं कर सकता था;

10 जो सुधार के समय तक केवल मांस और पेय, और गोताखोर धोने, और शारीरिक विधियों में शामिल थे।

11 परन्‍तु मसीह आनेवाली अच्‍छी वस्‍तुओं का महायाजक होकर एक बड़े और अधिक सिद्ध निवास के द्वारा आया, जो हाथ से नहीं बना, अर्थात इस भवन का नहीं;

12 और न बकरों और बछड़ों के लोहू के द्वारा, पर अपके ही लोहू के द्वारा हमारे लिथे अनन्त छुटकारे पाकर एक बार पवित्र स्थान में प्रवेश किया।

13 क्योंकि यदि बछड़ों और बकरों का लोहू, और बछिया की राख अशुद्ध पर छिड़के, तो वह मांस के शुद्ध करने के लिथे पवित्र ठहरती है;

14 मसीह का लोहू, जिस ने अनन्त आत्मा के द्वारा अपने आप को परमेश्वर के लिये निष्कलंक बलिदान करके, तुम्हारे विवेक को मरे हुए कामों से शुद्ध करके जीवते परमेश्वर की उपासना क्यों न की?

15 और इस कारण वह नई वाचा का मध्यस्थ है, कि मृत्यु के द्वारा, उन अपराधों के छुटकारे के लिए जो पहिली वाचा के अधीन थे, जो बुलाए गए हैं वे अनन्त मीरास की प्रतिज्ञा प्राप्त करें।

16 क्योंकि जहां वाचा है, वहां पीड़ित की मृत्यु भी अवश्य है।

17 क्योंकि पीड़ित के मरने के बाद वाचा प्रबल होती है; अन्यथा पीड़ित के जीवित रहने के दौरान उसकी कोई ताकत नहीं होती।

18 इस पर न तो पहली वाचा बिना लहू के समर्पित की गई।

19 क्योंकि जब मूसा ने सब लोगोंको व्यवस्या के अनुसार सब बातें कह दी, तब उस ने बछड़ोंऔर बकरोंका लोहू, और जल, और लाल रंग का ऊन, और जूफा लेकर पुस्तक समेत सब लोगोंपर छिड़का,

20 और कहा, यह उस वाचा का लोहू है जो परमेश्वर ने तुम से बान्धी है।

21 फिर उस ने निवास और सेवा के सब पात्रोंमें भी इसी प्रकार लोहू छिड़का।

22 और प्राय: सब वस्तुएं व्यवस्था के द्वारा लोहू से शुद्ध की जाती हैं; और बिना लहू बहाए क्षमा नहीं होती।

23 सो यह आवश्यक था, कि स्वर्ग की वस्तुओं के नमूने इन्हीं से शुद्ध किए जाएं; परन्तु स्वर्ग की वस्तुएं इन से उत्तम बलिदानों के साथ हैं।

24 क्‍योंकि मसीह हाथ के बनाए हुए पवित्र स्‍थानों में, जो सत्‍य की मूरतें हैं, प्रवेश नहीं किया गया; परन्तु स्वर्ग में ही, अब हमारे लिये परमेश्वर के साम्हने प्रकट होने के लिये;

25 और न ही वह अपके आप को बार बार चढ़ाए, जैसा महायाजक प्रति वर्ष औरोंका लोहू लेकर पवित्र स्थान में प्रवेश करता है;

26 क्‍योंकि वह जगत की उत्‍पत्ति के समय से बार-बार दु:ख उठाता आया है; परन्तु अब समय के मध्य में एक बार वह अपके बलिदान के द्वारा पाप को दूर करने के लिए प्रकट हुआ है।

27 और जैसा मनुष्यों के लिये एक बार मरना, परन्तु उसके बाद न्याय का होना ठहराया गया है;

28 सो मसीह को एक बार बहुतों के पापों को उठाने के लिथे बलिदान किया गया; और जो उसकी खोज में हैं, वह उद्धार के लिये पापरहित होकर दूसरी बार प्रकट होगा।


