गलाटियन्स

गलातियों को प्रेरित पौलुस का पत्र

 

अध्याय 1

सुसमाचार अपरिवर्तनीय - पॉल ने इसे रहस्योद्घाटन के द्वारा प्राप्त किया।

1 पौलुस जो प्रेरित है, (मनुष्यों का नहीं, न मनुष्य का, परन्तु यीशु मसीह और परमेश्वर पिता के द्वारा, जिस ने उसे मरे हुओं में से जिलाया;)

2 और गलातिया की कलीसियाओं के सब भाई जो मेरे संग हैं;

3 परमेश्वर पिता, और हमारे प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुझे अनुग्रह और शान्ति मिले,

4 उस ने हमारे पापों के लिथे अपने आप को दे दिया, कि परमेश्वर और हमारे पिता की इच्छा के अनुसार हमें इस वर्तमान दुष्ट संसार से छुड़ाए;

5 जिसकी महिमा युगानुयुग होती रहे। तथास्तु।

6 मैं अचम्भा करता हूं कि जिस ने तुम्हें मसीह के अनुग्रह में बुलाया है, उस में से तुम इतनी शीघ्रता से दूर हो गए;

7 जो दूसरा नहीं है; परन्तु कुछ ऐसे हैं जो तुम्हें परेशान करते हैं, और मसीह के सुसमाचार को बिगाड़ देते हैं।

8 परन्तु हम या स्वर्ग का कोई दूत उस सुसमाचार को छोड़ जो हम ने तुम्हें सुनाया है, और कोई दूसरा सुसमाचार सुनाएं, तौभी वह शापित हो।

9 जैसा हम ने पहिले कहा, वैसा ही मैं अब फिर कहता हूं, कि जो सुसमाचार तुम को मिला है, उसके सिवा यदि कोई दूसरा कोई सुसमाचार सुनाए, तो वह शापित हो।

10 क्‍योंकि अब मैं मनुष्योंको प्रसन्‍न करता हूं, वा परमेश्वर? या मैं पुरुषों को खुश करना चाहता हूँ? क्‍योंकि यदि मैं अब तक मनुष्योंको प्रसन्‍न करता हूं, तो मैं मसीह का दास न होता।

11 परन्तु हे भाइयो, मैं तुम को प्रमाणित करता हूं, कि जो सुसमाचार मेरे विषय में सुनाया गया, वह मनुष्य के पीछे नहीं है।

12 क्‍योंकि न तो मैं ने इसे मनुष्य से ग्रहण किया, और न मुझे यह सिखाया गया, परन्‍तु यीशु मसीह के प्रगट होने के द्वारा।

13 क्‍योंकि तुम ने यहूदियोंके धर्म में पहिले मेरी बातें सुनी हैं, कि मैं ने परमेश्वर की कलीसिया पर किस रीति से अत्याधिक ज़ुल्म किया, और उसे बरबाद किया;

14 और अपके पुरखाओं की परम्पराओं के प्रति अति उत्साही होकर अपनी जाति में अपके अपके बराबर के लोगोंसे बढ़कर यहूदियोंके धर्म में लाभ किया।

15 परन्तु जब परमेश्वर को यह प्रसन्न हुआ, जिस ने मुझे मेरी माता के गर्भ से अलग कर दिया, और अपने अनुग्रह से मुझे बुलाया,

16 कि अपके पुत्र को मुझ में प्रगट करूं, कि मैं अन्यजातियोंमें उसका प्रचार करूं; मैं ने तुरन्त मांस और लोहू नहीं दिया;

17 और जो मुझ से पहिले प्रेरित थे, उनके पास मैं यरूशलेम को नहीं गया; परन्‍तु मैं अरब को गया, और फिर दमिश्‍क को लौट गया।

18 तब मैं तीन वर्ष के बाद पतरस से भेंट करने के लिथे यरूशलेम को गया, और उसके साथ पन्द्रह दिन तक रहा।

19 परन्तु और प्रेरितों में से किसी ने मुझे नहीं देखा, केवल यहोवा के भाई याकूब को छोड़।

20 अब जो बातें मैं तुम को लिखता हूं, देखो, परमेश्वर के साम्हने मैं झूठ नहीं बोलता।

21 इसके बाद मैं अराम और किलिकिया के क्षेत्रों में आया;