अध्याय 10

व्यवस्था की दुर्बलता-मसीह का बलिदान-विश्वास को थामे रहने का उपदेश।

1 क्‍योंकि व्‍यवस्‍था, जिस की आनेवाली अच्‍छी बातोंकी छाया है, और उस की मूरत नहीं, वह उन मेलबलि से जो वे प्रति वर्ष नित्य चढ़ाए जाते हैं, उन में आनेवालोंको सिद्ध नहीं कर सकता।

2 क्‍योंकि क्‍योंकि क्‍या वे चढ़ाए जाने से न रुकते? क्योंकि एक बार शुद्ध किए गए उपासकों के पास पापों का विवेक नहीं होना चाहिए था।

3 परन्तु उन बलिदानों में प्रति वर्ष पापों का स्मरण फिर होता है।

4 क्योंकि यह नहीं हो सकता कि बैलों और बकरों का लोहू पापों को दूर करे।

5 इसलिथे जब वह जगत में आता है, तब कहता है, कि बलि और भेंट तू न चाहता, परन्तु देह तू ने मुझे तैयार की है;

6 होमबलि और पापबलि से तू प्रसन्न नहीं हुआ।

7 तब मैं ने कहा, सुन, हे परमेश्वर, मैं तेरी इच्छा पूरी करने के लिथे आया हूं।

8 ऊपर जब उस ने कहा, बलि और भेंट और होमबलि और पापबलि न तो तू लेना चाहता था, और न उस से प्रसन्नता होती थी; जो कानून द्वारा पेश किए जाते हैं;

9 तब उस ने कहा, सुन, हे परमेश्वर, मैं तेरी इच्छा पूरी करने आया हूं। वह पहले को ले लेता है, कि वह दूसरा स्थापित कर सके।

10 जिसके द्वारा हम यीशु मसीह की देह में से एक बार चढ़ावे के द्वारा पवित्र किए जाएंगे।

11 और हर एक याजक प्रतिदिन खड़ा होकर सेवा टहल करता, और बार-बार वही मेलबलि चढ़ाता है, जो पापोंको कभी दूर नहीं कर सकते;

12 परन्तु यह मनुष्य पापोंके लिथे एक ही बलिदान सर्वदा के लिये चढ़ाकर परमेश्वर की दहिनी ओर बैठ गया;

13 अब से जब तक उसके शत्रु उसके पांवों की चौकी न किए जाएं, तब तक वह राज्य करता रहेगा।

14 क्योंकि उस ने उन्हें एक ही भेंट के द्वारा सदा के लिये सिद्ध किया है, जो पवित्र किए गए हैं।

15 उसका पवित्र आत्मा भी हमारी साक्षी है; उसके बाद उस ने पहिले कहा था,

16 जो वाचा मैं उन दिनों के बाद उन से बान्धूंगा, वह यह है, यहोवा की यही वाणी है; मैं अपनी व्यवस्था उनके मन में रखूंगा, और उनके मन में उन्हें लिखूंगा;

17 और मैं उनके पापों और अधर्म के कामों को फिर स्मरण न करूंगा।

18 अब जहां इन की छूट है, वहां पाप के लिथे फिर कुछ नहीं।

19 इसलिथे हे भाइयो, यीशु के लोहू के द्वारा पवित्र में प्रवेश करने का साहस पाकर,

20 एक नए और जीवित मार्ग से, जिसे उस ने परदे के द्वारा अर्थात अपके शरीर के द्वारा हमारे लिथे पवित्र किया है;

21 और परमेश्वर के भवन का ऐसा महायाजक होना;

22 आओ हम सच्चे मन से विश्वास के पूरे निश्चय के साथ निकट आएं, और अपने मनों को दुष्ट विवेक से छिड़कें, और अपने शरीरों को शुद्ध जल से धोए।

23 आओ हम अपने विश्वास के काम को बिना डगमगाए दृढ़ बनाए रखें; क्योंकि वह विश्वासयोग्य है जिस ने प्रतिज्ञा की है;

24 और हम आपस में प्रेम और भले कामों को भड़काने के लिथे एक दूसरे पर विचार करें;

25 और कितनों की नाईं अपक्की इकट्ठी होने को न तजना; परन्तु एक दूसरे को समझाते रहे; और और भी बहुत कुछ, जैसा कि तुम दिन को निकट आते देखते हो।

26 क्योंकि सच्चाई की पहिचान पाने के बाद यदि हम जान बूझकर पाप करते हैं, तो पापों के बदले फिर कोई बलिदान नहीं रहता।

27 परन्‍तु एक ऐसा भयानक है, जो न्याय की बाट जोहता है, और जलजलाहट करता है, जो द्रोहियोंको भस्म कर डालेगा।

28 जो मूसा की व्यवस्था को तुच्छ जानता था, वह दो या तीन गवाहों के अधीन दया के बिना मर गया;

29 जो परमेश्वर के पुत्र को पांवों से रौंदा, और वाचा के लोहू को, जिसके द्वारा वह पवित्र किया गया था, एक अपवित्र काम गिना गया, और आत्मा के वश में किया गया है, उसे कितना अधिक दण्ड देने योग्य समझा जाएगा? अनुग्रह का?

30 क्योंकि हम उस को जानते हैं जिस ने कहा है, कि पलटा तो मेरा है, मैं बदला दूंगा, यहोवा की यही वाणी है। और फिर, यहोवा अपनी प्रजा का न्याय करेगा।

31 जीवते परमेश्वर के हाथ में पड़ना भयानक बात है।

32 परन्तु उन पहिले दिनोंको स्मरण करो, जिन में तुम ज्योति करके, क्लेशोंके बड़े बड़े युद्ध को सहते थे;

33 जब तक तुम नामधराई और दु:ख दोनों के कारण टकटकी लगाए हुए हो; और आंशिक रूप से, जबकि आप उनके ऐसे साथी बन गए थे जो इस प्रकार उपयोग किए गए थे ।

34 क्‍योंकि तुम ने मेरे बन्धन में मुझ पर तरस खाया, और अपक्की संपत्ति की लूट को आनन्द से लिया, यह जानकर कि तुम्हारे पास स्वर्ग में एक उत्तम और चिरस्थायी वस्तु है।

35 इसलिथे अपके उस हियाव को दूर न करो, जिसका बड़ा प्रतिफल है।

36 क्‍योंकि तुम को सब्र की आवश्‍यकता है, कि परमेश्वर की इच्‍छा पूरी करने के बाद तुम प्रतिज्ञा को प्राप्‍त करो।

37 क्‍योंकि अभी तो थोड़ा ही समय है, और जो आने वाला है, वह आएगा, और न ठहरेगा।

38 अब धर्मी विश्वास से जीवित रहेगा; परन्तु यदि कोई पीछे हट जाए, तो मेरा मन उस से प्रसन्न न होगा।

39 परन्तु हम उन में से नहीं हैं जो नाश की ओर लौट जाते हैं; परन्तु उनमें से जो आत्मा के उद्धार पर विश्वास करते हैं।


अध्याय 11

आस्था और उसका फल।

1 अब विश्वास आशा की हुई वस्तुओं का निश्चय, और अनदेखी वस्तुओं का प्रमाण है।

2 क्‍योंकि इससे पुरनियों को अच्‍छा समाचार मिला।

3 विश्वास के द्वारा हम समझते हैं, कि जगत परमेश्वर के वचन से रचे गए, यहां तक कि दिखाई देने वाली वस्तुएं प्रकट होने वाली वस्तुओं से न बनीं।