22 और यहूदिया की कलीसियाओं से जो मसीह में थीं, अनजाना था;

23 परन्तु उन्होंने केवल यह सुना था, कि जो पहिले समय में हमें सताता था, वह अब उस विश्वास का प्रचार करता है जिसे उस ने एक बार नाश किया था।

24 और उन्होंने मेरे कारण परमेश्वर की बड़ाई की।


अध्याय 2

झूठे भाइयों — विश्वास से धर्मी ठहराना — पतरस जुदा होना।

1 फिर चौदह वर्ष के पश्चात् मैं बरनबास के साथ फिर यरूशलेम को गया, और तीतुस को भी अपने साथ ले गया।

2 और मैं ने रहस्योद्घाटन के द्वारा ऊपर जाकर उन्हें वह सुसमाचार सुनाया, जिसका प्रचार मैं अन्यजातियों में करता हूं, परन्तु एकान्त में उनको जो प्रतिष्ठा के योग्य हैं, कहीं ऐसा न हो कि मैं व्यर्थ दौड़ूं, या दौड़ूं।

3 परन्तु तीतुस, जो यूनानी होकर मेरे संग या, खतना कराने के लिये विवश न हुआ।

4 तौभी कितने ऐसे थे, जो अनजाने में झूठे भाइयोंके द्वारा भीतर लाए गए, कि हमारी उस स्वतंत्रता का भेद लेने के लिथे जो हमें मसीह यीशु में मिली है, भेद लेने आए हैं, कि हम को बन्धन में डाल दें;

5 जिसे हम ने आधीन करके ठहराया, नहीं, एक घण्टे तक नहीं; कि सुसमाचार की सच्चाई तुम्हारे साथ बनी रहे।

6 परन्तु जो कुछ थोड़े से प्रतीत होते थे, चाहे वे कुछ भी हों, मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता; परमेश्वर किसी व्यक्ति के व्यक्ति को स्वीकार नहीं करता है; क्‍योंकि जो लोग सम्‍मेलन में कुछ-कुछ प्रतीत होते थे, उन्होंने मुझे कुछ नहीं जोड़ा;

7 परन्तु इसके विपरीत, जब उन्होंने देखा कि खतनारहित का सुसमाचार मुझे दिया गया है, जैसा कि खतने का सुसमाचार पतरस को दिया गया था;

8 (क्योंकि जिस ने पतरस के द्वारा खतने की प्रेरिताई का काम किया, वही मुझ में अन्यजातियों पर भी सामर्थी था;)

9 और जब याकूब, कैफा और यूहन्ना ने जो खम्भे थे, उस अनुग्रह को जो मुझ पर दिया गया था, जान लिया, तो उन्होंने मुझे और बरनबास को संगति के दाहिने हाथ दिए; कि हम अन्यजातियों के पास जाएं, और वे खतना कराने वालों के पास जाएं।

10 केवल वे चाहते थे कि हम कंगालों को स्मरण करें; वही जो मैं भी करने के लिए तत्पर था।

11 परन्‍तु जब पतरस अन्‍ताकिया में आया, तो मैं ने उसका साम्हना किया, क्‍योंकि उस पर दोष लगाया जाना था।

12 क्योंकि उस से पहिले कि याकूब की ओर से कितने लोग आए, उस ने अन्यजातियोंके संग भोजन किया; परन्‍तु जब वे आए, तब वह खतनेवालोंसे डरकर हट गया, और अलग हो गया।

13 और अन्य यहूदी भी उसके साथ मिल गए; यहाँ तक कि बरनबास भी उनके कपट से बहक गया।

14 परन्तु जब मैं ने देखा, कि वे सुसमाचार की सच्चाई के अनुसार सीधे नहीं चलते, तब मैं ने उन सब के साम्हने पतरस से कहा, यदि तू यहूदी होकर अन्यजातियोंकी रीति पर रहता है, और यहूदियोंकी नाईं नहीं चलता, तो क्यों विवश किया जाए? क्या तू अन्यजातियों की नाई यहूदियों की नाईं रहेगा?