4 विश्वास ही से हाबिल ने कैन से भी बढ़कर परमेश्वर के लिथे उत्तम बलिदान चढ़ाया, जिस से उस ने गवाही दी, कि वह धर्मी है, और परमेश्वर उसके वरदानों की गवाही देता है; और उसी से वह मरा हुआ होकर भी बोलता है।

5 विश्वास ही से हनोक का अनुवाद हुआ, कि वह मृत्यु को न देखे; और नहीं मिला, क्योंकि परमेश्वर ने उसका अनुवाद किया था; क्योंकि उसके अनुवाद से पहिले उसके पास यह गवाही थी, कि उस ने परमेश्वर को प्रसन्न किया है।

6 परन्तु विश्वास के बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है; क्योंकि जो परमेश्वर के पास आता है, उसे विश्वास करना चाहिए कि वह है, और जो उसके खोजी हैं, वह उन्हें प्रतिफल देता है।

7 विश्वास ही से नूह ने उन बातोंके विषय में जो उस समय दिखाई न पड़ती थीं, चितौनी पाकर भय के मारे अपने घराने के उद्धार के लिथे एक सन्दूक तैयार किया; जिसके द्वारा उस ने जगत को दोषी ठहराया, और उस धर्म का वारिस हुआ जो विश्वास से होता है।

8 विश्‍वास ही से इब्राहीम ने जब उस स्यान में जाने को कहा, जिसे वह निज भाग करके ग्रहण करे, तब उसकी बात मानी; और वह न जाने किधर को गया, वह निकल गया।

9 विश्वास ही से वह प्रतिज्ञा के देश में परदेशी देश में परदेशी होकर रहा, और इसहाक और याकूब के साथ निवासस्थानों में रहा, जो उसी प्रतिज्ञा के वारिस थे;

10 क्‍योंकि उस ने ऐसे नगर की खोज की जिसकी नेव हो, जिसका निर्माता और निर्माता परमेश्वर है।

11 विश्वास के द्वारा सारा ने आप भी गर्भ धारण करने की शक्ति प्राप्त की, और जब वह वयस्क थी, तब एक बच्चे को जन्म दिया गया था, क्योंकि वह उस विश्वासयोग्य का न्याय करती थी जिसने वादा किया था।

12 इसलिथे एक में से एक वहां उछला, और वह मरा हुआ सा, और आकाश के तारोंके समान, और समुद्र के किनारे की बालू के नाईं असंख्य हो उठे।।

13 वे सब वायदे प्राप्त न करके विश्वास में मर गए, परन्तु दूर से ही उन्हें देखकर उनका यक़ीन किया, और उन्हें गले लगाया, और मान लिया कि वे पृय्वी पर परदेशी और तीर्थयात्री हैं।

14 क्‍योंकि जो ऐसी बातें कहते हैं, वे स्‍पष्‍ट रूप से घोषणा करते हैं कि वे एक देश की खोज में हैं।

15 और वास्तव में, यदि वे उस देश का ध्यान रखते, जहां से वे निकले थे, तो उनके पास लौटने का अवसर हो सकता था।

16 परन्तु अब वे एक उत्तम देश अर्थात् स्वर्गीय देश की अभिलाषा करते हैं; इसलिए परमेश्वर उनका परमेश्वर कहलाने में लज्जित नहीं होता; क्योंकि उस ने उनके लिये एक नगर तैयार किया है।

17 विश्वास ही से इब्राहीम ने परीक्षा के समय इसहाक को बलि चढ़ाया; और जिस ने प्रतिज्ञा की थी, उसने अपके एकलौते पुत्र को बलि कर दिया,

18 जिस के विषय में यह कहा गया था, कि तेरा वंश इसहाक में कहलाएगा;

19 यह लेखा जोखा, कि परमेश्वर उसे मरे हुओं में से जिला सकता है; वह भी कहाँ से उसे एक आकृति में ग्रहण किया।

20 विश्वास ही से इसहाक ने याकूब और एसाव को आनेवाली बातों के विषय में आशीष दी।

21 विश्वास ही से याकूब ने मरते समय यूसुफ के दोनों पुत्रों को आशीर्वाद दिया; और अपने कर्मचारियों के शीर्ष पर झुककर पूजा की।

22 विश्वास ही से यूसुफ ने मरते समय इस्राएलियों के जाने की चर्चा की; और उसकी हड्डियों के विषय में आज्ञा दी।

23 विश्वास ही से मूसा अपने माता-पिता से तीन महीने तक छिपा रहा, क्योंकि उन्होंने देखा कि वह निराला है; और वे राजा की आज्ञा से नहीं डरते थे।

24 विश्वास ही से मूसा ने जब विवेक की आयु पूरी की, तब उसने फिरौन की बेटी का पुत्र कहलाने से इन्कार किया;

25 परमेश्वर की प्रजा के साथ दु:ख भोगने के लिथे एक दिन पाप के भोग भोगने के लिथे यह अच्छा ही रहे;

26 मसीह की नामधराई को मिस्र के भण्डारों से भी बढ़कर मान लेना; क्योंकि वह प्रतिफल के प्रति आदर रखता था।

27 विश्वास ही से उस ने राजा के कोप से न डरकर मिस्र को छोड़ दिया; क्योंकि वह अदृश्‍य को मानो देखता हुआ धीरज धरता रहा।

28 विश्वास के द्वारा उस ने फसह और लोहू छिड़कने को माना, कहीं ऐसा न हो कि वह पहिलौठों को नाश करने वाला उन्हें छू ले।

29 विश्वास ही से वे सूखी भूमि की नाईं लाल समुद्र के पार चले गए; जो मिस्री करने की परख कर रहे थे वे डूब गए।

30 विश्वास ही से यरीहो की शहरपनाह सात दिन तक चारों ओर घिरी रहने के बाद गिर पड़ी।

31 विश्वास ही से राहाब वेश्या उन लोगों के साथ नाश न हुई जिन्होंने विश्वास न किया, जब उस ने भेदियों को शान्ति से ग्रहण किया।

32 और मैं और क्या कहूं? क्योंकि गिदोन, बाराक, शिमशोन, और यिप्तह के विषय में मैं समय नहीं बता सकता; दाऊद का, और शमूएल, और भविष्यद्वक्ताओं का;

33 जिसने विश्वास के द्वारा राज्यों को वश में किया, धर्म के काम किए, प्रतिज्ञाओं को प्राप्त किया, और सिंहों के मुंह को रोका,

34 आग की लपट को बुझाया, तलवार की धार से बच निकला, दुर्बलता से बलवन्त हुए, युद्ध में वीर बने, परदेशियों की सेना को भगाने के लिए फिरे।

35 औरतों ने अपके मरे हुओं को जिलाया; और दूसरों पर अत्याचार किया गया, छुटकारे को स्वीकार नहीं किया; कि वे पहिले पुनरुत्थान को प्राप्त करें;

36 और दूसरों पर क्रूर उपहास और कोड़े लगने का परीक्षण हुआ, हां, बंधनों और कारावास के अलावा;

37 वे पत्यरवाह किए गए, वे चकनाचूर हो गए, वे परीक्षा में पड़ गए, और तलवार से मारे गए; वे भेड़-बकरियों और बकरियों की खालों में इधर-उधर फिरते थे; बेसहारा होना, पीड़ित होना, सताया जाना;

38 जिस के वश में संसार न था; वे मरुभूमि में, और पहाड़ों में, और भूमि की गुफाओं और गुफाओं में फिरते थे।

39 और इन सब ने विश्वास के द्वारा अच्छा समाचार पाकर प्रतिज्ञाओं को ग्रहण न किया;

40 परमेश्वर ने उनके दु:खों के द्वारा उनके लिये कुछ उत्तम वस्तुएं प्रदान की हैं, क्योंकि बिना कष्ट के वे सिद्ध नहीं हो सकते।