15 हम जो स्वभाव से यहूदी हैं, और अन्यजातियों के पापी नहीं,

16 यह जानते हुए कि मनुष्य व्यवस्था के कामों से नहीं, पर यीशु मसीह के विश्वास से धर्मी ठहरता है, हम ने भी यीशु मसीह पर विश्वास किया है, कि हम व्यवस्था के कामों से नहीं, पर मसीह के विश्वास से धर्मी ठहरें। ; क्‍योंकि व्‍यवस्‍था के कामों से कोई प्राणी धर्मी न ठहरेगा।

17 परन्तु यदि हम मसीह के द्वारा धर्मी ठहराए जाने का प्रयास करते हैं, तो हम भी पापी ठहरते हैं, तो क्या मसीह पाप का सेवक है? भगवान न करे।

18 क्‍योंकि जो वस्‍तुएं मैं ने नाश की हैं, यदि उन को मैं फिर से बनाऊं, तो अपने आप को अपराधी ठहराता हूं।

19 क्‍योंकि मैं व्‍यवस्‍था के द्वारा व्‍यवस्‍था के लिथे मरा हूं, कि मैं परमेश्वर के लिथे जीवित रहूं।

20 मैं मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया हूं; फिर भी मैं रहता हूँ; तौभी मैं नहीं, परन्तु मसीह मुझ में जीवित है; और वह जीवन जो मैं अब शरीर में जीवित हूं, परमेश्वर के पुत्र के विश्वास से जीवित हूं, जिस ने मुझ से प्रेम किया, और मेरे लिये अपने आप को दे दिया।

21 मैं परमेश्वर के अनुग्रह को निराश नहीं करता; क्‍योंकि यदि व्‍यवस्‍था से धर्म आता है, तो मसीह व्‍यर्थ मर गया।


अध्याय 3

अविश्वासियों को फटकार लगाई - इब्राहीम के साथ विश्वासयोग्य आशीष - मसीह में बपतिस्मा।

1 हे मूर्ख गलातियों, जिस ने तुम को ऐसा बहकाया है, कि तुम उस सत्य की बात न मानना, जिस की आंखों के साम्हने यीशु मसीह को तुम्हारे बीच क्रूस पर चढ़ाया गया है?

2 मैं तुम से केवल यही सीखूंगा, कि तुम ने आत्मा को व्यवस्था के कामोंके द्वारा वा विश्वास के सुनने के द्वारा ग्रहण किया है?

3 क्या तुम इतने मूर्ख हो? आत्मा में आरम्भ करके, क्या अब तुम शरीर के द्वारा सिद्ध किए गए हो?

4 क्या तुमने व्यर्थ में इतने कष्ट उठाए हैं? अगर यह अभी तक व्यर्थ है।

5 सो जो तुम्हारी आत्मा की सेवा टहल करता है, और तुम्हारे बीच चमत्कार करता है, क्या वह व्यवस्था के कामों से या विश्वास के सुनने के द्वारा करता है?

6 जैसा इब्राहीम ने परमेश्वर की प्रतीति की, और यह उसके लिथे धर्म गिना गया।

7 इसलिथे जान ले कि जो विश्वास करनेवाले हैं, वही इब्राहीम की सन्तान हैं।

8 और पवित्र शास्त्र ने यह पहिचान कि, कि परमेश्वर अन्यजातियों को विश्वास के द्वारा धर्मी ठहराएगा, इब्राहीम को यह सुसमाचार सुनाया, कि तुझ में सब जातियां आशीष पाएंगी।

9 सो विश्वास करनेवालों को विश्वासयोग्य इब्राहीम की आशीष मिलती है।

10 क्‍योंकि जितने व्‍यवस्‍था के कामोंमें से हैं, वे शाप के वश में हैं; क्योंकि लिखा है, शापित है वह, जो उन सब बातों में जो व्यवस्था की पुस्तक में लिखी हुई हैं, उनके करने में स्थिर नहीं रहती।

11 परन्‍तु यह प्रगट है कि कोई व्‍यवस्‍था के द्वारा परमेश्‍वर के सम्‍मुख धर्मी नहीं ठहरता; क्योंकि धर्मी विश्वास से जीवित रहेगा।

12 और व्यवस्था विश्वास की नहीं; परन्तु जो मनुष्य उन्हें करेगा वह उन में जीवित रहेगा।

13 मसीह ने हम को व्यवस्था के श्राप से छुड़ाया, और हमारे लिथे श्राप ठहराया; क्योंकि लिखा है, शापित है वह, जो वृक्ष पर लटकता है;