अध्याय 12

निरंतर विश्वास, धैर्य और भक्ति के लिए एक प्रोत्साहन - नई वाचा पुराने से बेहतर है।

1 इसलिथे, जब गवाहों का ऐसा बड़ा बादल हम से घिरा हुआ है, तो आओ, हम सब बोझ को, और उस पाप को जो हमें आसानी से घेर लेती है, अलग रख दें, और उस दौड़ में जो हमारे आगे दौड़ती है, धीरज से दौड़ें,

2 हमारे विश्वास के रचयिता और सिद्ध करनेवाले यीशु की ओर देख; जो उस आनन्द के कारण जो उसके आगे धरा था, लज्जा की कुछ चिन्ता न करके क्रूस को सहा, और परमेश्वर के सिंहासन की दहिनी ओर विराजमान है।

3 क्‍योंकि उस पर ध्‍यान दो, जिसने अपने विरूद्ध पापियों के ऐसे विरोध को सहा, ऐसा न हो कि तुम थके हुए और अपने मन में मूर्छित हो जाओ।

4 तुम ने अब तक लोहू का विरोध नहीं किया, और पाप के विरुद्ध यत्न किया है।

5 और तुम उस उपदेश को भूल गए हो जो तुम से बालकोंके समान कहता है, कि हे मेरे पुत्र, यहोवा की ताड़ना को तुच्छ न जाने, और जब तू उस की ताड़ना करे, तब तू निराश न हो;

6 क्योंकि जिस से यहोवा प्रीति रखता है उसको वह ताड़ना देता है, और जिस पुत्र को प्राप्त करता है उसे कोड़े देता है।

7 यदि तुम ताड़ना सहते रहो, तो परमेश्वर तुम्हारे साथ पुत्रों के समान व्यवहार करता है; क्‍योंकि वह कौन सा पुत्र है जिसे पिता ताड़ना नहीं देता?

8 परन्तु यदि तुम उस ताड़ना के बिना हो, जिसमें सब सहभागी हैं, तो बेटे नहीं, कमीने हो।

9 इसके अलावा, हमारे शरीर के पिता थे जिन्होंने हमें ठीक किया, और हमने उन्हें सम्मान दिया; क्या हम आत्माओं के पिता के आधीन होकर जीवित न रहें?

10 क्‍योंकि उन्‍होंने नि:सन्‍देह अपके ही लिथे हम को बहुत दिन तक ताड़ना दी; परन्तु वह हमारे लाभ के लिथे है, कि हम उसकी पवित्रता के सहभागी हों।

11 अब वर्तमान की ताड़ना आनन्ददायक नहीं, वरन दुखदायी मालूम होती है; फिर भी, बाद में यह उन लोगों को धार्मिकता का शांतिपूर्ण फल देता है जो इसके द्वारा प्रयोग किए जाते हैं।

12 इस कारण लटके हुए हाथों को ऊपर उठा, और निर्बल घुटनों को दृढ़ कर;

13 और अपके पांवोंके लिथे सीधा मार्ग बनाओ, ऐसा न हो कि जो लंगड़ा है, वह मार्ग से भटक जाए; बल्कि इसे चंगा होने दो।

14 सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप और पवित्रता का पालन करो, जिसके बिना कोई यहोवा को न देखेगा;

15 यत्न से देखते रहो, कहीं ऐसा न हो कि कोई मनुष्य परमेश्वर के अनुग्रह से चूक जाए; कहीं ऐसा न हो कि कड़वाहट की जड़ फूटकर तुम्हें कष्ट दे, और उसके द्वारा बहुत से लोग अशुद्ध हो जाएं;

16 कहीं ऐसा न हो कि एसाव के समान कोई व्यभिचारी, वा अपवित्र व्यक्ति हो, जिस ने अपने पहिलौठे के अधिकार को एक टुकड़े के बदले में बेच दिया हो।

17 क्‍योंकि तुम जानते हो, कि आगे चलकर जब उसे आशीष मिली होती, तो वह ठुकरा दिया जाता था; क्‍योंकि उस ने मन फिराव का कोई ठिकाना न पाया, तौभी वह आँसुओं के द्वारा उसकी खोज में रहा।

18 क्‍योंकि तुम छूए जानेवाले पहाड़ पर नहीं आए, जो आग से जल गया, और न कालापन, और अन्‍धकार, और आंधी,

19 और तुरही का शब्द, और शब्दों का शब्द; सुननेवालों ने किस शब्द से बिनती की, कि यह बात फिर उन से न कही जाए;

20 (क्योंकि वे उस आज्ञा को सह न सके, जिस की आज्ञा दी गई हो, और यदि पशु पहाड़ को छू जाए, तो पत्यरवाह किया जाए, वा डांटे से वार किया जाए;

21 और वह नजारा ऐसा भयानक था, कि मूसा ने कहा, मैं बहुत डरता और कांपता हूं;)

22 परन्तु तुम सिय्योन पर्वत पर, और जीवते परमेश्वर के नगर, जो स्वर्गीय यरूशलेम है, और बहुत से स्वर्गदूतों के पास आए हो,

23 महासभा और पहिलौठों की कलीसिया के नाम जो स्वर्ग में लिखे हुए हैं, और परमेश्वर सब के न्यायी, और धर्मी लोगों के आत्मा के लिथे जो सिद्ध किए गए हैं,

24 और नई वाचा के मध्यस्थ यीशु के लिथे, और छिड़काव के लोहू के लिथे, जो हाबिल से भी उत्तम बातें कहता है।

25 देख, कि बोलने वाले को न ठुकराना; क्योंकि जिस ने पृय्वी पर बातें करनेवाले को इन्कार किया, यदि वे न बच पाए, तो उस से जो स्वर्ग की बातें करता है, फिर जाएं, उस से भी हम न बचेंगे;

26 उस की वाणी ने पृय्वी को कांप दिया; परन्तु अब उस ने यह कहकर प्रतिज्ञा की है, कि मैं पृय्वी को ही नहीं वरन स्वर्ग को भी एक बार फिर हिलाता हूं।

27 और यह वचन, तौभी, जो हिलाई हुई वस्तुओं के बने रहने की नाईं टलने का एक बार फिर संकेत करता है, कि जो वस्तुएं हिलाई नहीं जा सकतीं वे बनी रहें।

28 इसलिथे हम ऐसा राज्य पाएं, जो टल नहीं सकता, उस पर अनुग्रह हो, जिस से हम भक्ति और भक्‍ति के साथ ग्रहणयोग्य परमेश्वर की उपासना कर सकें;

29 क्योंकि हमारा परमेश्वर भस्म करने वाली आग है।


अध्याय 13

दान, ईमानदारी, लोभ के बारे में सलाह; प्रचारकों के संबंध में, मसीह को स्वीकार करने के लिए, भिक्षा देने के लिए।

1 भाईचारे का प्रेम बना रहे।

2 अजनबियों का मनोरंजन करना न भूलें; इसके लिए कुछ लोगों ने अनजाने में स्वर्गदूतों का मनोरंजन किया है।

3 जो बन्धन में हैं, उन को स्मरण रखो, जैसे उन से बन्धे हुए हैं; और जो आप ही देह के होने के कारण विपत्ति सहते हैं।

4 विवाह सब में आदर की बात है, और बिछौना निर्मल है; परन्तु व्यभिचारी और व्यभिचारी परमेश्वर न्याय करेगा।

5 तेरा अभिषेक बिना लोभ के हो; और जो कुछ तुम्हारे पास है उसी को देने में सन्तुष्ट रहो; क्योंकि उस ने कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा।

6 ताकि हम निडर होकर कहें, यहोवा मेरा सहायक है, और मैं यह न डरूंगा कि मनुष्य मेरे साथ क्या करेगा।