14 कि इब्राहीम की आशीष यीशु मसीह के द्वारा अन्यजातियों पर आए; कि वे विश्वास के द्वारा आत्मा की प्रतिज्ञा प्राप्त करें।

15 हे भाइयो, मैं मनुष्यों की सी बात कहता हूं; चाहे वह मनुष्य की वाचा ही क्यों न हो, तौभी जब वह पक्की हो जाती है, तो कोई मनुष्य उसे न तोड़े, और न उसमें कुछ बढ़ाए।

16 अब इब्राहीम और उसके वंश से किए गए वादे थे। वह नहीं कहता, और बीज से, बहुतोंकी नाईं; परन्तु एक के रूप में, और तेरे वंश के लिए, जो कि मसीह है।

17 और मैं यह कहता हूं, कि जो वाचा परमेश्वर के साम्हने मसीह में दृढ़ की गई, वह व्यवस्था, जो चार सौ तीस वर्ष के बाद हुई, वह खण्डन नहीं कर सकती, कि उस प्रतिज्ञा को पूरा न किया जाए।

18 क्‍योंकि यदि निज भाग व्‍यवस्‍था का है, तो वह प्रतिज्ञा का नहीं; परन्तु परमेश्वर ने इब्राहीम को प्रतिज्ञा के द्वारा दिया।

19 इसलिए, कानून को अपराधों के कारण तब तक जोड़ा गया, जब तक कि वह वंश न आ जाए, जिसे मूसा को दी गई व्यवस्था में वादा किया गया था, जिसे इस पहली वाचा का मध्यस्थ होने के लिए स्वर्गदूतों के हाथ से ठहराया गया था, (व्यवस्था ।)

20 अब यह मध्यस्थ नई वाचा का मध्यस्थ नहीं था; परन्तु नई वाचा का एक मध्यस्थ है, जो मसीह है, जैसा कि इब्राहीम और उसके वंश से की गई प्रतिज्ञाओं के विषय में व्यवस्था में लिखा है। अब मसीह जीवन का मध्यस्थ है; क्योंकि यह वह प्रतिज्ञा है जो परमेश्वर ने इब्राहीम से की थी।

21 तो क्या व्यवस्था परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं के विरुद्ध है? भगवान न करे; क्‍योंकि यदि कोई ऐसी व्‍यवस्‍था होती जो जीवन दे सकती थी, तो व्‍यवस्‍था के द्वारा नि:सन्‍देह धार्मिकता होती।

22 परन्तु पवित्रशास्त्र ने सब को पाप के अधीन कर दिया है, कि यीशु मसीह के विश्वास से प्रतिज्ञा की हुई, विश्वास करनेवालों को दी जाए।

23 परन्तु विश्वास के आने से पहिले ही हम व्यवस्या के आधीन रहे, और उस विश्वास के लिथे बन्द रहे, जो बाद में प्रगट होगा।

24 इसलिथे कि मसीह तक व्यवस्या हमारा गुरु बनी रही, कि हम विश्‍वास के द्वारा धर्मी ठहरें।

25 परन्तु उस विश्वास के आ जाने के बाद, हम अब शिक्षक के अधीन नहीं रहे।

26 क्योंकि यीशु मसीह पर विश्वास करने से तुम सब परमेश्वर की सन्तान हो।

27 क्योंकि तुम में से जितनों ने मसीह में बपतिस्मा लिया है, उन्होंने मसीह को पहिन लिया है।

28 न यहूदी, न यूनानी, न बन्धन, न स्वतन्त्र, न नर, न नारी; क्योंकि तुम सब मसीह यीशु में एक हो।

29 और यदि तुम मसीह के हो तो इब्राहीम के वंश और प्रतिज्ञा के अनुसार वारिस भी हो।


अध्याय 4

मसीह के द्वारा छुटकारे - परमेश्वर के पुत्र।

1 अब मैं कहता हूं, कि वारिस जब तक बालक है, तौभी वह सब का स्वामी होने पर भी दास से भिन्न नहीं;

2 परन्तु पिता के ठहराए हुए समय तक वह शिक्षकों और हाकिमोंके आधीन रहता है।

3 वैसे ही हम भी जब बालक थे, तो जगत की वस्तुओं के वश में थे;

4 परन्‍तु जब समय पूरा हुआ, तब परमेश्वर ने अपके पुत्र को जो व्‍यवस्‍था के अधीन बनाया, औरत का बना हुआ भेजा,

5 कि व्यवस्था के अधीन रहने वालों को छुड़ा ले, कि हम को गोद लेनेवाले पुत्र प्राप्त हों।

6 और इसलिये कि तुम पुत्र हो, परमेश्वर ने अपके पुत्र का आत्मा तुम्हारे मन में यह पुकार कर भेजा है, कि हे अब्बा, हे पिता।

7 इस कारण तू अब दास नहीं, वरन पुत्र है; और यदि पुत्र है, तो मसीह के द्वारा परमेश्वर का वारिस है।

8 तौभी जब तुम परमेश्वर को नहीं जानते, तो उन की उपासना करते थे जो स्वभाव से देवता नहीं हैं।

9 परन्तु अब जब तुम परमेश्वर को जान गए, वा यों कहें कि परमेश्वर को जान गए हो, तो फिर तुम उन निर्बलों और भिखारियों की ओर क्योंकर फिरते हो, जिन में तुम फिर से दासत्व में रहना चाहते हो?

10 तुम दिनों, और महीनों, और समयों, और वर्षों को मानते हो।

11 मैं तुम से डरता हूं, कहीं ऐसा न हो कि मैं ने तुम को व्यर्थ परिश्रम किया हो।

12 हे भाइयो, मैं तुम से बिनती करता हूं, कि जैसे मैं सिद्ध हूं, वैसे ही तुम सिद्ध बनो; क्‍योंकि मैं निश्‍चय जानता हूं, कि तुम मुझे जानते हो, और तुम ने अपक्की बातोंसे मुझे कुछ हानि नहीं पहुंचाई।

13 तुम जानते हो कि मैं ने पहिले पहिले शरीर की दुर्बलता के द्वारा तुम्हें सुसमाचार का प्रचार कैसे किया।

14 और मेरी उस परीक्षा को जो मेरे शरीर में थी, तुम ने न तुच्छ जाना, और न तुच्छ जाना; परन्तु मुझे परमेश्वर के दूत के रूप में ग्रहण किया, यहां तक कि मसीह यीशु के रूप में भी।

15 तो उस आशिष की बात कहां की? क्‍योंकि मैं तुम्‍हें बताता हूं, कि यदि हो सकता होता, तो तुम अपक्की आंखें निकालकर मुझे दे देते।

16 सो क्या मैं तुम्हारा शत्रु हो गया हूं, क्योंकि मैं तुम से सच कहता हूं?

17 वे तुम पर जोश तो डालते हैं, पर भलाई नहीं; वरन वे तुम्हें बहिष्कृत कर देंगे, कि तुम उन पर प्रभाव डालोगे।

18 परन्‍तु अच्‍छी बात में सर्वदा जोश से भरा रहना अच्‍छा है, वरन केवल तब नहीं जब मैं तेरे साथ उपस्थित हो।

19 हे मेरे बालको, जिन से मैं फिर जन्म लेता हूं, जब तक कि तुम में मसीह न उत्पन्न हो जाए,

20 मैं चाहता हूं, कि अब तुम्हारे साम्हने उपस्थित रहूं, और अपक्की शब्‍द बदल दूं; क्‍योंकि मैं तुम पर शक करता हूं।

21 हे व्यवस्या के आधीन होने की इच्छा रखने वालों, मुझ से कहो, क्या तुम व्यवस्या को नहीं सुनते?

22 क्योंकि लिखा है, कि इब्राहीम के दो पुत्र हुए, एक दासी से, और दूसरा स्वतंत्र स्त्री से।

23 परन्तु जो दासी में से उत्पन्न हुआ, वह शरीर के अनुसार उत्पन्न हुआ; परन्तु वह स्वतंत्र स्त्री का वचन था।

24 कौन-सी वस्तुएँ रूपक हैं; क्योंकि ये दो वाचाएं हैं; सिनाई पर्वत से एक, जो बंधन को जन्म देता है, जो अगर के रूप में है।

25 क्योंकि आगर अरब में सीनै पर्वत है, और यरूशलेम को जो अब है, और अपक्की सन्तान के बन्धन में है को उत्तर देता है।