7 जो तुम पर प्रभुता करते हैं, उन को स्मरण रखो, जिन्होंने तुम से परमेश्वर का वचन सुनाया है; जिनका विश्वास उनकी बातचीत के अंत पर विचार करते हुए अनुसरण करता है।

8 यीशु मसीह कल, और आज और युगानुयुग एक ही है।

9 गोताखोरों और पराये उपदेशों के साथ मत घूमो; क्‍योंकि यह अच्‍छी बात है कि मन अनुग्रह से स्थिर रहे; मांस के साथ नहीं, जो उन पर कब्जा कर लिया गया है, जो उन्हें लाभ नहीं हुआ है।

10 हमारी एक वेदी है, जिस में से उनको खाने का अधिकार नहीं, जो निवास की उपासना करते हैं।

11 क्‍योंकि जिन पशुओं का लोहू महायाजक पाप के लिथे पवित्रस्‍थान में लाया जाता है, उन पशुओं की लोथ छावनी के बाहर जला दी जाती हैं।

12 इसलिथे यीशु ने भी, कि अपके लोहू से प्रजा को पवित्र करे, फाटक के बाहर दुख उठाया।

13 सो आओ, हम उसकी नामधराई सहते हुए छावनी के बाहर उसके पास जाएं।

14 क्‍योंकि यहां हमारा कोई स्थायी नगर नहीं, परन्‍तु हम तो एक के आने की खोज में हैं।

15 सो हम उसके द्वारा स्तुतिरूपी बलिदान नित्य परमेश्वर के लिथे अर्थात अपके होठोंका फल उसके नाम का धन्यवाद करते हुए चढ़ाएं।

16 परन्तु भलाई करना और बातें करना न भूलना; क्योंकि ऐसे बलिदानों से परमेश्वर प्रसन्न होता है।

17 उन की मानो जो तुम पर प्रभुता करते हैं, और अपने आप को समर्पित करो; क्योंकि वे लेखा देनेवालों की नाईं तेरे प्राण की बाट जोहते हैं, कि शोक से नहीं परन्तु आनन्द से करें; क्योंकि यह तुम्हारे लिए लाभहीन है।

18 हमारे लिथे प्रार्थना करो; क्‍योंकि हम भरोसा करते हैं, कि हमारा विवेक अच्‍छा है, और हम सब बातोंमें ईमानदारी से जीने को तैयार हैं।

19 परन्‍तु मैं तुम से बिनती करता हूं, कि ऐसा ही कर, कि मैं जल्‍दी से जल्‍दी तुम्‍हारे पास लौट आऊं।

20 अब शान्ति का परमेश्वर, जो हमारे प्रभु यीशु को, जो भेड़ों का महान चरवाहा है, मरे हुओं में से सदा की वाचा के लोहू के द्वारा फिर लाया,

21 तुम सब भले कामों में उस की इच्छा पूरी करने के लिये सिद्ध करना, और उस में वह काम करना जो उसकी दृष्टि में प्रिय है, यीशु मसीह के द्वारा; जिसकी महिमा सदा सर्वदा बनी रहे। तथास्तु।

22 और हे भाइयो, मैं तुम से बिनती करता हूं, कि उपदेश के वचन को सह लो; क्योंकि मैं ने तुम को चंद शब्दों में एक पत्र लिखा है।

23 तुम जान लो कि हमारा भाई तीमुथियुस स्वतंत्र हो गया है; किसके साथ, यदि वह शीघ्र आ जाए, तो मैं तुझ से मिलूंगा।

24 उन सभों को जो तुम पर प्रभुता करते हैं, और सब पवित्र लोगों को नमस्कार। इटली के वे आपको सलाम करते हैं।

25 अनुग्रह तुम सब पर बना रहे। तथास्तु। तीमुथियुस द्वारा इटली से इब्रानियों को लिखा गया।

शास्त्र पुस्तकालय:

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