26 परन्तु यरूशलेम जो ऊपर है, वह स्वतंत्र है, जो हम सब की माता है।

27 क्योंकि लिखा है, कि आनन्दित हो, हे बांझ, जो सहन नहीं करता; फूट-फूट कर रोओ, जो त्राहि-त्राहि न करे; क्योंकि उस उजाड़ के पति से बहुत अधिक बच्चे हैं।

28 अब हम, भाइयों, इसहाक की नाईं प्रतिज्ञा की सन्तान हैं।

29 परन्तु जैसा उस समय शरीर के अनुसार जन्म लेने वाले ने आत्मा के अनुसार जन्म लेने वाले को सताया, वैसा ही अब भी है।

30 फिर भी पवित्रशास्त्र क्या कहता है? दासी और उसके पुत्र को निकाल बाहर कर; क्योंकि दासी का पुत्र स्वतंत्र स्त्री के पुत्र के साथ वारिस न होगा।

31 सो हे भाइयो, हम दासी की नहीं, परन्‍तु स्‍वतंत्र की सन्‍तान हैं।


अध्याय 5

सुसमाचार की स्वतंत्रता - मांस के कार्य - आत्मा के फल।

1 इसलिये जिस स्वतन्त्रता से मसीह ने हमें स्वतंत्र किया है, उस में स्थिर खड़े रहो, और बन्धन के जूए में फिर न फंसो।

2 देखो, मैं पौलुस तुम से कहता हूं, कि यदि तुम्हारा खतना कराया जाए, तो मसीह को तुम्हें कुछ लाभ न होगा।

3 क्‍योंकि मैं सब खतनावालोंको फिर गवाही देता हूं, कि वह सारी व्‍यवस्‍था पर चलने का कर्ज़दार है।

4 जो तुम में से जो व्यवस्या के द्वारा धर्मी ठहरे, मसीह तुम पर निष्फल हो गया; तुम अनुग्रह से गिरे हुए हो।

5 क्योंकि हम आत्मा के द्वारा विश्वास के द्वारा धर्म की आशा की बाट जोहते हैं।

6 क्योंकि यीशु मसीह में न तो खतने से कुछ लाभ होता है, और न खतनारहित का; परन्तु विश्वास जो प्रेम से काम करता है।

7 तुम भली भाँति दौड़े; किसने तुम्हें रोका कि तुम सत्य को न मानना?

8 यह अनुनय तुझे बुलाने वाले की ओर से नहीं आता।

9 थोड़ा सा खमीर सारी गांठ को खमीर कर देता है।

10 मैं ने यहोवा के द्वारा तुम पर भरोसा रखा है, कि तुम दूसरे के मन में न होगे; परन्‍तु जो कोई तुझे परेशान करे, उसका दण्‍ड जो चाहे वह कोई भी हो।

11 और हे भाइयो, यदि मैं अब तक खतना का प्रचार करता हूं, तो अब तक क्‍यों सताता हूं? तो क्या क्रूस का अपराध समाप्त हो गया।

12 मैं चाहता हूं कि वे भी काट दिए जाएं जो तुम्हें परेशान करते हैं।

13 क्‍योंकि, हे भाइयो, तुम स्‍वतंत्रता के लिथे बुलाए गए हो; केवल अवसर के लिए शरीर के लिए स्वतंत्रता का उपयोग न करें, बल्कि प्रेम से एक दूसरे की सेवा करें।

14 क्‍योंकि सारी व्‍यवस्‍था एक ही बात से पूरी होती है; तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना।

15 परन्तु यदि तुम एक दूसरे को काट कर खाओगे, तो सावधान रहना, कि एक दूसरे के द्वारा नाश न होने पाए।

16 सो मैं यह कहता हूं, कि आत्मा के अनुसार चलो, तो शरीर की लालसा पूरी न करना।

17 क्योंकि शरीर आत्मा के विरोध में, और आत्मा शरीर के विरोध में लालसा करता है; और ये एक दूसरे के विपरीत हैं; ताकि तुम वह काम न कर सको जो तुम करना चाहते हो।

18 परन्तु यदि तुम आत्मा के मार्ग पर चलते हो, तो व्यवस्था के आधीन नहीं हो।

19 अब शरीर के काम प्रगट हैं, जो ये हैं, अर्थात् व्यभिचार, व्यभिचार, अशुद्धता, कामवासना,

20 मूर्तिपूजा, जादू टोना, बैर, भिन्नता, अनुकरण, क्रोध, कलह, देशद्रोह, विधर्म,

21 डाह करना, हत्या करना, पियक्कड़पन, मौज-मस्ती करना, इत्यादि; जिस के विषय में मैं तुम से पहिले कहता हूं, जैसा मैं ने तुम से पहिले समय में भी कहा था, कि जो ऐसे काम करते हैं, वे परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे।

22 परन्तु आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, नम्रता, भलाई, विश्वास,

23 नम्रता, संयम; ऐसे के खिलाफ कोई कानून नहीं है।

24 और जो मसीह के हैं, उन्होंने अपनी वासनाओं और अभिलाषाओं सहित शरीर को क्रूस पर चढ़ाया है।

25 यदि हम आत्मा में जीवित हैं, तो आत्मा में भी चलें।

26 हम हठ का अभिलाषा न करें, और एक दूसरे को भड़काएं, और एक दूसरे से डाह करें।


अध्याय 6

गलती करने वाले के साथ कृपापूर्वक व्यवहार करें - सभी पुरुषों का भला करें।

1 हे भाइयो, यदि कोई मनुष्य किसी दोष के कारण पकड़ा जाए, तो हे आत्मिक लोगों, ऐसे को नम्रता से फेर दे; अपने आप को ध्यान में रखते हुए, ऐसा न हो कि तुम भी परीक्षा में पड़ो।

2 एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरा करो।

3 क्‍योंकि यदि कोई अपने आप को कुछ समझता है, तो जब वह कुछ नहीं होता, तो अपने आप को धोखा देता है।

4 परन्‍तु सब अपके अपके काम को परखें, तब वह अपके ही कारण आनन्‍दित होगा, परन्‍तु दूसरे के कारण नहीं।

5 क्‍योंकि प्रत्‍येक मनुष्‍य अपना-अपना बोझ उठाएगा।

6 जो वचन में पढ़ाया जाता है, वह सब अच्छी बातों की शिक्षा देने वाले से बात करे।

7 धोखा न खाओ; भगवान का उपहास नहीं किया जाता है; क्योंकि मनुष्य जो कुछ बोएगा, वही काटेगा।

8 क्‍योंकि जो अपके शरीर के लिथे बोता है, वह शरीर में से नाश की कटनी काटेगा; परन्तु जो आत्मा के लिये बोता है, वह आत्मा के लिये अनन्त जीवन की कटनी काटेगा।

9 और हम भलाई के काम में हियाव न छोड़ें; क्योंकि यदि हम मूर्छित न हों, तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे।

10 सो जब हमारे पास अवसर है, तो हम सब मनुष्यों का भलाई करें, विशेष करके उनका जो विश्वास के घराने के हैं।

11 तुम देखते हो, कि मैं ने अपके ही हाथ से तुम को कितनी बड़ी चिट्ठी लिखी है।

12 जितनों की इच्छा होती है, कि वे शरीर में अच्छा प्रदर्शन करें, वे तुम्हें खतना कराने के लिए विवश करते हैं; केवल ऐसा न हो कि वे मसीह के क्रूस के लिए उत्पीड़न सहें।

13 क्‍योंकि न तो वे खतनेवाले व्यवस्या का पालन करते हैं; परन्तु चाहते हैं कि तुम्हारा खतना हो, कि वे तुम्हारे शरीर में घमण्ड करें।

14 परन्तु परमेश्वर न करे कि मैं महिमा करूं, केवल हमारे प्रभु यीशु मसीह के क्रूस पर, जिसके द्वारा संसार मेरी दृष्टि में और मैं संसार की दृष्टि में क्रूस पर चढ़ाया गया हूं।

15 क्योंकि मसीह यीशु में न खतने से कुछ लाभ होता है, और न खतनारहित से, वरन नई सृष्टि से।

16 और जितने लोग इस नियम के अनुसार चलते हैं, उन पर शांति, और दया, और परमेश्वर के इस्राएल पर हो।

17 अब से कोई मुझे कष्ट न दे; क्योंकि मैं अपने शरीर में प्रभु यीशु के चिन्ह धारण करता हूं।

18 हे भाइयो, हमारे प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह तुम्हारी आत्मा पर होता रहे। तथास्तु। रोम से लिखित अनटू द गलाटियन्स।

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